Saturday, 4 July 2015

मनरेगा का तात्कालिक कायाकल्प मेक इन इंडिया का प्राणवायु है।

गांधी के सिपहसालारों में दो व्यक्ति प्रमुख थे। एक थे महात्मा गांधी के ‘आध्यात्मिक-स्वराज’ के दर्शन-व्याख्याता संत विनोबा जिन्हें महात्मा ने 1942 में पहला सत्याग्रही घोषित किया तथा दूसरे थे 26 जनवरी 1930 को रावी के तट पर पूर्ण स्वराज का उद्घोष करने वाले जवाहरलाल नेहरू। पंडित नेहरू उम्र में संत विनोबा से 6 वर्ष बड़े थे। दोनों में आत्मिक मैत्री भाव था। एक दूसरे के विचारों का सम्मान किया करते थे। हास्य विनोद भी दोनों में खूब चलता। पंडित नेहरू बिना पूर्व सूचना के भी कभी-कभी पवनार पहुंच जाया करते। विनोबा शब्द सृष्टा व्यक्तित्त्व थे। पंडित नेहरू उनसे मिलने गये तो विनोबा जी ने उनका आदर सत्कार करते हुए कहा - पंडित जी ‘राज्यान्ते नरकम् ध्रुवम’। यह आध्यात्मिक मजाक था। पंडित नेेहरू प्रखर गीताभ्यासी थे उन्होंने विनोबा जी से पूछा - विनोबा जी मैं आपसे क्यों मिलने आया ? विनोबा ने पंडित नेहरू से कहा - धर्मशास्त्र कहता है ‘पंक्तिभेदम् न कर्त्तव्यम् न गच्छेत रौरवम् महत्’। यह चर्चा महात्मा गांधी के आध्यात्मिक और राजनीतिक उत्तराधिकारी के बीच हुई। 
वैंकैया नायडू महोदय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी मंत्रिमंडल में सांसदीय मामलात देखने के अलावा नगर विकास मंत्रालय के भी अधिष्ठाता हैं। हिन्दुस्तान तो गांवों का देश था पर 2011 की जनगणना अनुसार कानूनन घोषित शहर आबादी चालीस प्रतिशत है। राज्य सरकारों द्वारा अभी तक शहरी आबादी का पूरा पूरा खाका तैयार नहीं किया गया है पर कस्बायी गांवों सड़कों के किनारे के गांवों गांव या रूरल एरिया कहना अपने आप को धोखा देना है। गहराई में घुसा जाये तो इस समय पैंतीस प्रतिशत शहरी आबादी के साथ साथ देश में अर्ध शहरी आबादी भी पैंतीस प्रतिशत बढ़ गयी है। जनगणनाकार भले ही कहते रहें कि आज भी भारत की साठ से पैंसठ प्रतिशत जनसंख्या गांवों में रहती है। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने यहूदियों के देश इजरायल जाने के बारे मे संकल्प लिया है। इजरायल की प्रगति इजरायल के यहूदी वर्ग का भारत में भी उद्यमिता योगदान रहा है। पंडित नेहरू इजरायल की विकास पद्धति के प्रशंसक थे। उन्होंने विकेन्द्रित अर्थांग के पुरोधा सहकारी आंदोलन के कर्णधार वैकुंठ ल. मेहता से कहा था - वैकुंठ भाई इजरायल की बस्ती विकास नीति को अपने देश के गांवों में भी प्रयोग करें। इजरायल के ग्राम विकास कार्यक्रम को भारतीय गांवों में प्रयोग करने के लिये वैकुंठ ल. मेहता ने योजना आयोग के ग्रामीण उद्यम विशेषाधिकारी झबेर भाई पी. पटेल और उनके सहयोगी एन.टेकुमल्ला को रूर्बन सोसाइटी का कार्य सौंपा। भारत के गांव किस तरह रूर्बन सोसाइटी बनें पटेल टेकुमल्ला युगल ने डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद के गांव जीरादेई का रूर्बन सोसाइटी का रोडमैप तैयार कर पंडित नेहरू को सौंपा। पंडित नेहरू ने रूर्बन सोसाइटी कार्यक्रम को हार्दिक समर्थन दिया। यह योजना सघन क्षेत्र योजना के नाम पर 1953 से 1963 तक बिहार उत्तर प्रदेश राजस्थान और गुजरात के कई गांवों में सफलतापूर्वक चली। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने रूर्बन मिशन को डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में श्रीगणेश करने का आह्वान किया। 
