तक्षशिला और नालंदा से चणक नंदन कौटिल्य - कूटनीति के परमज्ञाता, दृढ़निश्चयी विष्णु शर्मा ने महानंद के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिये अपनी शिखा बंधन को खोल डाला। प्रतिज्ञा कर ली कि नंद के कुराज को खत्म कर के ही दम लेंगे। नंद के राज दरबार में चणक नंदन चाणक्य के अपमान की घटना अढ़ाई हजार वर्ष पुरानी है। नंद के महामात्य राक्षस ने ठान लिया कि वह चाणक्य की सहायता करेगा। मगध-राज नंद और राक्षस दोनों सत्ताधीश थे पर चाणक्य स्वयं राज करने का पक्षधर नहीं था इसलिये नंद के राज्य को तहस नहस करके एक नये सत्ताधिष्ठान का संकल्प चाणक्य ने लिया। मगध के गांव गांव घर घर जाकर चाणक्य ने अंततोगत्वा चंद्रगुप्त की खोज कर ही डाली। चाणक्य की विद्वत्त्वा पर देवगुरू बृहस्पति, दैत्यगुरू शुक्राचार्य तथा महाभारत के एक मुख्य पात्र जो वस्तुतः राजा शांतनु के राजकुमार होने के कारण हस्तिनापुर की राजगद्दी के स्वामी होते पर उन्होंने भीष्म प्रतिज्ञा कर ली। पिता को कलत्रवान बनाने के लिये देवव्रत ने दासराज से कहा - मैं राज्य की कामना नहीं करूँगा जो तुम्हें ईष्ट हो वही करूँगा। संतान जो सत्यवती जनेगी राज्याधिकारी वह ही बनेगी। यह पद इस ब्लागर के परमगुरू रघुनाथ उप्रेती उर्ध्वबाहु होकर कहा करते थे। गुरू को स्मरण कर उन्हें प्रणाम करता हूँ। दासराज मांझी था जिन्हें आजकल बिहार में महादलित कहा जाता है। दासराज ने देवव्रत से कहा - राजकुमार तुम क्षत्रिय हो राज करना तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार है। तुम अपनी प्रतिज्ञा पर अड़े भी रहोगे तुम्हारे पुत्र मेरे दौहित्र को राजगद्दी से उतार देंगे। तब देवव्रत ने मांझी से कहा - दासराज अपनी कन्या सत्यवती को मेरे पिता से ब्याह दो तुम्हारी शंका का समाधान करने के लिये मैं ऊर्ध्वबाहु होकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि आजन्म विवाह नहीं करूँगा। इस भीषण प्रतिज्ञा के कारण ही देवव्रत भीष्म कहलाये। सत्यवती के बेटों पोतों का राजकाज भीष्म ने ही संभाला। आचार्य चाणक्य भीष्म के समान ही दृढ़निश्चयी व राजधर्म की सही सही बारहखड़ी जानने वाले व्यक्ति थे। कौटिल्य ने ग्वाल बाल चंद्रगुप्त मौर्य को मगध नरेश के पद में स्थापित किया। तब उत्तरापथ में अनेक गणतंत्र भी थे। चाणक्य से पूर्व मगध से सटे हुए लिच्छिवियों के गणतंत्र प्रमुख राजा शुद्धोदन शाक्य के घर गौतम जन्मे थे। चाणक्य से लगभग तीन हजार वर्ष पूर्व राजगृह में जरासंध नामक मगध नरेश राज करते थे। वे गणतंत्र मुखियों को बंदी बना कर अपने कारागार में डाल देते थे। गणतंत्र व राजतंत्र में चाणक्य को राजतंत्र ज्यादा सटीक लगा इसलिये उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य को नंद वंश के नाश करने के तुरंत पश्चात मगध नरेश के रूप में अभिषिक्त करते समय यह घोषणा की कि अभी गणतंत्र कामयाब नहीं होगा इसलिये मैं चंद्रगुप्त मौर्य का राजतंत्र स्थापित कर रहा हूँ। भारत की धरती पर चाणक्य से पहले भी नीतिज्ञ हुए हैं जिनमें एक प्रजागर विदुर हैं जिन्होंने प्रज्ञाचक्षु मनीषी कुरूराज