Friday, 3 June 2016

          पुतली बाई दिवस को राष्ट्रीय पर्व मनायें
          25 अगस्त 2015 के हिन्दू अखबार के खुले पन्ने में एक चौंकाने वाली राष्ट्रीय समस्या एलकोहोलिज्म - शराबखोरी की हालतें गिनाते हुए अखबार नवीस जी. राम मोहन ने लिखा है - तमिलनाडु शराबखोरी बढ़ने के मामले में किंकर्त्तव्य विमूढ़ता वाली असमंजस की मानसिकता में है। समाज का बहुत बड़ा हिस्सा नशे के आगोश में है। नशाखोरी के रेगिस्तान में एक नखलिस्तान महाकवि भारतियार हायर सेकेन्डरी स्कूल वासुवा गांव जो तिरूनिनवार कस्बे के नजदीक है, उसमें बालवाड़ी (के.जी.) से बारहवीं कक्षा तक लगभग दो हजार छात्र छात्रायें पढ़ते हैं। विद्यालय से जुड़ा एक अनाथालय भी है जो 200 बच्चों का आश्रय स्थल है। अनाथालय के ये बच्चे भी महाकवि भारतियार विद्यालय में पढ़ते हैं। विद्यालय में छात्र छात्रायें दोनों पढ़ते हैं जो अधिकांशतः गरीब परिवारों से आते हैं। बुधवार 5 अगस्त 2015 के दिन इस विद्यालय में ‘पुतली बाई दिवस’ मनाया गया। मां पुतली बाई मोहनदास करमचंद गांधी जिन्हें हम महात्मा गांधी के नाम से भी जानते हैं की माता थीं। महात्मा गांधी को भारत राष्ट्रपिता के रूप में भी मानता है। संस्कृत साहित्य में पिता की व्याख्या करते हुए कहा गया है - सः पिता यस्तु पोषकः। कालिदास ने रघुवंश महाकाव्य में राजा दिलीप के बारे में लिखा - सः पिता पितरस्तेषाम् केवलम् जन्म हेतवः। दिलीप अपनी प्रजा का वास्तविक पोषक था। जन जन के पिता तो केवल जन्मदाता जनक मात्र थे। महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता मानने वाला भारत महात्मा गांधी को भारतीय जनता नाड़ी वैद्य मानती है। भारतीय राष्ट्रीय स्वातंत्र्य आंदोलन सहित भारत में नैतिक बल बढ़ाने का भगीरथ प्रयास महात्मा गांधी ने ही किया। उन्होंने अपने पहले ग्रंथ ‘हिन्द स्वराज’ में अपने लिये आध्यात्मिक स्वराज और देशवासियों के लिये पार्लमेंटरी स्वराज का आह्वान किया था। मां पुतली बाई की सबसे छोटी संतान मोहनदास थे जिन्हें मां पुतली बाई मोनिया कह कर बुलाती थीं। आदि शंकर ने कहा था -
पृथिव्याम् पुत्रास्ते जननि वहवः संति सरलाः। परम् तेषाम् मध्ये विरलतरलोहम् तव सुतः।।
माता पुत्र का यह संबंध सुनीति और ध्रुव देवहूति और कपिल देवकी और कृष्ण की तरह पुतली बाई और उनके कनिष्ठ पुत्र मोनिया में गहरी आत्मीयता का प्रतीक है। करम चंद कबा गांधी दीवान थे। पुतली बाई उनकी चौथी पत्नी थीं। ठीक उसी तरह जिस तरह देवक की सात कन्यायें वसुदेव को ब्याही गयी थीं। उनमें देवकी सबसे छोटी थी और देवकी के आठवें पुत्र कृष्ण तथा कन्या सुभद्रा थी। माता पुतली बाई के मोनिया सन 1888 में बारिस्टरी पढ़ने विलायत मुंबई होकर विलायत जाने के लिये दस अगस्त 1888 की तारीख तय हुई। मुंबई से उन्हें पानी के जहाज से विलायत के लिये सितंबर 4, 1888 को रवाना होना था। राजकोट की प्रौढ़ महिलाओं ने माता पुतली बाई को विलायत में पापाचरण संबंधी कई बातें उनके कानों में डालीं। गांधी