राजनैतिक यक्ष प्रश्न दिल्ली दरबार का अधिपति कौन ?
कानून और करूणामय वात्सल्य दो समानांतर चलने वाली विरूद्ध धारायें हैं। शासन अथवा कानून का राज संचालन अगर करूणा का मार्ग अपनायेगा तो उसे दुर्जन-निठुरता को रोकना कठिन होगा इसलिये कानून का संचालन करने वाला मानस हिरण्यकश्यप मानसिकता रखता है। हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे को समाप्त करने के लिये सभी उपाय काम में लाये। इसलिये कानून के राज में कानून का प्रयोगकर्त्ता राजसेवक राजकिंकर सामाजिक तौर पर निष्करूण निठुर और उत्पीड़क हुए बिना अपना कर्त्तव्य निर्वाह संपन्न करना कठिन मानता है। सज्जन से सज्जन दयालुतम व्यक्ति को भी राजकिंकर अथवा यमकिंकर की भूमिका निष्करूण ही बनाती है। यह कल्पना करना कि अस्त्र शस्त्र प्रयोगक सैन्यबल, पुलिसबल खोजी व्यक्ति अपने निजी खोज जांच पड़ताल में भी अगर उत्पीड़न का मार्ग नहीं अपनायेगा उसे कर्तव्यच्युति अपयश का भागी बनना पड़ सकता है।
भारत में कानून का राज है। कानून के राज में कानून की व्याख्या समीक्षा करने वाले विद्वान अधिवक्ता जिन्हें सामान्य जन वकील कहता है उसके बारे में योगेश्वर वासुदेेव श्रीकृष्ण ने अपने अनन्य सखा उद्धव कहा - सर्वम् न्यायम् युक्तिमत्वाद् विदुषाम् किं अशोभनम्। रामभक्त तुलसीदास ने विदुषाम् किं अशोभनम् को जन सामान्य को समझाने के लिये कहा - ‘समरथ को नहिं दोष गुसाईं’।
आम आदमी पार्टी संयोजक अरविन्द केजरीवाल महाशय ने जन जन से संपर्क का एक नया तरीका ईजाद किया। उन्होंने इस तरीके की मीमांसा महाराष्ट्र के अराजनैतिक समाज सेवी अण्णा हजारे द्वारा जंतर मंतर नयी दिल्ली में शुरू किये गये भ्रष्टाचार रोकने वाले जन लोकपाल की मांग से शुरू की। अरविन्द केजरीवाल ने आआपा का गठन कर दिसंबर 2013 में दिल्ली विधान सभा के सत्तर सीटों में से अठाईस सीटेें जीत कर कांग्रेस के समर्थन से 49 दिन दिल्ली सरकार भी चलायी। लोकसभा चुनावों में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को वाराणसी में टक्कर दी। फरवरी 2014 में उन्होंने दिल्ली विधान सभा में दोनों अखिल भारतीय राजनीतिक दलों को पछाड़ कर 67 सीटों पर विलय प्राप्त कर मतदाता के मन में क्या रहस्य है ? इस भारतीय राजनीति का एक नया मील पत्थर स्थापित कर दिया। केजरीवाल महाशय के आ आ पा को 54 प्रतिशत मतदाताओं का हार्दिक समर्थन मिला यद्यपि भारतीय जनता पार्टी के मत प्रतिशत में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आयी। 2013 के मत प्रतिशत से एक प्रतिशत से कुछ कम मत प्राप्त करने के बावजूद मतदाताओं के उत्साह ने केजरीवाल महाशय को विरोध पक्ष रहित लोकतांत्रिक बागडोर सौंप दी।
महात्मा गांधी ने बीस अध्याय वाल हिन्द स्वराज एक सौ आठ वर्ष पूर्व लिखा था। उन्होंने पुस्तक अपनी मातृभाषा में लिखी। पुस्तक कृष्णार्जुन संवाद की तरह अधिपति वाचक संवाद के तौर पर वाचक के सवाल और अधिपति के जवाब के रूप में प्रस्तुत किया। महात्मा गांधी ने हिन्द स्वराज में अपने आध्यात्मिक स्वराज और देशवासियों के लिये पार्लमेंटरी स्वराज की बात की। इस संवाद की रचना उन्होंने यूरप में भारतीय युवा समाज के अराजक तरीकों को अपना पर हित स्वराज पाने का जो उत्साह था