बोरारौ घाटी% मुख्यमंत्री रावत रावत जी की 758वीं घोषणा
इस ब्लागर को गांधी आश्रम चनौदा अल्मोड़ा के संचालक सह-अध्यक्ष खादी सेवी पीतांबर भट्ट ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री महोदय की घोषणा संख्या 758 वर्ष 2014 दिनांक सितंबर 2 वर्ष 2014 के बारे में बताया कि मुख्यमंत्री रावत जी ने कहा कि वे बोरारौ घाटी के एक अति महत्त्वपूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने वाले श्री गांधी आश्रम चनौदा के हालात सुधारने के लिये प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अपनी कटिबद्धता - रोजगार उपलब्ध कराने की घोषणा को मूर्तरूप देने के लिये कमर कस ली है। तात्कालिक सार्थक प्रयास करने का संकल्प वे लिये हैं। कोसी के दांये तट पर अवस्थित गांधी आश्रम महात्मा गांधी के अग्रचारी प्रतिनिधि श्री शांतिलाल त्रिवेदी की कर्मभूमि रहा है। शांतिलाल त्रिवेदी जिन्हें कुमांऊँ के लोग शांति भाई के नाम से जानते थे, महात्मा गांधी की कुमांऊँ यात्रा से दस महीने पहले अगस्त 1928 में अल्मोड़ा आये थे। अल्मोड़ा डिस्ट्रिक्ट बोर्ड ने शांतिलाल त्रिवेदी को ऊन कताई, हथ कते ऊन की हथकरघा बुनाई तथा हाथ बिनाई को प्रोत्साहित करने के लिये 1928 में ही ऊनी कारोबार संचालक नियुक्त किया। शांतिलाल त्रिवेदी ने लगातार पंद्रह वर्ष तक ऊन कताई बुनाई का संचालन अल्मोड़ा डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के एजुकेशन कमेटी के तत्त्वावधान में किया। 1929 में जब महात्मा गांधी अल्मोड़ा पधारे तो अल्मोड़ा म्यूनिसिपल बोर्ड के अध्यक्ष फादर ओकले ने धाराप्रवाह हिन्दी में महात्मा गांधी का अभिनंदन किया। फादर ओकले हेनरी रामजे हाईस्कूल अल्मोड़ा में अंग्रेजी के अध्यापक भी थे। महात्मा गांधी फादर ओकले और विक्टर मोहन जोशी की भारतीय वाङ्मय भावना से इतना प्रभावित थे कि उन्होंने फादर ओकले से कहा - कांग्रेस अध्यक्ष पंडित मोतीलाल नेहरू को अपने अदालती कामकाज में सहायता देने वाले स्टेनो की जरूरत है। फादर ओकले ने अपने प्रिय शिष्य शिव दत्त उपाध्याय का नाम सुझाया। महात्मा जी ने शिव दत्त उपाध्याय से बातचीत की और उन्हें पंडित मोतीलाल नेहरू का स्टेनो तय कर दिया गया। शांतिलाल त्रिवेदी महात्मा जी के साथ साथ कर्त्तव्यपूर्ति करते रहे। उन्होंने पौढ़ी व अल्मोड़ा जिलों के नौ हजार गांवों में ऊन कताई, हाथ कते ऊन की हथकरघा जिसे कुमांऊँनी रांच कहते हैं उसमें बुनाई तथा हाथ बिनाई के लिये निटिंग यार्न कताई के जरिये अल्मोड़ा तथा पौढ़ी दो जिलों के नौ हजार गांवों में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के शिक्षा समिति के तत्त्वावधान में संपन्न किया। सभी लोअर प्राइमरी, अपर प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में चर्खा व तकली कताई का अभ्यास कराने वाले शांतिलाल त्रिवेदी तत्कालीन अल्मोड़ा जिला जिसे अब अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व चंपावत के नाम से जाना जाता है, नैनीताल के छःखाता परगना तथा तत्कालीन ब्रिटिश गढ़वाल के वर्तमान पौढ़ी गढ़वाल, रूद्रप्रयाग और चमोली जिले, शांतिलाल त्रिवेदी के कार्य क्षेत्र थे। उन्होंने पंद्रह हजार मील पैदल गांव-गांव घूम कर वर्तमान उत्तराखंड राज्य के पांच जनपदों को माइक्रो क्राफ्ट हब बना डाला। हिन्दी लेखक वैष्णव लिखते हैं कि उन्होंने शांतिलाल त्रिवेदी को पहले पहल मिडिल स्कूल सोमेश्वर बोरारौ घाटी में देखा जब वे सातवीं कक्षा में पढ़ते थे। यद्यपि इस ब्लागर की मुलाकात शांतिलाल त्रिवेदी से नहीं हुई। इस ब्लागर ने 1940 से 1945-46 तक लोअर प्राइमरी, अपर प्राइमरी व वर्नाक्यूलर मिडिल स्कूल में अपनी शिक्षा के दौरान बारह पंखियों का ऊन कात कर अपने गांव के नजदीक दुनखोला गांव के निवासी स्वातंत्र्य वीर प्रयाग दत्त जोशी से रांच में पंखियां बुनवाईं। एक पंखी में बारह आने की डेढ़ सेर ऊन तथा ऊनी तागे की पंखी बुनाई बारह आने कुल मिला कर 1946 तक डेढ़ रूपये में एक पंखी तैयार हो जाती थी। शांतिलाल त्रिवेदी ने हैंड निटिंग पर भी जोर दिया। अगस्त 1935 में परमहंस योगानंद सेवाग्राम में महात्मा गांधी से मिले थे। जब उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई तो उन्होंने कहा - तकली व चर्खे पर कपास या ऊन कताई से अंगुलियों के पोर स्पर्श का महत्तम योग अपने आप काम करते करते होता है। हाथ बिनाई भी अंगुलियों का योग मार्ग है। हाथ का परिश्रम और योग साथ साथ निर्वाह होते हैं। डिस्ट्रिक्ट बोर्ड अल्मोड़ा के अंतर्गत ऊनी कताई बुनाई संचालक का उत्तरदायित्त्व संपन्न कर ऊनी कारोबार का जो ढांचा शांतिलाल त्रिवेदी के स्कूलों के जरिये खड़ा किया। उन्होंने कोसी के दांये किनारे पर स्थित चनौदा में कताई-बुनाई के काम को अंजाम