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| दादुर धुनि चहुँ ओर सुहाई, वेद पढ़हिं जनि बटु समुदाई । |
चौमासा हिन्दुस्तान के लोगों के लिये बहुत महत्व रखता है। चौमासा में ही मेढक ज्यादा बढ़चढ़ कर अपनी ध्वनि करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने मेंढकों की ध्वनि को वेदपाठी स्नातकों की वैदिक ऋचाओं के सस्वर उच्चार से तुलना कर डाली। महाशय जयंत सिन्हा जो नरेन्द्र दामोदरदास मोदी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री हैं उनके सह स्तंभकार अरिन्दम भट्टाचार्य मेढकी उछलकूद तथा उससे बहुत आगे निर्माण अथवा उत्पादकता के संदर्भ में राय रखते हैं कि सांख्याचार्य कपिल मुनि का सांख्यशास्त्र जिसे अंग्रेजीदां भद्रलोक डिजिटल सर्विस कह रहा है उनकी राय में हिन्द मध्य आय देश याने प्रति व्यक्ति जी.डी.पी. आधारित आमदनी सालाना 12 हजार डालर (संभवतः उनका तात्पर्य यू.एस. डालर से है।) याने आज के विभिन्न मौद्रिक मूल्यों के संदर्भ में भारत के लिये मध्यम आमदनी देश बनने के लिये जी.डी.पी. प्रति व्यक्ति आय लगभग आठ लाख रूपये सालाना होगी तभी हिन्द के लोग मध्यम आमदनी देश का सपना संजो सकते हैं। उनका मानना है कि निम्नतम प्रति व्यक्ति आय के नजरिये से आज हिन्द के जीडीपी प्रति व्यक्ति सालाना आमदनी 1800 डालर याने हिन्द के रूपयों में एक लाख बीस हजार रूपये के इर्दगिर्द है। महाशय जयंत सिन्हा एवं अरिन्दम भट्टाचार्य फरमाते हैं कि India that is Bharat इस महत्वाकांक्षी आमदनी संकल्प को प्राप्त करने के लिये हिन्द का आर्थिक संकल्प क्या हो ? इस यक्ष प्रश्न का समाधानकारी जवाब जो आसानी से समझ में आये वो 1. उत्पादकता संवर्धन और रोजगार सृजन 2. निर्मित वस्तुओं के व्यापारिक निर्यात में देखते हैं जिससे उनकी राय में जीडीपी बढ़त 102 प्रतिशत बढ़ सकती है। अपने द्वारा उकसाये गये उद्देश्य जिनका अनुसरण दुनियां के सभी बड़े देश करते हैं। स्तंभकार द्वय कहते हैं उनकी राय इससे अलग है वे मानते हैं हिन्द को एक अलग विकास मानव का रास्ता अख्तियार करना चाहिये। वे कहते हैं हमारी विचार कसौटी डिजिटल सेवायें उबेर जिसकी सेवायें 77 देशों ने मात्र सात वर्षों में डिजिटल प्लेटफार्म के जरिये उत्पादन व्यय प्रति किलोमीटर घटाया भी है ज्यादा लोगों को रोजगार मिला दुनियावी तौर तरीकों से वे इस आर्थिक बदलाव को ग्राह्य मानने की ओर बढ़ रहे हैं। डिजिटल टेक्नालाजी को सही सही समझने के लिये महात्मा गांधी जी की नित्य प्रार्थना का हिस्सा - भगवद्गीता के दूसरे अध्याय के अंतिम 19 श्लोक अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा था - स्थितिप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्य केशव। स्थित धीः किम् प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम। महात्मा गांधी ने अपने अनासक्ति योग नामक गीता के गुजराती भाष्य के द्वारा स्थित प्रज्ञता पर विशेष जोर दिया। कपिल का सांख्य दर्शन स्थित प्रज्ञता पर ही निर्भर है।
