Saturday, 27 February 2016

जन गण मंगल दायक जय हे भारत भाग्य विधाता
इलाहाबादी मौनी अमावस त्रिवेणी-स्नान मुहूर्त्त - चीनी नये साल का पहला दिन
इस वर्ष मौनी अमावस का स्नान पर्व माघ बदी अमावस जिसे इलाहाबादी मौनी अमावस कहते हैं उसी मौनी अमावस को दक्षिण भारत के लोग पौषी अमावस मानते हैं। मौनी अमावस के दिन ही गंगा-जमुना-सरस्वती संगम पर देवता व दैत्यों की छीना झपटी में अमृत कलश से अमृत कण गिरे थे वह महापर्व था। चीन के देहातों में रहने वाले सांस्कृतिक चीन के उद्गाता, सिंगापुर जो भारत में गंगा तट पर स्थित श्रंगबेरपुर का पौर्वात्य अवतार है। ताइवान, हांगकांग के चीनी मूल के लोग, कोरिया के मन्दारिन भाषा भाषी लोग सोमवती अमावस जो अबकी 8 फरवरी 2016 को पड़ रही है इसे इलाहाबाद के गांवों के लोग मौनी अमावस कहते हैं। यह दिन समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत बिंदुओं का त्रिवेणी तट पर गंगा, यमुना तथा सरस्वती के संगम का महापर्व है। सांस्कृतिक और चीन की राष्ट्रीयता समर्थक लोग मौनी अमावस को अपना नया साल बताते हैं। चीन की मुख्य भूमि के मौजूदा शास्ता समाज का कहना है कि वे विश्वविख्यात ग्रेगेरियन कैलेंडर को चीन का सरकारी कैलेंडर मानते हैं और शास्ताओं में ज्यादातर उन लोगों का प्रभुत्व है जो निरीश्वरवादी अथवा Athiest  कहते हैं परन्तु चीन की देहाती परम्पराओं को मानने वाले मौनी अमावस को ही अपना नया साल बताते हैं। विस्तारवादी चीनी कम्यूनिस्ट सत्ताधीश भारत के अनेक हिस्सों को अपना बताते थकते नहीं। समय समय पर अपना बेसुरा राग अलापते रहते हैं। चीन का यह शास्ता समाज यह भूल रहा है कि समूचे चीन राष्ट्र पर भारत के मौनी अमावस की छाप है। चीन के Athiest तथा भारत के मैकोलाइट अंग्रेजी विद भद्रलोक को क्षीर सागर मंथन की कहानी पूरी पूरी कल्पनामय महसूस होती है पर यह कोरी कल्पना नहीं अमृत कण धरती में गिरने का महापर्व है। भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री तथा षोडषी लोकसभा नेता नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भारत के पांच धाराप्रवाह हिन्दी भाषणकर्ताओं और प्रत्युपन्नमति वक्ताओं में पांचवे पंच हैं। उनसे पहले डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी अपनी धाराप्रवाह हिन्दी भाषण शैली से भारत के लोगों का मन मोह चुके हैं। डाक्टर मुखर्जी की मातृभाषा बंगला थी पर उनकी अद्वितीय हिन्दी भाषण क्षमता के कायल तो स्वयं पंडित नेहरू भी थे। भारत की आजादी से पूर्व और आजाद भारत में डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी की वक्तृता कला श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करती थी। डाक्टर मुखर्जी के पश्चात जय प्रकाश नारायण और डाक्टर लोहिया धाराप्रवाह भाषणकर्त्ताओं में अग्रणी थे। अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा संसद में और जनसामान्य में हिन्दी भाषण क्षमता के एक महत्वपूर्ण प्रशंसक पंडित नेहरू थे। ये चारों आशुवक्ता नेहरू तथा उत्तर नेहरू युग में भारत में गुंजार करते रहे। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हिन्दी भाषण कला मर्मज्ञों में पांचवे व्यक्ति हैं। यह आशुवक्ता नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का सौभाग्य है कि चीन के साथ सांस्कृतिक व राजनीतिक सरोकार स्थापित करने के लिये उन्हें अद्वितीय सौभाग्यशाली सुअवसर मिला है। चीन का आम आदमी मौनी अमावस के अमांत पर्व को अपना राष्ट्रीय व सांस्कृतिक नया वर्ष मानता है। चीन के सांस्कृतिक नये साल के पहले दिन का लाभ भारत और चीन के संबंधों को पटरी पर लाने का स्वर्णिम अवसर भारत को मिला है। चीन की मुख्य भूमि जिसके मौजूदा शास्ता अपने आपको Athiest मानते हैं और ख्रिस्ती मजहब की ओर झुके हुए प्रतीत होते हैं चीन में Athiest और ख्रिस्ती धर्मावलंबियों की वास्तविक जमीनी संख्या क्या है ? तिब्बत और सिकियांग वाले दुनियां को छोड़ कर शेष चीन में बौद्ध मतावलंबियों व इस्लाम मतावलंबियों की वास्तविक संख्या कितनी है ? सिंगापुर, ताइवान, हांगकांग तथा कोरिया के मंदारिन भाषियों की जनसंख्या क्या है ? क्या मुख्य चीन भूमि में मंदारिन भाषा पर कोई अवरोध तो खड़ा नहीं हुआ है ? मंदारिन भाषा के भारतीय विदेश सेवा मर्मज्ञ संख्या भारतीय भाषाओं में उनकी मातृभाषा अभिव्यक्ति क्षमता तथा मंदारिन भाषा प्रयोग क्षमता में क्या विदेश मंत्रालय ने जमीनी अनुसंधान किया है ? मंदारिन और भारतीय भाषाओं में तमिल का सुखद संगम सिंगापुर में दृष्टिगोचर होता है। वहां की दो मुख्य भाषायें मंदारिन व तमिल हैं। ताइवान का चीनी राष्ट्रीय सत्व हाल में संपन्न चुनावों के पश्चात दृष्टिगोचर हुआ है इसलिये सिंगापुर के अलावा ताइवान, हांगकांग तथा कोरिया के मंदारिन साहित्य सहित चीन की मुख्य भूमि में देहाती मंदारिन साहित्य सहित चीनी गणराज्य की लोकभाषा मंदारिन गंवई गांव की मंदारिन से कितना दुराव छिपाव रखे हुए है। इसलिये भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की कूटनीति-विदेश नीति मंत्रणा को सशक्त बनाने के लिये पहली राष्ट्रीय जरूरत यह प्रतीत होती है कि अरूणाचल प्रदेश में मंदारिन विश्वविद्यालय की तत्काल स्थापना किये जाने का संकल्प लिया जाये। जिन वैदेशिक मंत्रालयों, राजदूतों एवं विशेष अधिकारियों की अपनी अपनी मातृभाषा में अच्छी पकड़ है और जो लोग मंदारिन भाषा के प्रति आकर्षित हैं विदेश मंत्रालय ऐसे द्विभाषी विशेषज्ञों का पैनल तैयार करे। आने वाले दो वर्षों में याने 2018 की मौनी अमावस पर्व से पूर्व भारतीय-मंदारिन विश्वविद्यालय को अस्तित्व में लाया जाये। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती विश्व अहिंसा दिवस Non-Violence Day और उसके तीन महीने बाद 2020 की मौनी अमावस के दिन यह घोषित कर दिया जाये कि भारत चीन के साथ कूटनीतिक व वैदेशिक पत्राचार मंदारिन भाषा में संपन्न करेगा। चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया था क्या ह्वेनसांग इलाहाबाद भी गया ? क्या उसने मौनी अमावस को संगम में स्नान कर चीनी नया साल इलाहाबाद में मनाया ? आज की हमारी इस दुनियां में मंदारिन भाषा भाषी लोग डेढ़ अरब हैं। हिन्दुस्तान में भाषाओं का उद्गम नटराज राज के महाताण्डव नृत्य के पश्चात नटराज का डमरू बजा और उससे नौ और पांच बार ध्वनियां सुनाई दीं। इन ध्वनियों भारतीय भाषाओं के 51 अक्षर स्वर-व्यंजनों के ताल सुनाई दिये। भारत में नागरी लिपि के अलावा गुरूमुखी, गुजराती, कन्नड़, मलयाली, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बांग्ला, असमी, मइती लिपियां प्रचलन में हैं। इन सभी भारतीय लिपियों के स्वर व्यंजन एक सरीखे हैं। केवल फारसी लिपि और अरबी लिपियां जिनका उपयोग भारत में भी होता आया है उनका अक्षर विन्यास रोमन लिपि तथा रोमन या ग्रीक अल्फाबेट