ओबामा उवाच - समृद्ध सुरक्षित विश्व गवाक्ष अमेरिका
संयुक्त राज्य अमरीकी कांग्रेस में प्रेसीडेन्ट ओबामा महाशय का निर्णायक
मांगलिक वयं सर्वे गमिष्यामो संबोधन
स्टीफन मार्च उपन्यासकार होने के साथ साथ एस्क्वायर मैगजीन के सांस्कृति स्तंभकार भी हैं। उनकी ताजी औपन्यासिक कृति The Hunger of the Wolf हिन्दुस्तानी लहजे में उनकी औपन्यासिक रचना को ‘भूखा भेेड़िया’ कहना ज्यादा सटीक लगता है। स्टीफन महाशय ने अपने आलेख The Post - Obama left में प्रेसीडेन्ट ओबामा की उपलब्धियों का उल्लेख करने के समानांतर उन्हें लगा प्रेसीडेन्ट ओबामा थक गये हैं। पेरिस कानफ्रेंस उनकी ऊँची उपलब्धि है, बेरोजगारी में भी दस फीसदी के ऊँचे शिखर से 5.9 प्रतिशत नीचे लुढ़की है यह भी उनकी बड़ी उपलब्धि है। अपने समापन संदेश की तैयारी करते वक्त इंश्योरेेंस न किये हुए वयस्क अमरीकी भी 35 फीसदी तक पहुुंचे हैं। ओबामा की दयामूलक भावना आयुध-संस्कृति जिसे अमरीकी समाज Gun Culture कह कर आयुध रखना आत्मरक्षा का हेतु मानता है। भारतीय मानसिकता कृष्ण, महावीर, गौतम और गांधी सहित निरायुध संस्कृति की पोषक है। जार्ज स्केल्टन का प्रेसीडेंट ओबामा को उलाहना देना, यह कहना कि हाल के गये सप्ताहों में आयुध जन्य हिंसा से पीड़ित मन से राष्ट्राध्यक्ष ने अपने समापन संदेश में आयुध संस्कृति के खिलाफ भी बोलना चाहिये था। अमरीकी गन लॉबी पर कांग्रेस रोकथाम नहीं लगा पारही है पर जरूरत तो समूचे विश्व में अहिंसा का वातावरण बनाने की तात्कालिक महत्वपूर्ण नियति है। प्रेसीडेन्ट ओबामा व्यक्ति के रूप में आयुध सत्ता के समर्थक नहीं हैं। जार्ज स्केल्टन की मान्यता है कांग्रेस पलायनवादी है आयुध सत्ता का सामना नहीं करना चाहती। विश्व स्तर में असमानता सम्पत्तिशाली समाज की करनी पर रोक लगाने का सही रास्ता तो संपन्नता पर वैश्विक कर लगाया जाये, यह राय है मिस्टर फिकेटी की पर वे स्वयं यह मानते हैं कि वैश्विक कर संधान पूर्णतः काल्पनिक स्वर्ग की अवधारणा है जिसे अंग्रेजी में An Utopian Idea कहा गया है। अमरीकी विचार पोखर ने अब्राहम लिंकन की मानवोचित व्यवहार कला को स्थापित करने के लिये जो रास्ता चुना उसे अमरीकी जीवन चरित शैली ने संयुक्त राज्य अमरीका के दक्षिणी राज्यों के विद्रोह पूर्ण संघ से पृथक होने के प्रयास को सिविल वार कहा जिसे हिन्दुस्तानी तौर तरीकों पर गृहयुद्ध या घर का वैरी कहा जा सकता है पर अब्राहम लिंकन ने जो रास्ता चुना वह Civil War नहीं अमरीकी फेडरल सत्ता जिसे 4 जुलाई 1776 को जिसे बर्तानी राजकुल की ‘राजा पश्यति कर्णाभ्याम्’ दोष का प्रतिकार कहा जा सकता है। उस लोकसत्ता को खंडित न होने देने के लिये अब्राहम लिंकन ने जो भी उपाय किये उसे धर्मयुद्ध कहना ज्यादा तर्कसंगत होगा। नीग्रो दास प्रथा समाप्ति का जो महामानव यज्ञ अब्राहम लिंकन ने 2008 से 133 वर्ष पूर्व संपन्न किया, अफ्रीकन अमरीकी का अमरीकी प्रेसीडेन्सी संचालन एक अभूतपूर्व एक अद्वितीय घटना थी। नस्लवाद तथा मनुष्य मनुष्य में चौड़ी होती जारही आर्थिकी आज भी अमरीक समाज से पूर्णतः लुप्त नहीं हुई है। लगता है तुलसीदास की सत् व असत् दोनों को नमन करने की अवधारणा का अब्राहम