Sunday, 2 October 2016

नेताजी की सैफई का पारिवारिक राज वाला चक्रव्यूह
नेता जी अब 77 वर्षीय सेप्टुगेरियन हैं। जब 1949 में डाक्टर लोहिया और उनके उत्तर प्रदेशीय समाजवादी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में संयमित पर विशाल मार्च मार्च के महीने में ही आयोजित किया था। आचार्य नरेन्द्र देव, युसुफ मेहर अली, अच्युत पटवर्धन, सेठ दामोदर स्वरूप, डाक्टर लोहिया तथा गेंदा सिंह के नेतृत्व में अमीनाबाद से विधान भवन तक नब्बे हजार लोगों का छः पंक्तियों वाला जनमार्च हुआ। उसमें इटावा के समाजवादी जिला स्तरीय नेता अर्जुन भदौरिया की भूमिका महत्वपूर्ण थी। तब संभवतः नेताजी मुलायम सिंह यादव दस वर्ष के बालक थे। उन्होंने इटावा से डाक्टर लोहिया की कल्पना की अद्वितीय रैली के बारे में सुना तो जरूर होगा पर बच्चे होने के कारण वे उस महत्वपूर्ण रैली के भागीदारी वाले व्यक्ति नहीं थे। 1967 के उ.प्र. विधानसभा चुनाव में वे जसवंत नगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीत कर पहली बार फरवरी 1967 में विधानसभा सदस्य चुने गये तब डाक्टर लोहिया उस अस्पताल में रूग्णशय्या पर थे जिसका नाम मोरारजी रणछोड़जी देेसाई के नेतृत्व की जनता पार्टी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्री राजनारायण ने वर्ष 1977 में अस्पताल का नाम डाक्टर राममनोहर लोहिया अस्पताल रखा। वे रायबरेली से इंदिरा गांधी को पराजित कर लोकसभा पहुंचे थे तब नेताजी अठाईस वर्षीय युवा थे। उनके मार्गदर्शक लोहिया नहीं छोटे लोहिया नाम से विख्यात समाजवादी चिंतक बलिया के श्री मिश्रा थे। इलाहाबाद उनकी राजनीतिक कर्मभूमि भी थी, वे इलाहाबाद सांसद भी रहे। रविवारीय संडे ऐक्सप्रेस 25 सितंबर 2016 के अंक में भूपेन्द्र पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत फेमिला प्लाट को यह ब्लागर जो स्वयं मार्च 1949 की विधानसभा चलो यू.पी. का किसान जागा मिनिस्टर पंत भागा नारे से गूंज रहा था अपने किस्म का व्यवस्थित प्रदर्शन था। आज के जमाने में रूल आफ मॉब की जो भगदड़ मची रहती है उस प्रदर्शन में भेड़िया धसान के लिये कोई जगह नहीं थी। राजर्षि पुरूषोत्तम टंडन तब स्पीकर थे। उनसे पंडित पंत ने अनुरोध किया था कि प्रदर्शनकारियों को सुन कर यथोचित करें। विधानसभा मार्ग में स्वयं आकर राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन ने प्रदर्शनकारियों को सुना और प्रदर्शनकारी नेतृत्व के छः व्यक्तियों से स्पीकर कार्यालय में विचार विमर्श कर तत्कालीन उ.प्र. सरकार को मार्गदर्शन दिया। यह तब की घटना है जब भारत को आजाद हुए मात्र उन्नीस महीने ही हुए थे। 
मंडल कमीशन की सिफारिशें मंजूर कर हिन्द के आठवें पर संवैधानिक रूप से सातवें प्रधानमंत्री राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह ने स्वीकार कर अनुसूचित जातियों व जनजातियों के 22.5 प्रतिशत आरक्षण के समानांतर इतर पिछड़े वर्ग के लिये 27 प्रतिशत आरक्षण घोषित कर हिन्द की राजनीतिक रणनीति को एक नया सत्ता सूत्र निर्मित कर एक नया पैगाम दे डाला। ओबीसी के सर्वोच्च लाभग्राही सैफईनंदन नेताजी मुलायम सिंह यादव और उनका राजनीतिक कुनबा है जो 1989 से सत्ताधिष्ठान का पुरोधा है। मांझी दासराज के दौहित्र पराशर सत्यवती के पुत्र यमुना खादर के द्वीप में जन्मे कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने कहा -
