Wednesday, 15 February 2017

सवा सौ वर्ष वाला विश्व का अद्भुत साहित्य सेवी
जोह्न रोनाल्ड रेउल टोल्किन जय हो जय जय जय हो।
वैश्विक काव्य जगत सतत प्रेरणा देता रहे यही शिव संकल्प है जिसे धरती के कोने कोने तक फैलाया जाये। टोलकिन चिरंजीवी हों उनकी लेखनी लिखती रहे।
गीताप्रेस गोरखपुर की मान्यता है कि वसुदेव-देवकी की आठवीं संतान योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जब रोहिणी नक्षत्र था आज से पांच हजार दो सौ बयालीस वर्ष पूर्व हुआ था। श्रीकृष्ण भोजराज राष्ट्रपाल कंस के कारागार में जन्मे थे। कंस के राजमहल को मथुरावासी आज भी कंस थार नाम से जानते हैं। देवकी कंस के पिता उग्रसेन के अग्रज देवक की कन्या थी। श्रीमद्भागवत महापुराण के कथनानुसार श्रीकृष्ण 126 वर्ष जिये। प्रभास पाटन में यादवों की यादवी तथा अग्रज बलदेव के समुद्र में डूब कर मरने से श्रीकृष्ण को मानसिक क्लेश पहुंचा था। वे अश्वत्थ वृक्ष के सहारे अपने दांये पैर को बांये घुटने में टेक कर इस तरह बैठे थे देखने वाले को लगता कि यह हिरण है। उनके पद तल की लाली को देख कर बहेलिये ने हिरन समझ कर बाण चला दिया। जब घटना स्थल पर आया तो कृष्ण को देेख उसे अतीव मानसिक पीड़ा ने करा डाला। कृष्ण ने बहेलिये से कहा - वत्स तुमने मेरा हित साधन किया है। जाओ द्वारका जाकर सगे संबंधियों को प्रभास पाटन की हर घटना का ब्यौरा बताओ। कृष्ण की तरह हिन्द की आजादी के अगुआ मोहनदास करमचंद गांधी का भी संकल्प था कि वे 125 वर्ष जियेंगे। अगर उनकी मौत 30 जनवरी 1948 के दिन गोली लगने से न हुई होती उनका 125 वर्ष जीने का संकल्प साकार हो सकता था। सुपर्णा बनर्जी ने जे.आर.आर. टोलकिन जो अपनी 125वीं वर्षगांठ तीन जनवरी 2017 को मना चुके हैं उनका रहस्यपूर्ण विचित्रता लिये हुए व्यक्तित्त्व की झलक उनके पूरे नाम जोन्ह रोनाल्ड रेउल टोलकिन से प्रतीत होती है अंग्रेजी का जौन्ह शब्द भारत के जह्नु जाह्नवी से मिलता जुलता है। सेंट जान्ह ने ईसा मसीह का बपतिस्मा पवित्र जलाभिषेक से संपन्न किया था। जरूरत इस बात की प्रतीत होती है कि जान्ह रोनाल्ड रेउल के एक सौ पचीस वर्षीय अब भी निरंतर चल रही जीवन यात्रा से तुलसीदास की तरह स्वांतः सुखाय साहित्य सृजन में दत्तचित्त हैं। रहस्यपूर्ण विचित्रताओं से लबालब भरे हुए घट की तरह मौलिक चिंतन वाला लेखनी जन्य विचार पोखर व्यक्तित्त्व के धनी की कृतियों में आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जिसे ऋग्वेद सांगोपांग प्रथम बार प्रकाशन कराने वाले जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने अपने आपको मोक्षमूलः तथा आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का अक्षपत्तन विश्वविद्यालय का हिन्दुस्तानी नाम दिया था। टोलकिन के उपन्यासों में जो आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पुरानी और मध्यकालीन अंग्रेजी साहित्य के प्राध्यापक रहे पहले लीड्स में पुनः आक्सफोर्ड टोलकिन प्राथमिककतया एक ऐसे बौद्धिक व्यक्तित्त्व हैं जिनका