लिंकन में भी स्वाभाविक रूप से विद्यमान थी। तुलसीदास का यह कथन - वंदऊँ संत असंतन चरना अब्राहम लिंकन ने अपने अस्तित्व के महानाद अवसर से सत्तासी वर्ष पहले अमरीकी संघ की संरक्षा के लिये - धर्मयुद्ध के समानांतर आत्म बलिदान भी संपन्न किया। अमरीकी राजधर्म में जो श्रीगणेश अब्राहम लिंकन ने अपनी प्रेसीडेंसी अवधि में संपन्न किया उसे क्रियात्मकता बराक हुसैन ओबामा के अमरीकी प्रेसीडेंसी आसन ग्रहण करने में संपन्न हुई। लोकमत से गठित कोई भी निर्वाचित सरकार अपने मतदाताओं के दबाव से बच कर नहीं निकल सकती। अमरीका सहित समूचे विश्व में कारपोरेट संस्कृति जन्य आर्थिकी महादानव को नियंत्रित करना द्राविड़ प्राणायाम है। विश्व में व्याप्त Income Inequality का सामना तो केवल कौटिल्यीय अर्थशास्त्र के लगभग पौने छः सौ सूत्र तथा पंद्रह अधिकरणों, एक सौ पचास अध्यायों, एक सौ अस्सी प्रकरणों एवं अर्थशास्त्र के छः हजार श्लोकों का उपयोग आज के डेमोक्रेटिक दुनियां में किस प्रकार विवेचित कौटिल्य की अर्थशास्त्रीय राजधर्मिता का उपयोग कैसे हो यह यक्ष प्रश्न है। सृृष्टि में असंभव कुछ नहीं है पर संभाव्यता के आरपार होने वाले प्रकरणों पर विचार विमर्श करके ही रास्ता तय हो सकता है। अभी अमरीका का राजधर्म इतिहास महज 240 वर्ष पूरे करने वाला है। इसलिये उस इतिहास को समग्र इतिहास मानना विवेक सम्मत नहीं भी हो सकता। बहुत से रिपब्लिकन विचारकों की सोच है कि दुनियां का इतिहास मात्र दस हजार वर्ष पुराना है। अमरीका के वैज्ञानिक चिंतन पोखर नासा से यदि यह अपेक्षा की जाये कि 5116 वर्ष से इधर उधर बीस पच्चीस वर्ष की अवधि में जब अगहन शुदी एकादशी के दिन ज्योत्सर कुरूक्षेत्र में कृष्णार्जुन संवाद हुआ था क्या वह संवाद अंतरिक्ष में विद्यमान है ? क्या कृष्णार्जुन संवाद को नासा के वैज्ञानिक शोध से आज भी सुना जा सकता है ? जब कि कृष्ण अर्जुन संवाद को कुरूक्षेत्र में युद्ध की तैयारी में संलग्न लाखों लोगों में से किसी ने भी नहीं सुना क्योंकि उन्हें संवाद जानने की रूचि नहीं - रणरूचि थी पर कुरूक्षेत्र से एक सौ मील उत्तर पूर्व में गंगा तट हस्तिनापुर में संजय ने सुना और अपने स्वामी राजा धृतराष्ट्र को वह सब बताया जो कुरूक्षेत्र में घटित होरहा था। स्टीफन मार्च कहते हैं - A single graph in piketty’s CAPITAL completed 200 Years income and wealth records from more than 20 Countries. Coates the case reparation in the Atlantic was remarkable mainly for the specificity of its claim rather than a vogue spirit of racism on other side and poor outcomes American on the other. ओबामा महाशय ने रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख धनकुबेर रिपब्लिकन पार्टी से अमरीकी भावी प्रेसीडेंट उम्मीदवार महाशय डोनाल्ड ट्रंप का नाम उल्लेख न करते हुए ट्रंप महाशय की उक्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा - Any one claiming that America’s economy is in danger is peddling fiction and political hot air. प्रेसीडेन्ट ओबामा महाशय ने अमरीकी जनता जनार्दन से कहा - नस्ल और मजहब के आधार पर दुर्भावना फैलाना मनुष्यता के साथ साथ संयुक्त राज्य अमरीका के हित में नहीं है। उन्होंने कहा अमेरिका विश्व का शक्ति संपन्न राष्ट्र राज्य है यह हर अमेरिकी को अपने जेहन में रखना है। प्रेसीडेन्ट ओबामा महाशय ने नव निर्वाचित हाउस स्पीकर महाशय पाल.