Wednesday, 1 June 2016

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय राष्ट्रीयता का पर्याय है
निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय
ज्ञानी जैल सिंह सामान्य राजनीतिज्ञ ही नहीं थे, उन पर गुरू नानक देव तथा गुरूग्रंथ साहब की अपार कृपा थी, वे देश काल विशेषज्ञ थे। उन्हें पता था कि इंदिरा गांधी की उन पर राजनैतिक कृपा थी जिससे वे पंजाब व दिल्ली में अपनी राजनीतिक धाक जमा पाये। वे यह भलीभांति जानते थे कि फिरोज - इंदिरा नेहरू गांधी के ज्येष्ठ पुत्र में राजनीतिक रणनीति की समझ लगभग शून्य है फिर भी ज्ञानी जी ने इंदिरा गांधी की हत्या के पश्चात भारत के प्रधानमंत्रित्व की शपथ राजीव गांधी को दिला कर इंदिरा जी का जो राजनैतिक रणनीतिक ऋण ज्ञानी जी पर था, ज्ञानी जी ने स्वर्णमंदिर अमृतसर की मजहबी घटनाओं को नजरअन्दाज कर ऐतिहासिक ऋण जिसे संस्कृत वाङमय में ‘ऋण न मुच्यते काशी’ याने बावन सीढ़ियों वाले दशाश्वमेघ घाट में स्नान करने के बाद भी ऋण अपनी जगह अड़ा रहता है। यह तो निर्णय इतिहास के पन्नों में हजारों वर्ष पश्चात उभरेगा कि क्या राजीव गांधी योग्य प्रधानमंत्री थे ? जिन्होंने उन्हें सारी परम्पराओं को तोड़ कर प्रधानमंत्री बनाया राजीव गांधी उन्हीं को अपना प्रथम शत्रु मानने लग गये। राजीव राज 1984 से लेकर 1989 तक चला। राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह उनके खेमे से निकल कर प्रधानमंत्री पद पर विराजमान होगये। उन्हें पंडित नेहरू के वंशधर अरूण नेहरू का भी साथ मिला। अरूण सिंह सरीखे व्यक्ति भी राजीव गांधी से छिटक गये। बोफोर्स सौदे ने बेदाग कहे जाने वाले राजीव गांधी को दागी करार कर डाला। श्रीमती सोनिया गांधी ने कांग्रेस दल की कमान सीताराम केसरी से छीन कर वे पिछले उन्नीस वर्षों से अखिल भारत कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा हैं। सोनिया गांधी का राजघराना भारत की सुप्रीमो शैली वाली राजनीति का पहला राजघराना है जो दिल्ली के केन्द्रीय सरकार पर अपना मौरूसी अधिकार मानता है पर सोनिया गांधी से एक बड़ी चूक 2004 में हुई। उन्हें प्रधानमंत्री बनने में डर सताने लगा। यदि वे ज्ञानी जी की तरह अपने इकलौते बेटे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना देतीं और डाक्टर मनमोहन सिंह की योग्यता प्रतिनिधि प्रधानमंत्री ने बना कर उपप्रधानमंत्री के रूप में प्रयोग करतीं तो वे अपने बेटे को भारत की राजगद्दी सौंप कर निश्चिन्त हो सकती थीं। उन्हें भारत की जनता पर डाक्टर मनमोहन सिंह के मार्फत शासन करना ज्यादा उपयोगी जंचा। वे 2009 में अपनी भूल सुधार सकती थीं पर तब भी वे हिम्मत हार गयीं। राहुल गांधी को राजनीतिक सत्ता नहीं सौंप पायीं। 2014 के लोकसभा चुनावों ने उनकी हैसियतत लोकसभा में विरोधी दल के नेता के रूप में स्थापित नहीं हो पायी। उत्तर प्रदेश से वे व उनके पुत्र राहुल गांधी केवल दो सांसद चुने गये। सन 2016 में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली आइ.एन.सी. एक अरब सत्ताईस करोड़ वाले भारत के केवल हिमाचल, उत्तराखंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर तक सिकुड़ गयी है। इन सभी राज्यों की जनसंख्या अढ़ाई करोड़ के आसपास है। बिहार में आइ.