गंगातटीय श्रृंगबेरपुर जहाँ राम को अपनी नाव में बिठा कर केवट ने गंगा पार करायी।
सिंगापुर (श्रंगबेरपुर का तद्भव शब्द) विश्वविद्यालय के प्राध्यापक असित के. विश्वास की संशयग्रस्तता है।
हिन्द को पानी के आधार पर तंग कर्ता है।
नहीं यह तो अंग्रेजीदां मैकोलाइट हिन्द की भद्रलोक का वहम है।
नहीं यह तो अंग्रेजीदां मैकोलाइट हिन्द की भद्रलोक का वहम है।
असित के. विश्वास सिंगापुर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सेसिला लोर्वजादा व उदिशा सकलानी क्रमशः वरिष्ठ अनुसंधानकर्ता तथा सकलानी जल नीति मूलक संस्थान में कार्यरत हैं। टाइम्स आफ इंडिया वैचारिक रहस्यवादी चिंतन पोखर के जरिये हिन्द के अंग्र्रेजी अखबार पढ़ने वाले और हिन्द के अंग्रेजीदां राजनीतिज्ञों तथा हिन्द की नौकरशाही को यह अखबार सन 1838 से लगातार सहारा देता रहा है। एक सौ उन्नासी वर्ष से लगातार चल रहा यह अखबार हिन्द का सबसे पुराना और बर्तानी सरकार की रीतिनीति का खुलासा करता रहा हैै। अखबार अब हिन्दुस्तानियों के हाथ में है इसलिये इस पर आंतर भारती का भी प्रभाव पड़ता रहता है। अंग्रेजी के अलावा मुंबई से टाइम्स का मराठी संस्करण भी छपता रहा है। जब अखबार की कमान नजीबाबाद के मूल निवासी श्रेयांस प्रसाद जैन व उनकी धर्मपत्नी सेठ रामकृष्ण डालमिया कन्या रमा के हाथ आई अखबार ने हिन्दी भाषा के नवयुग, धर्मयुग दैनिक नवभारत टाइम्स तथा दिनमान साप्ताहिक अखबार भी छापने शुरू किये। स्तंभकार त्रयी असित विश्वास तोर्ताजाज और सकलानी ने जबर्दस्त वैचारिक रहस्योद्घाटन का Running on Empty शीर्षक स्तंभ से How water might dissolve Indian Union if it can’t resolve River diapute. Water management practices in India need to change dramatically in the coming years. However We do not see any sustained Political will which will be consensual to take some hard decision. हिन्द की मौजूदा सरकार कर्णाटक तमिलनाडु पंजाब तथा हरयाणा सरकारों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अपनी अपनी जिद पर अड़े रहना हिन्द के विचारशील लोगों का विवेकशील ध्यानाकर्षण कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंध के चौथे अध्याय में शुकदेव राजा परीक्षित से कहते हैं - येषाम् खलु महायोगी भरतो ज्येष्ठः श्रेष्ठगुण आसीद्येनेदम वर्षम् भारत निति व्यापि विशंति। हिन्द के संविधान में Inadia that is Bharat नामांकित हुआ है। भरत नाभि मेरूदेवी पुत्र ऋषभ महाराज के सौ पुत्रों में ज्येष्ठ थे। इस मुल्क का नाम ऋषभनंदन भरत के नाम से ही भारत है। भागवत महापुराण के पांचवें स्कंध में तत्कालीन नदियों का ब्यौरा देते हुए इंगित किया गया है कि - भारतेप्यस्मिन वर्षे सश्चैच्छैला संति बहवो यलयो मंगल प्रस्थो मैनाक त्रिकूट यर्म ऋषभ कूटक कोल्लक सह्य देवगिरि ऋष्यमूक श्रीशैल वैंकट महेन्द्र