दिया। चनौदा में शांतिलाल त्रिवेदी को चन्द्रवल्लभ बुद्धिवल्लभ जोशी बंधुओं ने भू भवन व्यवस्था उपलब्ध करायी। डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के सुसंगठित ऊनी कारोबार के अलावा बोरारौ घाटी के गांवों में बागेश्वरी ऊनी चर्खा, तकली व रांच में ऊनी तागा बुनाई के काम को भी शांतिलाल त्रिवेदी ने अंजाम दिया। शांतिलाल त्रिवेदी की सामाजिक उपादेयता को पंडित नेहरू ने तब पहचाना जब उन्होंने शांतिलाल त्रिवेदी से कहा - शांतिलाल अस्कोट के रजवार द्वारा अपने खाय कर सिरतानों का जो शोषण होरहा है उसकी आंखों देखी रिपोर्ट बना कर मुझे दो। अस्कोट के रजवार की रियायत गांव गांव घूम कर तल्ला अस्कोट मल्ला अस्कोट के हर एक गांव की किसानों की दुर्दशा का आंखों देखा लेखा जोखा तैयार कर शांतिलाल त्रिवेदी ने पंडित नेहरू को भेजा। पंडित नेहरू ने अपने अखबार नेशनल हेरल्ड में बर्तानी राज की पोल खोलने वाला कच्चा चिट्ठा आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। पंडित नेहरू की कृति - डिस्कवरी आफ इण्डिया में कुमांऊँ को भारतकारी का रोजनामचा कुमांऊँनी संस्कृति के सुनहले अक्षरों में डिस्कवरी आफ इण्डिया के अस्कोट टू चौकोट के शीर्षक से उपलब्ध है।
पंडित नेहरू ने मेरठ में स्वतंत्रता सेनानी चौधरी रघुवीर नारायण त्यागी के सौमनस्य पूर्ण सहयोग के जरिये फरवरी 1929 में गांधी आश्रम गढ़ रोड मेरठ की स्थापना की। पंडित नेहरू शांतिलाल त्रिवेदी व उनकी धर्मपत्नी भक्ति त्रिवेदी की कर्मठता के प्रशंसक थे जिन्होंने राजकोट से अल्मोड़ा आकर सामाजिक कार्य का नया आदर्श प्रस्तुत किया। राजकोट सौराष्ट्र में 1905 में जन्मे शांतिलाल त्रिवेदी किशोरावस्था में ही महात्मा गांधी के कोचरब आश्रम साबरमती आश्रम से जुड़ गये थे। 1918 से 1928 तक वे साबरमती में रहे तेईस वर्ष का नौजवान अपनी पत्नी को लेकर अल्मोड़ा आया। भक्ति त्रिवेदी कहती हैं कि अल्मोड़ा भवानी दत्त जोशी उनसे अपनी मातृभाषा कुमैयां में बतियाते थे क्योंकि वे खड़ी बोली अच्छी तरह बोल नहीं पाते थे। भक्ति त्रिवेदी की मातृभाषा गुजराती थी। गुजराती क्रिया पवंत कुमांऊँनी सरीखे हैं। भक्ति त्रिवेदी गुजराती में बोलती भवानी दत्त कुमांऊँनी में। शांतिलाल त्रिवेदी ने ऊनी कताई बुनाई के कारोबार के अलावा नमक सत्याग्रह के लिये पाली सब डिवीजन के पैठाणा गांव निवासी ज्योतिराम कांडपाल व भैरव दत्त जोशी को अहमदाबाद भेजा। ये दोनों नौजवान नमक सत्याग्रह बारदोली जाने वाले 78 भारतीयों में से दो कुमांऊँनी नौजवान थे। पंडित नेहरू ने जनवरी 1938 में प्रोफेसर जे.बी. कृपलानी को कहा चनौदा के ऊनी कारोबार जिसे शांतिलाल पिछले आठ वर्ष से परिश्रमपूर्वक चला रहे हैं उसे गांधी आश्रम का हिस्सा मान लो। शांतिलाल त्रिवेदी व भक्ति त्रिवेदी की समाजसेवा के प्रशंसक महात्मा गांधी ने सेठ जमनालाल बजाज को 1941 में मैरी कैथरीन हिलामन जो 1920 में भारत आ चुकी थी उनको स्वास्थलाभ हो इसलिये अल्मोड़ा भेजा। 1941-42 में मैरी कैथरीन हिलामन जिन्हें कुमांऊँ के लोग सरला बेन के नाम से जानते हैं उनके सहयोग से शांतिलाल त्रिवेदी ने कुमांऊँ की महिला श्रम शक्ति को जागरूक बनाने का उपक्रम किया।
बोरारौ घाटी की महत्त्वपूर्ण घटना - चनौदा में सात स्वतंत्रता सेनानियों का आत्म बलिदान है। इन सात शहीदों में तीन गांधी आश्रम चनौदा के कार्यकर्त्ता थे। तीन व्यक्ति कोसी के दांये किनारे पर अवस्थित छोटा सा गांव गुरूड़ा के निवासी थे। इन सात व्यक्तियों की स्मृति में उ.प्र. सरकार में पंडित गोविन्द वल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान के तत्त्वावधान में शहीद स्मारक का निर्माण संपन्न हुआ जिसे अब उत्तराखंड सरकार देखरेख संपन्न करने के लिये श्री गांधी आश्रम चनौदा जिला अल्मोड़ा को हस्तातंरित कर चुकी है परन्तु शहीद स्मारक अत्यंत दयनीय स्थिति में बाढ़ से एक हिस्सा गिर चुका है। शहीदों के बारे में भी सटीक जानकारी नहीं दी गयी है। इसलिये तात्कालिक जरूरत इस बात की है कि जहां गांधी आश्रम चनौदा को शांतिलाल त्रिवेदी-भक्ति त्रिवेदी व उत्तराखंड के हजारों स्वतंत्रता सेनानियों का स्मृति चिह्न, संग्रहालय के रूप में विकसित करने के लिये गुजराती वास्तु कला व कुमांऊँनी वास्तु कला का सम्मिश्रण कर शांतिलाल त्रिवेदी दम्पत्ति संग्रहालय का स्वरूप दिया जाये और भारत के विभिन्न घटक राज्यों के पर्यटक हिमालय खोजी हिमालय टैªकिंग करने के इच्छुक पर्यटकों, हिमालयी जड़ीबूटी तथा हिमालय के विभिन्न स्थानों के जल परीक्षण गंगा जल की विषाणु नाशक शक्ति, अल्मोड़ा बागेश्वर पिथौरागढ़ चंपावत इन चार जिलों के मूल जल स्त्रोतोें जल-शक्ति गंगोलीहाट के जाह्नवी नौले, शैल शिखर के अंदर कलकल वाहिनी जल शक्ति का परीक्षण तथा गंगोलीहाट-बेरीनाग मोटर सड़क के किनारे स्थित जाड़ापानी नामक गांव के जल का परीक्षण यह देखने की जरूरत है कि क्या इन तीन जगहों के जल में गंगा जल तुल्यता का स्वरूप है। यदि इन तीन जलस्त्रोतों व गंगा जल में साम्यता लगती हो वैज्ञानिक शोध से प्रमाणित हो कि गोमुख वाले गंगा जल व इन जलों में गुण साम्याता विद्यमान है गंगा जल के अलावा उत्तराखंड के सभी जल स्त्रोतों का वैज्ञानिक तथा हाइड्रोलौजिक अनुसंधान करने की जरूरत है।
उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने कैलास-मानसरोवर यात्रा पारम्परिक व शास्त्र सम्मत यात्रा मार्ग संबंधी प्रसंग भी उठाया है जो बहुत महत्त्वपूर्ण बिन्दु है। 26 जून 1931 के दिन बेरीनाग में मैसूर के तत्कालीन महाराजा जयचामराज वडियार कैलास मानसरोवर यात्रा के लिये दल बल सहित पहुंचे थे। अल्मोड़ा के तत्कालीन जिलाधिकारी महाराजा जयचामराज वडियार व महारानी शिवांगी की कैलास मानसरोवर यात्रा तत्कालीन संयुक्त प्रदेश आगरा व अवध के गवर्नर महोदय के प्रतिनिधि के रूप में महाराज के साथ थे। इस ब्लागर के पिता पंडित गौरी दत्त महाराज मैसूर के गीता पाठी थे। 1950 के कुम्भ मौनी अमावस्या के दिन उनके पिता श्री प्रयाग में गंगा तट पर दुर्घटनाग्रस्त होगये जिसके कारण उन्हें मैसूर से प्रयाग आना पड़ा। माघ शुक्ल तृतीया के दिन इस ब्लागर के पितामह का देहांत होगया। उनके इकलौते पुत्र ने अपने पिता की अंत्येष्टि कर तेरहवीं करने के पश्चात अपने गांव चले गये। महाराज जयचामराज ने अपने गीतापाठी को कहा था कि वे 1931 में महारानी सहित कैलास मानसरोवर जायेंगे। उस गांव में पंडित गौरी दत्त नाम के दो व्यक्ति थे। एक तो इस ब्लागर के पिता श्री दूसरे सज्जन गांव के मालगुजार थे। श्याम वर्ण थे, राजपुरूषों से कैसे व्यवहार व संवाद करना यह नहीं जानते थे। महाराज जयचामराज नाराज होगये व उन्होंने अल्मोड़ा के कलेक्टर को कहा - यह तो बहुत गंदा मजाक है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अंग्रेज था। उसने पूछा, गरांऊँ गांव में गौरी दत्त नाम के कोई और आदमी भी हैं। मालगुजार गौरी दत्त जी ने कहा - हां हुजूर, एक कांग्रेसी गौरी दत्त भी है।
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने पिथौरागढ़ के सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट, तहसीलदार वगैरह को कहा - उस ब्राह्मण को बुला लाओ। घुड़सवार हाकिमों का दल गांव पहुंचा। पिता श्री से बोले - हमारे साथ चलिये। पिता श्री ने उन्हें कहा - महाराज जयचामराज वडियार व महारानी का स्वागत करने के लिये ढोल-दमांऊँ दही दूध घी फूल पत्ते लेकर मेरे यजमान महाराज का डीडीहाट में स्वागत करेंगे। आप लोग चाहो तो मुझे सामाधुरा पहुँचा दो ताकि सब व्यवस्थायें सही तरीके से हों। शांतिलाल त्रिवेदी भी कैलास मानसरोवर यात्रा के लिये मुंबई के सेठ भाटिया के साथ चल रहे थे। के.सी.आई. सर नैन सिंह की पौत्रवधू तुलसी रावत ने अपने पति दुर्गा सिंह रावत व शांतिलाल त्रिवेदी को कहा - कुमांऊँनी भाषा में सव्य को सव्यूं अपसव्य विव्यूं कहते हैं। कैलास मानसरोवर की सव्य यात्रा मुनस्यारी, मिलम, कुग्री-बिग्री होकर ही होती है। कैलास के शंकर दर्शन तथा मानसरोवर के नीर-क्षीर विवके करके राजहंस के साथ मानसरोवर स्नान तभी फलदायी होता है जब यात्रा सव्य होती है। महाराज मैसूर हिन्दू राजा हैं हिन्दू राजा को विष्णुवत मानते हैं। उन्हें अधिकार है लिपुलेख तकलाकोट होकर जायें। आप लोग सामान्य जन हो मिलम होकर ही यात्रा करो। शांतिलाल त्रिवेदी की कैलास मानसरोवर यात्रा पोथी 1984 में तब छपी जब शांतिलाल दिवंगत होगये थे। उनका निधन 8 फरवरी 1984 के दिन घाटकोपर मुंबई में उनके पुत्र भीखूभाई त्रिवेदी के निवास स्थान में हुआ। भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी आगामी मई 2015 में नाथूला दर्रा होकर सड़क मार्ग से कैलास मानसरोवर यात्रा तथा चीन की राजधानी पेइचिंग जाने वाले हैं। आवश्यकता इस बात की है कि उत्तराखंड सरकार कैलास मानसरोवर की सव्य यात्रा-पथ निर्धारण के लिये निर्णायक विधि तय करने के लिये एक उच्च सत्ताक कमेटी का गठन करे। भारत के शैव मतावलंबियों, वैष्णव व शाक्त मतावलंबियों सहित सौराष्ट्र के सोमनाथ सहित जो भारत भर में यत्र तत्र ज्योतिर्लिंग हैं उनकी अर्चना विधि रावण संहिता में वर्णित रूद्राभिषेक सहित शास्त्र सम्मत कैलास मानसरोवर यात्रा पथ के निर्धारण के लिये मानस खंड व केदार खंड के दोनों हिमालय क्षेत्रों के बारे में उच्च सत्ताक इंन्क्वायरी गठित करने के लिये सटीक विचार विमर्श करे। प्रधानमंत्री जी के सड़क मार्ग से नाथूला दर्रा होकर त्रिविष्टप प्रदेश नीर क्षीर विवके राजहंस वाले मानसरोवर स्नान कैलास दर्शन का उत्तराखंड सरकार का अभिमत प्रधानमंत्री जी के संज्ञान में लाया जाये।
