Sunday, 1 June 2014

          
                  
                                           भरत मुनि का ध्वन्यालोक भिन्न रूचिर्हि लोकः रूचि विभिन्नता का उद्घोष करता है। चाणक्य नीति प्रणेता मौर्य साम्राज्य के वास्तुकार आचार्य चणक नंदन विष्णु शर्मा ने पाटलिपुत्र के गांवों में रहने वाले एक ग्वाल बाल चन्द्रगुप्त को मगध का साम्राज्य का प्रधान पुरूष निर्मित कर डाला। चाणक्य ने अपनी नीति वाक्य में कहा - स जातो येन जातेन याति वर्षः राष्ट्र समुन्नितम। चाणक्य की यह उक्ति नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री पर पूर्णतः लागू होती है। इस ब्लॉगर ने पंडित नेहरू को नजदीक से देखा है। नेहरू का सारा साहित्य तथा अखबारों में चाणक्य छद्म नाम से पंडित नेहरू जो लिखते थे वह भी पढ़ा है। वे स्वयं अपनी आलोचना करने वाले अलबेले राजनीतिज्ञ थे। प्रथम सामान्य निर्वाचन 1952 में था। पंडित नेहरू तब 62 वर्ष के थे। उनकी मेहनत और 2014 में नरेन्द्र मोदी की अहर्निश परिश्रमशीलता व भारत के कोने-कोने में जाकर मतदाताओं को जाग्रत करना, इलाहाबाद के फूलपुर निर्वाचन क्षेत्र से जवाहर लाल नेहरू लोकसभा के तीन चुनाव लड़े। भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के कार्यकाल में 14 नवंबर 2014 को पंडित नेहरू की एक सौ पचीसवीं जयंती मनायी जाने वाली है। 
          अखबारों में खबर छपी है कि इंडियन नेशनल कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय पदों से त्यागपत्र दे दिया है तथा संस्कृति मंत्रालय द्वारा गठित जवाहरलाल नेहरू 125वीं जयंती समारोह समिति की सदस्यता से भी अलग रहने का निर्णय लिया है। यह ब्लॉगर लोहियावादी होने के बावजूद जवाहरलाल के साहित्य अध्येता होने के कारण पंडित नेहरू की प्रत्युपन्न मति का हमेशा प्रशंसक रहा है। पंडित नेहरू राजनीतिज्ञ व सामूहिक ईमानदारी के कायल थे। विरोध-विचार ध्यानपूर्वक सुनते थे। आज जो वंशवाद का तमगा जवाहरलाल नेहरू पर भी जड़ गया है वे उसके दोषी तो थे ही नहीं। वंशवाद की प्रक्रिया को तो इंदिरा गांधी के राज में चापलूसी बढ़ जाने के कारण उपजी राजनीतिक विधा है। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की अहर्निश परिश्रमशीलता केवल देश-राष्ट्र के बारे में सोचना तथा चिंतन करने की शैली नेहरू की भी थी। इसलिये नेहरू सवा शताब्दी की आराम हराम है की तर्ज पर देश के भावी कर्णधारों का स्वकर्त्तव्य भाव हो। देश के लिये ही सोचना, देश आगे बढ़ेगा तो मुझे अपने आप बढ़ने का हौसला आयेगा यह नौजवानों के अंतर्मन में पहुंचाने की ऊर्जा भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री में विद्यमान है। विचारणीय बिन्दु यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्रित्त्व काल 2014-2019 के मध्य तीन महत्त्वपूूर्ण आयोजन केन्द्र सरकार को संपन्न करने होंगे। 1. पंडित नेहरू की 125वी वर्षगांठ 14 नवंबर 2014 को 2. श्रीमती इंदिरा गांधी की जन्म शताब्दी 19.11.2017 को तथा 3. महात्मा गांधी की 150वीं जयंती, गांधी ड्यौढ़ी शताब्दी 2 अक्टूबर 2018 से 2 अक्टूबर 2019 तक। श्रीमती सोनिया गांधी ने अपने दिवंगत पति राजीव गांधी के नाना पंडित नेहरू को स्वयं नहीं देखा संभवतः उन्हें समग्र नेहरू साहित्य को पढ़ने का मौका भी व्यस्तता के कारण न मिला हो। चूंकि पंडित नेहरू की 125वीं जयंती समारोहपूर्वक मनायी