Wednesday, 25 March 2015

महात्मा गांधी १५० वर्षीय ड्योढ़ी शती २-१०-१८६९&२-१०-२०१९ के बारे में कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्दु जिन पर प्रधानमंत्री जी का ध्यानाकर्षण भारत के राष्ट्र हित में है

महत्वपूर्ण बिन्दु जिन पर तात्कालिक विचार उपयोगी होगा। 
1. महात्मा गांधी द्वारा 24.9.1924 आश्विन बदी द्वादशी संवत् 1981 अपने 55वें जन्मदिवस पर कदमकुआं पटना बिहार में अखिल भारत चर्खा संघ अपनी अध्यक्षता में घोषित करना। चर्खा संघ के दूसरे आठ पदाधिकारियों क्रमशः मौलाना शौकत अली, डा. राजेन्द्र प्रसाद, मगन लाल गांधी, सतीश चंद्र दास गुप्त, सेठ जमना लाल बजाज खजांची, जवाहरलाल नेहरू तथा शोएब कुरैशी व शंकर लाल बैंकर चर्खा संघ के सेक्रेटरी थे।
2. उसी वर्ष के प्रारंभ में महात्मा गांधी जी ने बेलगांव कांग्रेस की अध्यक्षता की थी और भारत के हर गांव में कम से कम एक उद्योग स्थापित हो यह संकल्प लिया था। 
3. ठीक दस वर्ष पश्चात 1934 में महात्मा गांधी ने चर्खा संघ के समानांतर ग्रामोद्योग संघ स्थापित किया और स्वयं 65 वर्ष की आयु में कांग्रेस की चवन्नी सदस्यता से भी त्याग कर दिया। उनका घोषित उद्देश्य हिन्दुस्तान के सात लाख गांवों को स्वावलंबी बनाना था। 
4. ईश्वर गंगी काशी में महात्मा जी ने आचार्य जीवतराम भगवानदास कृपलानी को खादी काम के लिये चंदे की रकम रूपये 3.40 लाख सौंपते हुए कहा - प्रोफेसर, कत्ती व बुनकर की अमानत में खयानत नहीं होनी चाहिये। 
5. आजादी के पश्चात भारत सरकार ने श्री गजानन नाइक को भारत सरकार का ताड़ गुड़़ सलाहकार नियुक्त कर एक नयी क्रांति को जन्म दिया। ताड़ के पेड़ों से ताड़ी खींचने वाले लोग नशाग्रस्त रहते थे। गांधी जी ने ताड़ी के बजाय ‘नीरा’ का नया प्रयोग किया। आदिवासियों में ताड़ी की जो लत थी उसे धूप के कारण खमन आने से पहले पी लेना अमृत तुल्य था। गांधी जी ने यह प्रयोग कर जहां ताड़ी के नशे के रास्ते ले जाने के तौर तरीकों को नीरा (स्वास्थ्यवर्धक प्रातःकालीन ताड़ वृक्ष रस) के रूप में परिवर्तित कर डाला। डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद जब पंडित नेहरू मंत्रिमंडल के सदस्य थे उन्होंने महात्मा गांधी के ताड़ उत्पादों को एक संगठित माइक्रो क्राफ्ट का स्वरूप देने के लिये ही महात्मा गांधी के अनन्य सहयोगी - नीरा योजना के प्रवर्तक श्री गजानन नाइक को भारत सरकार का ताड़ गुड़ सलाहकार नियुक्त किया था। 
6. श्री वैकुंठ ल. मेहता की अध्यक्षता में भारत सरकार ने अखिल भारत खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का मुंबई हेडक्वार्टर रख कर गठन किया था। बोर्ड के सदस्य सचिव प्रसिद्ध कपड़ा मिल उद्योगपति श्री प्राणलाल सुंदर जी कापड़िया थे जिनके परिश्रम से खादी और हथकरघा हैंडलूम वस्त्रों को भारतीय टेक्सटाइल कारोबार में एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली। श्री प्राणलाल कापड़िया ने बोरीवली मुंबई में कोरा केन्द्र स्थापित कर अहिंसक चर्म उद्योग को प्रोत्साहन दिया। तीन वर्ष बाद भारत की संसद ने के.वी.आई.सी. एल.एक्स.आई. 1956 संसद के दोनों सदनों में पारित करा कर 1.4.1957 को खादी ग्रामोद्योग आयोग की सथापना की। इस आयोग के अध्यक्ष श्री वैकुंठ ल. मेहता सदस्य सचिव श्री  प्राणलाल सुंदर जी कापड़िया तथा सदस्यों में श्रीमन्नारायण, आर श्री निवासन तथा द्वारकानाथ विनायक लेले थे। 