गहन अध्ययन पुरातन वीर रस के साहित्य में BEOWULF मानक संदर्भ दाता है। टोलकिन बीसवीं शती के अंग्रेजी साहित्य में Great vogue of fantasy समकालीन साहित्य में एक खास संस्कृति व स्थापत्य के उद्गाता रहे हैं तथा साहित्य के फैशन में काल्पनिक तथा आन्वीक्षिकी विधा के बढ़ाने वाले साहित्यसेवी के नाते 3 जनवरी 1892 में जन्मे जौन्ह ने जब वे बयालीस वर्ष के थे 1936 में Beowulf: The Monseas and Critics उनके रचनात्मक लेखन का प्रतीक था। Lost Tales 1983-84 में तथा Silmarcilon 1977 में लिखा। 1937 में उन्होंने The Habit और Lord of Rings 1954-56 में लिखा। इस उपन्यास का अनुवाद दुनियावी 38 भाषाओं में प्रकाशित हुआ है। टोलकेन का गव्य तथा औपन्यासिक विशिष्टताओं एवं उनकी बढ़ती उम्र में विवेक के आनंद का मार्ग है। सुपर्णा बनर्जी पश्चिम बंग के बेरहामपुर के कृपानाथ कालेज में अंग्रेजी पढ़ाती हैं तथा Science, Gender and History लेखिका हैं तथा Fantastic in Mary Shelly and Margret at Word  की लेखिका भी हैं। उन्हेंने एक सौ पचीस वर्ष की जीवनगाथा का 3 जनवरी 2017 को संपूर्त करने वाले व्यक्तित्त्व को हिन्द के राष्ट्रीय ख्याति वाले दैनिक अंग्रेजी अखबार के जरिये समाज में अपनी काव्यात्मक प्रभाव डालने वाले लेखक आलोचक तथा वैविध्यपूर्ण काल्पनिकता का समावेश करते हुए अपने उपन्यासों के जरिये अंग्रेजी साहित्य को संवारा है। जहां तक वैश्विक उत्कृष्ट स्तर के साहित्य सृजन का सवाल है ग्रेग्रेरियन कैलेंडर के 2016वें वर्ष का सवाल है विश्व साहित्यिक समाज ने अंग्रेजी साहित्य काव्य नाटक क्षेत्र के ध्रुव तारा सरीखे चमकीले साहित्य नक्षत्र शेक्सपियर की चतुःशती पुण्यतिथि मनाई गई। पूरे वर्ष भर शेक्सपियर स्मृति से साहित्य पटल में भव्य रमणीकता वाला वातावरण रहा। 2017 वाला ग्रेग्रेरियन कैलेंडर वर्ष के पहले महीने जनवरी 2017 की तीसरी तारीख के दिन अंग्रेजी साहित्य में रोमान्स रोमान्टिसिटी रोमान्टिक शब्द संचय ने जौन्ह रोनाल्ड रेउल टोलकिन की सवा शती पूर्ति का पर्व 3 जनवरी 1892 को जन्मे जे आर आर टोलकिन नाम से प्रसिद्ध साहित्यिक का 3 जनवरी 2017 को मनाया। रोमान्स अंग्रेजी साहित्य में एक आकर्षक शब्द है इस शब्द की व्युत्पत्ति भारतीय वाङमय रमण शब्द से जुड़ी हुई है। पाणिनी का कथन है - येषाम् योगिनः रमन्ते सः रामः सैव दाशरथि रामः। योगी राम में रमण करता है सामान्य जन रमणीय कामिनी में रमता है। श्रंगार रस का समूचा भारतीय वाङमय अंग्रेजी साहित्य के रोमान्स भरे श्रंगार साहित्य से ज्यादा हृदयस्पर्शी है। ब्रजभाषा का समूचा भक्ति काव्य रमणीयता का जाज्वल्यमान ध्रुव तारा सरीखा चमक दमक का प्रतीक है। आधुनिक अंग्रेजी साहित्य की रोमान्टिक मीमांसा को नवरस के पुट से जोड़ कर देखने का प्रयास किया जाये तो भारतीय वाङमय की भक्ति ज्ञान वैराग्य की त्रिवेणी में जलक्रीड़ा नुमा सहस्नान करना होगा इसलिये टोलकिन के साहित्य HOBBIT आकार को मुंह बोलती रमणीयता उपलब्ध करानी हो तो टोलकिन सरीखी कल्पना की