Saturday, 6 February 2016

लॉस ऐंजेल्स और उसकी अनेक काउंटियों में
44 हजार बेघर लोगों का योगक्षेम
संपन्न लोगों के अपने अपने घर बाड़े हैं, जने जने कह रहे हैं हम अनिकेत हम अनिकेत बेघर हैं।

दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण सांस लेने में तकलीफ न हो नयेे साल के पहले दिन विषम अगले दिन सम प्लेट नंबर गाड़ियां सड़क में चलें यह अभियान चला रही थी दिल्ली के स्कूली बच्चों का उत्साह प्रदर्शित करा रही थी। पंद्रह दिन यह उपक्रम चलता रहा इसी बीच दक्षिण कैलिफोर्निया के मशहूर हालीवुड सिटी लास ऐंजेल्स में दक्षिण कैलिफोर्निया के लास ऐंजेल्स शहर के मेयर एरिक गारसेटी के अनुसार कैलिफोर्निया के 1,16,000 बेघर लोगों में से 44 हजार लोग लास ऐंजेल्स और उसकी काउंटियों में अनिकेत जिन्दगी जी रहे हैं। लास ऐंजेल्स नदी की भयंकर बाढ़ ने काउंटियों के रहने वाले लोगों की कठिनाइयां बढ़ा दी हैं। लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है जगह जगह बाढ़ की मिट्टी के ढेर लग गये हैं। तूफान हर चौथे रोज आरहा है। लास ऐंजेल्स टाइम का कहना है Watery Giant Roars लास ऐंजेल्स नदी और इसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। कैलिफोर्निया जब मैक्सिको का हिस्सा था स्पेन सरकार मैक्सिको पर राज करती थी। उन्होंने सन 1977 में अमरीकी संयुक्त राज्य स्थापना के अगले वर्ष कैलिफोर्निया का पहला खेतीबाड़ी आस्थान स्थापित किया था। लास ऐंजेल्स की बसासत सान जोन के बाद दूसरा बड़ा शहर था। संयुक्त राज्य अमरीकी राष्ट्र का कैलिफोर्निया एक सबसे बड़ा पशु पालन एवं खेतीबाड़ी की उपज देने वाला स्थान है। मार्च 1938 में लास ऐंजेल्स में तूफान आया एक दिन तो छः इंच पानी बरसा। सान गबरील मेें तो पांच दिनों में 32 इंच बारिस हुई। पुल, सड़के, रेल पटरियां सब बह गये घर तहस नहस हो गये। 87 व्यक्ति पूरी काउंटी में मर गये और एक लाख से ज्यादा भूमि में जल प्लावन हो गया। लास ऐंजेल्स नदी की बाढ़ को रोकने, राहत उपाय करने के बावजूद हरेक वर्ष दक्षिण कैलिफोर्निया विपदायें सहने का आदी होगया है पर कैलिफोर्निया राज्य सरकार लास ऐंजेल्स सिटी मेयर तथा फेडरल संयुक्त राज्य अमरीका की वाशिंगटन स्थित ह्वाइट हाउस स्थित अमरीकी लोकतंत्र प्रसाद कैलिफोर्निया रूपी दुधारू अमरीकी भूमि और भूमिधरों का ख्याल रखता आरहा है। इस राज्य के पूरे बेघर लोग तथा ला ऐंजेल्स और उसकी काउंटियों के बेघर लोगों को आसियाना मुहैया करने के लिये लास ऐंजेल्स काउंटियों - व्यय अनुमान 260 लाख डालर त्वरित गति से बेघर लोगों को तुरंत उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया है। काउंटी अस्पतालों व जेलों से बाहर आने वाले बेघर लोगों को रिहायश दिलाने के लिये 110 लाख डालर तथा विकलांगों के लिये फेडरल सरकार की मदद से रिहायशें बनाने के लिये 87,50,000 डालर का प्रावधान किया गया है। लास ऐंजेल्स में बेघर समस्या पिछले दस वर्षों में बहुत ज्यादा बढ़ी है। काउंटियों में लोग बर्फानी चिल्ला जाड़ा तंबुओं और छोलदारियों में सी सी करते बिता रहे हैं। दुनिया के समृद्ध देश के अति समृद्ध कैलिफोर्निया की काउंटियों में 26 हजार पुरूषों, स्त्रियों व बच्चों को घर मुहैया करने के लिये एक अरब पिचासी करोड़ डालर का बजट तय है। हिन्दुस्तानी रूपयों में यह रकम लगभग सवा खरब रूपये होती है। अगले दस वर्षों में लास ऐंजेल्स व उसकी सभी काउंटियों में रहने