ओडिसी साडी पहने ओडिसी नृत्य गोप बंधु चौधरी की आर्थिकी ही
हिंदुस्तान के गरीब जिले ननरंगपुर का रोज़गार चेहरा बदल सकती है
दिवंगत प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह (1902-1987) स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ साथ भारतीय किसानों के मसीहा थे। उनके पिचहत्तरवें जन्मदिन पर उनके प्रशंसकों ने उन्हें पिछत्तर लाख रूपये की थैली भेंट की। चौधरी साहब ने इस पूंजी से किसान ट्रस्ट गठित किया और ट्रस्ट की जिम्मेदारी डाक्टर यशवीर सिंह को सौंपी। चौधरी साहब की कर्तत्वशील व्यक्ति को पहचाने व विश्वसनीय सहयोगियों के चयन में महात्मा गांधी की तरह अद्भुत शैली थी। डाक्टर यशवीर सिंह ने चौधरी साहब की मनोकांक्षा पूर्ण की और किसान ट्रस्ट को किसान हित संवर्धक बना डाला। चौधरी साहब के दिवंगत होने के बाद राजनीतिक उथल पुथलें हो ही रही थीं। 1989 में जब राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में साझा सरकार बनी चौधरी साहब के पुत्र चौधरी अजित सिंह केन्द्रीय उद्योग मंत्री नियुक्त हुए। राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह सर्वोदयी चिंतक प्रोफेसर राममूर्ति को खादी ग्रामोद्योग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त करने का मन बना चुके थे पर चौधरी अजित सिंह ने डाक्टर यशवीर सिंह को खादी ग्रामोद्योग आयोग का सदर तैनात कर दिया। प्रधानमंत्री से पूछा तक नहीं। डाक्टर यशवीर सिंह की हिन्दुस्तानी गांवों और किसानों के हमदर्द संगठन खादी ग्रामोद्योग आयोग की अध्यक्षता हासिल होते ही उन्होंने गांव गांव में फैले हुए खादी ग्रामोद्योगों का ब्यौरा अपने जनसंपर्क से लेना शुरू कर दिया। वे मूलतः मुजफ्फरनगर जिले के निवासी होने के साथ साथ गुज्जर समुदाय से आते थे। उन्हें किसी ने यह बता दिया कि यह ब्लागर सन 1977 में लगातार आठ दस महीने मुजफ्फरनगर के गांवों में घूमा है और मुजफ्फरनगर की हरद्वारी कंबल उद्यमिता का प्रवर्तक है। यह ब्लागर 1989 में आयोग सेवा से निवृत हो चुका था। डाक्टर यशवीर सिंह ने लखनऊ स्थित एक ग्रामोद्योगों के जानकार अधिकारी को इस ब्लागर के पास भेजा। राज्य विशिष्ट अतिथिशाला में डाक्टर यशवीर सिंह ठहरे थे। यह ब्लागर उनसे मिला। मुजफ्फरनगर के प्रत्येक गांव तथा वहां के हर गांव का सड़क संपर्क सुदृढ़ था। मुजफ्फरनगर के कस्बे पूर्वी उ.प्र. के जिला मुख्यालयों से ज्यादा सुविधापूर्ण थे। आज की भाषा में कहें तो शामली कैराना बुलढाना जानसठ के समृद्ध कस्बे जाट गूजर खेतिहरों यहां तक कि जाटवों के गांवों में सड़क पानी बिजली की सुविधायें उपलब्ध थीं। यहां के शहरों में हिन्दू बनियों व जैन बनियों का व्यापारिक प्रभाव था। गांवों में दुधारू पशुओं की बहुतायत थी। गुड़ घी बूरा के लिये मुजफ्फरनगर के गांव