कहीं 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव माया मुहूर्त्त तो नहीं ?
साबा नकवी राजनीतिक विश्लेषिका हैं। उन्होंने टाइम्स आफ इंडिया के एन एपिफेनी आफ आइडियाज संपादकीय पन्ने में शुक्रवार 12 अगस्त 2016 के अंक में अपनी बात को पूरी करते हुए लिखा कि वे 1977 में राजनीतिक चुंबक शक्ति धारी मायावती बहन से उनके मुख्यमंत्री आवास कालिदास मार्ग लखनऊ में मिली थीं। उन्हें बहन मायावती ने साक्षात्कार देने के लिये आमंत्रित किया था। उनके शयन कक्ष में भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव रामराव अंबेडकर का आकर्षक चित्र देख जो 2 दशाब्दी पहले ही जब मायावती बहन को मुख्यमंत्री बनने में राजनीतिक महारत दूरन्देश भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था। साबा नकवी कहती हैं बहन मायावती में चुंबकीय शक्ति है। दलित नेतृत्व को केवल अपना संबल मानने वाली मायावती अपना एकाधिकार समझती हैं। उनका कार्यक्षेत्र असली हिन्दुस्तान है। गुरू शिष्या परंपरा की दूसरी चमकने वाली सितारा अपने गुरू कांशीराम शैली को समर्पित गुरू वत्सला मायावती के अलावा दूसरी गुरू वत्सला नेत्री जयललिता हैं। इन दोनों गुरू वत्सला महिला नेत्रियों में जयललिता गुरू वत्सलता में बहन मायावती से आगे हैं। गुरू वत्सलता के समानांतर पितृ वत्सला महबूबा मुफ्ती इन दोनों गुरू वत्सलताओं के मुकाबले काफी नयी है। तीनों के गुरू पिता इस दुनियां से कूच कर चुके हैं। संप्रति जयललिता व महबूबा मुफ्ती सत्ताधिष्ठान में हैं। बहन मायावती इस इंतजार में हैं कि उनका सत्ता-मुहूर्त 21 मार्च 2017 तक लखनऊ में काबिज हो जाये। नकवी कहती हैं कि सन 2007 में बहन मायावती ने 30.47 प्रतिशत मत पाकर उत्तर प्रदेश विधान सभा में अपने अकेले दम पर बहुमत की ब.स.पा. सरकार गठित कर ली। साबा नकवी के अनुसार अनुसूचित जातियों के 21 प्रतिशत मत तथा हिन्द के मुख्य अल्पसंख्यक समाज मुसलमानों के 19 प्रतिशत कुल मिला कर 40 प्रतिशत मतदाता उनके वोट बैंक हैं। ध्यान देने योग्य बिन्दु यह है कि जब भारत विभाजन हुआ भारत में मुस्लिम आबादी 23 प्रतिशत थी। साबा नकवी की सोच है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी 19 प्रतिशत है। इसी अंकगणित उ.प्र. के इस्लाम धर्मावलंबियों के दो विचार पोखर बरेलवी इस्लामिक विचार पोखर तथा देवबन्दी इस्लाम विचार पोखर तथा हैदराबाद का आल इंडिया एम.आई.एम. मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण करने की दिशा में अग्रसर है। महाशया नकवी ने अपने विश्लेषण में बहन मायावती को चुंबकीय शक्तित्व स्त्रोत बताया है। स्वयं मायावती भी मानती हैं कि उन्हें उनके प्रशंसक देवी का अवतार मानते हैं। बहन मायावती का प्रभाव क्षेत्र केवल हिन्द स्थान है, शेष हरयाणा पंजाब गुजरात महाराष्ट्र कर्णाटक तमिलनाडु केरल आंध्र तैलंगाना उड़ीसा पश्चिम बंग असम तथा बिहार व पूर्वांचल के दूसरे भारत गण राज्य के घटक हिन्दुस्तान नहीं कहलाते। केवल गंगा यमुना का दोआब ही हिन्दुस्तान के नाम से पहचान बनाये हुए है यहां तक कि मध्य प्रदेश के विभिन्न इलाके भी अपनी अलग इस हिन्दुस्तान में हिन्दू हो मुसलमान हो अवधी भाषा में तुलसीदास ने स्वांतः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा लिखा। तुलसी फकीर थे याने मजहब उनके लिये राम की तरफ मर्यादा पुरूषोत्तम नहीं केवल सामान्य जीवन विधा थी। अवधी भाषा में दूसरा