Monday, 8 August 2016


गज अरु ग्राह लड़े जल भीतर लड़त लड़त गज हारायण?
यही स्तब्धकारी वाक्युद्ध पथ है जिसका  सामना भारत कर रहा है।
इंडिया टुडे के 18 जुलाई 2016 के अंक में मुखपृष्ठ पर महाशय अरविन्द कुमार केजरीवाल का जिक्र छापते हुए हिन्दुस्तान के दूरदेश साप्ताहिक अखबार ने लिखा The Audacity of AAP  साप्ताहिक अपने मुखपृष्ठ में फिर लिखता है First, they took Delhi, now emboldened Arvind Kejriwal has launched the Party on an ambitious course to achieve National Prominance with a serious push in Punjab and Goa. अरूणपुरी ने अपने संपादकीय में केजरीवाल महाशय के गुजरात भ्रमण पर अपनी कलम नहीं चलायी। उन्होंने व्यक्त किया कि केजरीवाल महाशय स्वयं को Anarchist  मानते हैं। राजसत्ता जगत में अराजकता के कारण ही जन्मी इसलिये ये लगता है कि हिन्दुस्तान में जिसे अराजकता समझा जाता है बर्तानिया सहित समूचे पश्चिमी संसार की अराजकतावादी वाला सिद्धांत भारत में सोची जाती अराजकता से भिन्न है। यशोदा के पति गोपराज नंद अपना वार्षिक कर चुकाने कंस के राजमहल जाते थे। कंस को कर दिया करते थे पर कंस के राज के प्रति उनकी दृष्टि अनुकूल नहीं थी। वे कंस के तौर तरीकों को अराजक मानते थे क्योंकि कंस ने अपनी बहन देवकी के छः पुत्रों व एक कन्या को पटक कर मार डाला था। यशोदा की नजर में वही अराजकता का नंगा नाच था। भारत की पारंपरिक लोक कल्पना में राजधर्म और दस्युधर्म शास्ता समूह के दो भिन्न भिन्न प्रकृति के समूह हैं। कानून सम्मत राजतंत्र अथवा लोकतंत्र जिसे पाश्चात्य चिंतन में अंग्रेजी भाषा में डेमोक्रेसी कहा जाता है। पारंपरिक हिन्दुस्तान में तुलसीदास का कथन ‘एतो मतो हमारो’ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना मदनमोहन मालवीय गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र का नित्य पाठ करते थे। श्रीमद्भागवत महापुराण के छठे स्कंध का आठवें अध्याय नारायण कवच कहलाता है। नारायण के माने होते हैं श्वास प्रश्वास प्रक्रिया को योग के रूप में अपने ही शरीर में प्रयुक्त करना। नारायण कवच अथवा नारायण वर्त्य कथन वाले छठे स्कंध के आठवें अध्याय में बयालीस श्लोक हैं। नारायण कवच वस्तुतः प्राणायाम और अपने शरीर विशेषतः दोनों हाथों की दसों अंगुलियों के पोर स्पर्श से शरीर में विद्युत वेग वाली योग साधना स्वतः स्वाभाविक रूप से संपन्न कराते हैं। इन स्तोत्रों का नित्य पाठ व्यक्ति की वाणी में निखार लाता है। 
बीसवीं शताब्दी में भारतीय लोकायतन में पुतली बाई तथा दीवान करमचंद कबा गांधी की संतानों में सबसे छोटे बालक मोहनदास को माता पुतली बाई मोनियां कहती थीं। अपने कनिष्ठ पुत्र के प्रति दीवान करमचंद कबा गांधी से उम्र में 22 वर्ष छोटी पुतली बाई दीवान साहिब की चौथी पत्नी थीं। निरक्षर होने के बावजूद पुतली बाई की श्रौत रामकथा परंपरा का पूर्ण ज्ञान था। माता पुतली बाई ने अपने चतुर्थ तथा सबसे छोटी संतान को मोनियां कह कर संबोधित किया था। महात्मा गांधी की मां पुतली बाई की रामभक्ति का व्यापक प्रभाव महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी पर पड़ा। महात्मा गांधी मन वचन कर्म तीनों को साधने वाला अपनी बात को पूरी शब्द सामर्थ्य से प्रस्तुत करने वाला व्यक्तित्त्व था। ऊपर गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र का उल्लेख हुआ है जिसके निरंतर पाठ ने महामना मदनमोहन