इस ब्लागर ने आपके मंत्रिमंडलीय सहयोगी खादी ग्रामोद्योग मंत्री महोदय को सुझाया था कि वे खादी ग्रामोद्योग कार्यक्रमों को सही दिशा निर्देशन देनेे के लिये श्री पीतांबर भट्ट जो 1965 से 2002 तक खादी ग्रामोद्योग आयोग की प्रवृत्तियों से जुड़े हुए जानकार व्यक्ति हैं जिन्होंने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र पिथौरागढ़ से अपनी खादी सेवा यात्रा शुरू की और अर्थानुसंधान निदेशक के तौर पर सेवानिवृत्ति 2002 में हुई। संभवतः उन्होंने मेरे पत्र को पढ़ा ही नहीं। उत्तराखंड में जो खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का आकार है वह हिल वूल स्कीम 1937 में शुरू होते समय जो कम आकार था। शांतिलाल त्रिवेदी ने जो माहौल ऊनी खादी के लिये तैयार किया था, टिहरी गढ़वाल रियासत के उत्तर प्रदेश में विलय होने से पूर्व अल्मोड़ा व पौढ़ी जनपदों में 206 कताई शिक्षक थे। कताई बुनाई का कार्य वेग से होता था। श्री गोपाल दत्त जोशी व श्री भुवन चंद्र जोशी ने ऊनी कारोबार व खजूरी गुड़(ताड़ गुड़) वाला कार्यक्रम मुस्तैदी से चलाया था। पहाड़ में ऊन भाबर व तराई में खजूरी गुड़ उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड राज्य सृजित होने के पश्चात खादी ऊनी कारोबार का काम निरंतर घटता रहा है। कृपापूर्वक अपने उद्योग विभाग से पूछने का कष्ट करें कि 1. उद्योग निदेशालय कानपुर के अंतर्गत हिल वूल स्कीम 1930 से 1967 तक 2. उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का हिल वूल स्कीम तथा ग्रामोद्योगों ने ताड़ गुड़ कार्यक्रम 3. 9.11.2000 से अधपर्यन्त समूचे उत्तराखंड में हिल वूल स्कीम व दूसरे ग्रामोद्योग स्थितियों का जिलावार श्वेतपत्र आपके सम्मुख प्रस्तुत हों। भारत सरकार ने उत्तराखंड के जनपद रूद्रप्रयाग के मनरेगा कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री रोजगार संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष उपलब्धि प्राप्त की है। बी कीपिंग के लिये आपकी ही पार्टी के मुख्यमंत्री रहे श्री नारायण दत्त तिवारी महोदय ने इस ब्लागर को आश्वासन दिया था कि उत्तराखंड में केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के समानांतर उत्तराखंड मधुमक्खी विकास बोर्ड एक स्वतंत्र इकाई के रूप में गठित किया जायेगा वह आश्वासन अभी भी अमूर्त लगता है।
कृपया निम्न बिन्दुओं पर सहृदयतापूर्वक विचार करें।
1. त्रिस्तरीय पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा ग्राम सभा जन प्रतिनिधियों की रोजगार सृजन, रोजगार संवर्धन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये आप प्रत्येक जिला स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत, प्रतिनिधियों की भूमिका विशेषतया स्वयं सहायता समूह सृजन उनके लिये कार्य योजनायें। त्रिस्तरीय पंचायतों का सशक्तिकरण उन्हें अधिकार प्रतिनिधायन के लिये विशेषज्ञ समिति की राय ज्ञात करना। राजनीतिक स्तर पर विधायकों, जिला पंचायत प्रमुखों, ब्लाक प्रमुखों में से सात विधायक, सात जिला पंचायत प्रमुख तथा सात क्षेत्र प्रमुख की कमेटी तय करना ताकि त्रिस्तरीय पंचायत राज विविध विकास कार्यों में सहभागिता संपन्न कर सकें।
2. पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा जनपदों से निरंतर होरहे पलायन को रोकने के लिये ऐसे उपाय करना जिससे रोजगार इच्छुक स्थानीय रोजगार उपलब्ध कर सकें।
3. महिला आर्थिकी सशक्तिकरण के लिये उन्नत चर्खों पर ऊन कताई करघों(रांच) पर ऊनी वस्त्र बुनाई, हाथ बुनाई के लिये हैंड निटिंग यार्न कताई को ग्रामीण रोजगार गांरटी के लिये स्किल्ड लेबर श्रेणी देना।
4. ग्रामीण महिला रोजगार गारंटी के लिये उन्नत चर्खों पर कताई प्रशिक्षण तथा प्रशिक्षण पश्चात चर्खे कतकर को हायर पर्चेज पद्धति पर उपलब्ध कराना।
5. राज्य सरकार के समस्त वर्दी धारी कर्मचारियों की वर्दी उपलब्धि आपूर्ति उत्तराखंड राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा उपलब्ध किये जाने हेतु शासकीय नीति निर्धारित करना।
6. स्वयं सहायता समूह संगठक पुरूष/महिला प्रशिक्षण देने हेतु श्री गांधी आश्रम को ट्रेनिंग अनुभाग। स्वयं सहायता समूहों और अन्य कतकरों को पोली ऊन स्लाइबर, पोलीएस्टर स्लाइबर, काटन स्लाइबर, विशुद्ध ऊन स्लाइबर तथा रेशम ककून निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराये जाने वाला मैकेनिज्म।
मुख्यमंत्री जी की घोषणा को क्रियान्वित करने के लिये सर्वप्रथम -
1. उत्तराखंड खादी ग्रामोद्योग मंडल के समस्त अधिकारी व तकनीकी स्टाफ को मार्गदर्शिका बैठक।
2. जिला पंचायतों, ब्लाक पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों की कुमांऊँ-गढ़वाल मंडल बैठकें ऊधम सिंह नगर देहरादून व हरिद्वार जनपदों के जनपदस्तरीय बैठकें गांवों में रोजगार बढ़ाने के उपायों पर विचार विमर्श।