एन.सी. के सत्ताईस विधायक हैं जहां वह नितीश कुमार सरकार में साझीदार है। बिहार की आबादी लगभग साढ़े दस करोड़ है। बिहार में कांग्रेस लालू प्रसाद राजघराने की मुहताज है। लालू प्रसाद यादव की लोकशक्ति के बदौलत ही उन्हें बिहार में राज करने का मौका मिला है। नितीश कुमार स्वयं लालू प्रसाद यादव की वैशाखी के सहारे राज कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने लोकसभा चुनावों के वक्त कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगाया। उन्हें यह भलीभांति पता था कि इंडियन नेशनल कांग्रेस 1996-97 से सोनिया गांधी की मुट्ठी में है। आइ.एन.सी. का मतलब केवल माता सोनिया और पुत्र राहुल गांधी रह गया है। एक सौ तीस वर्ष पुरानी राजनीतिक संस्था एक राजपरिवार की बंदिनी बन कर रह गयी है। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत का जो उद्गान किया उसमें एक राजनीतिक वास्तविकता थी। बाबू नितीश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में 1998 से लेकर 2004 तक निरंतर सत्ता में रहे। 2005 से बिहार राज्य की भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से 2012 तक मुख्यमंत्रित्व पद पर जमे रहे। उनका सारा राजनीतिक श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनके अंतरंग सम्बन्धों को जाता है। उन्होंने दो बातें कहीं शराब मुक्त समाज और संघ मुक्त भारत। शराब मुक्त बिहार ने उनके उद्घोष की सराहना की जानी चाहिये पर वे किस तरह शराब मुक्त बिहार के अपने संकल्प को अंजाम दे पायेंगे। यह समझने के लिये उन्हें महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी तथा गुजरात मद्य निषेध के प्रवर्तक मोरारजी रणछोड़जी देसाई का अनुुसरण करना होगा। बिहार में शराब का उत्पादन तो हो पर उसकी बिक्री पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड व पश्चिम बंगाल में हो, यह तो शराब बंदी का नैतिक पथ नहीं है। शराब बंदी करने के लिये उन्हें दृढ़निश्चयी होना होगा। शराब बंदी एक सामाजिक जरूरत है पर उन्होंने जो आह्वान किया है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुक्त भारत के लिये प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आगामी विजया दशमी 12 अक्टूबर 2024 के दिन शताब्दी पूरी करेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भारत की प्रत्येक भाषा में अपनी उपलब्धियों तथा स्वातंत्र्योत्तर भारत में जो जन सेवा की है वह भारत के हर निवासी को उसकी अपनी जुबान में उपलब्ध कराई जानी चाहिये। महाशय नितीश कुमार सरीखे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विरोधियों के लिये दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में संघ विरोधियों - निंदक नियरे राखिये आंगन कुटी छवाय का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिये। संघ की गतिविधियों तथा कार्यशैली का विरोध करने वाले महानुभावों को आमंत्रित करना चाहिये। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पिछले नब्बे वर्षों के कार्यकलापों को भारत की हर भाषा में उपलब्ध कराया जाये। विरोधियों को न्यौता जाये कि वे अपनी बात अपनी भाषा में सप्रमाण प्रस्तुत करें ताकि संघ के बनावटी विरोधियों की राजनीतिक पोल खुल सके। आने वाले नौ वर्षोें के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के नंगे प्यासे व भूखे लोगोें को पीने का पानी दो जून पेट की जरूरत का निरामिष भोजन हर गांव व हर शहर के मुहल्ले मुहल्ले में एक जगह पर एक सौ आठ व्यक्तियों को मुफ्त भोजन का जिम्मा भी उठाये। सरकारी गोदामों में अनाज सड़ रहा है। न्यायालय कह रहे हैं लोगों को अनाज बांट दो पर जिनके पास साधन नहीं हैं वे अनाज से क्या करेंगे। उन्हें तो निशुल्क भोजन चाहिये। कानून और सरकारी अमला यह पात्रता नहीं रखता। कानून व कानून का अनुपालन कराने वाला सारा का सारा तंत्र सिस्टम फेलियर का शिकार है इसलिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को एक गैर सरकारी नैतिक आधार वाले अंबुदसमान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आकार देना होगा। देश में कोई भूखा न रहे हर व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार काम करने का मौका मिले इसलिये जहां जहां संघ की शाखायें चलती हैं स्वयंसेवक यह पता लगायें कि कितने लोग भूखे सोरहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने रोजमर्रा के दैनंदिन कार्योें में प्यासे को पानी भूखे को भोजन तथा जिस व्यक्ति में हाथ का काम करने की कूवत है उसे काम दिलाने का शिव संकल्प लें। प्रत्येक राज्य की भाषा या भाषाओं में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थायी लक्ष्य तथा भूख प्यास के निवारण का तात्कालिक लक्ष्य को प्राप्त करने का शिव संकल्प लेना चाहिये। सरकार सरकारी अमला तथा कानून अपनी जगह है उसकी मर्यादायें हैं परंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कमजोर गरीब परिवार तथा विकलांग का नैतिक सहायक बन सकता है। 
केन्द्रीय सरकार पर बोलबाला मजबूत राष्ट्रीय दल भाजपा का हो या राजनीतिक शोरगुल वाले अपने आपको राष्ट्रीय दल का ठप्पा लगा कर कांग्रेस स्वयं अथवा बिहारनुमा महागठबंधन की एक इकाई के रूप में सक्रिय रहने का द्रविड़ प्राणायाम करती रहे। वैशाखी के सहारे बिहार में शासन के मुखिया बने बाबू नितीश कुमार के नये नारे ‘शराब मुक्त बिहार और आर एस एस मुक्त भारत’ कर कल्पना में उलझते रहे मानस से जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बलबूते पर बाबू नितीश कुमार ने दिल्ली व पटना में अपनी गाड़ी सरपट दौड़ाई अब जाकर बाबू नितीश कुमार फंस गये लगते हैं। मनोकामना के ज्वार में वे अपने आपको भारत का भाग्यविधाता प्रधानमंत्री कोलकाता हाईकोर्ट में प्रतिष्ठित वकील रहे डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद जब पंडित नेहरू मंत्रिमंडल में प्रतिष्ठित सदस्य थे गांधी निधन 1948 के पश्चात गांधी दर्शन की पहली कहानी डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने गांधी के परम अनुयायी नीरा को ताड़ी का राष्ट्रीय विकल्प प्रतिष्ठित करने वाले गजानन नाइक को भारत सरकार का ताड़गुड़ सलाहकार नियुक्त कर ताड़गुड़ उद्यमिता तथा ताड़ी के नशीले व्यापार से आसेतु हिमाचल ताड़ी खींचने वाले लोगों को ताड़ी नशा