Tuesday, 1 March 2016

देहाती चीन का नया साल मौनी अमावस ही है
महाशय रविशंकर प्रसाद जी गुत्थी सुलझ गयी है
देहाती चीन का नया साल मौनी अमावस ही है
फिर बैंकाक जाइये और समुद्र मंथन चित्रांकन फिर से देखिये 
तब अपना सुदृढ़ निश्चय भारत को बताइये

प्रयाग की मौनी अमावस चीन का नया साल चीनी समाज को नये वर्ष की मंगल कामनाओं सहित क्षीर सागर मंथन-अमृत बूंदें प्रयाग में मौनी अमावस महापर्व पर ही गिरीं, अमावस का वही पर्व समुद्र मंथन की यादें तरोताजा कर रहा है। भारत के लोग देव, दानव, गंधर्व, यक्ष, राक्षस व किन्नर(क्या वह नर है या वानर है ?) वानर संस्कृति का भी उद्गान हनुमान चालीसा गा गा कर भारतवासी करते हैं। चीन के लोगों का मानना है कि इस वर्ष वर्षाधिपति वानर रूपधारी हनुमान ही हैं। मौनी अमावस के दिन प्रयाग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में अमावस पर्व शुरू होते समय ही संगम स्नान पवित्र माना जाता है। हर बारहवें वर्ष प्रयाग में मौनी अमावस के दिन कुंभ मेला लगता है। आसेतु हिमाचल से हजारों हजार नागा साधु शाही स्नान पर्व में स्नान करते हैं। शाही स्नान के पश्चात दूसरे स्नानार्थी संगम स्नान करते हैं। वैसे प्रयाग में स्नान पर्व पौषी पूनम, मकर संक्रांति(मुख्य स्नान पर्व मौनी अमावस), वसंत पंचमी तथा माघी पूनम भी महत्वपूर्ण स्नान पर्व हैं। भारत की षोडषी लोकसभा के नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के संचार मंत्री अपनी पहली यात्रा में बैंकाक गये। वहां के हवाई अड्डे में उन्होंने समुद्र मंथन का भव्य चित्रांकन देखा। वे उस दृश्य को देख कर प्रभावित भी हुए। उन्होंने हिन्दुस्तान के अखबार दैनिक जागरण को समुद्र मंथन के भव्य चित्रांकन के बारे में अपनी राय भी बतायी। बात आई गई पुरानी भी हो गयी। सरकारी दस्तावेजों के वजन ने संभवतः समुद्र मंथन के उस भव्य चित्रांकन की याद करने, उस पर बहस करने की फुर्सत ही नहीं मिली। चीन जिसे अंग्रेजी में  China कहा जाता है दुनियां में Athiest जीपमेज मानव पुंज है। चीन का सरकारी कैलेंडर ग्रेगेरियन कैलेंडर घोषित हुआ है जिसका पहला दिन पहली जनवरी कहा जाता है। Annie yu  के अनुसार Chinese new year is like Christmus and Thank giving all rolled up into one Holiday. यह कथन चीन में जन्मे लास ऐंजेल्स Xiayi Zhang  द्वारा बताये गये हैं। चीन का नया साल भारत में माघ महीना याने जब सूर्य मकर संक्रांति के पश्चात मकर राशि में प्रवेश करता है यह दिन सूर्य-उत्तरायण का पहला दिन भी माना जाता है। भारत में आसेतु हिमाचल चांद्र मास और सूर्य मास दोनों को मनाया जाता है। चांद्र मास अमावस्या याने अमांत महीना माना जाता है। सौर मास संक्रांति से शुरू होकर मासांति को पूरा होता है। सौर मास व चांद्र मास मंे कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष के सदा उन्तीस दिनों याने वर्ष में