3. स्वतंत्रता सेनानी आश्रित समाज को उत्तराखंड उन्नति के लिये प्रेरित करने हेतु उनकी बैठक करना, अपने अपने इलाकों में स्वयं सहायता समूहों को प्रेरित करने के लिये प्रोत्साहित करना।
4. उत्तराखंड के समस्त शहीद स्वातंत्र्यवीरों, सेना-पुलिस के देश रक्षार्थ बलिदान हुए शहीदों का जीवन वृत्तियां तथा भारतीय स्वांतत्र्य संग्राम में कुमांऊँ की भूमिका - 14.1.1921 के उत्तरायणी कुली बरदायश उतार का शताब्दी मनाने के लिये गांधी आश्रम सहित रचनात्मक संगठनों का सहयोग लेना- कुली बरदायश उतार शताब्दी के अवसर पर महात्मा गांधी द्वारा कूर्मांचल केसरी बदरी दत्त पांडे के अभियान को संयुक्त राज्य अमेरिका के दास मुक्ति ‘अब्राहम लिंकन द्वारा दासता मुक्ति आंदोलन’ की बराबरी का दर्जा देना।
5. कुमांऊँ भारत का स्विट्जरलैंड है - गांधी की इस धारणा को सामर्थ्य उपलब्ध कराना।
6. कौसानी में 2.10.2019 अथवा उस वर्ष की आश्विन द्वादशी के दिन महात्मा गांधी का 150 फीट उच्च स्तूप अनासक्ति आश्रम कौसानी में स्थापित कराना।
7. जिला जेल अल्मोड़ा को पंडित नेहरू संग्रहालय में परिवर्तित करना तथा अल्मोड़ा जेल में पंडित नेहरू की 150 फीट ऊँची मीनार स्थापित करना।
बोरारौ घाटी में शराब बन्दी
बोरारौ घाटी सहित अल्मोड़ा जनपद की दूसरी उर्वरा घाटी कैड़ारौ है। ये दोनों घाटियां धनद कुबेर की अन्नदाता हैं पर उर्वरा धरती माता से अन्न, फल, फूल, शाक तथा औषध गुण वाली वनस्पतियों की इस धरती में धरती के लाल मदिरा सेवन से जहां स्वयं आत्मग्लानि और देह हानि की ओर अग्रसर होरहे हैं वहीं मद्यप व्यक्ति के प्राणपखेरू उड़ जाने पर भरी जवानी में वैधव्य कष्ट झेलने वाली दो या तीन अथवा उससे अधिक संतान का उत्तरदायित्त्व अपने कंधों पर उठाने वाली पीड़ित मातृशक्ति संख्या निरंतर बढ़ती जारही है। बोरारौ घाटी उत्तर पश्चिमी शिखर पर कौसानी अवस्थित है। कौसानी भारतीय भाषा विज्ञानियों के अनुसार कौशिकाश्रम का तद्भव शब्द है। राजा कुशिक के पुत्र राजा गाधि के पुुत्र विश्वामित्र थे। विश्वामित्र ने एक नयी सृष्टि का भी सूत्रपात किया था। विश्वामित्र का एक नाम कुशिक वंशीय होने के कारण कौशिक भी है। अलकापुरी का काषाय पर्वत जिसे कासार देवी भी कहा जाता है पौराणिक कथनों के अनुसार कौशिकी(वर्तमान कोसी नदी) तथा शाल्मली(वर्तमान में सुआल नाम से पुकारी जाने वाली नदी) के मध्य में काषाय पर्वत है। बोरारौ घाटी में मदिरा नशे से पारिवारिक उत्पीड़न अपने चरम पर है। गांधी शिक्षा दर्शन तथा गांधी जीवन रेखा की प्रणेता प्रेमा जोशी पिछले दो दशकों से कौसानी में सैकड़ों ऐसे परिवारों को जीवन ज्योति वाला सहारा उपलब्ध किया है जिसे अत्यधिक मात्रा में मदिरा सेवन करने वाले पुरूषों के पितृहीन परिवारों को जीवन आशा की नयी ज्योति से आलोकित किया है। गांधी विचार आधारित बेसिक शिक्षा की सटीक उपयोग करने वाली मानवी सत्ता को प्रेमा ने एक नया आयाम दिया है। जरूरत इस बात की है कि उत्तराखंड की सरकार नशे के कुप्रभाव से पीड़ित परिवारों का सामाजिक आर्थिक अनुसंधान संकल्पित करे। माननीय हरीश रावत कुमांऊँ की सांस्कृतिक सामाजिक आर्थिक नब्ज पहचानने वाले नेता हैं। उन्होंने बोरारौ घाटी के बारे में जो घोषणा की है उसमें नशे से पीड़ित परिवारों को पुनर्स्थापित करने में जो मेहनत श्रीमती प्रेमा जोशी ने पिछली दो दशाब्दियों में मनोयोग पूर्वक मातृसत्ता पारिवारिकता का जो संवर्धन किया है, सैकड़ों से लेकर हजार से ज्यादा ‘एकल संरक्षक परिवार’ का जो नया ‘नारी कवच’ स्थापित किया है, माननीय मुख्यमंत्री जी उसका गवेषणात्मक अनुसंधान करने के लिये उत्तराखंड विधानमंडल को प्रेरित करें कि राज्य की विधायिका शक्ति मद्यपान के कुप्रभावों पर बहस मुबाहसा की शुरूआत करें। सबसे पहली जरूरत यह है कि सरकार की सेवा में लगे हुए स्थायी, अस्थायी, ठेके पर सरकारी नौकरी करने वाले लोगों पर कर्त्तव्यपूर्त्ति के क्षणों में मदिरा सेवन न करने, सार्वजनिक स्थल में मदिरा सेवन कर न टहलने का अनुशासन सुनिश्चित करें।