महत्वपूर्ण काव्य मलिक मोहम्मद जायसी ने फारसी लिपि और अवधी भाषा में लिखा। उन्होंने कहा - जायस नगर धरम अस्थानू जहां जाय कवि कीन्ह बखानू। उन्होंने अल्लाह ईश्वर परमात्मा आप जिस नाम से पुकारो यह भी लिखा - विधना के मारग हैं तेते सरग नखत तन रोआं जेते। रसखान ने कृष्ण भक्ति को संवारते हुए कविता रची। वे कहते हैं - मानुष हों तो वही रसखान बसों ब्रज गोकुल गांव के ग्वारन याहि जो पशु हों तो कहा वसु मेरो चरों नित नंद की धेनु मझारन। कंपनी बहादुर के शासन के आने के पश्चात हिन्द में हिन्दू मुस्लिम दंगों का सिलसिला शुरू हुआ। बांटो और राज करो यह अंग्रेजी शासन की रीतिनीति थी। भारत विभाजन के पूर्व तथा भारत विभाजन के पश्चात भी जहां जहां दंगे हुए उसमें एक पक्ष मुस्लिम तथा दूसरा पक्ष खटिक वाल्मीकि पासवान वगैरह हुआ करता था। इसलिये 21 प्रतिशत दलित और 19 प्रतिशत मुसलमान मिल कर जिसे साबा नकवी दलित मुस्लिम कान्सोलिडेशन कह रही हैं। अवधी भाषा में तुलसी रामचरित मानस का मनोयोग पूर्वक केवल संस्कृत भाषा न जानने वाले वामन ठाकुर कुर्मी लोध ही नहीं आज दलित नाम से पहचाने जाने वाले अनुसूचित जाति के बहुसंख्यक लोगों का रामचरित मानस कंठाग्र है। वे रामचरित मानस से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करते हैं। गीताप्रेस के रामचरित मानस हनुमान चालीसा का बहुत बड़ा ग्राहक समूह उत्तर प्रदेश सहित समूचे भारत का दलित समाज है। रामदास अठावले केन्द्र में मंत्री हैं। बाबा साहेब अंबेडकर सिद्धांत के अनुयायी हैं। उन्होंने बहन मायावती को ललकारा है क्यों न बौद्ध धर्म स्वीकारतीं ? साबा नकवी के अनुसार उ.प्र. में 21 प्रतिशत दलित हैं जिन्हें सरकारी परिभाषा में अनुसूचित जाति या अंग्रेजी में शेड्यूल्ड कास्ट नाम से पुकारा जाता है। इस सारे समाज में पश्चिमी उ.प्र. में जाटव संज्ञा से जाने जाने वाले लोगों में से शत प्रतिशत नहीं तो 80 प्रतिशत जाटव मायावती बहन के अंतरंग अनुयायी हैं। यहां वाल्मीकियों सहित अनुसूचित जातियों के जो दूसरे समाज हैं वे पूरे मनोयोग से बहन मायावती का जाटव नेतृत्व नहीं स्वीकारते इसलिये यह अनुमान लगाना अतिशयोक्ति ही कहलायेगी कि उ.प्र. का संपूर्ण दलित समाज जो जनसंख्या का 21 प्रतिशत है वह मनसा वाचा कर्मणा पूरी तरह बहन मायावती को समर्पित है। दूसरी ओर जब हम जयललिता की गुरूवत्सलता और तमिलनाडु में जयललिता की लोकप्रियता का आकलन करें तथा जयललिता व बहन मायावती की वक्तृत्व शक्ति का मूल्यांकन करें जयललिता की शब्द शक्ति कबीरदास की शक्ति को चरितार्थ करती हैै। कबीर ने कहा था - भगती उपजी द्रविड़ देश। जयललिता की भाषा में ओज है परंतु बहन मायावती की भाषा में आक्रोश है। साबा नकवी महाशया ने फरमाया है - मायावती के राज में ठाकुर लोगों को जेल के सीखचों के भीतर बन्द किया जाता है। ठाकुर मतदाता यद्यपि उ.प्र. में केवल साढ़े साठ प्रतिशत हैं परंतु ठाकुर राजनीतिक रणनीति के अनुकूल यादवों को छोड़ कर खस राजपूत लोध कुर्मी भी अपने आपको राजपूत श्रेणी में गिनते हैं। यद्यपि ठाकुर लोग सवर्ण माने जाते हैं उनका चन्द्रवंशी अथवा सूर्यवंशी दबदबा अपने आपको राजपूत ठाकुर मानने वाले वर्तमान काल में ओबीसी अदर बैकवर्ड क्लासेज की सीमा में गिने जाते हैं जिन्हें मंडल कमीशन ने अहीरों यादवों सहित आबादी का 54 प्रतिशत मात्र माना तथा मंडल कमीशन की संस्तुतियों को क्रियात्मक रूप देते हुए राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मार्ग प्रशस्त कर दिया जिससे उ.