वाले लगभग सभी बेघर लोगों को घर मुहैया कराना है। लास ऐंजेल्स शहर के प्रशासनिक अधिकारी माइगेल सांठना व मुख्य कानून विद शेरन त्सो द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है लास ऐंजेल्स शहर व पार्श्ववर्ती काउंटियों के बेघर लोगों को घर मुहैया कराने की त्वरित तात्कालिक योजना के अनुसार आने वाले दस वर्षों के बीच हर बेघर को घर दिलाने का शिव संकल्प लिया गया है। रपट का मुख्य भाग जिसमें व्यय भी ज्यादा होगा, दस वर्ष की अवधि में घर बेघर को घर दिलाना है। रपट ने यह भी इंगित किया कि बेघर होने वाली समस्या का मूल कारण पिछले वर्षों में जरूरत के मुताबिक बजट का प्रावधान न किया जाना भी है। लास ऐंजेल्स रहने वालों में जो लोग बेघर हैं उन्हें रहने की जगह, रहने लायक घर तुरंत मिलें यह साझा अभियान है। त्वरित गति से बेघरों को रहने लायक मकान मिलें, लास ऐंजेल्स सिटी, लास ऐंजेल्स काउंटियों के जन जन का दवाब बढ़ रहा है। लास ऐंजेल्स टाइम्स में प्रकाशित रपट के मुताबिक रे नाल्डी-‘रे’ गोंजलेज पिछले पांच साल से बेघर जिंदगी जी रहा है। लास ऐंजेल्स की पहली गली के इस बेघर व्यक्ति सरीखे और लोग भी हैं। लास ऐंजेल्स शहर में छोटी अवधि के लिये रिहायशी बन्दोबस्त के लिये बेघर लोगों के लिये केन्द्र आधारित आवासीय व्यवस्था पद्धति का संकल्प किया जारहा है। रपट में अनेक विकल्प सुझाये गये हैं। बेघर लोगों के लिये रिहायश उपलब्ध कराने के लिये धन किन स्त्रोतों से प्राप्त किया जाये, कैलिफोर्निया राज्य तथा फेडरल संयुक्त राज्य अमरीका की संघ सरकार से प्राप्त निधियों के अलावा स्थानीय सहयोग भी लिया जाये। रपट यह भी व्यक्त करती है कि लास ऐंजेल्स सिटी के मतदाताओं की रूचि भी बेघर लोगों को घर मुहैया करने में योगदान के लिये उत्साहित किया जाये। काउंटियों की बजट राशि के साथ साथ सिटी, राज्य तथा फेडरल बजट सब मिल कर बेघर समस्या से निजात पाने का उपाय संभव है। यह ब्लागर लास ऐंजेल्स के बेघर लोगों का सवाल हिन्दुस्तानी शहरों विशेषकर मुंबई, दिल्ली, कोलकाता व चेन्नई शहरों में स्लम व झुग्गी झोंपड़ियों में जिन्दगी बसर कर रहे लोगों के लिये भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संविधान संशोधन के सोलह वर्ष पश्चात भी नगर निगम कहे जाने वाले भारत के बड़े बड़े शहरों के नगर निगम व नगर पालिकाओं को संविधान प्रदत्त अधिकार भारतीय संघ की घटक सरकारें संवैधानिक स्तर देने के लिये तैयार नहीं हैं। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई वगैरह बड़े नगरों की बात बाद में उठाइये पहला सवाल तो यह है कि दिल्ली नगर निगम के तीन हिस्से कर डाले गये पर किसी ने नगर निगम के रहने वालों के बारे में सोचने का समय न तो केन्द्रीय नगर विकास मंत्रालय ने निकाला है न दिल्ली की केन्द्र शासित स्थिति के तहत कार्यशील केजरीवाल सरकार यह सोच पा रही है कि संविधान द्वारा दिल्ली नगर निगम की हैसियत वैसी ही महत्वपूर्ण है जैसी भारत संघ के घटक राज्य की। संविधान संशोधन पारित होने के सोलह वर्ष पश्चात भी त्रिस्तरीय पंचायत राज और मुंबई व दिल्ली सरीखे नगर निगम भी जिनकी जनसंख्या कई भारतीय घटक राज्यों से ज्यादा है वे नगर प्रबंधन सही तरीके से कानून सम्मत संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत संपन्न करने की स्थिति में इसलिये नहीं पहुंच पाये हैं क्योंकि घटक राज्य सरकार तथा केन्द्रीय नगर विकास मंत्रालयों