लैटिन, संस्कृत, रूसी, जर्मन भाषाओं की शब्द सृष्टि
भारतीय केन्द्रीय , विद्यालयों ने विदेशी भाषा की जगह संस्कृत पढ़ाने के मानव संसाधन मंत्री के फैसले से जर्मनी की चांसलर अंगेला मर्केल महाशया ने भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी का जी-20 सम्मेलन के वक्त ध्यानाकर्षण ब्रिसबेन में रविवार 16 नवंबर 2014 के दिन किया। यह दिन मासानाम् मार्गशीर्षोहम् अगहन का महीना था और रविवार, दिन संक्रांति था। प्रधानमंत्री बच्चों को ज्यादा से ज्यादा भाषा सीखने व सिखाने के पक्षधर हैं। भारोपीय (Indo-European) भाषाओं में संस्कृत, लैटिन, रूसी तथा जर्मन भाषाओं का जहां तक सवाल है, रूसी भाषा का जहां तक संबंध है रूस शब्द संस्कृत के ऋषि शब्द का तद्भव है। इसी प्रकार जर्मन शब्द संस्कृत के शर्मन् शब्द का तद्भव है। विश्व का भाषायी तत्त्व बोध जानने के लिये पहली जरूरत यह मालूम पड़ती है कि संस्कृत, लैटिन, रूसी व जर्मन भाषाओं के विभिन्न शब्द धातुओं का भाषा वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाये। यूरोप की भाषाओं में यूरोपीय देशों में जर्मन व फ्रेंच का वर्चस्व है। यूरोप के किसी देश में चले जाइये वहां अगर आप जर्मन या फ्रेंच में वार्ता करेंगे तो दिक्कत नहीं आयेगी। भारतीय भाषा वैज्ञानिक शिरोमणि प्रोफेसर सुनीति कुमार चाटुर्ज्या व डाक्टर हेम चंद्र जोशी ने भाषा विज्ञानी के नाते भारत की संस्कृत प्राकृत शब्द संरचना यूरोप पहुंच कर किस तरह उच्चारित होने लगी। दस दिशाओं में ईषाण, पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य तथा उत्तर अन्तरिक्षस्थ इन आठ दिशाओं के साथ ऊर्ध्व अंतरिक्ष का केन्द्र तथा अधः पाताल ये दस दिशायें हैं। रूस या रसिया का उच्चारण रूसी भाषा में संस्कृत शब्द ऋषि के किस रूप में है ? टालस्टाय ने जो पत्र महात्मा गांधी को लिखे उनमें उन्होंने ‘हिन्दू’ शब्द का भी प्रयोग किया। इसी तरह जर्मनी देश जिसका संस्कृत रूपांतरण शर्मणी है आज भी जर्मन लोग ‘स्वस्तिक’ चिह्न का प्रयोग करते हैं। जर्मनी के गिरिजाघरों में जो प्रार्थना बाइबिल प्रणीत जो ईश वंदना की जाती है उसका स्वरूप सामवेदमय है। इसलिये भाषायी सौमनस्यता के लिये संस्कृत, रूसी, जर्मन इन तीन भाषाओं का साझा शब्दकोष एवं इन तीनों भाषाओं में पर्यायवाची शब्द श्रंखला तथा शब्द सृष्टि को भाषायी नजरिये से पुनर्भाषित करने की तात्कालिक जरूरत महसूस होती है। भारत सरकार को चाहिये कि वह केन्द्र सरकार में सभी 22 भारतीय भाषाओं सहित संस्कृत से प्रभावित इतर विश्वभाषाओं का स्वीकृत ज्ञानकोष निर्मित करने का निश्चय करे। शुरूआत जर्मन भाषा से की जाये। संस्कृत भाषा के अमरकोश मेदिनीकोश सहित संस्कृत पर्यायवाची शब्दों तथा जर्मन पर्यायवाची शब्दों को क्रमशः जर्मन भाषा की लिपि रोमन तथा संस्कृत भाषा के लिये नागरी में इस प्रकार संयोजित किये जायें