क्या पार्श्व भारती हिन्द के पड़ोसियों की ज़ुबान है ?
हिन्द के लिये साने गुरू जी की आंतर भारती हिन्द के पड़ोसी राष्ट्र राज्यों के लिये पार्श्व भारती
हिन्द की कूटनीतिक वैश्विक जरूरत क्यों होगयी ?
आंतर भारती भाषाओं में भारतीय संविधान सम्मत दो भाषाओं या हिन्द का प्रामाणिक संविधान है। आंतर भारती की कश्मीरी, डोंगरी, उर्दू, पंजाबी, सिंधी, संस्कृत, संथाली, असमी, बोडो, मैथिली, मइती, बंगला, उड़िया, नैपाली, तेलुगु, तमिल, मलयाली, कन्नड़, कोंकणी, मराठी, गुजराती ऐसी भारतीय भाषायें हैं। मराठी, कोंकणी, नैपाली, संस्कृत, सिंधी, मैथिली यहां तक कि बोडो नागरी लिपि में ही लिखी पढ़ी जाती है। उर्दू, पंजाबी, गुजराती, कन्नड़, मलयाली, तमिल, तेलुगु, उड़िया, मइती, असमी, बांगला क्रमशः जम्मू कश्मीर, पंजाब, गुजरात, कर्णाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र व तेलंगाना, ओडिशा, मणिपुर, असम, बंगाल व त्रिपुरा की राजभाषा भी हैं। तेलुगु व बांग्ला दो राज्यों की राजभाषा हैं नागरी लिपि का उपयोग करने वाली भाषायें मराठी, कोंकणी और नैपाली हैं। इस प्रकार भारत गणतंत्र के सोलह घटक राज्यों की घोषित राजभाषाओं की सूची 10 हिन्दी प्रदेशों की राजभाषा हिंदी है। आंतरिक भाषायी स्वराज्य के लिये साने गुरू जी की आंतर भारती फार्मूला हिन्द को मजबूत आत्मनिर्भर राष्ट्र राज्य बनाने का स्वर्णिम अवसर देता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के सत्तर वर्ष बाद भारत अंगड़ाई लेरहा है क्या करना है ? क्या नहीं करना है ? इसे भगवद्गीता में ‘किं कर्मम् किम कर्मेति कवयो प्यत्र मोहिता’। राष्ट्र राज्य भारत के 36 घटकों के समानांतर भारत के पड़ोसी देशों में श्री लंका, नैपाल ये दो देश आस्था व वाणी के संदर्भ में जय श्री लंका जय श्री लंका का सिंहल गान श्री लंका में बस गये तमिल जिनके बारे में कबीर का कहना है - भगती उपजी द्रविड़ देश तथा कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास भक्ति द्वारा अपना परिचय देवर्षि नारद को देते हुए भक्ति से कहलाते हैं - द्रविड़े साअहम् समुत्पन्ना वृद्धिं कर्णाटके क्वचिन क्वचिन महाराष्ट्रे गुर्जरे जीर्णता गता। तमिल भक्ति गीत तथा सिंहली भाषा दोनों हिन्द की देन हैं। नैपाल तो हिमालय का मुकुट है इसलिये श्री लंका और नैपाल से भारत का पड़ोस धर्म तुलसी के रामचरित मानस और मलिक मोहम्मद जायसी के पद्मावत महाकाव्यों की उत्कृष्ट कथा है। भारत के उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक संबंधों के तागे कालड़ी केरल के नंबूदिरी जनों का हिमालय में स्थित बद्रिकाश्रम, बदरीनाथ या बदरी विशाल का रावल होना, कर्णाटक के शैव मतावलंबी ऋग्वेदी ब्राह्मणों का पशुपतिनाथ का प्रथम पुजारी रावल होना नैपाल व हिन्द का आस्थाजन्य सहजीवन है। काशी विश्वनाथ सोमनाथ सहित जो द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं उनमें रूद्राक्ष नैपाल के जंगलों से ही उपलब्ध होता है। नैपाल में जिन्हें मधेसी कहा जाता है वे हिन्द नैपाल के मध्य जातीय पुल का निर्वाह करते हैं। नैपाली कुमांउनी गढ़वाली तथा कांगड़ी ये तीनों हिमालयी हिन्द भाषायें हैं। नैपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड महाशय यह महसूस कर चुके हैं कि नैपाल का सबसे बड़ा हितू भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हैं। प्रतीति यह होती है भगती