क्या लोकतंत्र या डेमोक्रेसी में राजनीतिक शत्रुभाव अव्यावहारिक नहीं है ?
भारतीय वाङमय में सौरसेन चित्रकेतु का आख्यान याने एक जीवधारी का दूसरे जीवधारी का ज्ञाति (माता पिता दादा दादी परदादा परदादी नाना नानी परनाना परनानी बूढ़े परनाना बूढ़े परनानी), बंधु (भाई बहन पति पत्नी), मित्र (जिसकेे लिये हिन्दुस्तानी कहावत ‘माता मित्रम् पिता च स्वभावात् ते त्रयम् हितम्’ कही जाती है), अरि (स्पर्धा करने वाला शत्रुभाव से रहने वाला), उदासीन (निर्द्वन्द्व) तथा विद्विष प्राणहर्त्ता। ये छः स्थितियां हैं जो प्रत्येक प्राणी को दूसरे प्राणी से क्रमिक नाता बनाये रखती हैं याने एक जन्म में माता पिता, दूसरे जन्म में भाई बहन पति पत्नी, तीसरे जन्म में मित्र, चौथे जन्म में कच्चा खाऊँ चबाऊँ याने मारक, इनको अवश्यम्भावी बताया गया है। यह जीवलोक की यर्थाथता है। यहां पर केवल शत्रुभाव का ही उल्लेख इसलिये किया जारहा है। हिन्द के लोग स्वस्तिक के चिह्न साथ शुभ लाभ का स्पन्दन करते हैं। हर कोई केवल लाभ चाहता है हानि से परहेज करता है पर हानि एक ऐसी विधा है जो बिन चाहे आ जाती है। हानि से निबटने का क्या उपाय है ? जब हानि ने जीवन में आना ही है हम क्यों न उसके बारे में सही तरीके से अपनी सोच बनायें। केवल शुभ लाभ नहीं हानि का भी वरण करना सीखना जरूरी है। हानि होनी ही है तो दुःख हानि हो, रोग हानि हो, ऋण हानि हो, शोक हानि हो, शत्रु हानि हो, अपयश हानि हो, अज्ञान हानि हो। राजनीति करने वाले महानुभावों के लिये शत्रु हानि अत्यंत लाभदायी है। शत्रु हानि को शत्रुता हानि से ज्यादा सही तरीके से समझा जा सकता है। जिसे अंग्रेजी भाषा में डवदंतबील राजकुलीनता कहा जाता है वहां एक सार्वभौम राजा का दूसरे राजा से युद्धोन्माद तथा शत्रुभाव पड़ोसी राजा होने के कारण स्वाभाविक शत्रुता है पर आज की दुनियां में जहां वैश्वीकरण ने सार्वभौमता पर चक्रव्यूह खड़ा कर डाला है। कूटनीतिक शत्रुता राष्ट्र राज्य का पंचायती प्रबंधन अथवा डैमोक्रेसी याने चुनाव विधि द्वारा जिसे ज्यादा मत मिले उसका सत्तानशीन होना भले ही उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा होने के कारण वे भी सत्तानशीन हो जाते हैं उसे वस्तुतः लोकमत के नजरिये से कम वोट हासिल किये जाने पर तंत्र के कारण सत्तानशीन होगये। दरअसल में लोकतांत्रिक सत्ता में कोई एक व्यक्ति या नेता अथवा नेत्री सार्वभौम डवदंतबील की तरह पूरी जिन्दगी राज नहीं कर सकता। उसे विरोध पक्ष में बैठना सीखना ही होगा। हिन्दुस्तान की आजादी अभियान में विभिन्न विचार श्रंखलाओं वाले लोग समान उद्देश्य भारत को स्वतंत्रता दिलाना है इस नजरिये से विचार भेद के बावजूद एक दूसरे से संवाद रखते थे। आजादी के पश्चात शुरूआती सत्रह वर्ष राजनैतिक संवाद के वर्ष थे। पंडित नेहरू के निधन के पश्चात राजनीतिक दुश्मनी का बीजारोपण हुआ। राजनीतिक दलों की टूटन, सत्ता के लिये राजनीतिक दल बदल की प्रवृत्ति बढ़ी। बीसवीं शती के अंत के वर्षांे में किसी एक दल की सरकार बनना मुश्किल होगया। साझा सरकारें केन्द्र में राज करने लगीं। तमिलनाडु में द्रमुक अन्न द्रमुक, उत्तर प्रदेश में सपा बसपा, बिहार में 1991 से 2015 तक नित नये नये प्रयोग होते रहे। अंततोगत्वा नितीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन सरकार अस्तित्व में आयी। सुप्रीमो शैली व पारिवारिक राजकरण ने राजनीतिक दलों में शत्रुता संवर्धक तत्व सक्रिय होगये। आज प्रादेशिक तथा अखिल भारतीय