7. अ.भा. खादी ग्रामोद्योग मंडल के कार्यकाल में रूर्बन सोसाइटी का उच्च विचार कार्य रूप में परिणित कराने के उद्देश्य से अ.भा.खा.ग्रा.मंडल ने भारत सरकार की सहमति से इंटेंसिव एरिया डेवलपमेंट स्कीम का सूत्रपात रूर्बन सोसाइटी के विचार को प्रायोगिक स्वरूप देने के लिहाज से किया गया। रूर्बन सोसाइटी के सूत्रधार श्री झबेर भाई पी. पटेल तथा उनके सहयोगी वरिष्ठ शोध अधिकारी श्री विश्वनाथ एम. टेकुमल्ला थे। उन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद के गांवा जीरादेई को ध्यान में रख कर नया विचार रूर्बन सोसाइटी के रूप में प्रस्तुत किया। इस अवधारणा का समर्थन श्री वैकुंठ ल. मेहता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री की सहमति लेकर किया। जीरादेई के अलावा वाराणसी जनपद के तारगांव व अजगरा इलाहाबाद जनपद के कमला नगर तथा सहसों वर्तमान अमरोहा जिले के मंडी धनौरा व कपसुुआ गांवों में यह प्रयोग 1953-54 से वैकुंठ ल. मेहता के आयोग अध्यक्षता अवधि 31.3.1963 तक सफलतापूर्वक चलता रहा। 
8. रूर्बन सोसाइटी संकल्प के समानांतर भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने ‘पूरा’ (प्रोवाडिंग अर्बन ऐमिनिटीज टू रूरल एरियाज) का नया विचार देश के सामने रखा। वे भारत के राष्ट्रपति 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक थे। उनके द्वारा प्रस्तुत विचार कि गांव व शहर के बीच चौड़ी होेती खाई को पाटने का एक तरीका ‘पूरा’ है। जरूरत इस बात की है कि गांधी ड्योढ़ी शताब्दी 2.10.2019 से पहले डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम संकल्पित पूरा पर प्रयोग किये जायें। भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने अपने गुजरात मुख्यमंत्रित्व काल में सन् 2011 में रूर्बनाईजेशन के संकल्प में पचास गांवों का चयन किया। इन गांवों की आत्मा को बरकरार रखते हुए उनमें गांवों से पलायन को रोकने के लिये न्यूनतम शहरी सुविधा उपलब्धि का मार्ग प्रशस्त किया। इस योजना की उपलब्धियों से गांवों को भारत की नयी राष्ट्रीय जिन्दगी से जोड़ने का जो उपक्रम गुजरात में हुआ है उसके नतीजों का आकलन करते हुए रूर्बन सोसाइटी पूरा और रूर्बनाईजेशन पर राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षित करने की तात्कालिक आवश्यकता है। 
9. महात्मा गांधी के नेतृत्व ने गरीब अमीर के बीच फासले को पाट डाला। उन्होंने कोचरब आश्रम में दूधाभाई के परिवार को आश्रम हिस्सा बना कर छुआछूत निवारण का एक अनोखा आदर्श प्रस्तुत किया। डाक्टर जीवराज मेहता सहित गुजराती वैष्णव समाज अपने आपको धन्य समझता था कि उनके बीच महात्मा का अभ्युदय हुआ है पर दूधाभाई प्रकरण ने वैष्णवों को झकझोर डाला। उन्होंने महात्मा को चंदा देना बंद कर दिया। यह बात जब तेरापंथी जैन धर्मावलंबी मिल मालिक सेठ अंबालाल को मालूम हुई तो वे तेरह हजार रूपयों की थैली लेकर महात्मा के पास पहुंचे। कोचरब आश्रम की गतिविधियां यथा पूर्व चलने लगीं। 