उड़ान का वरण करना होगा। अपने दांये हाथ की अंगूठे को छोड़ कर शेष चार अंगुलियों को माप मानते हुए जिस मनुष्य की ऊँचाई सिर से पैर तक बावन अंगुल की होती है ऐसा व्यक्ति वामन या बौना कहलाता है। अपने अद्भुत काव्य हौबिट के जरिये जे आर आर टोलकिन ने बौना नस्ल का चित्रण किया है। कश्यप दिति की जुड़वां संतान हिरण्यकश्यप व हिरण्याक्ष की दैत्य नस्ल गाथा दैत्यधानी के हरिद्रोही नरेश हिरण्यकश्यप (हरिद्रोही को आजकल हरदोई के नाम से जाना जाता है। अमरीका के पैंतालीसवें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिरण्यकश्यप के नस्लवाद को अमरीकी श्वेत नस्लवाद आवरण से विभूषित किया है। नस्लवाद सृष्टि के साथ साथ चलने वाली ऐसी विधा है जिसका उल्लेख जयशंकर प्रसाद ने अपने महाकाव्य कामायनी में भी आकर्षक तरीके से किया है। सुपर्णा बनर्जी मानती हैं कि टोलकिन का महाकाव्य हौबिट अधूरी अधकचरी मानवता की काल्पनिकता है। आदि कवि वाल्मीकि ने अपने आदि काव्य रामायण में जो कल्पनालोक चित्रित किया उस काल्पनिक रामकथा को जीवन्त व सजीव बनाने का महायज्ञ का संपादन किया इसलिये काल्पनिकता की संज्ञा देते हुए किसी विचार स्त्रोत न दुत्कारना ही सात्विक मानवता का मूर्त रूप है। अंग्रेजी भाषा को उसके इंग्लिस्तानी ललित साहित्य को जब हिन्दुस्तान में जन्मी महिला या भारत जन्मा पुरूष अपने शिष्यों को पढ़ाता है उसमें भारती वाङमय की छाप चाहे अनचाहे स्वयं उग जाती है। वह तब अपने शिष्यों को इंग्लिश नहीं बंग्लिश या हिंग्लिश आदि के लहजे से ही साहित्य का परिष्कार करता या करती है। कल्पना शीलता की जो रेशमी चादर नुमा काल्पनिकता को अपने काव्य से सजीव बनाने का उपक्रम टोलकिन ने किया उसे सही सही तरीके से समझने के लिये गोस्वामी तुलसीदास की वन्दऊँ सन्त असन्तन चरना का पुनराभ्यास करना होगा। सुपर्णा बनर्जी महाशया Seamless Creation of ‘Other World’ and of a new ‘Elvish’ language its delightfully intricate plot patterns, its humour both dark and light. अगर महाशया सुपर्णा बनर्जी की उक्ति को भारतीय वाङमय के नजरिये से आंका जाये तो उसे केवल विचित्रता वाला काल्पनिक परलोक कहा जा सकता है जो भारतीय वाङमय की शब्द सृजन शक्ति की ध्वन्यात्मकता को संशय की दृष्टि से देखता है जबकि शब्दः खेः पौरूषम् नृषु का गीता वाक्य शब्द की सृजन शक्ति का उद्गाता है इसलिये भारतीय दृष्टिकोण से टालकिन महाशय का मूल्यांकन करने के लिये हमें रोमन लिपि के छब्बीस अक्षरों अथवा अल्फाबेट में जोड़जंतर कर विश्व को तमाम ध्वनियों को रोमन लिपि में संजोया जा सके ऐसी विधा अपनानी होगी जिसे स्वामी विवेकानंद और भक्ति वेदान्त स्वामी ने अपने विचारों को अंग्रेजी भाषा व रोमन लिपि में उतारने के लिये छब्बीसों अल्फाबेट पर अनुस्वार विसर्ग, रेफ तथा जल तुम्बरू न्याय का प्रयोग कर संस्कृत भाषा और रोमन लिपि में प्रस्तुत करने के उपाय अपनाये जिनका उपयोग हिन्द के वे अंग्रेजी भाषायी ज्ञानी भद्रलोक सरासर अनदेखी कर भारत में भाषायी ऊहापोह