उसे ध्यानपूर्वक सुनने मनन करने के बाद शब्दों की सृजन शक्ति को अपने आत्मविश्वास से जोड़ कर लिखा था। गुजराती भाषा में लिखे हिन्द स्वराज का बर्तानिया फ्रांस रूस जर्मनी आदि देशों के विचारकों ने अपनी अपनी भाषा में अनुवाद करा कर उसे हृदयंगम किया तथा विचारक वर्ग की धारणा बनी कि गांधी का हिन्द स्वराज ही विश्व को औद्योगिक आधुनिकता के कहर से बचा सकता है। भारत में प्रोफेसर गोपाल कृष्ण गोखले व दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर जिन्हें हिन्दुस्तानी समाज काका साहेब कालेलकर के साहित्यिक व गांधी व्याख्याता के रूप में मान्यता देता है उन दोनों की राय में महात्मा गांधी का हिन्द स्वराज अव्यावहारिक है। महात्मा गांधी के अनुयायियों पंडित नेहरू व आचार्य विनोबा भावे ने हिन्द स्वराज के विरूद्ध कोई टिप्पणी नहीें की न ही टालस्टाय, रोम्यांरोलां, बर्नाड शा की तरह हिन्द स्वराज की भूरि भूरि प्रशंसा ही की।
क्या हिंसा रहित राजतंत्र सुव्यवस्थित तरीके से चल सकता है ? राजधर्म और दस्युधर्म जिसे उत्पीड़क दस्यु प्रधान राजव्यवस्था भी कहा जाता है भारतीय वाङमय ने हिरण्यकश्यप, रावण व वेन को दस्यु कहा है राजधर्म की पृष्ठभूमि में जिसे पश्चिमी विद्वान रहस्य, चमत्कार, मिथक, मिथालाजी संज्ञा देते हैं, राजधर्म के आदर्श के प्रतीक के रूप में भारतीय चतुर्युग परिपाटी के अनुसार दूसरे युग त्रेता के मध्य भाग में अयोध्या में दाशरथि राम का राज्य था। पिता की आज्ञा पालन कर राम जब वन को जारहे थे - साकेत वासियों ने हाथ ऊँचा कर एक स्वर में कहा था - वयम् सर्वे गमिष्यामो रामो दाशरथि यथा। आनुनिक इतिहासकार रामराज्य रामायण महाकाव्य का ऐतिहासिक काल निर्धारण करने के लिये दाशरथि राम के पुत्र कुश, कुश का पुत्र अतिथि उसका पुत्र निषध फिर पुण्डरीक, क्षेमधन्वा, देवानीक, पारियात्र, बलस्थल, वज्रनाभ, खगग, विधृति, हिरण्याक्ष, पुष्य, ध्रुव संधि, सुदर्शन, अग्निवर्ण, मरू योगसिद्ध, प्रसुश्रु, संधि, मर्षण, महस्वान्त, विश्वसाहन, प्रसेनजित, तक्षक तथा महाभारत के अठारह दिन चले युद्ध में राम से पचीसवीं पीढ़ी में ब्रहदबल नामक सूर्यवंशी राजा जो महाभारत युद्ध में दुर्योधन के साथ थे उनकी मृत्यु अभिमन्यु के साथ युद्ध करते हुई थी। शुकदेव ने यह घटना राजा परीक्षित को बतायी थी। हस्तिनापुर का पौरव राज जब महाभारत के नायक राजा युधिष्ठिर द्यूत पराजय के पश्चात बारह वर्ष के वनवास के लिये जारहे थे समूचा हस्तिनापुर गंगा तट पर उमड़ पड़ा। लोग कहने लगे - वयम् सर्वे गमिष्यामो यत्र गन्ता युधिष्ठिरः। राम और युधिष्ठिर के लिये उनके साथ जाने की लोक भावना मनुष्य समाज की धारणा शक्ति का मूल है। युधिष्ठिर के राज्यारोहण के पश्चात इन्द्रप्रस्थ का पहला दरबार पिछले पांच हजार एक सौ पचास वर्ष से करीब दो दशाब्दी पूर्व लगा था। दिल्ली में कई दरबार लगे जिनका ब्यौरा अगले ब्लागों में वक्त की नजाकत को देखते हुए दिया जायेगा। दिल्ली का स्वातंत्र्योत्तर प्रमुख दरबारों में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, जनता पार्टी का 1977 वाला दरबार 1980 में फिर इंदिरा वापसी, इंदिरा निधन के उपरांत राजीव गांधी का दिल्ली दरबार, मांडा के राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह का मण्डल दरबार, पी.