Tuesday, 27 May 2014

गंगा निर्मला जाह्नवी तोयम्

          
          हिन्दुस्तान में गरीब के स्वाभिमान को स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने गरीब, वंचित को दरिद्रनारायण सम्बोधन देकर गरीब का आत्मसम्मान तब बढ़ाया जब हिन्दुस्तान परवश था, गुलामी के बंधन में था। हिन्दुस्तान की आजादी के पश्चात गांधी से जुड़े अथवा हिन्दुस्तानी पारम्परिकता में पले बढ़े लोग गरीब को हिकारत से नहीं देखते थे। सदाचार व सादा रहनसहन ओढ़ी हुई गरीबी का पर्याय था। महात्मा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारियों की दूसरी व तीसरी पीढ़ी के ... लिये ओढ़ी हुई गरीबी बेमतलब थी। जो शासक वर्ग से जुड़ रहे थे वे स्वयं को जनसामान्य से अलग मान कर चल रहे थे। शासक व शासित में खाई बढ़ती जारही थी। चुनावों का वक्त आते ही उन्हें गरीब की याद आती। उन्हें भरमाने का, उनके वोट हासिल करने का ज्यादातर राजनीतिक समूह मतदाताओं को लुभाते। मुफ्त साइकिल, लैपटॉप, नकदी, सब्सिडी व मदिरा वगैरह का झांसा देते रहते। मतदाता को झांसा देते रहने का यह क्रम पिछले पैंतालीस वर्षों से लगातार चल रहा था। 2014 की सोलहवीं लोकसभा के चुनाव के वक्त मतदाता को सही-सही राष्ट्रीय नेतृत्त्व की पहचान होगयी। अधिसंख्य मतदाताओं ने अपने मन में पक्का इरादा कर लिया कि अबके वह नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को हिन्द राजसत्ता की डोर सौंपेंगे। नरेन्द्र मोदी के हाथ अपने मत की राखी बांध कर भारत का गरीब-गुरबा समाज योगक्षेम की कामना करेगा। 
          भारत की जिस धरती से नरेन्द्र मोदी आते हैं उसे गुर्जर गिरा गुजरात कहा जाता है। वहां नर्मदा नदी, नकुलेश्वर महादेव के तीर्थ पर सागर से मिलाप करती है। सातवें मन्वन्तर के युग में नर्मदा सागर मिलन स्थल जिस भृगुकच्छ अथवा भड़ोंच कहा जाता है वहां हिरण्यकश्यप के प्रपौत्र, प्रह्लाद के पौत्र विरोचन के पुत्र बलि ने यज्ञ किया। वामन नामक वटुक को न्यौता तीन कदम भूमि दान देने का संकल्प कर लिया। दैत्यराजाओं के कुलगुरू शुक्राचार्य ने अपने शिष्य यजमा राजा बलि से कहा - यह वामन छलिया है। इसे भूमि दान देने से इन्कार कर दो। बलि ने अपने गुरू शुक्राचार्य से कहा - मैंने वाक्दान दिया है अतः वचन भंग नहीं करूँगा। नरेन्द्र मोदी भारत की उसी भूमि से आते हैं जहां वचन भंग का दोष स्वीकार नहीं किया जाता, जो बात कही है वह पूरी करनी है। आसेतु हिमाचल सोलहवीं लोकसभा के लिये मतदाताओं को अपनी बात समझाने में पूर्णतया कृतकार्य नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने संसद के केन्द्रीय हाल में निर्वाचित सांसदों के माध्यम से मतदाताओं को वादा किया वे 2019 में अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करेंगे। जो वादे किये हैं उन्हें पूरा करने के लिये ‘अहर्निश सेवामहे’ का व्रत लेंगे। उन्होंने हिन्दुस्तान के गरीबों को यह भी जतलाया कि उनकी सरकार गरीबनवाज सरकार होगी। भारत राज्य सरकार के राष्ट्रपति जी ने श्री नरेन्द्र मोदी जी को प्रधानमंत्री नियुक्त कर उन्हें व मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को शपथ ग्रहण हेतु आमंत्रित किया है। शपथ ग्रहण समारोह जेठ बदी त्रयोदशी सोमवार, अश्विनी नक्षत्र, रक्ष योग, गर करण विक्रम संवत् २०७१, राष्ट्रीय शक संवत् १९३६, राष्ट्रीय ज्येष्ठ ५ तदनुसार अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में ख्याति प्राप्त ग्रेगेरियन कैलेंडर की 26 मई 2014 संभवतः सायं वृश्चिक लग्न (सायं पांच बज कर अढ़तालीस मिनट से आठ बज कर चार मिनट पर्यन्त) संपन्न होगा। 