जानी भारत के व्यापक राष्ट्रीय हित में है। अभी हिन्दुस्तान में कई ऐसे लोग जीवित हैं जिनका व्यक्तिगत संपर्क पंडित नेहरू से रहा है। इसलिये नेहरू स्मारक संग्रहालय व पुस्तकालय तीन मूर्त्ति भवन नयी दिल्ली का उत्तरदायित्त्व संभालने तथा नेहरू सवा शताब्दी भव्य रूप से संपन्न करने के लिये प्रधानमंत्री जी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र यूनियन के अध्यक्ष रहे उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा श्रीमती इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल सहयोगी रहे श्री नारायण दत्त तिवारी से परामर्श कर श्री तिवारी को नयी दिल्ली स्थित नेहरू स्मारक संग्रहालय व पुस्तकालय सहित स्वाधीन भारत को 1946 से 1964 तक अपने चिंतन आराम हराम है के बुलंद उद्घोष सहित पंडित नेहरू व उनके सहयोगियों का जो भगीरथ योगदान आधुनिक भारत के निर्माण में है उसे आने वाले अगले साढ़े पांच महीनों में हिन्दुस्तान की वर्तमान व आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन एक राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण कर्त्तव्य है। नारायण दत्त तिवारी नेहरूवियन चिंतन पोखर हैं। नेहरू युग के जो राजनीतिक सरोकार थे उन्हें नजदीक से अध्ययन करने का अवसर उन्हें मिला है। आचार्य नरेन्द्र देव, अशोक मेहता, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया जैसे चिंतन-मननशील भारतीय नेतृत्त्व  मंडली के निकट संपर्क में रहे नारायण दत्त तिवारी का सहयोग माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी नेहरू सवा शताब्दी, इंदिरा गांधी शताब्दी तथा महात्मा गांधी ड्योढ़ी शताब्दी समारोहों में नारायण दत्त तिवारी की सहभागिता महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है। ज्ञातव्य है कि जब महात्मा गांधी जून 1929 में भवाली कुमांऊँ आये वहां पर्वतीय समाज को संबोधित किया, नारायण दत्त तिवारी अपने पिता श्री पूर्णानंद तिवारी के साथ अपने गांव पदमपुरी से पांच मील पैदल चलकर महात्मा गांधी का दर्शन करने भवाली आये थे तब वे मात्र साढ़े चार साल के बच्चे थे। 
  जहां तक श्रीमती इंदिरा गांधी शताब्दी 19.11.2016 से 19.11.2017 तक मनाये जाने का प्रसंग है। श्रीमती सोनिया गांधी कांग्रेसाध्यक्ष श्रीमती इंदिरा गांधी की पुत्रवधू रही हैं। मुख्य विपक्ष नेत्री हैं। इंदिरा गांधी के व्यक्तित्त्व से प्रभावित रही हैं। राजनीतिक शिष्टाचार के नाते माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्वयं अनुरोध करना चाहिये कि श्रीमती सोनिया गांधी इंदिरा गांधी शताब्दी की प्रमुख हों। भारत में नारी जागरण, नारी उत्थान एवं नारी सशक्तिकरण के जरिये भारतीय राष्ट्र राज्य में मार्कण्डेय ऋषि के कथन - ‘‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’’ के सामाजिक अभियंत्रण के जरिये स्त्रियों व बच्चों से घरेलू हिंसा सहित कार्यस्थल में महिला यौन शोषण, बलात्कार सरीखे कुकृत्य पर सामाजिक सदाचार अभियंत्रण उपलब्धि से घरेलू हिंसा पर कारगर रोक लग सके। जब इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान के अस्तित्त्व को समाप्त कर एक नये राष्ट्र बांग्ला देश के लोगों की नैतिक तथा सैन्य मदद की भारतीय राजनीति के नाड़ी वैद्य अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा कह कर सम्मानित किया। भारत में नवदुर्गा शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री का आयोजन शरद व वसंत में आसेतु हिमाचल होता है। पूर्व में पश्चिम बंग पश्चिम में गुजरात की दुर्गा पूजा तथा गरबा एवं धुर उत्तर कुमांऊँ में गुजरात पद्धति का गरबा वाला नौरता मनाया जाता है। यह नारी शक्ति का ही उद्गान है। 
