रामायण-महाभारत कालीन हिमालय विवेचन
मोहनदास करमचन्द गांधी अपना जन्मदिन प्रतिवर्ष आश्विन बदी द्वादशी को मनाते थे। उन्होंने इस दिन का नाम चर्खा द्वादशी रखा था। आश्विन बदी द्वादशी महात्मा गांधी आविर्भाव दिवस विक्रम संवत् 1926 सौर आश्विन 16 तदनुसार ग्रेगेरियन कैलेंडर मुताबिक 2 अक्टूबर 1869 था। अपने 55 वर्ष पूर्ति पर उन्होंने 24.9.1924 को कदमकुआं पटना में चर्खा संघ संगठित किया। इस वर्ष चर्खा द्वादशी 20 सितंबर 2014 को थी। महात्मा गांधी के जन्मदिन को राष्ट्रसंघ विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है। हिन्दुस्तानी पुरानी सभ्यता के मुताबिक अहिंसा धर्म धारण करने की क्षमता की ऊर्जा को धर्म कहा जाता है। धर्म और अहिंसा भारतीय पारम्परिक दर्शन के मुताबिक पति-पत्नी युगल है। धर्म अहिंसा संतति शांति कहलाती है। विश्व के लोग अनेक दिवस मनाते हैं यथा मदर्स डे, वूमेन्स डे। भारत के लोग भी जवाहरलाल नेहरू की स्मृति में बाल दिवस या चिल्ड्रेन्स डे मनाते हैं। सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में उत्साहपूर्वक मनाते हैं। उत्तराखंड भारत का 29वां घटक राज्य है। इस राज्य के उत्साही पर्यावरणविद् पर्यावरण चिंतन-पोखर 2009 से हिमालय दिवस मनाते आरहे हैं। इस वर्ष उन्होंने हिमालय दिवस 9 सितंबर 2014 को मनाया। उत्तराखंड के सातवें मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत ने घोषणा की कि अगले वर्ष से उत्तराखंड सरकार राजकीय तौर पर हिमालय दिवस मनाने का संकल्प ले चुकी है। बात उत्साहवर्धक है। पर्यावरण चिंतकों के समानांतर अगर घटक राज्य का संचालन करने वाली उत्तराखंड सरकार भी हिमालय दिवस प्रतिवर्ष 9 सितंबर तदनुसार प्रतिवर्ष भाद्रपद सौरमास की चौबीस पैट (प्रविष्टे) को निरंतर मनाना चाह रही है यह उत्तराखंड के मानसखंड हिमालय व केदारनाथ हिमालय का अहोभाग्य कहलायेगा कि वहां की सरकार और लोक हिमालय दिवस का संकल्प लेरहे हैं।
म्यांमार - पूर्ववर्ती वर्मा जिसे भारतीय वाङ्मय ब्रह्मदेश के नाम से पुकारता है वहां हिमालय से निकलने वाली इरावती नदी के उद्गम से लेकर काराकोरम हिन्दूकुश पर्वत तक वर्तमान हिमालय के दक्षिण में ब्रह्मदेश का हिमालयी हिस्सा भारतीय संघ घटक राज्य अरूणाचल प्रदेश क्षेत्रफल 16579 वर्ग किलोमीटर आबादी 1980602 मणिपुर क्षेत्रफल 22327 वर्ग किलोमीटर आबादी 2721756 मेघालय क्षेत्रफल 22429 वर्ग किलोमीटर आबादी 2964007 मिजोरम क्षेत्रफल 21081 वर्ग किलोमीटर आबादी 1091014 त्रिपुरा क्षेत्रफल 10491069 वर्ग किलोमीटर आबादी 3671032 सिक्किम क्षेत्रफल 7096 वर्ग किलोमीटर आबादी 607688 उत्तराखंड क्षेत्रफल 53484 वर्ग किलोमीटर आबादी 10116752 हिमाचल क्षेत्रफल 55693 वर्ग किलोमीटर आबादी 6856509 जम्मू कश्मीर क्षेत्रफल 222236 वर्ग किलोमीटर आबादी 12548926 के अलावा दो हिमालयी सार्वभौम राष्ट्र राज्य नैपाल व भूटान का क्षेत्रफल क्रमशः 147181 वर्ग किलोमीटर आबादी 30430267 व क्षेत्रफल 46500 वर्ग किलोमीटर आबादी 725296 है। उत्तराखंड सरकार ने जो शिवसंकल्प 9.9.2014 को लिया है कि उत्तराखंड सरकार अगले वर्ष से प्रतिवर्ष 9 सितंबर को हिमालय दिवस सरकारी तौर पर मनायेगी।