में वाजिब तालमेल का अभाव है। अमरीकी संयुक्त राज्य के कैलिफोर्निया राज्य ने घोषित किया है कि उनके राज्य में एक लाख से ज्यादा बेघर है पर दिल्ली अथवा महाराष्ट्र राज्यों में जहां दिल्ली नगर निगम व मुंबई नगर की बृहन्मुंबई नगर पालिका की जनसंख्या में कितने लोग बेघर हैं कितने लोग सड़कों में रातें बिताते हैं इस बारे में सोच विचार ही नहीं होरहा है। भारत सरकार के नगर विकास मंत्रालय को कैलिफोर्निया राज्य और लास ऐंजेल्स शहर एवं पार्श्ववर्ती काउंटियों के बेघर लोगों के बारे में जिस रपट का उल्लेख करते हुए लास ऐंजेल्स के मेयर एरिक गारसेटी महाशय का कहना है कि लास ऐंजेल्स के नगर प्रशासन अधिकारी मिस्टर माइगेल सानटन लेजिसलेेटिव व्याख्याता शाटन त्सो ने जो रपट पेश की है वह हमें बेघर लोगों को घर मुहैया करने वाली सटीक नीति निर्धारण के लिये प्रोत्साहित करती है। माइक बोनेन लास ऐंजेल्स सिटी कारपोरेशन के वेस्ट साइड डिस्ट्रिक्ट के काउंसिलर ने कहा - मैं कृतज्ञ हूँ तथा उत्साहित हूँ और चाहता हूँ कि बेघर लोगों को घर मुहैया कराने के लिये तुरंत कार्यवाही की जाये। पहले सवाल तो दिल्ली और मुंबई के बेघर स्लम रहने वाले झुग्गी झोंपड़ी में अपने दिन गुजार रहे लोगों के रहने लायक मकान मिलें। झुग्गी झोंपड़ी में सुलभ शौचालय का प्रबंध हो। क्यों न नगर विकास मंत्री वैंकैया नायडू महाशय दिल्ली व मुंबई नगर निगमों की बेघर रहने वाले लोगों के बारे में तुरंत कार्यवाही की चर्चा नहीं कर रहे हैं। दिल्ली सरकार सम विषम गाड़़ी नंबरों के सड़क में एक ही दिन न दौड़ाये जाने की बात कर रही है। वाहन प्रदूषण कम हो यह वे स्कूली बच्चों से कहला रहे हैं। वाहन प्रदूषण तो समूचे प्रदूषण का केवल पांचवां या छठा हिस्सा मात्र है। झुग्गी झोंपड़ी और स्लम भी प्रदूषण कारक तत्व हैं। उनसे वोट बटोर कर केजरीवाल महाशय ने उन्हें वादा किया था कि उनके अच्छे दिन आरहे हैं। चीथड़े चुनने वाले बच्चे जिन्हें भारत के अंग्रेजी अखबार Street Children कहते हैं इन सब की सही सही संख्या मालूम कर जनाब केजरीवाल महाशय स्वयं भी लास ऐंजेल्स के बेघर लोगों को मकान मुहैया करने की स्कीम देखें। दिल्ली के बेघर लोगों के लिये रिहायश का तत्काल चिंतन करें। दिल्ली में सात लोकसभा सदस्य 70 विधानसभा सदस्यों के अलावा राज्यसभा के भी तीन चार सदस्य होंगे इन अस्सी लोक प्रतिनिधियों से अनुरोध किया जाये कि वे अपनी सांसद निधि विधायक निधि का कम से कम 50 प्रतिशत झुग्गी झोंपड़ी स्लम इलाकों में रहने लायक मकान निर्माण करने स्लम एरिया व झुग्गी झोंपड़ी इलाकों में सुलभ शौचालयों के लिये सांसद निधि विधायक निधि का कम से कम 20 प्रतिशत सुलभ शौचालयों के लिये सुलभ शौचालय कार्यक्रम के अधिष्ठाता श्री बिन्देश्वरी पाठक के मार्गदर्शन में सुलभ शौचालय बनें ताकि दिल्ली का वायु प्रदूषण नियंत्रण करने का चौतरफा प्रयत्न किया जा सके। भारत के शहरों का प्रदूषण जिस तीव्र गति से बढ़ रहा है उसे नियंत्रित करने और हर शहर को रहने लायक बनाने का सामूहिक उपाय पहली जरूरत है। स्वच्छता अभियान पर राजनीति हावी न हो यह प्रकरण तो पूर्णतः मनुष्यता की संरक्षा का है। मनुष्यों सहित पशु पक्षी, पेड़ पौधे, मछली सभी को जीवन यापन करना है इसलिये मनुष्य के लालच पक्ष पर जब तक आत्मनियंत्रण नहीं होगा हालात सुधरेंगे नहीं। दिल्ली में जहां तक वाहन प्रदूषण का प्रसंग है सबसे बड़ी वाहन प्रदूषण कारक तत्व वाहन की क्षमता