परिवार परम वैष्णव बनिया समाज से आते थे। पुतली बाई में रामभक्ति कूट कूट कर भरी हुई थी। वे बहुश्रुत महिला थीं यद्यपि साक्षर नहीं थीं पर उनमें मानवता व ईश्वर भक्ति कूट कूट कर भरी हुई थी। उनके पति दीवान करमचंद कबा गांधी में 22 वर्ष का अंतर था। पास पड़ोस की वैष्णव महिलाओं तथा जैन महिलाओं की बातें सुन कर माता पुतली बाई की बेचैनी अपने मोनिया के बारे में बढ़ रही थी। उन्होंने जैन श्रमण वच्छराज जी महाराज से अपनी व्यथा कही। श्रमण महाराज ने माता पुतली बाई को आश्वस्त किया कि वे उसके पुत्र मोनिया को मां की उपस्थिति में ही तीन निषेध बतायेंगे कि वह मदिरा, मांस और स्त्री स्पर्श नहीं करेगा। मोहनदास ने माता-संकल्पित व्रत निर्वाह का आश्वासन दिया। माता ने बेटे को विलायत जाने की इजाजत दे दी। माता पुतली बाई भारत की श्रौत विद्या संपन्न गृहिणी थीं। इसमें कोई हेतु नहीं कि वे संपन्न परिवार से थीं अथवा गरीब घराने की ग्रामीण स्त्री थीं। उनका स्थान भारतीय मातृ संस्थान में उतना ही चमकीला है जितना देवक की सातवीं कन्या देवकी का जिनकी आठवीं संतान कृष्ण थे। 
जी. राम मोहन कहते हैं कि माता पुतली बाई को जो व्रत पूर्ति आश्वासन मोहनदास ने दिया था उसकी प्रतिकृति - पुनर्वाचन - महाकवि भारतियार विद्यालय के वे छात्र जो सोलह वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं उनसे माता पुतली बाई दिवस 5 अगस्त 2015 के दिन लगभग तीन सौ किशोर छात्रों को विद्यालय प्रांगण में विशेष किस्म की टीशर्ट पहनायी जिसमें तमिल में लिखा गया है। इस टीशर्ट का पहनने वाला किशोर आजीवन नशा न करने का व्रत लेरहा है। पुतली बाई दिवस नशाखोरी न करने का उत्सव है। तमिलनाडु के बारे में कबीर ने कहा था - भगती उपजी द्रविड़ देस। कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने हिमालय की व्यास गुफा में गणपति को महाभारत और अठारह पुराण लिखाते समय भक्ति और नारद संवाद में लिखा - 
द्रविड़े साहम् समुत्पन्ना वृद्धिम् कर्णाटके गताः। क्वचिन् क्वचिन् महाराष्ट्रे गुर्जरे जीर्णतां गताः।।
भारत में भक्ति का रास्ता वैसा ही है जैसा मानसून का रास्ता है। मानसून सागर से हिमालय पहुंचता है उसी तरह भक्ति का प्रवाह भी उर्ध्वगामी है। विशाल राम मोहन अपने आपसे सवाल पूछते हैं कि क्या उनका पुतली बाई दिवस कुछ कारगर नतीजे लायेगा ? अपने सवाल का जवाब स्वयं देते हुए वे कहते हैं कि समय की सुई ही यह संकेत देगी कि तमिल कवि सुब्रह्मण्यम भारती की यादगार में तमिलनाडु के गंवई गंवार इलाके में बालवाड़ी से बारहवीं दर्जे तक की पढ़ाई करने वाला अद्भुत स्कूल क्या भारत में बढ़ रही दिन दूनी रात चौगुनी शराबखोरी नशे की आदत पर कारगर रोक लग सकेगी। 