वारिधारो विन्ध्यः शुक्तिमान ऋक्षगिरि पारियात्र द्रोण चित्रकूट गोवर्धन रैवतक ककुभ नील गोकामुख इन्द्रकील कामगिरि शत सहस्त्रवस शैला तरषाह नितंब प्रभा नदा नद्यश्च सन्त्यरकाता ऐतेषा अयो भारत्य प्रजा नाममिरेव पुनन्ति नामानत्मना चोपस्पृशंति। चन्द्रवसा ताम्रपर्णी अवशेषा कृतमाला वैहायसी कावेरी वेणी पयस्विनी शर्करावर्ता तुंगभद्रा कृष्णा वेण्या भीमरथी गोदावरी निर्विन्ध्या पयोष्णि तापी रेवा सुरसा नर्मदा चर्मण्वती सिन्धुः अन्धः शोणश्च नदौ महानदी वेदस्मृति ऋषिकुल्या त्रिसामा कौशिकी मंदाकिनी यमुना सरस्वती सुषोमा शतदू्र चंद्रभागा मरूद्वृद्धा वितस्ता असिवनी विश्वेति महानद्यः चालीस सदानीरा नदियों का ब्यौरा दिया गया है। संप्रति कावेरी जल विवाद कर्णाटक तमिलनाडु दोनों राज्यों ने अपने अपने तर्कों को प्राथमिकता दी है। दोनों राज्यों के सामान्य जन जिन्हें जनसंसद भी कहा जा सकता है अपनी अपनी हेकड़ी पर अड़े हुए हैं। यह हैं दक्षिण भारत के दो महत्वपूर्ण घटक राज्य कर्णाटक व तमिलनाडु का जल विवाद उत्तर में पंजाब राज्य शतद्रू या सतलज के जल में हरयाणा राजस्थान की हिस्सेदारी नहीं चाहता। कप्तान अमरेन्द्र सिंह ने लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र देकर पंजाब की जन संसदीय भावनाओं को जाहिर किया है। सिंधु के जल विवाद 1947 में दो राष्ट्रों में बंटे हिन्दुस्तान व पाकिस्तान दो पक्ष हैं। यद्यपि अभी भारत ने सिंधु जल पर रोक नहीं लगाई है आने वाले दिनों में सिंधु जल विवाद वाला मसला भी उग्र हो सकता है। इसलिये क्लाइमेट चेंज के साथ साथ भारत की तात्कालिक जरूरत हिन्दुस्तानी राष्ट्रीय पंचांग जिसे आचार्य नरेन्द्र देव समिति ने सुझाया था नेहरू सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय पंचांग का पहला दिन 21 मार्च तय किया क्योंकि 21 मार्च व 23 सितंबर को दिन रात बराबर होते हैं याने दिन बारह घंटे या तीस घड़ी व रात भी बारह घंटे या तीस घड़ी। श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंध के इक्कीसवें अध्याय के चौथे व पांचवें सुश्लोक का कथन है - यदा मेष तुलयो वर्तंते तदा अहोरात्राणि समानानि भवंति यदा वृषभादिषु पंचसु राशिषु चरति तदाहान्येव वर्धन्ते हृषति च मासि मासि एकेका घटिका रात्रिषु यदा वृश्चिकादिषु पंचसु वर्तंते तदा अहोरात्राणि विपर्ययाणि भवंति।
आज हिन्द की सबसे बड़ी व प्राथमिकता दिये जाने वाली जरूरत हिन्द के घटक राज्यों के परामर्श से भारतीय राष्ट्रीय पंचांग को नया संघीय आवरण देने की जरूरत है। वित्त मंत्रालय के मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोक के समर्थ नौकरशाह हिन्द के बजट को अमरीकी अंग्रेजी तरीके पर ढालने के लिये संस्तुति कर रहे हैं। इस ब्लागर ने हिन्द के वित्त मंत्री अरूण जेटली महाशय का ध्यानाकर्षण कर भारतीय बजट के लिये राष्ट्रीय पंचांग के पहले दिन जो