Friday, 3 March 2017

दांडी मार्च में कुमाऊँ की सहभागिता
क्या 78 व्यक्तियों वाले दांडी मार्च में कुमांऊँ के तत्कालीन दो नौजवान 
ज्योतिराम कांडपाल और भैरव दत्त जोशी के अलावा कोई अन्य कुमाउंनी भी सम्मिलित था ?
यदि हां तो वे महाशय कौन थे ?
महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह 78 हिन्दुस्तानियों ने दांडी मार्च में सिरकत की, यह घटना सन 1930 की है। उन अढहत्तर दांडी मार्च करने वाले लोगों में दो नौजवान मौजूदा उत्तराखंड केे तब कुमांऊँ नाम से ज्यादा प्रसिद्ध इलाके के तत्कालीन अल्मोड़ा जिले के पाली पछाऊँ परगने के पैठाणा नामक गांव के दो व्यक्ति ज्योतिराम कांडपाल और भैरव दत्त जोशी सम्मिलित हुए थे। चुनावों में सभी उम्मीदवार अपनी उपलब्धियों के साथ उनके माता पिता दादा दादी नाना नानी के हिन्द की आजादी की लड़ाई में कैसी प्रतिभागिता रही इसका खुलासा भी कर रहे थे। एक उम्मीदवार ने अपने दिवंगत का पिता श्री का नाम तो नहीं छापा और यह भी खुलासा नहीं किया कि उनके पिता किस गांव के रहने वाले थे ? केवल इतना ही लिखा कि उनके पूज्यपाद पिता महात्मा गांधी के निकटतम सहयोगी थे और महात्मा गांधी की दांडी मार्च में सन 1930 में सम्मिलित थे। उन्होंने यह भी लिखा कि उनके स्वातंत्र्य सेनानी पिता सन 1952 में दिवंगत होगये। ध्यान देने योग्य बात है कि तत्कालीन संयुक्त प्रांत आगरा व अवध के नाम से पुकारा जाने वाला वर्तमान उत्तर प्रदेश और वर्तमान उत्तराखंड एक ही राज्य था और उसमें 51 जिले थे जिनमें बलिया और अल्मोड़ा जिलों की हिन्दुस्तान की आजादी के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका थी। अल्मोड़ा और बलिया जिलों से सर्वाधिक सत्याग्रही या तो मारे गये थे या जेलों के अन्दर बन्द थे। दूसरी ध्यान देने योग्य बात यह थी कि अल्मोड़ा जिले का ताड़ीखेत नामक स्थान (रानीखेत रामनगर मार्ग में रानीखेत से सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित) में सन 1921 में प्रेम विद्यालय ताड़ीखेत की स्थापना हुई थी। दांडी मार्च करने से एक साल पहले 1929 में महात्मा गांधी साबरमती आश्रम से छोटी लाइन की गाड़ी से रवाना होकर 11 जून 1929 को अमदाबाद से रवाना हुए और 14 जून 1929 को काठगोदाम पहुंचे। उनकी यह निजी यात्रा पंडित नेहरू ने प्रबंधित की थी। दो रात उन्होंने गांधी कुटी ताड़ीखेत में बिताई उससे पहले 14 जून की रात्रि नैनीताल जाने के मोटर मार्ग के समीप पड़ने वाले ताकुला नामक गांव में महात्मा ने रात्रि विश्राम किया। अगले दिन भवाली में विशाल कुमइयां जनसमूह को संबोधित करते हुए वे 15 जून की सायं प्रेम विद्यालय ताड़ीखेत पहुंचे जहां महात्मा गांधी की एक झलक देखने के लिये कुमांऊँ के लोग दूर दूर गांवों से ताड़ीखेत आये थे। महात्मा गांधी को देखने तत्कालीन ब्रिटिश गढ़वाल याने वर्तमान पीढ़ी जिले से भी हजारों लोग ताड़ीखेत पहुंचे। कुमांऊँ की प्राकृतिक छटा को देखते हुए महात्मा ने कहा - कुमांऊँ हिन्द का स्विट्जरलैंड है। अल्मोड़ा म्यूनिसपैलिटी के अध्यक्ष फादर ओकले रामजे हाईस्कूल में अंग्रेजी के अध्यापक थे साथ ही पादरी भी। उन्होंने महात्मा गांधी का अभिनंदन करते हुए अपना भाषण हिन्दी में दिया उस अवसर पर स्थानीय कांग्रेसी जनसमूह के अगुआ कूर्मांचल केेसरी बदरी दत्त पांडे थे। वे 37 वर्ष के नौजवान थे। 