हिन्द के मीडिया द्वारा ममता दीदी की भारत यात्रा का
राजनीतिक फलितार्थ ?
राजनीतिक फलितार्थ ?
क्या 1905 का लार्ड कर्जन के फैसले वाला बंगभंग, 1947 का भारत विभाजन, उर्दू भाषी सुहरावर्दी का कायदे आजम जिन्ना समर्थन, 1971 का बंगला देश उद्भव पश्चिम बंग या बंग जो भी कहें वहां कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस का जन्म, ममता दीदी का बंग विजय हिन्द की राजनीति में बड़े अजूबे स्तूप हैं ?
इंडिया टुडे के इकतालीसवें विशेष वार्षिकांक में War of Words का सारतत्व यह है -In her Bharat Yatras and rallies against the currency ban Mamata comes across as a politician ready to spread her wings. ममता दीदी का नौ मई 2014 का बयान ‘मैंने मोदी जी को उनकी कमर में रस्सी बांध कर जेल भेज दिया होता।’ 24 नवंबर 2014 को जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री होगये थे ममता दीदी ने कहा - Modi is Danga Guru 21 November 2016., Never seen a Prime Minister who threatens his political opponents. On 21 November 2016, को भारत की स्त्री शक्ति की ओर से ममता दीदी बोलीं -Women of our country will give you fitting reply. इंडिया टुडे के विद्वान संपादक गण इसे वाक् युद्ध कह रहे हैं। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी 10 मई 2014 को कहा - यदि आपको रस्सी खदीदने के लिये टेंडर मांगने होंगे मैं आपका मेहमान हूँ बंग आया हूँ। आपको मुझे जेल भेजने में कठिनाई नहीं होगी। यह वार्ता तब की है जब लोकसभा केे चुनाव होरहे थे। 20 नवंबर 2014 को नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भारत के प्रधानमंत्री के नाते नोटबंदी के बारे में उन्होंने कहा - लाखों करोड़ों लोग चिटफंड आर्थिक हानि से पीड़ित हैं। मुझे वे लोग कोस रहे हैं जिन्होंने अनर्जित धन का जखीरा खड़ा किया है। इस संदर्भ में ममता दीदी के कथनानुसार नरेन्द्र दामोदरदास मोदी अपने राजनीतिक विरोधियों को नापने का प्रयास कर रहे हैं पर बड़ा सवाल यह है कि क्या ममता दीदी दलित हितू बहन मायावती दिल्ली के स्वयंभू अखिल भारतीय राजनेता अरविन्द केजरीवाल अथवा नेताजी मुलायम सिंह यादव इन सबका मिल कर लोकसभा में बहुमत प्राप्त सरकार के मुखिया नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का राजनीतिक विरोध के रूप में विकल्प माना जा सकता है ? दीदी ममता बनर्जी स्वयं को तृणमूल कांग्रेस की अधिपति मानती हैं। उनकी नजर में दिल्ली की अ.भा. कांग्रेस से ज्यादा स्थानीय कांग्रेस के नखरे अखरते थे। भारत में पिछले उत्तर नेहरू युग से सामूहिक राजनीतिक समझबूझ के बजाय सुप्रीमो शैली जयादा कारगर हुई है। उत्तर नेहरू युग में लाल बहादुर शास्त्री के शासन काल तक सर्व सहमति की राजनीति अपनाई जाती थी पर इंदिरा गांधी द्वारा सत्ता की डोर हाथ में लेने कांग्रेस के उम्मीदवार संजीव रेड्डी के खिलाफ मजदूर नेता बी.बी. गिरि को राष्ट्रपति पद के लिये स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा कर कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा चयनित राष्ट्रपति उम्मीदवार को हरा कर राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस को अपनी जेबी संगठन बना डाला। यहीं भारतीय राजनीति का अधोपतन शुरू हुआ। उसे पूर्णतः विखंडित होने में इंदिरा जी की हत्या के सोलह वर्षांे में भारतीय जनात पार्टी के उदय ने लोकतंत्र को रास्ते में लाने का प्रयत्न किया। कांग्रेस तब निर्जीव हो गयी थी। कांग्रेस की दल सत्ता नरसिंह राव सरकार के पतन के पश्चात एक ऐसा घुन लग गया पार्टी दस जनपथ और श्रीमती सोनिया गांधी की व्यक्तिगत जागीर होगई। सत्ता पक्ष और विपक्ष में सैद्धांतिक पार्थक्य के बावजूद राष्ट्रीय हित के बिन्दुओं पर कारगर चर्चा होनी चाहिये पर सोलहवीं लोकसभा केे 2016 के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी की नोंकझोंक में बहस लुप्त होगई। आरोप प्रत्यारोपों का बाजार सज गया। वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी को भी संसद न चलने की पीड़ा ने व्यथित किया। सत्ता पक्ष ने विपक्ष को कोसा विपक्ष ने स्पीकर तथा सत्ता पक्ष को अपने आक्रोश का निशाना बनाया। नतीजा यह हुआ कि नोटबंदी संबंधी बहस का फैसला मतदाताओं के मत पर आकर अटक गया। मार्च 2017 में विधानसभा निर्वाचन नतीजे प्रत्यक्ष होने पर नोटबंदी बनाम वोटबंदी पर मतदाताओं का निर्णय तब ज्ञात हो जायेगा जब लोग होली के रंग में रंगे होेंगे एवं नये संवत्सर (साधारण) का 29 मार्च 2017 को स्वागत करेंगे।