चांद्र मास के 55 दिन तथा सौर मास के 30 या 31 दिनों का तालमेल बिठाने हर चौथे मास अधिमास निर्धारित कर चांद्र मास और सौर मास का समुच्चय बैठाया जाता है। अधिमास अथवा मलमास नाम से पुकारे जाने वाले चांद्र मास में दो अमावस्याओं के बीच में संक्रांति नहीं पड़ती। उत्तर भारत में मौनी अमावस्या - माघी अमावस्या माना जाता है जबकि दक्षिण भारत के लोग मौनी अमावस्या को पौषी अमावस मानते हैं। बाकी स्थितियां समान हैं। पूर्ण वत्सरी अमावस्या को उत्तर भारतीय चैती अमावस कहते हैं पर दक्षिण में इसे फाल्गुन अमावस माना जाता है। 
देहाती चीन के अलावा मंदारिन भाषी सभी चीनी समाज मौनी अमावस्या को अपने साल का पहला दिन मानते हैं। मंदारिन भाषी चाहे वे ताइवान में रहते हों, सिंगापुर में रहते हों, कोरियावासी हों अथवा चीन की मुख्य भूमि के निवासी हों वे मौनी अमावस को ही अपने नये वर्ष का पहला दिन मानते हैं। चीन के पारम्परिक समाज जिस पर निरीश्वरवादी सोच का प्रभाव नहीं के बराबर है उनके नये वर्ष का पहला दिन वह है जब भारत के प्रयाग में अमृत बूंदें गिरीं और अमृत उत्सव के तौर पर भारत प्रति बारहवें वर्ष कुंभ मनाता आरहा है। SIMIAN Trivia Monkeys were born after the Lunar year in 1908, 1920, 1932, 1944, 1956,1968, 1980, 1992, 2004 (Don’t know your animal visit graphics Latimes.com Chinese new year for our Chinese Jodiac Cycles through 12 animals you guessed 12 years)A । ऐसा प्रतीत होता है कि Simian Trivia ने अपने बारह वर्षीय आकलन में कहीं न कहीं गणनात्मक त्रुटि की है। भारत में कुंभ क्रमशः बर्तानिया की महारानी विक्टोरिया द्वारा 1858 के कुंभ में घोषणा करने के पश्चात बीसवीं शती का पहला कुंभ 1906 में, दूसरा कुंभ 1918 में, तीसरा 1930 में, चौथा 1942 में, पांचवां 1954 में, छठा 1966 में, सातवां 1978 में तथा आठवां 1990 में संपन्न हुआ। चीनी नया साल मनाने की प्रक्रिया ने एक बात साफ कर दी है कि समुद्र मंथन-क्षीर सागर मंथन का चीन से गहरा ताल्लुक है। क्षीर सागर का अस्तित्व तो था वास्तविक तौर पर कहीं चीन की वर्तमान मुख्य भूमि में ही तो क्षीर सागर नहीं था। देव दानव संविद संपन्न करा कर क्षीर सागर में रहने वाले महाविष्णु ने अमृतोत्पादन के लिये देव दानव शक्ति पुंज को संविद का मार्ग बताया। क्षीर सागर से अमृत निकलने से पहले हलाहल महाविष निकला। हलाहल को देख देव, दानव, गंधर्व, यक्ष, किन्नर, राक्षस सभी भयार्त होगये। आदि देव महादेव ने विषपान कर डाला जिससे उनका गला नीला होगया। महाविष का कोई अन्य विपरीत प्रभाव महादेव पर नहीं पड़ा। विषपान करने के पश्चात नटराज राज ने महाताण्डव नृत्य किया। नृत्यावसान पर नटराज का ढक्का - डमरू नौ और पांच बार बजा उससे 14 ध्वनियां हुईं। वे चौदह ध्वनियां और 51 अक्षर जिन्हें ग्रीक और रोमन Alphabet कहते हैं। ग्रीक मान्यता लैटिन के 24 Alphabet