हिन्द को मिडिल इन्कम देश बनाने में कौनसा रास्ता अपनाया जाये ? आज तो हिन्द के 44 करोड़ लोग रोजाना रूपये बीस भी नहीं जुटा पाते हैं उनकी सालाना आमदनी न्यूनतम स्तर पर भी सालाना अठारह सौ डालर हिन्द के रूपयों में कहें तो सालाना एक लाख बीस हजार रूपये तक कैसे पहुंचा जा सकता है ? जबकि जमीनी वास्तविकता यह है कि अभी तो हिन्द का गरीब से गरीब अपनी सालाना आमदनी सात हजार पांच सौ तक भी पहुंच नहीं कर पाया है। मैन्यूफैक्चरिंग अथवा उत्पादकता का जहां तक प्रश्न है हिन्दुस्तान में 1915 में जब महात्मा गांधी आये उन्होंने 1915 से 1924 तक देश भ्रमण किया। जनवरी 1924 बेलगांव कांग्रेस की अध्यक्षता संपन्न की। उसी वर्ष 24.9.1924 के दिन आश्विन बदी द्वादशी को उनका छप्पनवां जन्मदिन था। वे अपनी जीवन यात्रा के 55 वर्ष पूरे कर चुके थे। उन्होंने कदमकुआं पटना में अखिल भारत चर्खा संघ खड़ा किया अंग्रेजी में उसे All India Spinners Association कहा। चर्खा कताई करघा बुनाई के काम को उन्होंने हिन्द का खेतीबाड़ी के पश्चात सबसे ज्यादा रोजगार मुहैया करने वाला उपाय बताया। चर्खे पर सूत कातो करघे पर कपड़ा बुनो। महात्मा गांधी एक सौ वर्ष पहले जो आर्थिक नुस्खा तय किया वह आज भी उतना ही महत्वशील है। तब भारत की आबादी मात्र पचीस करोड़ थी आजादी के वक्त देश में उनतालीस करोड़ लोग थे। सन 2011 की जनगणनानुसार भारतीय आबादी 120 करोड़ से ज्यादा थी। मोटे अनुमानों के अनुसार 2016 में भारत की आबादी 130 करोड़ पहुंची है। सन 2021 में जब जनगणना होगी अनुमान लगता है कि तब भारत की जनसंख्या 150 करोड़ तक पहुंच जायेगी। इसलिये विचारणीय बिन्दु यह भी है कि महात्मा गांधी ने चर्खे पर कताई हथकरघे पर बुनाई का जो रोजगार सृजन परिवार की आमदनी बढ़ाने वाला कार्यक्रम चर्खा पर कताई हथकरघा पर बुनाई आजादी से पहले गुलजारी लाल नंदा व अनुसूया बेन का मजूर महाजन अभियान अहमदाबाद सहित जहां जहां कपड़ा मिलें थीं हथकरघा बुनाई का काम भी चलता था। पावरलूम की बढ़त ने हथकरघा बुनकरों की रोजीरोटी छीन ली। उन्हें पावरलूम का मजदूर बनने का रास्ता प्रशस्त किया। गुलजारी लाल नंदा ने 1961 में पंडित नेहरू को राय दी कि खादी और हैंडलूम की गलबहियां ही हथकरघा व खादी को जिन्दा रख सकती है। पंडित नेहरू ने गांधी आश्रम के सेक्रेटरी तथा अपने विश्वस्त साथी विचित्र नारायण शर्मा से पूछा क्या गुलजारी लाल नंदा की सोच हथकरघा व खादी को जीवनदान दे सकती है। तब विचित्र नारायण शर्मा ने पंडित नेहरू को खादी की शुद्धता का हवाला देते हुए अनुरोध किया कि पावरलूम को रोकने के लिये हथकरघा व खादी के गठजोड़ को मंजूरी न दी जाये। यह बात 1961 की थी। 1998 में शतजीवी विचित्र नारायण शर्मा ने अपनी 1961 की गलती को स्वीकार करते हुए कहा - पंडित नेहरू मेरी बात मानते थे। उन्होंने मेरे आग्रह पर खादी हथकरघा का जुगाड़ अस्वीकार कर दिया। उन्होंने इस ब्लागर को कहा - मुझे पश्चाताप है कि मैंने ही खादी की दुर्गति का रास्ता प्रशस्त किया।
