ब्रिक्स का भी हाल सार्क जैसा न हो?
पाकिस्तान को आतंकवादी मानने के लिये क्रिक्स वेन राजी क्यों नहीं?
ब्राजील रसिया इंडिया चाइना तथा दक्षिण अफ्रीका पांच राष्ट्र राज्यों का नूतन पांडव कुनबा एशिया अफ्रीका उत्तर व दक्षिण अमरीका यूरप आस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका सप्त द्वीपवती मही का क्षेत्रफल डेढ़ अरब वर्ग किलोमीटर से कुछ बढ़ कर ही है। पृथिवी, धरित्री, जमीन जिसे यूरप के लोग Our Planet कह कर पुकारते हैं उसका लगभग तिहाई हिस्सा एशिया महाद्वीप में है जिसमें ब्रिक्स के रूस चीन और भारत तीन सदस्य हैं। अफ्रीका दूसरा बड़ा महाद्वीप है जिसकी जमीन हमारी इस पृथ्वी का पांचवा हिस्सा है। इस महाद्वीप में ब्रिक्स का साथी दक्षिण अफ्रीका भी है। ब्रिक्स राष्ट्र राज्यों में से किसी की भी स्वभाषा या राजकाज भाषा अंग्रेजी नहीं है। ब्राजील की राजभाषा पुर्तगाली है यद्यपि वहां के लोग स्पेनी, फ्रेंच व अंग्रेजी भाषी भी हैं पर प्रभुत्व पुर्तगाली का ही है। ब्रिक्स का दूसरा राष्ट्र राज्य रसिया अथवा भारतीय वाङमय वाला ऋषि देश है जिसकी भाषा रसियन है। तीसरा ब्रिक्स राष्ट्र इंडिया है जिसके घटक राज्यों में अनेक भाषायें व उनकी अपनी अपनी लिपियां हैं। यूरप के देश भाषायी आधार पर हैं पर भारत भाषाओं की जननी है। भारत की भाषा समस्या का सही निदान साने गुरू जी ने आंतर भारती को बताया है। भारत का केन्द्रीय शासन अंग्रेजी के बलबूते पर ही चलता है यद्यपि संविधान ने भारत की राजभाषा हिन्दी घोषित की है पर उसे 1950 से आज तक दिल्ली के तख्त में अंग्रेजी की सहेली के रूप में रखा गया है। हिन्दी भारत के हर हिस्से समझी व बोली जाने वाली भाषा तो है पर अनेकों लिपियों वाले हिन्द में नागरी लिपि के लिये भाषायी बहुसंख्यकों का सम्मान नहीं है इसलिये ज्यादा व्यावहारिक स्थिति यह है कि सभी भारतीय भाषाओं को आंतर भारती का आधार दिया जाये। चीन की भाषा मंदारिन तथा साउथ अफ्रीका के लोग स्थानीय भाषाओं से ज्यादा रूझान अंग्रेजी की तरफ रखते हैं इसलिये ब्रिक्स देशों को पुर्तगाली, रसियन, हिन्दी सहित भारत की 22 भाषायें, मंदारिन व अंग्रेजी के जरिये बहुभाषी राष्ट्र समूह के रूप में विकसित किया जाना चाहिये। अगर ब्रिक्स के पांच पांडव राष्ट्र राज्यों में भू भौगोलिक नजरिये से रसिया या रूस क्षेत्रफल की दृष्टि से भीमकाय है लगभग पौने दो करोड़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला रूस चीन व हिन्द की अपेक्षा कम आबादी वाला राष्ट्र राज्य है। ब्राजील का क्षेत्रफल चीन से कम है आबादी के नजरिये से हिन्द चीन के बाद में आता है। भारत पाक को आतंकवादी मानता है पर चीन इससे सहमत नहीं, उसका कहना है आतंक को किसी देश या धर्म से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता। राष्ट्र संघ में उद्दंड आतंकी मसूद अजहर को खतरनाक आतंकी मानने के प्रस्ताव को चीन ने अपने वीटो अधिकार से रद्द कर दिया। वह पाकिस्तान को हर तरह की इमदाद दिये जाने के लिये लालायित है। क्रिस्टोफ जेफरलेट महाशय ने इंडियन एक्सप्रेस के अपने स्तंभ में कहा - रूस भी चीन की तरफ झुका हुआ लगता है यद्यपि रूस के ताल्लुकात हिन्द से बहुत मधुर हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग माओ त्से दुंग का स्थान लेने के लिये तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने अपना उत्तराधिकारी न चुन कर