अथातो योग जिज्ञासा के प्रवर्तक पतंजलि के नाम पर योग और व्यापार करने वाले बाबा रामदेव जो वस्तुतः भगुवाधारी सन्यासी हैं वे भी उसी रास्ते के राही हैं जिस रास्ते नानकपंथी सिंधी भाषी आसाराम बापू जिनके करोड़ों समर्थक हिन्द के गांव गांव तक फैल चुके थे जिनकी संपत्ति का लेखाजोखा अत्यंत दुष्कर कार्य है। उन्होंने योग मार्ग की सीढ़ी (दीक्षा कहना इसलिये उपयुक्त नहीं लगता क्योंकि उन्होंने अपने गुरू लीला साह की नारायण कवच वाली विद्या सीख तो ली पर योग मर्यादाओं का पालन करने के बजाय वे वित्तशाठ्य मार्ग के राही होगये) हिन्द में आसाराम बापू और यूएसए के कैलिफोर्निया में विक्रम चौधरी ने योग मार्ग का भयावह दुरूपयोग किया। ऐसा प्रतीत होता है कि बाबा रामदेव भी उपरोक्त दो गृहस्थियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। तुलसीदास ने सम्राट अकबर को कहलाया था - संतन को सीकरी सों का काम। बाबा रामदेव ममता दीदी को भारत की प्रधानमंत्री होने का सुपात्र मानते हैं। एक नागरिक की हैसियत से यह उनका अपना मत है वे स्वतंत्र हैं जो चाहें राय व्यक्त करें। ध्यान देने की बात यह है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री जनाब अरविन्द केजरीवाल जो आआपा के संयोजक भी हैं वे कहते हैं मजीठिया को कालर पकड़ कर जेल भेजूंगा। बसपा सुप्रीमो बहन मायावती ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा भद्री के पौत्र समाजवादी पार्टी के राजपूत नेता राजा भइया को अपने समूचे शासन काल में कैदी बना कर रखा। राजनीतिक दलों के सुप्रीमो क्षत्रपों का कानून को अपने हाथ में लेना अगर किसी ने अपराध किया है कानून के तहत उसको पुलिस एक्ट के अनुसार गिरफ्तारी होगी उस कार्य में मुख्यमंत्री या राजनीतिक सुप्रीमो की भूमिका कहां है ? ऐसा प्रतीत होता है हिन्द की आजादी के बाद पैदा हुए लोग जो आज सत्तानशीन हैं उनकी पहली नजर अपने विरोधी को जेल के सींखचे में भेजने में ज्यादा है।
अब हम बंगभंग से लेकर बंगला देश बनने के छियासठ वर्षों में भारत के महत्वपूर्ण क्षेत्र अंग बंग कलिंग की त्रिवेणी में बंग जो आकार में अंग और कलिंग से पर्याप्त बड़ा था आज के युग में बंग (नवद्वीप) नदिया तीन हिस्सों में है पश्चिम बंग जिसे ममता दीदी अब बंग ही कहना ज्यादा पसंद करती हैं। बंगला देश तथा त्रिपुरा जहां के लोग बंगला भाषा भाषी हैं भारत गणतंत्र में बंगला भाषी दो राज्य पश्चिम बंग व त्रिपुरा हैं दूसरी ओर तेलुगु भाषी आंध्र व तेलंगाना हैं। बंगला भाषा का प्राबल्य बंगला देश में भी बहुतायत से है। भारत के समूचे बंगला भाषी क्षेत्र बंगला देश सहित की मौजूदा आबादी लगभग तीस करोड़ है जितनी आबादी हिन्दुस्तान की 1931 की जनगणनानुसार थी अगर बंगभंग न हुआ होता भारत विभाजन से ईस्ट पाकिस्तान न बनता। 1971 में बंगला देश के रूप में नया देश उदय होने के बजाय ईस्ट पाकिस्तान के मुसलमान शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में भारत में विलय पसंद करते। बंगला देश अस्तित्व में नहीं आता तो ममता दीदी का दिल्लीश्वरी बनने का सपना वास्तविकता में साकार हो सकता था क्योंकि आसेतु हिमाचल पूर्व से पश्चिम तक फैले हुए हिन्दुस्तान में बीस करोड़ आबादी वाला पूर्ववर्ती संयुक्त प्रांत आजकल जिसे उत्तर प्रदेश कहते हैं वह बंगला भाषी बंगाल का पिछलग्गू ही होता। शीर्ष पर बंगाल जाता पर वह न तो भाग्य को मंजूर था न बंगाली भाषी समूचे समाज को जो बंटा हुआ था। जिन लोगों ने मूलतः बंगला भाषी परंतु धाराप्रवाह हिन्दी भाषण कर्ता डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दिल्ली, मेरठ, लखनऊ, जयपुर, बनारस, इलाहाबाद व पटना में सुना है वे आजाद हिन्द की सरकार में मंत्री रहे डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी से उनकी धाराप्रवाह हिन्दी भाषण कला से प्रभावित थे। यहां तक कि पंडित नेहरू डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी को ध्यानपूर्वक सुनते थे उनके भाषण शैली के प्रशंसक थे उसी तरह जिस तरह हिन्दी भाषी जयप्रकाश नारायण, डाक्टर लोहिया तथा अटल बिहारी वाजपेयी की आशुवक्ता शैली की पंडित नेहरू प्रशंसा करते थे।
