अंग्रेजी भाषा के WATER शब्द के लिये भारतीय वाङ्मय में संस्कृत अंग्रेजी कोशकार वामन सदाशिव आप्टे पुणे महाराष्ट्र के फर्ग्युसन संस्कृत कालेज के प्राचार्य ने 11 जून 1884 को लिखित अंग्रेजी-संस्कृत कोश की भूमिका में व्यक्त किया कि यह कोश केवल संस्कृत अंग्रेजी भाषाओं को पढ़ने वालों को ही नहीं संसार की जनसामान्य को भी लाभदायी होगा। उन्होंने अपने कोश में अंग्रेजी के वाटर शब्द के भारतीय वाङ्मय के मूल स्त्रोत संस्कृत तथा प्राकृत में भी जल के पर्याय क्रमशः अंबु, अंभस, उदक, तोय, वारि, पायस, सलिल, अप और पानीयम् नीर बताये हैं। पानी के भी बारह पर्याय हैं। पानी के पर्यायवाची शब्दों का उल्लेख इसलिये करना जरूरी होगया हिन्दुस्तान टाइम्स के खबरची त्रिवेदी ने गंगा निर्मलीकरण के संकल्प को सोलहवीं शताब्दी में यूरोप के चर्चित दैत्य गर्गान्तुअन सरीखा दुरूह कार्य बताया। उन्होंने यह भी कहा - भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गंगा निर्मलीकरण संकल्प पूर्ति में बाधाओं का ही सामना करना होगा। उनकी सोच है कि गंगा बेसिन प्राधिकरण पिछली शताब्दी के नवें दशक से इस परियोजना पर पिला पड़ा है पर पिछले अठाईस वर्षों में गंगा निर्मलीकरण संकल्प मात्र ही है। अनुपम त्रिवेदी सरीखे पत्रकारों सहित हिन्दुस्तान के कलमजीवी लोगों सेकुलरिज्म की राजनीतिक रोटी सेंकने वाले वे भारतीय विद्वत् जन मोदी विरोध के मानसिक रूग्णता पीड़ित थे। उनमें से एक सरस्वती वरद पुत्र अनंत मूर्ति ने यहां तक कह डाला कि यदि मोदी भारत के प्रधानमंत्री हुए तो वे अपना देश निकाला कर लेंगे। अखबारी खबरों के अनुसार कर्णाटक पुलिस ने उनकी सुरक्षा चौकस-चौबंद कर दी है। अनंत मूर्ति विद्वान व्यक्ति हैं। उन्होंने अपना देस निकाला की जो ध्वनि की उससे हिन्दुस्तान की रामायण काल की वह घटना ताजी होगयी जब गंगा घाटी के कान्यकुब्ज समाज ने राम राज्याभिषेक समारोह का बहिष्कार किया। बहिष्कार का घोष करने वाले ज्यादा लोग विद्वान थे, उन्हें मालूम था कि राजा राम चन्द्र उन्हें देश निकाले का दण्ड भी दे सकते हैं क्योंकि वे सामूहिक तरीके से राज-अवहेलना के दोषी थे। अयोध्या व साकेत के सभी सरयू पारी चाह रहे थे कि राजा राम चन्द्र कान्यकुब्जों को देश निकाला दे दें। राम ने कुलगुरू महर्षि वशिष्ठ से मंत्रणा की और राज्याभिषेक तथा यज्ञ में कान्यकुब्जों के निमंत्रण के बावजूद सम्मिलित न होने को राज-अवमानना नहीं माना। कान्यकुब्जों के बहिष्कार की अनदेखी कर दी। कान्यकुब्जके विद्वत् समाज को अपनी भूल का अहसास हुआ व उन्होंने अयोध्या नरेश राजा राम चन्द्र के राज दरबार में जाकर अपनी सामूहिक त्रुटि के लिये खेद व्यक्त करते हुए रामराज्य की सार्वजनिक प्रशंसा की। उनका अनेकानेक सामूहिक स्तोत्रों सहित जलाभिषेक किया। राजा राम चन्द्र ने वशिष्ठ से योगमार्ग सीखा था। योग वाशिष्ठ कृष्णार्जुन संवाद अष्टावक्र जनक संवाद सरीखा ज्ञान मार्ग था। राम ने अपने राजतंत्र को वशिष्ठ के द्वारा सुझाये गये तरीकों से चलाया। यही कारण है कि आज भी भारत के लोग रामराज्य का उदाहरण देते हैं। जब कभी भारत भूमि में नेक लोग राज करते हैं लोग उस राज्य की उपमा रामराज्य से देते हैं। इसी रामराज्य की कहानी तुलसीदास ने काशी में गायी, जन जन की भाषा में रामकथा लिख कर। वह हिन्दुस्तानियों के मन में बस गये। राम और तुलसी भारत के जन जन के प्रिय होगये।