स्तर पर जो नया शत्रुभाव उदित हुआ है वह लोकतंत्र के लिये अत्यंत घातक है। इसलिये राजनीतिक पटल में चिंतनशील समाज को दलीय या दल नेता अथवा दल नेत्री की दोस्ती-दुश्मनी भावनाओं को विवेकपूर्वक आंकने की जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। अपने राजनीतिक दल प्रमुख अथवा दल प्रमुखा के सामने राजनीतिक शत्रुता के तात्कालिक तथा दीर्घकालिक परिणतियों को खुलासे के साथ रखना होगा। अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिये डोनाल्ड टंªप की विजय ने वैश्विक चिंतन पर राष्ट्रीय चिंतन अथवा राष्ट्र के भीतर नस्लभेदी चिंतन ने एक नयी राजनीतिक इबारत लिख डाली है। देखते रहिये यदि आगामी पौने तीन महीनों में नये अमरीकी राष्ट्रपति की चिंतन शैली में परंपरा तोड़ने का माद्दा उस स्तर तक उग्र नहीं हुआ जिसका उन्होंने अपने प्रचार पक्ष में उद्बोधन किया। अब्राहम लिंकन ने डेढ़ सौ वर्षों से तीन वर्ष ज्यादा पहले जिस नस्लवाद को मटियामेट करने का भगीरथ प्रयास किया पर दासप्रथा की वृत्ति न नस्लभेद न तो महामानव अब्राहम लिंकन रोक पाये न अमरीकी समाज में श्वेत नस्ल ने अपना डंका फिर बजा डाला। संयुक्त राज्य अमरीका में मुस्लिम आबादी यहूदी आबादी के बराबर है याने संयुक्त राज्य अमरीका में रहने वाले बत्तीस लाख मुसलमान टंªप राष्ट्रपति से प्रभावित हैं।
कहीं युगान्तर आने के कारण तो राजनीतिक शत्रुता संवर्धन नहीं होरहा है। दुनियां के बहुत से चिंतक यह मान्यता रखते हैं कि भारतीय जनता पार्टी जिसके नेता नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने भारत की संसदीय परंपरा में तीस वर्ष पश्चात अपने दल को पूर्ण बहुमत दिलाया। बहुत से हिन्दुस्तानी चिंतक यह भी कहते हैं कि भाजपा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का राजनीतिक फ्रंट है पर भारत के प्रखर मुस्लिम नेता मौलाना आजाद की दृष्टि में डाक्टर हेडगेवार ने एक सुसज्जित संगठन खड़ा कर हिन्द को विभाजन की विभीषिका से बचा डाला। रूस जिसे भारतीय वाङमय ऋषि देश कहता है उसके वर्तमान नेता पुतिन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी और अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड टंªप की त्रिमूर्ति जब पारस्परिक संवाद कायम करेगी ऐसा प्रतीत होता है कि शी पिंग चाइना के मौजूदा राष्ट्रपति और खेवनहार जो सपना पाले हुए हैं कि वे माओ सरीखे व्यक्तित्त्व बन कर चाइना को स्थायित्व देंगे। टंªप के उदय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के पिछले अढ़ाई वर्ष का रपट कार्ड तथा पुतिन का ऋषि देशी चातुर्य चाइना-पाक इकानामिक कारीडोर को अंजाम होने से रोकने ही वाला है। हांगकांग का स्वतंत्र मंदारिन सोच पुष्कर ताइवान तथा सिंगापुर की मंदारिन मानसिकता शी पिंग की स्वप्निल उड़ान का जबर्दस्त रोड़ा है। बंगला देश तथा श्री लंका सरीखे हिन्दुस्तानी पड़ोसी राष्ट्र राज्य भी चाइना के प्रच्छन्न मददगार इसलिये हैं क्योंकि चीनी शास्ता उन्हें चारा डालते रहते हैं। श्रीमती सोनिया गांधी ने कांग्रेस की धरोहर सीताराम केसरी से छीन कर पूरे अठारह वर्ष कांग्रेस पार्टी पर एकछत्र अधिकार रखा। वे अपने इकलौते पुत्र राहुल गांधी को 2004 व 2009 में सत्तासीन नहीं कर पायीं। उन्होंने डाक्टर मनमोहन सिंह के माध्यम से शासन किया। नेताजी मुलायम सिंह यादव उनके मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव, मायावती बहन, सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल, महबूबा