Tuesday, 14 June 2016

कवींद्र रवींद्र संकल्पित विश्व भारती के सन्दर्भ में
साने गुरु जी की आन्तर भारती हिन्द के लिये क्यों जरूरी है ? 
पंडित नेहरू की पंचवर्षीय योजना विचार पोखर के मूल रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि लेकर अहमदाबाद में मजूर-महाजन व्यवहार शैली को अंजाम देने वाले गुलजारी लाल नंदा तथा अनुसूया बेन की महत्वपूर्ण भूमिका थी। अनुसूया बेन महात्मा गांधी के रसोढ़े का प्रबंध देखती थीं। वे तेरापंथी जैन मिल मालिक साराभाई की पहली संतान थीं बाल विधवा होगयीं। साराभाई अपनी बालविधवा प्रथमा कन्या को लेकर साबरमती पहुंचे। महात्मा गांधी से कहा - अनुसूया को आपको सौंप रहा हूँ। महात्मा ने अनुसूया बेन को कस्तूरबा को सौंप डाला। बा से महात्मा ने कहा - तुम्हारे रसोढ़े को ठीक तरीके से अनुसूया ही चला सकती है। बा निरक्षर थीं, उन्हें साक्षर बनाने का जिम्मा भी अनुसूया बेन ने लिया। मजदूर और मिल मालिक के बीच भावनात्मक पुल बांधने में अनुसूया बेन और गुलजारी लाल नंदा की महत्वपूर्ण भूमिका थी। पंडित नेहरू की प्रथम पंचवर्षीय योजना का श्रीगणेश करने में मजूर महाजन विचार पोखर की अद्भुत शक्ति है। पंडित नेहरू के पंचवर्षीय योजना कल्पतरू को जीवंत रूप देने वाले व्यक्ति भारतीय ज्योतिष शास्त्र के प्रशंसक बर्तानी चिंतक मिस्टर मून थे। उन्होंने योजना आयोग को हिन्दुस्तान की जमीन से जोड़ा। पंडित नेहरू के शिव संकल्प को साकार करने वाले महानुभाव एस.के. डे थे। पंडित नेहरू अंग्रेजी से भारतीय भाषाओं में सटीक अनुवाद के पक्षधर थे। भारतीय भाषाओं से अंग्रेजी में अनुवाद त्रुटिहीन हो यह पंडित नेहरू और प्रोफेसर रघुवीर की संकल्पना थी। पंडित नेहरू भाषायी तथा एक भाषा से दूसरी भाषा में भाषान्तरण जिसे आम तौर पर अनुवाद कहा जाता है अनुवाद की समीक्षा करने वाले व्यक्तित्त्व थे। उन्होंने देश के सभी कार्यालयों में AMNRUP की व्यवस्था शुरू की। पंडित नेहरू संकल्पित पंचवर्षीय योजनायें ही योजना कहलाने लायक थीं। तीसरी पंचवर्षीय योजना अवधि के मध्य में ही 27 मई 1964 के दिन उनके दिवंगत होने से पंचवर्षीय योजना अनाथ होगयी। पंडित नेहरू के उत्तराधिकारियों में वह नैतिक तथा रणनीतिक कूबत ही नहीं थी इसलिये ठीक पचास साल पंचवर्षीय योजना का प्रेत योजना भवन पर विद्यमान था पर उस प्रेत को साधने की सामर्थ्य लाल बहादुर शास्त्री श्रीमती इंदिरा नेहरू उनके पुत्र राजीव गांधी राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह राजनीति की बारहखड़ी ज्ञाता नहीं थे। पी.वी. नरसिंहा राव सहित किसी भी तत्कालीन राजनेता को न तो राजनीतिक फुर्सत थी न ही उन्हें नेहरू संकल्प की पंचवर्षीय योजना से कोई तादात्म्य था। प्रखर सिद्धांतवादी मोरारजी रणछोड़जी देसाई महात्मा गांधी पंडित नेहरू तथा गुलजारी लाल नंदा की मजूर महाजन शैली को हृदयंगम किये हुए व्यक्ति थे पर केवल अढ़ाई वर्ष ही जनता पार्टी के नेतृत्व का अवसर मिला। जनता पार्टी सतनाजा खिचड़ी नुमा व्यवस्था थी जो ढहढहा कर गिर गयी। श्रीमती इंदिरा नेहरू गांधी 1980 में पुनः सत्तासीन होगयीं। 