धृतराष्ट्र को नीति मार्ग बताया था। मगध नरेश चंद्रगुप्त मौर्य, आचार्य चाणक्य को इसलिये याद करना जरूरी होगया लास ऐंजेल्स टाइम्स के 4 जनवरी 2016 के तीसरे पन्ने में - रिपब्लिक डोनाल्ड ट्रंप अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिये रिपब्लिकन उम्मीदवारी के लिये आकाश पाताल एक किये हुए हैं। उनका प्रयास है कि नवंबर 2016 में संपन्न होने वाले अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में वे रिपब्लिकन उम्मीदवारी अर्जित कर सकें। अमरीकी महत्वपूर्ण पत्रिका टाइम ने उन्हें 2015 सन का तीसरा महत्वपूर्ण विश्व व्यक्तित्त्व घोषित किया है। डोनाल्ड ट्रंप की दौड़ के साथ साथ पार्थ एम.एन. नामक लास ऐंजेल्स टाइम्स के विशिष्ट संवाददाता ने भारत के बारे में Desperate Pleas for Toilets in North India शीर्षक वाला आख्यान संयुक्त राज्य अमरीका के अखबार के लिये भेजा है। बिहार के एक गांव जमसौट से पार्थ महादलित गांव जमसौट का हवाला देकर कहते हैं सन 2011 में इस गांव में बिल व उनकी पत्नी मिलिन्दा पधारे थे। वे अपनी दातव्यता जिसे अंग्रेजी में Charitable Foundation इंगित किया गया अपने दातव्य अधिष्ठान के जरिये बिल मिलिन्दा दम्पति बच्चा जनते समय मरने वाली जच्चाओं की जान बचाने जच्चा बच्चा मौतों को रोकने क्षय रोग तथा हैजा जैसी बिमारियों पर नियंत्रण करना बिल मिलिन्दा दम्पति का संकल्प था। बिहार राज्य में 2011-12 से लेकर हाल ही में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों वाले लगभग साढ़े तीन चार साल वाले कालखण्ड में बिहार में कौन राज करे ? महादलित समूह का योगक्षेम कौन देखे ? बिहारी और बाहरी वाला प्रसंग वहां बिहार की सत्ताकांक्षा रखने वाले लोगों के दिमाग में तैर रहा था। अंततोगत्वा बिहार की राजनीतिक नाड़ी वैद्यक लालू प्रसाद यादव ने विधानसभा की 243 में से 80 सीटें जीत कर बाबू नीतीश कुमार तथा कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी को क्रमशः 71 व 27 विधायक जितवा कर बिहार में नीतीश बाबू की सरकार गठित कर डाली। महादलित नेता जीतनराम मांझी और पिछड़ों के नेता कुशवाहा के साथ साथ बिहार की राजनीतिक तस्वीर को करीने से पहचानने वाले रामविलास पासवान सहित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भा.ज.पा. प्रमुख अमित शाह को बगलें झांकनी पड़ीं। रामविलास मानते हैं कि वहां पुनः मध्यावधि चुनाव दो वर्ष भीतर होंगे ही, संभव है महादलितों व अति पिछड़ों का आक्रोश जल्दी ही फूट जाये। नितीश बाबू को अपनी सत्ता कायम रखने के लिये फिर सुशील मोदी व नंद किशोर यादव का सहारा लेना पड़ जाये। देखते रहिये उत्तर भारत में शौचालयों वाले सवाल को परखते रहिये। बिल मिलिन्दा दम्पति के जमसौट गांव पधारने, अपनी योजना बिहार सरकार के मार्फत क्रियान्वयन के लिये उदारता दिखाने के बावजूद नारी गुंजन नामक नान गवर्नमेंटल आर्गनाइजेशन की सुश्री सुधा वर्गीज का कहना है कि सरकार ने शौचालय परियोजना स्वीकार तो कर ली पर आश्वस्त वित्तीय प्रावधान का वचन तो जरूर दिया गया पर वित्त राशि मिलने के बजाये बिचौलिये सरकारी ठेके के लिये चुंगी मांगने लगे बात अटक गयी। पिछले चार सालों में महादलित गांव जमसौट के पांच सौ बाशिंदे टकटकी लगा कर देख रहे हैं - शौचालय उन्हें मिले नहीं जैसे बिल मिलिन्दा दम्पति के आगमन से पहले रह रहे थे वही हालात आज भी हैं। यह पहला और अकेला उदाहरण नहीं है एम.