क्या भारत की शतस्मार्ट सिटी शिवसंकल्प बहुल संस्कृति वाले हिंदुस्तान का कायाकल्प कर सकती है?
टाइम्स आफ इंडिया के विचार कोश पन्ना संपादकीय स्तंभ में जहां एक ओर संपादकीय शीर्षक डार्क क्लाशस गैदर पाकिस्तान व कश्मीर को लेकर भारत सरकार को तुरंत क्या करना चाहिये इस पर हिन्दुस्तान के सबसे पुराने अंग्रेजी अखबार ने अपना मत प्रकट किया है। मुंबई से शुरू हुए इस अखबार ने आज का सोचने योग्य विचार संयुक्त राज्य अमरीकी लेखक मार्क ओस्ट्रोफक्सी को उद्धृत करते हुए लिखा - रोज सुहावने मौके आते हैं आपको जागरूक रह कर अपना कर्म कौशल दिखाना है। हिन्द की श्रीमद्भगवद्गीता इसको ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ कहती है। जब उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया ने बेनेट कोलमैन कंपनी के इस अखबार को लिया तो अपनी कन्या रमा और दामाद श्रेयांस प्रसाद जैन को अखबार सौंप डाला। इस अखबार की ख्याति बढ़ाने वाले संपादक लोगों में खुशवंत सिंह तथा गिरलाल जैन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्वयं श्रेयांस प्रसाद तथा रमा ने अखबार को अंग्रेजियत से हिन्दुस्तानियत की तरफ मोड़ डाला। श्रेयांस प्रसाद जैन पर मालिनी नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में सिंह शावकों के साथ बचपन में खेल करने वाले भरत (दुष्यंत व शकुंतला के पुत्र) का नाम महर्षि कण्व ने भरत इसलिये रखा। भरत संतान तो दुष्यंत-शकुंतला की थी पर शकुंतला सहित भरत के भरण पोषण का उत्तरदायित्त्व निर्वाह करने वाले यती कण्व ने ‘भरस्व इति भरतः’ कर्म तो किसी अन्य का है चाहे वह शकुंतला के पिता विश्वामित्र का हो अथवा भरत के पिता दुष्यंत का। इस प्रसंग को कण्व ने सहनशीलता के उच्चतम आदर्श से देखा। टाइम्स आफ इंडिया के बोलता हुआ पेड़ स्तंभ में मौलाना वहाउद्दीन खां तथा भीड़तंत्र को जिसे हम भेड़िया धसान भी कह सकते हैं, मनमोहन बहादुर सेवानिवृत्त वायुसेना मार्शल ने अराजकता की बढ़त पर नैतिक रोकथाम की संकल्पना की है। स्वयं को अराजक मानने वाले तथा राजनैतिक आदर्श नैपोलियन बोनापार्ट का उदाहरण देने वाले विश्वविजय की कामना न करने वाले अरविन्द केजरीवाल महाशय दिल्ली की आधी अधूरी विधानसभा के मार्फत शासन की बागडोर थामने वाले मुख्यमंत्री के समानांतर आआपा पर संयोजक भी हैं। आआपा पर उनका तथा उनके अभिन्न सहयोगी उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का स्वत्वाधिकार है। दिल्ली का लंगड़़ी सत्ता के समानांतर गोआ पंजाब तथा गुजरात में भी अपने आआपा के पांव पसारने का उपक्रम कर डाला है। पहले मौलाना द्वारा उठाये ‘फ्रीडाम’ स्वातंत्र्य वाक् स्वातंत्र्य कर्म स्वातंत्र्य विचार स्वातंत्र्य पर आम के पेड़ पर पत्थर मार कर वृक्ष बदले में मीठे फल देता है पत्थर मार सहता है यह फलदार वृक्ष की सहन करने वाली भावना है। सहना कम खाना गम खाना मामूली देहाती मुहावरा है। स्वतंत्रता का वास्तविक आनंद तो तभी लिया जा सकता है जब व्यक्ति स्वातंत्र्य के समानांतर मर्यादा का उल्लंघन न करे। शहरी हिन्दुस्तान जिसकी आबादी दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है भीड़तंत्र का अखाड़ा बनता जारहा है। हिन्दुस्तान में सन्यासियों के हजारों अखाड़े हैं हर सन्यासी स्वयं को सन्यास मर्यादाओं के अंदर रह कर शहरी समाज के भीड़तंत्र को सन्मार्ग दिखाने वाला भक्ति ज्ञान वैराग्य का अद्भुत समागम है।