प्रतिवर्ष ग्रेग्रेरियन कैलेंडर के मुताबिक 21 मार्च को पड़ता है क्लाइमेट चेंज के नजरिये से भी 21 मार्च को मेष संक्रांति पर्व माना जाना अत्यंत उपादेय हिन्दुस्तानी तरीका है। इस ब्लागर ने अपने पहले पोस्टों में विस्तार के साथ राष्ट्रीय पंचांग को अपनाये जाने का अनुरोध किया है। अर्जुन ने योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण से कहा था - असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव व्रवीषि मे। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अपनी आत्म विभूतियों का विवरण देते हुए कहा - हंत ते कथयिष्यामि दिव्या हयात्मविभूतयः। आगे विभूतियों का ब्यौरा देते हुए श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं - मुनीनाम् अप्यहम् व्यासः कवीनाम् उशना कविः।
अब उस प्रसंग पर विचार किया जाये जिस पर टाइम्स आफ इंडिया के रहस्योद्घाटन प्रवृत्ति पर अपनी लेखनी चला कर कहीं नदी जल विवाद इंडियन यूनियन को झकझोर न डाले और हिन्द की राष्ट्रीयता पर विग्रह का काला धब्बा न लेप डाले क्योंकि सतलुज जल विवाद और कावेरी जल विवाद उस स्तर तक उग्रता ले चुके हैं कि न्यायकर्ता सुप्रीम कोर्ट की भी बात सुनने के लिये मानसिकता नही बना पारहे हैं। ऐसी स्थिति में क्या तरीका अपनाया जाये ? केन्द्र सरकार तमिलनाडु व कर्णाटक राज्यों के सांसदों व विधायकों से विचार विमर्श कर आन्वीक्षिकी तरीका अपनाये। कन्नड़ व तमिल भाषाओं केे मर्मज्ञ राजनीतिक व्यक्तित्त्वों से विचार विमर्श कर दोनों पक्षों के विचारों पर मध्यस्थता का मार्ग प्रशस्त करने के लिये प्रयास किये जायें। कावेरी सतलुज अब केवल कानूनी पहलू नहीें रह गये हैं इनमें मानवीय सद्विचार स्वयं झुकने तथा विरोधी को भी झुकाने का कूटनीतिक तरीका अपनाना होगा। चूंकि अब 73वें व 74वें संविधान संशोधन के पश्चात सतलुज व कावेरी नदियों के तटवर्ती गांव पंचायतों जहां जहां सतलुज व कावेरी तटों में नगरपालिका व नगरपरिषद हैं उनका अभिमत नदियों के दोनों ओर के विधायक व सांसद अभिमत ज्ञात करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने मूल क्रियात्मक मंत्र सबका साथ सबका विकास अवधारणा के तहत प्रतिनिधियों की राय का विश्लेषण कर उच्चतम न्यायालय ने जो फैसले कावेरी तथा सतलुज जल के बारे में दिये हैं केन्द्रीय सरकार का संबंधित जल प्रबंधन मंत्रालय संबंधित राज्य सरकारों के जल प्रबंधन मंत्रालयों ग्राम सभा से लेकर लोकसभा तक संबंधित क्षेत्रों के लोकप्रतिनिधियों की बेबाक राय का उच्च न्यायालय के अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर उच्चतम न्यायालय से केन्द्र सरकार यह अनुरोध करे कि जल उपयोग का मध्य मार्ग अपनाया जाये तमिलनाडुु कर्णाटक पंजाब हरयाणा व राजस्थान जिन्हें संबंधित जल के उपयोग की लोककामना है स्वयं झुकने तथा अपने प्रतिपक्षी विचार को भी झुकाने की कला