उपजी तो द्रविड़ देश में, बचपन कर्णाटक में बीता महाराष्ट्र में प्रौढ़ व अति प्रौढ़ हुई यहीं उसकी दो संतानें ज्ञान व वैराग्य जन्मे। गुजरात गयी बुढ़िया गयी अतः ज्ञान वैराग्य ने तय किया मां को गंगाद्वार में गंगा स्नान करायेंगे। वृन्दावन पहुंची भक्ति जवान होगयी किन्तु ज्ञान वैराग्य बूढे़ होगये। वृन्दावन से भक्ति पांचाल होकर केदारखंड मानसखंड होते हुए डोटी नैपाल पहुंच गयी। डोटी से नेवाल होकर पशुपतिनाथ भगवान शंकर की आराधना कर भक्ति मिथिला प्राग्ज्ज्योतिष्पुर अंगबंग होते हुए कलिंग पहुंच गयी। भक्ति का मार्ग मानसून सरीखा है। नैपाल भक्ति के संदर्भ में भारत के इलाहाबाद शहर की माघी अमावस जिसे इलाहाबादी मौनी अमावस कहते हैं वह नैपाल चीन और हिन्दुस्तान की सांस्कृतिक त्रिवेणी है।
पिछली दो दशाब्दियों से हिन्द के पड़ोसी मुल्कों जहां श्री लंका और नैपाल का आस्थामूलक विशिष्ट उत्तर दक्षिण के दो पड़ोसी हैं। बंगला देश तथा पाकिस्तान सिंध, सीमा प्रांत पंजाब तथा बलूचिस्तान के वे हिस्से जो स्वतंत्र रियासतें न होकर क्वेटा सहित ब्रिटिश राज के हिस्से थे ये सभी इलाके वृहत्तर भारत के अपने हिस्से हैं इसलिये इनके साथ पड़ोसी धर्म की जमीनी स्थितियां यह भी बयान करती हैं कि यह जमीं हिन्द के दिल के टुकड़े हैं इसलिये इनसे पड़ोस धर्म एक खास विशिष्टता लिये है। मालदीव, म्यांमार, अफगानिस्तान, भूटान और तिब्बत भी हिन्द के जिगरी पड़ोसी देश हैं इन सभी देशों की अपनी अपनी वाणियां भी हैं। इसलिये आने वाले नये युग में भारतीय घटक राज्यों की आंतर भारतियां तथा मालदीव, श्री लंका, म्यांमार (ब्रह्मदेश), भूटान, नैपाल, तिब्बत व अफगानिस्तान के सात देश जो भारत के सप्तर्षि मंडल सरीखे भू भौगोलिक मंडल हैं तथा हिन्द के अपने दिल के टुकड़े पूर्व में बांग्ला देश तथा पश्चिम में पाकिस्तान नाम से पहचाने जारहे पंजाब, सीमा प्रांत सिंध व ब्रिटिश बलूचिस्तान याने क्वेटा का पार्श्ववर्ती वह भूभाग जो बर्तानिया राज का हिस्सा था, इनके अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश से कराची में बस गये उर्दू भाषी हिन्दुस्तानी मुसलमान पंजाबी ये सभी हिन्द के अंदरूनी पड़ोसी हैं। बंगला देश खुलेआम पाक विरोध का नारा बुलंद करने वाला बंगाली धोती वाला मुस्लिम राष्ट्र है इसलिये नस्ल विश्लेषण के साथ भारत के पड़ोसियों की संख्या सात के साथ पाकिस्तान के पांच इलाकों के रहने वाले लोग मनसा वाचा कर्मणा भारत के अंदरूनी पड़ोसी हैं जिन्हें हिन्द के लोग पट्टीदार या पाटीदार अथवा भारत के जाटों में हिन्दू जाट, सिख जाट और मुसलमान जाट कह कर पुकारते हैं जिनकी मौलिक पहचान शालिवाहन कनिष्क का शक संवत है। हिन्द के इन पड़ोसी राष्ट्र राज्यों में श्री लंका में तमिल व सिंहल, नैपाल में नैपाली और मधेसी, म्यांमार में बर्मी अफगानिस्तान में पश्तो, भूटान में भूटानी, तिब्बत में तिब्बती बोली जाती है। तिब्बती भाषा में रावण संहिता नामक ज्योतिष ग्रंथ की संस्कृत मूलकता तथा प्राचीन तिब्बती लिपि का भारतीय वाङमय की बांग्ला लिपि से साम्यता है। तिब्बती के स्वर व्यंजन भारतीय वाङमय के अनुसार ही हैं इसलिये तिब्बत की प्रवासी सरकार जो सन 1959 से परम पावन दलाई लामा के अधिपतित्व में चल रही थी वर्तमान में प्रवासी तिब्बत सरकार के निर्वाचित प्रमुख पिछले तिहाई दशक से विश्वभर में फैले हुए तिब्बतियों की निर्वाचित प्रवासी सरकार में प्रमुख लाम्ब सांग हैं।
