त्रिया चरित्रम पुरुषस्य भाग्यम दैवो न जानाति कुतो मनुष्यः
क्या शशिकला के आचरण को त्रिया चरित्र कहा जाये ?
उपरोक्त श्लोक हिन्द के वाङमय में संस्कृत साहित्य तथा संस्कृत परिहास से परिचित विद्वान यदा कदा परिहास में ही सही व्यक्त करते रहते हैं। यह ब्लागर सृष्टि तथा संसार को चलाने वाली मातृसत्ता में देखने वाला व्यक्ति है। श्रीमद्भगवद्गीता के तेरहवें अध्याय जिसे कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग (अर्थात खेत और खेत को जोतने वाला खेतिहर) पुरूषः प्रकृतिस्थो हि भुंक्ते प्रकृति जान् गुणान् कारणं गुण संगोहत्व सद्सद्योनि जन्मसु। संत ज्ञानेश्वर ने अपनी अद्भुत रचना ज्ञानेश्वरी में एक प्रसंग का उल्लेख किया। माता से पुत्र पूछता है मां तुम तो कहती हो इस दुनियां को में चला रही हूँ यह सारी सृष्टि मेरी ही देन है पर अपना नामपट देने के बजाय तुमने पिताजी का नाम लिखा है। मां बेटे से बोली कर तो सब मैं रही हूँ यह सारा संसारिक कर्मबंध मुझ पर निर्भर है जिसे तुम पिता कह रहे हो वह तो केवल ठूंठ है बीज है वह खेत में भी बीज डालता है, मैं उसका खेत हूँ करतब तो सारा मेरा है, मैंने उसका नाम पट इसलिये दिया है कि मेरे कार्य में बाधा न आवे जिन्हें पूछना हो, उसी से पूछें जिसे तुम पिता कह रहे हो। त्रिया चरित्रम् सुन कर हिन्द की मां बहनें बेटियां अपना आक्रोश व्यक्त कर सकती हैं पर वास्तविकता तो यही है कि मानव परिवार की रचयिता मात्र मां है, अगर कश्यप उनकी अनेक पत्नियों में से केवल प्रथम तीन अदिति (आदित्यादि देवताओं की मां) दिति (हिरण्यकश्यप, हिरण्याक्ष की मां और प्रह्लाद की दादी) शुंभ निशुंभ तथा वास्तुकार मय दानव की मां दनु इन तीनों को ही बहस का विषय बनाया जाये, अदिति और ‘दिति - दनु’ में भयावह सौतिया डाह था, ये तीनों बहनें शक्तिशाली मातृ प्रधान परिवार की संचालिकायें थीं मातृ प्रधान परिवार आज भी हिन्द के केरल तिर्वांकुर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं जहां परिवार का संचालन मां करती है, पिता केवल दर्शक मात्र है।
यक्ष प्रश्न यह है कि क्या चिन्नमा संबोधित होने से ही शशिकला में गुरू शिष्या प्रयोजन की वह सामर्थ्य शक्ति है ? जिसे जयललिता ने अपने सिनेमैटोग्राफिक तथा वैयक्तिक आचरण का मूल स्तंभ खड़ा किया। इस हिन्द में विष्णु सहस्त्रनाम गोपाल सहस्त्रनाम तथा ललिता सहस्त्रनाम का नित्य जप करने वाले पूरे 130 करोड़ नहीं तो बारह तेरह करोड़ नर नारियां होंगे ही जो सिख धर्मावलंबियों के जपुजी अभियान की तरह नित्य इन तीनों सहस्त्रनामों में ललिता सहस्त्रनाम एक ऐसा साध्य है जिसे ललित चक्रतीर्थ जो उत्तर प्रदेश केे सीतापुर जिले में हरदोई सीतापुर मार्ग में स्थित नैमिषारण्य जिसे अवध के लोग नीमसार भी कहते हैं, गंगा नदी की सहायक नदी गोमती का उद्भव स्थल नैमिषारण्य का चक्रतीर्थ भी है। यहां ललिता देवी का भव्य मंदिर भी है लगता है ललिता चक्रतीर्थ के कन्नडिया जयराम जयललिता पर विशेष अनुकंपा थी। आमदनी से अधिक मूल्य की संपदा अर्जन के मामले में दो दशाब्दियों से मुकदमा