यदुवंश प्रसूतानाम् पुंसान् विख्यात कर्मणाम्, संख्या न शक्यते कर्तुम् अपि वर्षायुतैर्नृप।
 तिस्त्र कोटयः सहस्त्राणाम् अष्ठाशीति शतासिन्न, संख्यानं यादवानाम् कः करिष्यति महात्मनाम्।
सवा पांच हजार वर्ष पूर्व जब कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने श्रीमद्भागवत महापुराण अपने गुरू नारद के कहने पर रचा तब हिन्द के यादवों की संख्या आज के वृहत्तर सांस्कृतिक भारत के मुकाबले तब तीस करोड़ से ज्यादा आंकी गयी थी। गंगा-यमुना का दोआब आभीर संस्कृति का उद्गाता है। मुसलमान कृष्ण भक्त रसखान कहते हैं - 
शेष महेश दिनेश जाहि अनादि अनंत बतावें, ताहि अहीर की छोहरियां छछिया भर छाछ पै नाच नचावें।
राजनीतिक दलों के लिये सत्ता का मूल तोरण जनता जनार्दन द्वारा लोकसभा विधानसभाओं में मतदाताओं के बहुमत से चुना जाना है। सैफई के सत्ताधिष्ठान के समाजवादी चक्रव्यूह में सेप्टुगेरियन नेताजी मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से लोकसभा सांसद हैं, उन्हीं की तरह लोकसभा सांसदी प्राप्त करने वाले चार अन्य भद्रकुलीन यादव क्रमशः तीसरे पाये में सुस्थिर अप्रौढ़ा अढ़तीस वर्षीया अखिलेश धर्मचारिणी डिम्पल हैं। वे सुगंधि स्थल कन्नौज (कान्यकुब्ज भूमि) से लोकसभा सांसद अढ़तीस अप्रौढ़ धर्मेन्द्र यादव बदायूं से लोकसभा सांसद हैं। मुलायम सिंह के सहोदर अभय राम के पुत्र छठे पायदान में हैं। उनसे एक पायदान में खड़े 29 वर्षीय युवा अक्षय यादव फिरोजाबाद से लोकसभा सांसद हैं। ये सत्तर वर्षीय प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र हैं। भूपेेन्द्र पांडेय के अनुसार अक्षय ज्यादा समय दिल्ली में ही रहते हैं। सताईस वर्षीय तेजप्रताप यादव मैनपुरी से लोकसभा सांसद हैं ये नेताजी के भाई के पोते तथा बिहार की राजनीति को अपनी दस अंगुलियों से नचाने वाले बिहारी गोप नेता लालू प्रसाद यादव के दामाद हैं। यादव राजपरिवार में सबसे युवा लोकसभा सांसद हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जामाता सैफई राजप्रासाद से पांचवें लोकसभा सांसद हैं। ये महाशय भूपेन्द्र पांडेय द्वारा आठवें पायदान में रखे गये जनप्रतिनिधि हैं। इन्होंने मैनपुरी की यह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र नेताजी द्वारा आजमगढ़ ही अपनाने बपौती इलाका अग्रज अभयराय के पोते को सौंप कर यादवों की दो पंगतों में विवाह के द्वारा एका का रास्ता साफ किया पर नेताजी मुलायम सिंह यादव तथा राजद सुप्रीमो दोनों के तौर तरीके भागीरथी गंगा के उत्तर तथा दक्षिण छोरों में जो जमीनी फर्क है वह इन दोनों ओबीसी महारथियों में साफ झलकता है। यादव खानदान के पांच पांडव लोकसभा में हैं जिनके अगुआ नेताजी मुलायम सिंह यादव हैं। दिल्ली वाली लोकसभा में पांच लखनऊ वाली विधानसभा में यादव राजपरिवार से साठा सो