क्या सार्क का कायाकल्प भारत का शक्ति संपात है ? नवंबर 2016 के पहले पखवाड़े के दूसरे सप्ताह में संकल्पित सार्क सम्मेलन जिसके प्रमुख वर्तमान में नैपाली प्रधानमंत्री हैं ऐसा लगता है महात्मा गांधी की प्रार्थना में भगवद्गीता के सांख्य योग के श्लोक संख्या 54 से श्लोक संख्या 72 तक जो महत्वपूर्ण बिन्दु है वह स्थिति धीः वाले व्यक्तित्त्व की है। अर्जुन ने श्रीकृष्ण से पूछा - स्थित धीः कौन है ? समाधिस्थ की स्थिति क्या है ? श्रीकृष्ण ने अर्जुन के दो सवालों का जवाब देकर यह कहा - वशो हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता। प्रज्ञा प्रतिष्ठित हो, इंद्रियां वश में हों वही व्यक्ति छिन्नसंशय हो सकता है। किसी राजनेता के लिये छिन्नसंशय होना राजयोग, राजधर्म तथा लोकसंग्रह मूलक होना पहली शर्त है। आज हिन्दुस्तान जिस चौराहे पर खड़ा है उसमें हिन्द का नेतृत्व केवल छिन्नसंशय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ही कर सकते हैं क्योंकि भारत में महात्मा गांधी के पश्चात छिन्नसंशय नेतृत्व करने की क्षमता केवल नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने अपनी इंद्रियों को वश में रख कर निर्लेप निर्विकार कर्म संपन्न करने का भगीरथ व्रत लिया है। उड़ी की घटना ने पूरा माहौल बदल डाला है भारत के पड़ोसियों की पंगत नये सिरे से खड़ी करना युगधर्म है। पाकिस्तान के जनक कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने छाती पीट कर कहा - हिन्द का मुसलमान वामन बनिया (महात्मा गांधी व पंडित नेहरू का नेतृत्व) की चाकरी नहीं करेगा। इतिहासज्ञ रामचंद्र गुह कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना को आधुनिक भारत के निर्माताओं की पंगत में खड़ा कर रहे हैं। पिछले सत्तर सालों में घटी सभी घटनाओं का सूक्ष्म विवेचन करने पर कोई भी विचारक इसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा कि पाकिस्तान मानव इतिहास को झुठलाने वाली मनोवृत्ति का प्रतीक है। जिस तरह बर्लिन की दीवार ढह गयी लगता है पाकिस्तान जो सत्तर वर्ष से अपने अस्तित्व का स्थायित्व देने का प्रयास कर रहा है कहीं वह अपने निर्माण के पिचहत्तर वर्ष पूरे न कर पाये और बंगला देश की तरह उर्दू प्रदेश कराची सिंध पंजाब सीमा प्रांत तथा बलूच यूरप की तरह स्वतंत्र भाषायी राष्ट्र न हो जायें। जो हो भारत के नेतृत्व के लिये आने वाले पांच वर्ष बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। आगामी पंद्रह अगस्त 2017 को भारत की आजादी की सप्तपदी होरही है। सात का अंक भारत के लिये बहुत महत्वपूर्ण इसलिये है कि भारतवासी बहुसंख्यक जब गृहस्थ बनता है वह सात फेरे लगाने के बाद ही विवाहित माना जाता है। दूसरी ओर सप्ताह सात दिन का होता है भगवद्गीता में सात सौ श्लोक हैं सप्तशती में सात सौ श्लोक हैं। हिन्दुस्तान के वैष्णव लोग श्रीकृष्ण को सोलह कलाओं वाला पूर्ण अवतार मानते हैं। वे भागवत सप्ताह भी करते रहते हैं। सप्त शैल, सप्त गोदावरी, सप्त सिंधु भारत का मुख्य विचार पोखर है इसलिये समय आगया लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हिन्द के पड़़ोसियों में नयी जाग्रति लायें। पहली जरूरत तिब्बत नैपाल भूटान म्यांमार श्री लंका मालदीव और अफगानिस्तान इन सात पड़ोसी राष्ट्र राज्यों की पंगत खड़ी करना पहली महत्वपूर्ण आवश्यकता है। मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव का वैयक्तिक आचार पंडित नेहरू किया करते। बिना बताये पहुंच जाते। पवनार धाम में विनोबा से मिलने गये। गांधी के पहले व दूसरे सत्याग्रही संत विनोबा व पंडित नेहरू थे। विनोबा ने पंडित नेहरू से हास्य में कहा - राज्यान्ते नरकम् ध्रुवम्। पंडित नेहरू सन्न रह गये। विनोबा ने कहा - पंडित जी मैं तो धर्मशास्त्र की बात कर रहा हूँ। धर्मशास्त्र का कथन है - राज्य करने के पश्चात नरक यात्रा करनी पड़े तो घबड़ाना नहीं चाहिये। सर्वधर्म समानत्व का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण भी विनोबा ने दिया। श्रद्धाभागवते शास्त्रे अनिन्दा अन्यत्र क्वापि हि। भागवत धर्मशास्त्र में श्रद्धा रखते हुए दुनियां में जितने धर्मशास्त्र हैं सबका सम्मान करना एवं किसी भी धर्मशास्त्र की निंदा कभी भी नहीं करना सर्वोच्च आदर्श है।
सात पड़ोसियों की पंगत बनाने के साथ साथ 42 वर्ष से अस्तित्व में आये बंगला देश तथा पाकिस्तान के घटक राज्यों की जनता के साथ हिन्दुस्तानी आत्मीयता कराची के उर्दू भाषी लोग को कराची को उर्दू प्रदेश बनाना चाहते हैं उनकी भाषा का उदय तो दिल्ली आगरा मेरठ लखनऊ बनारस इलाहाबाद गोरखपुर पटना आदि शहरों में हुआ उनका लगाव आज भी पूर्ववत उर्दू प्रदेश से है। सिंध पंजाब सीमा प्रांत तथा क्वेटा बलूचिस्तान के निवासियों से हिन्दुस्तानी मैत्रीभाव पाकिस्तान सन्मार्ग सद्बुद्धि वाला राष्ट्र राज्य बने यह हिन्द की आकांक्षा है। सात पड़ोसियों के अलावा आठवां पड़ोसी बांग्ला देश नवां पड़ोसी पाकिस्तान के वे लोग जो पंजाबी, सिंधी, उर्दू तथा बलूच बोलते हैं उनके साथ दिली दोस्ती का करार है।
जिन मुल्कों पर अंग्रेजी राज की छतरी कारगर रही आजादी के बाद भी वे मुल्क लोकतांत्रिक तौर तरीके अंग्रेजी सिस्टम से उधार लेकर चलाते आरहे हैं। हिन्दुस्तान के जो हिस्से बर्तानिया राज के अंग नहीं थे बर्तानियां के रेजिडेंट ही वहां ब्रिटेन व रियासत में पुल का काम करते। वहां की स्थितियां पूरी तरह से ब्रिटिश राज के सूत्रों से पर्याप्त भिन्न हैं रियासतों के आपसी कड़वे संबंधों में भी बर्तानियां शैली से हल करने के बजाय हिन्दुस्तानी की महान राजनीतिक विरासत वाली पुस्तक कौटिल्य का अर्थशास्त्र है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में 6000 श्लोक 572 सूत्र हैं। कुमांऊँ केसरी के नाम से विख्यात बदरी दत्त पांडे जिनका जन्म शक संवत् 1804 की वसंत पंचमी सन 1882 के दिन कनखल हरिद्वार में हुआ। उन्होंने कुमांऊँ का इतिहास और ब्रिटिश राज की कुली बरदाइश के खिलाफ एक जबर्दस्त मुहिम चलाई। मकर संक्रांति शक संवत 1842 ग्रेग्रेरियन कैलेंडर के अनुसार 14 जनवरी 1921 के दिन कुली उतार संकल्प स्वयं अपने दो अभिन्न सहयोगी हरगोविन्द पंत तथा चिरंजी लाल साह व कुमांऊँ के नौ हजार ग्राम प्रधान एवं थोकदारों के सहयोग से लिया। महात्मा गांधी ने कुमांऊँ केसरी के अहिंसक कुली उतार आंदोलन को अमरीका की दास प्रथा समाप्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण अभियान कहा। राजनीतिक चिंतक अंग्रेजी और हिन्दी पत्रकार तथा समाज सुधारक बदरी दत्त पांडे अपनी ऐतिहासिक खोज में एक नया शब्द निकाला जिसे कुमइयां भाषा में धड़ा कहा जाता है। धड़ा को सही सही समझने के लिये आन्वीक्षिकी षडविधा राजनीति का मनोयोगपूर्वक उपयोग करना बदरी दत्त पांडे जानते थे। इसी से