मनमोहन बहादुर सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल हैं एवं आकाश युद्ध विज्ञानी रहे हैं। उन्होंने Deterance Theory निरोध निवृत्ति मार्गी दृष्टिकोण को मध्य बिन्दु बनाते हुए अपने महत्वशील स्तंभ में व्यक्त किया कि भारत को अराजक होने से कैसे बचाया जा सकता है क्योंकि भारत शहरी भेड़िया धसान वाले भीड़तंत्र का अनुयायी बन रहा है। यह संयोग की बात है कि भारत के प्रधानमंत्री देश के 100 शहरों के स्मार्ट सिटी का रूतबा देकर हिन्द की शहरी जनता का रहनसहन का दर्जा उठाने के साथ साथ Rule of the Mob. के बजाय Rule of the Law का अनुसरण करने वाले 100 आदर्श स्मार्ट सिटी स्थापित कर हिन्द के शहरी जीवन को गतिशीलता देने के प्रबल पक्षधर हैं उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने Smart City Picks Trail Global Peers शीर्षक से नौ अगस्त 2016 के अंक में दुनियां के नौ शहरों और हिन्द के तीन शहरों अजमेर इलाहाबाद तथा विशाखापत्तनम भारत का केन्द्रवर्ती शहर इलाहाबाद पश्चिम भारत का अजमेर शहर पश्चिमी भारत के राजस्थान का अजमेर शहर तथा विशाखापत्तनम जिनकी आबादी क्रमशः 11 लाख, 5 लाख चालीस हजार तथा सत्रह लाख है प्रतिव्यक्ति जी डी पी एक हजार डालर इलाहाबाद अजमेर दोनों तथा विशाखापत्तनम की 2000 डालर से ज्यादा है। प्रत्येक घर में पानी का पाइप क्रमशः इन तीनों शहरों में 73.01 प्रतिशत तथा 80.03 प्रतिशत तथा शौचालय युक्त घर क्रमशः 78 प्रतिशत 71 प्रतिशत तथा 80.03 प्रतिशत है। भारत के इन तीन महत्वपूर्ण शहरों के समूहों को विश्व के नौ ऐसे महत्वपूर्ण शहरों के परिप्रेक्ष्य में देखें जिनमें मिस्त्र के एलेक्जेंडिरिया आबादी चालीस लाख प्रति व्यक्ति मेटरो जीडीपी 2680 डालर प्रत्येक घर में शोधित जल 96.05 प्रतिशत घर में ही शौचालय सूचना अप्राप्त कोलंबिया के मेडिलिन शहर में आबादी 24 लाख मेटरो जीडीपी 5940 डालर शोधित जल 9003 घरों में शौचालय 99 प्रतिशत घरों में कासाब्लांका मोरक्को में क्रमशः 40 लाख 5400 डालर 83.2 प्रतिशत 97.1 प्रतिशत डरबन दक्षिण अफ्रीका क्रमशः 35 लाख 12884 डालर 82.5 प्रतिशत 94 प्रतिशत केपटाउन द. अफ्रीका 41 लाख 14086 डालर 87.8 प्रतिशत 82.2 प्रतिशत सल्वाडोर ब्राजील 38 लाख 6000 डालर 98.9 प्रतिशत 98.4 प्रतिशत रिसाइफ ब्राजील 39 लाख 9003 डालर 93.3 प्रतिशत 98.6 प्रतिशत शान्टउ चीन 53 लाख 4150 डालर। अंतिम दोनों सूचनायें अनुपलब्ध तथा शौचालय सूचना अप्राप्त। उक्त सूचनाओं का आधार Report on building Smart City in India है। भारत