नशाखोरी से केवल तमिलनाुडु ही नहीं उसका पड़ोसी घटक राज्य केरल भी पीड़ित है। पंजाब और उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों से ज्यादा खरीद शराब और दूसरी नशीली वस्तुओं की होती है। उत्तराखंड आबकारी महकमे द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार लगभग सवा करोड़ आबादी वाले उत्तराखंड में मदिरा-आबकारी राजस्व के तौर पर उत्तराखंड सरकार को पंद्रह अरब रूपयों की कर वसूली हुई। समूचे उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आबकारी राजस्व प्रतिदिन पूरे उत्तराखंड के लिये सवा दो रूपये तथा कुमांऊँ के अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ जनपदों के लिये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन आबकारी राजस्व चार रूपये के इर्दगिर्द है। 
एक वर्ष पहले उत्तराखंड के सातवें मुख्यमंत्री जी ने बोरारौ घाटी के भारतीय आजादी आंदोलन में भागीदारी का जिक्र करते हुए 1942 में चनौदा में 6 लोगों के आत्मबलिदान की याद ताजी कराते हुए कहा - बोरारौ घाटी में गांधी आश्रम ने जो काम 1929 से अब तक किया है उसे याद करते हुए सार्थक उपाय करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री जी की घोषणा संख्या 758 आज भी क्रियान्वित नहीं हुई है। बोरारौ घाटी के शीर्ष कौसानी में नयी तालीम से क्रांतिकारी कदम उठाने वाली लब्धप्रतिष्ठित शिक्षिका प्रेमा जोशी हजारों परिवारों का योगक्षेम देख रही है। शराब के नशे से अपने परिवार को संकट में डालने वाले हजारों परिवारों की बेवाओं और उनके बच्चों का योगक्षेम संकल्पित करने वाली महिला प्रेमा जोशी की लगातार बीस वर्षों की मेहनत ने हजारों विधवाओं व उनके बच्चों का भविष्य निखारा है। इस ब्लागर ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जी का ध्यानाकर्षण किया कि प्रेमा जोशी ने जो सेवा कार्य किया है उसे संबल दिये जाने के लिये बोरारौ घाटी के नशा पीड़ित परिवारों का सर्वेक्षण प्रेमा जोशी के सहयोग से संपन्न किया जाये ताकि बोरारौ घाटी के बारे में महात्मा गांधी ने 1929 में कुमांऊँ की वादियों के बारे में ताड़ीखेत अल्मोड़ा गरूड़ बैजनाथ तथा बागेश्वर में अपना दायां हाथ उठा कर कहा था - कुमांऊँ भारत का स्विट्जरलैंड है। आज वह कुमांऊँ नशे की गिरफ्त में है। माननीय मुख्यमंत्री जी घोषणा कर रहे हैं कि शराब की दुकानें 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब बिक्री पर रोक लगायेंगे। मुख्यमंत्री जी से प्रार्थना है कि वे एक बार महाकवि भारतियार हायर सेकेंडरी स्कूल वासवा तिरूनिनवार का अवलोकन करने की कृपा करें। तमिल कंबन रामायण के सृजक सुब्रह्मण्यम भारती की यादगार में चल रहे स्कूल का संकल्प किशोरवय छात्रों द्वारा यह व्रत लेना कि वे मदिरा स्पर्श नहीं करेंगे। उत्तराखंड के स्कूलों में भी भले ही वे अंग्रेजी भाषायी माध्यम वाले कान्वेंट अथवा स्कूल व्यवसाइयों द्वारा संचालित स्कूल हों मदिरा सेवन की चाह किशोरों में भी बढ़ रही है इसलिये अगर उत्तराखंड सरकार को अपनी आबकारी नीति में युवाओं की नशाबन्दी रोकथाम के उपाय भी जोड़ने हों तो उत्तराखंड के शिक्षामंत्री तथा उच्च शैक्षिक अधिकारी वर्ग को महाकवि भारतियार स्मारक स्कूल का शैक्षिक वातावरण देखने हेतु तमिलनाडु