ममता दीदी हिन्दी शिक्षक शिक्षिका की खोज में हैं। वे दूर क्यों जायें उनके राज्यपाल हिन्दीभाषी हैं यदि उनसे अपनी टूटीफूटी हिन्दी - कोलकाता हिन्दी में ही बात करें तो वे हिन्दीविद हो सकती हैं। उनकी सबसे बड़ी समस्या हिन्दी न होकर क्षेत्रीय सुप्रीमो शैली है वे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री रही हैं उनसे पहले बाबू नितीश कुमार जिनसे उनकी अच्छी पटती थी अब वे बाबू नितीश कुमार को नोटबंदी समर्थन के कारण शिष्टाचार निर्वाह भी पसंद नहीं करती। बाबू नितीश कुमार भी रेलमंत्री रहे अब रेल बजट अलग से आने वाला नहीं है बाबू नितीश कुमार ममता दीदी तथा बिहार के राजनीतिक लौहपुरूष लालू प्रसाद यादव ये तीनों रेलमंत्री रहे हैं। मौजूदा रेलमंत्री सुरेश प्रभु को विचार करना चाहिये इन तीनों की कार्यशैली को जनता के सामने लाना चाहिये कि इन तीनों गैर कांग्रेसी तथा गैर भाजपा रेलमंत्रियों ने अपने कार्यकाल में रेल मंत्रालय में जो कुछ किया उस पर श्वेत पत्र जारी हो ताकि यह बात स्पष्ट हो सके कि क्या इन तीनों रेलमंत्रियों में क्षेत्रवाद प्रभावी था या वे रेलवे को अ.भा. का कार्यक्षेत्र मानते। सच्चाई जब सामने आ जायेगी ये तीनों भारत के प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी हैं। भले ही उनकी निजी पार्टी कांग्रेस या बीजेपी की तरह अखिल भारतीय महत्व नहीं पा सकती फिर भी उनकी अमर कामना है दृढ़ इच्छाशक्ति है कि वे भारत के प्रधानमंत्री बनें। हर देशभक्त चाहेगा कि वे सफल प्रधानमंत्री हों ? अभी उनके लिये वर्तमान प्रधानमंत्री को अपदस्थ कर खुद दिल्लीश्वर या दिल्लीश्वरी बनने का दिवास्वप्न ही होगा। मीडिया और राजनीतिक चिंतन पोखर के संपन्न लोग कितनी ही मेहनत न करलें उनके लिये 2019 व 2024 में बीजेपी को अपदस्थ करना टेढ़़ी खीर है।
अनर्जित धन दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई तथा मुंबई में सबसे ज्यादा मात्रा में है। कोलकाता मुंबई तथा दिल्ली में बंगला देशी घुसपैठियों तथा नकली नोटधारकों की संख्या क्या है ? इसका अनुमान करना भी बहुत कठिन कार्य है। सामान्य अनर्जित धन के अलावा पश्चिम बंगाल में नकली मुद्रा की मात्रा भी अनुमान से अत्यंत अधिक है। नोटबंदी की प्रशंसा करने के कारण दीदी ममता बनर्जी बिहार के मुख्यमंत्री बाबू नितीश कुमार से बहुत नाराज हैं। वे जो बंदर घुड़की प्रधानमंत्री को देरही हैं अगर नकली नोट वाला प्रसंग उघड़ गया रिजर्व बैंक तथा दूसरे बैंकों में नकली नोटों की आवक की मात्रा क्या है ? सही सही पता लग गया तो पश्चिम बंगाल की माली हालत गंभीर हो सकती है इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के खिलाफ दीदी ममता बनर्जी ने जो तरीका अपनाया है वह एक दूसरे तरीके से भी विचारणीय प्रतीत होता है। दीदी ममता बनर्जी नवदुर्गाओं में शैलपुत्री नहीं ब्रह्मचारिणी हैं। बंगाल कात्यायनी का अर्चक है, दूसरी ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भी अंबा भक्त हैं। उनकी वाणी में ओज है गुजराती भाषी होने के बावजूद वे हिन्दी वक्तृता में आज भारत के शिरोमणि हैं। यद्यपि अ.भा. कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष तथा अमेठी के सांसद दिवंगता इंदिरा गांधी के पौत्र दिवंगत राजीव गांधी के पुत्र राहुल गांधी पूरे वेग से मोदी विरोध पर उतर चुके हैं अपुष्ट आरोपों को प्रधानमंत्री जी पर मढ़ रहे हैं पर लगता है कि उ.प्र. के विधानसभा निर्वाचन ममें स.पा. बसपा और कांग्रेस चारों खाने चित्त होने ही वाले हैं। कहीं ऐसा न हो कि 1937 में संपन्न संयुक्त प्रांत आगरा व अवध की असंेबली के चुनाव में मुस्लिम वोट एकमुश्त मुस्लिम लीग को गया कांग्रेस को इतनी जीत मिली कि उसके स्पीकर पद के उम्मीदवार राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन ने कहा - यदि एक भी विधायक उनके खिलाफ हैं तो वे स्पीकर बनना पसंद नहीं करेंगे। इसे कहते हैं लोकतंत्र का आदर्श राजनीतिक चरित्र। टंडन जी जितने अर्से तक स्पीकर रहे उन्होंने हर विधायक के सम्मान की रक्षा की।