15 फरवरी 1916 को महात्मा ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की आधार शिला रखते समय महामना मदन मोहन मालवीय से कहा - वड़ील आप काशी की विद्वत परिषद से जुड़े हैं। मेरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि क्या छुआछूत सनातन धर्म में शास्त्र सम्मत है ? महामना ने महात्मा से कहा - महात्मा जी मैं तो परम्परा से छुआछूत मानता रहा हूँ। आपकी समस्या का समाधान अध्यापक सर्वपल्ली राधाकृष्णन ही कर सकते हैं। दोनों सर्वपल्ली राधाकृष्णन के घर गये। उन्होंने दोनों महानुभावों से कहा - मुझे बुला लेते आपने कष्ट किया पर दो महाविभूतियों ने मुझ गरीब अध्यापक को सम्मानित किया है। महात्मा जी ने उनसे पूछा - क्या छुआछूत धर्म शास्त्र सम्मत है ? राधाकृष्णन ने पंद्रह दिन की मोहलत मांगी। पूर्ण अध्ययन करने के पश्चात महात्मा गांधी को कहा - महात्मा जी धर्म शास्त्र में छुआछूत प्रमाणित नहीं है। महात्मा गांधी ने छुआछूत निवारण अपने जीवन का पहला व महत्वपूर्ण आदर्श रखा। 
10. अपरिग्रह का सर्वोच्च उदाहरण - अपनी जरूरत कम से कम रखना, फालतू वस्तुयें व धन एकत्र न करना अपरिग्रह का पहला पड़ाव है। एक बार सेठ जमनालाल बजाज ने महात्मा जी के पास जाकर कहा - बापू, मैंने सात पीढ़ियों की जरूरत पूरी करने की धन शक्ति अर्जित कर ली है। बापू ने हंस कर सेठ जमनाला बजाज से कहा - सेगांव आश्रम से करीब डेढ़ मील दूरी पर एक बुढ़िया बैठती है। जमनालाल जाओ उसे आटा दे आओ। जमनालाल बजाज एक सेर आटा बांध कर बुढ़िया के पास गये और बोले - माई यह आटा रख लो। बुढ़िया ने कहा - सेठ आज के लिये तो मेरे पास आटा मिल गया है इसलिये तुम अपना आटा ले जाओ मुझे नहीं चाहिये। सेठ जमनालाल बजाज महात्मा जी के पास वापस आये और बोले - वह तो मेरा दिया आटा ले ही नहीं रही है। महात्मा जी ने सेठ जमनालाल बजाज को अपरिग्रह का पाठ बुढ़िया के माध्यम से पढ़ाया। 
11. प्रधानमंत्री जी के ध्यानाकर्षण व छिन्न भिन्न व्यवस्थाओं को पुनः कारगर पटरी में लाने के लिये निम्नलिखित बिन्दु तत्काल विचारणीय हैं ताकि गांधी दाय भाग Gandhian Heritage of Anasakta Philosophy is able to improve the Human charity with participation refine to one of the important bows of Mahatma Gandhi about APARIGRAHAभारत में एक पुरानी लोकोक्ति है - यथा राजा तथा प्रजा। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के निस्पृह तथा निर्लोभ नेतृत्व ने भारत के जन जन की आशाओं को मुखरित किया है। गांधी निर्वाण के पश्चात गांधी अनासक्त पथ केवल राजनीतिज्ञों में ही नहीं गांधी आर्थिकी गांधी विचार पोषक लोगों में भी अपनी पकड़ पक्की नहीं कर सका। यहां तक कि हिन्द स्वराज लिखने के पचास वर्ष पश्चात 1.5.1959 को आचार्य काका कालेलकर ने कहा - हिन्द स्वराज के बताये रास्ते पर नहीं चला जा सकता है। महात्मा गांधी के नैतिक बल को त्याग देने से ही भारत को अनेकानेक किस्म की दिक्कतेें झेलनी पड़ी हैं। इसलिये जरूरी है कि गांधी ड्योढ़ी शती पर्व पर भारत सरकार संकल्पित चर्खा संघ को नया जीवन देने का प्रयास करे। चर्खा संघ महात्मा गांधी अहिंसा सत्याग्रह न्यास