माओ त्से दुंग की तरह आजीवन चीन का सर्वेसर्वा बने रहने की उद्दाम लालसा ने उन्हें प्रोत्साहित किया है। रूसी राष्ट्रपति यद्यपि कट्टर रूसी ख्रिस्ती हैं उनका लगाव मार्क्स लेनिन स्टालिन से ज्यादा जोरदार नहीं है केवल ऐतिहासिकता का प्रतीक है। अगर ताइवान सिंगापुर व हांगकांग के राष्ट्रवादी तथा संस्कृति मंदारिन भाषी चीनी आगामी मौनी अमावस 27 जनवरी 2017 के दिन चीन के नये साल का पहला दिन देहाती चीन सहित जहां जहां मंदारिन भाषी ज्यादा हैं उनकी सांस्कृतिक पहचान को संबल दे पाये तो महाशय शी जिनपिंग चारोें खाने चित भी हो सकते हैं। उस दशा में महाशय पुतिन भी अपने रास्ते नयी दिल्ली की तरफ झुक सकते हैं। ब्राजील तथा दक्षिण अफ्रीका भारत की तरह आतंक पीड़ित नहीं हैं इसलिये वे तटस्थ भी रह सकते हैं। अंततोगत्वा आतंक का सामना हिन्द को स्वयं करना होगा। चीन के साथ अरूणाचल प्रदेश तथा लद्दाख लेह बाल्टिस्टान गिलगित और मुजफ्फराबाद सहित पाक द्वारा कब्जा जमाये कश्मीर को आतंकियों के उन्माद से मुक्त करने के लिये ब्रिक्स के सर्वाधिक आबादी वाले चीन से तिब्बत सहित सभी द्विपक्षीय मामलों में चाणक्य की अपनायी हुई कूटनीति का सहारा लेना होगा। चीन की घबराहट का एक मुख्य कारक परम पावन चौदहवें दलाई लामा के उत्तराधिकार का प्रसंग है। पिछले पौने सात दशकों में चीन दलाई लामा की कीर्ति का सामना नहीं कर पाया है। अगर हांगकांग सहित राष्ट्रीयता प्रधान चीनी समाज वर्तमान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से छिटक गया वह स्थिति हिन्दुस्तान के लिये बहुत मुफीद होगी। राष्ट्रीयता, राष्ट्र प्रेम, राष्ट्रीय अर्थांग के चलते अगर हिन्दुस्तानी लोग चीन के माल का तिरस्कार करने पर अड़े रहे तो चीन का चाइना पाकिस्तान इकनामिक कारीडोर संकल्प सफल नहीं हो पायेगा इसलिये भारत के राष्ट्रवाद के जज्बात को तीव्र करने की जरूरत है। चीन को हिन्दुस्तान आने वाले दस वर्षों में पछाड़ सकता है आबादी और आर्थिकी दोनों मोर्चों पर। भारत अपनी मर्यादाओं की रक्षा करने वाला राष्ट्र राज्य है। भारत अपनी सामरिक अथवा युद्ध मर्यादा को लांघता नहीं। युद्ध होने के बाद विजयी व चक्रवर्ती सम्राट बनने की आकांक्षा भारत कभी नहीं करता। राजगृह मगध के प्रतापी राजा जरासंध का भीमसेन से युद्ध हुआ। योगश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण ने जरासंध के बेटे वृहद्रथ को मगध नरेश बनाया। जरासंध ने जिन राजाओं को बन्दी बनाया था उन्हें स्वतंत्र करा दिया, यह है भारत की सामरिक नीति। मगध नरेश जरासंध सरीखे प्रतापी राजा जिन्होंने ‘मगध कूर्म खस गणैः’ के कई गण प्रमुख राजाओं को अपने कारागार में बंद कर रखा था। जब वासुदेव श्रीकृष्ण को यह दुर्नीति मालूम हुई उन्होंने अपने परामर्शदाता विवेकशील उद्धव से कहा - सही सही पता लगाओ ताकि जरासंध को नापा जा सके। उद्धव ने वासुदेव श्रीकृष्ण को परामर्श दिया कि जरासंध से केवल भीम ही जीत सकता है। जरासंध 17 बार मथुरा में यादवों से हार चुका था। निरायुध श्रीकृष्ण ने रण छोड़ना उचित समझा। द्वारका बसा कर सभी यादवों को द्वारका भेज दिया। गुजरात के लोग वासुदेव श्रीकृष्ण को रणछोड़ महाराज कहते हैं। डाकोर में रणछोड़ महाराज का मंदिर भी है ।