वी. नरसिंह राव की अल्पमत वाली कांग्रेस सरकार वाला दरबार, देवगौड़ा व इन्द्रकुमार गुजराल का दरबार, अटल बिहारी वाजपेयी की तेरह दिन का दिल्ली दरबार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का वाजपेयी दरबार, मनमोहन सिंह की नेतृत्त्व वाली प्रतिनिधि सरकार के दस वर्ष के दैनिक दरबार, 16 मई 2014 के दिन नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के नेतृत्त्व वाली राजग सरकार के पूर्ण बहुमत वाली राजनैतिक शैली का स्वाधीन भारत का पहला दरबार जिसमें नेतृत्त्व गुजरात के गंवई गांव से उपजे नेतृत्त्व ने बर्तानिया के अंग्रेजी अखबार गार्जियन के अनुसार अंग्रेजियत का असली विदायी दरबार। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के अपने दल के 282 सांसदों का सहयोगियों के पचास से अधिक सांसदों सहित षोडषी लोकसभा के पंद्रहवें प्रधानमंत्री को देश का शासनाधिकार उपलब्ध हुआ। मोदी ने नये उभरते हुए भारत के लिये अपना व्यक्तित्त्व देश को सौंप डाला।
मात्र नौ महीनों में दिल्ली में मतदाताओं ने केजरीवाल स्वराज का डंका बजा डाला। दिल्ली को दुनियां का अद्वितीय शहर बनाने के लिये मतदाता समाज ने केजरीवाल महाशय की मफलर, टोपी वाली झोली में 67 विधायकों की पंगत खड़ी कर दी और नारा बुलंद किया 'केजरीवाल पांच साल' पहली पारी में उन्होंने पचास दिन होने से एक दिन पहले दिल्ली की सरकार का इस्तीफा सौंप दिया। मतदाता ने जो फैसला किया है उसे केजरीवाल महाशय कैसे अंजाम देंगे यह यक्ष प्रश्न है। उन्हें प्रधानमंत्री ने विजयी योद्धा के चुनाव समर विजय पर बधाई देने में देर नहीं लगायी। उन्हें चाय पर आमंत्रित किया। अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों को सुझाव दिया कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत केजरीवाल महाशय को पूर्ण सहयोग दें। केजरीवाल महाशय की पहली मांग है दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना तथा देश के अन्य घटक राज्यों की तरह दिल्ली की पुलिस - दिल्ली सरकार के हवाले करना। दिल्ली का क्षेत्रफल 1483 वर्ग किलोमीटर, जनसंख्या 1,67,53,335 आबादी का घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर 11,297 है। साक्षरता 86.34 प्रतिशत पुरूष साक्षरता 91.03 प्रतिशत महिला साक्षरता 80.96 प्रतिशत है। प्रशासनिक जनपद घोषित 11 परंतु व्यावहारिक केवल 8 ग्राम संख्या 158 शहर संख्या 62 आबादी के घनत्व के नजरिये से दिल्ली की जनसंख्या प्रति वर्ग किलोमीटर भारत के प्रशासनिक घटकों में सर्वाधिक 11297 है। अरूणाचल प्रदेश की जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर मात्र 17 है।
भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों द्वारा जो संवैधानिक दर्जा भारत संघ, घटक राज्यों को उपलब्ध है वह नगर पालिका नगर परिषद नगर पंचायतों तथा ग्राम क्षेत्र तथा जिला पंचायतों को भी उपलब्ध कराया जाना है। दिल्ली के जाग्रत मतदाताओं ने केजरीवाल महाशय को पांच वर्ष दिल्ली में राज करने की संवैधानिक शक्ति संपात का सुअवसर प्रदान किया है। वे घोषित भी कर चुके हैं कि दिल्ली को विश्व की उत्तम नगरी के स्तर