मुफ्ती उमर अब्दुल्ला, शिरोमणि अकाली दल के पिता पुत्र बादल महाशय, बिहार के लौहपुरूष लालू प्रसाद यादव, पश्चिम बंग तृणमूल कांग्रेस प्रमुखा ममता बनर्जी, तेलुगु देशम दल नेता चंद्रबाबू नायडू, तैलंगाना नेता राव, गुरू शिष्या प्रयोजन प्रतीका जयललिता उनके प्रतिपक्षी डी एम के सुप्रीमो करूणानिधि, देवगौड़ा व उनके पुत्ररत्न, महाराष्ट्र के शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे तथा कुछ बहुत हद तक महाराष्ट्र राजनीति के नाड़ी वैद्य शरद पवार व्यक्ति प्रमुख राजनीतिचेता हैं। ये सभी लोग यहां तक कि बीजू दल नेता नवीन पटनायक भी व्यक्तिमूलक राजनीति करने वाले महानुभाव हैं। उनका उद्देश्य कलिंग है कलिंग की सौरकिरणें हैं। नितीश बाबू ने बिहार में नशाबंदी की उनकी राय में नोटबंदी ने नशाबंदी के उनके काम को मदद दी है। वे नोटबंदी को साहसिक कदम मानते हैं। उनका कहना है नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने सिंह की सवारी की है। उनकी राय से नवीन पटनायक भी सहमत लगते हैं।
सुप्रीमो शैली की राजनीति करने वाले महानुभाव यह मान कर चल रहे हैं ज्यों ही नरेन्द्र दामोदरदास मोदी कोई गलती करें वे पकड़ डालें तथा आरोपों की बौछार लगायें पर नरेन्द्र मोदी का भाग्य चमक रहा है। वह हिन्द को उसके वाजिब शीर्ष स्थान पर पहुंचा कर ही दम लेंगे। उनके शत्रुभाव रखने वाले दोस्तों से केवल यही कहना है कि हिन्द में ईशनिन्दा भी ईश्वर भक्ति को ही अभिव्यक्त करता है। नारद ने युधिष्ठिर से कहा था - ईश्वर से दुश्मनी करना ईश्वर भक्ति का ही रूप है। इसलिये नरेन्द्र दामोदरदास मोदी से शत्रुता भाव रखने वाले महानुभावों को अगर वे 8-10 वर्ष पश्चात सत्तासीन होना चाहते हैं तो अपना तरीका बदल डालें। दुश्मनी को विचार भेद के तानेबाने में एक नया वितान बना डालें जिससे जब मोदी स्वयं कुर्सी छोड़ कर वानप्रस्थी बन जायें तब मोदी शत्रुओं को मौका मिले। जो भी हो आज की राजनीतिक शत्रुता को कम करने के लिये हर राजनीतिक दल को अपने एक या दो ऐसे व्यक्तियों की जीवनी लिखवानी चाहिये जिन पर कोई आरोप न हो। जो बोलने में शिष्टाचार का निर्वाह करते हों। ऐसे लोगों की जीवनियां राजनीतिक दल लोकसभा स्पीकर राज्यसभा अध्यक्ष के संज्ञान में लावें। भारत की संसद हरेक दल के परूष वाक्य का उपयोग न करने वाले शिष्टभाषी कदाचार के आरोप से मुक्त राजनीतिज्ञों की एक जीवन शैली दलीय आधार पर पहले तथा संसदीय आधार पर पुनर्वाचन कर लोकसभा तथा राज्यसभा के निर्विवाद सांसदों की जीवनियां प्रकाशित की जाये ताकि राजनीतिक दलों में शत्रुता भाव से मुक्ति का रास्ता प्रशस्त हो। राजनीति के प्रवेशार्थियों के लिये भारत के आधुनिक भारत के पचास निर्माताओं की नीति आधुनिक भारत के पचास आन्वीक्षिकी षडविधा राजनीति पारंगत व्यक्तियों की जीवनियां प्रकाशित की जायें ताकि राजनीतिक दुश्मनी का दंश कम हो सके।
एकल नेता या नेत्री प्रधान राजनीतिक समूहों में दो प्रकार के व्यक्तित्त्व हैं। पहले समूह में बिहार के लालू प्रसाद यादव उनकी धर्मचारिणी राबड़ी देवी उनके दोनों मंत्रिपद धारक पुत्रों का पारिवारिक राजतंत्र जिसमें सत्ता की डोर लालू प्रसाद यादव के ही हाथ रहने वाली है। नेताजी मुलायम सिंह यादव दूसरे राजपुरूष हैं जिनका पारिवारिक राजतंत्र पिछले 25 वर्षों से अनवरत चल रहा है। तीसरा परिवार तंत्र पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा एवं उनके पुत्रद्वय का है। जम्मू