मुक्त बनाने का भगीरथ प्रयास किया। महात्मा गांधी नशा मुक्त भारत के उग्र पक्षधर थे। उनकी ताड़ी मुक्ति संकल्पना को गजानन नाइक ने अमली जामा महात्मा गांधी के जीवन काल में ही उपलब्ध करा दिया था। महाराष्ट्र राज्य के ठाणे जिले के दहानू नामक स्थान से गजानन नाइक ने अपनी पहल शुरू की। गांधी युग में ही भारत भर में अमृत सरीखे पेय नीरा व ताड़गुड़ एवं ताड़ पत्ते उद्यमिता की श्रंखला खड़ी कर डाली। आज हिन्दुस्तान का शहराती समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा मधुमेह, प्रमेह अथवा अंग्रेजी भाषा में डायबिटीज नामक बीमारी का शिकार है। शहराती किशोर भी डाइबिटीज के मरीज होते जारहे हैं। नीरा ताड़गुड़ ताड़चीनी तथा खजूरी गुड़ के नाम से बंगाल व उत्तर भारत में पहचाने जाने वाले ताड़गुड़ में डाइबिटीज निरोधक शक्ति विद्यमान है। यह अद्वितीय प्रसंग डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने बिहार की ताड़ी संस्कृति को खजूरी गुड़ नीरा तथा ताड़ पत्ती उद्यमिता संवर्धन के उद्देश्य से प्रारंभ किया। अगर बाबू नितीश कुमार महाशय ने डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद के निर्णय को शराब बंदी के संबंध में मनन किया होता उनका शराब मुक्त बिहार का संकल्प शिव संकल्प हो सकता है। उन्हें गुजरात के शराब बंदी प्रबंधन का भी अनुशीलन करना चाहिये था। उनको बिहार राज्य की राजनीतिक ताकत बिहार के यादव मुसलमान युति से प्राप्त हुई है। उन्हें बिहार का मुख्यमंत्रित्व पद स्वयं संभालने के बजाय लालू प्रसाद यादव के मनोनीत राजद नेता को सौंप कर यदि भारत के प्रधानमंत्री पद की ही दौड़ में सम्मिलित होना था तो बिहार को वहां के सबसे बड़े राजनीतिक  दल राजद को सौंप कर राजनीतिक कुश्ती का अड्डा बनाना चाहिये था। राजनीतिक चिंतक कह रहे हैं क्या महागठबंधन प्रयोग असफल होगया। दो नावों में अपने पैर रख कर बाबू नितीश कुमार भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की खिलाफत नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का अपनी वाणी पर नियंत्रण है। वे भारत के पांचवें व्यक्ति हैं जो धाराप्रवाह हिन्दी भाषण कला के माहिर हैं वे हिन्दी भाषी नहीं हैं। उनकी तुलना भारतीय जनसंघ कर्णधार डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धाराप्रवाह हिन्दी भाषण कला से की जा सकती है। डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी हिन्दी भाषी नहीं थे पर उनकी वक्तृता श्रोताओं को मुग्ध करती थी। उनकी हिन्दी भाषण कला के प्रशंसक स्वयं पंडित नेहरू थे। नेहरू युग के हिन्दी भाषणकर्ताओं में तीन हिन्दी भाषी - जयप्रकाश नारायण, डाक्टर लोहिया तथा अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण पंडित नेहरू ध्यानपूर्वक सुनते थे। उन तीनों वक्ताओं के प्रशंसक भी थे। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी धाराप्रवाह हिन्दी बोलते हैं। उनके प्रत्येक शब्द में ‘शब्द खे पौरूष नृषु’ का गीता वाक्य है। उन्होंने शिव संकल्प लिया कि भारत को कांग्रेस मुक्त करेंगे। बिहार की साढ़े दस करोड़ की आबादी के शासकों में कांग्रेस के 27 विधायक भी हैं। बिहार के महागठबंधन को किनारे कर दिया जाये तो आज भारत के 127 करोड़ आबादी वाले देश की लगभग अढ़ाई करोड़ आबादी पर ही कांग्रेस सिमट गयी है। अखिल भारतीय स्तर के राजनीतिक सत्ताधिकार की जगह क्षेत्रीय अथवा सुप्रीमो शैली वाली राजपरिवार शक्तियां उभर रही हैं। मायावती, ममता बनर्जी तथा जयललिता का राजनीतिक संस्थान भी व्यक्तिमूलक सुप्रीमो शैली है। इन दो भद्र महिलाओं का शक्तिस्त्रोत गुरू शिष्या परंपरा में निहित है। मायावती संस्था का श्रेय बहुजन कल्याण के कल्पनाकार कांशीराम पर है। कांशीराम भारतीय राजनीति के गहनशील अध्येता थे। उनका वैयक्तिक नेतृत्व वाला स्वार्थ भी नहीं था। वे वामसेफ के जरिये भारतीय राजनीति में एक नया आदर्श प्रस्तुत करना चाहते थे। भारत के उस जनसमूह को जिसे आजादी से पहले अछूत कह कर पुकारा जाता था तथा उस समाज को डाक्टर भीमराव रामराव अंबेडकर ने एक पहचान देने का उपक्रम किया। कांशीराम महाशय ने बाबा साहेब अंबेडकर के दर्शन को धरती में व्यावहारिकि व वास्तविकी स्थिति से जोड़ कर अपनी शिष्या मायावती को तैयार किया। सत्ता का नशा मदिरा के नशे से ज्यादा उग्र होता है, मदिरा का नशा उतरने पर मद्यप सामान्य हो जाता है पर सत्तासीन व्यक्ति जब तक भीष्माचार्य और महात्मा गांधी सरीखे चरित्र का नहीं होता उसे सत्ता का नशा चौपट कर देता है। कांशीराम स्वयं सत्ता की पकड़ रखने वाले व्यक्ति नहीं थे पर मायावती ने सत्ता में आते ही अपना भव्य स्मारक बनाने का उपक्रम कर डाला पर मायावती की पकड़ जाटव मतदाताओं पर बनी रही। मायावती की तरह जयललिता भी अपने गुरू एम.वी. रामचंद्रन की उपज हैं। दोनों की सुप्रीमो शैली लालू प्रसाद यादव राजपरिवार सरीखी है। ममता बनर्जी इनसे जरा अलग है। भारतीय संघ के घटक राज्यों में इन तीन महिला शक्ति स्त्रोत के अलावा आनंदी पटेल, वसुन्ध्यरा राजे तथा महबूबा क्रमशः गुजरात, राजस्थान तथा जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री हैं। इन राज्यों की जनसंख्या जिसका शासन भारत की मातृशक्ति समूचे भारत की जनसंख्या का चतुर्थांश है तात्पर्य यह कि देश की महिला शक्ति स्त्रोत वर्तमान में क्रमशः गुजरात, राजस्थान, जम्मू कश्मीर तमिलनाडु पश्चिम बंग पांच राज्यों के भारत संघ के पांच महत्वपूर्ण घटकों का शासन संचालन कर रही है। यदि विधानमंडलों व लोकसभा में तैंतीस प्रतिशत निर्वाचन क्षेत्र महिला मतदाताओं के लिये सुरक्षित कर लिये गये तो महिला मुुख्यमंत्रियों की संख्या कम से कम तिगुनी तो हो ही सकती है। पांच राज्यों में दो राज्य याने लगभग आधे याने पंद्रह करोड़ की जनसंख्या भाजपा व उसकी सहयोगी राजनीतिक दल पीडीपी कर रहे हैं पश्चिम बंग तथा तमिलनाडु क्षेत्रीय क्षत्रप हैं। 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने नब्बे वर्ष से अधिक कार्यकाल में प्रत्येक प्रांत में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। शाखाओं के माध्यम से लोकसंग्रह का भगीरथ प्रयास किया है। आजादी मिलने के बाद भारत में नागरी लिपि व संस्कृत भाषा सहित हिन्दी भाषा की अखिल भारतीय स्वीकार्यता पर प्रश्न लगा हुआ है। बोलचाल की हिन्दी आसेतु हिमाचल में प्रयोग में है। भारत का अंग्रेजीदां भद्रलोक यह मानता है कि भारत