Thursday, 8 October 2015

सांख्य योगो पृथक बालाः प्रवदन्ति न पण्डिताः 
एकमप्यः स्थितः सम्यमुभयो विन्दते फलम्।श्रीमद्भगवदगीता - 5-4

सांख्य योग को सही सही समझने के लिये हमें कर्दम देवहूति वसुदेव देवकी नंद यशोदा इन तीन दम्पतियों के गृहस्थ धर्म को समझना होगा। देवहूति शतरूपा और विवस्वान मनु की द्वितीया कन्या थी। देवहूति को कर्दम से ब्याहने मनु शतरूपा वन में पहुंचे। उन्होंने अपनी कन्या देवहूति कर्दम को ब्याह दी। देवहूति की नौ कन्यायें व एकल पुत्र सांख्याचार्य कपिल थे। कर्दम देवहूति दम्पति ने अपनी नौ कन्यायें क्रमशः कला नाम्नी प्रथमा कन्या मरीचि को, द्वितीया कन्या अनुसूया अत्रि को, तृतीया कन्या श्रद्धा को अंगिरा से चतुर्था कन्या हवि को पुलस्त्य से पंचमा गति को पुलह ऋषि से षष्ठी कन्या क्रिया को क्रतु से भृगु से ख्याति तथा सप्तमा अष्टमा अरून्धति को वशिष्ठ से तथा नवमा कन्या शांति को अथर्वण से दाम्पत्य सूत्र संयोजित कर दिया। इन नौ कन्याओं के पश्चात देवहूति ने कपिल को जन्म दिया। कपिल और देवहूति का संवाद पुत्र माता मिथुन के मध्य अद्भुत संवाद है। इसी संवाद को सांख्य योग या ज्ञान योग कहा जाता है। मूल संख्यायें एक से नौ तक हैं। नृत्यावसान में नटराज महादेव ने ताण्डव नृत्य के उपरांत अपना डमरू बजाया उससे नौ और पांच ध्वनियां निकलीं। तब संख्यायें केवल एक से नौ तक ही हुआ करती थीं। शून्य का गणितीय अविष्कार होना शेष था। पुत्र माता भी मिथुन - एक पुरूष एक स्त्री का जोड़ा, पिता पुत्री भी मिथुन हैं। सहोदर भाई बहन भी मिथुन हैं। मिथुन के ये तीन जोड़े नर नारी संबंधों में अमैथुनेय हैं। मैथुनेय संबंध केवल दंपति के बीच होता है। दंपति मैथुन ही सृष्टि का स्त्रोत है। दाम्पत्य में स्त्री सुभगा अथवा सधवा कहलाती है। उसका पुरूष साथी कलत्रवान कहलाता है। सांख्य ज्ञान मार्ग का पहला संवाद कपिल देवहूति के बीच संपन्न हुआ। देवहूति की तरह ही देवकी अष्टपुत्रा व एक कन्या वाली थी। देवकी के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण थे। देवहूति कर्दम देवकी वसुदेव के अलावा एक जोड़ा नंद यशोदा का था। श्रीकृष्ण यशोदा के पुत्र नहीं देवकी नंदन थे पर यशोदा श्रीकृष्ण को अपना ही पुत्र मानती थीं। यशोदा पहली जीवात्मा थी जिसने श्रीकृष्ण का योग वैभव देखा था। सांख्य शास्त्र ज्ञान मार्ग की पहली सीढ़ी है यही कारण है कि योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था - सिद्धानाम् कपिलो मुनिः अर्थात सिद्धों में कपिल मुनि मैं ही हूँ। अर्जुन को विषाद होगया वह अवसाद से घिर गया। उसका मानना था कि राज्य हेतु स्वजन वध उचित नहीं है। इस विषाद योग को शमन करने के लिये ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सांख्यमार्ग दिखाया। गीता के अनन्य उपासक महात्मा गांधी को सांख्य योग की स्थितप्रज्ञता तथा समाधिस्थ भाव अत्यंत प्रिय विषय थे। महात्मा अपनी नित्य प्रार्थना में स्थितप्रज्ञ स्वयं बनने, समाधि स्थिति प्राप्त करने के अलावा अपने साथ प्रार्थना करने वाले लोगों को भी छिन्न संशय बनाते थे। उन्होंने अपनी मातृभाषा गुजराती में गीता भाषांतरण को अनासक्ति योग कहा। आसक्ति का स्थान हिन्दू अखबार के समानांतर टी.