से ज्यादा वजन वाहन पर चढ़ाना, जो वाहन सड़क में नहीं चलने चाहिये और जिनकी उम्र निर्धारित सीमा पार कर चुकी है उन्हें सड़क से हटाया कैसे जाये ? भारी भरकम टूरिस्ट वाहन और दिल्ली ट्रांसपोर्ट की वे बसें जिन्हें एयर कंडीशन बस कहा जाता है उनके द्वारा बढ़ रहा प्रदूषण संपन्न समाज की एयर कंडीशन गाड़ियां सरकार चलाने वाले महानुभावों का एयर कंडीशन में रहना ये सारे सवाल प्रदूषण वर्धक हैं इसलिये लोकप्रतिनिधियों और सरकार के आला अफसरों को दिल्ली की जनता से वादाा करना होगा कि वे न तो एयर कंडीशन मकान में रहेंगे न एयर कंडीशन गाड़ी में चलेंगे। एक बार जब ऐसी मुहिम चलेगी तभी दिल्ली सांस लेने लायक शहर रह सकेगी। दिल्ली के सत्ता संपन्न धनी तथा राजकाज चलाने वाले लोगों को आगामी 26 जनवरी 2016 के दिन घोषित करना चाहिये कि दिल्ली को प्रदूषण रहित बनाने के लिये वे अपना योगदान देने के लिये तैयारी में हैं। स्वयं वातानुकूलित वातावरण में रह कर दिल्ली के कष्ट दूर नहीं हो सकते इसलिये संकल्प कीजिये कि आप आराम की जिन्दगी जीने के बजाय जिस तरह आम आदमी रहता है उस तरह रहने का उपक्रम कीजिये तभी रास्ता निकलेगा। लोकतंत्र में जब तक लोकनेता सामान्य लोक की तरह जिन्दगी जीने का रास्ता नहीं अपनायेगा स्थितियों में सुधार होना लगभग असंभव लगता है। भारत सरकार का संकल्प है कि देश के 100 शहरों को स्मार्ट शहरों में तब्दील किया जायेगा। हिन्दुस्तान की शहरी और ग्रामीण आमदनियों में निरंतर खाई चौड़ी होती जारही है जिन शहरों को भारत सरकार व संबधित राज्य सरकारें स्मार्ट शहर निर्माण प्रक्रिया में जुडे़ हैं। सबसे पहली जरूरत तो यह है कि स्मार्ट सिटी के हर व्यक्ति को मकान की सुविधा के साथ साथ न्यूनतम पारिवारिक आवश्यकताओं की संपूर्ति का प्रावधान इस प्रकार हो कि स्मार्ट सिटी, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण तथा स्वच्छता के मानकों का निर्धारण कर सामान्य नागरिक सुविधाओं के अतिवाद का रास्ता न अपनाया जाये। स्मार्ट सिटी के पंद्रह किलोमीटर तक अवस्थित गांवों के लोगों को गांव की आत्मा बरकरार रखते हुए उन नागरिक सुविधाओं से जोड़ा जाये जो स्मार्ट शहर के लोगों को दी जाने वाली हैं। रेल और सड़क यातायात में वातानुकूलित यात्रा को यथासंभव सीमित किया जाये। वातानुकूलित रेल बस यात्रा भाड़े में उपकर - ऐस लगा कर अवातानुकूलित रेल यात्रा की स्वच्छता पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिये। सभी घटक राज्यों के परामर्श से ही रेल - बस वातानुकूलित यात्रा का भावी स्वरूप इस प्रकार निश्चित और नियंत्रित किया जाना जिससे वातानुकूलन के कुप्रभावों का समीचीन व सटीक अध्ययन कर घरों के वातानुकूलन सहित राष्ट्रीय वातानुकूलन नीति का निर्धारण करते समय वायु प्रदूषण के साथ साथ वातानुकूलन जन्य अन्य कुप्रभावों को विज्ञापित किया जाता रहे और उपभोक्ता व्यक्ति के शारीरिक तथा मानसिक स्थिति में जो बदलाव अनुभव किये जारहे हैं उन्हें सर्वसामान्य की समझ वाली भाषा में परिभाषित किया जाना चाहिये। देश के नीति आयोग को संबंधित राज्यों की सहमति से नीति निर्धारण करने का संकल्प लेना तात्कालिक आवश्यकता है। देश के संपन्न समाज तथा मध्यम वर्ग जो ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित होने का आकांक्षी है उसे समाज के दुर्बल, दलित तथा कमजोर वर्गों के लिये सहानुभूति का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देना