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन प्रभाव की सदर श्रीमती सोनिया गांधी ने संप्रग सरकार का मार्गदर्शन करने के लिये अपने कुछ विश्वस्त सहयोगियों के तत्वावधान में संविधानेतर उच्च सत्ताक एन.ए.सी. का गठन कर डाक्टर मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली प्रतिनिधि सरकार की नीति नियंता का गुरूभार अपने कंधों पर ही रखा। उन्होंने नेशनल रूरल इम्प्लायमेंट गारंटी कानून संसद के दोनों सदनों से पारित करा कर सन 2006 से स्कीम का श्रीगणेश शुरू कर दिया। गांव के लोगों में बेरोजगारी से रूखसत पाने वाली साल में 100 दिन रोजगार गारंटी वाली इस योजना ने गांवों के कुशल श्रमिक यथा चर्खे पर सूत कातने वाली महिला श्रम शक्ति हथकरघा पर कपड़ा बुनने वाले जुलाहे हैंडनिटिंग के लिये निटिंग यार्न की कताई करने वाली महिलाओं जूते बनाने वाले चर्मशिल्पियों मिट्टी के बर्तन पानी का घड़ा दिये गमले फूलदान बनाने वाले कुम्हारों बांस बेंत कारीगरी करने वाले कुशल दस्तकारों रस्सी बनाने वालों चटाई बनाने वाले कारीगरों हस्तकौशल व दस्तकारी के जरिये जीविका कमाने वाले लोगों की सुध न तो एन.ए.सी. के चिंतकों ने ली न ही हिन्दुस्तान की सवा सौ पुरानी राजनीतिक विरासत को अपने कंधों में लेकर नेतृत्व करने वाली श्रीमती सोनिया गांधी को ही यह विचार आया कि ये सभी दस्तकार भी गरीबी के दिन बिता रहे हैं। इन्हें भी स्किल्ड लेबर पेटे रोजगार गारंटी का लाभार्थी संकल्पित किया जाये। कांग्रेस अध्यक्षा महोदया की अगुआई में शुरू रोजगार गारंटी योजना ने भयावह पंक्तिभेद का रास्ता अपनाया। पंडित नेहरू पंक्तिभेद से परहेज करते थे क्योंकि उन्हें संत विनोबा की बात सदा याद रहती कि पंक्तिभेद करना रौरव नरक के रास्ते अपने लिये खोलना है। 
गांवों में रोेजगार के साधन शहरी इलाकों के मुकाबले बहुत सीमित हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अभी केवल उन्हीें रोजगार चाहने वालों के लिये उपलब्ध है जो हाड़तोड़ मेहनत कर रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में लग सकते हैं। पिछले दस वर्षों में केवल आर्थिक वर्ष 2009-10 में ही अधिकतम 54 दिन रोजगार गारंटी लाभार्थियों वाला आंकड़ा चालीस से नीचे था याने 100 दिन वाली रोजगार गारंटी में अधिकतम 54 दिन और न्यूनतम 39 दिनों का रोजगार एक वर्ष में मिला। इसलिये हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह  के इस तर्क में वास्तविकता है कि स्किल्ड लेबर को भी रोजगार गारंटी से जोेड़ा जाना चाहिये। वीरभद्र सिंह जब डाक्टर मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में एम.एस.एम.ई. केबिनेट मंत्री थे उन्होंने जयपुर की एक खादी सभा में बयान दिया था कि कताई बुनाई के स्किल्ड लेबर को वे रोजगार गारंटी से जोड़़ने के लिये मंत्रिमंडल में प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। भ्रष्टाचार मामले में फंसे होने के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से त्याग पत्र देना पड़ा। प्रधानमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष उनसे पल्ला झाड़ना चाहते थे पर वीरभद्र सिंह अपनी सांगठनिक योग्यता के बल पर हिमाचल सरकार पर फिर काबिज होगये। उन्होंने जो स्किल्ड लेबर वाला उपयोगी सुझाव रखा था वह धरा ही रह गया। 