का इलाहाबाद शहर गंगा घाटी के काशी के पश्चात एक महत्वपूर्ण शहर है। यहां हर बारहवें वर्ष कुंभ हुआ करता है जिसमें करोड़ों भारतवासी सम्मिलित होते हैं। कुंभ का पर्व मकर के सूर्य - सूर्य के उत्तरायण में जाने वाले महीने को हिन्दुस्तानी माघ कहते हैं। माघ महीने की अमावस्या के दिन अमांत पर्व में कुंभ स्नान का प्रावधान है। इलाहाबाद में माघ महीने की अमावस को मौनी अमावस भी कहते हैं। चीन ताइवान तथा सिंगापुर जहां के ज्यादातर लोगों की मातृभाषा मंदारिन है वे अमांत पर्व को अपना नया वर्ष का पहला दिन मानते हैं। यद्यपि कम्यूनिस्ट चीन के प्रभावशाली नेता व चीन को साम्यवादी दृष्टिकोण से संचालित करने वाले महानुभाव माओत्से दुंग ने सन 1949 में सोवियत रूस (जो सन 1991 में बिखर गया अब जिसका प्रमुख घटक रूस है।) का अनुकरण करते हुए चीन के राष्ट्रीय कैलेंडर मौनी अमावस्या का अमांत पर्व त्याग कर 15 अक्टूबर 1582 से जूलियन कैलेंडर के बदले ग्रेग्रेरियन कैलेंडर घोषित कर डाला पर चीन की राष्ट्रवादी सांस्कृतिकता ने 67 वर्ष के अंतराल के पश्चात अमांत पर्व का अपना नया राष्ट्रीय वर्ष का पहला दिन मौनी अमावस्या 8 फरवरी 2016 के दिन उत्साहपूर्वक मनाया। माओ राज में चीन के लोग शासक के डर से चीनी मंदारिन भाषियों के साल का पहला दिन मौनी अमावस के अमांत पर्व में खुले आम मनाने से डरते थे। 8 फरवरी 2016 के दिन मौनी अमावस थी। अमांत पर्व को चीनवासियों ने साढ़े छः दशक बाद उत्साहपूर्वक मनाया। चीन के लोग क्षीरसागर मंथन तथा अमृत प्राप्ति के पर्व के रूप में माघी अमावस या मौनी अमावस का अमांत पर्व अपने कैलेंडर का पहला दिन मानते हैं। इस दिन का संबंध अमृत प्राप्ति से है। ताइवान सहित चीन की सांस्कृतिक राष्ट्रीयता ने नयी अंगड़ाई ली है चीन के निरीश्वरवादी शास्ताओं ने यह महसूस कर लिया है कि वे राष्ट्रीयता के पर्व अमांत पर्व को ज्यादा दिन नहीं रोक सकते। भारत के इलाहाबाद शहर की मौनी अमावस का तथा चीन के राष्ट्रीय वर्ष के पहले दिन का अत्यंत महत्व है। इलाहाबाद को भारत के 100 स्मार्ट शहरों में ओडिसा के जगन्नाथपुरी के पश्चात अंतर्राष्ट्रीय महत्व दिये जाने की तात्कालिक जरूरत है। दुनिया भर में मंदारिन बोलने व लिखने वाले लोगों की जनसंख्या डेढ़ अरब से ज्यादा है। मंदारिन भाषियों के लिये मौनी अमावस के अमांत पर्व का राष्ट्रीय महत्व है इसलिये भारत सरकार को जगन्नाथपुरी के साथ साथ इलाहाबाद नगरपालिकाओं के महापौर का निर्वाचन सीधे शहर की जनता के मतदाताओं द्वारा संपन्न करने हेतु दोनों राज्यों के घटक सरकारों को प्रेरित करना चाहिये तथा संविधान संशोधन 73 व 74 के संदर्भ में जगन्नाथपुरी व इलाहाबाद के नगरनिगमों को नगर राज्य का दर्जा देनेे के लिये प्रोत्साहित करना इसलिये जरूरी है कि देश में भीड़तंत्र व अराजकता की स्थिति न आ सके। मनमोहन बहादुर ने शहरी भारत की दुर्दशा तथा भीड़तंत्र से भयार्त होकर महाशय अरविन्द केजरीवाल द्वारा स्वयं को अराजकतावादी