आज इसलिये जरूरी होगया है क्योंकि धार्मिक उन्माद जिसका चरम स्वरूप जिहाद में देखा जा सकता है तथा भारत के उन इलाकों में जहां नक्सलवाद तथा उग्रवाद बढ़त में हैं सीधे सादे कबीलाई समूहों के नौजवानों को नक्सलवादी अतिवाद की ओर आकर्षित किया जारहा हैै। विभिन्न आदिम जातियों के समूहों की पारिवारिक तथा सामाजिक स्थितियों का गहरा अध्ययन युग की जरूरत है। आदिवासी समाज के रीति रिवाजों को समझने की जरूरत है। उनके बीच ऐसे समाज सेवी समूह की पहुंच जरूरी है जो किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित न होकर मानव समाज के हित का संकल्प लिये हुए है। इसलिये नीति आयोग के अंतर्गत विभिन्न आदिवासियों, अनुसूचित जातियों के बीच उनकी सामाजिक स्थितियों में सुधार करने के लिये भारत सरकार को 1860 के सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट में आवश्यक संशोधन करने, एन.जी.ओ. के तौर पर काम कर रहे संगठनों की विशुद्ध समाजसेवी तथा विभिन्न धर्मावलंबियों द्वारा अपने धर्म प्रचार के लिये प्रयुक्त किये जारहे एन.जी.ओ. अलग अलग कानूनों द्वारा व्यवस्थित किया जाना भारत की तात्कालिक जरूरत है। भारत की परम्परागत धार्मिक आस्था प्रचार द्वारा अपने मजहब का विस्तार करने की राही नहीं है जबकि भारत में मुख्यतया दो सेमेटिक रिलिजन जिनका उद्गम मध्यपूर्व के जेरूसलम और अरब के मक्का मदीना हैं। ये दोनों मजहब Semetic Religion की श्रेणी में गिने जाते हैं जबकि भारत के धर्म या मजहब उन्हें आप जो भी नाम दें उन्हें पाश्चात्य रीति में Hemetic Religion माना जाता है। भारत में सनातन धर्म के समानांतर जैन धर्म, बौद्ध धर्म तथा सिख धर्म भी भारत में उद्भव हुए इनमें जैन, बौद्ध तथा सिख धर्म क्रमशः महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध तथा गुरू नानक से जुड़े हुए धर्म हैं। जैन व बौद्ध दोनों धर्म वेदांत के प्रतिकूल हैं। वह वेदों को वह मान्यता नहीं देना चाहते जो सनातनी मानते हैं कि वेद अपौरूषेय हैं। सनातनियों में वैष्णव-शैव संप्रदायों में मनमुटाव रहता आया है पर जैन-बौद्ध तथा सिख धर्मियों से सनातनियों का धार्मिक संघर्ष नहीं के बराबर है इसलिये धर्मान्तरण के पक्ष में सनातन शास्त्र सम्मति उपलब्ध नहीं है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार सनातन जिसे अब हिन्दू धर्म कहते हैं और प्रचार-प्रसार एवं दूसरे धर्मों से सनातन धर्म में धर्मान्तरण की अवधारणा न होने के बावजूद आज दुनियां की धार्मिक आबादी में ख्रिस्ती धर्मावलंबी सर्वाधिक हैं तत्पश्चात इस्लाम धर्मावलंबी ही आते हैं। सनातन या हिन्दू धर्मानुयायियों की संख्या विश्व में आज भी एक अरब से ऊपर है। भूतकाल में सनातन या हिन्दू धर्म से धर्मान्तरित होकर जो लोग मुसलमान या ईसाई हुए हैं उन्हें घर वापसी या शुद्धि के नाम पर फिर हिन्दू बनाना एक असहिष्णु विचार है अतः भारत सरकार को सुप्रीम कोर्ट के मार्फत यह निर्णय लेना ही चाहिये कि सनातन धर्म में छुआछूत और धर्मान्तरण का शास्त्रोक्त विधान नहीं है। ऐसा रास्ता अपनाने से भारत का बहुसंख्यक समाज Hate Speech घृणा-भाषण दोष से भी बचेगा और धार्मिक उन्माद का मार्ग भी नहीं अपनायेगा। भारत में ख्रिस्ती व इस्लाम धर्मावलंबियों में यह विश्वास जमेगा कि उन्हें भारत का हिन्दू समाज धर्मान्तरित करने का पक्षधर नहीं है।
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