पर पहुंचायेंगे। उनका मुहल्ला सभा अभिनय, मुहल्ले के निवासियों की नागरिक आवश्यकता पूर्ति जलापूर्ति विद्युत आपूर्ति दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों को अच्छी विधि सम्मत बस्तियों में परिवर्तित करना, अस्पताल स्कूल मुहल्लों की जरूरत के अनुसार संकल्पित करना, अठावन गांवों की गांव पंचायत के अलावा दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास खंड सह क्षेत्र पंचायतें व जिला पंचायतों के बजाय ग्राम पंचायत शहरी क्षेत्रों के जो 62 म्यूनिसिपल क्षेत्र बताये गये हैं इस बात की पड़ताल करना कि क्या दिल्ली नगर निगम के छोटे छोटे उत्तर दक्षिण पश्चिम नगर निगम बनाना, भारतीय संविधान के संविधान संशोधन 73वें व 74वें संविधान संशोधन का क्रियान्वयन दिल्ली से ही क्यों न शुरू किया जाये। अपनी बारह अध्याय वाली पुस्तक स्वराज में मौजूदा पंचायती राज की दोष गणना (शार्ट कमिंग) अपनी पुस्तक का चौथा अध्याय - ग्राम सभा शीर्षक चित्र देकर प्रस्तुत किया है। वे कहते हैं पंचायतों को झाडू़ खरीदने का भी अधिकार नहीं है। दिल्ली राज्य में 158 पंचायतें हैं। जब भारत आजाद हुआ था दिल्ली के गांवों की संख्या 276 थी। इन एक सौ अठावन गांवों की ग्राम पंचायतों को ग्राम सभा का संवैधानिक दर्जा दिये जाने दिल्ली शहर में जो 62 नगर क्षेत्र बताये गये हैं उनमें कितनी नगर पंचायतें कितनी नगर परिषदें कितनी नगर पालिकायें तथा दिल्ली नगर निगम के कितने उत्तर दक्षिण पश्चिम नगर निगम हैं। इन सब नगर क्षेत्रों को दिल्ली छावनी परिषद व नयी दिल्ली नगर पालिका एन.पी.एम.सी. सहित नागर क्षेत्र तथा ग्राम क्षेत्र संबंधी संवैधानिक विवेचन के अनुसार दिल्ली को स्वतंत्र नगर राज्य सृजित करने, दिल्ली को पूर्ववत केन्द्र शासित प्रदेश का स्तर देने दिल्ली नगर निगम व छावनी परिषद नयी दिल्ली नगर पालिका और जिन गांवों को संविधान लागू होनेे के पश्चात नगर पालिका या नगर पंचायत व नगर परिषद का दर्जा दिया गया है उस पर संविधान प्रावधानों संबंधी न्यायिक विश्लेषण की तात्कालिक राष्ट्रीय आवश्यकता है। ज्योंही दिल्ली विधान सभा के सदस्य विधायक पद की शपथ लेते हैं विधायक स्पीकर का चुनाव करते हैं विरोध पक्ष नगण्य है केवल तीन विधायक विरोध पक्ष में हैं भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष को विचार करना चाहिये कि यदि उनके तीन विधायकों के विरूद्ध पड़े सारे मत उपरोक्त उम्मीदवारों में से कोई नहीं विकल्प सहित यदि उनके विजयी विधायक के विरूद्ध पड़े मत, उन्हें प्राप्त मतों से ज्यादा हैं। भारतीय जनता पार्टी को चाहिये कि वह अपने विधायकों को त्यागपत्र देने के लिये सुझाव दे, उन्हें दूसरे राजनीतिक कामों में लगाया जाये। आआपा से राजनीतिक तौर पर यह कहा जाये कि वह दल शासक दल व विरोधी दल दोनों की भूमिका निर्वाह करे।