पाठा तथा अहीर अठारह नहीं साठ वर्ष की उम्र में बालिग होता है यह कहावत शिवपाल यादव पर संभवतः पूरी पूरी लागू होती है। वे नेताजी मुलायम सिंह यादव के अनुज हैं वे यादव भ्रातृमंडली में सबसे छोटे हैं। दिल्लीश्वरी रहीं इंदिरा गांधी की पुत्रवधू प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विधवा अखिल भारत कांग्रेस कमेटी की सदारत पिछले सत्रह अठारह साल से निरंतर करती आरही श्रीमती सोनिया गांधी सन 2004 के सामान्य निर्वाचन में लोकसभा में सबसे ज्यादा संख्या वाले सांसदों की नेता थीं।उन्हें प्रधानमंत्री पद स्वीकार करना चाहिये था पर उन्होंने अपने प्रतिनिधि नौकरशाह तथा इकानामिक टेक्नोक्रेट डाक्टर मनमोहन सिंह को दस वर्ष प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नियुक्त किया, हुक्म चलता था दस जनपथ रोड से। यश मिले तो श्रीमती सोनिया गांधी को अपयश हो तो उसे झेलें प्रतिनिधि प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह। राज्यसभा सांसद का प्रधानमंत्री होना लोकतंत्र में लोकसंग्रह की भयावह अवमानना है। उत्तर प्रदेश में दिल्ली की नकल हुई सुश्री मायावती बहन उच्च सदन की सदस्य रह कर मुख्यमंत्री बनीं। उनका अनुसरण किया मुलायम सिंह यादव ने जिन्होंने अपने एमएलसी पुत्र को मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठा दिया। जब कि उनका सहोदर छोटा भाई शिवपाल विधानसभा सदस्य था। यहां नेताजी का पुत्र मोह उसी तरह जगा जिस तरह प्रज्ञाचक्षु राजा धृतराष्ट्र जब जब अपने ज्येष्ठ पुत्र सुयोधन की बात सुनते उनका पुत्रानुराग जग जाता। 2012 में जब नेताजी को उ.प्र. विधानसभा में बहुमत मिला वे स्वयं भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नजर गड़ाये हुए थे। उन्हें सही रास्ता दिखाने वाला व्यक्ति छोटे लोहिया 2012 में जिन्दा नहीं थे वे जिन्दा रहते नेताजी से कहते एमएलसी बेटे को मुख्यमंत्री मत बनाओ, एमएलए अनुज को मुख्यमंत्री बनाओ। नेताजी तब 70 वर्ष की उम्र पार कर चुके थे। उन्हें लोकनेता नानाजी देशमुख के द्वारा 1977 के जनता राज में कुर्सी नमः कहना याद आना चाहिये था इसीलिये तो चाणक्य की यह बात याद आती है - असंभवम् हेममयी कुरंगो तथापि रामो लुलुभेमृगाम्। भारत भर के दलित जो आबादी के हिसाब से छठे हिस्से हैं लालू प्रसाद यादव जी तो कहते हैं कि दलित आबादी बढ़ कर बत्तीस फीसदी होगयी है। गुरू शिष्या प्रयोजन की माहिर बहन मायावती जो अपने आपको देवी का अवतार भी कहती हैं उन्होंने भी उ.प्र. का राज जनप्रतिनिधि नहीं पिछले दरवाजे के रास्ते आकर मुख्यमंत्रित्व संपन्न किया। दिल्ली में राज्यसभा सांसद के नाते डाक्टर मनमोहन सिंह सोनिया गांधी की ओर से राज चलाते रहे। उत्तर प्रदेश में 2007 से 2017 पर्यन्त पूरे दस वर्ष बीस करोड़ जनता पर बुआ मायावती तथा भ्रात्रेय अखिलेश राज करते रहे। यही सत्ता का चक्रव्यूह है जो दिल्ली और लखनऊ दोनों जगह व्याप्त रहा। शिवपाल यादव की तरह सैफई से जुड़े विधानसभा सदस्य यादव राजकुल के अठारह महारथियों में मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोकसभा में कन्नौज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व 2000 में संपन्न उपचुनाव से करते आरहे थे। कन्नौज उ.