कि भाषा सीखने वाला व्यक्ति यदि जर्मनभाषी है उसे संस्कृत पर्याय मिलें, यदि वह संस्कृत अथवा संस्कृत तद्भव भाषी है भारतीय उसे जर्मन भाषा सीखने में सहायता मिले। जहां तक भारत की संस्कृत तद्भव भाषाओं का प्रश्न है नागरी लिपि उपयोग करने वाली भारतीय तद्भव भाषाओं में हिन्दी (अवधी व ब्रजभाषा के साथ-साथ कबीर की सधुक्कड़ी अथवा रेखता खड़ी बोली या दखिनी) के अलावा नैपाली, मैथिली, भोजपुरी, वज्जिका, अंगिका, छत्तीसगढ़ी, अर्धमागधी, डिंगल या राजस्थानी-मारवाड़ी, हरयाणवी, डोंगरी, कांगड़ी, गढ़वाली, कुमांऊँनी की भी लिपि नागरी ही है। भारतीय इतर तद्भव भाषाओं में पंजाबी, गुजराती, कन्नड़, मलयाली, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बांग्ला, असमी, मणिपुरी या मैइती, नागालैंड सहित मिजोरम, मेघालय की भाषायें तो हैं पर लिपि मान्य नहीं है।
चांसलर अंगेला मर्केल महाशया ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का ध्यानाकर्षण सही प्रसंग में किया। कांग्रेस मुक्त भारत के पहले प्रहरी डाक्टर राममनोहर लोहिया ने भारत में अपनी पढ़ाई पूरी करने के पश्चात विलायती विश्वविद्यालयों से डाक्टरेट लेने के बजाय तीन महीने जर्मन भाषा सीखी और बर्लिन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में जर्मन माध्यम से अनुसंधान कर डाक्टरेट प्राप्त की। बर्लिन विश्वविद्यालय संसार का एकमात्र विश्वविद्यालय है जहां संस्कृत, वैदिक संस्कृत, व्याकरण सहित संस्कृत भाषा की पूर्ण शिक्षा का प्रबंध है। ऋग्यजु, साम व अथर्ववेद सर्वप्रथम जर्मन भाषा में ही अनूदित हुए। बर्लिन विश्वविद्यालय ने पर्वतों का पक्षियों की भांति उड़ कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने संबंधी गुरूतर गवेषणा श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के छिहत्तरवें व सतहत्तरवें अध्याय शाल्व युद्ध का वर्णन आता है।
शिलादु्रमाश्चाशनयः सूर्या आसार शर्करा, प्रचण्ड चक्रवातेऽभूद् रजसाऽऽच्छादिता दिश।
बर्लिन विश्वविद्यालय के संस्कृत-विज्ञान शोध संकाय ने निष्कर्ष निकाला कि पूर्वकाल में पहाड़ पक्षियों की तरह उड़ते थे। वज्री इन्द्र ने पर्वतोेें के पंख काट कर उन्हें स्थावर बना डाला। जंगम पर्वत स्थावर होगये। बर्लिन विश्वविद्यालय सहित नासा जो अनुसंधान कर रहा है भारत की नई सरकार की भारतीय पुराणेतिहास क्षेत्र में नई पहल कर जर्मन सरीखी भाषाओं का संस्कृत सरोकार उसी तरह संपन्न करना चाहिये जिस तरह आदि शंकर ने स्मार्त स्मृति के आधार पर स्थापित ज्ञानशलाका को आधुनिक संसार से उसी तरह जोड़ना चाहिये जिस तरह स्वामी विवेकानंद ने वेदांत तत्त्व सार अद्वैत का प्रतिपादन किया। इसलिये चांसलर अंगेला मर्केल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का ध्यानाकर्षण कर भारत की भाषायी आवश्यकता को संबल दिया है। भारत में जहां जहां संस्कृत