Friday, 20 January 2017

प्रधानमंत्री का शिव संकल्प ?
क्या हर बेघर को रहने के लिये घर उपलब्ध कराना युगधर्म है ?
हिन्द के देहाती इलाकों के दस करोड़ तिहत्तर लाख परिवार निराश्रित या अर्ध निराश्रित गरीबी का कष्ट झेल रहे हैं। हिन्द के गांवों में कुल मिला कर सत्रह करोड़ चौरानबे लाख कुटंब हैं। गरीबी की मार झेलने वाले कुटंब साठ प्रतिशत हैं। देहाती हिन्द की आबादी 833087662 तथा शहरी हिन्द की आबादी 377105760 है। लगता है देहाती हिन्द में प्रति परिवार सात व्यक्ति हैं, संयुक्त परिवार में सदस्य संख्या ज्यादा भी हो सकती है। जो कमेटी सरकार ने गठित की थी उसके अनुसार समिति का विचारणीय क्षेत्र एसईसीसी द्वारा लाभग्राहियों का चिह्नांकन तथा प्राथमिकताओं का निर्धारण मात्र संकल्पित था। देश में वर्तमान में 638568 गांव एवं 5161 शहरी इलाके हैं देश में 640 जिले तथा 5924 उपजिले हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने अपनी पहली पारी में मई 2014 से लेकर अद्यपर्यन्त याने दिसंबर 2014 तक के अपने इकतीस महीनों के शुरूआती प्रधानमंत्रित्व के सोलह बिन्दुओं को पकड़ा है। हिन्द में सोलह के आंकड़े की बड़ी महिमा है, इस मुल्क के रहने वाले लोग सोलह संस्कार, सोलह श्रंगार, तथा रूपये में सोलह आने पर यकीन करने वाले थे। हिन्द का सबसे बड़ा अवधूत सोलह वर्षीय शुकदेव जिसने आसेतु हिमाचल सारे देश में भगवान श्रीकृष्ण कथा की धूम मचा दी। स्वयं वासुदेव श्रीकृष्ण सोलह कलाओं वाले अवतार थे। नरेन्द्र मोदी स्वयं सोलहवीं लोकसभा के नेता के रूप में उभर कर आये। जिन सोलह बिन्दुओं को प्रधानमंत्री मोदी ने अपना रिपोर्ट कार्ड माना है उनमें स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छ शौचालय, प्रधानमंत्री जन धन योजना, मुद्रा, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, उजाला, दीनदयाल अन्त्योदया योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना, डाइरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, मिशन इंद्रधनुष, नेशनल स्कालरशिप पोर्टल, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, (मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया) तीनों एक पंगत में। प्रधानमंत्री इन योजनाओं पर स्वयं नजर रख रहे हैं। 6 वर्ष पहले हुई जनगणना के आंकड़ों निराश्रित लोगों की सही सही संख्या बढ़ना स्वाभाविक है। लगभग पौने ग्यारह करोड़ कुटंबों में से साढ़े अढ़तालीस प्रतिशत परिवारों याने लगभग आठ करोड़ सत्तर लाख परिवारों ने निराश्रित देश संबंधी एक ओर अनेक बिंदुओं को गणनाकारों को बताया था। बड़ा मुद्दा छत न होने मकान न होने का था याने 2011 की जनगणनानुसार करीबन पौने नौ करोड़ लोग आवास से वंचित थे। इन वंचित कुटंबों में सोलह लाख बत्तीस हजार कुटंब बेघर थे जिनमें परिवार प्रमुखा महिलायें अथवा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों के अलावा भूमिहीन परिवार भी थे। ये सभी रहने के लिये मकान की तुरत जरूरत पूर्ति वाले परिवार हैं। ऐसे लोगों