उत्तराखण्डी 86 या 89
नागर क्षेत्र भूमि प्रबन्धन एवं वर्षा जल संचयन
भारत सरकार देश में 100 स्मार्ट सिटी आने वाले समय में विकसित करने का संकल्प करती है। आबादी के नजरिये से उत्तराखंड एक करोड़ से ज्यादा भारतीयों का रिहायशी इलाका है। इसका क्षेत्रफल 53,482 वर्ग किलोमीटर है। भारतीय संघ राज्य का क्षेत्रफल 32,87,240 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल के नजरिये से उत्तराखंड भारत का साठवां हिस्सा बनता है पर आबादी की दृष्टि से उत्तराखंड की आबादी भारत राष्ट्र की आबादी का एक सौ इक्कीसवां हिस्सा है। उत्तराखंड में नागर क्षेत्र ¼Urban areas such as Nagar Parishad, Nagar
Panchayat, Nagar Palika and Nagar Nigam½ ताजा उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार 86 है संभवतः राज्य सरकार ने तीन अन्य नागर क्षेत्रों की घोषणा की है। नागर क्षेत्रों का उत्तराखंड राज्य की भू भौगोलिक स्थिति के अनुसार क्रमशः 1. नदी के किनारे वाले हर यथा हरिद्वार, ऋषिकेश, उत्तरकाशी, देवप्रयाग, श्रीनगर, रूद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली, धारचूला, टनकपुर, बागेश्वर, कपकोट, चिन्यालीसौड़, लोहाघाट आदि 2. पर्वतों व पठारनुमा पर्वतीय ढलानों पर स्थित शहर यथा नैनीताल, अल्मोड़ा, मसूरी, नरेन्द्र नगर, रानीखेत, पिथौरागढ़, मुनस्यारी, डीडीहाट, चंपावत, गोपेश्वर, जोशीमठ आदि 3. रूड़की, रूद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी, खटीमा, बाजपुर, किच्छा, गदरपुर, लक्सर सरीखे शहराती इलाके जो तराई मेंं हैं 4. दून घाटी के देहरादून, हरबर्टपुर, विकासनगर, कालसी सरीखे शहराती क्षेत्र। इन चारों प्रकार के नागर क्षेत्रों की भूमि, जल संबंधी प्रकृतियां एक दूसरे से पर्याप्त भिन्न भिन्न हैं इसलिये उत्तराखंड के सभी नवासी नागर क्षेत्रों के लिये एक पैमाना उपयोग में लाना अव्यवहारिक होगा। इन सभी नवासी नागर क्षेत्रों की भूमि की नापजोख, भूमि का स्वामित्त्व व्यक्ति अथवा संस्थान उत्तराखंड सरकार के नगर-विकास विभाग अथवा स्थानीय स्वशासन विभाग Local
Self Government particularly Urban Areas की जमीन की नापजोख, जमीन का नक्शा, जमीन का कानून सम्मत स्वामित्त्व, नजूल गूंठ की जमीनें जो शहराती क्षेत्रों के अंतर्गत हैं, जिन शहरों में वक्फ संपत्तियां हैं उनका वर्तमान प्रबंधन, हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे शहरों में आस्थामूलक विभिन्न संस्थाओं के कब्जों की भूमियां Working
group for the identification of Urban Land owned by Individuals, Trusts,
Institutes, Goonth Land etc. जिसके लिये पूर्व अमीनों, अमीनों से पदोन्नत पटवारी, पेशकार, कानूनगो व नायब तहसीलदार तक के अराजपत्रित अधिकारियों के पद से सेवानिवृत्त तथा उन प्रमोटी तहसीलदारों के पद से सेवानिवृत्त हुए जो शहरों में रहते हैं स्वस्थ्य हैं Urban
Land identification and creating Urban Development Roadmap of Uttarakhand के लिये मुख्यमंत्री द्वारा संकल्पित प्रभावकारी जमीन बन्दोबस्त में सहयोग देना चाहते हैं उनका सहयोग लेकर उन्हें वाजिब मानदेय देते हुए शहरी जमीन का चिह्नांकन - गांवों, पंचायती जंगलों तथा जंगलात की भूमि आगणन से ज्यादा सरल है।