की है वहीं रोमन Alphabet 26 मानते हैं। वाणी विलास का भारतीय वाङमय इक्यावन उच्चारण मानता है। ये 51 अक्षर जैसे लिखे जाते हैं वैसे ही बोले भी जाते हैं। भारत में बारह वर्षीय कुंभ प्रयाग के अलावा हरिद्वार, उज्जयिनी तथा नासिक में भी हर बारहवें वर्ष मनाये जाते हैं। लोक मान्यता यह है कि देव-दानव संघर्ष और छीना झपटी में अमृत बूंदें त्रिवेणी संगम प्रयाग, हरिद्वार, उज्जयिनी व नासिक में भी गिरी थीं। समुद्र मंथन का मुख्य भारतीय लाभार्थी स्थल गंगा-यमुना-सरस्वती का संगम त्रिवेणी है जहां अमृत बिंदु मौनी अमावस को गिरे थे। अमृत बूंदें की गिरने की यह महान घटना उस समय घटी जब मौनी अमावस पूर्ण होरहा था। चीन के देहाती गंवई गंवार तथा मंदारिन भाषा बोलने वाले चीनी चाहे वे निरीश्वरवादी चीन की मुख्य भूमि में रहते हों, कोरियावासी हों, भले ही कुछ हद तक जापानी लोग भी अमृत बूंदें गिरने वाली मौनी अमावस से प्रभावित हों, ताइवान, सिंगापुर तथा चीन की मुख्य भूमि जहां जहां मंदारिन भाषा बोली व समझी जाती है चीन का नया वर्ष भारत में प्रति वर्ष माघ -अमावस्या याने मौनी अमावस्या का पुण्यकाल ही चीन का नया साल है। 
चीन की संस्कृति, चीन की भाषा तथा चीन का प्राचीन स्वरूप क्या क्षीर सागर चीन की मुख्य भूमि में था ? क्षीर सागर का मंथन करने पर ही श्री, रंभा, विष, वारूणी, अमिय, शंख, गजराज, धनु, धन्वंतरि, धेनु, तरू, चंद्रमणि अरू वाज ये चौदह रत्न निकले थे। महाशय रविशंकर प्रसाद बैंकाक हवाई अड्डे के समुद्र मंथन के चित्रांकन से प्रभावित हुए उन्हें चाहिये कि चीनी नया साल मौनी अमावस वाला प्रसंग अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगी विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज के संज्ञान में लायें। भारत में भी चीनी नस्ल के लोगों की एक अच्छी खासी संख्या है। भारत का विदेश मंत्रालय चीन की मुख्य भूमि के अलावा सबसे पहले देहाती चीनियों द्वारा मौनी अमावस चीनी नया साल मनाने के प्रसंग को सबसे पहले सिंगापुर में परखा जाये। भारतीय विदेश मंत्रालय के वे अधिकारी जिन्हें मंदारिन भाषा पर गहन अधिकार पूर्ण विद्वत्ता है वे चीनी नये साल का निरूपण करें। मुख्य चीन में ज्यादा सफलता मिलने की संभावना इसलिये नहीं है क्योंकि चीन के वे लोग जिनको विश्वास है कि ईश्वर का अस्तित्व नहीं है वे ही सब कुछ हैं तथा चीन की सरकार का सरकारी कैलेंडर ग्रेगेरियन कैलेंडर है इसलिये जरूरत इस बात की लगती है कि ताइवान, मुख्य चीन के गंवई गंवार क्षेत्र जो इलाहाबाद की मौनी अमावस को अपने नये साल का पहला दिन मानते हैं उनके मंतव्य पर विदेश मंत्रालय श्वेत पत्र जारी करने का विचार करे। भारत में भी मौनी अमावस्या केवल इलाहाबाद जिले के गांवों में ही मनाई जाती है। मौनी अमावस्या का भारतीय महत्व इसलिये है क्योंकि हर बारहवें वर्ष संपन्न होने वाला कुंभ का शाही स्नान मौनी अमावस को