एन. पार्थ का कहना है कि यह कहानी बार बार दुहराई जारही है। गेट फाउन्डेशन के बारे में रिपोर्टर पार्थ का कहना हैै कि फाउन्डेशन बिहार सरकार को सेहत, सुरक्षा तथा अस्पतालों में जन्मे नवजात शिशुओं की देखभाल का सटीक तरीका अपनाये जाने के लिये मदद करता आरहा है। अमी इनराइट फाउन्डेशन के प्रवक्ता हैं उनका कहना है कि यह काम इतने बड़े आकार का है कि इसे कोई एक संगठन अंजाम नहीं दे सकता। बिहार की मातृशक्ति चाहे वो अगड़े हों अथवा पिछड़े उन सब की एक ही समस्या है कि शौचालयों के अभाव में जिन्दगी कैसे जियें। संयुक्त राष्ट्र संघ की रपट का हवाला देेते हुए पार्थ कहते हैं साढ़े 66 करोड़ हिन्दुस्तानी लोग शौचालय रहित हैं यानी एक अरब सत्ताईस करोड़ वाला आबादी वाला हिन्दुस्तान उसकी आधी आबादी खुले में मलमूत्र विसर्जन के लिये अभिशप्त है। रपट यह भी प्रतीति करा रही है कि हिन्दुस्तान एक तिहाई जनसंख्या याने लगभग बयालीस करोड़ लोग रोजाना एक डालर से कम रकम पर जी रहे हैं। बहुत से अर्थज्ञ लोगों का मानना है कि भारत के गांवों का गरीब औसतन बीस रूपये से नीचे की रकम पर निर्वाह कर रहा है। पार्थ महाशय फर्माते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी तेरह महीने पहले वाले व्याख्यान में 100 मिलियन से ज्यादा शौचालय निर्मित करने का संकल्प लिया था और कहा था कि माताओं बहनों के शील रक्षा के लिये स्वच्छता अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देना भारत की तात्कालिक जरूरत है। रिपोर्टर पार्थ का यह भी कहना है कि बिहार की राजधानी पटना के कुछ निवासियों का कहना है कि उनके घरों के शौचालयों में शहर की सीवर व्यवस्था में भयावह व्यवधान के कारण सीवर का गंदा पानी उभर रहा है। रपट का एक हिस्सा यह भी बयान करता है कि बिहार सरकार ने अगस्त 2015 में कहा कि 80 लाख शौचालय सरकार बना चुकी है पर जमीन में सही सही हालत देखने पर रिपोर्टर को लगता है कि बहुत से शौचालय काम के लायक ही नहीं हैं। राज्य सरकार की स्वच्छता नीति, हर घर में शौचालय के सटीक काम करने के लिये सीवर के गन्दे मल मूत्र का प्रबन्धन भी संकल्पित नहीं है। सुलभ शौचालय के चिंतन पोखर के अधिपति बिन्देश्वर पाठक चाणक्य की तरह बिहार की धरती पर ही जन्मे हैं। उन्होंने अपने अद्भुत कर्म कौशल के जरिये सुलभ शौचालय का कार्य हाथों में लिया है। बचपन तथा युवावस्था में वे बिहार में रहे हैं उन्हें चाणक्य की तरह संकल्प करना चाहिये कि बिहार के गांव गांव कस्बा दर कस्बा तथा पटना जैसे बड़े शहरों में भी सुलभ शौचालय की शुरूआत करने के बारे में सोचेंगे। बिहार के शासक तथा अगड़े पिछड़े सभी समाज के लोगों को बिन्देश्वर पाठक स्वच्छता, निर्मल गांव, निर्मल मुहल्ला का गुरूमंत्र दे सकते हैं। सवाल उठता है कि बिहार