के साथ जनगणनाकार भिखारियों, आज भी मानव मलमूत्र सिर पर ढोने वाले लोग हैं। हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी दुखती रग बहुत बड़ी संख्या में मलमूत्र सिर पर ढोने वाले लोगों का योगक्षेम न देखना भी है। भिखारियों के अलावा संयुक्त परिवार व्यवस्था टूटने के कारण वृद्ध जन पुरूष हों या स्त्रियां इकले हों या पति पत्नी दोनों जीवित हों उनके पास पैसा मकान हो सकता है पर वे भोजन बनाने की शारारिक क्षमता नहीं रखते। नौकर या नौकरानी रखें तो लूटपाट के अलावा बूढे़ लोगों की हत्या की भी शंका रहती है। यद्यपि यह मसला शहरों के लिये ज्यादा है गांवों में उतना संकटप्रद नहीं है पर हिन्द में शहरी आबादी के अलावा शहर न घोषित हुए ऐसे इलाके बहुत ज्यादा हैं जिन्हें अब गांव कहना तर्कसंगत नहीं है। शहर की सभी सुविधाओं का लाभ लेने वाले परिवारों की संख्या भी पर्याप्त है। दरअसल जरूरत इस बात की महसूस होती है कि अर्ध शहरी इलाकों को गांव न माना जाये। उनके लिये गांव व शहर के बीच का एक नया रास्ता खोजने का काम नीति आयोग को सौंपा जाये तथा गांवों के निराश्रितों की सही जानकारी तभी मिल सकती है जब जनगणना के आंकड़ों में देहाती हिन्द वाले हिस्से में जिन 40 प्रतिशत परिवारों को याने सात करोड़ छः लाख कुटंबों में से कितने कुटंब हिन्द के उन इलाकों में हैं जहां राज्य सरकारों ने नगर पंचायत नगर परिषद अथवा नगर पालिका नहीं बनाई है पर जो इलाके बाजारनुमा हैं शहरी सुविधा प्राप्त हैं जहां खेती केवल सागभाजी उगाने के लिये होती है लोगों की आमदनी होते रहती है। जरूरत इस बात की है कि नीति आयोग इन 40 प्रतिशत परिवारों के लिये अगली जनगणना से पहले एक मार्गदर्शक रूपरेखा भारत संघ के घटक राज्यों के उपयोगार्थ करे। इन सेमी अर्बन एरिया को गांव पंचायत अथवा ग्राम सभा का दर्जा देने से पहले यह विचार किया जाये कि इन इलाकों की आर्थिक स्थिति क्या है ? क्या अर्ध शहरी इलाकों को ग्राम पंचायत ग्राम सभा तथा क्षेत्र पंचायत के दायरे से बाहर कर अर्ध शहरी इलाका माना जाये या इन्हें टेम्परेरी अर्बन स्टेटस देते हुए सेमी अर्बन एरिया के रूप में स्थापित किया जाये ? महाशय लालकृष्ण आडवानी ने युग पुकार सामने रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अनुरोध किया है कि संघ महिला शक्ति संपात का उपयोग करे। इस ब्लागर ने संघे शक्ति कलौयुगे ब्लाग में सरसंघ संचालक महोदय श्री मोहन भागवत का ध्यानाकर्षण करते हुए दिल्ली और नागविदर्भ में प्रत्येक संघ शाखा के समानांतर शाखा क्षेत्र महिला श्रम शक्ति तथा वात्सल्य शक्ति का प्रयोग वृद्ध अपंग तथा आश्रमहीन लोगों को दिन में एक बार अपराह्न में भोजन मुहैया कराने का संकल्प लिया जाये। हिन्द की सांस्कृतिकता का आदर्श प्रभाते बदरिकाश्चैव मध्याह्ने मणिकर्णिका भोजने तु जगन्नाथ शयने कृष्ण द्वारका का भोजने तु जगन्नाथ का सत्संकल्प कम से कम दिल्ली व नागपुर में तो लिया ही जाये। केवल कानून के सहारे अथवा लोकलुभावनी योजनाओं के बजट प्रावधानकार सरकारी मशीनरी अथवा बैंकों