झेल रही जयललिता के कर्णाटक उच्च न्यायालय ने अपराधयुक्त घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के निर्णय को उल्टा कर डाला, पर मामले की मुख्य अभियुक्त जयललिता दिवंगत होगईं। मृत्यु ने उन्हें दोष मुक्त कर दिया इसे कहते हैं करम गति टारि नाहिं टरी। जिस दृढनिश्चयी कानून के ज्ञाता तथा अपने विरोधियों की अच्छी खबर लेने वाले सुब्रह्मण्यम स्वामी ने जयललिता के विरूद्ध मुकदमे को देखते रहने का कार्य किया, दिवंगता जे. जयललिता ने कभी भी अपना नखशिख विरोध करने वाले सुब्रह्मण्यम स्वामी के विरूद्ध कोई परूष वचन नहीं कहा। स्वामी ने दिवंगता जयललिता के स्वभाव की प्रशंसा करते हुए उन्हें मृत्यु उपरांत श्रद्धांजलि दी वह अद्वितीय है। इंडिया टुडे ने 20 फरवरी 2017 के अंक में जयललिता की प्रतिमूर्ति के रूप में अपने आपको स्थापित करने की अजीबोगरीब किस्म के उत्कर्ष का रास्ता अपनाने वाली शशिकला नटराजन जयललिता की विरासत हथियाने के लिये जो संघर्ष कर रही हैं उसे हिन्द के शीर्ष न्यायालय ने जिस नजरिये से देख कर शशिकला नटराजन को संपत्ति अपहरण कारिणी दोषी चारित्रिकता का अपराधी मानते हुए दण्डित किया है। हिन्द में वाराह पुराण में जातहारिणी प्रसंग वर्णित है। जातहारिणी उस स्त्री को कहते हैं जो नये जन्मे शिशु को उसकी मां की गोद से उठा कर दूसरी मां की गोद में रख देती है। पराये धन, पराये बच्चों व पराई संपत्ति का अपहरण करने का जो अपराध शशिकला नटराजन के माथे की बिन्दी बन गया है चिन्नमा विशेषण से संबोधित शशिकला नटराजन 1980 के दशक में जे. जयललिता के समीपी संपर्क में लाने का श्रेय तमिलनाडु के कुडलूर जिलाधिकारी निरूमति वी. एस. चन्द्रेलेखा को है जिन्होंने जयललिता से शशिकला को परिचित कराया। जयललिता कन्नड़ भाषी ब्राह्मण परिवार की उपज थीं वहीं शशिकला तमिलनाडु के एक शहर मनरगुडि में जन्मी उनके मातापिता स्थानीय प्रभावशाली कलग्नार समुदाय से आते थे। शशिकला विडियो कैसेट किराये पर लगाने के काम पर लगी थी। शशिकला के पति देव की नौकरी बर्खास्त होने के कारण परिवार आर्थिक बदहाली में था। ज्यों ज्यों जयललिता ने अपने सार्वजनिक कामों के फिल्मांकन का जिम्मा शशिकला को सौंप दिया कहा तो यह जाता रहा है कि शशिकला ने 1987 में अपने गुरू एम जी रामचंद्रन के निधन के कारण जिन कठिनाइयों का सामना जयललिता को करना पड़ा शशिकला में मानवीय भावनात्मक सहारा जयललिता को उपलब्ध किया सन 1987 से शशिकला जयललिता के मोसकरन स्थित आवास में रहले लग गयी। शनैः शनैः अन्ना प्रमुख दल के दलीय मामलों में पकड़ मजबूत करने में लग गयी। शशिकला के भतीजे सुधाकरण के 1995 में संपन्न विवाह समारोह को जे जयललिता ने ही संपन्न कराया। दोनों के बीच संबंधों का यह मील पत्थर नुमा मोड़ था। 