का निर्धारण करना तात्कालिक जरूरत है। तमिलनाडु तथा कर्णाटक के मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोक जिनमें गिने चुने अच्छी अंग्रेजी जानने व समझने वाले लोग भी हैं क्योंकि मद्रास प्रेसीडेंसी और बंबई प्रेसीडेंसी का हिस्सा रहे कर्णाटक के अनेक हिस्से मैकाले सृजित अंग्रेजी भाषा विधा राजनीतिक हलकों में भी उपलब्ध हैं। तमिल व कन्नड़ नौकरशाह भी अंग्रेजीदां भद्रलोक हैं। हम नहीं कहते कि उनकी बात न सुनी जाये उनकी राय भी सुनी जाये पर कन्नड़भाषी व तमिल भाषी कावेरी तटवर्ती ग्रामसभा से लोकसभा तक के लोक प्रतिनिधियों को सुन कर ही निष्कर्ष निकाला जाये। निष्कर्ष तक पहुंचने के लिये तमिलनाडु में तमिल कर्णाटक में कन्नड़ भाषा में अभिव्यक्त मत उन दोनों भाषाओं में ही प्रकाशित हों उनकी अंग्रेजी अनुवाद भी साथ में दिया जाये। जल प्रबंधन विशेषज्ञ जमीन से जुड़े लोगों की राय पर विचार विमर्श कर भारत के राष्ट्रपति महोदय कावेरी जल विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त करें चीफ जस्टिस आफ इंडिया तमिल मातृभाषी तथा कन्नड़ मातृभाषी जजों की व्यक्तिगत राय भी ज्ञात करें। जो तथ्य मीमांसित होकर सामने आयें वे भारत के राष्ट्रपति महोदय को बतायें ताकि भारत की संवैधिक एकता व अखंडता पर जो संदेह व्यक्त किया जारहा है उसका सर्वसम्मत समाधानकारी सूत्र तय किया जाये। इसी तरह पंजाब हरयाणा व राजस्थान के लिये शतद्रू (सतलुज) जल प्रबंधन में अमृतसर से लोकसभा सदस्य रहे कप्तान अमरेन्द्र सिंह ने लोकसभा से त्यागपत्र देकर असंतोष जाहिर किया है। महत्वपूर्ण मौका आगया है कि पंजाब की नदियों के जल प्रबंधन पर नयी दिशा से विचार करने के लिये भारतीय पंजाब में जो नदियां हिमालय से निकल कर बहती हैं उनके तटवर्ती गांवों विधानसभा क्षेत्रों लोकसभा क्षेत्रों सहित नदियों के किनारे रहने वाले पंजाबी भाषी जल प्रबंधन को करने पर क्या राय रखते हैं यह स्पष्ट होना बहुत जरूरी है। अदृश्य सरस्वती नदी सहित पंजाब के हर नदी तीर के गांव शहर का योगक्षेम राष्ट्रीय महत्व का विषय है इसलिये भारतीय पंजाब के नदी तटवर्ती गांवों के लोगों का लोकमत जानने के अलावा ग्रामसभा या ग्राम पंचायत नदी तटवर्ती नगरपरिषद नगर पंचायत तथा नगर निगम/पालिका के जन प्रतिनिधियों का मत संबंधित विधायक सांसद का अभिमत जानने के लिये तुरंत प्रयास किये जाने चाहिये। पंजाब की मुख्य भाषा पंजाबी तथा हिन्दी संबंधितों से संपर्क कर पंजाब सतलुज जल विवाद का एस वाई एल - सरयू यमुना लिंक का जो प्रावधान भूतकाल में निश्चित किया गया था पाकिस्तान के साथ सिंधु जन संधि सहित जल प्रबंधन के लिये लोकमत के अनुसार राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए नीति निर्धारण से एस वाई एल प्रकरण भी न्यायालय नवीनतम लोकमत के आधार पर विचार करे।