दाओस की खबर है कि आटोमेशन के कारण भारत में रोजगार घटत एक अनिवार्य तथा आकस्मिक कष्ट का हेतु है। आकांक्षित नौकरी या रोजगार पाना आज इस बात पर निर्भर नहीं रह गया कि आप क्या कर्मकौशल जानते हैं ? परंतु अब आगे रोजगार तो तब मिलेगा कि आप क्या सीखने या दक्षता प्राप्त करने की पात्रता धारक हैं ? दुनियां के देशों में इटली 301336 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल आबादी लगभग 6 करोड़ ग्वाटेमाला क्षेत्रफल 108889 वर्ग किलोमीटर जनसंख्या करीब पौने दो करोड़ पेरू क्षेत्रफल 1285216 वर्ग किलोमीटर आबादी सवा तीन करोड़ ऐसे देश हैं जिन्हें डिजिटाइलेशन याने सांख्यशास्त्र पर यकीन है वे अपने अपने देशों में रचनात्मकता भावना प्रधान विवेकशीलता तथा समझबूझ वाली लोकतंत्र भावनागत कर्मकौशल का स्तर संवर्धन रोबोटनुमा बनाना न कि उसमें घुलमिल जाना। इसलिये महात्मा गांधी द्वारा दिखाया गया रास्ता आज भी हिन्द के 130 करोड़ निवासियों के लिये आर्थिकी रामबाण औषध है। हिन्दी के एक अखबार अमर उजाला ने एक खबर छापी कि पीएमओ ने खादी कैलेंडर व खादी डायरी 2017 प्रकरण में खादी आयोग व एमएसएमई मंत्रालय से पूछताछ की कि किस कारण खादी डायरी खादी कैलेंडर विभाग को क्यों बढ़ावा दिया गया ? पीएमओ और एमएसएमई मंत्रालय की मान्यता है कि खादी ग्रामोद्योग आयोग ने यह कार्य बिना पूर्व अनुमति के किया। असल जरूरत तो यह मालूम पड़ती है कि प्रधानमंत्री जी हिन्द के गांव गांव शहर के मुहल्ला दर मुहल्ला रोजगार की बहार लाने के लिये खादी आयोग ने नियुक्ति के पश्चात जो जो तरीके अपनाये हैं उनकी पड़ताल की जाये कि कौन कौन काम वास्तविक तौर पर खादी को बढ़ावा देने वाले थे ? जो जो काम ऐसे थे जिनसे यह झलकता है कि खादी आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष महोदय ने वाहवाही लूटने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी महोदय को खुश करने के लिये कदम बढ़ाये। खादी ग्रामोद्योग कार्यक्रमों में तीन व्यक्तियों विकेन्द्रित अर्थांग के पुरोधा सहकारी उद्यमिता के कर्णधार वैकुंठ ल. मेहता ग्यारहवें राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तथा 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे वर्तमान प्रधानमंत्री ने रूर्बन सोसाइटी पूरा तथा गुजरात के पचास गांवों को गांव की संस्कृति बरकरार रखते हुए रूर्बनाइजेशन का जो तरीका अपनाया इन तीनों बिन्दुओं पर खादी ग्रामोद्योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष महोदय ने अपने कार्यकाल में क्या क्या विशिष्टतायें अपनायीं ? यहां यह ब्लागर एक घटना का उदाहरण प्रस्तुत करना सामयिक समझता है। बात 1956 की है जब संयुक्त महाराष्ट्र अभियान पूरे वेग पर था। हिंसा भी यत्र तत्र संपन्न होरही थी। तब भारत के वित्त मंत्री पूर्व आई सी एस अफसर रहे रिजर्व बैंक के भी गवर्नर रहे चिंतामणि द्वारकानाथ देशमुख थे। उन्होंने लोकसभा में भारत के तत्कालीन गृहमंत्री पंडित पंत पर आरोप लगाया कि वे बिड़ला के पेरोल में हैं। पंडित पंत के पुत्र कृष्ण चंद्र पंत तो बिड़ला जी के यहां काम करते थे। वित्त मंत्री चिंतामणि द्वारकानाथ देशमुख ने यह भी कहा - कोंकण से कुछ कोंकणस्थ परिवार कुमांऊँ क्या चले गये महाराष्ट्र की शालीनता को भी अपने साथ ले गये। पंडित पंत ने लोकसभा में कहा था - मैं भी मराठा हूँ। मेरे पूर्वज कोंकण से कुमांऊँ गये थे। पंडित पंत ने प्रधानमंत्री पंडित नेहरू से कहा - कृपापूर्वक मेरा त्यागपत्र स्वीकारें। प्रधानमंत्री इसके लिये तैयार नहीं थे। सेठ घनश्याम दास