विश्वविद्यालय हैं उन सभी विश्वविद्यालयों में तिब्बती, रूसी तथा जर्मन भाषायें पढ़ाये जाने का उपक्रम जितनी जल्दी शुरू किया जाये उतना अच्छा है। भारत में जर्मन व रूसी दूतावासों में जर्मन भाषा तथा रूसी भाषा एवं संस्कृत भाषा का आदान प्रदान एक सामयिक जरूरत है। केन्द्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा शिक्षण का जो प्रबंध मानव संसाधन मंत्रालय ने बदल कर वहां संस्कृत पढ़ाये जाने का जो संकल्प लिया, जर्मन सरीखी महत्त्वपूर्ण यूरोपीय भाषा के लिये महाशया मर्केल ने जो प्रकरण उठाया वह वास्तव में भारत के अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्र हित का सरोकार है। जर्मनी की संस्कृति, जर्मन सभ्यता तथा जर्मन आचार विचार में प्राचीन भारतीय संस्कृति का व्यापक प्रभाव है उस विश्व बंधुत्त्व की व्यापकता को ख्रिस्ती मतावलंबिता व भारत की सनातनता को शाश्वत स्वरूप प्रदान करने वाला स्त्रोत अद्वैत मार्ग है जिसका सूत्रपात तो आदि शंकर ने किया उसे स्वामी विवेकानंद और भक्तिवेदांत स्वामी के ज्ञान मार्ग ने विश्व में भारत के औपनिषदिक ज्ञान पथ को प्रशस्त किया। इसलिये महाशया मर्केल ने जो प्रश्न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संज्ञान में प्रस्तुत किया उसे भारत मैकाले सभ्यता के प्रचण्ड प्रसार की गति को रोकने में सहायता करने वाला राखी के धागे के रूप में देखा जाना चाहिये। यूरोप की भाषाओं में अंग्रेजी का प्रभुत्त्व तो है ही फ्रेंच तथा पुर्तगाली इन दो यूरोपीय भाषाओं का प्रभाव भी भारत में यत्र तत्र रहा है। अरविन्द घोष का महाकाव्य सावित्री मूलतः फ्रेंच भाषा में है इस साहित्य के बारे में कनाडा व संयुक्त राज्य अमेरिका में यह धारणा जोर पकड़ रही है कि आने वाला युग सावित्री महाकाव्य का है। भारत में मातृत्त्व तीन शक्तियां हैं पहली गायत्री जो व्यक्ति को व्यक्तित्त्व देने वाली माता है। दूसरी शक्ति सावित्री है जो सविता देवता की शक्ति है। हिन्दुस्तानी मानस सावित्री के पितामही या दादी के रूप में देखता है। तीसरी शक्ति सरस्वती है जो व्यक्तित्त्व परदादी प्रपितामही है। गायत्री सावित्री तथा सरस्वती की यह त्रिवेणी भारतीय मातृशक्ति की नांदीमुख है। पिता दादा परदादा जहां पुरूष नांदीमुख है नाना परनाना बूढ़े परनाना सहित छह पुरूष नांदीमुख हैं। मां दादी परदादी के समानांतर नानी परनानी बूढ़ी परनानी ये छह शक्ति नांदीमुखा हैं। इस प्रकार जीवात्मा मनुष्य या मानुषी पुरूष या स्त्री को जीवन शक्तिदायिनी नांदीमुख के बारह अवतार हैं। जर्मन भाषा व संस्कृत सहित तद्भव भारतीय भाषाओं में उस तादात्म्यता की तात्कालिक आवश्यकता है जिससे जर्मन संस्कृत तथा भारतीय भाषाओं का तद्भव आत्मा को ‘‘शब्द खेः पौरूषम् नृषु’’ भागवद्गीता का शाश्वत संदेश मिलता रहे।
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