वी. मोहनदास पई मनिपाल ग्लोबल ऐजुकेशन सर्विसेज के प्रतिभागी तथा संगठनाध्यक्ष हैं। वे अपने सटीक दृष्टिकोण में व्यक्त करते हैं प्रधानमंत्री मोदी ने सिलिकान वैली को चकाचौंध कर डाला। उनके व्यक्तित्त्व करिश्माई कृत्य मानते हुए पई कहते हैं कि संयुक्त राज्य अमरीका के इंटरनेट को वाणिज्य शोधक कहते हैं कि भारत अविजित डिजिटल मार्केट है। वे कहते हैं कि अगर डिजिटल इंडिया सफल होता है तो शेष अविजित विश्व को इंटरनेट के घेरे में लाने में एक नया आदर्श एक नयी पहल की जा सकती है। सान जोश कैलिफोर्निया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ज्योंही अठारह हजार आसनों वाले पूरी तरह भरे हुए सभागार में अभिव्यक्ति करने पहुंचे वहां भव्य सांस्कृतिक कोलाहल का वातावरण था। उसे अगर हम हिन्दुस्तानी नजरिये से देेखें तो नजारा ठीक वैसा ही था जैसा कनखल में दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अफरातफरी का वातावरण बन गया था। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने उपस्थित जनता को संबोधित किया मान लो हरेक का मन मोह लिया। लोक भावनायें नरेन्द्र मोदी मय होगयीं। गूगल व ऐपल समूचे विश्व को कपिल के सांख्य योग मार्ग को विजय ही दिलाना चाहते हैं। जनकनंदिनी सीता को दारचोर रावण ने आहरण कर अशोक वाटिका में रख डाला। सीता को अपनी भार्या बनाने के सारे उपाय करने पर सीता ने रावण को स्वीकृति नहीं दी। साफ साफ बता दिया कि राम से अन्य पुरूष से सीता का कोई ताल्लुक नहीं हो सकता। जिस तरह सीता का संकल्प राममय था स्वाधीन भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री भारत की षोडषी लोकसभा के नेता नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हिन्दुस्तान के डिजिटल इंडिया में बदलाव लाना चाहते हैं। लक्ष्य ऊँचा है, लक्ष्य प्राप्ति के लिये अहर्निश प्रयत्नशील रहना आवश्यक है। सवा अरब से दो करोड़ ज्यादा आबादी वाले हिन्दुस्तान में भारतीय संविधान घोषित क्षेत्रीय राष्ट्र भाषायें आठवें परिशिष्ट के अनुसार क्रमशः 1. असमी 2. बांग्ला 3. गुरूमुखी 4. गुजराती 5. मराठी 6. कन्नड़ 7. मलयालम 8. तमिल 9. तेलुगु 10. उड़िया 11. 12. हिन्दी 13. कश्मीरी 14. उर्दू  इन चौदह भाषाओं में संविधान के 71 संशोधन सेे 15. कोंकणी 16. भोजपुरी 17. नैपाली 18. बोडो 19. डोगरी 20. मैथिली 21. संथाली संविधान 192 संशोधन से जुड़ी ये 21 भाषायें इंटरनेट पर अपनी उपस्थिति दर्ज करना चाहती हैं। इन भाषाओं में 10 राज्यों की राजभाषा हिन्दी है। जम्मू कश्मीर पंजाब गुजरात महाराष्ट्र कर्णाटक केरल गोआ तमिलनाडु तेलंगाना आंध्र उड़ीसा पश्चिम बंग असम मणिपुर व सिक्किम की भाषायें भी राजभाषायें हैं अतएव भाषायी प्रबंधन में पहली जरूरत यह है कि गणराज्य के घटक राज्य अपनी राजभाषा में केन्द्र सरकार से पत्र व्यवहार शुरू करें। लोकसभा राज्यसभा में संविधान भाषा अनुसूची के अनुसार सदस्य द्वारा चाहत भाषा या मातृभाषा में अपना मंतव्य प्रस्तुत करना शुरू किया जाये। अंग्रेजी में केवल उन्हें ही अपनी बात प्रस्तुत करने का अधिकार हो जिनकी मातृभाषा अंग्रेजी है और पूर्वाेत्तर राज्यों में अरूणाचल प्रदेश मिजोरम मेघालय नागालैंड सहित जिन राज्यों ने अपने राजकाज की भाषा अंग्रेजी निश्चित की है केवल वे लोग अंग्रेजी में अपना अभिमत व्यक्त करें। देशी भाषाओं व्यक्त मत का भाषान्तरण देश की सभी राजभाषाओं में उपलब्ध कराने का प्रबंध संसद सचिवालय द्वारा यथाशीघ्र प्रांरभ किया जाये। सभी घटक राज्य अपने राज्य की विधानमंडल भाषा सरकारी कामकाज की भाषा में केन्द्र सरकार से तुरंत पत्र व्यवहार शुरू करें। केन्द्र सरकार संबंधित राज्य की राजभाषा में ही संबंधित राज्य को उत्तर भेजें। भारत में करोड़ों लोग इंटरनेट में अंग्रेजी