बिड़ला पंडित नेहरू से सामीप्य रखने वाले तथा हरिजन सेवक संघ के सदर भी थे। पंडित पंत उन लोगों में से थे जो अपने मिलने वाले से पूछते भोजन किया या नहीं ? रहने की ठौर है या नहीं ? जाने का खर्च जेब में है क्या ? उनकी इस सहृदयता से सेठ घनश्याम दास बिड़ला परिचित थे। जब कभी नैनीताल जाते पंडित पंत के घर ही भोजन करते। पंडित पंत को मेहमानों को भोजन कराने के कारण अपना नैनीताल का मकान बेचना पड़ा। सेठ घनश्याम दास बिड़ला ने तय किया कि वे पंडित पंत के निवास स्थान 6 अकबर रोड पर भोजन सामग्री रखवायेंगे। पंडित पंत ने लोकसभा में कहा - मेरे घर में रोजाना दो सौ लोग सुबह शाम भोजन करते हैं उनके भोजन के लिये आटा, दाल, चावल सेठ घनश्याम दास बिड़ला मुहैया करते हैं। अगर यह घटना मुझे बिरला के पेरौल में मानती है मैं जरूर घनश्याम दास बिड़ला के पेरौल पर हूँ। पंडित पंत की साफगोई ने चिंतामणि द्वारकानाथ देशमुख को वित्तमंत्री के पद से त्यागपत्र देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
फ्रीडम आफ स्पीच जो बात मन में जम गई उसे व्यक्त करना डैमोक्रेसी की पहली सीढ़ी है। हिन्द में एक कहावत है - आत्मनः प्रतिकूलानि परेषाम् न समाचरेत्। पश्चिम की वाक् स्वतंत्रता इस नैतिकता की कायल नहीं है। वाणी पर लगाम न लगाने के कारण राजनीतिक रणनीति में नये नये गड्ढे खोजे जाया ही करते हैं। हिन्दुस्तान की पारंपरिकता यह यकीन दिलाती है कि यदि आपको राजनीति करनी है तो पहले महाभारत का शांतिपर्व पढ़ डालिये। उससे आपको नई दिशा मिलेगी। अब हम उस सवाल पर आते हैं कि रोजगार सिकुड़ जाने के कारण क्या हिन्द बेरोजगारी के दावानल में तो नहीं फंस जायेगा ? महात्मा गांधी ने इस का रास्ता सौ वर्ष पहले खोज डाला था - चर्खा कातो। जुलाई 1935 में महात्मा जी से मिलने परमहंस योगानंद महाराज सेगांव पहुंचे। उस दिन सोमवार था महात्मा सोमवार को मौन व्रत रखते थे। दोनों का वार्तालाप लिख कर हुआ। परमहंस योगानंद महाराज ने महात्मा गांधी को कहा आप तो योगमार्गी हो। श्रीमद्भागवत महापुराण में छठे स्कंध के आठवें अध्याय का शीर्षक है - नारायण वर्त्म कथन। बयालीस श्लोकों वाला यह अध्याय अंगुलियों के पोरों का स्पर्श चर्खा कातने में हर क्षण होता रहता है। दोनों हाथों की दस अंगुलियों के पोरवों को नारायण वर्त्म कथन एक नयी चेतना देता है जिसका आभास महात्मा गांधी को परमहंस योगानंद महाराज ने दिया। कर्मकौशल का ही पर्याय योग है।
यूनिवर्सल बेसिक इन्कम का प्रसंग इन दिनों दुनियां के कई देशों में जोरशोर से गाया जारहा है। हिन्द के एक लोकसभा सांसद वैजयंत जय पंडा तथा यूनिवर्सल बेसिक इन्कम के समर्थक डा. भरत झुनझुनवाला की राय है कि यूनिवर्सल बेसिक इन्कम की राशि माहवारी 2 हजार रूपये तथा सालाना चौबीस हजार रूपये हिन्द के दस करोड़ कुटंबों को दी जाये। अब हम वर्ष 2017-18 के बजट में खादी ग्रामोद्योगों की भूमिका पर चर्चा करना चाहेंगे। शहरी विकास मंत्री महाशय वैंकैया नायडू से नम्र अनुरोध है कि वे हिन्द के 7935 शहरी इलाकों में बसने वाली 377105760 जनसंख्या में झुग्गी झोपड़ी तथा स्लम एरिया में रहने वाले लोगों को यदि वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं उन्हें महात्मा गांधी नेशनल रूरल इमप्लायमेंट गारंटी स्कीम में समुचित वैध व्यवस्था के लिये महात्मा गांधी नेशनल इमप्लायमेंट गारंटी स्कीम का आवरण प्रदान करायें ताकि रोजगार प्राप्ति का लाभ शहर के गरीब लोग भी उसी तरह उठा सकें जिस तरह देहातों के लोग उठा रहे हैं। दूसरी ओर इमप्लायमेंट गारंटी स्कीम में चर्खा कताई हथकरघा बुनाई तथा चर्खे पर निटिंग यार्न कताई हाथ बुनाई चार मदों को स्किल्ड लेबर के तौर पर जोड़ा जाये ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के संकल्प मेक इन इंडिया पूरे वेग से चल सके। चर्खे पर ऊन, कपास, रेशम ककून कताई करने वाली महिला श्रम शक्ति को तरजीह मिले। चर्खे पर कताई करने वाली महिलाओं की साल में कम से कम साठ दिन रोजगार देकर न्यूनतम पारिश्रमिक राशि उपलब्ध कराई जाये। उनके चर्खे पर कते सूत ऊन और रेशम की बुनाई हथकरघों में हथकरघा बुनकर स्वयं सहायता समूहों चर्खा कताई स्चयं सहायता ग्रुपों एवं चीन द्वारा बाजार में उपलब्ध कैश्मीलोन के स्वेटरों टोपियों मोजों दस्तानों के बजाय निटिंग यार्न कताई के जरिये हाथबुनाई करने वाली महिलाओं के स्वयं सहायता ग्रुपों को संवर्धित किया जाये। कताई बुनाई तथा हाथबिनाई के स्वयं सहायता ग्रुपों को पारिश्रमिक वितरण का उत्तरदायित्त्व खादी ग्रामोद्योग आयोग को सौंपा जाये। कर्णाटक सहित उत्तर भारत में जहां जहां जाड़ों में ऊनी स्वेटर पहनने का रिवाज है सभी प्रकार के स्कूलों में जहां जाड़ों में स्वेटर पुलोवर पहनी जाती है खादी ग्रामोद्योग आयोग को यह उत्तरदायित्त्व सौंपा जाये कि वे स्कूलों में ऊनी स्वेटर पुलोवर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने का कार्य यथाशीघ्र शुरू करें ताकि खादी ग्रामोद्योग आयोग की वह कार्य शक्ति संवर्धित हो जिसके लिये वैकुंठ ल. मेहता ने दस वर्ष अहर्निश कार्य किया। प्रधानमंत्री जी, प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों खादी ग्रामोद्योग मंत्रियों खादी ग्रामोद्योग आयोग सहित समस्त राज्य खादी बोर्डों तथा देश भर में जो खादी संस्थायें आज भी कार्यरत हैं उनकी बैठक बुला कर मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत देश भर में खादी ग्रामोद्योगों के जरिये रोजगार को नई ऊँचाई दिलायें क्योंकि महात्मा गांधी की खादी आज भी हिन्द के लिये हर हाथ को काम मुहैया करा सकती है। पंडित नेहरू के कार्य दर्शन तथा इजरायल शैली के ग्राम विकास का जो आयोजन वैकुंठ ल. मेहता ने अपने सहयोगी झबेर भाई पी पटेल तथा सघन क्षेत्र योजना के माध्यम से जो रूर्बन सोसाइटी का संकल्प किया उसे चौवन वर्ष उपरांत ही सही वह स्थान दिया जाये जिसकी कल्पना खादी ग्रामोद्योग आयोग के उद्घाटन पर्व पर अक्टूबर 1956 में जवाहरलाल नेहरू ने जयपुर में संपन्न की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी सबका साथ सबका विकास मंत्र के जरिये हिन्द के दबे कुचले गरीब लोगों में आत्मविश्वास जाग्रत करने में सक्षम हैं क्योंकि उनका व्यापक लक्ष्य जाग्रत राष्ट्र राज्य है।
घर घर में चर्खा हर हाथ को काम मिले यही हिन्द का गुरूमंत्र है।
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