1996 में डी एम के की सरकार तमिलनाडु में सत्ता में आई शशिकला पर इल्जाम लगे जयललिता ने शशिकला से दूरी बना डाली वर्ष 2000 में जयललिता ने शशिकला को अपने घर से निकाल डाला। निकाले जाने के कारण अखबारी खबरें थी कि यदि अम्मा को जेल जाना पड़ा शशिकला सत्ता अपने हाथ में लेगी। शशिकला व उनके 22 परिजन अन्ना द्रमुक से निकाल दिये गये सन 2014 में जयललिता व शशिकला गिरफ्तार हुए मामला तांसीलैंड स्थान का था शशिकला को दस करोड़ रूपये जुर्माना भी हुआ। जब 2016 में जयललिता अस्वस्थ हुई शशिकला का रोबदाब पार्टी में बढ़ गया शशिकला ने अपने परिवार साथ जिन्हें जयललिता निष्कासित कर चुकी थी फिर पार्टी में वापस ले लिया। जयललिता के निधन के पश्चात शशिकला अन्ना द्रमुक को एक साथ रखने का प्रयास कर रही हैं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने संभवतः तिरूमति शशिकला नटराजन के मनसूबों पर पानी फिराने का काम किया है। सवाल इतना ही है कि जयललिता के विश्वासभाजन जिन्हें शशिकला ने दल का नेता चुनवाया है वे कब तक शशिकला की हां में हां मिलायेंगे ? शशिकला आने वाले दस वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ पायेंगी। यदि कहीं यह साबित होगया कि शशिकला ने जयललिता की मृत्यु में जो कुभावना वाली मुद्रा अपनाई अगर वर्तमान मुख्यमंत्री को भी यह यकीन होगया कि जयललिता की मौत में शशिकला की संदेहात्मक भूमिका है जैसा सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि शशिकला किसी भी तरह से जे जयललिता की संपत्ति का उत्तराधिकार पात्रता नहीं रखती थी पर संपत्ति हड़पना उनका मानसिक संकल्प लगता था इसलिये जेल की हवा खाते खाते वर्तमान मुख्यमंत्री कब तक शशिकला के विश्वासपात्र बने रहेंगे यह बहुत बड़ा यक्ष प्रश्न है ?
मनारगुडि सत्ता परिवार की वी.के. शशिकला अपने दिवंगत भ्राता जयरामन परिवार के सलाह मशविरा पर चलती है। उनके पिता दिवंगत विवेकानंदन, माता दिवंगता कृष्णवाणी के छः संतानों में वी के शशिकला उमें के लिहाज से अपने माता पिता की तीसरी संतान है। शशिकला के पति नटराजन व कन्या प्रभावती दामाद शिवकुमार हैै। शशिकला के अग्रज तिरूसुन्दर वदनम् भाभी शांतलस्त्री को पुत्री अनुराधा एस जया टी वी की पूर्व प्रबंध निदेशक है जिनका विवाद टी टी की दिनकरन से हुआ है डाक्टर वेंकटेश तथा प्रभा शिवकुमार शशिकला के भतीजे व भतीजी हैं। अपने पितृपक्षीय सारे कुटंबी जनों को शशिकला ने जयललिता व अ.द्र.मु.क. से जोड़ा था। शशिकला ने दिवंगता जयललिता के निधन के 2 माह पश्चात कहा - मैंने अन्ना प्रमुख महासचिव का पद ग्रहण करने की सहमति इसलिये दी कि हमारे नेता मुझसे बार बार आग्रह कर रहे थे कि मैं अन्ना द्रमुक को संभालूं। यह बात शशिकला ने जयललिता की तरह ही वस्त्राभूषण पहन कर कहीं उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि आप लोग चाहते हैं कि अ. द्रमुक महासचिव व मुख्य मंत्री एक ही व्यक्ति हो मैंने आप लोगों के मत का सम्मान किया है। मैं स्वयं इस विचार की पक्षधर नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने शशिकला के समूचे स्वार्थ संकल्प की पोल हिन्द की जनता जनार्दन तथा तमिलनाडु के जे जयललिता को अम्मा का सम्मान अपने अंतर्मन से देने वाले लाखों लोग जयललिता के आकस्मिक निधन से अवाक हैं उनका स्वर नहीं निकल पारहा है। इस सारे प्रकरण में एक अद्भुत घटना यह हुई कि शशिकला के संपत्ति लालच ने संभवतः स्वयं को जयललिता अनुगामी बताना। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ होगया कि पराये धन को पराई संपत्ति को हड़पने का शिव संकल्प की हुई शशिकला की सचाई सामने आगई वे अब सजा भुगत रही हैं। आने वाले दस वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकतीं उन्होंने जो तिकड़म अपनाई है वह उन्हें कहां तक कितना लाभ देगी यह तो आने वाले समय में पता चलेगा।
स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या तमिलनाडु की लोकनेत्री जे. जयललिता ने अंतर्मन में जो आत्मानुभूति तमिल भाषी जन जन के मन की गहराई को छू गई थी वे गृहस्थ नहीं थी। सारा तमिल उनका अपना समाज था। हर तमिल उनमें मां के संतान के प्रति वात्सल्य देखता था। यहां तक कि वे लोग भी जो राजनीतिक कारणों से जयललिता के मतदाता नहीं थे पर जयललिता की वात्सल्यपूर्ण सहृदयता केे प्रशंसक थे उनमें जाति, धर्म, भाषा तथा क्षेत्रीयता की कोई भावना नहीं थी - अम्मा कैंटीन ही मां और संतान के बीच वात्सल्य पुल बनाये था। दूसरी ओर तिरूमति वी के शशिकला गृहस्थ हैं। उनके पारिवारिक हित हैं उनमें वह वातावरण शक्ति संपात नितांत असंभव है क्योंकि उनकी नजर संपत्ति हड़पने पर गड़ी हुई है। इसलिये आने वाले समय में याने तमिलनाडु के नये मुख्यमंत्री को सदन में अपना बहुमत स्थापित करने में सफलता भी मिल गई पर तमिलनाडु के वे लोग जो जयललिता के राज व्यवहार तथा वात्सल्यता के कायल हैं क्या वे दस वर्ष तक इंतजार कर सकेेंगे कि जब शशिकला जेल से छूट कर आये, उसे तमिल जनात वह सम्मान देगी जो उन्होंने जयललिता को दिया। वी के शशिकला ने अपने तौर तरीकों से यह साफ कर दिया है कि उन्हें पराई संपत्ति पर अधिकार जमाने का अधिकार है उनके समूचे प्रत्यक्ष व प्रच्छन्न राजनीतिक आचरण को तमिल जननेता जयललिता ने समय समय पर कारगर रोक लगाई। शशिकला में वह सहन शक्ति भी नहीं दिखती जो जयललिता का स्वधर्म था इसलिये शशिकला को तमिल जन वह सम्मान नहीं दे सकेंगे जो उन्होंने जयललिता के लिये व्यक्त किया। इसका मनोभावना मूलक कारण है जयललिता बात सुन कर तमिल भाषी लोग आह्लादित हो जाया करते थे। तपस्वी पुरूषों व स्त्रियों में जो तेज होता है वह मां आनंदमयी की तरह जयललिता में झलकता था। जयललिता पर कानून का जो दबाव पड़ा उन्होंने उसकी परवाह नहीं की वे बढ़ती रहीं पर शशिकला में वह शक्ति दीख नहीं रही है वे जयललिता के पहनावे चलने फिरने का वैसा अभ्यास कर रही है ताकि लोगों को पता चले कि शशिकला का आदर्श जयललिता जीवन चर्या है। जमीनी यथार्थ इसक बिल्कुल उल्टा है। जयललिता के संपर्क में आने का उद्देश्य ही लाभार्जन था जब कि एम.जी. रामचंद्रन और जयललिता केे संबंध गुरू शिष्या वाले थे। जब वी के शशिकला अपनी हालात सुधारने के लिये छटपटा रही थी उनके पतिदेव नटराजन बेरोजगार थे। घर गृृहस्थी का रोजमर्रा का खर्चा चलना भी दूभर होरहा था। कुडलूर जिलाधिकारी तिरूमति की एच चंद्रलेखा ने वी के शशिकला को जो जयललिता के संपर्क में पहुंचने में मदद की। 