गूगल वैश्विक अधिपति जय जय - सुन्दर राजन चारी जय हो।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने गूगल के नये अल्फा (अक्षराणाम् अकारोस्मि) तैंतालीस वर्षीय सुंदर राजन पिचारी को दिल से बधाई देते हुए गूगल में सुंदर राजन को मिली महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करने में हार्दिक मंगलकामनायें व्यक्त की हैं। गूगल के कार्यकारी अध्यक्ष एरिक स्केमिडिट ने अपनी अभिव्यक्ति में कहा - ‘मैं वास्तव में सुंदर राजन पिचारी की दूरदर्शिता तथा कुशाग्र बुद्धिमत्ता से अभिभूत हूँ, वे एक महान कार्यकारी होंगे’। खड़कपुर में सुंदर राजन पिचारी के प्राध्यापक रहे एस के राय ने उनकी सादगी की सराहना की। गूगल की नयी कंपनी अल्फाबेट आई एन सी खोजकोपी के अलावा अनेक नयी इकाइयों को प्रतिष्ठित करेगी। लैटिन व अंग्रेजी में लैटिन भाषा में चैबीस अक्षर (अल्फा) हैं। रोमन लिपि में अल्फा संख्या बढ़ कर छब्बीस होगयी। हिन्दुस्तान में नटराज के नृत्य को वाणी का उद्गम माना गया है। खोज इस बात की करनी है कि देवाधिदेव महादेव ने नटराज-नृत्य कब किया ? क्या यह ताण्डव नृत्य क्षीर सागर मंथन के उपरांत जब शंकर जी विषपान किया विषपान करने से पूर्व विश्वमोहिनी रूप से वे प्रभावित हुए। देखना यह है कि महाताण्डव के पश्चात शंकर जी ने डमरू बजाया। उससे नौ और पांच आवाजें या ध्वनियां निकलीं यही ध्वनियां हिन्दुस्तान के स्वर व्यंजन के इक्यावन उच्चारण हैं। लैटिन के 24 रोमन के 26 तथा भारतीय वाङमय के 51 उच्चारण वाणी, बोली या भाषा का मूल स्त्रोत हैं। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एबट ब्लेयर ने साढ़़े चार हजार वर्ष पूर्व निर्मित नटराज नृत्य की कांस्य मूर्ति भारत के प्रधानमंत्री को सौंपी।
हमारी इस धरती में अनेक वाणियां बोलियां भाषायें हैं। मनोरमा इयर बुक 2015 के अनुसार मंदारिन जो कि चीन की भाषा है, बोलने वाले देसी जन 84.50 करोड़ लोग हैं। समूची दुनियां में सवा अरब लोग मंदारिन बोलते हैं। अंग्रेजी बोलने वाले नेटिव 32 करोड़ अस्सी लाख हैं। दुनियां भर में डेढ़ अरब लोग अंग्रेजी बोलते हैं ऐसा भाषायी सर्वेक्षण करने वालों का मत है। हिन्दी हिन्दुस्तानी और उर्दू बोलने वाले नेटिव लोग 24 करोड़ तथा समूची संख्या 60 करोड़ पचास लाख है। पंजाबी बोलने वाले 11 करोड़ बंगाली बोलने वाले 15 करोड़ मराठी बोलने वाले साढ़े सात करोड़ तैलुगु भाषी सात करोड़ तमिल भाषी साढ़े 6 करोड़ सारे विश्व में तमिल भाषी साढ़े सात करोड़ गुजराती भाषी साढ़े चार करोड़ मलयालम बोलने वाले साढ़े तीन करोड़ कन्नड़ बोलने वाले नेटिव साढ़े तीन करोड़ उडि़या भाषी सवा तीन करोड़ सिन्धी बोलने वाले दो करोड़ असमी डेढ़ करोड़ इंटरनेट में रोमन लिपि प्रयुक्त करने वाली यूरप की सभी भाषाओं रूसी भाषा के अलावा मंदारिन और अरबी भाषा को इंटरनेट में बहुमूल्य स्थान मिला हुआ है। भारत की भाषाओं में हिन्दी, बांग्ला