जो क्रमशः 26 और 24 हैं भारतीय अक्षर विन्यास से भेदग्राही हैं। हिन्दुस्तान में रहने वाले वे लोग जिन्हें दुनियां के दूसरे देशों के लोग हिन्दू कहते हैं हिन्दू कहे जाने वाले लोगों के लिये माघ का पूरा महीना खास तौर पर मौनी अमावस अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। आसेतु हिमाचल प्रतिवर्ष लाखों लोग मौनी अमावस का स्नान लाभार्जन करते हैं। मौनी अमावस का सीधा संबंध समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत की बूंदें छीना झपटी में सबसे पहले मौनी अमावस के अमांत पर्व में त्रिवेणी - गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम इलाहाबाद जिसे भारत के पारम्परिक लोग प्रयाग कहते हैं वहां गिरीं। अमृत बिन्दु धरती पर पड़ने के इसी पर्व को दुनियां भर के मंदारिन भाषी अपने वर्ष का पहला दिन याने साल मुबारक मानते हैं। ईसवी सन् 2016 में मौनी अमावस का यह पर्व सोमवार 8 फरवरी को था। ईसवी सन् 2017 में मौनी अमावस पर्व शुक्रवार 27 जनवरी 2017 को संपन्न होगा। मंदारिन और भारतीय वाणियों में आगामी वर्ष का नया साल (उसे हम सांस्कृतिक चीन का नया साल कहें तो वह ज्यादा तार्किक होगा) भारत सरकार पूरे उत्साह के साथ मंदारिन और भारत की सभी 22 भाषाओं में चीन का सांस्कृतिक नया साल मनाने का राष्ट्रीय संकल्प लें। भारत के हिन्दू तथा दुनियां के दूसरे देशों में बस गये हिन्दुओं की संख्या एक अरब के करीब बताई जाती है। उनके लिये तीर्थराज प्रयाग और संगम स्नान जिन्दगी का एक अनमोल रत्न है। दुनियां की पूरी आबादी में करीब डेढ़ अरब मंदारिन भाषी मौनी अमावस को अपना नया साल मानने वाले लोग हैं भले ही चीनी गणराज्य अपना सरकारी कैलेंडर ग्रेगेरियन कैलेंडर को मानता है जो पहली जनवरी से 31 दिसंबर तक के 365 या 366 दिन का वर्ष होता है परंतु सांस्कृतिक चीन ग्रेगेरियन कैलेंडर से प्रभावित नहीं है। मंदारिन भाषी चीनी लोग यह मान्यता रखते हैं कि हिन्दुस्तान के शहर इलाहाबाद में हर साल मौनी अमावस मनाई जाती है। मौनी अमावस का गंगा स्नान - मौन रह कर स्नान करना। स्नान के पश्चात भाष्कर देव को सूर्यार्घ देना इस परिपाटी को दुनियां के अढ़ाई अरब लोग बड़े चाव से मनाते हैं। इलाहाबाद का संगम स्नान भारत ही नहीं अपितु चीनी मंदारिन भाषियों का भी महापर्व है। आधुनिक राजनीतिक चीन का शास्ता समाज - अमृत कण धरती पर पड़ने के मुहूर्त्त को इसलिये नकारेगा क्योंकि वह अपने आप को Athiest  कहता है। चीन के शासकों में इतनी हिम्मत नहीं कि वे देहाती चीनियों द्वारा मनाये जाने वाले मौनी अमावस-अमांत पर्व को चीन के परम्परा प्रेमी लोगों द्वारा नया साल मानने से इन्कार कर दे। चीन की Athiest सरकार का मंदारिन भाषी नया वर्ष सालाना मौनी अमावस को मनाये जाने का विरोध करने का साहस भी एकत्र नहीं कर पायेगा इसलिये जरूरी है कि भारत सरकार यह संकल्प ले कि सांस्कृतिक चीनी सभ्यता के लिये इलाहाबाद की मौनी अमावस वाली रात बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिये भारत सरकार को चीनी सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़ना होगा। मंदारिन भाषा के जरिये चीन और हिन्दुस्तान एक दूसरे के नजदीक पहुंच सकते हैं इसलिये सांस्कृतिक चीनी मान्यताओं को पुष्ट करने के लिये भारत सरकार बमरौली हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दे। हवाई अड्डे का नामकरण चीन के सांस्कृतिक