भारत राष्ट्र राज्य के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी राजनीतिक तपोमूर्ति हैं। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सत्तात्मक राजकरण से राजनीतिक हत्या के कारण रिक्तता संपूर्ति के योग्य दावेदार होने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर पदासीन होने का प्रयास नहीं किये क्योंकि वे हिन्द की स्वभाषायी मर्यादा समझते थे। तत्कालीन राष्ट्रपति महोदय ने इंदिरा जी के पुत्र राजीव गांधी को प्रधानमंत्री की शपथ दिलायी। 1984 से 2014 तक का प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल सहित जो उठापटकें होती रहीं मौके का फायदा उठाने वाले लोग पूरे एक दशक तक गोटियां फिट करते रहे। पहली साझा सरकार अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सजगतापूर्वक चलती रही। 2004 से 2014 तक प्रतिनिधि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्षा और गांधी परिवार की पारंपरिक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की जनप्रतिनिधि का सत्ता प्रतिनिधायन मात्र कर रहे थे। यह भी प्रारब्ध ही कहा जायेगा कि एक टेक्नोक्रेट से ब्यूरोक्रेट बने शिष्ट व्यक्ति को दस वर्ष राज करने का सौभाग्य तो मिल पर यस मैडम ! के शिष्ट संबोधन के सहारे। हिन्द की प्रधानमंत्री की कुर्सी की दावेदार दीदी ममता बनर्जी ने भीष्म प्रतिज्ञा की है कि वे जिन्दा रहें या न रहें मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी से उखाड़ देंगी। उनका अपना मत है कि हिन्द की मातृशक्ति उनका सहारा है। वे यह भी कहती हैं कि वोटबंदी भी करायेंगी। उनके इस भीष्म अभियान इतनी आत्मीयता क्यों हुई ? यह जानने के लिये बंगाल-भारत विभाजन पूर्व पाकिस्तान जो 1971 के पश्चात बांगला देश में तबदील होगया, उस बंगला देश के कितने लोग जिसकी आबादी उन्नीस करोड़ से ज्यादा है कितने बांगला देशी गैर कानूनी तौर से पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मुंबई, आसाम आदि राज्यों में पाकिस्तान द्वारा स्वयं अथवा आईएसआई के जरिये पाकिस्तान अथवा हिन्द के इलाकों छपे जाली नोट कितने हैं ? देखना यह है कि सन 2017 की पहली तिमाही में जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होंगे, पुराने जाली नोटों के समानांतर नये छपे असली अथवा जाली नोटों किस हद तक उपयोग हो पाता है। रिजर्व बैंक आफ इंडिया तथा सरकारी एवं प्राइवेट बैंकों असली व नकली नोटों का ऊँट किस करवट पर बैठते हैं ? दीदी ममता बनर्जी, बहन मायावती, अरविन्द केजरीवाल तथा भारतीय राजनीति की जितनी भी हस्तियां विमुद्रीकरण जिसे आज जनता नोटबंदी नाम से पहचानती है, बाबू नितीश कुमार की राय में मोदी ने शेर की सवारी की है। बाबू नितीश कुमार नोटबंदी को व्यापक राष्ट्रीय हित मानते हैं पर बीजेपी के विरोध व बीजेपी के गिने चुने मोदी विरोधी सांसदों सहित जितने भी लोग नोटबंदी के खिलाफ खड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो फैसला लिया है अनर्जित धन तथा अनर्जित धन उपार्जित करने के लिये विभिन्न स्तरों में होने वाली घटनाओं पर एक सशक्त वज्रपात नुमा कारवाई है। भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर जो वर्ष 2017 की जनवरी महीने की तीन तारीख को सेवानिवृत्त होकर देश के सामान्य नागरिक के तौर पर जीवनयापन करना चाहते हैं उनका मत है न्यायालय रामराज्य नहीं ला सकता। भारत के दो महाकाव्य रामायण और महाभारत रामराज्य और धर्मराज्य की व्याख्या करते हैं सोदाहरण बतलाते हैं कि रामराज्य की क्या विशेषता थी और सवा पांच हजार वर्ष पहले कुरूक्षेत्र के मैदान धर्मयुद्ध जीतने वाले अजातशत्रु राजा धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मराज्य की क्या विशेषतायें थीं। जागरूक मीडिया सहित एक अरब तीस करोड़ जनसंख्या वाले देश हिन्द के प्रधानमंत्री ने सिस्टम बदलाव, भ्रष्टाचार पर अंकुश अनर्जित धन पर पैनी नजर रख कर जो राजनीतिक तथा वैयक्तिक सदाचार के अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये जिस तरह धर्मयुद्ध का ऐलान किया है उसमें ममता माया अरविन्द केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जो अभियान छेड़ा यह एक अच्छाखासा राज धर्मयुद्ध है। अगर ममता माया अरविन्द राहुल के असली या नकली जो भी आरोप वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पर मढ़ रहे हैं गोआ, पंजाब, उ.