          महात्मा गांधी ड्यौढ़ी शताब्दी - महात्मा गांधी ने मानव कलेवर 30 जनवरी 1948 को त्याग दिया। वे भारत के जन-जन के बीच अफ्रीका से भारत लौटने पश्चात तत्कालीन भारत का अध्ययन करते रहे। हिन्दू समाज में व्याप्त छुआछूत उन्होंने सबसे पहले क्रम में रख कर मानव मर्यादा व्यक्तिगत रूप से अपने जीवन का प्रथम उद्देश्य माना। कोचरब आश्रम में दूधाभाई के परिवार को आश्रम का हिस्सा बनाया। छुआछूत का कलंक मिटाने के लिये अहर्निश प्रयत्नशील रहे। महात्मा गांधी तेरापंथी जैन मतावलंबी सेठ अंबालाल ने तेरह हजार रूपये चंदा देकर कोचरब आश्रम को गतिशील बनाया। माननीय प्रधानमंत्री जी के लिये सौभाग्य का विषय है कि वे भी गुजराती भाषी हैं। गांधी उपलब्धियों गांधी सरोकारों तथा गांधी आर्थिकी गांधी नैतिकी पर हर भारतीय भाषा में गांधी साहित्य उपलब्ध किया जाना राष्ट्र का गौरव है। गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत पर अनुसंधान की तात्कालिक आवश्यकता है। गांधी प्रणीत नैतिकता ही भारत राष्ट्र का सिर संसार में ऊँचा करा सकती है। इसलिये महात्मा गांधी ड्योढ़ी शताब्दी समारोह मनाने के लिये प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय समिति मुख्यमंत्रियों की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की जाकर संयुक्त राष्ट्र संघ में गांधी आर्थिकी दीर्घा तथा अहिंसा स्तूप भारत के सभी दूतावासों में गांधी आर्थिकी गांधी नैतिकी तथा भारत की लोक भाषाओं का कूट साहित्य व भारतीय वाङ्मय में जो विवेक वर्धक कूटनीतिक साहित्य है उसके लिये School of diplomatic thought in Indian languages स्थापित कर भारतीय भाषाओं रामायण महाभारत सरीखे महाकाव्यों में चर्चित राजधर्म भारतीय भाषायें जिनकी मातृभाषा है, उन्हें Classical Indian Stylish Diplomacy पर पुनराभ्यास शिक्षण सत्र चलाये जायें ताकि देवयानी खोबरागड़े व उनकी गृह सेविका सरीखे विवादों की पुनरावृत्ति न हो। भारतीय विदेश सेवा राजनयिकों को गांधी आर्थिकी गांधी नैतिकी पुनराभ्यास सत्र संकल्पित हो प्रत्येक दूतावास में गांधी-दीर्घा सृजित करने पर सरकार विचार करे। गांधी ड्योढ़ी शताब्दी समारोह के लिये माननीय प्रधानमंत्री जी देश भर के गांधी आर्थिकी प्रमुखों गांधी नैतिक विचार अनुयायियों सर्वोदय पंथियों को भी गांधी ड्योढ़ी शताब्दी 150वीं गांधी जयंती मनाने के लिये संत विनोबा के प्रमुख सहयोगी श्री बाल विजय संयोजक खादी मिशन  को आमंत्रित कर विचार-विमर्श के पश्चात महात्मा गांधी 150वीं जयंती रूपरेखा निर्धारण कर सभी प्रकार के दस्तकारों बुनकरों, कुटीर उद्यमियों व असंगठित देहाती व शहराती दुर्बल कारीगरों को मनरेगा से Skilled Labour के तौर पर जोड़ कर दस्तकारी से जीवनयापन करने वाले हाथ की कारीगरी वाले समूहों का योगक्षेम का रोडमैप सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करें। भारतीय वाङ्मय में ही दस्तकारों की उपलब्धियों और कठिनाइयों का निदान संकल्पित है।

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