भाषा व रोमन लिपि का उपयोग कर रहे हैं। अंग्रेजी में ट्विटर को संस्कृत भाषा व भारतीय भाषाओं में तीतर कहा जाता है। तीतर एक सामर्थ्यशील पक्षी है। भारत केे पारंपरिक ज्ञान में तैत्तरीय उपनिषद का अपना महत्व है। जनसामान्य को रोमन लिपि की जगह उनकी अपनी मातृभाषा तथा भारतीय लिपि अपनाने के लिये सरकार बाध्य नहीं कर सकती क्योंकि भाषा व लिपि का प्रयोग व्यक्ति का स्वाधिकार है पर जो लोग सत्ता में हैं एक दूसरे को रोमन लिपि में ट्वीट करते हैं तानाकशी भी करते हैं अपने मन की बात दूसरों तक पहुंचाते हैं। उनमें जो लोग सरकार में हैं सांसद हैं उनसे तो प्रधानमंत्री जी यह अपेक्षा कर ही सकते हैं कि वे अपनी मातृभाषा का प्रयोग इंटरनेट में तत्काल शुरू कर दें। इंटरनेट में वे जिसे ट्वीट कर रहे हैं यदि उनकी मातृभाषा ट्वीट करने वाले व्यक्ति की भाषा से भिन्न भाषा हो पर दोनों भारत की भाषाओं में हो किसी अनाम भाषा में वार्ता करने संवाद भेजने की क्षमता रखते हों जो भाषा दोनों को मालूम हो उसका प्रयोग किया जाये। रोमन अथवा अंग्रेजी भाषा में कोई भी खासदार केवल उन्हें ही अंग्रेजी में ट्वीट करें जिन्हें अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। डिजिटल इंडिया की पहली जरूरत ही हिन्दुस्तानी भाषाओं व हिन्दुस्तानी लिपियों को मंदारिन अरबी व मलय भाषाओं की तरह जब तक इंटरनेट में भाषायी कब्जेदार नहीं बनाया जायेगा भारत के हर व्यक्ति इंटरनेट की पहुंच नहीं हो सकती। आज विश्व में मंदारिन भाषा के बोलने वाले डेढ़ अरब से ज्यादा लोग हैं यद्यपि अंग्रेजी को अपनी मातृभाषा मानने वाले लोग मात्र पच्चीस करोड़ हैं पर अंग्रेजी का इंटरनेट प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या सवा अरब है। भारत में 88 प्रतिशत हिन्दुस्तानी अपनी अपनी भाषा में बतियाते हैं। दुनिया भर में हिन्दी, उर्दू व हिन्दुस्तानी बोलने समझने वाले लोग विश्व जनसंख्या के चौथे पाये पर हैं। भारतीय भाषाओं हिन्दी के अलावा पंजाबी और बांग्ला बोलने वालों की संख्या विश्व भाषायी नक्शे में सातवें और ग्यारहवें स्थान पर है पर इन तीन भारतीय भाषाओं की पहुंच इंटरनेट तक करने के लिये भगीरथ प्रयास करने की जरूरत है। पंजाबी, उर्दू, गुजराती, कोंकणी, मराठी, कन्नड़, मलयाली, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बांग्ला, असमी, मइती, नैपाली भाषाओं में संबंधित राज्यों में भाषायी इंटरनेट केन्द्र जल्दी से जल्दी शुरू किये जायें। इंटरनेट प्रयोगर्ताओं को अपनी अपनी भाषाओं में अपनी बात प्रस्तुत करने का अभ्यास शुरू कराया जाये। राजनीतिक दलों विभिन्न भाषाओं के साहित्यिक संगठनों को प्रेरित किया जाये कि वे अपनी अपनी भाषा में इंटरनेट उपयोगी शब्दावली तथा इतर भारतीय भाषाओं सहित संस्कृत, प्राकृत, पालि तथा तद्भव भाषाओं के पर्यायवाची शब्दों व मौजूदा भारतीय भाषाओं के पर्यायों का एक ऐसा विश्वकोश रचें जिसे हिन्दुस्तानी बोलियों भाषाओं का इनसाइक्लोपीडिया आफ इंडियन मदर टंग्स का आकार दिया जाये। रोमन लिपि के 26 हरूफों तथा भारतीय वाङमय के सभी 51 हरूफों का एक भाषायी विशकोशनुमा इक्यावन खंड वाला इनसाइक्लोपीडिया आफ इंडियन मदर टंग्स एंड रोमन अल्फा बेट्स का विश्वभाषायी संकलन तैयार किया जाये। भारतीय भाषाओं के पर्याय, रोमन लिपि, नागरी लिपि तथा भारतीय भाषा लिपि यथा पंजाबी, गुजराती, कोंकणी, मराठी, कन्नड़, मलयाली, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बांग्ला, असमी, मइती और फारसी लिपि उर्दू