नगर विकास मंत्री ने शहरी विकास के समानांतर शहरी रोजगार संवर्धन से ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया संकल्प को क्रियान्वित करने के लिये उतना ही भगीरथ प्रयास करना है जितना गंगा को धरती पर उतारने के लिये अंशुमान से लेकर भगीरथ तक राजा सगर की संतानों की तीन पीढ़ियों को करना पड़ा था। दस्तकारियों हस्तकलाओं सहित हाथ की कारीगरी के जरिये उद्यम करने वाले पुरूष और स्त्रियों को रोजगार गारंटी का लाभ मिले इसके लिये यह जरूरी है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में स्किल्ड लेबर के कार्य भी जोड़े जायें ताकि दस्तकार भी योजना के लाभग्राही बन सकें। सही तरीका तो यह होता कि मनरेगा से रूरल शब्द ही हटा दिया जाये और योजना का शीर्षक महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना निश्चित किया जाये साथ ही रोजगार गारंटी निधि का 50 प्रतिशत स्किल्ड लेबर को रोजगार गारंटी के लिये दिया जाये। नगर विकास मंत्री एम.एस.एम.ई. केबिनेट मंत्री तथा ग्राम विकास केबिनेट मंत्री से विमर्श कर हाथ की दस्तकारियों व परम्परागत ग्रामीण उद्योगों के कारीगरों को रोजगार गारंटी योजना का लाभार्थी सुनिश्चित करें। चूंकि जूता चप्पल बनाने हाथ कागज बनाने वाले रेशों व बांस बेंत के कारीगर कुम्हार दर्जी आदि सभी दस्तकारियां यदि रोजगार गारंटी से जोेड़ी जायेंगी तो हाथ से काम करने वाले दक्ष कारीगरों को रोजगार गारंटी का सहारा मिल सकता है। अभी तक ये कारीगर दिल्ली हाट व्यवस्था सरीखी इंतजामियत के तहत बिचौलियों द्वारा शोषित हैं। रूर्बन सोसाइटी का प्रस्तोता उस कार्यक्रम को 10 वर्ष सफलतापूर्वक संचालित करने वाली खादी ग्रामोद्योग आयोग इन्टेंसिव एरिया स्कीम को फिर पुनर्जीवित कर दस्तकारी संबंधी सभी काम खादी ग्रामोद्योग आयोग को पुनर्गठित कर उसे सौंपे जायें। ग्रामीण क्षेत्रों के स्किल्ड रोजगार तथा शहरी क्षेत्रों का समूचा हस्तकौशल स्किल्ड लेबर आयोग को सौंपा जाये तथा आयोग के सदस्य भी पूर्णकालिक हों। आयोग में उपाध्यक्ष व सदस्य सचिव के पदों को पुनर्जीवित कर खादी ग्रामोद्योग आयोग को वह स्तर फिर उपलब्ध कराया जाये जो वैकुंठ ल. मेहता व प्राणलाल सुन्दरजी कापड़िया के अध्यक्ष सदस्य सचिव काल में मार्च 1963 तक बरकरार था। मनरेगा - महात्मा गांधी नेशनल रूरल इम्प्लायमेंट गारंटी का कायाकल्प ही ग्रामीण व शहरी हाथ के रोजगारों को पुनर्जीवित कर फिर गांधी आर्थिकी को पुनर्जीवन दिया जा सकता है। वैंकेया नायडू महोदय की पहल रूरल इम्प्लायमेंट गारंटी को नेशनल इम्प्लायमेंट (दोनों - रूरल व अर्बन) गारंटी का रोडमैप बना सकती है।
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