प्र. का महत्वपूर्ण कान्यकुब्ज इलाका है साथ ही महाभारत महाकाव्य की प्रेरक शक्ति याज्ञसेनी द्रौपदी पांचाल राज द्रुपद पुत्री थीं, अयोनिजा थीं। इस पुण्यभूमि की सेवा के प्रसाद स्वरूप अखिलेश यादव पिछले साढ़े चार साल से उ.प्र. के मुख्यमंत्री हैं। उन्हें चाहिये था कि विधानसभा सदस्यता पाकर उ.प्र. का नेतृत्व करते पर नेताजी मुलायम सिंह जी को बहन मायावती का राजकरण पसंद आया। उनके पुत्र मोह ने शिवपाल यादव को छिटक दिया जब कि शिवपाल यादव ही नेताजी के मूल निर्वाचन क्षेत्र जसवंत नगर से विधायक चुने गये थे। सैफई भूमिपुत्र परिवारीजनों में से पांच सांसद (लोकसभा सदस्य एक विधायक विधानसभा सदस्य) वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित रामगोपाल यादव के भतीजे अरविन्द सिंह कुल मिला कर 2 एमएलसी एक राज्यसभा सांसद श्री रामगोपाल यादव संसद तथा विधान मंडलों में केवल नौ जनप्रतिनिधि हैं जब कि राजनीतिक दलों व विकास खंड प्रमुख मृदुला यादव सैफई शिवपाल नंदन आदित्य यादव प्रादेशिक सहकारी संघ अध्यक्ष तथा इफको निदेशक डाक्टर अनंत सिंह यादव 62 वर्ष ब्लाक प्रमुख अनुराग यादव समाजवादी पार्टी के मुलायम के राष्ट्रीय सचिव प्रतीक यादव व्यापारी हैं। अपर्णा यादव लखनऊ से विधानसभा चुनाव में कूदना चाहती है। भूपेन्द्र पांडे की 50 फीसदी बात करीने वाली है। यह सही है कि सैफई को नेताजी मुलायम सिंह यादव ने उसी तरह विकसित किया है जिस तरह कांशीराम शिष्या बहन मायावती अपना स्वस्मारक लखनऊ व अन्यत्र बनाना चाहती हैं, बना रही हैं। मुलायम सिंह यादव को नेतृत्व में सैफई से संबंधित पांच सांसद, एक राज्यसभा सदस्य, एक विधानसभा सदस्य, 2 विधान परिषद सदस्य, एक राज्यसभा सदस्य कुल मिला कर नेताजी मुलायम के नवरत्न हैं। 
मुलायम सिंह राजपरिवार के अलावा हिन्द में दूसरा यादव राजपरिवार लालू प्रसाद यादव का है। प्रकाश सिंह बादल, पुत्र सुखबीर सिंह बादल का बादल राजपरिवार कश्मीर के मरहूम शेख अब्दुल्ला का राजपरिवार जिसका नेतृत्व अब उमर अब्दुल्ला कर रहे हैं, मुफ्ती राजपरिवार जिसकी नेतृत्व शक्ति अब महबूबा मुफ्ती पर है, दस जनपथ का राजपरिवार जिसकी अगुआई श्रीमती सोनिया गांधी कर रही हैं, उत्कल का बीजू-नवीन राजखानदान, चेन्नई का राजपरिवार एम. करूणानिधि, कर्नाटक का राजपरिवार देवगौड़ा कुमार स्वामी, स्वयं राज न करने वाला बाल ठाकरे राजपरिवार, चन्द्रबाबू नायडू की ससुर जमाई मेढ़ी, दिवंगत राजशेखर रेड्डी का औंधे मुंह गिरा राजपरिवार, तैलंगाना का नया नवेला राजपरिवार इन राजपरिवारों के अलावा गुरू शिष्या प्रयोजन जयललिता की गुरू वत्सलता मायावती बहन की कांशीराम के लिये गुरूत्वाकर्षण भक्ति स्वयंभू - स्वर्गे इंद्रः पाताले बलिः भूलोकेऽहम् ममता बनर्जी अरविन्द केजरीवाल की अलबेली सुप्रीमो शैली इन सबके अलावा बिहार में शराब बन्दी का ऐलान करने वाले बाबू नितीश कुमार का राजकरण, नितीश कुमार का उदय जार्ज फर्नांडीस की बिहार अपनाने करती कथा समता जनता दल यूनाइटेड