अब पानी के सवाल पर सोचें विश्व की वर्तमान लिंगुआ फ्रांका कही जाने वाली अंग्रेजी भाषा में पानी या जल के लिये केवल Water शब्द है जब कि हिन्द की भाषाओं में नीर, तोय, उदक, जल, अप, सलिल, पानीय, पय, पाणि, वारि याने भारत में जितनी लिपियां हैं पानी के उतने ही पर्याय हैं। असित के. विश्वास सहित स्तंभ तिकड़ी ने हिन्द की जल वितरण नीति पर जो प्रसंग उठाया है उनका पहला पैरा फतहपुर सीकरी के बारे में है। हिन्द के महान भक्त कवि तुलसीदास को सम्राट अकबर ने तलब किया। फतहपुर सीकरी में तुलसीदास ने कहला भेजा - संतन को सीकरी सों का काम। स्तंभकार तिकड़ी ने राबर्ट फिच सन 1589 में एक घुमक्कड़ अंग्रेज हिन्दुस्तान आये। उनके अनुभवों के आधार पर स्तंभकार तिकड़ी इस नतीजे पर पहुंची कि तब आगरा और फतहपुर सीकरी बड़े शहर थे, उनकी राय में लंदन से बड़े शहर थे। तिकड़ी यह मानती है कि सम्राट अकबर सीकरी के राजप्रासाद में केवल 13 वर्ष रहे उसके बाद सीकरी छोड़ दी। स्तंभकार त्रयी ने फतहपुर सीकरी को हिन्द की जल समस्या के रूप में लिया। शायद उन्होंने रहीम खानखाना सहित सम्राट अकबर के जो नवरत्न थे उनके बारे में ज्यादा नहीं सोच केवल बर्तानी घुमक्कड़ राबर्ट फिच की अनुभूतियों को ही प्राथमिकता दी। वे आगे बताते हैं भारत की आबादी 15 अगस्त 1947 याने विभाजन से पूर्व 39 करोड़ थी। वे यह मान कर चल रहे हैं कि 2050 तक हिन्द (भारत पाक व बंगला देश सहित) आबादी के नजरिये से 2 अरब बीस करोड़ साठ लाख बाशिन्दों का देश होगा याने 15 अगस्त 1947 से पूर्व के भारत की आबादी से 19 गुणा ज्यादा आबादी वाला उपमहाद्वीप जिसे यूरप के लोग Indian Subcontinent कहते हैं, आबादी विस्फोटक होगा। स्तंभकार त्रिकुटी या तिकड़ी अथवा हम उसे त्रिभुज भी कहें तो अतिशयोक्ति दोष नहीं होगा। Running on Empty केे जरिये उन्होंने जो चेतावनी हिन्द को दी है उससे घबड़ाने की जरूरत इसलिये नहीं है कि तिकड़ी ने साने गुरू जी का राष्ट्रवाद तथा आंतर भारती को नजरअन्दाज कर केवल मैकोलाइट अंग्रेजीदां हिन्दुस्तानी भद्रलोक जिसकी जनसंख्या में मात्रा मात्र एक प्रतिशत से ज्यादा नहीं है, हिन्द की पारंपरिकता को नजरअन्दाज किया है। हिन्द की दुखती रग केे उन्होंने बीस पड़ाव निश्चित किये। यह ब्लागर उन सभी का विश्लेषण करने के बजाय हिन्द की मौजूदा सरकार से यही कहना चाहता है कि तिकड़ी कहती है कि कठोर निर्णय जरूरी हैं। भारत केे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबन्दी का कठोर निर्णय जिसे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश बाबू ने सराहा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विमुद्रीकरण कर शेर की सवारी की है। हिन्द में नरेन्द्र मोदी सहित करोड़ों नवदुर्गा उपासक भगवती अंबा, गिरिजा, पार्वती, दुर्गा, ब्रह्मचारिणी, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री को सिंह स्कंधाधिरूढ़ा यानी शेर की सवारी करने वाली भगवती मानते हैं। जिम कार्बेट नामक अंग्रेज ने कुमांऊँ के अनेक नरभक्षी बाघों को मारा पर उन्हें देवीधुरा स्थित वाराही देवी के वाहन सिंह को मार गिराने में सफलता नहीं मिली। उन्होंने अपनी जीवनगाथा में कबूल किया कि वाराही देवी की अनंत शक्ति के आगे नतमस्तक हूँं। वे हिन्दू नहीं ख्रिस्ती अंग्रेज थे पर उन्होंने हिन्द की दैवी शक्ति को नमन किया।