बोरारौ घाटी, कैड़ारौ घाटी तथा कत्यूर घाटी व समूचे बागेश्वर जनपद में शराब बन्दी किये जाने के बारे में माननीय मुख्यमंत्री जी चालू वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद - कैड़ारौ, बोरारौ, कत्यूर तथा बागेश्वर के समूचे जिले आंशिक नशा बंदी का संकल्प लेने का कष्ट करें। शराब की बढ़ती खपत नव युवा वर्ग में शराबखोरी के बढ़ने से जहां एक ओर नाप्तयौवन या जूवेनाइल अपराधों का ग्राफ बढ़त की ओर है, स्कूल कालेजों में पढ़ने वाले संपन्न परिवारों के युवक युवतियां भी किशोरावस्था से ही शराबखोरी की बुराई से पीड़ित हैं। खेतीबाड़ी में अपना समय बिताने वाले कृषक परिवार के लोग भी नकदी फसलों की बढ़त से उन्नत आय वर्ग की परिधि में आने के कारण आमदनी का एक अच्छा खासा हिस्सा शराबखोरी में व्यय कर रहा है। उत्तराखंड के तेरह जनपदों में से कुमांऊँ मंडल के कैडा़रौ-बोरारौ तथा बागेश्वर जनपद में नशाबंदी का प्रयोग किया जाये। आज उत्तराखंड में भी ऐसे कुछ लोग हैं जो शराबखोरी के बगैर जिन्दा नहीं रह सकते हैं। मदिरा सेवन के आदी होगये ऐसे लोगों का डाक्टरी परीक्षण करा कर उन्हें जिन्दा रहने के लिये शराब की दैनिक न्यूनतम मात्रा में उपलब्ध कराने का प्रबंध तंत्र निर्मित किया जाये। मदिरा विक्रेताओं को सख्त ताकीद की जाये कि वे अवयस्क व्यक्ति को मदिरा आपूर्ति नहीं करेंगे। आंशिक शराब बन्दी से शराब खोरी में बढ़त नहीं होगी।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
गांधी आश्रम चनौदा को फिर रोजगार दाता बनाने के लिये तात्कालिक विवेकाधीन अनुदान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री महोदय की 758वीं घोषणा जो आठूं के त्यौहार 2 सितंबर 2014 की बोरारौ घाटी की रोजगार वृद्धि के लिये गांधी आश्रम चनौदा अल्मोड़ा के बारे में की गयी थी। उस घोषणा को हुए अगले महीने 2 मार्च 2015 को पूरे छः महीने हो जायेंगे। यह सुसंयोग है कि घोषणा के छः महीने पूरे होने वाले दिन से होल सरे धुन्धुका द्वादशी रंगभरी एकादशी का अगला दिन है। उत्तराखंड के नये-नये आये मुख्य सचिव मुख्यमंत्री की द्वारा की नयी घोषणाओं का अनुश्रवण कर रहे हैं। संबंधित विभाग को निर्दिष्ट कर रहे हैं कि वे अपने प्रस्ताव शीघ्र भेजें। वर्तमान वित्त वर्ष 31 मार्च 2015 को समाप्त हो जायेगा। चालू वित्त वर्ष में यदि श्री गांधी आश्रम चनौदा अल्मोड़ा की यत्किंचित आर्थिक सहायता संस्था के कार्यक्रमों को गति दिलाने के लिये हो सके वह भी बड़ी बात होगी। चनौदा गत शताब्दी के वर्ष 1928 से बोरारौ घाटी में उद्यमिता की अलख जगाये हुए है। यह परिश्रम बोरारौ घाटी में शांतिलाल त्रिवेदी दम्पत्ति को चंद्रदत्त बुद्धिवल्लभ जोशी के सहयोग का परिणाम है जिन्होंने शांतिलाल त्रिवेदी को चनौदा में भूमि भवन उपलब्ध कराये और शांतिलाल त्रिवेदी ने 1929 से लेकर दिसंबर 1937 तक ऊनी कारोबार की शुरूआत कर महिला कतकरों, रांच में ऊनी तागा बुनने वाले बुनकरों तथा हाथ बिनाई करने वालों को एक नयी दिशा दिखायी। शांतिलाल त्रिवेदी ने निरंतर 1928 से 1945 तक डिस्ट्रिक्ट बोर्ड अल्मोड़ा के शिक्षा समिति के कताई, बुनाई, हाथ बिनाई संचालक का उत्तरदायित्त्व निर्वाह किया।
पंडित नेहरू के महात्मा गांधी की बात अत्यंत प्रिय थी जिसमें महात्मा गांधी ने ताकुला (बल्दियाखान नैनीताल रोड), भवाली, ताड़ीखेत प्रेम विद्यालय अल्मोड़ा, कौसानी, गरूड़ व बागेश्वर में हजारों हजार लोगों को संबोधित कर स्वतंत्रता की अलख जगायी थी। महात्मा गांधी का यह मत था कि कुमांऊँ की वादियां भारत के लिये स्विट्जरलैंड का काम करती हैं। वे प्राकृतिक छटा से इतने अभिभूत थे कि उन्होंने अपने कुमांऊँ प्रवास 14.6.1929 से 3.7.1929 तक अपने समय का सदुपयोग कर श्रीमद्भगवदगीता को गुजराती भाषा से जोड़ डाला। महात्मा गांधी प्रार्थना का श्रेष्ठ अंश ही गीता का गुजराती भाष्य है जिसकी भूमिका महात्मा गांधी ने अपने कौसानी प्रवास में सन 1929 में लिखी हिन्द स्वराज और गीता का गुजराती भाष्य महात्मा के गुजराती भाषा में लिखे दो अद्भुत ग्रंथ हैं। मनुष्यता को संबल देने वाला महात्मा गांधी का सत्याग्रह और अहिंसा के लिये महात्मा की वैष्णव प्रतिबद्धता और निर्भय होकर अहिंसा का रास्ता अपनाया। अपने संगी साथियों को भी अहिंसा, अपरिग्रह, अभय, अस्तेय, अस्वाद, अस्पृश्यता निवारण महात्मा के इन ग्यारह व्रतों में छः व्रत अकार प्रधान हैं। उन में अ की महत्ता है। अक्षर ‘अ’ सृष्टि का पहला स्त्रोत है जिससे वाणी व ध्वनि निकले हैं। गांधी प्रार्थना ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीर पराई जाणे रे। पर दुःखे उपकार करे तोये मन अभिमान न आणे रे’। महात्मा गांधी का कौसानी प्रवास कुमांऊँ के लिये उनकी सद्भावना ने कुमांऊँ के लोगों की आजादी की मुहिम में भागीदारी बढ़ायी। महात्मा गांधी ने दो अहोरात्र गांधी कुटीर ताड़ीखेत प्रेम विद्यालय में बिताये। स्वतंत्रता की चिंगारी फैलाने वाले पहले भारतीय राजा महेन्द्र प्रताप थे जिन्होंने वृन्दावन मथुरा में प्रेम महाविद्यालय स्थापित किया। भक्ति द्रविड़ देश में पैदा हुई बचपन कर्णाटक में बीता महाराष्ट्र में पुष्ट होगयी। उसके दो बेटे ज्ञान व वैराग्य थे। बुढ़ापा आया गुजरात में भक्ति के बेटे ज्ञान वैराग्य ने मां से कहा - मां तुम्हें गंगा स्नान करा लायें। भक्ति बेटों के साथ वृन्दावन आयी तो भक्ति वहां तरूणी हो गयी व ज्ञान व वैराग्य बूढ़े हो गये। भक्ति ज्ञान वैराग्य मथुरा वृन्दावन से अहिच्छत्र होते हुए कैलास मानसरोवर व बद्रिकाश्रम केदारनाथ के लिये बढ़े। भक्ति ज्ञान वैराग्य केदारखंड से मानसखंड नेपाल, असम, बंगाल, उड़िया, तेलुगु होते हुए फिर तमिलनाडु पहुँच गयी जहां उसका जन्म हुआ था। यह है हिन्दुस्तानी भक्ति मार्ग। इसमें मानसरोवर की विशेष भूमिका है। मानसरोवर कैलास का सटीक सव्य व शास्त्रोक्त मार्ग केवल कुमांऊँ होकर है जहां मत्स्य, कूर्म और वाराह अवतार क्षेत्र हैं। अल्मोड़ा जिले का वारामंडल सबडिवीजन वस्तुतः वाराहमंडल है जहां देवीधूरा वाराही देवी का महत्त्वपूर्ण देवस्थल है।