की लिंग्वा फ्रांका रोमन लिपि में लिखी जाने वाली अंग्रेजी भाषा है। एक अरब सत्ताईस करोड़ जनसंख्या वाले भारत के लगभग बारह करोड़ लोग भारत के दो सौ वर्ष तक शासक रहे ईस्ट इंडिया कंपनी बहादुर के हुक्मरान तथा 1857 के पश्चात बर्तानी राज के 90 वर्ष हिन्दुस्तान को अंग्रेजीमय नहीं बना सके। अब तो ईसाई मिशनरियां भी मानने लग गयी हैं कि धर्मान्तरण का युगांत हो चुका है। जिसे दुनियां के लोग हिन्दू धर्म कहते वह समाज धर्मान्तरण समर्थक नहीं है फिर भी दुनियां की समूची आबादी में हिन्दू कहे जाने वाले धर्म मानने वाले लोगों की संख्या मजहबी गणनानुसार अढ़ाई अरब ख्रिस्ती एक अरब साठ करोड़ मुसलमान तथा तीसरे क्रम में ये हिन्दू कहे जाने वाले लोगों की मजहबी जनसंख्या एक अरब से अधिक है। 
जब भारत बर्तानी राज के जुए से मुक्त हुआ भारत और पाक के अलावा देसी रियासतें व हैदराबाद निजाम सरीखे राजतंत्र भी स्वतंत्र होगये। जम्मू कश्मीर के महाराज हरी सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ संचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर याने गुरू गोलवलकर का हार्दिक सम्मान करते थे। तत्कालीन गृह सचिव वी.पी. मेनन उप प्रधानमंत्री व गृृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के विश्वस्त अधिकारी थे। सरदार वल्लभ भाई पटेल के गुरू गोलवलकर जी की मदद कश्मीर नरेश राजा हरी सिंह से भारत विलयन दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिये वी.पी. मेनन आईसीएस अधिकारी थे। उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा कि वे सरसंघ संचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर को लेकर हवाई जहाज से श्रीनगर पहुंचे। मेनन के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब महाराज हरी सिंह ने श्रीनगर हवाई अड्डे में ही गुरू गोलवलकर जी को साष्टांग प्रणाम किया कहा - गुरू जी आपकी आज्ञा शिरोधार्य है। उन्होंने भारत में विलयन के दस्तावेज पर दस्तखत कर दिये। आईसीएस अधिकारी वी.पी. मेनन इस घटना से अत्यधिक प्रभावित हुए। उन्होंने अपने संस्मरणों में गुरू जी की यशोगाथा का गान किया। पंडित नेहरू के संबंध राज हरी सिंह से सुमधुर नहीं थे। राजनीतिविद सरदार पटेल ने यह भांप लिया था कि गुरू जी की मदद निहायत जरूरी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघ संचालक मोहन भागवत जी का ध्यानाकर्षण समय की तात्कालिक जरूरत है। भारत के तमाम संघ आलोचकों का वे कृपापूर्वक आह्वान करें तथा देश के हर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विरोधी से अनुरोध करें। उन्हें संघ से क्या क्या शिकायतेें हैं संघ के कामकाज संघ की सामाजिक सेवा से उन्हें जो एतराज हों वे उसे अपनी मातृभाषा अथवा चाहत भाषा में अभिव्यक्त करें। नितीश बाबू का ही पक्ष प्रस्तुत किया जाये तथा नितीश बाबू के तर्कों का यथातथ्य उत्तर संघ द्वारा दिया जाये। पिछले 90 वर्ष की संघ की उपलब्धियों के ब्यौरे भारत की हरेक प्रांतीय भाषा में भी प्रसारित करने का शिव संकल्प किया जाये। 