ही मनाया जाता है। भारत में मेष, वृृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन इन बारह राशियों के अनुसार सौर मास मनाये जाते हैं। चीनी राशि मंडल में मेष, वृष, सिंह तथा वृश्चिक राशियां सम्मिलित हैं। मेष-बकरा, वृष-बैल, सिंह-शेर तथा वृश्चिक राशि को चीनी लोग सर्प मान कर चलते हैं। चीन की शेष राशियों में भारतीय वाङमय का पुट नहीं है। वे किन्नर या वानर को राशिमंडल का महत्वपूर्ण भाग मानते हैं। आवश्यकता इस बात की प्रतीत होती है कि भारतीय वाङमय राशियों व चीनी राशियों में अनुसंधान किया जाये। समुद्र मंथन-क्षीर सागर मंथन के समय देवताओं के प्रमुख अदित-कश्यप पुत्र पुरन्दर अथवा इंद्र थे जब कि अदिति की बहनों दिति व दनु के पुत्रों में कश्यप-दिति के जुड़वां बेटों में हिरण्यकश्यप व हिरण्याक्ष थे। हिरण्याक्ष का वध वाराह ने किया था। हिरण्यकश्यप पहला दैत्यराज था जिसकी दैत्यधानी हरिद्रोही थी। आजकल उस नगर को लोग हरदोई केे नाम से जानते हैं। हिरण्यकश्यप नृसिंह द्वारा मारा गया। हिरण्यकश्यप की मृत्यु के पश्चात हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद दैत्यराज हुए। प्रह्लाद के पुत्र का नाम विरोचन था। प्रह्लाद ने अपने चचेरे भाई अंधक को दैत्यराज नियुक्त किया अपने बेटे को राज्यासन नहीं दिया। अंधक अन्यायी और दुराचारी था इसलिये उसका राज्य ज्यादा नहीं चला। प्रह्लाद ने अपने पौत्र विरोचन के पुत्र बलि को दैत्यराज नियुक्त किया। बलि कश्यप द्वितीया भार्या दिति के प्रपौत्र थे। जब क्षीर सागर मंथन का प्रश्न उभरा आदित्य प्रमुख शक्र या इंद्र थे उन्हें पुरन्दर भी कहा जाता था। दूसरी ओर प्रह्लाद पौत्र बलि दैत्य-दानव अधिपति थे। क्षीर सागर मंथन कब हुआ ? इस सवाल पर आधुनिक भारत चिंतन पोखर, क्षीर सागर मंथन को कवि-कल्पना घोषित कर वास्तविकी घटना नहीं मानता। उन्हें प्रति वर्ष चीन द्वारा माघ महीने की मौनी अमावस्या को चीन का कालातीत नया वर्ष मानना विचार योग्य प्रसंग है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय पिछले 90 वर्ष से हिन्दू पंचांग प्रकाशन कर रहा है। पंचांगानुसार कलियुग प्रारंभ हुए 5116 वर्ष होगये हैं। कल्पादि से 1,97,29,49,116 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। सृष्टि से वर्ष संख्या 1,95,58,85,116 वर्ष होगये हैं। सृष्टि की शुरूआत से हिरण्यकश्यप से लेकर बलि तक चार पीढ़ियां हुईं। बलि के राज्यकाल में क्षीर सागर-समुद्र मंथन का उपक्रम हुआ। मौनी अमावस्या समुद्र मंथन, अमृत उपलब्धि अमृत के लिये देव-दैत्य छीना झपटी में मौनी अमावस्या के दिन अमृत की बूंदें धरती में गिरने के महापर्व को चीन का पारम्परिक समाज अपने नये वर्ष का पहला दिन मानता है। 
