जेलों में गौशालायें - उत्कृष्ट मानवीय दृष्टि
हरियाणा के कारागार मंत्री महाशय कृष्ण लाल पंवार ने राज्य की 6 जेलों अंबाला, करनाल, भिवानी, जिन्द जींद, सोनीपत तथा रोहतक की प्रयोग में न आरही जमीनों में गौशाला स्थापित करने का स्तुत्य निर्णय लिया है। उ.प्र. की जेलों में 1937 के चुनावों के बाद कैदियों से चर्खा कताई अभ्यास कराने का निर्णय अठहत्तर वर्ष पूर्व लिया गया था। यद्यपि यह उपक्रम तीस वर्ष तक वेगपूर्वक चलता रहा, 1967 के पश्चात अस्थिर सरकारों में अनेक विचारधाराओं की मिलीभगत ने जेलों में चर्खा कताई और हथकरघा बुनाई के कार्यक्रम जिला प्रशासन तथा स्थानीय जेल प्रशासन की कर्मठता के कारण अनेक जेलों में चर्खा कताई हथकरघा बुनाई का सिलसिला अब भी चल रहा है उसमें शिथिलता आयी है पर जेलों के कैदी और नजरबंद लोग अपने समय का सदुपयोग चर्खा कताई करघा बुनाई के द्वारा मेहनताना अर्जित करने का लाभार्जन करते ही थे साथ ही जेल के कैदियों के लिये पहनने के कपड़े और ओढ़न बिछावन में भी खेस, चादर, दुतई आदि भी तैयार होते थे। हरियाणा गौ वंश की उन्नत नस्ल के लिये प्रसिद्धि प्राप्त क्षेत्र है। हरियाणवी हिन्दी भाषा समूह की महत्वपूर्ण भाषा या बोली भी है जिसे आज भी हरियाणा के कस्बों के मुहल्लों और गांवों लोगों की पारंपरिक वार्ता द्वारा समझा जा सकता है। इस समय देश में गौ रक्षकों के नाम पर भयावह ऊहापोह व्याप्त है। Cattle Shed or Cow Shed नहीं, हिन्द की आज के युग की मुख्य जरूरत गौशालायें हैं। देसी नस्ल की गायों को ही संवर्धित करने का लक्ष्य कारागार मंत्रालय रखे। जरसी गायें अथवा संकर गायें जेलों की गौशालाओं में प्रवेश न पा सकें इसका माकूल कानूनी इंतजाम किया जाना जरूरी है। एक जेल में अगर जमीन ज्यादा उपलब्ध हो तो एक से ज्यादा गौशालायें भी स्थापित की जा सकती हैं। एक गौशाला में 108 गायें 108 बछड़े ही प्रबंधित हों। अंबाला, करनाल, भिवानी, जींद, सोनीपत तथा रोहतक शहरों के निवासियों का भी सक्रिय सहयोग लिया जाय। जो परिवार अपने गाय बछड़ों को जेल प्रशासन संचालित गौशाला में रखने की इच्छा व्यक्त करें उनसे गाय पालने का न्यूनतम खर्चा निर्धारित कर गाय बछड़े का सुरक्षा बीमा करने का उत्तरदायित्त्व गौ स्वामी का हो। गौ स्वामी यदि स्वयं जेल गौशाला जाकर अपनी गाय स्वयं दुहे तथा तीन स्तनों से जो दूध प्रातः सायं मिलता है उसे अपने बर्तन में अपने घर ले जाये। अपनी गाय के दूध का उपभोग स्वयं व अपने परिवार से संपन्न कराये। जेल प्रशासन जिला प्रशासन का पशुपालन विभाग तथा अपनी गाय के दूध का उपभोग करने वाले नागरिकों के द्वारा चयनित तीन प्रतिनिधि गाय के पालने का खर्चा तथा जो कैदी (महिला या पुरूष) गाय की देखभाल करेगा उसका मेहनताना निश्चित कर माहवारी गोपालन व्यय की पचास प्रतिशत राशि महीने की पहली तारीख को जेल प्रशासन के गौशाला निधि में जमा करेगा शेष 50 प्रतिशत महीने के अंतिम दिन या अगले महीने की पहली तारीख को जमा करेगा। जो गोपालक स्वयं अथवा अपने परिवार