1918 में महात्मा जी से कोलकाता में मिल चुके थे। 1920 में नागपुर कांग्रेस में महात्मा से अपने 50 हमजोलियों की पंगत सहित मिले थे। महात्मा गांधी व पंडित नेहरू कूर्मांचल केसरी बदरी दत्त पांडे की कर्मठता के प्रशंसक थे। वहां तब पंडित गोविन्द वल्लभ पंत विक्टर मोहन जोशी सहित बदरी दत्त पांडे के अनन्य सहयोगी हरगोविन्द पंत चिरंजी लाल साह के अलावा गरूड़ घाटी के जुझारू नेता मोहन सिंह मेहता सहित हजारों लोगों ने महात्मा गांधी के नागरिक अभिनंदन की भूरि भूरि प्रशंसा की। महात्मा की इस यात्रा में पंडित नेहरू के अलावा उनके पिता जो तब इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष थे महात्मा के कुमांऊँ प्रवास में उनके साथ थे। पंडित मोतीलाल नेहरू ने महात्मा जी को कहा - फादर ओकले सज्जन हैं उनसे प्रार्थना करें कि मेरे योग्य स्टेनोग्राफर का चयन करने की कृपा करें। द्वाराहाट अल्मोड़ा जिले का पछांऊँ का महत्वपूर्ण इलाका था। वहां के वमन गांव के शिव दत्त उपाध्याय फादर ओकले के चहेते प्रियतम शिष्यों में से थे। फादर ओकले ने महात्मा जी से कहा - महात्मा जी मेरी मान्यता है कि पंडित मोतीलाल नेहरू के लिये शिव दत्त योग्य स्टेनोग्राफर सिद्ध होंगे। महात्मा ने शिव दत्त की कड़ी परीक्षा ली और पंडित मोतीलाल को कहा - पंडित जी यह युवक आपके योग्य है। इसे अपना स्टेनोग्राफर तय करें। पंडित शिव दत्त 1929 से पंडित मोतीलाल नेहरू केे जीवनपर्यन्त उनके सहयोगी रहे। पंडित मोतीलाल नेहरू के दिवंगत होने के पश्चात वे निरंतर पंडित जवाहरलाल नेहरू को सेवा देते रहे। पंडित जी ने सदैव शिव दत्त उपाध्याय को शिव दत्त जी ही संबोधित किया। उपाध्याय जी पंडित नेहरू के स्टेनोग्राफर ही नहीं उनके स्वराज्य भवन आनंद भवन के सर्वोत्कृष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ भी थे। जब पंडित नेहरू प्रधानमंत्री होगये शिव दत्त जी ने उनसे प्रार्थना की कि वे अब सरकार हैं अपने लिये योग्य सहायक का चुनाव कर उन्हें अवकाश दें। पंडित नेहरू के शिव दत्त जी की प्रार्थना के पूर्वांश को स्वीकार कर उनसे कहा - शिव दत्त जी आप ही मेरे लिये स्टेनो चुनो। शिव दत्त जी ने अनेक युवकों को देखा परीक्षा ली उन्हें केरल निवासी एम.