रूक्मिणी विदर्भ नरेश भीष्मक की कन्या थी। उसके अग्रज महाराज कुमार रूक्म थे। रूक्म ने अपने मात पिता से कहा - रूक्मिणी का विवाह चेदिराज शिशुपाल से कर दो। महाराज भीष्मक अपने महाराज कुमार की बात गौर से सुनते उन्होंने सहमति दे दी। महारानी ने रूक्मिणी का रूझान श्रीकृष्ण की ओर बताया। राजा ने कहा - बारात तो शिशुपाल की ही आयेगी। अगर रूक्मिणी श्रीकृष्ण को चाहती है तो उसके साथ भाग जाये या श्रीकृष्ण उसे उठा ले जाये। महाराज भीष्मक ने महारानी से कहा - हमारा पुरोहित कुमार अत्यंत दक्ष ब्राह्मण है वह रूक्मिणी की मनोकामना पूरी कर सकता है। महारानी और रूक्मिणी ने पुरोहित कुमार के मार्फत श्रीकृष्ण को संदेशा भेजा। पुरोहित कुमार ने रूक्मिणी की स्त्री चेतन ध्वनि में श्रीकृष्ण को संदेशा सुनाया। जरासंध सरीखे अद्वितीय योद्धा को मानना पड़ा कि यदि रूक्मिणी श्रीकृष्ण को ही चाहती है हम राजा लोग अपने अपने चेहरे लटका कर लौट चलें। युद्ध सिद्धिर्हि चंचला। युद्ध में आप विजयी ही हों यह जरूरी नहीं है मारे भी जा सकते हैं हार कर बन्दी भी बनाये जा सकते हैं इसलिये जो सही योद्धा होता है वह मौत, हार, जीत तीनों को एक ही नजरिये से देखता है।
चीन की दीवाल और उस दीवाल के ईंटों की भूमिका में चीन हिन्द की परवाह नहीं करना चाहता है। उसने गोआ में संपन्न ब्रिक्स शीर्ष सम्मेलन के पश्चात अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चीन पाक सदाबहार दोस्ती को ही सराहा। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मानते हैं कि पाक आतंक की धाय है वह आतंक छोड़ नहीं सकता। चीन पाकिस्तान को हर हालत में आतंक संवर्धन मानने से इन्कार करता जारहा है। रूस यद्यपि भारत से अपनी पुरानी मैत्री कायम रखने के पक्ष में है वह चीन को भी अनमना नहीं करना चाहता है और दक्षिण अफ्रीका के लिये भारत की आतंक पीड़ा प्राथमिकता का विषय नहीं के लगभग है इसलिये भारत को बड़ी संजीदगी के साथ पाकिस्तान से लोहा लेना होगा। ब्रिक्स का गोआ में संपन्न शीर्ष सम्मेलन ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के पोषक वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उद्गार को उतनी अहमियत नहीं दी जिसकी कल्पना की जारही थी। इसका मुख्य कारण हिन्द महासागर में चीन की उपस्थिति में पाकिस्तान का सक्रिय सहयोग तथा बंगला देश द्वारा चीन का बंगाल की खाड़ी में उतरने के प्रयास को जिसका भारत एकदम प्रतिकूल था। चीन के हौसले बढ़े। यद्यपि सार्क अथवा दक्षेस संबंधी भारत द्वारा पाकिस्तान द्वारा किये जारहे आतंक आक्रमण का सार्क देशों ने समर्थन नहीं किया। सार्क सदस्य देशों की सहानुभूति भारत के साथ ही है। स्तंभकार क्रिस्टोफ जेफरलेट का मत है कि सीरियाई आई.एस. सहित आतंकी समूहों के प्रति रूस का ज्यादा झुकाव पेइचिंग की नीति निर्धारकता के पक्ष में है। आतंक से पीड़ित संयुक्त राज्य अमरीका भी दोहरे रास्ते का राही है। ऐसी स्थिति में पाक की आतंकी गतिविधियों को भारत को आन्वीक्षिकी षडविधा राजनीतिक तथा कूटनीतिक रणनीति से फतह करना होगा। जब तक चीन और पाकिस्तान के अन्दरूनी विवाद उग्र होते जायेंगे हिन्द को अपनी कूटनीति का प्रयोग करना होगा। उर्दू हिन्दुस्तानी शहरी मुसलमानों की मादरे जबान है। पाकिस्तान के मुख्य नगर कराची व उसके इर्दगिर्द उर्दू भाषी बने हुए हैं उन्हें भी पाकिस्तान सरकार वह नवाज शरीफ के नेतृत्व में हो अथवा सिंधी राजनीति समाज के शीर्षगुरू भुट्टो, उनकी बेगम नुसरत भुट्टो बिटिया बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने नवोदित नेता बिलाल