मालवीय को अतुल सामर्थ्य दी जिससे उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। इंडिया टुडे ने महाशय केजरीवाल नीत आम आदमी पार्टी के लिये महाशय केजरीवाल के तिरंगे चित्र के साथ अंग्रेजी भाषा के Audacity of AAP कर शीर्षक चुना। Audacity को भारतीय भाषाओं में स्तब्धकारी कहा जा सकता है। संस्कृत शब्द स्तब्ध की व्याख्या गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र के उत्तरांग में कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने अगत्स्य ऋषि द्वारा शाप का वर्णन करते हुए लिखा - तस्मा इमम् शापमदाद साधुरयम् दुरात्मा कृत बुद्धिरथः विप्रावमत्ता विशताम् तमोन्वम् यथा गजः स्तब्धमतिः स एव। इंडिया टुडे के दूरन्दाज उड़ती चिड़िया विज्ञ हिन्दुस्तानी अंग्रेजी अखबार नवीस अरूण पुरी और कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास द्वारा सवा पांच हजार वर्ष पूर्व लिखे गये पंचम वेद महाभारत तथा कृष्ण भक्ति पर उनके ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण में हाथी को स्तब्धमति कहा गया है। उस हाथी को पूर्व जन्म की याद थी। जब नाका गज अरू ग्राह लड़े जल भीतर लड़त लड़त गज हारायण का जो कथन है ग्राह मकर नाका हाथी के पैर को पकड़ कर उसे जल के भीतर खींच रहा था हाथी मृत्युग्रस्त बन रहा था तब उसने पूर्वजन्म की याददाश्त कर गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ किया। सवाल उठता है कि क्या महाशय अरविन्द केजरीवाल स्तब्धमति हैं। स्वयं अरूण पुरी हिन्दुस्तान की उस जाति प्रथा की उपज हैं जिसमें गिरि, गोस्वामी, पुरी, भारती, सरस्वती, नाथ तथा सात तरीके के सन्यास मार्गी हुआ करते हैं जिसे दुनियां के लोग हिन्दू धर्म कहते हैं। गिरि गोस्वामी आदि समूह भले ही वह सन्यासी हो या घर गृहस्थी वाला गुसाईं हिन्दुस्तानी सनातन स्मार्त वैष्णव शैव शाक्त तथा दूसरे मतावलंबी जो अपने आपको सनातन धर्म से पूरी तरह जुड़ा मानने को तैयार नहीं है कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने ऐसे लोगों को गुसाईं या गोस्वामी कहा है जो रीति रिवाजों में अपने आपको सनातन से अलग मानते हैं। यही ध्यान धर्म का मूल है जिसे तिब्बत के हीनयान मार्गी बौद्ध अपनाते हैं और तिब्बत को Autonomus Region of Tibet मानने वाली पेइचिंग की निरीश्वरवादी सरकार Incarnation of Dalai Lama or Reincarnation theory of Communist China through Reincarnation Law. तिब्बत का यह सिद्धांत तिब्बत ही नहीं समूचे हिमालय में विद्यमान है। अफगानिस्तान जिसे संस्कृत वाङमय में उपगंधर्व स्थान कहता है वहां के लोग इस्लाम धर्मावलंबी होगये पर उनमें गंधर्व विद्या अथवा गांधार संस्कृति के चिह्न आज भी विद्यमान हैं। शागत दास गुप्त ने आआपा की स्तब्धकारी मानसिकता के बारे में लिखा Combative CM leads his party in a heady compaignto wrest Punjab and Goa from BJP and Congress. Signalling AAP’s ambitious to emerge as a National Player in 2017. ताजी खबरों के अनुसार क्रिकेटर आशुवक्ता महाशय नवजोत सिंह सिद्धू तथा उनकी विधायक धर्मपत्नी 2013 से आआपा से प्रभावित व्यक्तित्त्व ज्ञात होते हैं। अखबार नवीसों की इस पड़ताल में कोई वास्तविकता हो तो सिद्धू को राज्यसभा की सदस्यता राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किये जाने वाले महत्वपूर्ण सांस्कृतिक साहित्यिक वैज्ञानिक व्यक्तित्त्व जो