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गंगा निर्मलीकरण अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। वे कहते हैं उन्हें गंगा माता ने ही काशी बुलाया। गंगा निर्मलीकरण का काम तो ऐसा बड़ा काम है जो मिलजुल कर ही संपन्न किया जा सकता है। केवल विशेषज्ञों परियोजनाओं के विश्व की भाषा अंग्रेजी में प्रस्तुत करने से गंगा के किनारे रहने वाले हिन्दुस्तान के नेशनल गंगा बेसिन अथारिटी और गंगा ऐक्शन प्लान तैयार करने वालों के भरोसे रहेंगे तो हालात वही रहेंगे जो 1986 में नेशनल गंगा बेसिन अथारिटी सृजित होने के बावजूद हालातों में अंतर नहीं है। इलाहाबाद जिसे परम्परागत हिन्दुस्तानी प्रयाग कहता है वहां की कवियित्री महादेवी वर्मा का कहना था कि त्रिवेणी संगम में स्नान कीचड़ में नहाने जैसा है। जब महादेवी वर्मा ने यह कहा - तब हिन्दुस्तान परवश था आज हिन्दुस्तान आजाद है। हिन्दुस्तान की सोलहवीं संसद का नेतृत्त्व करने वाले जन नेता नरेन्द्र मोदी ने जो संकल्प किया है कि गंगा निर्मल की जावेगी, वे अपना रिपोर्ट कार्ड 2019 में हिन्दुस्तान की जनता को प्रस्तुत करेंगे।
गौमुख से गंगा सागर तक भागीरथी की अढ़ाई हजार किलोमीटर जल प्रवाह तथा नदी तीरा दांये व बांये दोनों किनारों भागीरथी जल-थल भागीरथी भूमि का निर्धारण नदी के दोनों किनारों की बसासतों द्वारा भागीरथी भू क्षेत्र में गांवों व नगरों के निवासियों द्वारा अतिक्रमण की पहचान के साथ साथ गोमुख से गंगा सागर तक नदी के गर्द, नदी का जल रहित पाट, वर्षा में नदी जल स्तर कहां तक पहुंचता है इस तथ्य का निर्धारण करते हुए गोमुख से गंगा सागर तक प्रशासनिक जनपदों, उप जिलाधिकारी क्षेत्रों/तहसीलों व विकासखंड के ग्राम सभाऐं, क्षेत्र समितियों, उप जिलाधिकारी/तहसील क्षेत्र विभाग, जिला प्रशासक तथा मंडलीय आयुक्त कार्य क्षेत्र प्रत्येक राज्य के लिये सुनिश्चित हों संबंधित घटक राज्यों के गंगा तटीय क्षेत्र में ही राज्य स्तरीय गंगा निर्मलीकरण प्राधिकरण में राज्य के मुख्यमंत्री, संस्कृति मंत्री, पंचायत राज मंत्री, ग्राम विकास व नगर विकास मंत्री, सिंचाई मंत्री, राज्य के गंगा तट वाले सभी सांसद, विधायक, मुख्य सचिव, ग्राम विकास सचिव, नगर विकास सचिव, पंचायत राज सचिव, राज्य स्तरीय गंगा बेसिन प्राधिकरण की अध्यक्षता राज्य के मुख्यमंत्री तथा चीफ इक्जीक्यूटिव, संबंधित राज्य के संस्कृति मंत्री निर्धारित किये जायें। राज्य स्तरीय गंगा बेसिन प्राधिकरण की बैठक वर्ष में 6 बार दो महीने में एक बार संपन्न हों।
भागीरथी उत्तराखंड की उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, देहरादून व हरिद्वार जनपदों में होकर बहती है। देवप्रयाग में भागीरथी का संगम अलकनंदा से होता है। चूंकि अलकनंदा भागीरथी के धरती पर उतरने से पहले से अंतर्तत्त्व में थी और कुमांऊँ तथा गढ़वाल में हर सदानीरा नदी गंगा कहलाती है। अतएव उत्तराखंड व गंग निर्मलीकरण प्रसंग को सदानीरा नदियों के निर्मलीकरण के तौर पर देखे जाने की जरूरत है। उत्तराखंड में नदी तीरों जिसे गढ़वाली व कुमांऊँनी में बगड़ कहते हैं, उत्तरकाशी सहित भागीरथी तटवर्ती बसासतों में जो त्रासद स्थिति उभर रही है उसे एक अलग प्रकरण के रूप में विचारित किये जाने की आवश्यकता यह ब्लॉगर महसूस करता है। उत्तराखंड की सरकार देहरादून से उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व चंपावत जिले जो तिब्बत-नैपाल से भारत की सीमावर्ती क्षेत्र हैं इन जनपदों की यातायात सुविधायें अस्तव्यस्त हैं इसलिये उत्तराखंड सरकार को यह सलाह देने की जरूरत है कि वह राज्य के तिब्बत नैपाल सीमा से सटे जनपदों को भारत सरकार द्वारा केन्द्र शासित प्रदेश घोषित करने की सिफारिश करे। राज्य सृजन के पिछले चौदह वर्ष में राज्य सरकार ने सिडकुल विकास के जरिये केवल तराई-हरद्वार व देहरादून को ही लाभान्वित किया है। तिब्बत-नैपाल से सटे सीमावर्ती क्षेत्र को मेधा व श्रमशक्ति पलायन से बचाने का उपाय केवल इस क्षेत्र को केन्द्र शासित दर्जा देना है।