के सदर रहे शरद यादव को बाहरी होते हुए भी बिहारी कहना, प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नजर गड़ाये रखना भले ही वह कभी मिले या न मिले। दूसरा अलबेला नेतृत्व अरविन्द केजरीवाल की अपना आपा खोने वाली आम आदमी पार्टी का है। वह दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं, आआपा के राष्ट्रीय संयोजक पंजाब गोआ तथा गुजरात में अपना डंका बजाना चाहते हैं। उनका ज्यादा समय दिल्ली से बाहर रहना है। 
माकूल सवाल उठता है कि क्या डैमोक्रेसी ऐसे राजनीतिक दलों द्वारा पुष्टिमार्ग अपना सकती है जिनकी सदारत एक व्यक्ति पुरूष या महिला संपन्न करते हैं व्यक्ति प्रधान राजनीतिक दल में निर्णायक नेता के वचन हैं जो नेता ने बताया वही लोगों को मानना है। इस समय भारत में 131 वर्षीया अखिल भारत कांग्रेस कमेटी को अध्यक्ष महोदया सहित जम्मू कश्मीर में दो, पंजाब में एक, दिल्ली में एक, उ.प्र. में दो, बिहार में एक, पश्चिम बंग में एक, ओडिशा में एक, आंध्र में दो, तैलंगाना में एक, तमिलनाडु में दो, कर्णाटक में एक, महाराष्ट्र में एक कुल मिला कर सत्रह राजनीतिक जमातें हैं जिनका नेतृत्व एकल व्यक्ति करता है। इन व्यक्ति प्रधान राजनीतिक दलों से यह अनुरोध करने की जरूरत है कि वे अपने राजनीतिक दल के सात प्रमुख राजनीतिज्ञों की पंक्ति निर्माण करें। राजनीतिक दल का नेतृत्व एक व्यक्ति अधिक से अधिक नौ वर्ष तक करे। लोकतंत्र को राजकरण की स्थायी विधा बनाने के लिये राजनीतिक दलों को आपस में संवाद स्थापित करना ही होगा। आज जैसी सुप्रीमो शैली तथा क्षत्रप राजकरण को Rule of Mob से बचाना ही होगा। देश के गांवों से पलायन शहरों में झुग्गी झोपड़ी तथा स्लम एरिया की बढ़त भीड़तंत्र अख्तियार करने ही वाली है। वे राजनीतिक समूह जो एक व्यक्ति के इशारों पर चलते हैं तथा जात बिरादरी का सहारा लेकर वोट बैंक के सहारे अपना राज स्थायी बनाना चाहते हैं उन्हें राजनीतिक दल के एकतंत्र तथा डैमोक्रेसी के लोकतंत्र के बीच एक मर्यादा पुल का सृजन करना ही होगा। भारत के सामने दो प्रधानमंत्रियों मां इंदिरा तथा पुत्र राजीव गांधी की हत्या का जीवंत उदाहरण है इसलिये ऐसी स्थिति दुबारा न आये कि राजकर्ता व्यक्ति की हत्या हो जाये। तंत्र विद्रूप हो जाये इसलिये नेताजी मुलायम सिंह यादव सरीखे धरतीपुत्र राजनेताओं को सोचना ही होगा कि क्या वे भीड़तंत्र के जरिये देश में आंतरिक दुर्व्यवस्था तथा अराजकता का संवर्धन तो नहीं कर रहे हैं ? संविधान संशोधन 73 व 74 संपन्न हुए अगले वर्ष 2017 में पूरे पचीस वर्ष हो जायेंगे पर घटक राज्य सरकारें तथा उनके क्षत्रपनुमा सर्वेसर्वा पंचायत, नगर पालिका इन दो घटकों का उनका वाजिब हक देना नहीं चाहते नगर प्रबंधन तथा ग्राम प्रबंधन को डाक्टर राममनोहर लोहिया शैली वाल चौखंभा राजतंत्र निर्मांण में उन्हें राष्ट्रीय अंबुद समान चिंतन पोखर का चिंतन करना ही होगा। अभी ज्यादातर राजनीतिक दल राजकुमारी तिलोत्तमा सुनिश्चित विचार पद्धति पर मनन करें वृक्ष की उस शाखा या टहनी को न काटें जिस पर आप बैठे हैं। व्यक्ति प्रधान हर राजनीतिक दल को भारत के राष्ट्रपति महोदय से यह अनुरोध करना ही चाहिये कि वे तीन से पांच गैर राजनीतिक राष्ट्र चिंतकों, मानव हित चिंतकों तटस्थ वैज्ञानिक चिंतकों का पैनल तैयार कर भेजें ताकि सभी राजनीतिक दलों राज्यों की घटक राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुत पैनल से National Ombudsman Council of India  किया जाये। 