सक्रिय राजनीति में चुनाव नहीं लड़ते पर जिनकी योग्यता राष्ट्र के लिये परम हितकारी है। पंडित नेहरू ने अराजनीतिक मैथिली शरण गुप्त बालकृष्ण शर्मा नवीन तथा रामधारी सिंह दिनकर जैसे महत्वपूर्ण कवियों को राज्यसभा में नामित किया था। पंडित नेहरू इन तीनों की कविता चाव से सुनना भी पसंद करते थे। तीन महीने पहले नवाजी गयी थी अगर सिद्धू महाशय पंजाब के मुख्यमंत्री आआपा के माध्यम से बनना चाहते तो उन्हें प्रधानमंत्री मोदी जी को साफ बता देना चाहिये था। महाशय सिद्धू के मनोनीत राज्यसभा सदस्यता से छोटी अवधि के अंदर ही त्याग कर पंजाब का शासक बनने की इच्छा थी तो उन्हें राज्यसभा की सदस्यता प्रणव पंड्या की तरह ठुकरा देनी चाहिये थी किन्तु वे ऐसा साहस नहीं कर सके। महाशय केजरीवाल को नेता बनाने में प्रशांत भूषण और राजेन्द्र यादव की भी भूमिका है। यादव मानते थे कि सरकार तो मोदी ही बनायेंगे पर वे महाशय केजरीवाल द्वारा 100 सांसद पहुंचाने का सपना भी देखते थे वास्तविकता में केजरीवाल को केवल चार सांसद मिले। दो वर्ष पहले वे कहते थे वे फ्रांस के नैपोलियन बोनापार्ट नहीं हैं पर उन्हें दीखता है कि पंजाब और गोआ तथा कुछ सीमा तक गुजरात में भी उन्हें पैर फैलाने का अवसर आ सकता है। पंजाब में अकाली दल व अ.भा. कांग्रेस कमेटी ये ही दल मुख्य हैं। पंजाब का हिन्दू मतदाता कांग्रेस व भाजपा में बंटा है नवजोत सिंह सिद्धू जाट सिख हैं। जाट आन्दोलन जाट सिखों तथा मुसलमान जाट सिखों को भी प्रभावित करने ही वाला है। पंजाब में अकाली तथा कांग्रेस मुख्यतया दो दल हैं। केजरीवाल में काशी में नरेन्द्र मोदी के विरूद्ध चुनाव लड़ा सोचा 100 एम.पी. आआपा को मिल गये वे प्रधानमंत्री की कुर्सी हासिल कर लेंगे। इतिहास बार बार दुहराता रहता है बीसवीं शती में भारत में उन्नीसवीं शती में 1869 में जन्मे महात्मा गांधी 1876 में जन्मे गुजराती भाषी शिया मुसलमान मोहम्मद अली जिन्ना तथा 1871 में जन्मे भीमराव रामराव अंबेडकर क्रमशः हिन्दू मुसलमान तथा अछूत नेता थे। महात्मा गांधी को न जिन्ना पसंद करते न बाबा साहेब अंबेडकर। गांधी जिन्ना समकालीन दोनों गुजराती भाषी थे। दोनों वकील थे। महात्मा निर्वैर थे उन्होंने कभी भी जिन्ना अथवा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की कोई नुक्ताचीनी नहीं की। बाबा साहेब महात्मा गांधी से 22 वर्ष छोटे थे उन दोनों में पीढ़ियों का अंतराल था। बाबा साहेब महात्मा गांधी की हरिजन नीति के कटु आलोचक थे। महात्मा ने इसे कभी अन्यथा नहीं लिया। जो पीढ़ी का अंतराल महात्मा जी और बाबा साहेब में था उसका पुनरावलोकन प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी और महाशय अरविन्द केजरीवाल में स्पष्ट दीखता है। शौगत दास गुप्ता लिखते हैं Two years ago Modi called Kejriwal A.K. 47 The Pakistani Agent. Last year Kejriwal called Modi ‘A Psychopath and a Coward. जितनी तिक्तता महाशय केजरीवाल और भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयानों में है वह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और महात्मा में नहीं थी। महात्मा के खिलाफ बाबा साहेब का शाब्दिक हमला इकतरफा था। महात्मा ने कभी भी कोई परूष वाक्य बाबा साहेब के लिये नहीं बोला। आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू को कहा बाबा साहेब भीमराव रामराव अंबेडकर विद्वान हैं कानूनदां हैं उन्हें कानून मंत्री