असित के. विश्वास तिकड़ी ने जो चेतावनी हिन्द को दी है उसे हिन्दवासियों को स्वीकार करते हुए सबसे पहला काम यह करना चाहिये कि गंगा को गोमुख से गंगा सागर तक निर्मल करने के लिये गंगा तटवासियों, गंगा तट की ग्राम पंचायतों के लोकप्रतिनिधियों, गंगा के दोनों तरफ के गांवों शहरों के प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों विधायकों सांसदों का आह्वान कर उनकी सम्मति मालूम की जाये, लोकमत ज्ञात होने पर सरकार यह कठोर फैसला ले कि गंगा में औद्योगिक अवशिष्ट तथा तटवासी लोगों के मानव मलमूत्र सहित इतर अवशिष्ट नदी में न गिराये जायें। सरकारी अमले के समानांतर लोकसंग्रह में यकीन करने वाले स्वयं को पारिवारिक जीवन से न बांधने वाले स्त्री पुरूषों और सक्रिय जीवन से निवृत्त व्यक्ति जिन्होंने सत्तर वर्ष पूरे कर लिये हैं जिनकी कोई पारिवारिक जिम्मेवारी शेष नहीं रह गयी है वे हिन्द के अंबुद समान व्यक्ति समूह से जुड़ें। अभी देश में हजारों हजार एन.जी.ओ. हैं समाजसेवी संस्थायें हैं उन सबको मिला कर गांव पंचायत नगर पंचायत से लेकर राष्ट्र पंचायत तक अंबुद समान व्यक्ति श्रंखला स्वयं सेवी आधार पर स्थापित करने की जरूरत है। नदी जल प्रबंधन स्थानीय लोकमत तथा स्थानीय समाज की नदी जल उपयोग संबंधी प्राचीन परंपराओं को दकियानूसी मान कर त्याग करना स्वधर्म नहीं है इसलिये नदी तीरवर्ती गांवों के आंतर भारती साहित्य सहित रामायण महाभारत तथा अठारह पुराणों में भारतीय नदियों का जो इतिहास भरा पड़ा है उसे श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंध के नदी, पहाड़, नक्षत्र तथा परिवर्तनशील संसार के जो बिन्दु हैं उन पर युगानुकूल पद्धति निर्धारण किया जाना आवश्यक है। शुकदेव राजा परीक्षित से कहते हैं -
अहो अमीषाम् किम कसिशोभनम् प्रसन्न एसां स्विदुतः स्वयं सी।
येर्जन्म लब्धम्् नृषु भारता गिरे मुकुन्द सेवा पथिकं स्पृहा हि नः।
असित के. विश्वास और उनके दोनों सहयोगी स्तंभकारों से केवल इतना ही कहना है कि जिस प्राणी विशेषतया द्विपद ने भारत में जन्म लिया है वह सांस्कृतिक राष्ट्रबोधी है। पश्चिम के माडर्न नेशनलिज्म से भारत सांस्कृतिक भू भौगोलिक शक्ति बहुत ऊँचे आसन में उसे डिगाना अत्यंत दुष्कर है। सांस्कृतिक भारत टूटता नहीं जिसे लोग Political Nationhood कहते हैं वह सिद्धांत भारती तीर्थ पर लागू होता नहीं। घबराने की जरूरत नहीं।
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