के मार्फत गरीब हिन्दुस्तानियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से काम नहीं बनने वाला है। सरकारी अमला व बैंक कार्मिक अपने आपको मालिक मान कर चलता है। उसमें जब तक नैतिक सदाचार का आरोपण नहीं होगा उसने बांटे जाने वाले धन में से चुंगी लेनी ही है इसलिये सरकारी प्रावधान तथा कानूनी डंडा के समानांतर आज हिन्द की पहली जरूरत करूणा व वात्सत्यता संवर्धन है। चूंकि नरेन्द्र दामोदरदास मोदी परिवारवादी नहीं हैं सारा भारत उनका अपना कुटंब है वे कानूनी दण्डकारण्य के समानांतर वात्सल्य संवर्धन मानवीयता को प्रोत्साहित कर सकते हैं। 
एसईसीसी वाले जनसंख्या आंकड़े गांवों के बारे में सामने आगये पर गांवों से शहरों विशेषकर मुंबई दिल्ली कोलकाता चेन्नै सहित हिन्द के बड़े बड़े शहरों में एसईसीसी आंकड़े भी सामने आना जरूरी है। बिहार की राजनीतिक नब्ज जानकार महाशय लालू प्रसाद यादव का कहना है कि अनुसूचित जनसंख्या साढ़े बाईस फीसदी से तैंतीस फीसदी पहुंच गयी है। भारत सरकार को आलोचकों को जवाब देना ही चाहिये कि एसईसीसी का वास्तविक आंकड़ा क्या है ?  सही सही सामाजिक अभियंत्रण जिसका नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ईमानदारी से अनुसरण कर रहे हैं वह नाना जी देशमुख मधु लिमये महात्मा गांधी को समर्पित कांग्रेस नेता शंकर राय देव तथा तमिलभाषी गोविन्दाचार्य से ज्यादा कारगर हैं। अहर्निशम् सेवामहे का संकल्प लिये नरेन्द्र मोदी नरसी मेहता की तरह द्वारकाधीश योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण को हुंडी भेजने की क्षमता अर्जित कर चुके हैं। उन्हें ममता बनर्जी अरविन्द केजरीवाल मायावती लालू प्रसाद यादव द्वारा निरंतर की जारही आलोचना से ही संबल मिल रहा है। उन सभी के अपने अपने निजी व खास एजेंडे हैं पर नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का एक ही एजेेंडा है हिन्द को उसका सर्वतोभद्र वैभव दिलाना है। सबको साथ लेकर चलने की मानसिकता संवर्धन करना तथा विकास किसी खास व्यक्ति का ही नहीं सबका विकास संकल्पित करना है। 
हिन्द के गरीब लोगों को स्वामी विवेकानंद तथा महात्मा गांधी के गरीब में नारायण के दर्शन दरिद्र नारायण की कल्पना ऊँचा आदर्श होने के साथ साथ स्वामी विवेकानंद तथा महात्मा गांधी का आत्मवाद था। एक रत्न मानवीय के संकल्पकर्ता पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भी गरीब के लिये सहानुभूति थी। इन तीनों महापुरूषों को राजनीति नहीं लोकसंग्रह प्रिय था। हर मकान रहित परिवार या व्यक्ति को मकान दिलाने का संकल्प दक्षिण कैलिफोर्निया के विशाल नगर लास ऐंजेल्स व उसकी काउंटियों में बेघर लोगों को मकान दिलाने का संकल्प लास ऐंजेल्स के मेयर ने लिया। इस ब्लागर ने अपनी कैलिफोर्निया यात्रा के दौरान अपने एक ब्लाग में कैलिफोर्निया के आवास हीन लोगों को आवास दिये जाने का जो उपक्रम लास ऐंजेल्स में हुआ वह अत्यंत सराहनीय था। भारत जिसकी आबादी आज करीब एक अरब तीस करोड़ है 2011 की जनगणना में हिन्द की आबादी 1 अरब