तथा पंजाबी बोलने व समझने वाले लोगों की संख्या का सही सही अनुमान विश्व भाषा सूची में भोजपुरी बोलने वाले 4 करोड़ अवधी बोलने वाले पौने दो करोड़ मारवाड़़ी बोलने वाले 3 करोड़ मैथिली बोलने वाले साढ़े तीन करोड़ राजस्थानी बोलने वाले 2 करोड़ लगभग 20 करोड़ लोग हिन्दी की इन 24 भाषाओं को बोलते। इस प्रकार भारत में हिन्दी बोलने वाले लोगों की संख्या चालीस करोड़ से ज्यादा है। विश्व की एक दर्जन से ज्यादा भाषायें लैटिन अथवा रोमन लिपि प्रयोग में लाती हैं। इन्हें इंटरनेट में विशेषाधिकार प्राप्त है। मंदारिन अरबी तथा मलय भाषाओं के लिये अलग अक्षर हैं। इन तीनों भाषाओं ने इंटरनेट में अपने लिये एक विशेष दर्जा पा लिया है। भारत की भाषाओं में नागरी के अलावा फारसी लिपि (उर्दू के लिये) गुरूमुखी पंजाबी के लिये गुजराती लिपि गुजराती के लिये कन्नड़ लिपि कन्नड़ भाषा के लिये मलयाली लिपि मलयाली भाषा के लिये तमिल लिपि तमिल भाषा के लिये तेलुगु लिपि तेलुगु भाषा के लिये उडि़या लिपि उडि़या भाषा के लिये बांग्ला लिपि बांग्ला भाषा के लिये असमी लिपि असमी भाषा के लिये मइती लिपि मइती भाषा के लिये तथा नैपाली मराठी कोंकणी हिन्दी संस्कृत सिंधी भाषायें नागरी लिपि को प्रयोग में लाती हैं। नागरी लिपि के अलावा जो शेष दस लिपियां हैं उनके स्वर व्यंजन उच्चारण नागरी की तरह होने के कारण पंजाबी गुजराती कन्नड़ मलयाली तमिल तेलुगु उडि़या बांग्ला असमी और मइती लिपियों में ट्विटर फेसबुक आदान प्रदान करने से भारत के उन लोगों को भी इंटरनेट का तात्कालिक लाभ मिलेगा जो रोमन लिपि तथा अंग्रेजी भाषा में पारंगत नहीं हैं। ट्विटर में रोमन लिपि में संवाद भेजने से वाणी संशयग्रस्तता जोर मारती है। इसलिये हिन्दुस्तानी लोग जो ट्विटर में संदेशा भेजते हैं उन्हें गूगल के नये अधिपति श्री सुंदर राजन से एक मार्मिक अपील करनी है कि आज हिन्दुस्तान का बारह प्रतिशत समाज अंग्रेजी जानता है समझता है बोलता व लिखता भी है किन्तु 88 प्रतिशत भारतीयों की हार्दिक अपेक्षा है अपने देशवासी सुंदर राजन से। वह अपेक्षा है जिस तरह मंदारिन अरबी और मलय भाषायें इंटरनेट में अपना बोलबाला रखती हैं हिन्दुस्तान की भाषाओं के लिये भी श्री सुंदर राजन कोई नया रास्ता ईजाद करें। शुरूआत नागरी, गुरूमुखी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयाली लिपियों से की जाये। हिन्दुस्तान में उर्दू भाषी भी सत्रह करोड़ हैं इसलिये उर्दू को भी इंटरनेट में जोड़ा जाये। हिन्दुस्तान में मलिक मोहम्मद जायसी नामक अवधी भाषा में काव्य रचना करने वाले कवि थे। उनकी महत्वपूर्ण कृति पद्मावत महाकाव्य है। पद्मावत को उन्होंने अवधी भाषा तथा फारसी लिपि में लिपिबद्ध किया। कवि अपने जन्मस्थान के बारे में व्यक्त करते हैं - जायस नगर धरम अस्थानू तहां जाय कवि कीन्ह बखानू। कवि ने ईश्वर शक्ति की व्यापकता व्यक्त करते हुए पद्मावत में लिखा - विधना के मारग हैं तेते सरग नखत तन रोेआं जेते।
