दिल्ली में भूख से छुटकारा पाने के लिये ऊर्ध्वबाहु होकर उद्घोष करें
संघम शरणम गच्छामि।
संघम शरणम गच्छामि।
अभी हिन्द में भीख मांगना अपराध की श्रेणी में आता है। सन 1959 में बाम्बे प्रेसीडेंसी (वर्तमान महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश तथा कर्णाटक के वे इलाके जो बाम्बे प्रेसीडेंसी के इलाके थे) बाम्बे प्रिवेंटशन आफ बेगिंग एक्ट 1959 अस्तित्व में आया। इस अधिनियम का सहारा लेकर दिल्ली सहित कई राज्यों में भिखारियों को पकड़ कर न्यायाधीश के सम्मुख प्रस्तुत किया गया। पुलिस को भीख मांगने के पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत न कर पाने केू कारण अदालतें भिखारियों को भीख मांगने के अपराध से मुक्त कर देती थी। यह सांप छंछूदर की कहानी चलती रहती थी भीख मांगना बंद नहीं हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट याचिका की सुनवाई के दौरान दिल्ली की आआपा सरकार तथा केन्द्रीय समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा अपना अपना पक्ष उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी तथा न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे The persons in destitution (Prevention care and Rehabilitation) model bill 2016 की प्रति प्रस्तुत करें। लगभग महीना भर पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश ने एक टिप्पणी में इंगित किया कि अदालतें रामराज्य नहीं ला सकतीं। रामराज्य की स्थितियां तो सुशासन से ही आ सकती हैं। अभी तक तो बंबई प्रेसीडेंसी द्वारा 1959 में पारित एक्ट भीख मांगने को अपराध श्रेणी में रख कर दिल्ली सहित जो जो राज्य भीख मांगना गैर कानूनी मानते हैं इस एक्ट का सहारा लेकर भिखारियों के खिलाफ कार्यवाही करते हैं। जो अंततोगत्वा मजिस्ट्रेट द्वारा भिखारी को भीख मांगते रहने का प्रमाण सहित साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने के कारण भिखारी फिर स्वतंत्र हो जाता है। भीख को अपराध मानने से समस्या नहीं सुलझेगी। यह अच्छी बात है कि केन्द्रीय समाज कल्याण मंत्रालय भीख मांगने को अपराध न माने जाने के पक्ष में है और कानून की नजर में भीख मांगने को अपराध श्रेणी से हटाने का पक्षधर है। पहली जरूरत यह है कि Bombay Prevention of Begging Act 1959 ही निष्प्रभावी बनाया जाये और समाज कल्याण मंत्रालय जैन धर्मावलंबियों में ‘भिक्षा’ बौद्ध धर्मावलंबियों में भिक्षा सनातन धर्मावलंबियों में भिक्षा के आकार और स्वरूप के समानांतर इस्लाम धर्मावलंबियों में जकात सिख धर्मावलंबियों का लंगर ख्रिस्ती धर्मावलंबियों में चैरिटी तथा भारत के विभिन्न आदिम जातियों में भिक्षा के स्वरूप तथा भारत की विभिन्न जातियों में सदावर्त प्याऊ तथा बुभुक्षित व्यक्तियों को भोजन देने की जो परिपाटियां हैं उन का सटीक अध्ययन कर जिसे अंग्रेजी में Destitution कहा जाता है याने निराश्रित यतीम दरिद्र अत्यंत गरीब जिस नाम से भी कहें उनकी सही सही संख्या दिल्ली शहर मुंबई शहर कोलकाता शहर जैसे शहरों में कितनी है इन चारों शहरों में काशी मथुरा वृन्दावन की तरह कितने सदावर्त हैं सारे भारत में सिख धर्मावलंबियों द्वारा चलाये जारहे कितने लंगर हैं इस्लाम धर्मावलंबियों के कितने यतीमखाने हैं इनके द्वारा कितने भूखों को रोजाना भोजन मुहैया होता है। दिल्ली के भूखेनंगे लोगों का सदावर्त यतीमखाने लंगर आदि द्वारा कितने लोग रोजाना भोजन पारहे हैं कितने लोग रैनबसेरा रहित हैें। यह सब आकलन करने की जरूरत है। दिल्ली के बेसहारा लोगों को जो इमदाद सिख धर्मावलंबियों के लंगर इस्लाम धर्मावलंबियों के यतीमखाने जैन तथा बौद्ध एवं आर्यसमाज सहित सनातन धर्म मानने वाले सरह जो सदावर्त प्याऊ तथा रैनबसेरे चल रहे हैं उन सब को दिल्ली के अनेक हिस्सों में संघ शाखा चलाने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ संचालक द्वारा दिल्ली के लिये महिला स्वयंसेविकाओं की पंक्ति खड़ी करने की जरूरत है। शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवकों के परिवारों की महिला श्रम शक्ति को दिल्ली के भूखे और प्यास तथा आश्रय हीन लोगों के लिये कृतसंकल्प करने की तात्कालिक जरूरत है। दिल्ली का शासन केजरीवाल महाशय चलाते हैं दिल्ली के गरीब घरों की दास्तान यह ब्लागर पहले प्रस्तुत कर चुका है। राजनीतिक दल तथा केन्द्रीय सरकार एवं घटक राज्य सरकारों की भूमिका भी एक सीमा तक ही कृतकृत्य हो सकती है। दिल्ली के बेघर लोग जो सड़कों में सोते हैं उन्हें रैनबसेरे चाहिये। ज्योंही केन्द्र सरकार का समाज कल्याण मंत्रालय भीख मांगने को अपराध श्रेणी से हटा लेता है दिल्ली सरकार द्वारा जो गरीब घर निर्मित हुए हैं उन्हें रैनबसेरों के तौर पर विकसित करने का प्रयास को महिला रैनबसेरे संचालन का कार्य राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की महिला शाखा निर्मित कर वो मां बहनें जो वात्सल्यपूर्ण हैं पारिवारिक जीवन से जिन्हें एक प्रकार का उपराम उपलब्ध है वे महिला रैनबसेरे महिलाओं और बारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों व लड़के लड़कियों के भोजन प्रबंध के लिये भी कार्यशील हों। गोदामों में अनाज सड़ रहा है उच्चतम न्यायालय एकाधिक बार सरकार को कह चुका है कि अन्न की बर्बादी के बजाये अन्न गरीबों में बांट दिया जाये। न्यायालय के इस परामर्श को मूर्त रूप नहीं मिल सका है। कम से कम दिल्ली में भूखे सोने वाले लोगों को रैनबसेरा सहायता तथा भोजन मिले इसके लिये समाज कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली के यतीमखानों का संचालन करने वाले इस्लाम धर्मावलंबी संगठन दिल्ली के विभिन्न गुरूद्वारों में चलने वाले लंगर संचालकों से दिल्ली को भूख मुक्त तथा रैनबसेरा युक्त बनाने की दृष्टि से समाज कल्याण मंत्रालय विचार विमर्श करे। जाड़ा सिर पर आकर खड़ा होगया है समाज कल्याण मंत्रालय दिल्ली हाईकोर्ट में जो प्रस्तुतकरण कर चुका है उसे अंजाम देने के लिये मंत्रालय को दिल्ली सरकार के मार्फत ही योजना का संचालन करना होगा।
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