का सूत्रपात विनोबा भावे के खादी मिशन के सूत्रधार बाल विजय संयोजक खादी मिशन गोपुरी वार्धा महाराष्ट्र के नेतृत्व में परम्परागत चर्खा कताई हाथ बुनाई तथा हथकरघा बुनाई के तीन काम मनरेगा कार्यक्रम के कुशल श्रमिक में संयोजित किये जायें। मनरेगा - Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act का कार्यक्षेत्र केवल गांव ही नहीं शहरों की झुग्गी झोपड़ी स्लम एरिया को भी जोड़ा जाये। मनरेगा में रूरल इम्प्लायमेंट गारंटी के बजाय 100 या 150 दिनों की चुनिंदा कामों की रोजगार गारंटी जैसे वर्षा जल संरक्षण के लिये पानी की बड़ी टंकियों का निर्माण, तालाब तथा पशुओं के लिये हर गांव में चारागाह सृजन के लिये कुशल और अकुशल श्रमिकों के मामले में, चर्खे पर कपास, सूत, ऊन व रेशम की कताई, हैंड निटिंग यार्न कताई, हाथ बुनाई व बुनकरों को हथकरघा बुनाई के कुशल कारीगर के तौर पर रोजगार गारंटी में इस प्रकार के संशोधन किये जायें। भारतीय संसद ने 1956 में के.वी.आई.सी. एक्ट एल.एक्स.आई. 1956 पारित किया। 1.4.1957 से खादी ग्रामोद्योग आयोग अस्तित्त्व में आया। कालांतर में अनेक संशोधनों ने खादी ग्रामोद्योग को लंगड़ा बना दिया। रूर्बन सोसाइटी की जो कल्पना श्री वैकुंठ ल. मेहता व उनके सहयोगियों ने की थी वह 1964 के बाद अत्यंत शिथिल हो गयी। अतएव तात्कालिक आवश्यकता यह है कि माननीय प्रधानमंत्री जी के.वी.आई.सी. एक्ट एल.एक्स.आई. के उपाध्यक्ष तथा सदस्य सचिव के पद पुनः जीवित करें। जोनल सदस्यों सहित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य सचिव पूर्णकालिक हों। 1953-54 से 1963-64 तक कार्य कर रही इन्टेंसिव एरिया डेवलपमेंट स्कीम को पुनर्जीवित कर खादी ग्रामोद्योग आयोग को ग्रामीण औद्योगीकरण का सशक्त संगठन बनाया जाये। रूर्बन सोसाइटी पूरा तथा रूर्बनाइजेशन के तीनों प्रायोगिक प्रायोजनायें खादी ग्रामोद्योग के सघन क्षेत्र योजना का अंग निर्मित की जाये ताकि गांवों से मेधा पलायन व श्रम शक्ति पर कारगर रोक लग सके। ज्योंही यू.पी.ए.1 सरकार मई 2004 में सत्तासीन हुई उसने मात्र पांच महीने के भीतर 14.10.2004 को खादी ग्रामोद्योग आयोग को भंग कर महात्मा गांधी की गांधियन इकोनामिक थीम को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया। उस सरकार ने खादी आयोग को भंग करते हुए यह भी कहा - खादी ग्रामोद्योग को रीवैम्प किया जायेगा पर हुआ उल्टा ही। खादी ग्रामोद्योगों केा एम.एस.एम.ई. मंत्रालय का हिस्सा बना दिया गया। ग्रामीण औद्योगीकरण की जो बुनियाद विकेन्द्रित अर्थांग के पुरोधा वैकुंठ ल. मेहता ने रखी थी वह बुनियाद कमजोर कर दी गयी इसलिये वैकुंठ मेहता व उनके सहयोगियों की रूर्बन सोसाइटी तेरहवें राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा पोषित ‘पूरा’ एवं देश के पंद्रहवें प्रधानमंत्री द्वारा अपने गुजरात मुख्यमंत्रित्व काल में गुजरात के पचास गांवों में रूर्बनाइजेशन का जो सुखद प्रयोग किया गया इन तीनों का क्षेत्रीय परियोजनात्मक प्रयोग इंटेंसिव एरिया डेवलपमेंट स्कीम के पुनरूद्धार द्वारा के.वी.आई.सी. के मार्फत संचालित करने की तात्कालिक आवश्यकता है। 