गंगा निर्मलीकरण के लिये उत्तराखंड के ऋषिकेश और हरिद्वार के दो नागर क्षेत्रों में गंगा को निर्मल बनाने के लिये युद्ध स्तर के श्रम की जरूरत है। गंग नहर सहित हरिद्वार के गंग निर्मलीकरण के लिये केन्द्रीय कृषि मंत्रालय, केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश राज्य के सिंचाई मंत्रालय और कृषि मंत्रालय यह जानकारी उपलब्ध किये जाने की जरूरत है कि गंग नहर का सिंचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश के किस जनपद में कितना है। यह देखने की जरूरत है कि हरिद्वार में गंग नहर में कितना क्यूसेक पानी जारी हो कितना पानी गंगा में छोड़ा जाये। कनखल से लेकर हरिद्वार जनपद के साथ साथ बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमरोहा, बुलंदशहर जनपद के नरौरा क्षेत्र तक गंगा से गाद, सिस्ट तथा अपशिष्ट निकाल कर गंगा जल प्रवाह को गतिमान बनाने के लिये हरद्वार, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमरोहा, बुलंदशहर जिलों के जिला स्तर पर गंग तटवर्ती क्षेत्र में गंग निर्मलीकरण कार्य योजना व तात्कालिक जरूरतों के मुताबिक संशोधित नेशनल गंगा बेसिन अथारिटी का अखिल भारतीय राज्य स्तरीय तथा जनपद स्तरीय स्थल चिह्नित किया जाये।
ज्योंही सोलहवीं लोकसभा अपने विधायी कामकाज के साथ साथ कार्यपालिका मार्गदर्शन के लिये तैयार हो सकती है। लोकसभा स्पीकर महोदय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में लोकसभा के गंगतटीय सभी सांसदों की गंगा निर्मलीकरण सर्वोच्च सत्ताक संसदीय दल गठित कर नेशनल गंगा बेसिन अथारिटी का कायाकल्प से कल्पित किया जाये। प्रधानमंत्री जी ने जो उद्घोषणा गंग निर्मलीकरण हेतु की है उसे क्रियान्विति का आकार दिया जाये। अखिल भारतीय गंगा बेसिन प्राधिकरण के साथ साथ उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा पश्चिम बंग गंगा निर्मलीकरण प्राधिकरण राज्य के मुख्यमंत्री जी की सदारत में गठित हो जिसमें राज्यमंत्रिमंडल के संबंधित मंत्रियों के अलावा गंग क्षेत्र सांसद व विधायक, गंग निर्मलीकरण प्राधिकरण अस्तित्त्व में लाये जायें। भारत राष्ट्र राज्य संवैधानिक दृष्टि से संघात्मक व एकात्मक दोनों का सम्मिश्रण है। घटक राज्यों की जरूरत मुताबिक तथा राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संघात्मक स्वरूप को प्राथमिकता देने की तात्कालिक जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात राज्य के सफल व श्रेयस मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बने हैं उन्हें राजनीतिक दुखती रगों का कटु अनुभव भी है। उनके नेतृत्त्व वैचारिक व सैद्धांतिक मतभेदों के बावजूद संघ सरकार व घटक राज्य सरकारों के मध्य संवैधानिक सेतु निर्माण के समानांतर पानी जैसे जल संसाधन विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर सहमति के बिन्दुओं के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिन्द की राजनीतिक हुंडी के जरिये इस पुरातन देश का कायाकल्प कर सकते हैं। जल तुंबिका न्याय प्रत्येक सोमवार की प्रभाती में पढ़ें।
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