प्र. व बिहार में यादव क्षत्रप मुलायम सिंह यादव व लालू प्रसाद यादव ने सुप्रीमो शैली के क्षत्रप बन कर अपने अपने राजपरिवारों के लिये स्थान सुनिश्चित कर दिया। दलित सुप्रीमो पर अपना एकाधिकार बताने वाली मायावती के दलित मुस्लिम एक्य की भांति मुलायम सिंह यादव व लालू प्रसाद यादव की यादव मुस्लिम युति ने उ.प्र. व बिहार की ओबीसी राजनीति में अपना ठिकाना सुनिश्चित कर लिया। लालू प्रसाद यादव कहते हैं कि भारत के प्रथम ओबीसी प्रधानमंत्री देवगौड़ा हैं। लालू प्रसाद यादव नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को पिछड़े समाज से आया हुआ नेतृत्व स्वीकारने के लिये तत्पर नहीं दीखते। 2014 के लोकसभा निर्वाचन में बहन मायावती ने 20 प्रतिशत मत प्राप्त किये पर लोकसभा में वे अपना एक भी प्रतिनिधि नहीं भेज पायीं। दूसरी ओर समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव अपने राजमहल सैफई से जुड़े पांच व्यक्तियों को स्वयं सहित लोकसभा में दाखिल कर लिया। सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस अमेठी व रायबरेली तक सिमट गयीं। अनुप्रिया पटेल सहित भारतीय जनता पार्टी व सहयोगियों के 73 सांसद लोकसभा में पहुंच गये तथा लोकसभा निर्वाचन में भाजपा को 42 प्रतिशत मत प्राप्त हुए जबकि सामान्य निर्वाचन में चुनावी संघर्ष दो के बजाय चार दलों में था, सपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और एनडीए। विधानसभा चुनावों में भी गौरक्षक अभियान तथा दलित उत्पीड़न की घटनाओं के बावजूद विधानसभा चुनावों में विशेष तौर से उ.प्र. के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सत्ता में होने के कारण घाटे में रह सकती है। कांग्रेस अपनी ताकत बढ़ाने के लिये पंडित नेहरू व इंदिरा गांधी के राज्य काल में प्रमुख भूमिका निर्वाह करने वाले उमाशंकर दीक्षित की पुत्रवधू शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार इसलिये बना रही है क्योंकि वे ब्राह्मण वधू हैं पर सोनिया गांधी के यह मालूम होगा कि शीला पंजाबी खत्री है ब्राह्मण नहीं। मतदाताओं का बड़ा वर्ग अब पंडित उमाशंकर दीक्षित को भूल चुका है फिर भी अगर कुछ ब्राह्मण मत शीला दीक्षित को मिल भी गये कांग्रेस उ.प्र. में अकेले सरकार गठन करने की स्थिति में नहीं आने वाली है। यदि नरेन्द्र मोदी व बीजेपी गौरक्षकों व गुजरात सहित अनेक राज्यों में दलित उत्पीड़न करने वालों पर सटीक राजनीतिक कार्यवाही कर सके और बहन मायावती की दलित मुस्लिम युति पर ग्रहण लग गया मुस्लिम वोट स.पा. कांग्रेस एमआईओ तथा बसपा में बंट गये चौतरफा संघर्ष में भारतीय जनात पार्टी दलबदलुओं के सहयोग से लखनऊ में सरकार उसी तरह बना सकती है जिस तरह उसने सोनोवाल के नेतृत्व में असम में कांग्रेस को सत्ताच्युत कर अपना झंडा गाड़ डाला।
उत्तर प्रदेश पंजाब गोआ उत्तराखंड राज्यों में वर्ष 2007 के प्रारंभिक महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन प्रदेशों में से गोआ और पंजाब में आआपा अपनी पूरी ताकत लगा रही है। पंजाब में अकाली दल भाजपा युति को कैप्टेन अमरेन्द्र सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब कांग्रेस का सामना करना है। चुनाव दो पक्षीय न होकर आआपा के मैदान में आने से तिकोना संघर्ष होगया है। आआपा और कांग्रेस अकाली दल बादल को सत्ताच्युत करनेे