12. पूर्ववर्ती य.पी.ए.1 सरकार ने 2006 में एम.एस.एम.ई. एक्ट 2006 पारित कर खादी के माइक्रोक्राफ्ट को निर्जीव कर डाला। इसलिये माइक्रोक्राफ्ट को एम.एस.एम.ई. मंत्रालय से हटा कर गांधियन इकोनामिक मंत्रालय को सृजित कर सामाजिक संरक्षण के सभी कार्य - बेघर लोगों को रहने लायक घर उपलब्धि सहित - संबंधित विभागांे के द्वारा समाज के वंचित विपन्न को छत सुविधा चौकसी भी संपन्न की जानी चाहिये। संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा महोदय ने अपने ताजा बयान में अमरीका में मधुमक्खी पालन उद्यमिता जिसे अमरीका के लोग हनी बी कहते हैं कीटनाशक रासायनिक द्रवों से मधुमक्खियों को प्रभावित किया है। उन्होंने हनी बी संरक्षण की बात कही है। भारत में हनी बी के बारे में चरक का कथन है कि ‘सद्यः शक्ति प्रदते मधुः’ अर्थात शहद तुरंत ऊर्जा देता है। श्री वैकुंठ मेहता भारत में सहकारी आंदोलन के जनक तथा विकेन्द्रित अर्थांग के पुरोधा ने खादी व ग्रामीण उद्योग आयोग के परम्परागत उद्योगों में मधुमक्खी पालन उद्योग जिसे हिमालय में मौन पालन कहा जाता है धारवाड़ कर्णाटक निवासी एपिकल्चरज्ञ एस.के. कालापुर के मार्गदर्शन में मधु उद्यमिता का विकास कराया। एपिकल्चर एग्रीकल्चर के उत्पादन को बढ़ाने वाला है। पिछली शती के सातवें दशक में इगाडा परियोजना के अंतर्गत इन्तहा कीटनाशक प्रयोग से कुमांऊँ में एपिस इंडिका बर्बाद होगयी। एपिस इंडिका व एपिस मेलीफेरा संवर्धन के लिये कृषि मंत्रालय ने बी कीपिंग को राष्ट्रीय महत्व देने के लिये खादी ग्रामोद्योग आयोग व उसके केन्द्रीय मधुमक्खी पालन संस्थान पुणे केा महत्व दिया जाना चाहिये। मौन पालन कृषि बागवानी उपज को भी बढ़ावा देता है।
13. चर्खा संघ का नया अवतार घोषित कर 15.8.1947 से पूर्व जो भी संस्था-संगठन खादी व ग्रामोद्योगों का काम करते थे उनकी परिसंपदा, चंदा दान या उपहार में खादी संस्थाओं को मिली है। उस सभी संपदा को भारत सरकार द्वारा स्थानीय राज्य सरकार की सहमति से चर्खा संघ महात्मा गांधी अहिंसा न्यास की संपदा घोषित कर भारत भर में जहां जहां दान, विष्णुप्रीति अथवा उपहार में खादी संगठनों को भूमि भवन संपदा मिली वह सब चर्खा संघ महात्मा गांधी अहिंसा न्यास की संपदा घोषित की जाये। कतकर, बुनकर, हैंड निटिंग करने वाले व परम्परागत ग्रामीण उद्योगों के कौशल संवर्धन केन्द्र हर उस स्थान पर संचालित किये जायें जहां खादी संगठनों की 15.8.47 से पूर्व अर्जित संपदा है। 
ख- जो खादी संगठन 15.8.47 से पूर्व से अस्तित्व में हैं वे अहिंसा न्यास का अनुभाग घोषित हों। उनका प्रबंध यथापूर्व संपन्न होता रहे। अहिंसा न्यास की जो सामान्य सभा है संबंधित संस्था के अध्यक्ष या सचिव उपरोक्त न्यास में संस्था का प्रतिनिधित्व करेंगे। 
ग- न्यास भारत व संयुक्त राष्ट्र संघ सहित भारत के प्रत्येक दूतावास में चर्खा संघ महात्मा गांधी अहिंसा न्यास की एक दीर्घा भारतीय विदेश मंत्रालय से परामर्श कर स्थापित करेगा जिसे महात्मा गांधी अहिंसा दीर्घा कहा जा सकता है। 
घ- संयुक्त राष्ट्र संघ व भारत के सभी विदेशी दूतावासों में अहिंसा दीर्घा में भारत के हस्त कौशल तथा गांधी साहित्य भारत की सभी अनुसूचित भाषाओं तथा अंग्रेजी में साथ साथ में संबंधित राष्ट्र जहां भारत का दूतावास है वहां की भाषा में भी गांधी साहित्य उपलब्ध कराया जायेगा। 