घोषित किया गया है। अराजकता का भय जनसामान्य में व्याप्त न हो इसके लिये जरूरी है कि स्मार्ट शहरों को अराजक होने से बचाया जाये। लोगों को उनकी क्षमता तथा योग्यता के मुताबिक रोजगार मिले। संपन्न तथा विपन्न में आमदनी का अंतर पाटा जाये यह तभी संभव है जब व्यक्ति में करूणा भावना उदित हो। हिन्दुस्तान की ग्रामीण आबादी निरंतर सिकुड़ती जारही है जिसका एक मुख्य कारण खेतीबाड़ी के समानांतर जब तक गांवों में ग्रामीण उद्योगों का श्रंखला कायम नहीं की जायेगी। गांवों से रोजगार की खोज, सरकारी तथा कारपोरेट नौकरी शहरों में करने वाले मूलतः ग्रामवासियों की एक बहुत बड़ी संख्या सेवानिवृत्ति के पश्चात सेहत तथा अपने बच्चों की मानक स्तर की शिक्षा दीक्षा के लिये गांव छोड़ कर शहर की तरफ पलायन करते जारहे हैं इसलिये गांवों में रहने वाले ग्रामोद्योगों के द्वारा परिवार की आमदनी बढ़ाने के इच्छुक लोगों को प्रोत्साहित करना होगा। देश के जो परंपरागत उद्योग हैं उनमें कई कारणों से ह्रास होरहा है। गुजरात में दलित अशांति के कारणों को गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है। कुओं से पानी निकालने, मंदिरों में दलितों के प्रवेश, स्कूलों में मध्याह्न भोजन, दायों द्वारा दलित महिला की प्रसूति सेवा से कतराना रोकना होगा। समाज के उस वर्ग को जो वानप्रस्थी अथवा सन्यस्त जीवन जीने का उत्सुक है उनके द्वारा भारत सेवक समाज एवं भारत साधु समाज की रीति नीतियों के मुताबिक समाज में अंबुुद समान व्यक्तित्त्व के लोगों की श्रंखला स्थापित करनी होगी जिसमें अधिकारों के समानांतर सेवा व कर्तव्यपरायणता के प्रति नैतिक आकर्षण हो। यह तभी संभव होगा जब एक उम्र के बाद लोग जनसेवा की ओर आकर्षित हों। जिस तरह सरकारी अथवा प्राइवेट नौकरी के पश्चात सेवा करने वाला व्यक्ति सेवानिवृत्त माना जाता है उसी तरह राजनीतिक कर्तव्यपरायणता के लिये चुनावी राजनीति में लगातार या अलग अलग अवधियों में नगर पंचायत, नगर निगम, ग्राम पंचायत, जिला पंचायत आदि पंचायत स्तर में लोकप्रतिनिधित्व 15 वर्ष से ज्यादा अवधी के लिये न हो। भारतीय संघ के घटक राज्यों के विधान मंडलों में फिर लगातार या कुल मिला कर पंद्रह वर्ष तथा केन्द्र में लोकसभा राज्यसभा सदस्यता सहित राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति पदों में अखिल भारतीय स्तर पर कुल मिला कर फिर पंद्रह वर्ष याने जीवन में निर्वाचित पदों में कोई व्यक्ति पंचायत राज्य विधान मंडल संसद तथा उच्चस्थ निर्वाचित पदों पर कुल मिला कर कोई व्यक्ति 45 वर्ष से ज्यादा पदासीन न रहने पाये। पंद्रह वर्ष अखिल भारतीय स्तर पर पंद्रह वर्ष घटक राज्यों के विधान मंडल तथा पंद्रह वर्ष जिला नगर ग्राम पंचायत स्तर पर नगर क्षेत्र में मतदाता को ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत अथवा जिला पंचायत के किसी पद के लिये पात्रताधिकार न रहे केवल नगर पंचायत नगर परिषद अथवा नगर निगम के निर्वाचित पदों के लिये ही