प्र., उत्तराखंड घटक राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव ही फैसला करेंगे कि प्रधानमंत्री मोदी सही हैं या उनके व्यक्तिगत दुश्मनी के आक्रामक विरोधी जो एक नहीं एक ही साथ प्रधानमंत्री की कुर्सी के चार प्रमुख दावेदार ममता माया अरविन्द केजरीवाल व राहुल गांधी। भगवद्गीता का श्लोक - संजय अपने स्वामी राजा धृतराष्ट्र से कहता है - यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थोधनुर्धरः तत्र श्री विजयोभूतिर्ध्रुवा मतिर्मम। मनीषि राजा धृतराष्ट्र के ज्येष्ठ पुत्र महाराज कुमार सुयोधन ने बेबाक वाणी में कहा था - जानामि धर्मम् न मे प्रवृत्ति, जानामि अधर्मम् न च मे निवृत्ति।
परम वैष्णव नरेन्द्र दामोदरदास मोदी डाकोर के रणछोड़ महाराज बेट द्वारका के योगेश्वर वासुदेव कृष्ण के लिये नरसी मेेहता संकल्पित हुण्डी याप्ता हैं। द्वारकाधीश अपने बन्दे की हुण्डी सकारते ही रहेंगे। नोटबंदी के विरूद्ध उग्र से उग्रतर स्वर में क्रोधाग्नि की वाणी से जो उच्चार होरहा है नोटबंदी बनाम वोटबंदी के द्यूतकर्म का फैसला मतदाताओं ने राष्ट्रीय पंचांग के नये साल के पहले दिन - चैत्र कृष्ण अष्टमी मंगलवार 21 मार्च 2017 से पहले देना है। आने वाले संवत्सर गुड़ि पड़वा युगादि उगादि चैतीचांद का नाम उत्तर भारत के लिये साधारण नामक संवत्सर है। तब तक चुनाव होने वाले राज्यों में नई सरकारें गठित हो जायेंगी चुनाव की सरगर्मी कम हो जायेगी - इस चुनावी ज्वरों - वैष्णव ज्वर और माहेश्वर ज्वर का संघर्ष देखते रहिये। फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्टर्डम का कहना है भारत में गौतम बुद्ध महावीर स्वामी और भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री ने विवाह तो किया पर विवाहित गृहस्थ जीवन के बजाय फकीरों का रास्ता अपनाया। देखते रहिये इस नोटबंदी बनाम वोटबंदी के महासंग्राम किस्म के जुए में कौन विजयी होता है ? संस्कृत वाङमय में चूहे को अन्न तष्कर या और राज्य के कर वंचक को भी तष्कर कह कर संबोधित करता है। देखते रहिये इस नोटबंदी बनाम ममता दीदी की वोटबंदी में जुए की बाजी किसके हाथ आती है ? हिन्द का आम आदमी रामराज चाहता है या तष्कर राज ?
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अथातो योग जिज्ञासा के प्रवर्तक पतंजलि के नाम पर योग और व्यापार करने वाले बाबा रामदेव जो वस्तुतः भगुवाधारी सन्यासी हैं वे भी उसी रास्ते के राही हैं जिस रास्ते नानकपंथी सिंधी भाषी आसाराम बापू जिनके करोड़ों समर्थक हिन्द के गांव गांव तक फैल चुके थे जिनकी संपत्ति का लेखाजोखा अत्यंत दुष्कर कार्य है। उन्होंने योग मार्ग की सीढ़ी (दीक्षा कहना इसलिये उपयुक्त नहीं लगता क्योंकि उन्होंने अपने गुरू लीला साह की नारायण कवच वाली विद्या सीख तो ली पर योग मर्यादाओं का पालन करने के बजाय वे वित्तशाठ्य मार्ग के राही होगये) हिन्द में आसाराम बापू और यूएसए के कैलिफोर्निया में विक्रम चौधरी ने योग मार्ग का भयावह दुरूपयोग किया। ऐसा प्रतीत होता है कि बाबा रामदेव भी उपरोक्त दो गृहस्थियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। तुलसीदास ने सम्राट अकबर को कहलाया था - संतन को सीकरी सों का काम। बाबा रामदेव ममता दीदी को भारत की प्रधानमंत्री होने का सुपात्र मानते हैं। एक नागरिक की हैसियत से यह उनका अपना मत है वे स्वतंत्र हैं जो चाहें राय व्यक्त करें। ध्यान देने की बात यह है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री जनाब अरविन्द केजरीवाल जो आआपा के संयोजक भी हैं वे कहते हैं मजीठिया को कालर पकड़ कर जेल भेजूंगा। बसपा सुप्रीमो बहन मायावती ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा भद्री के पौत्र समाजवादी पार्टी के राजपूत नेता राजा भइया को अपने समूचे शासन काल में कैदी बना कर रखा। राजनीतिक दलों के सुप्रीमो क्षत्रपों का कानून को अपने हाथ में लेना अगर किसी ने अपराध किया है कानून के तहत उसको पुलिस एक्ट के अनुसार गिरफ्तारी होगी उस कार्य में मुख्यमंत्री या राजनीतिक सुप्रीमो की भूमिका कहां है ? ऐसा प्रतीत होता है हिन्द की आजादी के बाद पैदा हुए लोग जो आज सत्तानशीन हैं उनकी पहली नजर अपने विरोधी को जेल के सींखचे में भेजने में ज्यादा है।