14. एम.एस.एम.ई. मंत्रालय, खादी ग्रामोद्योग आयोग का वर्तमान प्रशासनिक मंत्रालय है। इस मंत्रालय में माइक्रोक्राफ्ट के अलावा लघु उद्योग व मझोले उद्योग भी सम्मिलित हैं। स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज विभाग कुटीर, गृह छोटी मोेटी उद्यमिताओं के लिये यह मंत्रालय मत्स्य न्याय करता है जिस तरह तालाब में बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है उसी तरह समर्थ लघु उद्योग तथा मझोले उद्योगों के साथ माइक्रोक्राफ्ट वाले अत्यंत कमजोर उद्यमितायें दब जाती हैं। खुले विश्व बाजार की खिड़की में आर्थिक सिद्धांत यह कहता है कि समाज का दुर्बल वर्ग उद्यमिता के रिसते हिस्से से लाभान्वित होता है। हैंडिक्राफ्ट हैंडलूम खादी तथा दूसरे अत्यंत छोटे उद्यम बगैर सहायता के चल नहीं सकते पर हाथ का श्रम बेरोजगारी में जितना कुछ हाथ से बन पड़़ा वह उद्यम भी परिवार की आमदनी बढ़ाता है। निरंतर बढ़ रही मंहगाई में चर्खे की कताई हाथ बुनाई जैसे कामों से जहां एक ओर अपने फालतू समय का सदुपयोग होता है वहीं परिवार की आमदनी बढ़ती है। जो हाट व्यवस्था नयी दिल्ली में हस्तकला वगैरह उत्पादों के विपणन के लिये होरही है उसमें कारीगर का शोषण ज्यादा है बिचौलिये अगले की मेहनत का लाभार्जन कर लेते हैं। इसलिये उद्यमियों के स्वयं सहायता समूह तथा इन समूहों के फेेडरेशन व कनफेडरेशन की व्यवस्था कारीगर के ज्यादा अनुकूल बैठती है। एम.एस.एम.ई. मंत्रालय ने खादी मार्क का नया राग अलापा है। फैशनेबल खादी को मॉल्स में बेचने का उनका संकल्प है। उनके इस प्रकरण पर गहराई पूर्वक विचार करने की तात्कालिक आवश्यकता है। इसलिये एम.एस.एम.ई. तथा मल्टी ब्रांड खादी संबंधी उनका जो दृृष्टिकोण है उसे भी गहन विचार विमर्श की आवश्यकता है अतएव एम.एस.एम.ई. तथा पी.पी. मोड वाले उनके विचारक वर्तमान खादी आयोग के सदस्यों अधिकारियों का पक्ष भी प्रस्तावित बैठक में प्रस्तुत हो। खादी मार्क मल्टी ब्रांड खादी तथा पी पी पी मोड में खादी से संबंधित मंत्रालय वे कंपनियां जो मंत्रालय को सहयोग देरही हैं तथा खादी आयोग के वर्तमान सदस्य व उच्चाधिकारियों से 100 व्यक्तियों को प्रधानमंत्री जी सुनें। 
15. रूर्बन सोसाइटी तथा वैकुंठ ल. मेहता सृजित खादी सिस्टम में 100 पारंगत खादी आयोग पूर्व अधिकारी वर्ग व कार्मिक वर्ग का भी अनुभव एवं रूर्बन सोसाइटी संबंधी उनके विचार सुन कर खादी का भविष्य गांधी 150वीं वर्षगांठ के पश्चात क्या हो ? गांवों से पलायन रूकने के उपायों में एक महत्वपूर्ण बिन्दु गांव गांव में इन्टेंसिव एरिया डेवलपमेंट स्कीम है। 
16. बाल विजयय के नेतृत्व वाली गांधी हेरिटेज खादी वाले संगठनों एवं आदतन खादी पहनने वाले लोगों को मिला कर समूचे भारत से खादी मिशन के अनुमोदक 100 व्यक्ति जिन्हें बाल विजय बुलाने के लिये आग्रह करें।
17. सर्वोदय विचारधारा के प्रवर्तक तथा सर्वोदय आचरण शैली अपनाने वाले वे लोग जो अ.भा. सर्व सेवा संघ, गांधी शांति प्रतिष्ठान तथा गांधी विचार केन्द्रों से जुड़े हैं उनके प्रतिनिधि 100 व्यक्ति। 