डी. रायन की प्रशंसा की और उनके गहन विमर्श पूर्ण बहस कराने के लक्ष्य का लोकतंत्र का प्रमुख स्तंभ बताया। स्पीकर रायन निर्णायक वक्ता प्रेसीडेंट ओबामा के पृष्ठभाग वाली पहली आसनी पर विराज रहे थे। उन्होंने तीन महीने पहले ही स्पीकर आसन ग्रहण किया था। अमरीकी सेनाओं की प्रशंसा करते हुए उन्होंने एक या दो बार प्रसन्नतापूर्वक वाहवाही भी की। मधुर संबंधों के बावजूद प्रेसीडेंट ओबामा रिपब्लिकन बहुल कांग्रेस से यह अपेक्षा नहीं करते कि रिपब्लिकन अमरीकी प्रेसीडेंट के आयुध नियंत्रण अस्त्र शस्त्रों पर सामाजिक जीवन को ओढ़ने की वृत्ति छोड़ने के पक्ष में रहेंगे नहीं, न ही आप्रवासी नीति और ऊँचे दरों पर न्यूनतम पारिश्रमिक पर उनके उदार दृष्टिकोण को संबल नहीं देेंगे। अपने पिछले सात वर्षों की अमरीकी प्रेसीडेंसी अवधि में जिन उसूलों और धारणाओं को उन्होंने संबल दिया उनका निर्णायक संबोधन में अमरीकी राष्ट्र राज्य को यही कहना था कि अमरीकी राष्ट्र सत्ता को यह विचारना ही चाहिये कि अमरीका अपने हर नागरिक को आकांक्षित अवसर उपलब्ध कराता है। राष्ट्र को यह विचारना ही चाहिये कि नवीन आर्थिकी व तकनालाजी से लोकहित होना चाहिये आर्थिकी व तकनालाजी लोक विरूद्ध न हों। अमरीकी सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित रखते हुए दुनियावी पुलिसिया रूतबा न अपनाये हमारी राजधर्म की रणनीति, हमारे राष्ट्र के लिये क्या श्रेयस्कर है ? कौन से हालात हमें त्रस्त करेंगे यह निर्णय लेना ही होगा। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा बाजार वाद में अपेक्षित बदलाव वैश्विक बाल संवर्धन (KinderGarten) तथा विद्यालयी शिक्षा उपादेयता सामाजिक सुरक्षा बरकरार रखते हुए जन स्वास्थ्य संरक्षा (Medicine) के साथ साथ उन्होंने अपने प्रथम सहयोगी वाइस प्रेसीडेंट महाशय जो. विडन Moonshot Project to cure Cancer को संवर्धन देने की प्रतिज्ञा करने का भी आह्वान किया। विदेश नीति पर भी उन्होंने जीवंत प्रकाश डाला रिपब्लिकन जन जो प्रत्यालोचना कर रहे हैं उसे उन्होंने पूर्णतया नकार डाला। उन्होंने अपनी विदेश रणनीति ईरान, क्यूबा व चीन संबंधी प्रसंगों का पूरा पूरा बचाव किया तथा कहा उनकी विदेश रणनीति ने विश्व भर में अमरीकी हित संवर्धन ही किया है। उन्होंने अमरीकी समाज से शरणागतों को शरण देने की तात्कालिक मानवीय आवश्यकता बताया। सीरिया में जो कुछ होरहा है उसे उन्होंने सिविल वार गृहयुद्ध कहा। उन्होंने ट्रांसपैसेफिक पार्टनरशिप की वकालत करते हुए बारह राष्ट्रों से व्यापार गुहार लगायी। उन्होंने कहा - सटीक नेतृत्व वही कहलाता है जो सैन्य सत्ता का अनुकूल प्रयोग करे और दुनियां के देशों को अपना अनुचर बनाने का ऊँचा लक्ष्य साधे। उनका कहना था कि यही सही शक्ति संपात है यही सही नेतृत्व की पहचान भी है। राजनैतिक रणनीति वाला द्वन्द इकतरफा जिद से हल नहीं हो सकता। वैचारिक