भारत के सातवें प्रधानमंत्री ने भारतीय नगर शासन व गांव शासन को पंचायती बाना पहनाने का उत्साही कदम उठाया। भारत संघ और उसके घटक राज्यों के साथ साथ नगर व गांव सहित जिला स्तरीय शासन को संवैधानिक दर्जा त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगर क्षेत्रों के लोक शासन को वह महत्ता देने का भगीरथ प्रयास हुआ जो ग्रीक यूनानी सभ्यता के नगर राज्यों को उपलब्ध थी। श्रीमद्भागवत महापुराण मथुरा के शूरसेनी नगर राज्य का वर्णन वासुदेव श्रीकृष्ण व उनके अनुज बलराम को जब अक्रूर मथुरा लाये मथुरा के नगर राज का भव्य सिंहावलोकन महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने अठारह पुराणों में विशेष स्थान रखने वाले श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के इकतालीसवें अध्याय - पुर प्रवेश में व्यक्त किया - बीसवें श्लोक -
भारत के सातवें प्रधानमंत्री ने भारतीय नगर शासन व गांव शासन को पंचायती बाना पहनाने का उत्साही कदम उठाया। भारत संघ और उसके घटक राज्यों के साथ साथ नगर व गांव सहित जिला स्तरीय शासन को संवैधानिक दर्जा त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगर क्षेत्रों के लोक शासन को वह महत्ता देने का भगीरथ प्रयास हुआ जो ग्रीक यूनानी सभ्यता के नगर राज्यों को उपलब्ध थी। श्रीमद्भागवत महापुराण मथुरा के शूरसेनी नगर राज्य का वर्णन वासुदेव श्रीकृष्ण व उनके अनुज बलराम को जब अक्रूर मथुरा लाये मथुरा के नगर राज का भव्य सिंहावलोकन महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने अठारह पुराणों में विशेष स्थान रखने वाले श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के इकतालीसवें अध्याय - पुर प्रवेश में व्यक्त किया - बीसवें श्लोक -
ददर्श सांस्कारिक तुंगगोपुर द्वाराम् वृहद् हेम कपाट तोरणम्।
ताम्रारकोष्टाम् परिकापुरा सदामुद्यान रम्यो पवनोपशोभिताम्।।
भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री भारत में एक सौ स्मार्ट शहर खड़े करना चाहते हैं। जरूरत इस बात की है कि महाभारत कालीन शहर व्यवस्था का भी जायजा लिया जाये। प्रधानमंत्री जी ने योजना आयोग का कायाकल्प कर उसे नीति आयोग का नया कलेवर तथा घटक राज्यों के मुख्यमंत्रियों को देश की नीति निर्धारण में प्रतिभागिता का आह्वान किया है। दिल्ली के मतदाता समाज ने सिस्टम बदलाव के लिये जो राय व्यक्त की है उसका पहला प्रयोग दिल्ली में ही हो। गांव पंचायत क्षेत्र पंचायत नगर राज्य तथा दिल्ली की व्यवस्थायें संघ सरकार व स्थानीय राज्य सरकार में कैसे तालमेल बैठे ? यह निश्चित करने के लिये भारत सरकार के संविधान संशोधन 73वां व 74वां पर पिछले पच्चीस वर्षों से जो पहल नहीं हो पायी है पंचायतों को संवैधानिक स्तर संविधान ने दिया है पर जमीनी वास्तविकता यह है कि हिन्दुस्तान के म्यूनिसिपल बोर्ड व डिस्ट्रिक्ट बोर्ड जितनी लोकोपकारी जन सेवा बर्तानी राज में कर लेते थे संविधान लागू होने के पश्चात म्यूनिसिपल बोर्ड व डिस्ट्रिक्ट बोर्ड घटक राज्य सरकारों के लोकल सेल्फ गवर्नमेंट विभागों के बन्दी होगये हैं। शहरी आबादी दिन दूनी रात चौगुनी बढ़़ रही है पर शहर प्रबंधक म्यूनिसिपल बोर्ड पिछले पैंसठ वर्षों में राज्य सरकारों की दया पर जीने वाले संगठन मात्र रह गये हैं। इसलिये पहली जरूरत यह है कि डिस्ट्रिक्ट बोर्ड जिन्हें अब जिला पंचायत/जिला परिषद नाम दिया गया है उनकी तथा म्यूनिसिपल बोर्ड स्थानीय शासन प्रबंधन पर नीति आयोग बहस मुबाहसा कर तय करे कि भारत को कैसे शहर संस्थान तथा जिला संस्थान चाहिये। गांव पंचायत जिला पंचायत को संवैधानिक दर्जा मिला है नगर पालिकाओं की जो संवैधानिक स्थिति उच्चतर हुई है राज्यों के अधिकारों से पंचायत राज तथा नगर प्रबंधन व्यवस्था को सिस्टम सुधार करते हुए स्थानीय शासन अधिकार प्रतिनिधायन होना तात्कालिक आवश्यकता है। ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत न्याय पंचायत जिला पंचायतें अस्तित्व में तो हैं पर उन्हें अधिकार नहीं दिये जा सके हैं। दिल्ली के मतदाताओं ने जो पहल की है दिल्ली से ही स्मार्ट सिटी वाला प्रावधान संकल्पित हो। केन्द्र सरकार दिल्ली राज्य सरकार से प्राप्त होने वाले प्रस्तावों पर विचार कर संवैधानिक दिशा बोधक दिल्ली के ग्राम सरकार तथा नगर सरकार का खाका सुनिश्चित कराने के लिये नेशनल कैपिटल रीजन सरकार का ढांचा संकल्पित करे।
सिविल सोसाइटी और मानवाधिकार सहित विभिन्न किस्मों के असरकारी संगठन विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिये कार्यरत हैं। विदेशी दान दाताओं से अपने लक्ष्य पूर्ति हेतु वित्तीय सहायोग भी लेते रहते हैं। ऐेसे स्वयं सेवी संगठनों तथा देश के संविधान के अनुकूल राजनीतिक क्रियाकलाप संपन्न करने वाले विभिन्न राजनीतिक पक्ष जब सत्ता के भागीदार बनते हैं अपने विरोधियों के खिलाफ जायज नाजायज दोनों किस्म के आरोप लगाया करते हैं सिविल सोसाइटी व एन.जी.ओ. समूहों के सक्रिय चिंतन पोखर तथा संविधान प्रावधानों के अनुसार देश में जनतांत्रिक व्यवस्था का संचालन करने वाले सत्ता पक्ष के बीच विवाद भी उठते हैं। देश के उस राजनीतिक वर्ग को भी अपने पांव फैलाने का मौका मिलता है जो विपक्ष के बेंचों में बैठा है। राजनीतिक क्षितिज में कहीं कहीं वंशवादी परम्परा भी अपना प्रभुत्व प्रदर्शित करती है। बहुत कुछ नेतृत्व संभाल रहे व्यक्तित्त्व पर भी निर्भर करता है कि उसका अपना स्वजीवन आदर्श क्या है ? आ.आ.पा. के विचार पोखर ने दिल्ली विधान सभा के 2013 के चुनाव व तत्काल पश्चात होरहे भारतीय संसद के चुनाव के वक्त यह व्यक्त किया था कि देश का बहुत बड़ा वर्ग नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को भारत की राजसत्ता सौंपने का प्रबल समर्थक है। वे एक विचारक के नाते आआपा के चिंतन पोखर के तौर पर यह स्वीकार कर रहे थे कि नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के मुकाबले उनका पक्ष कमजोर है।
केजरीवाल महाशय को दिल्ली के मतदाता ने पांच वर्ष दिल्ली संचालन का अवसर उपलब्ध कराया है। केजरीवाल महाशय राजनीति चौपड़ के मैदान में अपेक्षाकृत नये खिलाड़ी हैं। जब उन्होंने स्वराज नामक बारह अध्याय वाली पुस्तक लिखी उसकी भाषा और योगेन्द्र यादव की भाषा में धरती आसमान का अंतर है। एक छोटा सा उदाहरण - उन्होंने भोंडसी गांव के बारे में प्रस्तुत किया। उन्होंने गांव में हुए वृक्षारोपण के बारे में पुस्तक के चौथे अध्याय में वृक्षारोपण से जल स्तर के एकदम नीचे चले जाने की बात लिखी। अगर वे भोंडसी गांव में भारतीय राजनीति के प्रबुद्ध व्यक्ति दिवंगत चन्द्रशेखर के भोंडसी आश्रम का उल्लेख भी अपनी पुस्तक में कर लेते चन्द्रशेखर जी ने राजनीतिक क्षेत्र में जो सैद्धान्तिक मानक कायम किये उनके बारे में केजरीवाल महाशय को जानकारी न हो यह संभव है पर भारतीय राजनीति के सूक्ष्म अध्येता योगेन्द्र