तथा संविधान की जिम्मेदारी दो। पंडित नेहरू को महात्मा ने यह भी कहा कि डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी षडमुखम चेट्टी सरदार बलदेव सिंह को अपने मंत्रिमंडल में सम्मान दो। भारत की आजादी कांग्रेस की बपौती नहीं सभी भारतीयों का उत्सव पर्व है। पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में 6 केबिनेट मंत्री गैर कांग्रेसी थे। यह थी महात्मा गांधी की चिंतन परंपरा। वे शब्द नापतौल कर बोलते वहीे कहते जो खुद कर सकते और यही आन्वीक्षिकी षडविद्या राजनीति कहलाती है। 
महाशय केजरीवाल वाग्युद्ध रत हैं। प्रधानमंत्री ने यदि उन्हें पाक एजेन्ट कहा उन्होंने जवाब में प्रधानमंत्री को कायर कहा जब कि भारत में महात्मा के पश्चात केवल मोदी ही ऐसा राजनेता हुआ है जिसका जीवन आदर्श अर्जुन की तरह ‘प्रतिज्ञे द्वै न दैन्यम् न पलायनम्’ नरेन्द्र मोदी के अनुभव हैं वह देश के गांवों गांवों में घूमे व्यक्ति हैं। उनकी भाषा में ओज है वे धाराप्रवाह बोलते हैं। उनका कहना है केवल चुनावों के वक्त राजनीति शेष समय राष्ट्र नीति पर महाशय केजरीवाल हर बात में युद्धरत रहते दीखते हैं। उन्हें क्या जरूरत थी कि नरेन्द्र मोदी के प्रमाण पत्रों को जाली कहते यह उनका व्यामोह था। उन्हें प्रशांत भूषण सरीखे सुलझे वकील तथा चुनावी रणांगण के विशेषज्ञ राजेन्द्र यादव ने सही रास्ता दिखाया था पर वह महाशय केजरीवाल को स्वीकार्य नहीं हुआ। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचना की। सुप्रीम कोर्ट ने याचना पर विचार करना वाजिब नहीं समझा। शाब्दिक वाग्युद्ध के अलावा वे कानूनी पचड़ों में भी उलझ गये हैं। उनका अनुभव सीमित है उनकी पुस्त ‘स्वराज’ अंग्रेजी हिन्दी दोनों संस्करण पढ़ने में यह प्रतीति होती है कि उनमें वह भाषायी शब्दशक्ति नहीं जो महात्मा गांधी के मूल गुजराती में लिखे हिन्द स्वराज के 20 अध्यायों में है जिसे यूरप के विद्वानों ने अपनी अपनी भाषा में अनुवाद करा कर राय दी कि महात्मा गांधी का हिन्द स्वराज ही यूरप औद्योगिक क्रांति के कुप्रभाव को थाम सकता है। उनका न्यायालय उनसे पूछ रहा है ठुल्ला हुल्ला से उनका क्या तात्पर्य है ? दिल्ली पुलिस के जवान ने उनके ठुल्ला कहने पर आपत्ति की। ठुल्ला डिंगल भाषा तथा हरयाणवी व राजस्थानी देहातों में प्रयुक्त शब्द है जो सुनने वाले को परूष वाक्य लगता है। 
प्रधानमंत्री कार्यालय ने समूचे हिन्दुस्तान में जहां जहां महानगर या नगर निगम आदि हैं वहां भारतीय संविधान संशोधन 74 के अनुरूप महापौर जिसे अंग्रेजी भाषा में मेयर कहते हैं महानगर पालिका या वृहदनगर पालिका या नगर निगम जिस नाम से भी ऐसे शहर पुकारे जाते हैं वहां मेयर का चुनाव नगर क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा सीधे मतदान से कराये जाने की दिषा में बढ़ने का प्रयास है। बहुत से राज्यों में मेयर का चुनाव सीधे नगर मतदाता करते हैं। बहुत राज्यों में नगर महापालिका सभासद मेयर का चुनाव करते हैं। 