तथा राजनीतिक मतभेदों का समाधान करने के लिये तर्कसम्मत बहस मुबाहसे की जरूरत है। तार्किक तथा रचनात्मक दृष्टिकोण अपना कर ही बहस के द्वारा मतभेदों पर पुनर्विचार हो सकता है। लोकतंत्र या डेमोक्रेसी की पहली सीढ़ी यह है कि अपने प्रतिकूल विचार को ध्यानमग्न होकर सुनो। उस पर तार्किक दृष्टि से विचार करो। अखबार नवीसों का मानना है कि अपने संबोधन के समापन के क्षणों में वर्तमान अमेरिकी राजनीतिक वैचारिक उठापटक पर अमरीकी राष्ट्र के पहले अश्वेत प्रेसीडेन्ट की वार्ता को उपदेश तरीके की वाणी विलास वाला संबोधन करार दिया जब कि प्रेसीडेन्ट ओबामा ने अपने पिछले सात वर्षों की प्रेसीडेन्सी में अमरीकी राष्ट्रवादिता को एक नया चेहरा दिया। उन्होंने कहा - देखिये, सोचिये, यदि कोई भला मानस जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक सोच पर शंका व्यक्त करता है तब श्रीमन आप पूर्णतः इकले पड़ जायेंगे इसलिये मनन और चिंतन वैचारिक इमानदारी से कीजिये। बिल क्लिंटन पूर्व प्रेसीडेन्ट ने एक बार कहा था - हरेक प्रेसीडेंसियल निर्वाचन में डेमोक्रेट प्रेम में डूबते हैं और रिपब्लिकन पंगत में ही खड़े रहते हैं। यह फैसला तो नवंबर 2016 में संयुक्त राज्य अमरीका के आगामी राष्ट्रपति निर्वाचन बेला में अमरीकी मतदाता करेंगे कि उन्हें धनकुबेर राष्ट्राध्यक्ष चुनना है या ऐसे व्यक्ति को जो जो मध्यम मार्ग का आन्वीक्षिकी षडविधा राजनीति का मार्ग अपनाये। वर्तमान में अमरीका सहित समूचे विश्व के सम्मुख हिमालय सरीखा यक्ष प्रश्न है कि संपन्न विपन्न के बीच बढ़ रही खाई को कैसे पाटा जाये। यक्ष प्रश्न का उत्तरार्ध यह है कि आततायी जिन्हें पश्चिम Terrorist कहता है धार्मिक उन्माद हो या पुलिसिया उन्माद वाला आयुध मार्ग का विकल्प क्या है ? क्या हिंसा विहार को रोकने, अहिंसा का रास्ता अपनाने का संकल्प विश्व के मनीषी लेना पसंद करेंगे अथवा जिसे पश्चिम World War कहता है ऐसे तीसरे World War की पृष्ठभूमि तो तैयार नहीं होरही है। अंततोगत्वा यह तो मानना ही पड़ेगा कि अमरीकी प्रेसीडेन्ट बराक ओबामा ने अमरीका सहित दुनियां के देशों के सामने शांति पथ का रास्ता सुझाया है। समृद्धिशाली अमरीका राष्ट्र राज्य के वे प्रेसीडेन्ट के नाते बराक ओबामा अमरीकी राष्ट्र निर्माताओं की पंगत में जिसमें ज्यादातर इतिहास के कायल नहीं पर तुलसीदास के रामचरित मानस की तरह अपनी अपनी अथवा अपने चहेते प्रेसीडेन्ट की जीवनी जिसे अंग्रेजी भाषा में Biography कहते हैं उससे ही ज्यादा प्रभावित होते हैं। हिन्दुस्तान सरीखे देश में मनुष्यता तथा सृष्टि का इतिहास बहुत लम्बा है। हिन्दुस्तान मनुष्यों के अहोरात्र - दिन रात के 24 घन्टे के समानांतर पितरों का अहोरात्र याने दिन शुक्ल पक्ष के पंद्रह दिन और रात कृष्ण पक्ष के पंद्रह दिन आगे बढ़ कर देवताओं के अहोरात्र - उत्तरायण के छः महीने का दिन और दक्षिणायन के छः महीने की रात्रि। यहां की कालगणना धरती में पैदा होने वाले मनुष्यों सहित जीव जंतुओं का बारह मासा, पितरों का बारह मासा तथा देवताओं के बारह मासा के साथ साथ सृष्टिकर्त्ता का एक दिवस तथा सृष्टिकर्त्ता की एक रात्रि सहित सृष्टि का दिव्य वर्ष