सन 2014 में नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के नेतृत्व में तीस वर्ष के अंतराल में संख्याबल की दृष्टि से भारतीय जनता पार्टी अपने बलबूते पर लोकसभा में बहुमत हासिल कर सकी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने अपने राजग सहयोगियों की मदद से सरकार का नेतृत्व करते हुए राज्य सरकारों की सुध ली। उनकी संकल्पना का शासन स्थापित करने के लिये फेडरलिज्म का आह्वान किया तथा पंचवर्षीय योजनाओें के प्रेत के स्थान पर नीति आयोग गठन का मार्ग प्रशस्त किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने अरविन्द पनगरिया के नेतृत्व में नीति आयोग का खाका खींचा। परम राष्ट्रवादी साने गुरू जी ने आन्तर भारती संकल्पना के जरिये भारत की संविधान भाषा अनुसूूची में दर्ज भाषाओं के लिये एक नया रास्ता सुझाया। इस रास्ते का नाम उन्होंने आन्तर भारती रखा। अखबारी खबरों के मुताबिक भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पी.एम.ओ. में भारतीय भाषा कक्षों के विचार को आकार देने के पक्षधर हैं। खबर बहुत अच्छी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय प्रत्येक संविधान अनुसूचित भाषा में उस भाषा को घटक राज्य की भाषा के रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय संबंधित भाषा को अखिल भारतीय स्तर पर स्थापित करने का पक्षधर है। साने गुरू जी का आन्तर भारती संकल्प प्रधानमंत्री कार्यालय भारत के राष्ट्रपति महोदय संसद के दोनों सदनों के स्पीकर डिप्टी स्पीकर उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा के उपाध्यक्ष सदन के दोनों सदनों के नेता सदन तथा नेता प्रतिपक्ष अखिल भारतीय राजतंत्र स्तर पर नौ महानुभाव तथा भारत के गणराज्य के 36 घटकों को विधानमंडल (विधान सभा तथा विधान परिषद) सहित दिल्ली और पुडुचेरी सरीखे विधान सभाओं वाले राज्य तथा केन्द्र शासित क्षेत्रों के प्रबंध तंत्र में प्रत्येक राज्य के विधान सभा स्पीकर डिप्टी स्पीकर नेता सदन तथा नेता प्रतिपक्ष जहां विधान परिषद है उनके अध्यक्ष उपाध्यक्ष नेता सदन तथा नेता प्रतिपक्ष सब मिल कर घटक राज्य तथा केन्द्र शासित क्षेत्रों सहित 36 हैं इसलिये ज्यादा से ज्यादा 288 तथा राष्ट्रपति सहित दोनों सदनों के नौ प्रतिनिधि मिल कर यह संख्या 297 होती है। वर्तमान में संविधान भाषा अनुसूची में हिन्दी अंग्रेजी सहित 23 भाषायें हैं। इनमें मइती मणिपुरी असमी बांग्ला उड़िया तेलुगु तमिल मलयाली कन्नड़ कोंकणी गुजराती मराठी पंजाबी तथा उर्दू क्रमशः मणिपुर असम पश्चिम बंग व त्रिपुरा उड़िया आंध्र तेलंगाना तमिलनाडु केरल कर्णाटक गोआ महाराष्ट्र गुजरात पंजाब जम्मू कश्मीर तथा सिक्किम की राजभाषायें हैं। दस राज्यों की राजभाषा हिन्दी है अरूणाचल प्रदेश नगालैंड मेघालय मिजोरम की राजकाज भाषा अंग्रेजी है। संविधान भाषा अनुसूची में क्रमशः कश्मीरी डोगरी मैथिली संथाली सिन्धी संस्कृत बोडो सात भाषायें संविधान भाषा अनुसूची में दर्ज हैं पर किसी घटक राज्य की राजभाषा अभी तो नहीं है पर भविष्य में इन भाषाओं के बोलने वाले सरकार से मांग कर सकते हैं इसलिये इन सात भाषा को नजरअन्दाज करना उचित नहीं होगा। फिलहाल यह संकल्प लिया जाये कि संसद के दोनों सदनों