74वें संविधान संशोधन के अनुसार गांव पंचायत जिला पंचायत ब्लाक कमेटी का संवैधानिक रूतबा संसद तथा राज्या विधानमंडलों के समानांतर संकल्पित हुआ है। घटक राज्य अपनी सत्ता का बंटवारा पंचायती राज से करने से कतरा रहे हैं। पहली जरूरत यह है कि जहां जहां महानगर पालिका नगर निगम अथवा वृहद नगरपालिका क्षेत्र हैं आबादी दस लाख से ज्यादा है उन सबके मेयर का चुनाव नगर के मतदाता करें और मेयर की स्थिति सिटी स्टेट के प्रमुख की तरह हो। पुलिस एक्ट में वृहन् नगर पालिका क्षेत्रों की पुलिस को मेयर के अधिकार में  दिया जाये। नगर क्षेत्र की पुलिस अधिकारियों का थानेदार अथवा कोतवाल स्तर तक का स्थानान्तरण उसी शहर में करने का अधिकार मेयर को मिले। आज भारत के शहरों में जो अपराध वृद्धि होरही है उसे रोकने के लिये मेयर की संख्याओं नगर पालिका को सामर्थ्यवान बनाने की तात्कालिक जरूरत है। प्रदेश सरकार आई सी एस अधिकारियों आई ए एस अधिकारियों म्यूनिसिपल कमिश्नर रखती है उसके मार्फत शासन करती है। जरूरत इस बात की है कि म्यूनिसिपल कमिश्नर मेयर का उत्तरदायी हो। जो 100 स्मार्ट सिटी का संकल्प सरकार ने लिया है उनके मेयर यदि स्मार्ट सिटी की आबादी दस लाख से ज्यादा हो तो सीधे मतदाताओं द्वारा चुना जाये। शहरों की व्यवस्था मेयर के तत्वावधान में ही चले ताकि संविधान संशोधन 74 की मूल भावना का सम्मान हो देश के बड़े शहरों का सुशासन मेयर संपादित हो। 
पहल दिल्ली से की जाये। महाशय केजरीवाल का कथन है कि केन्द्र सरकार उसके रास्ते में रोड़ा अटका रही है। उनका यह भी आरोप है कि दिल्ली नगर निगम जिसके तीन हिस्से किये गये हैं उसमें बोलबाला बीजेपी का है वहां भी महाशय केजरीवाल को भ्रष्टाचार नजर आता है। इसलिये पीएमओ को दिल्ली से ही स्मार्ट सिटी प्रशासन का शिवसंकल्प लेना चाहिये। संविधान संशोधन 74 के परिप्रेक्ष्य में क्या दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन को तीन हिस्से में वाला चाहती है ? इसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट से लेना चाहिये। 
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तीन म्यूनिसिपल कारपोरेशन तथा 62 कस्बे व 158 गांव हैं। 62 कस्बों में एनडीएमसी भी है। एनडीएमसी व दिल्ली कैन्ट सहित वे क्षेत्र जो एनडीएमसी से जुड़े हैं उन्हें छोड़ कर शेष सभी नगर क्षेत्र म्यूनिसिपल कारपोरेशन से जोड़े जाने चाहिये तथा म्यूनिसिपल कारपोरेशन दिल्ली के मेयर का चुनाव सीधे किया जाना चाहिये। केजरीवाल महाशय म्यूनिसिपल कारपोरेशन के मेयर का चुनाव लड़े अगर विजयी होते हैं उन्हें डीएचसी पुलिस का सर्वाधिकार भी दिया जाये पर केवल सेकेन्ड क्लास पुलिस अधिकारी तक आईपीसी अधिकारी यथावत गृह मंत्रालय के अधीन रहे। जिन अधिकारियों को प्रति नियुक्ति पर दिल्ली कारपोरेशन को उपलब्ध किया जाये उनके ऊपर मेयर या महापौर रहे। 1991 में दिल्ली विधानसभा की जो संरचना हुई है वह रद्द कर दी जाये। जहां जहां पर केन्द्रीय सरकार के विभाग हैं वे सभी क्षेत्र एनडीएमएल तथा कैन्ट बोर्ड के साझे संगठन में रहें। जो 158 गांव बचे हैं उनकी पंचायतों का सीधा प्रबंध केन्द्रीय ग्राम विकास मंत्रालय भारत के आदर्श गांव व आदर्श ग्राम पंचायतों के तौर पर स्वयं करे। प्रधानमंत्री का जो शिवसंकल्प है स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट विलेज उसका पहला परीक्षण दिल्ली में ही किया जाये। केजरीवाल महाशय केन्द्र सरकार व प्रधानमंत्री पर आरोप जड़ रहे हैं कि उन्हें अगर काम करने दिया जाता तो वे चोैगुना काम कर सकते हैं। वे पंजाब गोआ गुजरात में भ्रमण कर रहे हैं। पंजाब में उन्हें अपनी सरकार बनाने की पूरी पूरी उम्मीद वैसी ही है जैसी काशी से लोकसभा का चुनाव लड़ते समय 100 लोकसभा सांसद संसद में भेजने की थी तथा प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा थी। महत्वाकांक्षा अथवा