प्राचेतस वाल्मीकि ने रामायण रचा। रामायण में अनेक काण्ड हैं जिनमें से एक काण्ड का नाम सुन्दरकाण्ड भी है। तमिल भाषी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी बाल गंगाधर तिलक व महात्मा गांधी युग के परम वैष्णव विचारक होने के साथ साथ वाल्मीकि रचित रामायण के अंग्रेजी भाषा में रामायण का भाष्यांतरण करने वाले उद्भट मनीषी थे। वे आन्वीक्षिकी षडविधा राजनीति के परमज्ञाता भी थे। उनमें राजनीति वेत्ता के वे सभी गुण विद्यमान थे जिनको योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण ने अपनी 125 वर्ष की जीवनी में भारत में ज्ञान मार्ग का नया स्त्रोत उदित कराया। रामायण के सुन्दरकाण्ड की उन्होंने भूरिभूरि प्रशंसा की जिसमें 68 सर्ग तथा 2865 श्लोक हैं। आदि कवि वाल्मीकि के अलावा भारतीय भाषाओं में रामकथा संकीर्तन करने वाले गोस्वामी तुलसीदास व तमिल भाषा में कंबन रामायण की भी अपनी महत्ता है। तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में सेतुबंध रामेश्वरम है जहां मर्यादापुरूषोत्तम दाशरथि राम ने नल नील वानरों की सहायता से सेतु बांधा। आज भारत की जरूरत प्राचीन सांस्कृतिक भारत और आधुनिक जगत के वैज्ञानिक भारत के बीच सेतु बांधने का महत्तम कार्य महाशय सुंदर राजन द्वारा संपन्न हो सकता है। तमिल मलयाली तेलुगु व कन्नड़ इन चार भाषाओं सहित पंजाबी गुजराती मराठी कोंकणी उडि़या बांग्ला मइती और असमी भाषायी लिपियों में हिन्दुस्तान का हर ट्विटर - तैत्तरीय उपनिषद - तीतर बटेर का वाणी विलास वाला आदान प्रदान हर हिन्दुस्तानी अपनी मातृभाषा में संपन्न कर सके यह भारत को सांख्य दर्शन का सही सही रास्ता सुझाने का एकमात्र उपाय है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू महाशय तेलुगु लिपि व तेलुगु भाषायी इंटरनेट संवर्धित करने के प्रेरक हैं। लंका विजय के पश्चात जब श्रीलंका के नागरिकों का शिष्टमंडल दाशरथि राम से मिला उन्होंने अपना मंतव्य दाशरथि रामचंद्र के समक्ष प्रस्तुत करने के लिये लक्ष्मण का सहारा लिया। दाशरथि राम ने अपने वैमात्र अनुज लक्ष्मण से कहा - अपि सुवर्णमयि लंका न मे लक्ष्मण रोचते जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। गूगल के नये अधिपति सुंदर राजन भारत की लिपियों और भाषाओं को इंटरनेट में वही दर्जा दिलायें जो मंदारिन और अरबी भाषा सहित मलय भाषा ने ग्रहण कर लिया है।
भारत के प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया के पक्षधर हैं। इस मुल्क में ज्ञान मार्ग का पहला मसीहा कपिल हुए। कपिल के पिता कर्दम और माता देवहूति स्वयं ज्ञान सागर थे। कपिल ने जिस ज्ञान गंगा का वितान फैलाया वह आज के सांख्य दर्शन सांख्य शास्त्र और साधारण से साधारण व्यक्ति को उसकी अपनी जबान और वाणी के माध्यम से अज्ञान की गरीबी से उबरना, देश में जन जन में खुशहाली का वातावरण बने, भारत के