अब हम बंगभंग से लेकर बंगला देश बनने के छियासठ वर्षों में भारत के महत्वपूर्ण क्षेत्र अंग बंग कलिंग की त्रिवेणी में बंग जो आकार में अंग और कलिंग से पर्याप्त बड़ा था आज के युग में बंग (नवद्वीप) नदिया तीन हिस्सों में है पश्चिम बंग जिसे ममता दीदी अब बंग ही कहना ज्यादा पसंद करती हैं। बंगला देश तथा त्रिपुरा जहां के लोग बंगला भाषा भाषी हैं भारत गणतंत्र में बंगला भाषी दो राज्य पश्चिम बंग व त्रिपुरा हैं दूसरी ओर तेलुगु भाषी आंध्र व तेलंगाना हैं। बंगला भाषा का प्राबल्य बंगला देश में भी बहुतायत से है। भारत के समूचे बंगला भाषी क्षेत्र बंगला देश सहित की मौजूदा आबादी लगभग तीस करोड़ है जितनी आबादी हिन्दुस्तान की 1931 की जनगणनानुसार थी अगर बंगभंग न हुआ होता भारत विभाजन से ईस्ट पाकिस्तान न बनता। 1971 में बंगला देश के रूप में नया देश उदय होने के बजाय ईस्ट पाकिस्तान के मुसलमान शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में भारत में विलय पसंद करते। बंगला देश अस्तित्व में नहीं आता तो ममता दीदी का दिल्लीश्वरी बनने का सपना वास्तविकता में साकार हो सकता था क्योंकि आसेतु हिमाचल पूर्व से पश्चिम तक फैले हुए हिन्दुस्तान में बीस करोड़ आबादी वाला पूर्ववर्ती संयुक्त प्रांत आजकल जिसे उत्तर प्रदेश कहते हैं वह बंगला भाषी बंगाल का पिछलग्गू ही होता। शीर्ष पर बंगाल जाता पर वह न तो भाग्य को मंजूर था न बंगाली भाषी समूचे समाज को जो बंटा हुआ था। जिन लोगों ने मूलतः बंगला भाषी परंतु धाराप्रवाह हिन्दी भाषण कर्ता डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दिल्ली, मेरठ, लखनऊ, जयपुर, बनारस, इलाहाबाद व पटना में सुना है वे आजाद हिन्द की सरकार में मंत्री रहे डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी से उनकी धाराप्रवाह हिन्दी भाषण कला से प्रभावित थे। यहां तक कि पंडित नेहरू डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी को ध्यानपूर्वक सुनते थे उनके भाषण शैली के प्रशंसक थे उसी तरह जिस तरह हिन्दी भाषी जयप्रकाश नारायण, डाक्टर लोहिया तथा अटल बिहारी वाजपेयी की आशुवक्ता शैली की पंडित नेहरू प्रशंसा करते थे।
ममता दीदी हिन्दी शिक्षक शिक्षिका की खोज में हैं। वे दूर क्यों जायें उनके राज्यपाल हिन्दीभाषी हैं यदि उनसे अपनी टूटीफूटी हिन्दी - कोलकाता हिन्दी में ही बात करें तो वे हिन्दीविद हो सकती हैं। उनकी सबसे बड़ी समस्या हिन्दी न होकर क्षेत्रीय सुप्रीमो शैली है वे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री रही हैं उनसे पहले बाबू नितीश कुमार जिनसे उनकी अच्छी पटती थी अब वे बाबू नितीश कुमार को नोटबंदी समर्थन के कारण शिष्टाचार निर्वाह भी पसंद नहीं करती। बाबू नितीश कुमार भी रेलमंत्री रहे अब रेल बजट अलग से आने वाला नहीं है बाबू नितीश कुमार ममता दीदी तथा बिहार के राजनीतिक लौहपुरूष लालू प्रसाद यादव ये तीनों रेलमंत्री रहे हैं। मौजूदा रेलमंत्री सुरेश प्रभु को विचार करना चाहिये इन तीनों की कार्यशैली को जनता के सामने लाना चाहिये कि इन तीनों गैर कांग्रेसी तथा गैर भाजपा रेलमंत्रियों ने अपने कार्यकाल में रेल मंत्रालय में जो कुछ किया उस पर श्वेत पत्र जारी हो ताकि यह बात स्पष्ट हो सके कि क्या इन तीनों रेलमंत्रियों में क्षेत्रवाद प्रभावी था या वे रेलवे को अ.भा. का कार्यक्षेत्र मानते। सच्चाई जब सामने आ जायेगी ये तीनों भारत के प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी हैं। भले ही उनकी निजी पार्टी कांग्रेस या बीजेपी की तरह अखिल भारतीय महत्व नहीं पा सकती फिर भी उनकी अमर कामना है दृढ़ इच्छाशक्ति है कि वे भारत के प्रधानमंत्री बनें। हर देशभक्त चाहेगा कि वे सफल प्रधानमंत्री हों ? अभी उनके लिये वर्तमान प्रधानमंत्री को अपदस्थ कर खुद दिल्लीश्वर या दिल्लीश्वरी बनने का दिवास्वप्न ही होगा। मीडिया और राजनीतिक चिंतन पोखर के संपन्न लोग कितनी ही मेहनत न करलें उनके लिये 2019 व 2024 में बीजेपी को अपदस्थ करना टेढ़़ी खीर है।
