Thursday, 10 November 2016

वायु प्रदूषण मुक्त नेशनल कैपिटल रीजन को 
भूख प्यास मुक्त तथा रैनबसेरा युक्त कौन बनाये ?
क्यों न राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने महिला विभाग को आगे बढ़ाये ? 
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को स्थापित हुए इक्यानवे विजयादशमियां संपन्न होगयीं। डाक्टर केशव वलिराम हेडगेवार महाशय ने एक स्वातंत्र्य वीर के वेष में विक्रम संवत 1982 शक संवत 1847 शरद ऋतु आश्विन शुक्ल दशमी के श्रेयस मुहूर्त्त में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का स्वयं सेवी अश्वत्थ वृक्ष भारत के हृदयस्थल नाग विदर्भ में रोपा । यह स्वयं सेवी अश्वत्थ वृक्ष अब नवति से एक वर्ष ज्यादा आयुष्य वाला है। विजयादशमी संवत 2062 शक संवत 1947 तथा धरती में यत्र तत्र सर्वत्र प्रचलित तेरहवें ग्रेग्रेरियन परम पावन पापल पोप द्वारा स्थापित ग्रेग्रेरियन कैलेंडर का 2025वां वर्ष अक्टूबर महीने की बारहवीें तारीख को शताब्दी पूर्ण नये शताब्द की ओर अग्रसर होगा। अजातशत्रु धर्मराज कौंतेय युधिष्ठिन ने कहा - 
विजयाय विनिर्वाहि प्रत्यन् रश्मि वानिव मानम् विधूय शत्रूणां धर्मोजयतु नः सदा। 
कौंतेय अर्जुन बोला - 
प्रज्ञयाभयाधिष्ठान् शूरान् गुणयुक्तान् बहूनादि, जयन्त्यल्पतरो येन तन्निबोध विशांपते। 
न तया बल वीर्याभ्याम् जयन्ति विजिगीषवः। यथा सत्य नृशंसाभ्याम् धर्मेण व्योद्यभेन च। 
त्यक्त्वाऽधर्मत सर्वे धर्मचोत्तम या स्थिताः युध्वस्वमनहंकारा यतो धर्मः ततो जयः। 
संजय ने राजा धृतराष्ट्र से कहा - 
यत्र योगेश्वरः कृष्ण यत्र पार्थो धनुर्धरः तत्र श्री विजयोभूतिधर्ु्रवा नीतिमेति मम।
भारत विभाजन के पश्चात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवकों ने विभाजन पीड़ित जनों की अद्वितीय सेवा संपन्न की। दिल्ली का क्षेत्रफल 1483 वर्ग किलोमीटर जनसंख्या 1,67,52,735 प्रति वर्ग किलोमीटर आबादी घनत्व 11,297 व्यक्ति पुरूष आबादी 89,76,410 स्त्री आबादी 77,76,625 दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन के जहां जहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखायें चलती हैं शाखाओं से जुड़े स्वयं सेवक परिवारों की महिला शक्ति स्त्रोत को भूख-प्यास तथा जाड़ों की रात काटने के लिये रैनबसेरों का संकल्प राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपनी महिला शक्ति सेना से उपलब्ध करने के बारे में विचार करे। दिल्ली के मुख्यमंत्री महोदय ने अपने उस मंत्री को बर्खास्त कर दिया जिसने कनाट प्लेस से भिखारियों का सफाया करने का बीड़ा उठाया। दिल्ली में मुंबई का भिखारी रोक कानून 1959 लागू है। इस कानून के अनुसार भीख मांगना कानूनन अपराध श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय में दिल्ली सरकार व भारत सरकार निराश्रित व्यक्तियों के लिये अपने अपने कर्तव्य पूर्ति का आश्वासन दे चुके हैं। केन्द्रीय समाज कल्याण मंत्रालय भीख मांगने को अपराध श्रेणी में गिने जाने के बजाय निराश्रितों के योगक्षेम की कल्पना कर रही है तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय शताब्दी वर्ष में उनके एकात्मवाद तथा समाज के बीच पंक्ति के अंतिम नंगे-भूखे तथा ठंड में आश्रयहीन व्यक्तियों के लिये संकल्प लेना चाहती है। भारत सरकार की जो सोच है उसे नेेशनल कैपिटल रीजन में फौरी चलाने के लिये याने भूखे को भोजन, प्यासे को पानी, रूग्ण को दवा तथा बेघर को रैनबसेरा देने केे बारे में व भूखे लोगों को निश्शुल्क दो जून का भोजन मुहैया कराने में आरएसएस की महिला स्वयं सेविकायें अन्नपूर्णा की भूमिका अदा कर सकती हैं इसलिये भारत सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय तथा महिला व बाल कल्याण मंत्रालय को राष्ट्रीय स्वयं सेवी संगठन से अपील करनी चाहिये कि जहां जहां दिल्ली में शाखायें चलती हैं हरेक शाखा के साथ आरएसएस की महिला स्वयं सेविका से तत्परतापूर्वक आगे आयें और हरेक शाखा में ज्यादा से ज्यादा 108 भूखे लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प लें। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ संचालक स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए - हर भूखे आदमी औरत व बच्चे को पेट भर भोजन मिले। भोजन देते समय व्यक्ति से न उसकी जाति पूछी जाये न धर्म पूछा जाये। संयुक्त परिवार टूटने से ऐसे बुजुर्ग भी भोजनाकांक्षी हो सकते हैं जो अपना खाना बनाने की स्थिति में नहीं हैं। उनके पास पैसा है पर मददगार नहीं है। ऐसे बूढ़़े लोग अगर मुफ्त खाना वाजिब न समझें कुछ दान देना चाहें उनकी दान दक्षिणा स्वीकार की जाये जिसकी उन्हें रसीद दी जाये। यदि वे माहवारी प्रति व्यक्ति पांच हजार रूपये से ज्यादा चंदा देना चाहें उन्हें 80जी के अंतर्गत टैक्स में छूट का प्रावधान भी हो। रैनबसेरा उपलब्ध कराना दिल्ली की सरकार दिल्ली नगर निगम तथा दिल्ली की अन्य नगर पालिकायें व पंचायतों का कर्तव्य है। अपने कर्तव्य संपन्न करने के लिये वे यदि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा की मदद लें। शहर के विभिन्न मोहल्लों में निश्शुल्क भोजनालयों के द्वारा जहां निराश्रित लोगों का योगक्षेम संपन्न करने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ स्वयं को अंबुद समान संगठन के रूप में स्थापित कर सकता है वहीं गैर सरकारी। पिछले नब्बे वर्षों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ योगपथ का राही रहा है। जिस तरह योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण तथा वेदव्यास पुत्र अवधूत शुक ने भारत की नारी शक्ति के ‘मनोज्ञ’ के रूप में भारत की नारी शक्ति को नवीन पैगाम दिया, स्त्री के कामिनी व मातृ पक्ष को भी उजागर किया। महाभारत युद्ध संपन्न हुए सवा पांच हजार वर्ष उपरांत नारी अभ्युदय व्यापक तौर पर हुआ है। भारतीय मानसिकता परिवार को स्त्री प्रधान संगठन याने मातृ प्रधान परिवार मानती है। पुरूष शौर्य के समानांतर स्त्री-कारूण्य संवर्धन औद्योगिक तथा वैज्ञानिक युग की पहली जरूरत उन लोगों को भोजन मुहैया कराना है जो आज के कारपोरेट गवर्नेंस आमदनी बढ़ाने की दौड़ में मैं पहले मैं पहले मनोभावना व मनोकामना से बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पास संघ शताब्दी में अभी आठ वर्ष छियानवे महीने और अहोरात्र के रूप में दो हजार नौ सौ बाईस अहोरात्र हैं। सरसंघ संचालक महाशय मोहन भागवत को भारत की मातृ शक्ति को वत्सलता क्षेत्र में सक्रिय बनाने की जरूरत है। पहले इन्द्रप्रस्थ-शक्रप्रस्थ फिर भारत मध्यवर्ती बिन्दु नागप्रस्थ में नारी शक्ति का लोक कल्याणकारी उद्भव चाहिये। जिन परिवारों से स्वयं सेवक आते हैं स्वयं सेवकों के मार्फत उनके परिजनों की मातृत्व शक्ति को भूख मुक्ति के लिये कमर कस कर आगे बढ़ने की राष्ट्रीय जरूरत है। दुनियां में क्लाइमेट चेंज के साथ साथ मानसिकता परिवर्तन भी व्यापक पैमाने पर आगे बढ़ा है इसलिये प्रत्येक शाखा से संबद्ध स्वयं सेवकों को प्रेरित किया जाये कि वे अपने परिवार की मातृशक्ति को भूख मुक्त दिल्ली और भूख मुक्त नाग विदर्भ की स्त्री शक्ति की प्रतीक दमयंती तथा रूक्मिणी की प्रसिद्धि राजा नल एवं योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण केे समय से ही ख्याति प्राप्त है। जब कभी लोग नल का आख्यान बतियाते हैं भीष्मक कन्या दमयंती का स्त्रीत्व जागरूक होकर सामने आ जाता है। नल दमयंती कथानक तो कृत-त्रेता के मध्य था पर रूक्मिणी तथा श्रीकृष्ण का परस्पराकर्षण तो सवा पांच हजार वर्ष पुराना ही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उग्र आलोचक भी यह मानता आया है कि सेवा परोपकार के समानांतर स्वयं सेवकों में जाग्रति एकात्म मानववाद तथा जीव दया संघ की आत्मा है। भारत में एक अरब पैंतीस करोड़ भारतीयों में 29.5 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा से नीचे बसर कर रहे हैं। मोटे तौर पर वे लोग जो दो जून पेट भर भोजन नहीं पाते हैं उनकी संख्या पैंतालीस करोड़ के आसपास मानी जा सकती है। सवाल केवल गेहूं चावल अन्न सरीखे अनाज प्राप्त करने का है। आटा चावल के साथ दाल, सब्जी, ईंधन, घी तेल आदि भी तो खाना तैयार करने के लिये चाहिये। शहरों में जो गरीब रहते हैं उनकी कठिनाई गांवों के गरीबों से ज्यादा दुष्कर है। अन्न की सड़ कर बर्बादी होरही है अन्न की बर्बादी न हो सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सुझाया कि अनाज सड़ाने के बजाय गरीब लोगों को बिना मूल्य लिये बांट दो। जब तक सरकारें एक नहीें अनेक दलों की थीं अनाज को सड़ने से बचाने का माकूल उपाय सामने नहीं था। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार पूर्ण बहुमत में है। यह सरकार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित जो भी संगठन दिल्ली में भूख से पीड़ित जन समूह को निश्शुल्क भोजन मुहैया करने का संकल्प लें। उनको निश्शुल्क भोजनालय चलाने की सुविधा उपलब्ध करने के लिये राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को गहराई से विचार करना चाहिये। यतीमखानों लंगरों तथा संपन्न धनी व्यक्तियों के द्वारा चलाये जारहे सदावर्त द्वारा जो मुफ्त भोजन परोसने वाले संगठन हैं उनके साथ समाज कल्याण तथा अल्पसंख्यक मंत्रालयोें के द्वारा जिन समाज सेवी संगठनों को मानक स्तर पर कार्य करते हुए पाया जाये उन्हें चिह्नित किया जाये। जहां तक अल्पसंख्यक समाज का ताल्लुक है अगर वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा संचालित संकल्पित भोजनालयों से दो जून का भोजन लेना अपने अनुकूल नहीं मानते हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जनाब नकवी साहेब मुसलमान संगठनों द्वारा संचालित यतीमखानों को चिह्नित कर उन्हें असमर्थ असहाय तथा निराश्रित पुरूषों व स्त्रियों एवं बच्चों के खाने के लिये इन्तजामात को दोषरहित बनाने जकात चंदा तथा सरकारी अनुदान से यतीमखानों को जो सहायता मिलती है उसका सदुपयोग सुनिश्चित करना तय हो। दिल्ली और नाग विदर्भ को पहली प्राथमिकता दी जाये। दूसरे शहरों या इलाकों में एक स्थान पर ज्यादा से ज्यादा 100 भूखों को भोजन मिले। व्यवस्था नियंत्रण में रहे तथा जो भोजन पारहे हैं और जो भोजन उपलब्ध करा रहे हैं उनमें करूणा के तार जुड़ें। भोजन मुहैया कराने वाले व्यक्ति में अहंकार न आये वह उस व्यक्ति को जिसकी क्षुधा शांत कर रहा है उसे अपने सरीखा ही समझे। भोजन पाने वाला हीनग्रंथि ग्रस्त न होने पाये। आज हिन्द का जो राजनैतिक रोडमैप है उसमें बहुमत ऐसे राजनीतिकों का है जो सत्ता मिलते ही अपने आपको अपने आसपास के लोगों से श्रेष्ठ समझने लग जाते हैं तथा उनके हाथ में ज्यों ही व्यवस्था की डोर आती है वे इतरा जाते है इसलिये भूख प्यास तथा रैनबसेरा संबंधी जो तिहरा प्रबंधन वाला सवाल है उसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सरीखा संगठन मानवीय मर्यादाओं में व्यवस्थित करने की ऊर्जा अर्जित किया हुआ संगठन है। लोकतंत्र या डैमोक्रेसी में पंक्तिभेद करने से लोकव्यवस्था में वैचारिक भूकंप आ जाता है जिससे कार्यक्रम आमतौर पर लड़खड़ा जाते हैं। इसी दृष्टि से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अगर भूख निवारण के कार्यक्रम को नीति निर्धारण तथा कार्यक्रम की वास्तविक जमीनी स्थिति पर मर्यादामूलक नियंत्रण रख कर कार्यक्रम चलायेगा। हिन्द की राजनीतिक चेतना वेगवती करूणा प्रवाह संपन्न कर सकेगी तथा संघ की शताब्दि पूर्ति याने विजयादशमी 12 अक्टूबर 2025 संवत 2082 शक संवत 1947 आश्विन शुक्ल दशमी तक ऐसे हालात मुल्क में बन सकते हैं कि कोई व्यक्ति भूखा नंगा तथा आश्रयहीन नहीं रह जायेगा, यही स्वतंत्र भारत का महापर्व होगा। 
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

No comments:

Post a Comment