के लिये एड़ी चोटी का पसीना बहा रहे हैं। आआपा को सामान्य चुनाव में पंजाब से चार लोकसभा सदस्यों को लोकसभा पहुंचाया। अकाली दल और पंजाब कांग्रेस का अपनी अपनी सरकार बनाने चुनावों को अपने पक्ष में मोड़ने के उपाय होरहे हैं। कैप्टेन अमरेन्द्र सिंह अकाली दल अध्यक्ष तथा उप मुख्यमंत्री पर मत ध्रुवीकरण का रास्ता अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। आआपा भी कितने पानी में है यहां जूझ रहा है। आआपा आपसी संघर्ष अगर चुनाव में बहुमत पागये तो सत्ताधीश कौन होगा ? क्या आआपा संयोजक दिल्ली के मुख्यमंत्री पंजाब में सत्ताधिष्ठान पर कब्जा कर पायेंगे। नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी विधायक पत्नी की क्या भूमिका होगी ये सारे सवाल भविष्य के गर्भ में हैं। गोआ पंजाब उत्तराखंड उ.प्र. सहित जहां जहां विधानसभा निर्वाचन अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक संपन्न होने वाले हैं। चुनावी हलचलों के थमने व राज्यों में विजयी दलों की सरकार बनने के पश्चात भारत के प्रधानमंत्री महोदय को हिन्द स्वराज में महात्मा गांधी द्वारा हिन्दू मुसलमान वैर गौरक्षा तथा दलित उत्पीड़न की रोकथाम के लिये शिवसंकल्प लेना ही चाहिये। गौरक्षा तथा गोरक्षक के वेष में भारत भर में जो लोग अशांति के लिये पुरजोर कोशिश कर रहे हैं उनसे यह मालूम किया जाये कि क्या 1. क्या वे जरसी गायों का दूध उपयोग कर रहे हैं ? क्या संकर गायों के दूध से अपने परिवार की दूध जरूरत संपन्न कर रहे हैं ? 2. यदि वे गोपालक भी हैं तो किन किन भारतीय नस्लों की गायें उनकी गोशाला में पल रही हैं ? 3. क्या वे गौ (भारतीय नस्ल की गायों की तरह) सेवा के समानांतर स्वयं भी गाय की तरह शाकाहारी हैं ? 4. क्या उनके अपने परिवार में सभी लोग शाकाहारी निरामिष हैं ? या कुछ लोग अंडा मुर्गी मांस का सेवन करते हैं ? 5. क्या गोसेवक महानुभाव दुग्ध संघ अथवा दुग्ध आपूर्ति करने वाले किसी संगठन या व्यक्तिगत उद्यमी से जरसी गाय अथवा संकर गाय का दूध अपने परिवार के उपयोग के लिये लेते हैं ? 6. क्या गोसेवक किसी गोसेवा संस्था से संबद्ध है ? 7. क्या उन्हें मालूम है कि पंक्तिभेद जिसे अंग्रेजी भाषा में Discrimination कहते हैं वे पंक्तिभेद को बढ़ावा देते हैं या स्वयं पंक्तिभेद करते हैं ? क्या उन्हें पता है सनातन धर्मशास्त्र पंक्तिभेद को महापातक मानता है और सलाह देता है ‘पंक्तिभेदम् न कर्त्तव्यम् न गच्छेत् रौरवम् महत्’ अगर आपको रौरव नरक यातना नहीं सहनी हो पंक्तिभेद न करें।
जामनगर कृषि विश्वविद्यालय ने गिर के जंगलों में घास चरने वाली गायों के गोमूत्र का परीक्षण किया है। भारत सरकार को यह विचार करना चाहिये कि वर्तमान में देश में 60 नस्ल की देसी गायों में से केवल 24 नस्ल की गायें ही बची हैं। इन गायों के गोमूत्र गोमय या गोबर गोदुग्ध गोदधि गोघृृत का प्रयोगशाला परीक्षण करने के लिये प्रत्येक राज्य के कृषि पशु महाविद्यालयों को प्रेरित करना चाहिये। भावनगर कृषि महाविद्यालय को केन्द्रीय कृषि व पशु विश्वविद्यालय का दर्जा देकर केवल देसी गायों के गोमूत्र ही नहीं गोमय गोदुग्ध गोदधि गोघृत भी लैबोरेटरी में परीक्षित किय जायें। आज भारत में श्वेत क्रांति के नाम पर जरसी गायें तथा संकर गायों की दिन दूनी रात चौगुनी बढ़त होरही है। यूरप व अमरीका में मैडकाउ पगली गायों का गोमांस कहर ढा चुका है। अब अमरीकी व यूरोपीय गोमांस भोजी