बीस करोड़ थी आबादी रह दस साल में पच्चीस फीसदी दर से बढ़ रही है। अन्दाजा लगता है कि 2021 की जनगणना में भारत के लोगों की कुल संख्या डेढ़ अरब से केवल चार पांच करोड़ कम रह जायेगीं सभी लोगों को छत मिले उसके लिये कम से कम पैंतीस करोड़ मकान चाहिये। विपन्नता को जो चक्रव्यूह भारत को मथ रहा है विपन्न समाज कुल भारतीय समाज का तिहाई हिस्सा रहने ही वाला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के शिव संकल्प कि हर जरूरत मंद व्यक्ति 2022 तक छत पा सके इसके लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उतनी मेहनत करनी होगी जितनी गंगा को धरती में उतारने के लिये राजा सगर के प्रपौत्र राजा भगीरथ ने की थी जिसके परिश्रम के कारण गंगा नदी भागीरथी और जाह्नवी कहलाने लगी। पूर्व वित्त सचिव सुमित बोस ने एसईसीसी विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता करते हुए जो संस्तुतियां भारत सरकार को प्रस्तुत कीं अगर नरेन्द्र दामोदरदास मोदी सरकार अपने अधिकारियों को आसन्न कर्तव्यों के लिये मुखर करने में सफल होगई तो हिन्द में एक मानवीय सत्वांकल्प वाली प्रशासन क्रांति का सूत्रपात संपन्न हो सकता है। अतुल गुप्त की मान्यता है कि जिस तरह नोटबंदी या विमुद्रीकरण का साहस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिया उसी तरह हिन्द के बाबू समाज जो हिन्दुस्तानी मैकोलाइट भद्रलोक का अगुआ है जिसका चिंतन पोखर बर्तानिया व अमरीकी शैली पर निर्मित है उसे धरती में लाकर धरती पुत्रों के साथ समाज के सुख दुःख का साझीदार बनाना अत्यंत जरूरी है। अतुल गुप्ता ने परामर्श दिया Demonetize Babus, हिन्द की आज की वास्तविकता यह है कि सरकारी अमले का मुखिया आईएएस आईपीएस आईएएएस आईएफएस तथा केन्द्र सरकार के समस्त अंग्रेजी के अधिकारी राज्यों के पीसीएस पुलिस व इतर विभागीय अफसर सेवाकाल में ही राजनीतिक सुप्रीमो व क्षत्रपों की छतरी के अंदर आने के कारण हिन्द की समूची प्रशासनिक मशीनरी अनेकानेक खेमों में बंट गई है। कंपनी बहादुर व अंग्रेजी बादशाहत के राज में जो जिला प्रशासन तंत्र खड़ा किया गया था पिछले सत्तर वर्षों में वह जातिवादी प्रवाह में बह गया है। सिस्टम फेल हो चुका है इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 640 जिलों केे सिस्टम फेलियर के कारण को राजनीतिक सह नौकरशाही अफरातफरी आज हिन्द में है उसे खत्म करना पहली जरूरत हैै। मुल्क का प्रशासनिक तंत्र बजाय 640 जिलों के 5940 उप जिलों या विकासखंड मूलक बनाया जाये। जिला प्रशासन को नया नौकरशाही तंत्र पांच हजार नौ सौ चौहत्तर या छः हजार ब्लाकों के जरिये चलाये जाने का रास्ता अख्तियार किया जाये तो प्रशासनिक अधिकारी आई ए एस पुलिस अधिकारी आई पी एस को केवल अढ़ाई लाख जनसंख्या का योगक्षेम देखना होगा। प्रशासनिक अधिकारी वह चाहे आईएएस हो प्रादेशिक सिविल सर्विस के पीसीएस से प्रोन्नत आईएएस हो उसकी पकड़ प्रशासन पर बनी रहेगी। इससे दो फायदे तो तुरंत होंगे आईएएस केन्द्रीय सेवा संख्या बढ़ने से दलितों सहित अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों सहित विकलांगों का कोटा बढ़ जायेगा। विकासखंड प्रशासन मूल प्रशासनिक इकाई होने से प्रशासनिक अधिकारी को अपने कार्यक्षेत्र को सही सही तरीके से समझने का मौका मिलेगा। प्रधानमंत्री को प्रशासनिक उच्चस्थ सचिव स्तर के उत्तरदायी अधिकारियों से जो अपेक्षायें हैं वह इसलिये पूरी नहीं हो पारही हैं क्योंकि उच्चस्थ प्रशासनिक तबका भी जाति बिरादरी बंटवारे का कर्ता बन गया है। प्रशासनिक तंत्र में खेमे बन चुके हैं जिन समाजों या जातियों की जितनी संख्या ज्यादा है उनका जातीय स्वार्थ प्रशासनिक कर्तव्य निष्ठा पूर्ति में बाधक बन चुका है। इसलिये सिस्टम फेलियर के कारण जिला प्रशासन को भंग कर विकासखंड प्रशासन को खड़ा करना अत्यंत आवश्यक होगया हैै। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महाशय को एक इन्क्वायरी कमीशन बैठा कर जिला प्रशासन में पिछले सत्तर वर्षों में आई विसंगतियों की सही सही जानकारी लेकर राजनीतिक पक्षों के विवेकशील मानव हितैषी तत्वों को इन्क्वायरी कमीशन में जोड़ना चाहिये ताकि कोई राजनीतिक सुप्रीमो यह महसूस न करे कि उसकी अनदेखी होरही है। राजनीतिज्ञों व नौकरशाहों की मिलीभगत वाली सिस्टम फेलियर का सही सही स्वरूप सामने लाने की जरूरत है। 
यह ब्लागर हिन्दुस्तान की आजादी पर्व पंद्रह अगस्त 1947 को 1921 में स्थापित प्रेम विद्यालय ताड़ीखेत जिला अल्मोड़ा में गणित का अध्यापक था। प्रेम विद्यालय ताड़ीखेत कुमांऊँ का उतना ही महत्वशील स्वातंत्र्य केन्द्र था जितना प्रेम महाविद्यालय वृन्दावन जिसकी आधारशिला राजा महेन्द्र प्रताप ने रखी थी। आजादी मिलते समय नौकरशाह समूह किंकर्तव्यविमूढ़ था। यद्यपि पंडित नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने तत्कालीन केबिनेट सेक्रेटरी वाजपेयी के माध्यम से नौकरशाही को अभयदान दिया। कालांतर में बर्तानी राज के हुक्मरानों को संविधान सभा ने भी आश्वस्त किया। महात्मा गांधी के अछूतोद्धार अस्पृश्यता निवारण संबंधी महत्वपूर्ण व्रत की पूर्ति के लिये तत्कालीन संयुक्त प्रांत आगरा अवध के प्रीमियर पंडित पंत ने अपने विश्वस्त मंत्रिमंडलीय सहयोगी डाक्टर संपूर्णानंद को ताड़ीखेत भेजा। पंडित पंत चाहते थे कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के सामूहिक भोज में भोज वितरण का कार्य रानीखेत के सफाई कर्मचारी जिन्हें उस जमाने में मेहतर कहा जाता था वे बांटेंगे। महात्मा गांधी स्वयं 1929 में ताड़ीखेत में गांधी कुटी में दो दिन रहे थे। उन्हें जब पता चला कि ताड़ीखेत में अस्पृश्यता निवारण का महायज्ञ संपन्न हुआ उन्होंने हरिजन में पंडित पंत की प्रशंसा की। महात्मा गांधी जब मई 1930 में गवर्नर माल्कम से भेंट करने नैनीताल गये थे पंडित पंत के निवास स्थान में ही रहे वहीं उन्होंने भोजन किया था। डाक्टर संपूूर्णानंद ने ताड़ीखेत प्रेम विद्यालय के सहभोज में 15.8.1947 को स्वयं भाग लिया और प्रबंधन की प्रशंसा की।
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