नये साल की यादगार में मौनी अमावस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित किया जाये। सांस्कृतिक चीन की महत्ता को भारत व चीनी नये (सांस्कृतिक) वर्षारंभ के रूप में मनाये। मुख्य भूमि सहित जो भी चीनी समाज मंदारिन भाषा के जरिये अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान संजोना चाहता हो उसे मौनी अमावस केे दिन प्रयाग पहुंच कर सांस्कृतिक चीनी नया साल मनाने का निमंत्रण दिया जाये। इलाहाबाद को भारत सरकार दुनियां के अढ़ाई अरब निवासियों को Cultural Tourism के जरिये जोड़ कर चीन और हिन्दुस्तान दोनों की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकते हैं। यद्यपि चीन का वर्तमान शास्ता समाज चीन में क्षीर सागर के होने की बात एकदम खारिज कर देगा, समुद्र मंथन व अमृत बूंदें गिरने की बात भी नहीं जम पायेगी पर मंदारिन भाषा के गहन अनुशीलन से भारत सरकार यह साबित कर सकती है कि क्षीर सागर चीन की मुख्य भूमि का ही हिस्सा था जहां सृष्टि के शुरूआती वर्षों में अमृत प्राप्ति का सुअवसर मिला। 
मंदारिन भाषा के समानांतर तिब्बती भाषा व तिब्बती लिपि में उपलब्ध समुद्र मंथन के विवेचनों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाये और चीन तथा भारत के बीच राजनीतिक ऊहापोह को विराम देकर चीनी शास्ता समाज को एक कूटनीतिक मार्ग अपनाने के लिये प्रेरित किया जा सकता है। पहले यह देखना जरूरी है कि हिन्दुस्तानी समाज में ही भारत चीन के नूतन समीकरण का मार्ग सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में पहला उग्र विरोध भारत के मैकोलाइट भद्रलोक के चिंतन पोखर द्वारा हो सकता है क्योंकि देश का अंग्रेजी पास भद्रलोक यथास्थिति बनाये रखने का समर्थक है। नया विचार, नयी दिशा उसे अटपटी लगती है। भारत के आजाद होते समय मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोक के एक अच्छे हिस्से पर महात्मा गांधी के हिन्द स्वराज की छाप थी। आजादी उपलब्धि का नेतृत्व जिन लोगों के हाथ में था वे विचार भेद के बावजूद महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और दूसरे लोकनेताओं पर यकीन करते थे। आजादी मिलने के पश्चात अंग्रेजीदां भद्रलोक का वर्चस्व गांधी की गरीबी ओढ़ने वाली राजनीति के बावजूद दिन दूना रात चौगुना सशक्त होता चला गया। आज भारत की जनसंख्या का आठवां हिस्सा याने लगभग सोलह करोड़ हिन्दुस्तानी मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोेक विचार पोखर की गिरफ्त में हैं यही समाज सारे हिन्दुस्तान को रोक रहा है। भारत की शेष 111 करोड़ जनता गरीबी चक्की के साथ साथ मैकोलाइट भद्रलोक संचालित चक्रव्यूह में फंसी हुई है। एक अरब से ज्यादा हिन्दुस्तानियों को गरीबी रेखा निर्धारण चक्रव्यूह ने ऐसा दबोचा है कि ईश्वर ही भारतीय गरीबों का एकमात्र सहारा लगता है। ऐसी विषम स्थितियों से किस तरह छुटकारा मिले परमात्मा ही नेतृत्व को सद्बुद्धि दे उसे शक्ति संपात दे और गरीब के उत्कर्ष का रास्ता खुल जाये। मैकोलाइट भद्रलोक के अलावा और भी अनेकानेक बाधक तत्व हर चौराहे पर खड़े हैं। दलित-गैर दलित विभाजन, नक्सलवादी चिंतन पोखर तथा एन.जी.ओ. संगठनों द्वारा विदेशी सहायता उगाही के जरिये शिक्षा, स्वास्थ्य, कुरीति उन्मूलन तथा गरीबी निवारण सरीखे उद्देश्यों को लेकर चलने वाले लाखों एन.जी.ओ. संगठनों की जमात भी प्रचण्ड पाखण्ड का रास्ता अपना चुकी है। 