जाना चाहिये। उत्तराखंड की तरह तमिलनाडु भी मदिरा सेवन की आदत पड़ जाने से राज्य स्तर पर अनेकानेक समस्याओं से जूझ रहा है। महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती की राष्ट्रभक्ति उनकी रामभक्ति उतनी ही गतिशील रही है जितनी गोस्वामी तुलसीदास जिन्होंने स्वांतः सुखाय रघुनाथ गाथा का भाषा निबंधन किया। जार्ज ग्रियर्सन ने गोस्वामी तुलसीदास के बारे में अपना अभिमत व्यक्त करते हुए कहा था - अगर तुलसीदास यूरप में जन्मे होते उनकी साहित्यिक उपलब्धि ख्यात शेक्सपियर से ऊँचे दर्जे तक पहुंचती। 
आबकारी भारतीय गणराज्यों के घटकों का विषय है इसलिये शराब के नशे पीड़ित घटक राज्यों को ही पहल करनी पड़ेगी। तमिलनाडु मुख्यमंत्री जे. जयललिता सस्ते भोजनालय चला रही हैं। जनता जनार्दन पर उनकी गहरी पकड़ है। वे मातृशक्ति की प्रतीक हैं इसलिये उनसे अनुरोध किया जाये कि महाकवि भारतियार हायर सेकेंडरी स्कूल व उसके छात्रों की प्रस्तुति को प्रकाश में लायें। तमिल और अंग्रेजी के महाकवि भारतियार स्कूल व उसके छात्र छात्राओं का जहां तमिल डाक्यूमेंटरी फिल्म बनायी जाये वहीं स्कूल के पार्श्ववर्ती गांवों का हालचाल पढ़ाई लिखाई तथा विद्यालय द्वारा पुतली बाई दिवस मनाये जाने को राष्ट्रीय स्तर पर ऐडवरटोरियल तरीके से प्रसारित किया जाये। 
मात और बेटे के बीच ताल्लुकात हिन्दुस्तान में आसेतु हिमाचल यह मान्यता है कि बाप को बड़ा बेटा या बेटी प्यारी होती है। कुमांऊँ के गांवों में आज भी बड़े बेटे या बड़ी बेटी के माता पिता को संबोधित किया जाता है।  कुमांऊँ के गांव के लोग परिवार की बड़ी लड़की के नाम से उसके पिता देवकी के बौज्यू या देवकी की ईजा संबोधित करते हैं। मां को अपनी सबसे छोटी संतान ज्यादा प्रिय होती है और यही माता पुलली बाई की सोच भी थी। महात्मा गांधी पुतली बाई के मोनिया तथा दुनिया भर में मोहनदास करमचंद गांधी नाम से ख्याति प्राप्त व्यक्तित्त्व के धनी महात्मा गांधी पर उनकी माता पुतली बाई की ईश्वरपरायणता तथा रामभक्ति की अमिट छाप थी। संभव है माता पुतली बाई का जीवनचरित गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ हो। गांधी जीवनी के साथ साथ माता पुतली बाई और उनके लाड़ले बेटे मोनिया संबंधी उक्ति दंतकथायें तथा नरसी मेहता की दशधा भक्ति का उन्मेष समय की जरूरत है। माता पुतली बाई ने अपने बेटे मोनिय से जो व्रत लिवाया वह मदिरा मांस तथा परस्त्री स्पर्श नहीं करेगा। तमिलनाडु का सुब्रह्मण्यम भारती के नाम से चलने वाले स्कूल में नाप्तयौवन छात्रों से प्रतिज्ञा कराया जाना कि वह मदिरा सेवन नहीं करेगा उसकी टीशर्ट में तमिल में इंगित किया गया कि मद्य सेवन नहीं करूंगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अपने गृह राज्य में नशाबंदी है। नशाबंदी का असर दूसरे राज्यों में भी हो इसलिये प्रधानमंत्री जी से प्रार्थना है कि वे गुजरात राज्य सरकार की नशाबंदी नीति गुजराती भाषा के अलावा अंग्रेजी हिन्दी मराठी कन्नड़ तमिल पंजाबी