भुट्टो, बेनजीर के पति जो पाकिस्तान के राष्ट्रपति भी रहे हैं अंततोगत्वा पाकिस्तान के लाभार्थी समूहों में पहला क्रम पंजाबी मुसलमानों का है। सिंधी मुसलमान पंजाब का अग्रेचर पार्थ सारथी सरीखा मार्गदर्शन नहीं केवल अनुसरणकर्ता है। बलूचों सहित सीमा प्रांत के मुसलमान अंततोगत्वा पाक से बिछुड़ने ही वाले हैं। फौजियों के बल पर बलूच पश्तू तथा सिंधी मुसलमान और कराची के उर्दू भाषी मुसलमानों लंबे अर्से तक इस्लामी रिपब्लिक के नाम पर एक साथ नहीं रखा जा सकता इसलिये जो बलूच विद्रोही भारत में शरण लेना चाहें जो पश्तोभाषी हिन्दुस्तान की रहनुमाई चाहें उन्हें दी जाये। अगर वे अपनी प्रवासी सरकार स्थापना के लिये विश्व के समर्थ राष्ट्र राज्यों की सहानुभूति पा सकें तो भारत को उन्हें प्रोत्साहित करना ही चाहिये ताकि पाकिस्तान अगले 6 वर्ष में बलूचिस्तान, पख्तूनिस्तान, सिंध उर्दू प्रदेश तथा पंजाब पांच हिस्सो में बंट जाये इस्लामी गणतंत्र क्रमशः बलूच गणतंत्र, पश्तो गणतंत्र, पंजाब गणतंत्र, सिंध गणतंत्र तथा उर्दू प्रदेश गणतंत्र के पांच हिस्सों में बंट जाये तो ये भारत के भाषायी पड़ोसी राज्य हो जायें। बंगला देश और पाकिस्तान दोनों हिन्द के दिल के टुकड़ों वाले इस्लामी आबादी वाले देश हैं। चीन की मान्यता है कि इन दोनों देशों को यद्यपि चीन की Athiest Theory विश्वसनीय नहीं मानती पर हिन्द के रास्ते रोड़े अटकाने में बंगला देश व पाकिस्तान का उपयोग चीन कर ही सकता है। इसलिये अंततोगत्वा ब्रिक्स का उभरता हुआ आर्थिक सहयोग जो ऐशिया के तीन राष्ट्र राज्य लातिनी अमरीका के ब्राजील तथा दक्षिण अफ्रीका का मिलाजुला उपक्रम है। चीन और रूस की बेरूखी भारत के लिये निरंतर बढ़ती रही चीन पाकिस्तान इकानामिक कारीडोर दुहरा आर्थिक गलियारा निर्मित करने में चीन अगर सफल होगया भारत की दिक्कतें बढ़ सकती हैं इसलिये भारत को मुजफ्फराबाद सहित पाक कब्जे वाले कश्मीर गिलगित और बाल्टिस्टान को पाक चीन के कब्जे से छुड़ाना अत्यंत आवश्यक कदम है। इस कदम के बढ़ने पर किशनगंगा जल संधि पर फिर विचार करने से जो सामरिक प्रतिकूलतायें भारत को घेरेंगी वे पाक-भारत युद्ध में न बदल जायें तथा यदि पाक भारत सीमा संघर्ष अपरिहार्य हो जाये उस दशा में चीन अपनी आर्थिक तथा वैश्विक निर्यात व्यवस्था को लुंजपुंज न करने केे उद्देश्य से संभावित युद्ध में पाक का सहारा न बने। पाक की सैनिक ताकत मियां नवाज शरीफ को अपदस्थ कर सत्ता अपने हाथ में ले के और पाक भारत संघर्ष आणविक युद्ध में बदल न जाय यह भारत की कूटनीतिक सफलता होगी। जो भी हो ऊँट किसी करवट बैठे भारत को पाक के आतंकी ठिकाने ध्वस्त करने ही होंगे। यूरप के वे देश जो आतंक पीड़ित हैं तथा आतंकी सीरिया व पाकिस्तान से डरते हैं उनका नैतिक समर्थन अगर हिन्दुस्तान को मिले तो बाजी हिन्द के पक्ष में भी जा सकती है। चीन में मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग यदि अपने आपको स्थापित करने तथा माओ त्से दुंग का दर्जा हासिल करने में सफल होगये चीनी राष्ट्रवाद के मूल स्त्रोत ताइवान हांगकांग तथा सिंगापुर के राष्ट्रवादी मंदारिन भाषी चीनी राष्ट्रीय एकता के डोरे में न बंध पायें तथा भारत और चीन का सीधा संघर्ष 1962 से ज्यादा तीव्र हो सकता है। भारत के नेतृत्व को चीन के बजाय तिब्बत की सांस्कृतिकता को वरीयता देनी ही होगी।
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