अल्मोड़ा जनपद के 18 शहीदों जिन्होंने भारत की आजादी के लिये अपना बलिदान किया अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण घटना है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि संयुक्त प्रांत आगरा व अवध में अल्मोड़ा और बलिया ही दो जनपद थे जहां सबसे ज्यादा लोगों ने स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लिया। बर्तानी राज में इन दो जिलों में खद्दर पहनने वाले किसान, मजदूर, वकील, डाक्टर व अध्यापकों की एक लंबी कतार थी। गंगोलीहाट में एक गांव उपराड़ा है जहां का युवक तारा दत्त पंत रामजे हाईस्कूल का पहला अंग्रेजी पढ़ा व्यक्ति था जिसने ईसाई धर्मान्तरण से इन्कार किया। स्वामी विवेकानंद, मदन मोहन मालवीय, एनी बेसेन्ट ने यह स्वीकार किया कि तारा दत्त ईसाई नहीें है। तारा दत्त की धर्मपत्नी क्रिश्चियन थी। उसका बेटा डैनियल पंत अल्मोड़ा गिरिजाघर का आर्कबिशप था। अल्मोड़ा के तारा दत्त प्रकरण ने हिन्दू और ख्रिस्ती धर्मों की गरिमा को बनाये रखा। डैनियल पंत की बेटी नवाब लियाकत अली खां पाक प्रधानमंत्री की बेगम थी।
शांतिलाल त्रिवेदी ने पंडित नेहरू के लिये अस्कोट के खायकर सिरतानों पर रजवार द्वारा किये जारहे अत्याचारों का गांव गांव और घर घर जाकर ब्यौरा एकत्रित किया। पंडित नेहरू ने नेशनल हेरल्ड में पहाड़ के किसानों विशेष तौर पर रजवार के सिरतानों पहाड़ के किसानों का हवाला दिया। पंडित नेहरू ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी आफ इण्डिया में अस्कोट से चौकोट तक का एक पूरा अध्याय कुमांऊँ के लिये निश्चित किया।
मुख्यमंत्री रावत जी ने आठूं त्यौहार वाली अपनी घोषणा में बोरारौ घाटी को फिर से रोजगार परक बनाने की जो प्रतिबद्धता व्यक्त की है उस संबंध में नीचे लिखे सात बिन्दु मुख्यमंत्री जी के ध्यानाकर्षण के लिये प्रस्तुत हैं।
1. जब 1937 में संयुक्त प्रांत आगरा व अवध में पहली लोकप्रिय सरकार बनी तो गांवों की उद्यमिता को ध्यान में रखा गया। चर्खे पर कताई, करघे पर बुनाई की उद्यमिता कानपुर स्थित उद्योग निदेशालय का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा - श्री कृष्ण दत्त पालीवाल के नेतृत्त्व में घोषित हुआ। अल्मोड़ा और पौढ़ी दो पर्वतीय जिलों के लिये हिल वूल स्कीम का चयन हुआ। ऊन कताई, भेड़ बकरी के गले की पश्म ऊन की छंटाई व पश्म कताई हाथ बुनाई के काम हिल वूल स्कीम अल्मोड़ा के हिस्सा बने।
2. पर्वतीय क्षेत्र में सिलपडुआ व अन्य घासों से हाथ कागज बनाने का उपक्रम करना तथा अखाद्य तिलहनों से औषधी तेल निर्माण के लिये अरण्डी बांज बलूत, नीम, चाय के बीज, चकोतरा जमीर बीज, महुआ, परकर, रीठा, सेमल, पीपल, च्यूरा, तिलहन बीजों को एकत्रित करना व उनके तेल निर्माण करना एवं शैम्पू बनाना। मडुवा, गहत, भट्ट, मसूर, सोयाबीन, अलसी, राई, तुलसी, आंवला, हड़, बड़ की खेती जैविक खादों के जरिये करना। इनके उत्पादों का भोग्य, पुष्टिकर भोग्य तथा तेल आदि में करना।
3. वन पंचायतों में वनौषधि फूल, तुलसी तथा सामुदायिक गौशालाओं के माध्यम से गोपालन, गौ उत्पादों से पंचगव्य व पंचामृत निर्माण।
4. प्रत्येक बाखली में सामुदायिक गैस संयत्र जिससे बाखली शौचालय जुड़े हों, गांव की सामूहिक सफाई का केन्द्र बिन्दु सामुदायिक मैथेन गैस यंत्र।
संवत् 2073 शकाब्द 1938 कीलक संवत्सर में हरिद्वार का अर्धकुंभ आयोजित होगा इसलिये खादी ग्रामोद्योग क्षेत्र में खादी (सूती और रेशमी), उर्दू, पंजाबी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तमिल, मलयाली, तैलुगु, उड़िया, बांग्ला, असमी व नैपाली में छपे रामनामी चादर बदरीनाथ, केदारनाथ, कैलास मानसरोवर, जागेश्वर धाम, गंगोत्री, जमुनोत्री, हरिद्वार मनसा देवी के चित्र वाले भाषायी चादरें, वेस्ट कोट, टीशर्ट, बुश्शर्ट व कमीज में बदरी, केदार, कैलास मानसरोवर, बागनाथ, जागनाथ के चित्र वाले जिसके लिये गांधी आश्रम हरिद्वार जिला खादी आयोग अधिकारी हरिद्वार तथा उत्तराखंड खादी ग्रामोद्योग बोर्ड व उत्तराखंड उद्योग निदेशालय, जम्मू कश्मीर, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्णाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रा व तेलंगाना, उड़िया, बंगाल, असम, मणिपुर, अरूणाचल, सिक्किम राज्यों को खादी ग्रामोद्योग मंडलों व राज्यों की सक्षम खादी संस्थाओं से खादी ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से परामर्श कर विभिन्न भारतीय भाषाओं में छपे अंगरखे, ओढ़नियां, बुश्शर्ट, टीशर्ट आदि में बदरी, केदार, बागनाथ, जागनाथ, कैलास मानसरोवर, हरिद्वार, ऋषिकेश आदि के तथा ऊँ पर्वत हिमालय के दर्शनीय चित्र फोटोग्राफर अनूप साह से परामर्श कर हरिद्वार की उद्यमिता बढ़ सकती है।