उन्होंने गांव गांव घूम कर कुली उतार का बिगुल बजाया। भारत और उसके निकटस्थ सात पड़ोसी राष्ट्र राज्यों तथा हिन्द से न्यारे हुए अपने भाइयों के देश बांग्ला देश तथा पाकिस्तान के लोकमत को लोकसंग्रह पथ में लाने के लिये महर्षि अगस्त्य का सा प्रयास करना होगा। प्रसंगवश प्रोफेसर रघुवीर तथा भारत के पहले प्रधानमंत्री की कल्पना का भाषायी रूपांतरण भारतीय भाषाओं से अंग्रेजी में अंग्रेजी से भारतीय भाषाओं में अब 70 वर्ष पश्चात भी पटरी में नहीं आ पाया है। राष्ट्र भक्त साने गुरू जी का कहना है आंतर भारती (भारत की प्रादेशिक क्षेत्रीय भाषाओं का मंच) नये बदलते भारत की इच्छा शक्ति का द्योतक है। भारत की भाषाओं में बांगला, नैपाली, उर्दू और तमिल भारत के पड़ोसी देशों में धड़ल्ले से बोली जाती हैं। भारत के पड़ोसी देशों की पार्श्व भारती की संकल्पना सार्क प्रकाश पुंज सहित पड़ोसियों की अपनी अपनी स्वभाषाओं में भारत के पड़ोसी सार्क के नये अवतार के अवतरण पर्व में ही सुनिश्चित कर लें। सार्क का सप्तर्षि मंडल मालदीव म्यांमार भूटान तिब्बत अफगानिस्तान तथा नैपाल और श्री लंका के साथ हिन्द का पड़ोसी धर्म पार्श्व भारती याने इन देशों की भाषाओं के माध्यम से विचार विनिमय का केन्द्र बिन्दु बने। कभी कभी कोई घटना इतनी महतवपूर्ण हो जाती है कि मंच विचार का मार्ग बदल जाता है। उड़ी की घटना तथा हिन्द के दिल के टुकड़े पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद का निर्यात तथा हिन्द को Soft State मान कर चलने वाला पड़ोसी देश पाकिस्तान हिन्द की बदलती बयार को भांप नहीं पाया है। पाकिस्तान के मौजूदा शासकों और उन पर राज करने वाले सेनापतियों के मन में कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के मन का वह जिन्न घुसा हुआ है जो यह मान कर चलता रहा कि हिन्दुस्तान के बनिया वामन (महात्मा गांधी व जवाहरलाल नेहरू) के मातहत हिन्द का मुसलमान रहना नहीं चाहता। पाकिस्तान के नीति निर्णायक यह नहीं समझ पाये कि हिन्द का नेतृत्व बदल गया है। स्वतंत्र भारत में पैदा हुए नेतृत्व के हाथ में हिन्द की कमान है वह जो कहता है वह करके भी दिखाता है। हिन्द के एक अरब तीस करोड़ लोगों की दिल की धड़कन को पहचानने वाले नाड़ी वैद्य नरेन्द्र दामोदरदास मोदी सिंह गर्जना कर चुके हैं कह चुके हैं कि भारत पीओके के गिलगित बालिस्टान में तिरंगा फहरा कर ही दम लेगा। भारत की दिली हमदर्दी पाकिस्तान के पंजाबी भाषी पश्तो भाषी सीमा प्रांत सिंधी भाषी सिंधी समाज के लोकमत से उसी तरह है जिस तरह नैपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड महाशय जो कल तक माओवादी थे यह मान चुके हैं कह चुके हैं कि मोदी नैपाल के असली हितू हैं। यही कारण है कि भारत सहानुभूति वाला राष्ट्र है। सहानुभूति ही महाविभूति का प्रतीक होती है। हिन्द के पड़ोसी नैपाली वर्मी भूटानी तिब्बती पश्तो सिंहली तमिल बांग्ला वाणियों के जरिये अंतिम सांसें लेे रहा सार्क को दक्षिण एशियायी सहयोग का अद्भुत चबूतरा निर्मित करने का श्रेय भारत की षोडषी लोकसभा के नेता सदन पंद्रहवें प्रधानमंत्री सार्क का कायाकल्प करने की क्षमता रखते हैं। अगली पोस्ट में हिन्द और हिन्द के पड़ोसियों में सबका साथ सबका विकास नेतृत्व के चिंतन पोखर के दशों दिशाओं का भावी आकार कैसा हो ? इस स्पष्ट किया जायेगा।
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