के राजनीतिज्ञ तथा वे लोग जिनकी दृष्टि चुनाव पर ही रहती है ग्राम सभा, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर परिषद तथा नगर पालिकायें व नगर निगम तथा राज्य विधानसभा, राज्य विधान परिषद के साथ साथ लोकसभा सदस्यता के लिये चुनाव मैदान में उतरने वाले राजनीतिक महानुभावों से बिहार की मातृशक्ति यह आह्वान करे कि हमारा मत उसी उम्मीदवार को मिलेगा जो गांव गांव, घर घर में शौचालय दुरूस्त करने में हमारी मदद करे, खुले मैदान में शौच के लिये मां बहनों को न जाना पड़े ऐसी स्वच्छता नीति, निर्मल गांव नीति को संबल देने वाले व्यक्ति को ही मां बहनें अपना वोट देंगी। जमसौट गांव की महादलित मां कालिया देवी का उल्लेख रिपोर्टर पार्थ ने किया, कालिया देवी सहित समूचे बिहार की मां बहनें वे भले ही मुस्लिम हों, यादव हों, कुर्मी हों, पासवान हों, मांझी महादलित सहित अति पिछड़े समूह से हों अपना अमूल्य मत जिसे देना चाहें जरूर दें पर मत पाने वाले से वादा जरूर करायें कि अगर विजयी होकर राज्य विधानसभा, लोकसभा का सदस्य हो जायेगा अथवा लालू प्रसाद यादव जी, नितीश कुमार जी, सोनिया गांधी अथवा अमित शाह, रामविलास पासवान आदि नेताओं की कृपा से विधान परिषद या राज्यसभा के सदस्य बन जायें तो यह वादा करें कि विधायक सांसद निधि का एक निश्चित हिस्सा गांव गांव घर घर में सलीके के शौचालय निर्मित करने के लिये बिन्देश्वर पाठक के सुलभ शौचालय योजना को उपलब्ध करायेंगे ताकि जहां जहां शौचालय बनें वे सुलभ शौचालय तरीके से बनें। बिन्देश्वर पाठक भी जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी का वाल्मीकि मंत्र अपनायेंगे व बिहार की मातृशक्ति को सामर्थ्य दिलायेंगे। हो सकता है कि राजनीतिक दलों के प्रमुख हेकड़ी में बिन्देश्वर बाबू का सहयोग न लेना चाहें पर अगर बिहार की महिला मतदाता शक्ति संचय कर ठान ले कि वोट उसी को देगी जो सांसद या विधायक बनने पर सांसद निधि अथवा विधायक निधि का पूरा पूरा उपयोग सही तरीके से संपन्न करने के लिये सुलभ शौचालय के प्रमुख बिन्देश्वर पाठक की सुलभ शौचालय योजना के लिये उपलब्ध कराने का वचन देगा। सांसद या विधायक बनने के बाद वचन भंग का दोष नहीं अपनायेगा। जैसा सुधा वर्गीज कहती हैं बिहार ही नहीं समूचे भारत में आज बिचौलियों का बोलबाला है। मुंबई में दलाल स्ट्रट है जहां व्यापारिक दलाली, दलाली के नियमों के मुताबिक होती है। दलाल लोग आपस में पूरी ईमानदारी से लेना देना भी करते हैं पर सरकारी खजाने से रकम उठाने वाली दलाली ने एक विचित्र नक्शा बना डाला है जिस दलाली के किले को ढहाना आज अगर असंभव नहीं तो दुष्कर जरूर हो गया है। बर्तानी राज का सिस्टम फेल हो चुका है नया सिस्टम बन नहीं पारहा है। पीपीपी मोड सहित जितने भी रास्ते अपनाये जारहे हैं उनमें इतने ज्यादा छेद हैं कि अब घूस लेना देना उतना बड़ा पातक नहीं रह गया है जितना जनता जनार्दन द्वारा दिये गये राजस्व में प्रोजेक्ट बनाने, उन्हें क्रियान्वित करने के तरीकों में राजस्व का भयावह अपहरण होरहा है। उसे कानून व न्यायालय के न्यायमूर्ति भी प्रमाण के अभाव