हिमवर्षा तो यूरोप के आल्प्स में, रूस देश के पूरे साइबेरिया समूचे उत्तरी यूरोप के स्कैंनडेनिवियन देशों में गिरती है। अमेरिका, कनाडा तथा ग्रीनलैन्ड भी बर्फ वाले हैं पर किसी राष्ट्र राज्य में अपनी स्थानीय भाषा में किसी पर्वत को बर्फ वाला पहाड़ नहीं घोषित किया है। केवल हिमालय ही ऐसा पहाड़ है जिसका नाम यथा नाम तथा गुण है। इसलिये उत्तराखंड सरकार को चाहिये कि वह अपने विधान मंडल द्वारा यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से संपन्न कर भारत सरकार से अनुरोधपूर्वक आग्रह करे कि आदिकवि प्राचेतस वाल्मीकि द्वारा रचित वाल्मीकि रामायण में जिन राज्यों, स्थानों, तीर्थों तथा पर्वतों एवं नदियों का उल्लेख हुआ है, सेतुबंध रामेश्वरम् सहित जिसे अंग्रेज इतिहासकार ऐडम्स ब्रिज कहते आये हैं उस पर पौराणिक साहित्य दक्षिण भारत की भाषाओं यथा तमिल, तेलुगु, कन्नड़ व मलयाली में सेतुबंध रामेश्वरम् संबंधी विश्लेषण सहित तत्कालीन भौगोलिक तथा वानस्पतिक-स्थावर-जंगम जीवजगत सहित भारतीय वाङ्मय के संस्कृत तथा प्राकृत एवं देशज भाषाओं में आज जो विमर्श है उसको भी एक आधार मानते हुए रामानंद सागर सृजित रामायण सीरियल व बी.आर. चोपड़ा निर्मित महाभारत सीरियल में जो चरित्र उजागर हुए हैं तत्कालीन भौगोलिक स्थितियां तत्कालीन सामाजिकतायें गणतंत्रात्मक व्यवस्थाओं सहित - विष्णुपुराण ने जिन गंणतंत्र व्यवस्था का उल्लेख मगध और कूर्म (कुमांऊँ) के संदर्भ में किया है मगध के लिच्छिवि गणतंत्र के मुखिया शाक्य राजा शुद्धोधन के घर में गौतम बुद्ध का जन्म हुआ। ब्रह्मवैवर्त, शिव, लिंग, कूर्म, मत्स्य, वाराह, वामन, मार्कण्डेय आदि पुराणों में मानसखंड व केदारखंड के प्रत्येक पहाड़ प्रत्येक नदी प्रत्येक देवस्थल तीर्थस्थल, स्नानस्थल का उल्लेख है। उत्तराखंड सरकार को हिमालय दिवस मनाने के संदर्भ में भारत सरकार से रामायणकालीन तथा महाभारतकालीन भौगोलिक, वानस्पतिक, जलवायु, गणतंत्र अथवा राजतंत्र व्यवस्था सहित उद्यमिता आदि की क्या स्थिति थी ? इसका सार्वदेशिक अनुसंधान करने के लिये इनक्वायरी कमीशन बैठा कर भारत की तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक तथा आजीविका संबंधी विषयों पर खोजपूर्ण गवेषणा का मार्ग प्रशस्त करना चाहिये।
जहां तक उत्तराखंडी हिमालय क्षेत्र का सवाल है कुमांऊँ व गढ़वाल के पूर्णतः पर्वतीय क्षेत्र क्रमशः उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, रूद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल तथा देहरादून जिले के पर्वतीय क्षेत्र के गांव-गांव की स्थितियों का अनुसंधान संबंधित पुराणों में वर्णित हिमालय क्षेत्रों संबंधी विवेचनाओं में उपलब्ध है। अल्मोड़ा जनपद में एक सबडिवीजन का नाम बारामंडल है, यह शब्द वराहमंडल का अपभ्रंश है। देवीधुरा में प्रतिवर्ष बग्वाल कौतिक मनाया जाता है। जरूरत इस बात की है कि वाराहपुराण में वर्णित वाराहमंडल के प्रत्येक गांव, नदी, जलागम का उल्लेख है देवीधुरा के वाराही देवी के मंदिर में जो शक्तिस्थल है उस पर अन्वेषण कर पूरे बारामंडल क्षेत्र को सांस्कृतिक उन राज्यों के समानांतर आर्थिक समृद्धि के मार्ग की ओर मोड़ा जा सकता है। इसी तरह कूर्मपुराण व मत्स्यपुराण ये दोनों पुराण कुमांऊँ से संबंध रखते हैं। उत्तराखंड सरकार भारत सरकार से अनुरोध करे कि जहां-जहां शिलालेख, ताम्रपत्र व गुफाओं में भित्ति चित्र हैं उनका विज्ञान सम्मत अध्ययन किया जाकर उत्तराखंड के प्रत्येक गांव, नदी, पहाड़ को आस्थामूलक पर्यटन का क्षेत्र बनाया जा सकता है। जो व्यक्ति, संस्थायें, स्कूल-कालेज एवं महाविद्यालय तथा उत्तराखंड के विश्वविद्यालय अध्ययनार्थ क्षेत्रों का चयन करें, स्थानीय साहित्य में वर्णित विशेषताओं का विवेचन कर प्रत्येक गांव को ऐतिहासिक दृष्टि से उसकी महत्ता को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
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