शहरी जमीन प्रबंधन के समानांतर सभी 89 शहरी क्षेत्रों में तत्काल Rain
Water Harvesting Management System शुरू करने की जरूरत है। जो संपन्न लोग अपने मकान या मकानों में Rain
Water Harvesting System स्वयं शुरू करना चाहते हैं उन्हें नागर क्षेत्र Rain
Water Harvesting Management System से अवगत कराया जाना चाहिये। प्रत्येक नागर क्षेत्र में नगर पालिका के अंतर्गत Rain
Water Harvesting Management Board सृजित किया जाये।जो मकान मालिक Rain Water Harvesting का पचड़ा खुद नहीं करना चाहते उनसे निर्धारित राशि जमा करा कर उन्हें Rain
Water Harvesting सुविधा उपलब्ध करायी जावे। जो गरीब मकान मालिक एकमुश्त राशि जमा कराने की वित्तीय क्षमतावान नहीं हैं उन्हें नगर परिषद Rain Water Harvesting सुविधा उपलब्ध करा कर 36 से 48 माहवारी किश्तों में वसूली कराये। नगर पालिका क्षेत्र में कोई भी मकान बिना Rain
Water Harvesting System के न रहे। राज्य सरकार संबंधित नगर पालिका नगर परिषद आदि को Rain Water Harvesting System Development के लिये 6.25 लाख का RWHSD निधि स्थायी निधि के रूप में उपलब्ध कराये। उत्तराखंड सरकार प्रत्येक नगर क्षेत्र की जल वितरण व्यवस्था जल निगम व जल संस्थान से वापस लेकर नगर परिषद व नगर पंचायत को हस्तांतरित कर नागर जल वितरण व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरूआत करे। उत्तर प्रदेश से राज्य गठन सौगात में मिली जल निगम जल संस्थान व्यवस्था उत्तराखंड में एकदम विफल है। जल निगम जल संस्थान के कायाकल्प का विषय अलग महत्त्व रखता है। शहरों की जल वितरण व्यवस्था नगर निगम आदि को ही संपन्न करनी चाहिये। भले ही जल निगम अथवा जल संस्थान से जल उपलब्धि का नक्शा अलग से बनाया जाये। संविधान संशोधन 73वां व 74वां के अंतर्गत भी गांव पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों तथा जिला पंचायतों को सामर्थ्यवान् बनाने एवं नगर क्षेत्रों को राज्य सरकार के संगठनों का मातहत रखने के बजाये शहरों की स्वायत्तता नगर पालिका आदि का संवैधानिक अधिकार है उसमें जल निगम जल संस्थान और प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशालय का दखल समस्याओं को बढ़ाता है। उनका समाधान नहीं करता। इसलिये नगर निगम सहित सभी नगर पालिका नगर पंचायतों व नगर परिषद को नगर प्रबंध में स्वायत्तता उपलब्ध करने से राज्य सरकार की पकड़ ज्यादा मजबूत होगी।पूर्ववर्ती ब्लाग में जिस उच्चसत्ताक जमीन बंदोबस्ती पड़ताल आयोग की चर्चा की गयी है उसके High Power Uttarakhand Land Settlement and Land
Development Enquiry Commission उत्तराखंड के शहरी हलकों का भी कायाकल्प किया जा सकता है। उत्तराखंड सरकार को चाहिये कि कम से कम तीन स्मार्ट सिटी परियोजनायें मिलें जिनमें एक हरिद्वार देहरादून रोड के बीच दूसरी कालाढूंगी कोटाभाबर के बीच व तीसरी टनकपुर सूखीढांग के बीच संकल्पित की जाये।
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