18. गांधी स्मारक निधि राजघाट नयी दिल्ली प्रादेशिक गांधी स्मारक निधियां तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत गांधी भवनों गांधी विचार केन्द्रों के 100 व्यक्ति जिन्हें गांधी स्मारक निधि राजघाट के सचिव आमंत्रित करने की सलाह दें। 
19. गांधी साहित्य उनकी मातृभाषा गुजराती मराठी हिन्दी व अंग्रेजी के 20-20 गांधीी साहित्यिकों को आमंत्रण बांग्ला के 15 तथा तमिल के 10 साहित्यिक असमी कन्नड़ कश्मीरी मलयाली उड़िया पंजाबी तेलुगु उर्दू सिंधी संस्कृत के पांच पांच कोंकणी के तीन मणिपुरी नैपाली बोडो डोंगरी मैथिली संथाली के दो दो साहित्यिक कुल मिला कर 200 गांधी साहित्य रचयिता आमंत्रित हों। संबंधित राज्य सरकार संबंधित राज्यों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों नेशनल बुक ट्रस्ट नवजीवन ट्रस्ट सस्ता साहित्य मंडल हिन्दी साहित्य सम्मेलन आदि से परामर्श कर गांधी साहित्यिक सूची तैयार हो। 
20. विशेष आमंत्रित डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अमर्त्य सेन ख्याति प्राप्त लेखक यथा अनंत मूर्ति प्रतिष्ठित पत्रकार भी आमंत्रित किये जायें। 
21. गांधी आत्मकथा - सत्य के मेरे प्रयोग का प्रकाशन हिन्द स्वराज व अनासक्त योग की गीता की गांधी टीका भी सभी भारतीय भाषाओं में प्रकाशित किये जाने का शिव संकल्प लिया जाये। 
22. एम.एस.एम.ई. मंत्री कलराज मिश्र, खादी आयोग के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र देसाई तथा उनके सहयोगी सदस्य, श्री बाल विजय संयोजक खादी मिशन गोपुरी वार्धा महाराष्ट्र, श्री एन.एन. लालदास सेक्रेटरी ए.आई. केवीआईसी विले पार्ले मुंबई, सुश्री राधा भट्ट अध्यक्षा सर्व सेवा संघ, श्री रामचन्द्र सचिव गांधी स्मारक निधि राजघाट नयी दिल्ली से निवेदन किया जा सकता है कि वे अपने अपने संगठनों के प्रतिनिधियों के नाम पते लिखवायें। 
23. गांधी साहित्य प्रत्येक भारतीय भाषा में पाठकों को उपलब्ध हो। नयी पीढ़ी महात्मा गांधी उनके जीवन दर्शन तथा दरिद्र नारायण के प्रति उनकी हार्दिक हमदर्दी एवं व्यक्तित्व के रूप में शरीर श्रम करना साथ ही अपने निजी आचरण को इतना शुद्ध रखना कि उस पर कोई अंगुली न उठा सके। 
24. कौसानी हिमालय जहां महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग की भूमिका सोमवार जेठ वद द्वितीय विक्रमाब्द 1985 तदनुसार 24.6.1929 को पूरी की। पूरे कौसानी को भी महात्मा गांधी अनासक्त मार्ग घोषित किया जाना भारत राष्ट्र के सार्वभौम हित में है। 
25. अनासक्ति आश्रम कौसानी हिमालय में 150 फीट ऊँचा महात्मा गांधी अनासक्त सत्य अहिंसा स्तूप का निर्माण होकर प्रधानमंत्री द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं चर्खा जयंती के सुअवसर पर भारत के मस्तक हिमालय में स्थापित किया जाना भारत राष्ट्र को विश्व में प्रतिष्ठित स्थान उपलब्ध करा सकता है। 
          गांधी भारत के नांदीमुख हैं। हम सभी भारतीय प्रतिज्ञा करें कि गांधी के अनासक्त मार्ग का अनुसरण कर हिन्द दुनियां में हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुंचायेंगे। 
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