केन्द्रीय संचार मंत्री बाबू रविशंकर प्रसाद ने बैंकाक हवाई अड्डे में समुद्र मंथन चित्रांकन देखा, उनकी बाछें खिल गयीं। वे सोचने को मजबूर हुए कि भारत में भी ऐसा नजारा खड़ा किया जाये। उन्होंने अपने मन की बात अखबार नवीसों से की। बात आयी-गयी हो गयी, जहां की तहां अटक गयी पर आगामी मौनी अमावस इस वर्ष सोमवार 8 फरवरी को है। चीन के लोग मौनी अमावस्या का पर्व मान कर चल रहे हैं और चीनी देहाती जनता मौनी अमावस को नया साल मना रही है। क्यों न भारत सरकार चीन की सरकार का सरकारी अभिमत ज्ञात करे कि Athiest होने के बावजूद क्या चीन के जनसामान्य में मौनी अमावस्या के लिये विशेष आग्रह चीनी सरकार जो ग्रेगेरियन कैलेंडर को सरकारी कैलेंडर मानती है मौनी अमावस्या के बारे में कोई निश्चित मत रखती है या चीन की सांस्कृतिक थाती ही समुद्र मंथन जन्य स्थिति का सांस्कृतिक श्रेष्ठता स्वीकारती है। चीन की सरकार सरकारी मत जो भी हो भारत के सामने एक सुनहरा मौका आया है कि प्रयाग इलाहाबाद में मौनी अमावस्या को चीनी अपना राष्ट्रीय नया साल मानते हैं। क्यों न भारत सरकार इलाहाबाद के बमरौली हवाइ्र अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय मौनी अमावस हवाई अड्डे के रूप में विकसित कर चीन की मुख्य भूमि वाली जनता से, सिंगापुर, ताइवान, कोरिया आदि जो जो देश मंदारिन भाषी हैं जिन्हें मंदारिन भाषा पर अपनी राष्ट्रवादिता स्थापित करने का सुअवसर मिला है वे सब सांस्कृतिक चीनी लोग मौनी अमावस्या का अंतर्राष्ट्रीय महत्व पहचानें। यह ब्लागर यह नहीं कहता कि इलाहाबाद का नाम वैसे ही बदल डालो जिस तरह डाक्टर संपूर्णानंद ने बनारस को वाराणसी नाम दिया। आज विश्व में वाराणसी मुंबई, कोलकाता व चेन्नई की तरह प्रसिद्ध है। इलाहाबाद नाम जवाहरलाल नेहरू को पसंद था। अकबर के दीन इलाही विचार पोखर का प्रतीक इलाहाबाद बना रहे पर इलाहाबाद की जो महत्ता संगम-त्रिवेणी है जहां लोग माघ के महीने में आसेतु हिमाचल गांव गांव शहर शहर से मौनी अमावस को गंगा स्नान करने पहुंचते हैं। सांस्कृतिक चीन की राष्ट्रीयता की पहचान मौनी अमावस्या है। यह दिन चीन के लोगों के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है इसलिये मंदारिन भाषा बोलने व लिखने वाले करीब डेढ़ अरब लोग इस धरती में बसते हैं मौनी अमावस्या उनकी सांस्कृतिक श्रद्धा की प्रतीक है इसलिये बाबू रविशंकर प्रसाद महाशय बैंकाक हवाई अड्डे के समुद्र मंथन डिजाइन पर हिन्दुस्तानी जोड़ लगायें और प्रयाग, हरिद्वार, उज्जयिनी तथा नासिक में प्रति बारहवें वर्ष संपन्न होने वाले कुंभ मेलों की याद ताजा करायें। पहल बमरौली हवाई अड्डे से ही हो, इस हवाई अड्डे का नाम ही मौनी अमावस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित हो। विश्व के वे मंदारिन भाषी जो मौनी अमावस को अपना राष्ट्रीय व सांस्कृतिक नया साल मानते हैं उन्हें भारत आने का मौका मिले। ऐसा प्रतीत होता है कि भारतवासी वे महाशय जिन पर मैकोलाइट अंग्रेजी सभ्यता हावी है मौनी अमावस्या प्रकरण की खिल्ली भी उड़ाने का प्रयास कर सकते