कश्मीर के अब्दुल्ला राजपरिवार एवं मुफ्ती राजपरिवार, पंजाब का बादल राजपरिवार, शिवसेना प्रमुख स्थापित शिवसेना राजपरिवार उपरोक्त तीन राजपरिवारों से कुछ बहुत पार्थक्य लिये है। शत्रु बुद्धि के शमन के लिये कौन सा राजनीतिक ंिवचार पोखर मजबूती के साथ डैमोक्रेसी में राजनीति वाले विवेकवर्धन कर सहिष्णुता का अध्याय जोड़ सकते हैं। खुली दुश्मनी सुप्रीमो केजरीवाल के तरीकों में दिल्ली के मुख्यमंत्री जो भी कदम उठाते हैं उन्हें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी अपने शत्रु प्रतीत होते हैं यद्यपि उन दोनों में पीढ़ी अंतराल के बीस वर्ष हैं। महात्मा गांधी तथा भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव रामराव अंबेडकर में भी पीढ़ी अंतराल था। बाबा साहेब को महात्मा गांधी का हर कदम तत्कालीन अछूत कहे जाने वाले समाज के लिये हितकारी प्रतीत नहीं होता था। पीढ़ी अंतराल का यह पक्ष एकतरफा था। महात्मा गांधी ने कभी भी भारत रत्न बाबा साहेब अंबेडकर को एक शब्द भी नहीं कहा इसलिये एकतरफा शत्रुता ज्यादा दिन नहीं टिकती। शत्रुता का नया उदाहरण बंग नेत्री ममता बनर्जी प्रस्तुत कर रही हैं। उन्होंने बंग में कांग्रेस तथा कम्यूनिस्ट दोनों को परास्त कर डाला। उनकी दृष्टि अब भारत के प्रधानमंत्री पद पर है। पश्चिम बंगाल का नकली नोटों का धंधा हमेशा जोरों पर रहा। नकली मुद्रा वाला प्रकरण जोर न पकड़े इसलिये उन्होंने वार पर वार करना शुरू कर दिया है पर अंततोगत्वा वे नोटबंदी और नकली नोटों के बंगाल में चलन को बढ़ावा देकर जिन लोगों के खाते नहीं हैं उन्हें एक नयी जिन्दगी नवाजना चाहती हैं।
वैयक्तिक शत्रुता लोकतंत्र का कर्कव्याधि या कैंसर सरीखा रोग है। डैमोक्रेसी के मतलब ही होते हैं एक बार तुम राज करो अगला मौका राज करने का मुझे मिले इसलिये आज की हिन्दुस्तानी राजनीतिक जरूरत यह है कि राजनीति को पैनी धार देने वाले पर राजनीतिक विरोधी के साथ सहानुभूति रखने वाले लोकंिचंतकों का चिह्नांकन होना चाहिये। चंद्रभानु गुप्त, ई.एम.एम. नंबूदिरिपाद, आचार्य नरेन्द्र देव, राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर, रामकृष्ण हेगड़े सरीखी राजनीतिज्ञों की जीवनी प्रकाशित करने के लिये लोकसभा स्पीकर, उपराष्ट्रपति तथा राष्ट्रपति द्वारा ंिचंतन किया जाना चाहिये। वर्तमान लोकसभा षोडषी लोकसभा है। पिछली पंद्रह लोकसभाओं में सभी राजनीतिक दलों के निर्विवाद व्यक्तियों का चित्रांकन करने की जरूरत है। भारत की लोकसभा स्पीकर उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा सभापति सब राष्ट्रपति द्वारा निर्विवाद तथा स्वस्थ्य राजनीति करने वाले सांसदों की संसदीय जीवनी प्रकाशित करने के लिये फोरम बनाया जाये। राजनीतिक दलों के प्रमुखों द्वारा अपने अपने दलों के सांसदीय निष्णात तथा भद्रलोक सांसदीय भाषा का प्रयोग करने वाले ऐसे सांसदों का जीवन वृत्त दें जो उनकी राय में चाणक्य सरीखी राजनीति करने वाले परूष वाक्य न बोलने वाले राजनीतिज्ञों याने सांसदों का ब्यौरा लोकसभा व राज्यसभा के स्पीकर व उपराष्ट्रपति को उपलब्ध कराये। वैरभाव त्याग सरल नहीं है उसके लिये अहर्निश मेहनत करने की जरूरत है इसलिये राजनीतिक शत्रुता पर रोक लगाने के लिये षडविधा राजनीतिक शालीनता संपन्न सांसदों की जीवनशैली भारत राष्ट्र राज्य के लोकतंत्र या डैमोक्रेसी को स्थायित्व दे सकती है।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
No comments:
Post a Comment