भाषा के लिये भारतीय वाणी विश्वकोश & Encyclopedia of Indian Toungues and main foreign Languages like English, German, French and Russian Languages सुनिश्चित किया जाये। अंग्रेजी, जर्मन, रसियन भाषाओं में पुरानी अंग्रेजी, पुरानी जर्मन तथा पुरानी रसियन भाषाओं में 60 से 90 प्रतिशत शब्द संस्कृत मूल के हैं। भाषा विज्ञान के दृष्टिकोण से विभिन्न भाषाओं को एक दूसरे के नजदीक लाया जा सकता है। डिजिटल इंडिया भारत के प्रधानमंत्री का शिव संकल्प है इसे तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु बनाने के लिये पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही करनी होगी। उन्हें अपनी मातृभाषा गुजराती भाषियों से इंटरनेट संयोजन के लिये गुजराती लिपि व गुजराती भाषा को अपनाना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी धाराप्रवाह हिन्दी में बोलने में डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पश्चात दूसरे भारतीय हैं जिन्होंने हिन्दी भाषण कला पारंगति प्राप्त की है। हिन्दी भाषियों में धाराप्रवाह बोलने वाले व्यक्तियों में जयप्रकाश नारायण, डाक्टर लोहिया, पुरूषोत्तम दास टंडन, आचार्य नरेन्द्र देव, स्वामी श्रद्धानन्द, प्रकाशवीर शास्त्री तथा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते थे। सरस्वती की कृपा है नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पर वे जो कह रहे हैं वह हिन्दुस्तान को श्रेष्ठतम राष्ट्रराज्य बनाने का गौरव देने वाला है। जरूरत केवल इतनी है कि वे अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों, अपने विश्वस्त सांसदों व राजनीतिक चिंतकों को मशविरा दें कि वे ट्विटर रोमन में करने के बजाय अपनी मातृृभाषा व मातृलिपि में शुरू कर दें। जो लोग नागरी लिपि जानते हैं नागरी लिपि से जिन्हें घृणा नहीं है वे नागरी लिपि में ट्वीट करें। भारतीय भाषाओं भारतीय लिपियों का प्रयोग इंटरनेट में जितना ज्यादा होगा इंटरनेट भारत के हर व्यक्ति तक पहुंचे। इंटरनेट की लहरें यत्र तत्र सर्वत्र फैले तकनालाजी में ईशत्व है। इन्सान में आत्मा के समानांतर परमात्मा का स्वरूप दिल में सदा रहता है। आत्मा जिसे हम भोक्ता कहते हैं वह जब जब दृष्टा परमात्मा की तरफ देखता है उसकी राह पर चलने का मन बनाता है तभी भोक्ता व दृष्टा का योग बल बढ़ कर मानवता के ऊँचे स्तूप तक पहंुच जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का डिजिटल इंडिया संकल्प हर भारतीय युवा तक पहुंचे, युवा युवतियां कर्मयोग के जरिये अपना भविष्य संवारने के समानांतर भारत राष्ट्र राज्य को आदर्श मानवीय व्यवस्था का आकार दे सकता है। पूर्णता प्राप्त करने के लिये हमें बार बार उद्घोष करना ही होगा। \ पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्युते, पूर्णस्य पूर्णमादाय् पूर्णमेवावशिष्यते’।      पूर्णता हमारा राष्ट्र लक्ष्य हो, आदर्श हो न निन्दते न स्तौति - निन्दा व स्तुति से अपने आप को अलग रखना घृणा का व्यापार तो बिल्कुल छोड़ देना तभी उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। भगवद्गीता कहती है - कर्मानुबंधीनि मनुष्य लोकेः। संसार का मानवमात्र कर्मगति से बंधा हुआ है। मजहब कोई भी हो इन्सान की सबसे बड़ी खूबी कर्मण्येवाधिकारस्ते ही है। कर्म आपका जन्मसिद्ध मानवाधिकार है, कर्म से मुंह मत मोड़िये कर्म करते रहिये वही सुख शांति का आधार है। 
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