में रोक नहीं पारहे हैं। इसलिये कम से कम स्वच्छता अभियान, निर्मल गांव, हर घर में सटीक शौचालय के लिये पहल बिहार से ही की जाये। बाबू बिन्देश्वर पाठक ने समूचे विश्व में सुलभ शौचालय का डंका बजाया है उनकी दृष्टि वैसी ही स्पष्ट है जितनी अढ़ाई हजार वर्ष आचार्य चणक के पुत्र कौटिल्य अर्थशास्त्र के रचयिता तथा अर्थशास्त्र वर्णित सूत्रों व छः हजार श्लोकों के अनुसार राज्य संचालन का जो गुरूमंत्र कौटिल्य ने दिया पौने छः सौ सूत्र निर्धारित किये। बिहार के गांव गांव घर घर मुहल्ला दर मुहल्ला सुलभ शौचालय निर्माण के लिये बिहार की मातृशक्ति आगे आये और बिहार के यशस्वी पुत्र बिन्देश्वर पाठक का आह्वान करे कि बिन्देश्वर आओ, बिहार के घर घर को स्वच्छ बनाने का मंत्रोच्चार के साथ साथ बिहार की मां बहनों की शील रक्षा का राजसूय यज्ञ पाटलिपुत्र में संपन्न कर डालो। बिहार के नेता अगर आपको बुलायें न्योंतें तो ठीक यदि न भी बुलायें न भी न्योंतें तो आप बिहार की मातृशक्ति को शक्तिमती बनाने में वैसा ही उपक्रम करो जैसा भगीरथ ने भागीरथी को धरती में उतारने में किया। भागीरथी का जल पुकार रहा है -
औषधम् जाह्नवी तोयम् वैद्यो नारायणो हरिः।
रिपोर्टर एम.एन. पार्थ ने यह भी संकेत दिया कि नारी गुंजन संगठन की प्रमुखा सुधा वर्गीज कहती हैं ‘हम बिचौलियों, दलालों या ठेकेदारी करने वाले व्यक्तियों से सहकार नहीं कर सकतीं’। वे यह भी बताती हैं कि सरकारी योजना प्रशासक वर्ग को सीधे गांव वालों से ही बात करनी चाहिये। इस सारे प्रकरण में एक बिन्दु गेट फाउन्डेशन से अगर इण्टरनेशनल सुलभ शौचालय सीधे संपर्क साधे तथा बिहार के गांवों में स्वच्छता अभियान में समूचे प्रकरण की वस्तुनिष्ठ जानकारी लेकर राज्य सरकार, भारत सरकार का स्वच्छता अभियान तथा विभिन्न इलाकों में जो नान गवर्नमेंटल आर्गनाइजेशन निर्मल ग्राम योजना, ग्रामीण स्कूलों सहित सार्वजनिक सुलभ शौचालय योजना और जो लोग अपने अपने घरों में ढंग के कम खर्च वाले पर उपयोगी शौचालय निर्माण में रूचि रखते हैं उन सभी बिन्दुओं पर अध्ययन के पश्चात यदि बिहार की महिला मतदाता शक्ति समूह सुलभ शौचालय योजना में यकीन करता हो और अपने जनप्रतिनिधि के वार्षिक सांसद निधि विधायक निधि का कम से कम 50 प्रतिशत भाग अपने सुलभ शौचालय योजना के लिये अपने प्रतिनिधि सांसद या विधायक पर नैतिक दवाब बनाये रखता है और राज्य सरकार केन्द्र सरकार बाबू बिन्देश्वर पाठक के कारगर सहयोग से कारगर योजना का समारंभ का मतभेद रहित सर्वसम्मत निर्णय लेने का मार्ग प्रशस्त करती है वैयक्तिक, जातीय, क्षत्रप दृष्टि को किनारे कर अगर बिहार के गांवों का स्थायी व टिकाऊ सज्जा वाला विकास पथ अपनाया जाता है बिहार के राजनीतिक पुरोधा बाबू बिन्देश्वर पाठक से हार्दिक अनुरोध करने को तैयार होें तो बिहार के गांवों व कस्बों का नक्शा बदल सकता है। ग्रामीण उद्यमिता संवर्धन के नये सोपान भी खुल सकते हैं। तात्कालिक जरूरत केवल इतनी है कि बिहार की राज्य सरकार बाबू बिन्देश्वर पाठक का सहयोग लेने की तैयारी करें।
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