प्रसिद्ध थे। डाक्टर यशवीर सिंह ने इस ब्लागर से पूछा - आप मुजफ्फरनगर के बारे में जानते हो। मैं यहां तीन सौ ईंट भट्टे चलवाना चाहता हूँ। इस ब्लागर ने यशवीर सिंह से निवेदन किया कि श्रीमान रोटी गोल होती है। उसे किस किनारे से तोड़ कर भोजन शुरू करें यह भोजन करने वाले पर निर्भर करता है। भारत का निर्धनतम जिला उड़ीसा का मयूरभंज है और समृद्धतम जिला मुजफ्फरनगर है। आप विकास गंगा का प्रवाह करना चाहते हैं मयूरभंज से करें या मुजफ्फरनगर से या उ.प्र. के सबसे गरीब जिले उत्तरकाशी से करें यह आप का कर्तृत्व विवेक सुनिश्चित करेगा। वे चाहते थे मुजफ्फरनगर के तीन सौ स्थानों पर खादी ग्रामोद्योग आयोग की ईंट भट्टा योजनान्तर्गत क्लस्टर बनाये जायें। जिले में तीस करोड़ रूपये का विनिवेश आयोग की ग्रामोद्योग निधि से संपन्न हो।
मयूरभंज व उत्तरकाशी वाली बात हवा में उड़ गयी। उड़ीसा के मयूरभंज की आबादी 2011 जनगणनानुसार 2513895 तथा जिले का क्षेत्रफल 10418 वर्ग किलोमीटर है। मयूरभंज का जिला मुख्यालय वरीपाड़ा है। नवरंगपुर जिसे इंडियन ऐक्सप्रेस उड़ीसा का सबसे गरीब जिला घोषित कर रहा है उसका क्षेत्रफल 5291 वर्ग किलोमीटर तथा आबादी सवा बारह लाख से ज्यादा है। संभव है बीस वर्ष पूर्व मयूरभंज और नवरंगपुर एक ही इलाका रहा हो। जो भी सही स्थिति हो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पवई मुुंबई भारत के दरिद्रतम जिले नवरंगपुर की सुध लेरहा है यह प्रशंसनीय कदम है। यह ब्लागर रामनाथ गोयनका के अखबार इंडियन ऐक्सप्रेस को 1948 से लगातार पढ़ रहा है। जहां तक याददाश्त जाती है 1994 में डाक्टर यशवीर सिंह से मयूरभंज वाला प्रसंग इस ब्लागर ने इंडियन ऐक्सप्रेस की रपट मुताबिक ही प्रस्तुत किया था। नवरंगपुर जो अब भारत का दरिद्रतम जिला है उसे पवई के ज्ञान स्त्रोत ने अपनाया है। आईआईटी पवई मुंबई ने निःशुल्क आडियो विडीओ ट्यूटोरियल आधारित उड़ीसा में इनफार्मेशन तकनालाजी का प्रशिक्षण नवरंगपुर में शुरू करने का संकल्प लिया है। आईआईटी मुंबई द्वारा विकसित परियोजना का सूत्रपात प्रमुख उद्देश्य है। परियोजना में कहा गया है - Projectionally the use of spoken tutorials to
reach free and open source software in regional languages at three different levels
of expertise beginner immediate and advance. भारतीय वाङमय में वर्तमान में ओड़िसा नाम से पुकारे जारहे भू भाग को उत्कल और कलिंग नामों से भी जाना जाता है। भारतीय राष्ट्रगान में कविन्द्र रवीन्द्र ने ओडिशा को उत्कल कहा है। संस्कृत वाङमय में कलिंग नाम का ज्यादा उपयोग हुआ है। आप सात हजार पांच सौ रूपये में लैपटाप उपलब्ध करने का संकल्प लेरहे हैं। साक्षरता समूचे ओडिशा में लगभग साढ़े तिरहत्तर प्रतिशत है। पुरूष साक्षरता प्रतिशत 82, नारी साक्षरता