लोग मैडकाउ प्रकरण को भूल रहे हैं। हिन्दुस्तान में भी जरसी गायों का दूध तथा अन्य गोउत्पादों व गोमूत्र तथा गोबर की पड़ताल करने की तात्कालिक जरूरत है। नीलगाय प्रकरण नीलगायों द्वारा फसल नुकसान संबंधी खबरें भी यत्र तत्र हैं। अथर्ववेद का कहना है कि सटीक पंचगव्य के लिये गोमूत्रम् नीलवर्णाया कृष्णाया गोमयम् स्मृतम् दुग्धम् तु ताम्रवर्णाया श्वेतायाः दधि संस्मरेत घृतम् तु कपिलायाः सम्मेलयेत कुशोदकम्। अथर्ववेद विधि से पंचगव्य निर्माण मनुष्य कायाओं को निरोग बनाने की क्षमता रखता है इसलिये गौरक्षा गोकुशी तथा गोमांस सेवन इन सभी मामलों को बहुसंख्यक अल्पसंख्यक विवाद का मुद्दा न बना कर स्वस्थ समाज जिसमें एचआईवी एवं कैंसर सरीखे रोगों की रोकथाम में पंचगव्य तथा पंचामृत अत्यंत उपादेय हो सकते हैं। आसेतु हिमाचल दलित स्थितियों तथा उत्पीड़न एवं दलितों का व्यापक सामाजिक सम्मान कहां कितना है ? निर्धन दलितों को उनके पारंपरिक हस्तकौशल को संवर्धित करने उनकी आर्थिक स्थिति सुधारे जाने तथा उनमें आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है। संपन्न व्यक्ति तथाकथित सवर्ण हो मंडल आयोग संस्तुतियों का लाभग्राही हो अथवा क्रीमीलेयर परिधि में आगणित पिछड़ा वर्ग हो या सत्ता व धन संपन्न दलित अथवा आदिम जाति से हो वह दूरदराज देहात के विपन्न यहां तक कि शहरों की झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले दलित का योगक्षेम सहायक नहीं उसे अपनी ही समृद्धि घेरा है। संपन्न समाज में भी कुछ लोग करूणा परायण होते हैं जरूरत इस बात की है कि ऐसे लोगों को असरकारी राष्ट्रीय राजनीति को सही परिप्रेक्ष्य में समझने वाले पर स्वयं राजनीतिक भंवर में न घुसने के इच्छुक विचारशील लोगों का गांव मुहल्ला नगर क्षेत्र पंचायत जिला पंचायत तथा राज्य ‘न मे द्वेष्योस्ति न प्रियः’ भाव का मनोग्राही व्यक्तित्त्व मिलजुल कर अंबुदसमान श्रंखला से जुड़ सकता है। ऐसी अनुकूल स्थितियां गाय और दलित पक्षों के लिये प्रस्तुत करने के लिये आवश्यक है कि प्रधानमंत्री महोदय सर्वदलीय विचार पोखर के माध्यम से भारत में आज दलित की वास्तविकता तथा गाय संबंधी सभी पहलुओं में सही सही स्थिति का आकलन तथा राजनैतिक पक्षों की अवधारणाओं की समीक्षा करने की जरूरत है। ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसरों ने बीफ अथवा गौमांस उनके नित्य भोजन का हिस्सा था। हिन्दुस्तानी मुसलमान यूरोपवासियों की तरह नित्य बीफ भोजी नहीं है। आज जो गोकुशी गोहत्या तथा गोरक्षा का नया पचड़ा उठा है उसके पीछे अंग्रेजी राज की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति थी इसलिये गोपालन को सटीक समझने के लिये महात्मा गांधी की गोरक्षा नीति के व्याख्याकार ख्रिस्ती धर्मावलंबी प्रोफेसर जे.सी. कुमारप्पा की गाय संबंधी अवधारणा को भारतीय संदर्भ में अध्ययन करने की जरूरत है। भारत के मौजूदा दो आंतरिक संकट गाय व दलित को लेकर है। प्रधानमंत्री इन दोनों प्रसंगों पर अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं। तात्कालिक जरूरत इस बात की है कि सभी राजनीतिक दल तथा देश के बहुसंख्यक अल्पसंख्यक धार्मिक तथा भाषायी समाज भारतीय राष्ट्र राज्य हित में मिल बैठ कर इन दोनों सरोकारों पर आम राय बनाने और राष्ट्रीय एकता तथा राष्ट्रीय हित साधक मार्ग का निर्धारण करने आगे बढ़ें।
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