में सदस्य अपनी मातृभाषा अथवा चाहत भाषा में अपना मंतव्य व्यक्त कर सके इस व्यवस्था के लिये ही संसद के दोनों सदनों सहित विधान सभाओं विधान मंडलों के स्पीकर डिप्टी स्पीकर नेता सदन नेता प्रतिपक्ष सहित तेईस भाषाओं के स्थापित भाषा विज्ञानी नामचीन कवि लेखक तथा भारतीय भाषाओं के अखबारों के लब्धप्रतिष्ठ संपादकों सहित साने गुरू जी संकल्पित आन्तर भारती बोर्ड का गठन किया जाना चाहिये। जिसके 297 सदस्यों के अलावा भारतीय भाषाओं के मर्मज्ञ विद्वानों को संसद व सरकार महत्व दे तथा भारतीय भाषाओं को संसद तथा विधान मंडलों में मातृभाषा अथवा चाहत भाषा में विचार व्यक्त करने का अवसर मिले तथा अन्य सदस्य अपनी मातृभाषा अथवा चाहत भाषा में उन वक्तव्यों को सुन सकें। यह तात्कालिक व्यवस्था करने के लिये संकल्प लिया जाना चाहिये। 
दूसरी ओर उपरोक्त वर्णित अधिष्ठान को यह उत्तरदायित्व भी सौंपा जाये कि भारतीय संविधान जो अभी केवल अंग्रेजी व हिन्दी में ही प्रमाणित है संबंधित घटक राज्य की विधान मंडल सहित लोकसभा व राज्यसभा में भारतीय संविधान के उर्दू पंजाबी गुजराती मराठी कोंकणी कन्नड़ मलयाली तमिल तेलुगु उड़िया बांग्ला मइती नैपाली तथा असमी भाषाओं संविधान की प्रामाणिक प्रति संसद द्वारा जारी की जाये ताकि संबंधित राज्य अपने कामकाज में भारतीय संविधान की अपने राज्य की राजभाषा में प्रयोग कर सके। भारतीय संविधान को भारतीय भाषाओं में अधिकारिक ग्रंथ के रूप में प्रमाणित किये जाने पर घटक राज्य कानून सम्मत सुशासन का प्रबंध कर सकेंगे। भारतीय संविधान भारतीय भाषाओं में आधिकारिक तौर पर मिले यह भारत की भाषायी सुशासन की तात्कालिक जरूरत है। आन्तर भारती का साने गुरू जी का विचार पोखर भारत की राष्ट्रीयता सशक्त बना सकता है। भारतीय भाषाओं में जो ज्ञान भंडार है उसका सदुपयोग करने पर ही बर्तानी शासन सिस्टम व्यवस्था के खंडित हो जाने के पश्चात भारत के लोगों को अपनी मर्यादाओं की स्थापना के लिये अहर्निश प्रयत्न करना होगा इसलिये भारत की तात्कालिक भाषायी जरूरत आन्तर भारती है। प्रखर राष्ट्र चिंतक साने गुरू जी ने आन्तर भारती का गुरूमंत्र भारत के शासकों के सामने रखा है। साने गुरू जी की राष्ट्रवादिता का लाभार्जन करना भारत वासियों का कर्तव्य है। अगले पोस्ट में यह ब्लागर आन्तर भारती नक्शे का पहला हिस्सा मइती असमी बांग्ला उड़िया तेलुगु तमिल मलयाली कन्नड़ कोंकणी मराठी पंजाबी गुजराती उर्दू नैपाली हिन्दी और अंग्रेजी इन सोलह भाषाओं व उनकी लिपियों के जरिये शुरू करेगा। दूसरे चरण में संविधान सूची की भाषायें होेंगी जिनमें बोडो मैथिली संथाली संस्कृत सिन्धी डोंगरी कश्मीरी सात भाषायें जो संविधान सम्मत भाषायें हैं पर किसी राज्य की राजभाषा नहीं। फिर तीसरा चरण आता है डाक्टर ग्रियर्सन की दृष्टि वाले भारत की 276 भाषायें। तुलसी ने रामचरित मानस स्वांतः सुखाय लिखा राम को जन जन तक पहुंचाया। अगले ब्लाग में आन्तर भारती का क्या स्वरूप हो ? Encyclopedia of Indian languages from Sanskrit to modern Indian languages i.e. English utilized by 12 crore Indians.      
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