का वातावरण सृजित कर रहे हैं इसलिये दुनियां के द्विभाषी त्रिभाषी अथवा बहुभाषी राष्ट्र राज्यों में भारत एक ऐसा देश है जहां भाषायी राष्ट्रवाद अपना प्रभुत्व नहीं जमा सका है क्योंकि बहुभाषायी भारत की एकता के सूत्र सांस्कृतिक तथा भू भौगोलिक तीर्थवाद में गुंथे हुए हैं। भारत की इस विशिष्टता का पहले पहल संज्ञान आदि शंकर ने लिया तथा श्रंगेरी, द्वारका, पुरी और बदरीनारायण चार वेदांती अद्वैत स्थलों का श्रीगणेश कर आसेतु हिमाचल को एकाकी मनुष्यता का संघ बना डाला। आदि शंकर के इस प्रयास को स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी तथा एकात्म मानववाद के मसीहा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने अपने तरीके से संवर्धित किया। वैसे हिन्दुस्तान में बंबई भिक्षा एक्ट के तहत भीख मांगना गैर कानूनी है। इस कानून को हिन्द की मौजूदा सरकार बदलना चाहती हैै। अंततोगत्वा श्रमणों की भिक्षा, बटुक द्वारा अपनी मां से भिक्षा लेना और भिक्षा में प्राप्त रकम अपने गुरू के आदेश के मुताबिक अन्य को सौंपना लोकतंत्र या डैमोक्रेसी में वोट भिक्षा एक ऐसा तथ्य है लोकसभा, विधानसभा, ग्राम पंचायत सहित त्रिस्तरीय पंचायत व नगर पंचायत में मतदाता द्वारा उम्मीदवार को वोट भिक्षा दी जाती है इसलिये भिक्षा को गर्हित मानना श्रेयस्कर नहीं है।
टोलकिन के सरस साहित्य तथा दीर्घ जीवन का आनंद रस अगर जातीय मंतव्य से जोड़ कर देखा जाये संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास, भवभूति ने जो कालजयी साहित्य रचा है जिसका अनुशीलन करने से उनके साहित्य का वाचन करने वाला पाठक अपने आपको उस साहित्य में रमा हुआ सा महसूस करता है। जे आर आर टोलकिन के नाम से परिचित विश्व साहित्यकार के बारे में साहित्यिक समालोचना स्तंभ के जरिये भारतीय अंग्रेजी अखबार हिन्दू ने अपने 22 जनवरी 2017 के अंक में एक सौ पचीस वर्ष की उम्र पूरी कर 3 जनवरी 2017 को अपना एक सौ छब्बीसवां जन्मदिन मनाने वाले साहित्यिक मनीषी को हिन्दुस्तानी समाज सोलह कलाओं के अवतार योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण की 125 वर्ष से अधिक जीवनलीला तथा महात्मा गांधी की आकांक्षा कि वे सवा सौ वर्ष जीना चाहते हैं हिन्द के चिंतक समाज के लिये जे आर आर टोलिकिन एक आदर्श हैं। उनके साहित्य के महत्वपूर्ण अंश Hobbit – The Book of lost tales the Lords of Rings अंतर्राष्ट्रीय फैंटैसी अवार्ड उपलब्धकर्ता जिनकी लार्ड्स आफ रिंग्स का अनुवाद विश्व की अढ़तीस भाषाओं में उपलब्ध है। भारत के मानव संसाधन मंत्रालय तथा संस्कृति मंत्रालय सहित भारतीय भाषाओं और भारतीय लिपियों को संरक्षण देने वाले मंत्रालयों को चाहिये कि यदि उपरोक्त 38 भाषाओं भारत की कोई भाषा सम्मिलित नहीं है कम से कम लार्ड्स आफ रिंग्स का अनुवाद भारतीय भाषाओं में संपन्न कराये जाने हेतु भाषायी अनुवादकों को आकर्षित कर प्रोत्साहन दिया जाय जो भारतीय भाषा समृद्धि का पथ होगा।
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