प्रतिशत 64 है। इंटरनेट में उड़िया लिपि व उड़िया भाषा के निरंतर प्रयोग होने तक प्रशिक्षण व दीक्षा देने वाले प्रशिक्षक जब उड़िया भाषी होंगे तभी वे इंटरनेट अध्यापन ज्यादा से ज्यादा कर सकेंगे। अभी इंटरनेट में मंदारिन अरबी और मलय भाषायें रोमन अंग्रेजी फ्रेंच जर्मन पुर्तगीज स्पेनी डच रूसी आदि उन भाषाओं में जो रोमन लिपि के 26 हरूफों का प्रयोग करती हैं वे ही इंटरनेट की लाभग्राही हैं। हिन्दी संस्कृत सहित भारत की किसी भाषा व लिपि को इंटरनेट का गौरव पद नहीं मिल पाया है। प्राध्यापक कन्नन एस मोदगला ने जिस उत्साह से भारत के सर्वाधिक गरीब जिले के बारे में रोजगार संवर्धक उपायों का सहारा लिया है वह स्तुत्य है। जो पार्श्वसज्जा नवरंगपुर में उपलब्ध है आईआईटी पवई मुंबई से संपर्क साधने का जिम्मा त्वरित गति प्राप्त करने हेतु आईटीआई उमेरकोट के अंशकालिक अतिथि इन्स्ट्रक्टर श्री वी.के. दलाल को सौंपा है। नवरंगपुर जिले में एकमात्र आईटीआई उमेरकोट में है जिसमें शिक्षकों की कमी है। क्यों न मानव संसाधन मंत्रालय आईआईटी पवई मुंबई के माध्यम से हिन्दुस्तान के सबसे गरीब जिले को अंगीकृत कर लेता। जिले में राज्य सरकार तथा अन्य शिक्षण संस्थाओं एवं असरकारी संगठन समूहों जो एनजीओ का काम कर रहे हैं उसे राज्य सरकार भी सहयोग दे। हरेक आदमी विशेष तौर पर नौजवान मर्दों व औरतों को सस्ता लैपटाप मुहैया करने से जिले की जनता को स्वरोजगार से नहीं जोड़ा जा सकता। ओडिशा सरकार व भारत सरकार को चाहिये कि गोप बंधु चौधरी ने महात्मा गांधी के बताये रास्ते चल कर जो शुरूआत उड़ीसा में चरखा कताई व हथकरघा बुनाई के लिये आजादी के शुरूआती वर्षों में शुरू की उस पर भी उड़ीसा सरकार व भारत सरकार ध्यान दे। इंडियन ऐक्सप्रेस ने जो आंखें खोल कर देखने का रास्ता सुझाया है, उड़ीसा टेक्सटाईल - महात्मा गांधी नेशनल रूरल इम्प्लायमेंट गारंटी योजना को नवरंगपुर के गांवों में तुरंत लागू किया जाये। एमएसएमई मंत्रालय, मानव विकास मंत्रालय तथा स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय मिल बैठ कर प्राचार्य मोदगल्य द्वारा शुरू की गयी मुहिम को संबल देने के लिये उड़िया भाषा में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करने के साथ साथ गांवों की महिला श्रम शक्ति को चर्खा कताई हाथ बुनाई चरखे पर हाथ कते अथवा मिल कते सूत की बुनाई का उपक्रम स्किल्ड लेबर के रूप में मनरेगा से जोड़ा जाये। नवरंगपुर जिले में मनरेगा के तहत रोजगार गारंटी की दशा क्या है ? क्या गांवों की महिला श्रम शक्ति को सौ दिन नहीं सही पचास दिन चर्खा कताई करनेे के लिये मनरेगा स्किल्ड लेबर उपक्रम जोड़ा जाये। जनपद के बुनकरों को जो हथकरघा में बुनाई करते हैं उन्हें रोजगार गारंटी का स्थायी हिस्सा घोषित किया जाये। प्रशांत महासागर में