इंडियन ऐक्सप्रेस अपने स्थापना काल से अखबारी दुनियां में रामनाथ गोयनका की राष्ट्रीय कल्पना शैली का प्रतीक है। उन्होंने मुलायम राजपरिवार के अठारह व्यक्तित्त्वों का चरित्र चित्रण किया है। गुणदोष विवेचन के साथ नेताजी मुलायम सिंह उनके मुख्यमंत्री पुत्र एमएलसी अखिलेश यादव सांसद डिंपल यादव राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव, फिरोजाबाद के सांसद अक्षय यादव, बदायूं सांसद धमेन्द्र यादव, शिवपाल यादव सदस्य विधानसभा तेजप्रताप सिंह यादव सांसद मैनपुरी इन सब की घोषित संपदा का मूल्य एक अरब रूपये के आसपास है। सैफई इटावा जिले का महत्वपूर्ण इलाका है। जनप्रतिनिधियों के घोषित संपदाओं केे समानांतर उ.प्र. सरकार के बजट से सैफई विकास के लिये कितनी राशि कब जारी हुई उसका ब्यौरा भूपेन्द्र पांडे के संज्ञान में नहीं है। उ.प्र. में एक लाख गांव हैं जिनमें सैफई एक महत्वपूर्ण इलाका बन गया है। वैयक्तिक संपन्नता के समानांतर जब सामाजिक संपन्नता का उदय होता है अभी तो सैफई से केवल दो ही मुख्यमंत्री पिता नेताजी मुलायम सिंह यादव व इंजीनियर पुत्र अखिलेश यादव ने अपनी मातृभूमि ब्रजभाषी इटावा को सैफई समारोहों के जरिये उ.प्र. ही नहीं भारत भर में प्रसिद्धि दिलायी है। सत्ता के साथ विग्रह जाने अनजाने स्वयं उपस्थित हो जाता है। अगर 2017 के निर्वाचन में नेताजी की समाजवादी पार्टी गुरू शिष्या आधारशिला वाली स्वयं को दलितों का उत्थान करने वाली देवी सरीखी शक्ति समझने वाली बहन मायावती के आगे शीश झुकाना पड़ा अथवा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व प्रतिष्ठा यदि उ.प्र. में कारगर होगयी सपा बसपा चारों खाने चित्त होगये। उ.प्र. को नया निजाम मिल गया तो राजपरिवार शैली को एक धक्का तो जरूर लगेगा पर मुलायम सिंह जिनकी धरती पुत्र वाली ताकत को चौधरी चरण सिंह तथा हेमवती नंदन बहुगुणा के नजदीक से देख कर नेताजी मुलायम सिंह का उत्साहवर्धन किया। पारिवारिक कलह के चक्रव्यूह से क्या नेताजी उबर पायेंगे ? उ.प्र. में इटावा के यादव राजपरिवार में सत्ताधिष्ठान को खींचतान भाई और बेटे के बीच नूरा कुश्ती से जूझ रहे नेताजी का इलाहाबाद से जुड़े भारतीय राजपरिवार इंदिरा गांधी उनके पुत्रों पुत्रवधुओं पौत्रों तथा इंदिरा गांधी के पति फीरोज गांधी के अपने परिवार का कोई कलहदायी प्रसंग नहीं था। इंदिरा गांधी 1946 से ही फीरोज गांधी से अलग रहती थीं पर फीरोज गांधी को उ.