यादव को तो चंद्रशेखर के राजनीतिक तौरतरीकों की पूरी पूरी तस्वीर मालूम है। लगता है देर से ही सही केजरीवाल महाशय - योगेन्द्र यादव के समीक्षित विचार पथ के राही बन रहे हैं। बात बहुत अच्छी है दिल्ली में उनसे नौ महीने पहले नरेन्द्र दामोदरदास मोदी शासन की दस्तक दी है। म्यान में एक तलवार पहले से ही प्रविष्ट है। वे दिल्ली विधान सभा के विजयी नेता के नाते दिल्ली में दस्तक दे चुके हैं। उन्हें चाहिये कि पारम्परिक परामर्श कर दिल्ली विधान सभा में सर्वसम्मत प्रस्ताव लावें कि भारतीय संविधान में 73वें व 74वें संविधान संशोधनों के परिप्रेक्ष्य में 1. दिसंबर 1991 में दिल्ली के केन्द्र शासित देश से घटक राज्य विधान सभा गठन 2. श्रीमती शीला कौल द्वारा दिल्ली नगर निगम के तीन भाग करना। 3. दिल्ली के नेशनल कैपिटल रीजन को भारतीय संघ के इतर घटक राज्यों की भांति पूर्ण राज्य का स्तर उपलब्ध कराना - दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली पुलिस आदि का प्रबंध दिल्ली सरकार को सौंपने से कहीं दोहरे प्रबंधन का दोष तो उत्पन्न नहीं होगा ? केन्द्र सरकार से अनुरोध करें कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने बाबत संवैधानिक स्थिति स्पष्ट हो, राजनीतिक दल निर्मित करना उनका स्वाधिकार है। आज हिन्दुस्तान की जरूरत जनसत्तात्मक राजनीतिक सामंजस्य की है। दिसंबर 2013 में उनका मुकाबला श्रीमती शीला कौल, श्रीमती सोनिया गांधी , श्री राहुल गांधी तथा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से था। आज उनका सामना ऐसे व्यक्ति से है जिसका अपना निजी या पारिवारिक स्वार्थ कुछ भी नहीं है। कुनबापरस्ती अथवा कुनबे का वंश परम्परागत राज वाला आरोप मोदी पर नहीं जड़ा जा सकता। जिस म्यान में नरेन्द्र दामोदरदास मोदी रूपी शासन तलवार है उसमें घुसने से पहले केजरीवाल महाशय को सोच विचार कर ही कदम उठाने लाभकर होंगे।
दिल्ली की पहली जरूरत सरकार के समानांतर अहैतुक समाजसेवी - ‘सेवा धर्म परम गहनो’ का अनुसरण करने वाले अराजनीतिक संगठन की जरूरत है। दिल्ली के नंगे भूखों को कूूड़़ा बीन कर जीने वाले गली गली के बच्चों की और किशोरों की करूणापरक जीवन में लाने की जरूरत है। दिल्ली के वंचितों को राजनीतिक पाखंड से भरमाया नहीं जा सकता। जवाहरलाल नेहरू व गुलजारी लाल नंदा ने भारत सेवक समाज व भारत साधु समाज की जो नींव डाली आज हमें मानवाधिकार समर्थक एन.जी.ओ. के बजाय ऐसे करूणामूलक व्यक्तियों की एक पंगत खड़ी करने की जरूरत है जिनका अपना निजी हित साधने की जरूरत न रह गयी हो। जो पर हित सम धरम नहिं कोई पर यकीन करते हों, सत्ता शिखर आरूढ़ होने के बजाय जो मुहल्ला दर मुहल्ला नागरिक समस्याओं का निदान खोज सकें। अंग्रेजी भाषायी अखबारों ने विज्ञापन मूलक सम्पादकीय परम्परा का सूत्रपात कर खबरों के संसार में हर व्यक्ति को बिकाऊ बाजारी चौराहे पर ला पटका है। इसे लोग पेइंग गेस्ट निष्क्रय देकर आतिथ्य ग्रहण करने का तरीका बताते हैं। पेइंग गेस्ट व पेड न्यूज़ दोनों विचार विचार शैली के उपांग हैं। यही राजनीतिक उपधर्म राजनीतिक पाखंड का जन्मदाता है। इसलिये पाखंड से परहेज समय की पुकार है।
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