          स्वांतः सुखाय रघुनाथ गाथा का निबंधन तत्कालीन बोलचाल की भाषा में सृजित कर गोस्वामी तुलसीदास राम कथा को घर-घर, जन-जन तक पहुंचा कर देसी वाङ्मय में राम कथा के द्वारा पराधीनता के दंश को बेअसर कर डाला। तुलसी ने कहा था - ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं’। तुलसी की रामभक्ति ने देश में ऐसा वातायन बना दिया और कह डाला - लगन मुहूरत जोग बल तुलसी गनत न काहि। राम भये जेहि दाहिने सबै दाहिने ताहि।।
भारतवासियों ने नरेन्द्र मोदी को मतदान के द्वारा जो अंतरात्मा वाला मार्मिक समर्थन दिया है वह नरेन्द्र मोदी का सम्बल है। नरेन्द्र मोदी ने शासक दल भारतीय जनता पार्टी व उसके अठाईस दलों के सहयोग से भारत का संघीय शासन सुचारू रूप से चलाने का शिव संकल्प कर लिया है। हिन्दुस्तान का मौजूदा गणतांत्रिक इतिहास केवल चौंसठ की उम्र का है। यह पुरातन देश चतुः षष्ठि कला विद्या भूमि है। चौंसठ कलायें इसके वाङ्मय में हैं। नेतृत्त्व का आत्मविश्वास तथा स्थितप्रज्ञता दर्शनीय है। तुलसी के शब्दों में नरेन्द्र मोदी नेतृत्त्व का भारतीय जनतांत्रिक सुशासन के लिये - ‘अवसि देखिअ देखन जोगू’ उक्ति सटीक लागू होती है।
          श्री गुलजारी लाल नंदा सहित भारतीय प्रधानमंत्री के आसन पर जवाहरलाल नेहरू, लालबहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गांधी, मोरारजी रणछोड़ जी देसाई, चौधरी चरण सिंह, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, इन्द्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी व डाक्टर मनमोहन सिंह चौदह भद्र पुरूष व मातृ शक्ति आरूढ़ हुए। आंकिक गणना में जायें तो गुलजारी लाल नंदा ने दो बार, श्रीमती इंदिरा गांधी चार बार, अटल बिहारी वाजपेयी की तेरह दिन प्रधानमंत्री रहने के साथ-साथ दो अन्य गणनों में प्रधानमंत्री की शपथ ले चुके थे। भारतीय संविधान लागू होने के पश्चात पंडित नेहरू ने तीन बार प्रधानमंत्री की शपथ ली, गुलजारी लाल नंदा ने दो बार, लालबहादुर शास्त्री ने एक बार, श्रीमती गांधी ने चार बार प्रधानमंत्री की शपथ ली। व्यक्तित्त्वों के आधार पर नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भारत के पन्द्रहवें प्रधानमंत्री हैं। डाक्टर मनमोहन सिंह के उच्च सदन सदस्यता सामर्थ्य से प्रधानमंत्री पद की शपथ के साथ लोकसभा का सदन नेतृत्त्व प्रसंग अगर जोड़ दिया जाये भारत की सोलह लोकसभा नेतृत्त्व की गरिमा वाला कर्त्तव्य पथ मई 2004 से मई 2014 तक श्री प्रणव मुखर्जी व श्री सुशील कुमार शिन्दे ने संभाला। भारतीय जनता पार्टी संसदीय दल का नेता चुने जाने के पश्चात नरेन्द्र मोदी बहुमत प्राप्त संसदीय दल के नेता चुने जाने के पश्चात सरकार गठन करने का दावा भारतीय राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करने के लिये विधिक सामर्थ्यवान थे। लोक नेता नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रहित की भावुकतापूर्ण जो अपील उन्होंने की थी - ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की उन्हें जनता जनार्दन ने लक्ष्य की उपलब्धि करायी। यह डाक्टर राममनोहर लोहिय, डाक्टर रघुवीर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, मीनू मसानी व आचार्य जीवतराम  भगवानदास कृपलानी द्वारा पिछली शताब्दी के सातवें दशक के शुरूआत से ही पंडित नेहरू के जीवन काल में ही गैर कांग्रेसवाद की जो मुहिम डाक्टर लोहिया ने पोषित की जिसका आंशिक प्रभाव 1967 में व्यापक प्रभाव 1977 में पड़ा। नरेन्द्र मोदी ने अपने सोलहवीं लोकसभा निर्वाचन अभियान में जनता जनार्दन को जो कहा, जो प्रतिज्ञा की जो वादे किये उनमें महत्त्वपूर्ण वादा कांग्रेस मुक्त भारतीय राजकरण था इसलिये उन्होंने अठाईस सहयोगी दलों को जो स्फूर्तिदायक सम्मान दिया वह नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक सूझबूझ का प्रतीक है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में सर्वशुद्धा त्रयोदशी - तेरस दूसरी मास शिवरात्रि तथा सोमवार ये सब मिलकर भारत के लोकप्रिय - लोकानुरंजन करने वाले शास्ता की सामर्थ्य अर्जित करें। कवि कालिदास ने राजा दिलीप के लिये कहा था कि दिलीप की प्रभावकता को कालिदास ने यह व्यक्त करते हुए सराहा - सः पिता पितरः तासाम् केवलम् जन्म हेतवः। शासक का अकबाल ही उसकी शक्ति है। नरेन्द्र मोदी ने उद्घोष किया कि वे साठ महीना बाद 2019 में अपना रिपोर्ट कार्ड भारत के जन गण मन समुच्चय में पेश करेंगे। 
          यह एक सुयोग वाला संयोग ही है कि भारत की जिस माटी से नरेन्द्र मोदी ने अपने जीवन के तिरेसठ वसंत उतने ही शरद देखे हैं उस सौराष्ट्र काठियावाड़ की उशना-भार्गवः कविः और्व की कर्मभूमि में 2019 संयुक्त राष्ट्र संघ 2 अक्टूबर को हिन्द वासी महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी की ड्योढ़ी शताब्दी - एक सौ पचासवां जन्मदिन मनायेंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ अहिंसा के मसीहा महात्मा गांधी के जन्मदिन को अहिंसा दिवस के रूप में मना रहा है। विश्व के देशों का संयुक्त राष्ट्र गांधी आर्थिकी, गांधी नैतिकी तथा समूचा गांधी साहित्य भारत की सभी लोकभाषाओं के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ के घटक राज्यों की लोकभाषा में भी उपलब्ध किया जाये। माननीय प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र संघ तथा विश्व के सभी देशों में स्थित भारतीय राजदूतावासों में अहिंसा परमोधर्मः के मसीहा गांधी अहिंसा दीर्घा स्थापित करने बाबत सुविचारित निर्णय करने की कृपा करें। समूचे हिन्द की कुटीर ग्रामीण हस्तकौशल हथकरघा हैंडिक्राफ्ट भारत के गांव गांव की उद्यमिता की एक देखने लायक झलक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ में अहिंसा Non-Violence व गांधी आर्थिकी नैतिकी दीर्घा गांधी साहित्य उपलब्ध कराने की तैयारी हो। विश्व देशों में भारत के हर दूतावास में गांधी दीर्घा की झांकी दिखायी जाये। गांधी की खादी यू.