प्र. के भारी भरकम कांग्रेस नेता पंडित पंत का आशीर्वाद था। पंडित पंत, पंडित नेहरू के जामाता फीरोज गांधी को अपने जामाता का सम्मान देते तथा फीरोज की राजनीतिक ताकत के सूत्रधार थे। फीरोज की 1959 में मृृत्यु के पश्चात ही रायबरेली का सियासती अड्डा इंदिरा गांधी को मिला। पंडित मोतीलाल नेहरू पंडित जवाहरलाल नेहरू को परिवारी राजनीतिक कारक नहीं कहा जा सकता। अलबत्ता इंदिरा गांधी के अपने शासन काल में उनके माता पिता से संबंधित शीला कौल शक्ति स्त्रोत थीं। इंदिरा गांधी के राजपरिवार से उनके अपने शासन काल में संजय गांधी व राजीव गांधी राजनीतिक नक्षत्र बन चुके थे। इंदिरा जी की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र राजीव गांधी जहां प्रधानमंत्री हुए, उन्होंने अपनी माता इंदिरा जी के मैके के रिश्तेदार अरूण नेहरू को अपनाया। नेताजी मुलायम सिंह के परिजनों में पांच व्यक्ति लोकसभा सांसद हैं। जब कि इंदिरा गांधी के पुत्र पौत्र पुत्रवधुऐं सोनिया गांधी मेनका गांधी इनके पुत्र राहुल गांधी वरूण गांधी चार सांसद वर्तमान लोकसभा में हैं। इंदिरा राजपरिवार का विग्रह चक्रव्यूह नेताजी मुलायम सिंह यादव राजपरिवार से ज्यादा कलहग्रस्त है। मेनका गांधी व वरूण गांधी शासन दल में हैं जब कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी मुख्य विपक्षी दल के 44 सांसदों में दो हैं। इसलिये मुलायम सिंह यादव का चक्रव्यूह तथा सोनिया गांधी का चक्रव्यूह दोनों गहरे सियासती गड्ढे के नजदीक पहुंच गये प्रतीत होते हैं। पारिवारिक राजसत्ता को उ.प्र. के ये दो स्तूप वर्तमान में लोकसभा के विपक्षी बेंच में हैं। 
इंडियन ऐक्सप्रेस ने जिस तरह मुलायम चक्रव्यूह का ढांचा जनता जनार्दन के सामने रखा पारिवारिक राजनीति के जितने शेष अखाड़े हैं उन सभी तथा गुरू शिष्या प्रयोजन के प्रयोग करने वाली बहन मायावती तथा जयललिता स्वयंभू क्षत्रप ममता बनर्जी तथा अरविन्द केजरीवाल नेतृत्व शैली का भी आने वाले महीना दो महीना भीतर इंडियन ऐक्सप्रेस जनता जनार्दन के सामने रखेगा तो हिन्द की राजनीतिक रणनीति कहां बढ़ रही है उसका निष्कर्ष क्या होने वाला है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता भारत में तो बढ़ ही रही है उनका लोकसंग्रह का ग्राफ बढ़ रहा है देखना यह है कि वे अपने कटु आलाचकों को किस तरह भांपते हैं। सबका साथ सबका विकास तथा गरीबी पंगत में आखीर में खड़ा व्यक्ति भी यह महसूस करे कि देश की सरकार उसका योगक्षेम देखती है। तथाकथित दक्षिण पंथी कहा जाने वाला राजनीतिक दल भाजपा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का राजनीतिक मंच माना जाता है वस्तुतः भारत में साम्यवादी एवं राष्ट्रवादी स्तूप कम्यूनिस्ट पार्टी आफ इंडिया माकर््िसस्ट कम्यूनिस्ट पार्टी एवं इन दोनों के सहयोगी राजनीतिक रणनीतिकार तथा भारतीय जनता पार्टी जो 1952 में स्थापित भारतीय जनसंघ का परिवर्तित अवतार है ये दो धु्रवों के राजनीतिक रणनीतिकर्ता ही सही माने में Democratic System वाले हैं शेष सभी दल सुप्रीमोवादी क्षत्रपवादी पारिवारिक राजकरण के पुरोधा हैं। नेताजी मुलायम सिंह यादव सहित सभी सुप्रीमो शैली वाले नेतृत्व को कौटिल्य अर्थशास्त्र के 6000 श्लोकों में व्यक्त राष्ट्र हित का मार्गदर्शन केवल साने गुरू जी की आंतर भारती चिंतन पोखर से ही संभव है।
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