देश भर के प्यासे लोगों को प्याऊ भूखे लोगों को दो जून भोजन नंगे लोगों को तन ढकने के लिये कपड़ा देने की राष्ट्रीय जिम्मेवारी भी संघ ही उठा सकता है। राज्य सरकारें अथवा केन्द्रीय सरकार व उसके कर्मचारी निःशुल्क भोजन, जल, जो पहनने के लिये कपड़े नहीं खरीद सकते उन्हें कपड़ा तथा जो लोग हाथ से काम कर सकते हैं काम करना चाहते हैं उन्हें दस्तकारी का अभ्यास देते हुए निःशुल्क भोजन के समानांतर हाथ की कारीगरी का अभ्यास भी कराने का उपक्रम हो। यह काम सरकारी ऐजेंसी नहीं कर सकती क्योंकि सारा सरकारी तंत्र सिस्टम फेलियर का शिकार बन चुका है। इसलिये प्रत्येक शाखा के साथ निःशुल्क भोजन व्यवस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उठाये। सरकार के समानांतर राष्ट्रीयता पूर्ण मानवीयता की अंबुदसमान संरचना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संपन्न कर सकता है। आज जो सिविल सोच रही है उसे हिन्दुस्तानी बनाने की जरूरत है। सरकार के समानांतर अंबुदसमान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिन्दुस्तान को वह आसन दिला सकता है जो आचार्य चणकनंदन कौटिल्य अर्थशास्त्र के रचनाकार चाणक्य विष्णुशर्मा ने अपने ग्रंथ के 6000 शलोकों में स्पष्ट किया है। आज की भारतीय जरूरत भगवद्गीता का ‘कर्मानुबन्धीनि मनुष्य लोके’ तथा महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने शांतिपर्व में जो कथानक प्रस्तुत किये हैं उनका अनुसरण कर भारतीय राजनीति को नयी दिशा दिखाने का कर्म राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर सकता है। केवल एक शिव संकल्प लेने की आवश्यकता है। 
  देसी मदिरा कच्ची शराब ताड़ी के संत्रास से बचने का जो उपाय महात्मा गांधी ने गजानन नाइक की नीरा ताड़गुड़ खजूरी गुड़ तथा ताड़ पत्तों की उद्यमिता से स्वातंत्र्य पूर्व भारत में किया ताड़ी खींचने वाले संमाज से भारत के महान देशभक्त तथा गांवों में रह कर गांवों का उत्थान संकल्प करने वाले गैर अंग्रजीदां लोकनेता कामराज नाडार को कौन नहीं जानता। भारतीय राजनीतिक क्षितिज में अंग्रेजी के बिना अपना जनाधार खड़ा करने वाले कामराज नाडार की तरह अनेक ज्ञात अथवा आत्म प्रचार न करने वाले राजनीतिक चिंतक थे जिन पर साने गुरू जी की आन्तर भारती संकल्पना का प्रभाव था। आज भारत में भाषायी ऊहापोह है देश में तमिल, बांग्ला, मराठी, तेलुगु, मलयाली, उड़िया, मइती, गुजराती, पंजाबी, उर्दू भाषाओं का समृद्ध लोक साहित्य है परंतु विश्वविद्यालयों तथा शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्रों पर भारतीय भाषाओं की निरंतर अनदेखी होती जारही है। इसलिये साने गुरू जी के प्रखर राष्ट्रवाद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आन्तर भारती के जरिये भारतीय भाषाओं को एक दूसरे के नजदीक लाने का भगीरथ प्रयास करना होगा। लोग अंग्रेजी पढ़ें अंग्रेजी के माध्यम से शिक्षा भी ग्रहण करें तथा अंग्रेजी के ही जरिये अपना भविष्य भी संवारने का प्रयत्न करते रहें पर अंग्रेजी से भारतीय भाषाओं में अनुवाद की त्रुटियां तथा भारतीय भाषाओं से अंग्रेजी में अनुवाद से जो प्रशासनिक न्यायिक तथा भाषायी ऊहापोह उग रहा है उसका अनुमान पंडित नेहरू और प्रोफेसर रघुवीर को था इसलिये अनुवादकों की टीम बनाने उन्हें अनुवादक मान्यता देने जो भारतीय भाषा