अनर्जित धन दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई तथा मुंबई में सबसे ज्यादा मात्रा में है। कोलकाता मुंबई तथा दिल्ली में बंगला देशी घुसपैठियों तथा नकली नोटधारकों की संख्या क्या है ? इसका अनुमान करना भी बहुत कठिन कार्य है। सामान्य अनर्जित धन के अलावा पश्चिम बंगाल में नकली मुद्रा की मात्रा भी अनुमान से अत्यंत अधिक है। नोटबंदी की प्रशंसा करने के कारण दीदी ममता बनर्जी बिहार के मुख्यमंत्री बाबू नितीश कुमार से बहुत नाराज हैं। वे जो बंदर घुड़की प्रधानमंत्री को देरही हैं अगर नकली नोट वाला प्रसंग उघड़ गया रिजर्व बैंक तथा दूसरे बैंकों में नकली नोटों की आवक की मात्रा क्या है ? सही सही पता लग गया तो पश्चिम बंगाल की माली हालत गंभीर हो सकती है इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के खिलाफ दीदी ममता बनर्जी ने जो तरीका अपनाया है वह एक दूसरे तरीके से भी विचारणीय प्रतीत होता है। दीदी ममता बनर्जी नवदुर्गाओं में शैलपुत्री नहीं ब्रह्मचारिणी हैं। बंगाल कात्यायनी का अर्चक है, दूसरी ओर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भी अंबा भक्त हैं। उनकी वाणी में ओज है गुजराती भाषी होने के बावजूद वे हिन्दी वक्तृता में आज भारत के शिरोमणि हैं। यद्यपि अ.भा. कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष तथा अमेठी के सांसद दिवंगता इंदिरा गांधी के पौत्र दिवंगत राजीव गांधी के पुत्र राहुल गांधी पूरे वेग से मोदी विरोध पर उतर चुके हैं अपुष्ट आरोपों को प्रधानमंत्री जी पर मढ़ रहे हैं पर लगता है कि उ.प्र. के विधानसभा निर्वाचन ममें स.पा. बसपा और कांग्रेस चारों खाने चित्त होने ही वाले हैं। कहीं ऐसा न हो कि 1937 में संपन्न संयुक्त प्रांत आगरा व अवध की असंेबली के चुनाव में मुस्लिम वोट एकमुश्त मुस्लिम लीग को गया कांग्रेस को इतनी जीत मिली कि उसके स्पीकर पद के उम्मीदवार राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन ने कहा - यदि एक भी विधायक उनके खिलाफ हैं तो वे स्पीकर बनना पसंद नहीं करेंगे। इसे कहते हैं लोकतंत्र का आदर्श राजनीतिक चरित्र। टंडन जी जितने अर्से तक स्पीकर रहे उन्होंने हर विधायक के सम्मान की रक्षा की।
भारत राष्ट्र राज्य के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी राजनीतिक तपोमूर्ति हैं। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सत्तात्मक राजकरण से राजनीतिक हत्या के कारण रिक्तता संपूर्ति के योग्य दावेदार होने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर पदासीन होने का प्रयास नहीं किये क्योंकि वे हिन्द की स्वभाषायी मर्यादा समझते थे। तत्कालीन राष्ट्रपति महोदय ने इंदिरा जी के पुत्र राजीव गांधी को प्रधानमंत्री की शपथ दिलायी। 1984 से 2014 तक का प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल सहित जो उठापटकें होती रहीं मौके का फायदा उठाने वाले लोग पूरे एक दशक तक गोटियां फिट करते रहे। पहली साझा सरकार अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सजगतापूर्वक चलती रही। 2004 से 2014 तक प्रतिनिधि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्षा और गांधी परिवार की पारंपरिक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की जनप्रतिनिधि का सत्ता प्रतिनिधायन मात्र कर रहे थे। यह भी प्रारब्ध ही कहा जायेगा कि एक टेक्नोक्रेट से ब्यूरोक्रेट बने शिष्ट व्यक्ति को दस वर्ष राज करने का सौभाग्य तो मिल पर यस मैडम ! के शिष्ट संबोधन के सहारे। हिन्द की प्रधानमंत्री की कुर्सी की दावेदार दीदी ममता बनर्जी ने भीष्म प्रतिज्ञा की है कि वे जिन्दा रहें या न रहें मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी से उखाड़ देंगी। उनका अपना मत है कि हिन्द की मातृशक्ति उनका सहारा है। वे यह भी कहती हैं कि वोटबंदी भी करायेंगी। उनके इस भीष्म अभियान इतनी आत्मीयता क्यों हुई ? यह जानने के लिये बंगाल-भारत विभाजन पूर्व पाकिस्तान जो 1971 के पश्चात बांगला देश में तबदील होगया, उस बंगला देश के कितने लोग जिसकी आबादी उन्नीस करोड़ से ज्यादा है कितने बांगला देशी गैर कानूनी तौर से पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मुंबई, आसाम आदि राज्यों में पाकिस्तान द्वारा स्वयं अथवा आईएसआई के जरिये पाकिस्तान अथवा हिन्द के इलाकों छपे जाली नोट कितने हैं ? देखना यह है कि सन 2017 की पहली तिमाही में जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होंगे, पुराने जाली नोटों के समानांतर नये छपे असली अथवा जाली नोटों किस हद तक उपयोग हो पाता है। रिजर्व