उर्दू मलयाली तैलुगु उड़िया बांग्ला कोंकणी मइती भाषाओं में भी उपलब्ध किये जाने हेतु संकल्प लिया जाये। पिता के पत्र पुत्री के नाम - जवाहरलाल नेहरू के द्वारा अपनी कन्या प्रियदर्शिनी इंदिरा को जो पत्र लिखे गये उन्हें हरिभाऊ उपाध्याय ने हिन्दी में अनुवाद हिन्दी भाषियों को उपलब्ध कराया। पत्र तो मूलतः अंग्रेजी भाषा में थे। जब उनका हिन्दी अनुवाद घर घर पहुंचा तो एक जाग्रति आयी। महात्मा गांधी द्वारा जब वे केवल मोहनदास करमचंद गांधी के नाम से जाने जाते थे उन्होंने अपनी मातृभाषा में हिन्द स्वराज लिखा। उन्होंने प्रश्नकर्ता को वाचक तथा उत्तरदाता को अधिपति कहा। जरूरत इस बात की है कि सुमति और ध्रुव देवहूति और कपिल संबंधों की तर्ज पर पुतली बाई मोनिया संवाद की रचना गुुजराती भाषा में संपन्न कर भारत के प्रमुख भाषायी वर्गों में पुतली बाई-मोनिया संवाद जारी करने पर विचार किया जाये। पहली आवृत्ति गुजराती भाषा में जारी हो तथा फिर भारत की शेष भाषाओं में भी पुतली बाई-मोनिया संवाद प्रकाशित किया जाये। महावीर त्यागी देहरादून के रहने वाले थे और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के जांबाज रणपंडित थे। इलाहाबाद के प्रतिष्ठित बैरिस्टर पंडित मोतीलाल नेहरू से उनके संबंध अत्यंत आत्मीय थे। पंडित नेहरू की माता श्री स्वरूप रानी नेहरू महावीर त्यागी को अपने बेटे जवाहरलाल नेहरू की तरह ही स्नेह करती थीं। नशाखोरी एवं दुर्व्यसनों सहित कदाचारों से समाज को मुक्ति कानूनों के जरिये नहीं मिल सकती। शिष्ट समाज निर्माण पुरूष-स्त्री संबंधों में विवेकशीलता पूर्ण आचरण के लिये कानून के समानांतर सामाजिक शिष्टाचार विकसित करना अत्यंत जरूरी है इसलिये तमिलनाडु के भारतियार स्मारक विद्यालय द्वारा पुतली बाई दिवस मनाये जाने के प्रसंग को अखिल भारतीय स्तर पर माता पुतली बाई दिवस संकल्पित किया जाना युग की पुकार है। नशा पीड़ित उत्तराखंड के लिये माता पुतली बाई दिवस एक वरदान होगा। महात्मा गांधी की द्वितीय पुस्तक अनासक्ति योग भगवद्गीता का गुजराती भाष्य है। महात्मा गांधी की दृष्टि में भगवद्गीता के दूसरे अध्याय के सांख्य योग के अंतिम उन्नीस श्लोक स्थितप्रज्ञता तथा समाधिस्थिता के उद्गाता हैं। महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग का प्राक्कथन कौसानी(कुमांऊँ) में संपन्न किया इसलिये पुतली बाई को मोनिया द्वारा दी गयी आश्वस्ति का प्रमुख किन्तु मदिरा-स्पर्श न करना है। पूरे उत्तराखंड में न सही कौसानी तथा बोरारौ घाटी जैंती खुमाड़ सल्ट देघाट जहां स्वातंत्र्य वीरों ने 1942 में आत्मबलिदान संपन्न किया कम से कम इन चार जगहों पर तो नशामुक्ति केन्द्र प्रयोग के तौर पर स्थापित किये ही जाने चाहिये, यही पुतली बाई-मोनिया संवाद की सार्थकता को सिद्ध करने का उत्तराखंड सरकार का सही दिशा में किया गया समयानुकूल प्रयास उत्तराखंड राज्य को नशामुक्त करने की ओर अग्रसर कर सकता है। 
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