हैं। समुद्र मंथन अमृत की बूंदें छीना झपटी के कारण जिन चार जगहों पर धरती पर गिरीं वहां वहां हर बारहवें वर्ष कुंभ मेला लगता है। उसे मनुष्यता का सबसे बड़ा पर्व मान कर भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, संचार मंत्री तथा संस्कृति मंत्रालय को चाहिये कि इलाहाबाद का कायाकल्प संकल्पित किया जाये। संभव है उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत सरकार से अनुरोध किया हो कि इलाहाबाद को उड़ीसा के भुवनेश्वर शहर की तरह भारत की महात्वपूर्ण स्मार्ट सिटी का आकार दिया जाये। इलाहाबाद जिले के गांव गांव, इलाहाबाद शहर के घर घर में पहुंच कर यह प्रतीति की जाये कि इलाहाबादी समाज मौनी अमावस को इतना महत्व क्यों देता है ? क्या मौनी अमावस का त्रिवेणी संगम स्नान पर्व इसका मुख्य कारक है ? गंगा-यमुना के दोआबे में कानपुर के पास एक जगह बिठूर है जिसे भारतीय वाङमय ब्रह्मावर्त्त कहता है। इस ब्रह्मावर्त्त को ही भारतीय वाङमय मूल देश की संज्ञा देता है। यहीं नाभि मेरू देवी की संतान के रूप में ऋषभ हुए। ऋषभ को जैन धर्मावलंबी प्रथम तीर्थंकर मानते हैं पर जैन धर्म से इतर सोच रखने वाले लोग ऋषभ को आर्यावर्त का महत्वपूर्ण सत्ताधिष्ठान व धर्मपथ मानते हैं। ऋषभ के पुत्र भरत के नाम पर ही यह देश भारत कहलाता है। हिन्दुस्तान की आजादी के बाद भी जब नया संविधान संकल्पित हुआ India that is Bharat के नाम से इस देश को अंग्रेजी नाम इंडिया के समानांतर भारतीय नाम भारत दिया गया। भारत के अपने घटक राज्यों के अलावा दक्षिण में श्रीलंका, पूर्व में बांग्ला देश व म्यांमार, उत्तर में नैपाल व भूटान के सार्वभौम राज्य तथा भारत विभाजन के फलस्वरूप पूर्ववर्ती पूर्व पंजाब अब पंजाब, हरियाणा व हिमाचल के घटक राज्य, जम्मू कश्मीर भारतीय संघ घटक हैं। CHINA अथवा भारतीय वाङमय का चीन, अर्वाचीन, प्राचीन जो भी नामकरण हम करना चाहें उसका सीधा संबंध मौनी अमावस के अमांत पर्व से जुड़ा होने के कारण ही चीन के मंदारिन भाषा बोलने व लिखने वाले लोग मौनी अमावस को अपने नये साल के रूप में मनाते हैं। यही भारत का चीन पर सांस्कृतिक आधार है भले ही चीन की कम्यूनिस्ट सरकार व चीन का Athiest समाज मौनी अमावस को नजरअन्दाज कर चीन के सरकारी कैलेंडर ग्रेगेरियन कैलेंडर घोषित करे पर सवा अरब से ज्यादा मंदारिन भाषा का प्रयोग करने वाले लोगों के लिये मौनी अमावस सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय नया साल है। भारत की तात्कालिक जरूरत यह है कि वह मौनी अमावस को अंतर्राष्ट्रीय महत्व का महत्वपूर्ण बमरौली हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय मौनी अमावस हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने का संकल्प लेकर चीन को यह महसूस कराये कि चीन के सांस्कृतिक सूत्र मौनी अमावस से जुड़े हैं।
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