कालगणना के ये चार स्त्रोत हैं। हिन्दुस्तान के लोग इसे निमेष, विपला, पला, घड़ी, अहोरात्र, सप्ताह, पक्ष, मास तथा संवत्सर जिनकी संख्या भी भारतीय 60 मानते हैं यही कालस्त्रोत है। कालखंड के निर्धारण में उसी तरह मत भिन्नता बनी रहती है जिस तरह मनुष्यों के चेहरे व आवाजें अलग अलग होने के साथ साथ उनमें रूचि भिन्नता भी होती है। प्रेसीडेन्ट ओबामा का सबसे बड़ा मानवीय चेहरा सीरिया के गृहयुद्ध अथवा जिहाद जनित हिंसा प्रतिहिंसा से जो मानवीय संत्रास उपजा है। सीरियाई सीरिया से जान बचाने के लिये शरण की खोज में हैं। प्रेसीडेन्ट ओबामा का अमरीकी समाज से शरणागत को शरण देने का जो गुुरूमंत्र उन्होंने दिया है उस पर सहृदयतापूर्वक हर अमरीकी विचार करेगा। भारत में कहा जाता है -
शरणागत दीनार्त्त परित्राण परायणे सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणी नमोस्तुते।
शरण में आये व्यक्ति का योगक्षेम स्वधर्म है।
प्रेसीडेन्ट ओबामा ने अपनी कमी का इजहार करते हुए खेद प्रकट किया कि उनकी प्रेसीडेन्सी अवधि में वाशिंगटन में राजनीतिक कड़वाहट बद से बदतर हुई। वे चाहते हुए भी अहर्निश प्रयत्नशील रहने के बावजूद यह समझते हुए भी कि क्या सटीक और क्या समीचीन है अपने राजनीतिक विरोधियों में कारगर बहस के द्वारा राजनीतिक सरोकारों के समाधान का रास्ता नहीं बना पाये। सत्य उक्ति - A President with the gifts Lincoln and Roosewelt might have better bridged The Divide. अब्राहम लिंकन और रूजवेल्ट दोनों राष्ट्रपति युद्ध जुगुप्सा संत्रस्त व्यक्तित्त्व थे परन्तु उन दोनों की प्रतिभा ने अमरीकी राष्ट्र को जीवंतता दी। ओबामा में वे सभी प्रत्युपन्न मति विद्यमान थीं जिनके सहारे अब्राहम लिंकन और रूजवेल्ट ने अमरीका की नाव को समुद्र के भंवर से बाहर निकाला। ऐसा प्रतीत होता है कि संपूर्ण सदाशयता के बावजूद प्रेसीडेन्ट ओबामा ने जिस तार्किकता से अमरीका के मतदाताओं को प्रेरित किया और अपने कार्यकाल के सात वर्षों में अहर्निश जो कौशल दिखाया उसे नस्लवाद को प्रश्रय देने वाले अमरीकी समाज के गौरांग महाप्रभुओं का वह वर्ग पचा नहीं पारहा है कि अमरीका सरीखे श्वेत गौरांग महाप्रभुओं का सरताज एक अफ्रीकी अमरीकी हो गया। रिपब्लिकन तो अब्राहम लिंकन भी थे जिन्होंने दास प्रथा समाप्ति के लिये अपना बलिदान दिया तथा करफरेड समूह की अमरीकी संघ से दक्षिण अमरीका को अलग कर अपनी ढपली बजाने के राग को बेसुरा ही नहीं किया धर्मयुद्ध की पताका फहरा दी। अमरीकी धनकुबेर डोनाल्ड ट्रंप अथवा वर्तमान में उनके प्रतिस्पर्धियों में बुश खानदान के जेब बुश सहित रिपब्लिकन प्रेसीडेन्सी उम्मीदवारी सात में से कोई भी व्यक्ति उपलब्ध कर ले, नवंबर 2016 में संपन्न होने वाले चुनाव के नतीजे किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में जायें बराक हुसैन ओबामा ने जो जाग्रति संयुक्त राज्य अमरीका में नयी ज्योति के रूप में जाग्रत की है वह भारतीय राजा रंतिदेव सरीखा आदर्श है जिसने कहा था -
नत्वहम् कामये राज्यम् न स्वर्गम् न पुनर्भवम्, कामये दुःखतप्तानाम् प्राणिनाम् आर्ति नाशनम्।
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