दक्षिण केलिफोर्निया का महत्वपूर्ण शहर हालीवुड लास ऐंजेल्स में है। यहां उड़िया मूल के परमहंस योगानंद का आश्रम है। जुलाई 1935 में परमहंस योगानंद वार्धा जाकर महात्मा गांधी से मिले। उस दिन गांधी जी का मौन व्रत था अतः वार्ता लिख कर ही हुई। परमहंस योगानंद ने महात्मा जी को कहा - चर्खा कातना अंगुलियों के पोरों के स्पर्श का योग है। ओडिशा के अनेक आप्रवासी दक्षिण कैलिफोर्निया में बस गये हैं। ओडिशी गायिका ओडिशी नृत्य शिक्षण देने वाली नंदिता का कहना है कि अगर ओडिशी नृत्य सीखने वाली महिला ओडिशी हाथ कती हाथ बुनी साड़ी पहन कर नृत्य करें तो उपलब्धि सौगुना बढ़ जाती है। इसलिये यह ब्लागर प्राचार्य मौदगल्य सहित नवरंगपुर की गरीबी कम करने व गरीबी हटाने के पक्षधर लोगों को चाहिये कि उड़ीसा के जननेता गोप बंधु चौधरी द्वारा अपनाया गया तरीका दुबारा खोजें। हर उड़िया नौजवान व नवयुवा युवती के हाथ में कम दाम वाला लैपटाप मुहैया करने से पहले भारत सरकार के इन्फार्मेशन तकनालाजी मानव संसाधन मंत्रालय उड़िया लिपि व उड़िया भाषा में इंटरनेट सेवायें उपलब्ध कराये। केवल लैपटाप मुहैया करने तथा रोमन लिपि में ट्वीट करना सिखाने से काम नहीं चलेगा। भाषायी गलतफहमी के समानांतर वैचारिक संशयग्रस्तता भी अपना सिर उठायेगी। इंडियन ऐक्सप्रेस की रपट के अनुसार जिले में चार डिग्री कालेज और एक आईआईटी ही है। आबादी बारह लाख से ऊपर है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में जहां आबादी पौने पांच लाख है पिथौरागढ़ सहित बेरीनाग गंगोलीहाट अस्कोट धारचूला डीडीहाट मुनस्यारी सात परास्नातक सरकारी डिग्री कालेज हैं।
यह तो प्रशंसनीय होने के साथ साथ स्तुत्य है कि आईआईटी पवई मुंबई भारत के पिछड़े से पिछड़े जिले को अंगीकृत कर रहा है। सप्तशती में एक प्रकरण आता है वह है मरे हुए आदमी का जीवित हो जाना। दैत्य दानव गुरू शुक्राचार्य को मृत व्यक्ति को यदि उसकी देह उपलब्ध कर दें तो उसे जिन्दा करने की योग्यता उनमें थी। दैत्य भगवती मारे जारहे थे जिन्दा हो जाते। भगवती ने सभी देव शक्तियां अपने आप में स्थापित कर लीं। रक्तबीज का नाश किया। किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निरंतर कर्मशील रहना पड़ेगा। जहां जहां गरीबी ज्यादा तीव्र है उसे नियंत्रित करने के लिये गांधी आर्थिकी ही एकमात्र सहारा है। इसलिये नवरंगपुर की गरीबी को शनैः शनैः कम करने के लिये कमर कसनी होगी। गांधी के चरखे को हथकरघा के लूम या करघे को मनरेगा के तहत स्किल्ड लेबर के रूप में जोड़ना तात्कालिक जरूरत है। पी.एम.ओ. को चाहिये कि प्रोफेसर मोदगल्य प्रभृति के आयोजन को गोप बंधु कल्पना से जरूर जोड़ा जाये ताकि उड़ीसा की साड़ी के कतकर बुनकर स्किल्ड लेबर की रोजी कमाये।
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