दिवास्वप्न देखा जा सकता है पर उसके लिये वाणी का संयम नितांत आवश्यक है। उनको अपने पहले दुश्मन कांग्रेस से अब भय नहीं पर दूसरे दुश्मन भाजपा नेता नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को हर बिला वजह कोसना महाशय केजरीवाल ने अपना नित्य कर्म समझ लिया है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचना पर विचार करने से इन्कार कर दिया है उनसे कहा है उच्च न्यायालय दिल्ली से ही निर्णय ले ऐसी स्थिति में केजरीवाल महाशय को दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन पर ही अपना ध्यान लगाना चाहिये ताकि उन्होंने जो कायदे डेढ़ वर्ष पूर्व दिल्ली के मतदाताओं को किये हैं उन पर वे करीने से आगे बढ़ सकें। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रास्ता बता दिया है कि दिल्ली की लंगड़ी सरकार तथा भारत सरकार के बीच लक्ष्मण रेखा खींचने का कोई इरादा सुप्रीम कोर्ट नहीं रखती। 
पंजाब में सरकार बनाना उनके लिये इतना सरल नहीं जितना वे सोच रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू उन्हें कितना संबल दे पायेंगे यह चुनाव के बीच ही पता चलेगा। वहां प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, अकाल तख्त तथा कांग्रेस के नेता अमृतसर से सांसद कैप्टन अमरेन्द्र सिंह से केजरीवाल महोदय को जूझना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी संयमी व्यक्ति हैं। वे समझकर बोलते हैं। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की राह पर चलने में महाशय केजरीवाल को 20 साल इंतजार करना होगा तब उनका संघर्ष कर्तव्यनिष्ठ नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के बजाय किसी अन्य नेता से होगा। अगर पंजाब गोआ व गुजरात में महाशय केजरीवाल अपना झण्डा गाड़ पाये उन्हें अपनी और अपने प्रशासकों की मर्यादाओं का अगर ध्यान रहा वे आज नहीं कल आने वाले कम से कम दस वर्षों तक अपना अस्तित्व अगर बनाये रख पाये तो संभव है सन 2035 तक उन्हें दिल्लीश्वर बनने का सौभाग्य मिल जाये। अभी वे हाथ पैर ऐसे व्यक्ति के खिलाफ पटक रहे हैं जिस पर कोई दुराचार का आरोप नहीं लगा सकता। पिछले 5116 वर्षों में शक्रप्रस्थ इन्द्रप्रस्थ था आधुनिक दिल्ली या देहली दरबार में अनेकानेक यशस्वी राजाओं ने राज्य किया है। महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास के अनुसार दिल्ली का पहला दरबार धर्मराज युधिष्ठिर ने लगाया। उनके राजसूय यज्ञ में सात लाख लोगों के बैठने खाने हवन करने की व्यवस्था थी। उनकी राजसभा का निर्माण मय दानव ने योगेश्वर वासुदेव श्रीकृष्ण के परामर्शानुसार किया था। मय दानव को खाण्डव वन में दावानल से बचने का उपक्रम कौंतेय अर्जुन का कर्म था। मय अपने त्राता अर्जुन का योगक्षेम देखना चाहता था। उसने जो राजसभा निर्मित की उसमें जल स्थल का भेद पहचानना कठिन था। युधिष्ठिर के पश्चात दिल्ली के नामी शासकों में पृथ्वीराज चौहान उससे पहले दिल्ली के निकट थानेश्वर के राजर्षि हर्ष मुगल बादशाह अकबर हिन्दुस्तान की आजादी के पश्चात पंडित नेहरू आज भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी लोकतांत्रिक प्रमुख हैं। उनका लोकसंग्रह परंपरागत राजशाही के राजाओं सम्राटों के मुकाबले लोकायतन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का मानना है कि वे आलोचनाओं तथा रिपु स्वभाव से पूर्ण पत्थरों की वर्षा का उपयोग आलोचनाओं का पुल बना कर करते हैं। बिहार तथा दिल्ली के विधानसभा चुनावों में महागठबंधन के पुरोधा बाबू नितीश कुमार तथा कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी बिहार में साझा सरकार चला रही हैं। बिहार के मुख्यमंत्री बाबू नितीश कुमार व दिल्ली के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री की कुर्सी के दावेदार हैं। देखते रहिये 2017 के उ.