अगले वर्ष के बजट के लिये जहां चर्चायें हों दिशा निर्देश तय हों। मुख्यमंत्री जी अपनी घोषणा को क्रियान्वित करने के लिये कृपया उद्योग मंत्री, खादी ग्रामोद्योग मंत्री, सचिव उद्योग, सचिव पर्यटन, उत्तराखंड की सभी खादी ग्रामोद्योग संस्थाओं के अध्यक्ष, मंत्री तथा विशेष तौर पर श्री गांधी आश्रम समूहों की संस्थायें 1. हल्द्वानी 2. चनौदा 3. गौचर 4. देहरादून 5. हरद्वार के लिये सहारनपुर के अध्यक्ष सचिव सभी ट्रस्टियों व प्रबंध मंडल सदस्यों को बुला कर उनसे परामर्श कर अगले वर्ष 2015-16 के बजट की रूपरेखा सुनिश्चित करें। साथ ही अपनी घोषणा को तात्कालिक अमली जामा देने के लिये बोरारौ घाटी के मुख्य केन्द्र गांधी आश्रम चनौदा को अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ जिलों के लिये 2-2 करोड़ रूपये तथा बागेश्वर व चंपावत के लिये भी 2-2 करोड़ रूपये। उत्तराकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग के लिये भी 2-2 करोड़ रूपये प्रति जिला। टिहरी, देहरादून, पौढ़ी, ऊधम सिंह नगर के लिये 1-1 करोड़ रूपये, नैनीताल के पर्वतीय क्षेत्र के लिये एक करोड़ रूपये, भाबर व तराई के लिये भी एक करोड़ रूपये। अर्धकुंभ के कारण हरद्वार के लिये 2 करोड़ रूपये कुल मिला कर। चनौदा के लिये तुरंत दस करोड़ रूपये विवेकाधीन अनुदान संबंधित जनपदों के लिये विचारित किये जायें ताकि मुख्यमंत्री जी की घोषणा पर 31.3.15 से पूर्व क्रियान्वयन हो सके। साथ ही शेष नौ जिलों के लिये भी मुख्यमंत्री जी के विवेकाधीन कोष से विशेष अनुदान को प्रदान करने बाबत सहृदयतापूर्वक विचारें। पर्यटन तथा खादी बिक्री में हरद्वार के महत्त्व को देखते हुए अर्धकुंभ के लिये अर्धकुंभ निधि से 2 करोड़ रूपये पर्यटन समृद्धि के लिये प्रदान करने पर सहृदयतापूर्वक विचार हो। शेष आठ जनपदों के लिये भी विवेकाधीन निधि से 31.3.15 से पूर्व नैनीताल 2 करोड़ (एक करोड़ ऊन के लिये एक करोड़ सूती रेशमी खादी हेतु), पौढ़ी, टेहरी, देहरादून, ऊधम सिंह नगर के लिये एक एक करोड़ रूपये, उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग के लिये 1.50 करोड़ प्रति जनपद विवेकाधीन अनुदान दिया जाये ताकि गांवों में कताई, रांच बुनाई, हाथ बिनाई के जरिये पारिश्रमिक प्राप्ति का जरिया बने। मुख्यमंत्री जी रोजगार संवर्धन के संबंध में माइक्रो क्राफ्ट के हर कारीगर को महत्त्व दें। उन्हें सुन कर राज्य की व्यवस्था को सुधारें।
उपरोक्त के अलावा कुछ ऐसी संस्थायें भी होंगी जिनका कार्य श्रेयष्कर हो। दिवंगत केदार सिंह कुंजवाल ने अपनी सारी जिन्दगी खादी के काम को सौंपी। ऐसी संस्थाओं को भी मुख्यमंत्री जी स्वविवेकाधीन सहायता उपलब्ध करने बाबत विचार करें। खादी ग्रामोद्योगों के जरिये वे पलायन पर भी रोक लगा सकते हैं इसलिये तात्कालिक जरूरत खादी वालों से तुरंत संवाद स्थापित करने की है। बोरारौ घाटी के मृतप्रायः खादी उद्यमिता को पुनर्जीवित करने के लिये जहां जिलावार विवेकाधीन तात्कालिक सहायता पेटे क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम चनौदा शांतिलाल त्रिवेदी कर्मभूमि चनौदा परिसर को 2 लाख रूपये, पिथौरागढ़ के लिये 2 करोड़ रूपये, अल्मोड़ा के लिये 2 करोड़ रूपये, बागेश्वर व चंपावत के लिये भी 2-2 करोड़ रूपये कुल आठ करोड़ रूपये का तात्कालिक प्रावधान लाभकारी होगा ताकि मुख्यमंत्री जी की घोषणा का सटीक क्रियान्वयन हो। उत्तराखंड के शेष ग्यारह जनपदों के लिये भी सक्रिय संस्थाओं को मदद पहुंचाने के लिये हरद्वार 2 करोड़, नैनीताल छखाता परगना के पहाड़ी इलाके के ऊन कताई बुनाई के लिये 1 करोड़, भाबर व तराई में सूती खादी के काम को टेक्सटाइल पार्क से जोड़ने के लिये नैनीताल के लिये 1 करोड़, ऊधम सिंह नगर के लिये 1 करोड़, गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग के लिये 1.50-1.50 करोड़ रूपये, टिहरी पौढ़ी देहरादून के लिये एक एक करोड़ रूपये अनुदान के साथ भी विवेकाधीन निधि से तात्कालिक सहायता उपलब्ध कराने से माइक्रो क्राफ्ट का संवर्धन दिखने लगेगा।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
No comments:
Post a Comment