तथा अंग्रेजी बोली के लब्धप्रतिष्ठ ज्ञाता हों केवल वही अनुवाद जगत में प्रवेश करें। उत्तर नेहरू युग में अंग्रेजी से भारतीय भाषाओं में अनुवाद तथा भारतीय भाषा या भाषाओं से अंग्रेजी अनुवाद प्रक्रिया लंगड़ा गयी है उसे किस तरह सही रास्ते में लाया जाये उद्भट राष्ट्रवादिता के प्रवर्तक स्वातंत्र्यवीर डाक्टर केशवराव हेडगेवार तथा साने गुरू जी की भारतीय राष्ट्रीयता के सांस्कृतिक पक्ष को आन्तर भारती के जरिये सुप्रतिष्ठित कराने की तात्कालिक जरूरत है। जिस तरह अंग्रेजी भाषा ने इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के जरिये अंग्रेजी भाषा को समूचे विश्व में फैैलाया गया है। रोमन में केवल 26 अल्फाबेट हैं लैटिन में 24 अल्फाबेट हैं संयुक्त राज्य अमरीका के पचासवें घटक हवाई का हवाई भाषा भारतीय वाङमय के नजदीक है वहां अल्फाबेट केवल 12 हैं फारसी में 28 अल्फाबेट अरबी में 32 अल्फाबेट हैं। नागरी लिपि सहित भारतीय लिपियों असमी, मइती, बांग्ला, उड़िया, तेलुगु, तमिल, मलयाली, कन्नड़, गुजराती, गुरूमुखी लिपियों में नागरी की भांति 51 अल्फाबेट हैं। आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी भारत यात्रा में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को साढ़े चार हजार वर्ष पूर्व नटराज की नृत्यकाल वाली अभूतपूर्व कांस्य प्रतिमा प्रस्तुत की। चौरासी लाख योनियों में नौ लाख अथवा चार लाख योनियां मानव मूलक हैं। जब समुद्र मंथन हलाहल पान के पश्चात महादेव ने तांडव नृत्य किया तांडव नृत्यावसान में महादेव का डमरू नौ और पांच बार बजा। उससे चौदह ध्वनियां निकलीं जो ध्वन्यालोक का आधार होने के साथ साथ मनुष्य में वाणी का उद्गाता है। भारत की भाषायी ऊहापोह स्थिति से निजात पाने के लिये हमें नटराज की शरण में ही जाना होगा। नृत्यावसाने नटराज राजो ननाद ढक्का नवपंचवारम् पर अनुसंधान कर भारतीय भाषाओं को जो गरिमा भाषा विज्ञानी डाक्टर सुनीति कुमार चाटुर्ज्या तथा डाक्टर हेम चंद्र जोशी ने संयुक्त प्रयास से उपलब्ध की उसे पुनर्जीवित करने की तत्काल आवश्यकता है तभी भारत भारतीय वाङमय की मदद से विश्व में अपना शीर्ष संस्थान पुनः उपलब्ध कर सकता है। 
साने गुरू जी आन्तर भारती आज भारत की भाषायी जरूरत है। भारत की सभी भाषाओं को समान सम्मान मिले नागरी लिपि संस्कृत भाषा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रचारित हिन्दी भाषी आन्तर भारती का सहायता स्त्रोत हो हरेक भारतीय मातृभाषा या अपनी चाहत भाषा का प्रयोग निर्विघ्नतापूर्वक करता रहे। अनुवाद दोष से बचने के लिये भारत की तात्कालिक जरूरत ‘भारतीय भाषायें व लिपियां इनसाइक्लोपीडिया’ का अ से लेकर ज्ञ तक भाषायी पर्याय कोष सृजित किया जाये। भारतीय भाषायें भाषायी पर्याय कोष को भारत की सभी लिपियों के साथ साथ नागरी व रोमन लिपि में भी अभिव्यक्ति मिले। भाषायी अनुवाद दोष से बचने का एकमात्र उपाय भाषायी पर्याय कोष है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाभारत के शांतिपर्व तथा कौटिल्यीय अर्थशास्त्र की उपादेयता आज के राजनीतिक संदर्भ में व्याख्यायित करने की क्षमता रखता है। 
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