प्र. पंजाब उत्तराखंड गोआ गुजरात के विधानसभा निर्माताओं में किसका पलड़ा भारी रहता है। वास्तविकी भारतीय राजनीतिक रणनीतियां संचालित करने वाले ज्यादा राजनेता क्षत्रप तथा अंग्रेजी भाषा के सुप्रीमो शैली नेतृत्व करने वाले लोग हैं। केजरीवाल उस नेतृत्व मंडल में नवागत हैं। अपने आपको अराजकतावादी घोषित कर चुके हैं। क्या वे भारत में अराजक दस्युधर्मिता फैलाना चाहते हैं ? मुलायम सिंह यादव उ.प्र. में नेताजी संबोधन से अभिव्यक्त होते हैं पर वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस सरीखे नहीं। प्रकाश सिंह बादल डा. फारूख अब्दुल्ला महबूबा मुफ्ती मायावती लालू यादव ममता बनर्जी नवीन पटनायक चन्द्रबाबू नायडू तैलंगाना महाप्रभु के सी के राव शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भारत के प्रधानमंत्री रहे देवगौड़ा एम करूणानिधि जे. जयललिता शरद पवार सुप्रीमो शैली वाले क्षत्रप ज्यादातर अखिल भारतीय नहीं प्रादेशिक हैं। पारिवारिक एकछत्रता कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी में भी विद्यमान है पर वो किसी राज्य तक सीमित नहीं है। सुप्रीमो शैली राजनीतिक रणनीति में संविधान संशोधन 73 व 74 द्वारा नगरपालिकाओं व पंचायतों को जो संवैधानिक स्तर मिला है वह हिन्दुस्तान के बड़े शहरों के मेयरों जो सीधे जनता द्वारा चुने जाने के तरीके से शहरी हालात परिवर्तित हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक मौका दिया है महाशय अरविन्द केजरीवाल को वे दिल्ली के अधूरे मुख्यमंत्री पद के बजाय दिल्ली वृहन् नगर निगम का सवाल उठायें। प्रधानमंत्री से अपेक्षा करें कि वृहन् दिल्ली महानगर निगम को एकीकृत किया जाकर मेयर के अंतर्गत पहला सिटी स्टेट तरीके वाला नगर राज्य कायम करें तथा अपनी आकांक्षाओं की संपूर्ति के बजाये वृहन्महानगर निगम दिल्ली के मेयर का चुनाव लाकर अपना संकल्प पूरा करें। महाशय केजरीवाल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी में बैठने का स्वप्न अपने आपको दूध का धोया सदाचारी तथा जो उनकी हां में हां नहीं मिलाता उसे भ्रष्ट कहने से पहले दिल्ली नगर निगम को भारतीय संविधान संशोधन 74 के तहत भारत का पहला शहर राज्य का आकार दिलाने में अपनी ऊर्जा व्यय करने का प्रयास करें। अगर दिल्ली के मतदाता उन्हें दिल्ली का मेयर मतदाताओं के सीधे मतदान से चुनते हैं उनकी आम आदमी पार्टी अपना आपा नहीं खोयेगी। वे आज जिस राजनीतिक पैंतरेबाजी और स्वयं को अराजक घोषित कर रहे हैं तुलसीदास के लोकतंत्र का सारतत्व एतो मतो हमारो के साथ साथ स्वान्तः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा भाषा निबंध भातनोलि था एवं अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिये तुलसी ने यह भी कहा - वन्दऊं संत असंतन चरना। ग्रियर्सन ने कहा यदि तुलसी यूरप में जन्मे होते उनका साहित्यिक उन्मेष अंग्रेजी कवि और नाटककार शेक्सपियर से काफी ऊंचा होता। 
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