पी.ए.1 ने ज्योंही एम.एस.एम.ई. एक्ट 2006 में पारित किया ग्रामीण उद्यमिता और हाथकती एवं हथकरघे में बुनी खादी बन्दी के कगार पर है इसलिये तात्कालिक जरूरत यह है कि माननीय प्रधानमंत्री जी स्माल स्केल मीडियम इन्टरप्राइजेज मंत्रालय से माइक्रोक्राफ्ट उद्यमिता को अलग कर पूर्ववत् अटल जी के प्रधानमंत्रित्त्व काल में तत्कालीन ऐग्रोरूरल इंडस्ट्रीज मिनिस्टर श्रीमती वसुन्धरा राजे ने खादी सहित ग्रामीण उद्योगों को जो बढ़ावा दिया वह पुनः लाया जाये। मझोले उद्योगों व स्माल स्केल इंडस्ट्रीज के औद्योगिक जलाशय में ‘मत्स्य न्याय’ चलता है - बलवान का कमजोर को निगल जाना। गांधी के दरिद्रनारायण को हाथ की कारीगरी के जरिये आजीविका अर्जित करने का साधन माइक्रोक्राफ्ट ही है। मनरेगा योजना सहित गांवों के गरीबों व शहरों के झुग्गी-झोंपड़पट्टी में दिन बिताने वाले सभी सामाजिक अभियंत्रण तथा कमजोर को मदद कराने वाले सभी केन्द्रीय महकमों को महात्मा गांधी आर्थिकी मंत्रालय सृजित कर उससे संबद्ध कर दिया जाये। सोमवार 26 मई को भारत के जन-जन का हित चाहने वाले नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने केन्द्रीय सरकार की बागडोर संभाली है। वे हरेक कदम में सफल हों यह हर भारतवासी की कामना है। हर सोमवार को जल-जंगल-जमीन का पहला प्रसंग गंगा निर्मली करण पर प्रधानमंत्री जी की प्राथमिकता वाला सरोकार चर्चित होगा। यह इसलिये कि पिछले नब्बे वर्षां से राष्ट्रीय भावनाओं को उकेरने वाले अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के नयी दिल्ली संस्करण में सोमवार 19 मई 2014 के दूसरे पृष्ठ में अनुपम त्रिवेदी का रपटनुमा आलेख - Modi faces A Gargantuan task of cleaning Ganga  यूरोपीय वाङ्मय व संस्कृति में गर्गान्तुआनुमा दैत्याकार अवरोध की कल्पना की है तथा अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य का सहारा लेकर कहना चाहा है कि गंगा निर्मलीकरण का नरेन्द्र मोदी संकल्प कठिन डगर है। गंगा निर्मलीकरण 1986 में गठित नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथारिटी सहित नदियों, जंगलों, पहाड़ों, सड़कों, खेत-खलिहानों, भारतीय शहरों के उद्योग केन्द्रों सहित जहां जहां जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण विकराल रूप धारण कर रहा है उसे पारम्परिक हिन्दुस्तानी तौर तरीकों को भी आजमा कर गंगा निर्मलीकरण के संकल्प को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता देते हुए नरेन्द्र मोदी अपार जन सहयोग से पटरी पर ला सकेंगे यही ‘‘तन्मे मनः शिव संकल्प मस्तु’’ आने वाले हर सोमवार को यह ब्लॉगर जंगल(पहाड़), जल(पर्वत नंदिनी नदियाँ), जमीन, नदियों के प्रवाह क्षेत्र से सटी हुई जमीन जिसे हिमालय में बगड़ कहा जाता है इन तीनों को प्रदूषण से छुटकारा कैसे मिले, ‘किं कर्मम् किं अकर्मेति’ अर्थात क्या करना व क्या नहीं करना इस पर हिमकर ब्लॉगर चिन्तन पोखर खड़ा करना अपना राष्ट्र जन कर्त्तव्य मानता है। आगे से हर सोमवार को पोस्ट में ‘गंगा निर्मला जाह्नवी तोयम्’ पढ़ें। 

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