नगर क्षेत्र के मतदाता का अधिकार क्षेत्र हो। इसी प्रकार गांव का मतदाता ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत अथवा जिला पंचायत पदधारिता हेतु चुनाव में सम्मिलित हो सके। राजनैतिक दल की अध्यक्षता कोई भी भारतीय नागरिक केवल तीन बार अध्यक्षता हेतु पात्रताधारक हो। समय की अवधि यदि दल के अध्यक्ष का कार्य काल दो वर्ष का हो तो तीन अवधि को छः वर्ष तक अध्यक्षता कर सके यदि अध्यक्ष कार्यकाल तीन वर्ष का हो तो दो बार अध्यक्ष पद पर पद स्थापित हो सके। राजनीतिक दलों के निर्वंधन तथा चुनाव में उत्पन्न विवादों का निपटारा करने का अधिकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त में निहित हो। अखिल भारतीय स्तर के राजनीतिक दलों से संबंधित प्रसंगों पर निर्वाचन आयोग संयुक्त रूप से अधिकृत हो। एक या दो राज्यों में अपना प्रभाव क्षेत्र मानने वाली राजनीतिक शक्ति संपात वाले दलों के मामले देखने के लिये निर्वाचन आयुक्तों में घटक राज्य बांट दिये जायें। पीपुल्स रिप्रेजेन्टेशन एक्ट 1951 में निर्दल दलीय एक राज्य तक सीमित राजनीतिक दलों के सरोकार निस्तारण का दायित्व निर्वाचन आयोग के सदस्यों (निर्वाचन आयुक्त) में कार्य विभाजन प्रक्रिया का अंग हो। निर्वाचन आयोग केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों के बीच शहरी मतदाताओं शहर के भीड़तंत्र तथा भीड़ द्वारा हैरानी की हद तक अराजकता की व्यापकता को संयमित करना इसलिये जरूरी है क्योंकि अनियंत्रित भीड़ राजनीतिक उद्देश्य पूर्ति का कारक बन सकती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात उ.प्र. की राजधानी लखनऊ में आचार्य नरेन्द्र देव डाक्टर राममनोहर लोहिया सेठ दामोदर स्वरूप अच्युत पटवर्धन के प्रभावशाली नेतृत्व के तत्वावधान में तत्काली 51 जिलों से नब्बे हजार लोगों ने विधान भवन पर प्रदर्शन किया। विधानसभा स्पीकर ने प्रदर्शनकारी नेताओं से वार्ता की। राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन ने पूरे मनोयोग से प्रदर्शनकारियों का जायजा लिया। नब्बे हजार प्रदर्शनकारियों ने रेल मोटर भाड़ा भुगतान कर प्रदर्शन स्थल पर 6 पंक्ति बना कर विधान भवन को कूच किया। आज जो भीड़ें इकट्ठी होरही है उनका उद्देश्य भी स्पष्ट नहीं। भीड़ एकत्र करने वाले रैली करने वाले नेतृत्व का सामूहिक दिशा निर्देश दाता कोई है ही नहीं इसलिये सेवा निवृत्त वायुसेना एयर मार्शल मनमोहन बहादुर की भीड़ का बगावती समूह बन जाने की शंका में तथ्य है। शासक दल तथा विरोधी दल दोनों मानवीय मर्यादाओं का उल्लंघन न करने का व्रत लें तभी स्वतंत्रता का वास्तविक आनंद समाज उठा सकता है।
