राष्ट्रसंघ महात्मा गांधी के जन्मदिवस 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का शिवसंकल्प वर्षों पहले ले चुका है। राष्ट्रसंघ के एक महत्वपूर्ण श्री मागीयर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जरिये चीन के अथीष्ट या निरीश्वरवादी शास्ता को अहिंसा और सत्याग्रह पर आस्था नहीं है। उसे आतंकवादी तत्त्वों से भी वैश्विक वितृष्णा से परहेज लगातार अफजल गुरू सहित जो आतंकी तत्त्व कश्मीर घाटी में सक्रिय हैं उन्हें चीन आतंकवादी मानने के लिये राजी नहीं है। जब कभी संयुक्त राष्ट्र में यह प्रश्न उपस्थित होता है चीन अपने विशेषाधिकार वीटो शक्ति का प्रयोग कर कश्मीर के आतंकवादियों के हौसले बढ़ाने का उपक्रम करता रहता है। ऐसी स्थिति में भारत और चीन के रास्ते जुदा जुदा हैं परन्तु चीनी उत्पादों का सबसे बड़ा उपयोक्ता भारत का डेमोक्रेटिक समाज है। वह वस्त्र सज्जा तथा अन्य संबंधित उत्पादों को खपाने वाले राष्ट्रों में भारत की स्थिति से इन्कार नहीं कर सकता इसलिये जैसा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जीे ने अभिव्यक्त किया कि स्वदेशी ही चीन के विस्तारवादी जबरन कब्जा करने वाली रणनीति का सामना करने वाला अकेला मार्ग है। यहीं भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज की महत्वपूर्ण भूमिका प्रारंभ होती है सबसे पहले न्यूयार्क में राष्ट्रसंघ के परिसर मंे गांधी के स्वदेशी अभियान, विभिन्न प्रकार के चरखों द्वारा सूत, ऊन, रेशम तथा किन्हीें दो के सान्निध्य से खादी का तानाबाना तैयार करना तथा कबीर के हथकरघा में बुनाई के द्वारा हिन्द का स्वदेशी उत्पाद वातावरण राष्ट्रसंघ के सदस्य राष्ट्रों के संज्ञान में प्रस्तुत कर वस्त्रभूषा तथा पहिरावे के विभिन्न परिधानों के लिये योगमार्ग का अनुसरण करना जिसको परमहंस योगानंद महाराज ने जुलाई 1935 मंे स्वयं वर्धा पहुंच कर महात्मा गांधी को कहा - उनके चरखे, कबीर के करघे में बुनाई, कताई करते समय स्वयं योगाभ्यास हो जाया करता है। यह वही योगाभ्यास है जिसे नैनीताल के संत लीलाशाह महाराज ने सिंध के नानकपंथी आसाराम बापू को अंगुलियों के पोर पर संपन्न होने वाली योगिक क्रिया की दीक्षा दी थी जिसके सहारे आसाराम बापू ने आसेतु हिमाचल अपने अनुयायियों की लंबी कतार खड़ी कर ली। यह तो कर्मानुबंधीनि मनुष्य लोके का कर्मबंध याने Bondage of Karma है जिसे कालांतर में आसाराम बापू के लालच ने उन्हें कहीं का नहीं रखा। आसाराम बापू का सारा व्यापार ध्वस्त होगया पर आसाराम बापू की तरह दूसरा हिन्दुस्तानी कोलकाता से कैलिफोर्निया पहुंचा विक्रम चौधरी का भी वही हाल हुआ जो हिन्द में आसाराम बापू का हुआ इसलिये योगमार्ग का अनुसरण करने वाले हर साधक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह योगमार्ग का दुरूपयोग संपत्ति अर्जन तथा अपने शारीरिक दोषों के संवर्धन में प्रयुक्त नहीं करेगा। केवल सन्यासी ही योगमार्ग का नेतृत्व करने की पात्रता धारक है। हिन्द में इन दिनों योगपथ, योगदिवस तथा नित्ययोग प्रक्रिया का अनुसरण करने वाले लोग व्यक्तिगत तथा सामाजिक स्तर पर योगमार्ग अपना रहे हैं। योगमार्ग पर चलने के लिये योग की मर्यादाओं का अनुपालन अनिवार्य शर्त्त है इसलिये महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह के समय न्यूयार्क स्थित राष्ट्रसंघ परिसर में महात्मा गांधी का स्वदेशी अभियान 150 चरखे, 150 करघे, 150 निटिंग यार्न कातने वाले ऊनी चरखे तथा हाथ बुनाई के जरिये 150 लोगों को हाथ बुनाई की सुविधा उपलब्ध कराना, कत्ती, बुनकरों तथा दूसरे कार्मिक लगातार पांच वर्ष तक सक्रियतापूर्वक राष्ट्रसंघ में कर्त्तव्यरत रहें। हर पांच वर्ष के पश्चात हिन्द से दूसरा दल पहुंचे इस तरह राष्ट्रसंघ में भारतीय विदेश मंत्रालय का महात्मा का स्वदेशी अभियान चलता रहे। कारीगरों, कतकरों, बुनकरों का चयन करते समय देश के प्रत्येक भाग में कार्यरत खादी संस्था या खादी सेवक चुने जायें। समूचे भारत के लोगों का एक लघु भारत संयुक्त राष्ट्र परिसर में स्वकर्त्तव्य का निर्धारण करे। विदेश मंत्रालय राष्ट्रसंघ के समानांतर विश्व के हर देश के भारतीय विदेश मंत्रालय में भी गांधी की स्वदेशी खादी तथा कबीर के करघे का कमाल दिखाना गांधी की 150वीं शताब्दी का 150 वाला आंकड़ा प्रत्येक भारतीय दूतावास में इस तरह स्थापित किया जाये कि आने वाले पांच वर्ष याने प्रधानमंत्री संकल्पित 2022 में हिन्द का स्वदेशी अभियान अपने पूर्ण यौवन में प्रवेश कर देश की कपड़ा संबंधी लोकभावना विश्व के हर देश तक पहंुचाये और स्वदेशी - गांधी के चरखे पर कते, कबीर के करघे पर बुने कपड़े का नया वस्त्र बाजार स्थापित हो। चीन हिन्द सहित दुनियां के देशों में परिधान भूषा व्यापार का जाल बिछाये हुए है। उसका वस्त्र व्यापार उस स्तर का नहीं है जैसे गांधी के स्वदेशी तथा चरखे करघे के उत्पाद विश्व के देशों में हिन्द के हाथ कते, हाथ बुने कपड़े अपनी खास पहचान बना सकते हैं और दुनियां के उन लोगों को जो वस्त्र परिधान के क्षेत्र में संत्रास भोग रहे हैं हिन्द का स्वदेशी वस्त्र अभियान उनके लिये वरदान साबित हो सकता है। संयुक्त राज्य अमरीका के काय चिकित्सक लोग अमरीकी समाज कोे हाथ कते, हाथ बुने सूती परिधान पहनने की सलाह देरहे हैं ताकि उनके कायिक कष्ट निवारण का मार्ग प्रशस्त हो सके। चीन के परिधान उत्पादों में वह शक्ति नहीं है जो भारतीय स्वदेशी हाथ कते, हाथ बुने परिधानों में विद्यमान है इसलिये भी हिन्द की पहली वैश्विक आवश्यकता हिन्द के हाथ कते, हाथ बुने कपड़ों को सामाजिक वरीयता देना है। जिस दिन हिन्द केे हर वैदेशिक भारतीय दूतावास में गांधी का स्वदेशी अभियान अपने पूर्ण वेग से चल निकलेगा विश्व के देशों में हिन्द केे लिये नयी विश्व चेतना का उद्भव होगा। भारत का उद्देश्य अनर्जित धन नहीं केवल अर्जित धन का उपयोग है। चीन के राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग महाशय तािा निरीश्वरवादी चीनी शास्ता समाज यह समझ चुका है कि भारत केे प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी और तिब्बत के चौदहवें दलाई लामा की जो ध्यानसत्ता है उसे चीन नहीं पा सकता। चीन यह मानता है कि दलाई लामा और हिन्द के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की चारित्रिक विशेषता का सामना करने की शक्ति न तो चीनी राष्ट्रपति महाशय जिनपिंग में है न ही देहाती चीन सहित ताइवान, हांगकांग व सिंगापुर के मंदारिन भाषी चीनी देहाती मानसिकता को चीन के वर्तमान शासक रोकने में समर्थ हैं।
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