के किसी वयस्क व्यक्ति को गाय दुहने दूध अपने घर लेजाने में असमर्थता व्यक्त करें उन्हें उनके घर उनकी गाय का दूध उनके बर्तन में ही पहुंचाने का प्रबंध करेगा। इसमें जो लागत लगेगी उसका निर्धारण भी कमेटी करेगी। गौपालक को निर्धारित राशि गोशाला निधि में जमा करनी होगी। इस प्रकार की व्यवस्था का संकल्प करने से कैदियों, विचाराधीन कैदियों कैद में रहने वाले अन्य व्यक्तियों और शहर के गोपालकों में एक कारगर संवाद स्थापित होगा। जेल जीवन व्यतीत कर रहे लोगों को कारगर रोजगार मिलेगा। जो कैदी सजा अवधि समाप्त होने पर अपने घर में भी गोपालन करना चाहे गौशाला प्रबंधन यदि कैदी ने कम से कम बारह वर्ष तक गो सेवा की है उसे दूध देने वाली एक गाय बछड़ा सहित सामाजिक गोदान प्रक्रिया के अंतर्गत दी जाये। सेवा अवधि बारह वर्ष से कम भी की जा सकती है। हरियाणा के जेल मंत्री महाशय को पशुपालन व कृषि मंत्री वित्त मंत्री वन मंत्री तथा रोजगार सृजन विभाग के मंत्री महानुभावों उन विभागों के सचिवों पशु विज्ञानियों तथा पशु चिकित्सा विशेषज्ञों सहित हरियाणा के 6 जेलों में प्रस्तावित गौशाला नीति निर्धारक समिति का गठन कर उस समिति को अधिकार संपन्न बनाना होगा। समिति में संबंधित शहर के गोपालक जो अपनी गाय जेल गौशाला में पालन करा रहे हैं उनके भी एक या दो प्रतिनिधि नीति निर्धारक समिति के सदस्य हों। 6 जिलों के स्वनामधन्य गोपालकों गौ विशेषज्ञों तथा उन जिलों में जहां जहां नीलगाय हैं नीलगायों को (कम से कम दो नीलगायें व एक सांड) जेल गौशाला से जोड़ा जाये। वैदिक मंत्र का कथन है -
गोमूत्रम् गोमयम् क्षीरम् दधि सर्पि कुशोदकम् निर्दिष्टम् पंचगव्यम् च पवित्रम् कायशोधनम्।
आगे का मंत्र कहता है -
मूत्रम् तु नीलवर्णाया कृष्णाया गोमयं स्मृतम्, पयश्च ताम्र वर्णायाः श्वेताया दधि संस्मृतम्।
कपिलाया घृतम् ग्राह्यम् महापातक (कष्ट) नाशनम्।
मूत्रस्येक पलम् दद्यात् तदर्धम् गोमयम् स्मृतम्, क्षीरम् सप्तपलम् दद्यात् दधि त्रिपल मुच्यते।
आज्यस्येक पलम् दद्यातं पलमेकम् कुुशोदकम्।
उपरोक्त विधि से निर्दिष्ट मात्रा में निर्दिष्ट गो उत्पाद संयुक्त कर जो पंचगव्य बनाया जायेगा और उस पंचगव्य से प्रति शनिवार शरीर लेप कर एक घंटा पश्चात नहाने से शरीर निरोग तथा हृष्टपुष्ट होगा। कैंसर तथा एचआईवी से बचने की रामबाण औषध शक्ति पंचगव्य में है। हरियाणा के जेल मंत्री महोदय राज्य के पशुपालन कृषि मंत्री वन मंत्री वित्त मंत्री रोजगार संवर्धन मंत्री महाशयों के जेलों में गौशालायें प्रसंग पर चर्चा कर माननीय मुख्यमंत्री के परामर्शानुकूल जेलों में गौशाला स्थापना प्रसंग के हरेक पहलू पर विचार विमर्श कर गौशाला व्यवस्था को कारगर स्वरूप में किस प्रकार संवर्धित किया जाये। जनसामान्य को बनावटी दूध घी के उपयोग से बचाने के रास्ते में यह सराहनीय कदम होगा। पंचगव्य के समानांतर पंचामृत निर्माण कला भी विकसित करनी होगी। आजादी से पहले हिन्द में देसी गायों की साठ नस्लें थीं। पिछले सत्तर वर्षों में देसी गायों