सांस्कृतिक चीन के नये साल मौनी अमावस ने यह प्रतीति कराई है कि क्षीर सागर मंथन हुआ था। चीन के नये वर्ष का पहला दिन उसका प्रत्यक्ष प्रतीक है। भारत के प्रधानमंत्री महोदय को अपने संस्कृति मंत्रालय से पूछना चाहिये कि क्या उनके संज्ञान में समुद्र मंथन घटना है ? यदि मंत्रालय को पूरी जानकारी न हो, सेकुलरिज्म के प्रावधानों के कारण वे ऐसे विषय में अपना मत प्रधानमंत्री जी को प्रस्तुत करने की स्थिति में न भी हों तो भी भारतीय वाङमय, तिब्बती वाङमय और मंदारिन वाङमय में गहरी छानबीन करने के लिये संस्कृति मंत्रालय को मंत्रिमंडल से अनुरोध करना चाहिये। देश के सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं के विश्वविद्यालयी विभागों से अनुरोध किया जाना चाहिये कि वे यह पता करें कि क्या सृष्टि के उपरांत जब देवराज इंद्र आदित्यों के प्रमुख थे और उनकी मौसी दिति के पौत्र प्रह्लाद के पौत्र बलि जब दैत्यराज थे तब क्या आदित्यों और दैत्यों में संविद होकर अमृत मंथन का मार्ग प्रशस्त किया गया था ? सांस्कृतिक चीन ने यह स्वीकार कर लिया है कि उनका राष्ट्र दिवस समुद्र मंथन का प्रतीक है। चीन और हिन्दुस्तान में सांस्कृतिक सरोकार का सूत्र मौनी अमावस का अमांत पर्व है। चीन और हिन्दुस्तान के राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक जिजीविषा से जुड़ा प्रसंग चीन का नया साल है। यह सवाल इन्क्वायरी कमीशननुमा जांच पड़ताल का नहीं वरन दो पड़ोसी देश किस तरह एक दूसरे के निकट आ सकते हैं, उनकी भावी वैश्विक रणनीति क्या हो ? इसलिये समुद्र मंथन (क्षीर सागर मंथन), क्षीर सागर क्या वास्तविकता थी ? यदि क्षीर सागर अस्तित्व में था तो क्या वह वर्तमान हिमालय में था ? अथवा वर्तमान तिब्बत या वर्तमान चीन की मुख्य भूमि का हिस्सा था ? सटीक नतीजे पर पहुंचने में भारत सरकार को समय लगेगा किन्तु जो बातें प्रकाश में आगयी हैं कि अमृत की बूंदें - आदित्यों व दैत्यों द्वारा की गयी अमृृत कलश की छीना झपटी में मौनी अमावस के दिन ही प्रयाग में गिरी थीं, हर बारहवें साल प्रयाग में कुम्भ लगता है जो अमृत बूंदों के गिरने केे महापर्व का साक्षी है। सांस्कृतिक मंत्रालय को प्रयाग, हरिद्वार, उज्जयिनी तथा नासिक में जो अमृत बूंदें गिरीं वहां हर बारहवें वर्ष कुम्भ मेला लगता है, इन सभी कुम्भों का सिलसिलेवार ब्यौरा संस्कृति मंत्रालय को मंत्रिमंडल के संज्ञान में लाना चाहिये ताकि चीन सहित जिन जिन राष्ट्रों से भारत का सांस्कृतिक संपर्क है वह प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत हो। भारत सरकार ठोस निर्णय पर पहुंचे कि सांस्कृतिक चीनी राष्ट्र और सांस्कृतिक भारत राष्ट्र दोनों मिलजुल का दोनों आधुनिक संसार का शीर्ष स्तंभ बन सकें। सांस्कृतिक चीनी राष्ट्र के नये साल के प्रसंग ने भारत के प्रधानमंत्री को चीनी गणराज्य से संबंधों को अमृतमय बनाने का नया सौभाग्य दिया है। चीन का सांस्कृतिक नव वर्ष भारत-चीन संबंधों को दुनियां की अभूतपूर्व महत्वपूर्ण घटना का प्रदाता बन रहा है। चीन के पारम्परिक लोग डर रहे हैं उन्हें डर हनुमान से लग रहा है पर हनुमान तो अपनी कृपा से भारत चीन संबंधों को सांस्कृतिक परिवेश देकर दुनियां की अढ़ाई अरब आबादी को - हिन्दी चीनी भाई भाई के भावनात्मक जुड़ाव द्वारा अपना सिर ऊँचा करने की ताकत प्रदान कर चुके हैं।
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