1980 के शुरूआती दशक वर्षों में वी के शशिकला और जे जयललिता के संबंधों में अजीबोगरीब उतार चढ़ाव आये यही उतार चढ़ाव यहां तक कि तमिलनाडु के कुछ लोगों का सोचना है कि वी के शशिकला ने सत्ता संपत्ति के भयावह सीन से प्रेरित होकर जयललिता के जीवन के लिये विषम स्थितियां खड़ी करने में कोई कोर कसर नहीं रखी अगर ओ.पी.एस. ही मुख्यमंत्री बने रहते वी के शशिकला को अपने अस्तित्व का खतरा महसूस होगया लगता है इसीलिये उन्होंने जयललिता के विस्वस्त प्रशंसक को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने के लिये प्रेरित किया अब चूंकि वी के शशिकला जेल की सजा तमिलनाडु में नहीं कर्णाटक में भुगत रही हैं। वे कन्नडिया नहीं हैं उनके लिये कन्नड़ भाषी समाज की सहानुभूति दिवास्वप्न है। मुख्यमंत्री की शपथ लेने के पश्चात अपने कामकाज में पैठ करने के दौरान नये मुख्यमंत्री शशिकला द्वारा संपन्न दांवपेचों की जानकारी पाने के पश्चात वी केे शशिकला के विपरीत भी जा सकते हैं। जयललिता तमिल लोकवत्सला थीं तमिल जन जन उन्हें मां की ममतामयी वत्सलता से दीखता था जयललिता की अपनी समूची निजी हैसियत तमिल जन वत्सलता पूर्ण थी सवाल उठता है कि अपने परिवारी जनों के दृश्य अदृश्य दुराचार तथ अपनी सत्ता संपत्ति लोलुपता का वी के शशिकला त्याग कर पायेंगी ? वी के शशिकला का गत 35 वर्षों का जो साहचर्य जयललिता को मिला जयललिता केे उदार चरित्र ने जो विश्वसनीयता वी के शशिकला पर देखी मौका आने पर शशिकला को दूध की मक्खी की तरह फेंक भी दिया। जयललिता के मानस में शशिकला संदिग्ध व्यक्तित्त्व लगती है। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला देते हुए शशिकला को दंडित किया है उससे भी यही प्रतीति होती है कि त्रिया चरित्रम् क्या क्या अनहोनी कर सकता है। शशिकला का त्रिया चरित्र हर माता बहन व बेटी पर लागू नहीं होता केवल उन्हीं पर लागू होता है जो लोभ के आगोश में थिरकने वाली महिलायें हैं। हिन्द के लोग यह भी तो कहते हैं पाप के बाप का नाम ही लोभ है जहां लोभ होगा वहां पाप होना सुनिश्चित है।
पराये धन का अपहरण पराई संतान को सूतिका गृह से चुरा कर दूसरी स्त्री की गोद में रख उसका नव बच्चा उठा कर तीसरी स्त्री के पास सुला देने वाली नवजात शिशु चोर स्त्री को जातहारिणी कहा जाता है। जातहारिणी द्वारा चुराये गये एक बच्चे ने जब वह सात साल का होगया उसने पूछा किस मां की चरण वंदना करूँ जिसने या जिसने मुझे पाल पोस कर साढ़े सात साल तक लालन पालन किया इसलिये पराई संपत्ति पराये धन को हड़पना पराये बच्चों को चुराना पराई श्रेष्ठता की भौंडी नकल कर अपने आपको श्रेष्ठ साबित करना मर्यादित व्यवहार नहीं कहा जा सकता सुप्रीम कोर्ट ने इसी अमर्यादित पराई संपत्ति हड़पने पराये धन को अपना बताने के अपराध की सजा वी के शशिकला को दी है। जयललिता की नकल कर उनका सरीखा व्यवहार करने का नाटक वैसा ही है जिस तरह रामलीला में राम के एक्टर मर्यादा पुरूषोत्तम दाशरथि राम की श्रद्धा सम्मान से प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
No comments:
Post a Comment