एक सौ स्मार्ट सिटी अभियान में जिन शहरों को स्मार्ट सुनिश्चित किया जारहा है शहर को महापौर अथवा मेयर का निर्वाचन शहर के मतदाताओं द्वारा हो। संबंधित राज्य सरकार स्मार्ट सिटी के लिये जिस अधिकारी को नगर आयुक्त नियुक्त करना हो उसे यह समझना होगा कि नगरायुक्त महापौर अथवा मेयर का मुख्य कार्यकारी होगा। समूचा नगर प्रशासन मेयर तथा नगर निगम पार्षदों के बहुमत द्वारा निर्दिष्ट होगा। श्रेयस स्थिति तो यह हो कि राज्य का शासक दल यह पहल करे कि नगर निगम पार्षद दलीय आधार पर चुनाव न लड़ें। चुनाव का मूलाधार निर्दलीय हे। दलीय आधार पर केवल विधानसभा लोकसभा चुनाव लड़े जायें। राजनीति के वितान में अपना भविष्य देखने व संवारने वाले भारतीय नागरिकों को आधुनिक विश्व की राजनीतिक सत्ता प्रतिष्ठान में ग्रेट ब्रिटेन फ्रांस जर्मनी स्पेन पुर्तगाल स्केंडेनेवियन देश विशेषतया स्विट्जरलैंड तथा संयुक्त राज्य अमरीका सहित अमरीकी अफ्रीकी देशों की राजनीतिक रणनीति को आत्मसात करने के साथ साथ भारत के राजनीतिज्ञों को अपनी अपनी स्वभाषा के जरिये भारतीय राजनीतिक मनीषा को हृदयंगम करने की भी जरूरत है। हर राजनीति के विद्यार्थी को जहां कौटिल्य का अर्थशास्त्र अपनी मातृभाषा में समझना होगा वहीं भारतीय नीतिज्ञों में बृहस्पति शुक्र चार्वाक वशिष्ठ वाल्मीकि तथा कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास रचित महाभारत के शांतिपर्व भर्तृहरि के नीति शतक श्रंगार शतक तथा वैराग्य शतक का अनुशीलन करते हुए भारत मूल के धर्मों में आन्वीक्षिकी विद्या का अध्ययन करना होगा। राजनीति के मैदान में राजनीति का खिलाड़ी तभी अपनी साख बैठा सकता है जब वह राजनीति दर्शन को हृदयंगम कर ले। भारत की 100 स्मार्ट सिटी श्रंखला को भारत संघ तथा भारत संघ के घटक राज्य इन शहरों को पुरातन काल के सिटी स्टेट नुमा राज्य शासन संरचना के लिये शिव संकल्प लें। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिये कृतसंकल्प हों कि भारत के स्मार्ट शहर सुराज के प्रतीक होंगे। स्मार्ट सिटी सृजन में नगर निवासियों के अलावा शासन व्यवस्था के पारखी प्रशासक समाज तथा राजनीतिक रूप से पूरी तरह से राजनीति की बारहखड़ी समझने वाले लोगों को भी गैर सरकारी स्तर पर अंबुद समान सत्ता प्रत्येक शहर में सुप्रतिष्ठित हो। शहरों में रहने वानप्रस्थी सन्यासी महानुभावों का भी सहकार प्राप्त करना समीचीन होगा। अंततोगत्वा भारतीय राजकरण को राजनैतिक पाखंड तथा आन्वीक्षिकी उपधर्मिता से भी अप्रभावित कराना होगा। आज मौलाना वहाउद्दीन खां द्वारा फ्रीडाम पर जो प्रश्न उठाये हैं तथा स्वतंत्रता तभी सफल होगी जब स्वतंत्रता अपनाने वाला व्यक्तित्त्व स्वयं मर्यादाओं का पालन करना अपना नैतिक कर्तव्य समझे। स्वतंत्रता को तभी सफल बनाया जा सकता है स्वतंत्रचेता लोभाभिभूत न हो। संयमित सामाजिक जीवन का पक्षधर हो। अतिवाद अथवा उग्र धर्मा उग्र कर्मा न हो। स्वतंत्रता बिना मर्यादा अनुपालन ‘आत्मनः प्रतिकूलानि परेषाम् न समाचरेत्’ का अनुशीलन किये बिना लाभदायक नहीं हो सकती इसलिये भारत की आजादी श्रेयष्करता प्रधानमंत्री संकल्पित स्मार्ट सिटी समुच्चय प्रत्येक रोजगारार्थी को रोजगार दे। स्मार्ट सिटी में भीड़तंत्र का बोलबाला न होने दिया जाये।
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