एक अरब सताईस करोड़ लोगों के दो अरब चैवन करोड़ हाथों को काम करने का मौका मिले, हस्तकौशल दस्तकारी छोटे से छोटे काम के लिये भी तत्परता तभी सामने आयेगी जब हिन्दुस्तान के 70 प्रतिशत लोग जो गांवों में रहते हैं उनकी आर्थिकी सुधार का राष्ट्रीय नजरिया सामने आये। हर हाथ में मोबाइल तथा हर नागरिक का इंटरनेट से जुड़ाव करने के लिये रोमन लिपि के बजाय भारतीय लिपियों यथा गुरूमुखी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयाली, असमी, कोंकणी, उड़िया तथा फारसी लिपि जिसमें उर्दू लिखी जाती है इन लिपियों के माध्यम से हिन्दुस्तान की हिन्दीतर भाषा भाषी जनता में यह विश्वास जगाया जाये कि अंग्रेजी के बदले उन पर हिन्दी न लादी जाये। मैकोलाइट अंग्रेजी के जुए में भारतीय समाज बंधा हुआ है। देश में अंग्रेजी जानने वाले बारह से पंद्रह करोड़ लोग हैं। अंग्रेजी भाषा के मर्म को समझने वाले लोगों की संख्या चार करोड़ से ज्यादा नहीं है। वे चार करोड़ हिन्दुस्तानी जो अंग्रेजी भाषा से जुड़े हैं उनमें भी भाषा के मर्म को समझने वाले लोगों की संख्या प्रतिशत में देखें तो एक प्रतिशत के आसपास ही है। याने एक अरब सताईस करोड़ भारतीयों में लगभग एक करोड़ लोग अंग्रेजी भाषा का सही सही उपयोग कर पाते हैं। इसलिये हिन्दुस्तान की तात्कालिक भाषायी जरूरत संविधान दर्ज भाषा सूची की भाषाओं को लोकसभा व राज्यसभा में समान स्तर मिलना चाहिये। राज्य विधानमंडलों में राज्य की मुख्य भाषा तथा भाषायी अल्पसंख्यकों की भाषा का ही उपयोग करने वालों के लिये सुंदर राजन गूगल के नये साधन स्त्रोत अल्फाबेट आई एन सी के जरिये भारतीय भाषाओं और लिपियों को मंदारिन व अरबी और मलय की तरह इंटरनेट में अधिकार संपन्न कराने की दिशा में प्रयत्नशील हों।
अल्फाबेट - अक्षर संसार में लैटिन के 24 उच्चारण रोमन के 26 उच्चारण के समानांतर नागरी, गुरूमुखी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयाली आदि सभी लिपियों लिखी जाने वाली सभी भारतीय भाषाओं उच्चारण श्रेष्ठता का लाभ इंटरनेट से मिले। संसार का प्रथम ध्वनि विज्ञान शास्त्र - ध्वन्यालोक के ‘भिन्न रूचिर्हि लोके’ का सहारा लिया जाये। सुंदर राजन के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं के पर्यायवाची शब्दकोष में अंग्रेजी सहित पहले उन भारतीय भाषाओं पंक्तिबद्ध किया जाये जिनको राज्य की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। डिजिटल क्रांति लाने के लिये इंटरनेट में भारतीय लिपियां अत्यंत उपयोगी साधन हैं। भारतीय संसद को चाहिये कि संसद में अंग्रेजी सहित भारतीय संविधान सूचीगत भाषाओं में वक्तव्य देने को प्रोत्साहित किया जाये। सुंदर राजन पिचारी भारतीय भाषाओं के इंटरनेट आकांक्षियों की अपेक्षा की पूर्ति करेंगे तथा अपने नाम को सत्यम् शिवम सुंदरम् की भांति विश्व में गुलजार करेंगे।
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