बैंक आफ इंडिया तथा सरकारी एवं प्राइवेट बैंकों असली व नकली नोटों का ऊँट किस करवट पर बैठते हैं ? दीदी ममता बनर्जी, बहन मायावती, अरविन्द केजरीवाल तथा भारतीय राजनीति की जितनी भी हस्तियां विमुद्रीकरण जिसे आज जनता नोटबंदी नाम से पहचानती है, बाबू नितीश कुमार की राय में मोदी ने शेर की सवारी की है। बाबू नितीश कुमार नोटबंदी को व्यापक राष्ट्रीय हित मानते हैं पर बीजेपी के विरोध व बीजेपी के गिने चुने मोदी विरोधी सांसदों सहित जितने भी लोग नोटबंदी के खिलाफ खड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो फैसला लिया है अनर्जित धन तथा अनर्जित धन उपार्जित करने के लिये विभिन्न स्तरों में होने वाली घटनाओं पर एक सशक्त वज्रपात नुमा कारवाई है। भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर जो वर्ष 2017 की जनवरी महीने की तीन तारीख को सेवानिवृत्त होकर देश के सामान्य नागरिक के तौर पर जीवनयापन करना चाहते हैं उनका मत है न्यायालय रामराज्य नहीं ला सकता। भारत के दो महाकाव्य रामायण और महाभारत रामराज्य और धर्मराज्य की व्याख्या करते हैं सोदाहरण बतलाते हैं कि रामराज्य की क्या विशेषता थी और सवा पांच हजार वर्ष पहले कुरूक्षेत्र के मैदान धर्मयुद्ध जीतने वाले अजातशत्रु राजा धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मराज्य की क्या विशेषतायें थीं। जागरूक मीडिया सहित एक अरब तीस करोड़ जनसंख्या वाले देश हिन्द के प्रधानमंत्री ने सिस्टम बदलाव, भ्रष्टाचार पर अंकुश अनर्जित धन पर पैनी नजर रख कर जो राजनीतिक तथा वैयक्तिक सदाचार के अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये जिस तरह धर्मयुद्ध का ऐलान किया है उसमें ममता माया अरविन्द केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जो अभियान छेड़ा यह एक अच्छाखासा राज धर्मयुद्ध है। अगर ममता माया अरविन्द राहुल के असली या नकली जो भी आरोप वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पर मढ़ रहे हैं गोआ, पंजाब, उ.प्र., उत्तराखंड घटक राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव ही फैसला करेंगे कि प्रधानमंत्री मोदी सही हैं या उनके व्यक्तिगत दुश्मनी के आक्रामक विरोधी जो एक नहीं एक ही साथ प्रधानमंत्री की कुर्सी के चार प्रमुख दावेदार ममता माया अरविन्द केजरीवाल व राहुल गांधी। भगवद्गीता का श्लोक - संजय अपने स्वामी राजा धृतराष्ट्र से कहता है - यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थोधनुर्धरः तत्र श्री विजयोभूतिर्ध्रुवा मतिर्मम। मनीषि राजा धृतराष्ट्र के ज्येष्ठ पुत्र महाराज कुमार सुयोधन ने बेबाक वाणी में कहा था - जानामि धर्मम् न मे प्रवृत्ति, जानामि अधर्मम् न च मे निवृत्ति।
परम वैष्णव नरेन्द्र दामोदरदास मोदी डाकोर के रणछोड़ महाराज बेट द्वारका के योगेश्वर वासुदेव कृष्ण के लिये नरसी मेेहता संकल्पित हुण्डी याप्ता हैं। द्वारकाधीश अपने बन्दे की हुण्डी सकारते ही रहेंगे। नोटबंदी के विरूद्ध उग्र से उग्रतर स्वर में क्रोधाग्नि की वाणी से जो उच्चार होरहा है नोटबंदी बनाम वोटबंदी के द्यूतकर्म का फैसला मतदाताओं ने राष्ट्रीय पंचांग के नये साल के पहले दिन - चैत्र कृष्ण अष्टमी मंगलवार 21 मार्च 2017 से पहले देना है। आने वाले संवत्सर गुड़ि पड़वा युगादि उगादि चैतीचांद का नाम उत्तर भारत के लिये साधारण नामक संवत्सर है। तब तक चुनाव होने वाले राज्यों में नई सरकारें गठित हो जायेंगी चुनाव की सरगर्मी कम हो जायेगी - इस चुनावी ज्वरों - वैष्णव ज्वर और माहेश्वर ज्वर का संघर्ष देखते रहिये। फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्टर्डम का कहना है भारत में गौतम बुद्ध महावीर स्वामी और भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री ने विवाह तो किया पर विवाहित गृहस्थ जीवन के बजाय फकीरों का रास्ता अपनाया। देखते रहिये इस नोटबंदी बनाम वोटबंदी के महासंग्राम किस्म के जुए में कौन विजयी होता है ? संस्कृत वाङमय में चूहे को अन्न तष्कर या और राज्य के कर वंचक को भी तष्कर कह कर संबोधित करता है। देखते रहिये इस नोटबंदी बनाम ममता दीदी की वोटबंदी में जुए की बाजी किसके हाथ आती है ? हिन्द का आम आदमी रामराज चाहता है या तष्कर राज ?
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