की छत्तीस नस्लें लुप्त हो चुकी हैं। अभी मुल्क में देसी गायों की 24 नस्लें हैं। इनकी हिफाजत करना राष्ट्रधर्म है। श्वेत क्रांति के लिये भारत में यत्र तत्र सर्वत्र जरसी गायों को अत्यधिक महत्व दिया जारहा है। जरसी गायों के अलावा संकर गायों का भी बोलबाला है। यदि भारतवासी चाहते हैं कि देसी नस्ल की गायों को नष्ट होने से बचाया जाये तो श्वेत क्रांति के लिये जरसी गायों व संकर नस्ल की गायों को तरजीह देना रोकना ही होगा। जामनगर कृषि विश्वविद्यालय ने गिर (गुजरात का वन क्षेत्र) की गायों के गोमूत्र में अत्यंत विस्मयकारी अनुसंधान के द्वारा स्वर्णकण खोजे हैं। देसी गायों के गोमूत्र, गोबर, दूध, दही तथा घी का वैज्ञानिक रासायनिक परीक्षण आज भारत के गोपालन को वांछित दिशा में ले जाने के लिये निहायत जरूरी है। जामनगर कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में हरियाणा सरकार गुजरात सरकार के माध्यम से गिर के गौ बछड़े बैल के उत्पाद के रासायनिक परीक्षण के समानांतर जरसी गायों के उत्पाद तथा संकर गायों के उत्पादों का भी रासायनिक परीक्षण होना चाहिये ताकि सामान्य जन को यह पता चले कि जरसी गाय के दूध, दही, घी तथा संकर गाय उत्पाद सेहत के कितने दुश्मन हैं। हरियाणा की महत्वपूर्ण स्थिति यह भी है कि इसी भूमि में सरस्वती नामक पौराणिक नदी का प्रवाह स्थल हिमालय से हिन्द महासागर के अरब सागर के प्रभास पाटन तीर्थस्थल में सरस्वती समुद्र से मिलती थी। वासुदेव श्रीकृष्ण ने अपने खानदानियों को कहा - प्रभास पाटन (सोमनाथ के पार्श्ववर्ती क्षेत्र) में जहां सरस्वती समुद्र से समागम करती है वहां चलो। समस्त द्वारका वासी पुरूष समाज सरस्वती स्नानार्थ प्रभास पाटन के लिये रवाना हुआ। शोधकर्ताओं तथा जल विशेषज्ञों का मानना है कि सरस्वती हरियाणा से होकर ही बहती थी। कुरूक्षेत्र जहां महाभारत का अठारह दिवसीय धर्मयुद्ध हुआ वह भी हरियाणा में ही है। यहीं ज्योत्सर में वासुदेव श्रीकृष्ण ने कौंतेय अर्जुन को गीता का परम कल्याणकारी उपदेश भी दिया था जिसे कृष्णार्जुन संवाद कहा जाता है। राजा हर्ष का राज्य भी हरियाणा में ही था जो अपने समय के दानियों में श्रेष्ठ था। हरियाणा के 6 जेलों में आदर्श गौशाला स्थापना से अपने को गौरक्षक कहने वाले ऐसे महाशय जो स्वयं जरसी या संकर गाय के गोउत्पाद प्रयोग में लाते हैं बात करते हैं गौरक्षा की उन्हें भी हरियाणा के 6 जेलों में स्थापित की जारही गौशालाओं से मार्गदर्शन मिलेगा व स्वयं को बनावटी गौपालक या गौरक्षक से निष्ठावान तथा सही सही गौरक्षा का रास्ता अपना सकेंगे तथा गौरक्षा स्वयं गौपालन से करेंगे। प्रचार प्रसार तथा बनावटी गौरक्षक बन कर भारतीय समाज को दिग्भ्रमित करने का रास्ता नहीं अपनायेंगे। हरियाणा के जेलमंत्री महाशय अपने उद्देश्य में सफल हों राज्य की 6 जेलों में आदर्श गौशालायें स्थापित कर गौरक्षकों का मार्गदर्शन कर सकेंगे।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
No comments:
Post a Comment