ओ. मथाई की काबिलियत भा गयी। उन्होंने पंडित जी से कहा - पंडित जी युवक योग्य है। चूंकि मैं मलयाली नहीं जानता इसलिये मथाई के चरित्र के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करता। संभाषणा में मुझे लगा कि चौकस देखभाल रही तो मथाई योग्य सहायक साबित हो सकता है। पंडित जी ने राजनीतिक तौर पर शिव दत्त उपाध्याय की प्रबंधन योग्यता सच्चरित्रता ईमानदारी का पूरा पूरा लाभार्जन किया। वे सतना से लोकसभा सांसद प्रथम द्वितीय तथा तृतीय निर्वाचन में चुने गये। राज्यसभा के भी सदस्य रहे। उन्होंने अपनी सादगी को कभी नहीं छोड़ा और वे हर मिलने वाले से प्रसन्नवदन होकर संभाषण कला के विशेषज्ञ थे। जब तक जिन्दा रहे राष्ट्रपति भवन के इलाके में रहे धोती कुर्ता सदरी टोपी यही उनका बाना था। अल्मोड़ा जिले के (अब बागेश्वर जिला) सरयू तट पर स्थित सुमगढ़ नामक गांव में उनकी ससुराल थी। उनके साले कृष्णानंद जोशी वर्षों तक कांग्रेस पार्लमेंटरी बोर्ड के सेक्रेटरी रहे उनकी रिश्तेदारी कराला दशौली गांवों में भी थी। दिल्ली व दिल्ली से पूर्व इलाहाबाद स्वराज्य भवन में जब इंडियन नेशनल कांग्रेस का मुख्यालय था ज्यादातर कर्मचारी अल्मोड़ा जिले के ही थे। महात्मा गांधी की तरह पंडित नेहरू को कुमांऊँ बहुत पसंद था। वे वर्षों तक अल्मोड़ा जेल में रहे उनकी विशेषता ही यह थी कि जो एक बार पंडित नेहरू के संपर्क में आया पंडित जी उसका हमेशा खयाल रखते थे। उनकी राजनीतिक परख भी उच्चकोटि की थी। 
उत्तराखंड विधान सभा सदस्यता उम्मीदवार ने अपने दिवंगत पिता श्री को महात्मा गांधी का निकटस्थ व्यक्ति अपने विज्ञापन में उल्लेखित किया है। उनकी बात सही भी हो सकती है पर इतना तय है कि दांडी मार्च करने वालों में ज्योतिराम कांडपाल व भैरव दत्त जोशी ही थे। ज्योतिराम कांडपाल के पुत्र बदरी दत्त कांडपाल इस ब्लागर के सहयोगी रहे हैं। उन्होंने कभी यह नहीं बताया कि उनकी बहन उ.प्र. में विधान परिषद सदस्या व उत्तराखंड में विधान सभा सदस्या तथा राज्य मंत्रिमंडल की कैबिनेट मिनिस्टर ही है। दूसरे दांडी मार्च करने वाले व्यक्ति भैरव दत्त जोशी के बारे में उनके पुत्र पुत्रियां कौन कौन हैं यह जानकारी एकत्र करनी पड़ेगी पर प्रतीत यह होता है कि चुनावी विज्ञापन दाता के पिता पाली पछांऊँ निवासी नहीं संभवतः कराला य दसौली जहां पाठक ब्राह्मणों की बहुतायत है वहां के रहने वाले थे। शिव दत्त उपाध्याय मूलतः द्वाराहाट के रहने वाले थे उनकी कोई रिश्तेदारी पैठाणा में भी हो सकती है। इतना तो सुनिश्चित है कि उनकी ससुराल सुमगढ़ के जोशी खानदान में भी कराला व दसौली में भी उनकी अन्य रिश्तेदारियां थीं जिससे अ.भा. कांग्रेस के इलाहाबाद ओर जंतर मंतर दिल्ली कार्यालयों पर हर चौथा कर्मचारी कुमांउनी था। उनमें विधान सभा सदस्यता की उम्मीदवार के पूज्यपाद पिता श्री भी हो सकते हैं। वास्तविकता जो हो दांडी मार्च हिन्दुस्तान की राजनीति का महत्वपूर्ण मील पत्थर है। उस मार्च से जुड़े हुए केवल दो कुमांउनी व्यक्ति हैं। यह संभव है कि विधान सभा सदस्यता की उम्मीदवार की व्यक्तिगत जानकारी के बिना उनके प्रशंसकों तथा समर्थकों ने वाहवाही लूटने के इरादे से उम्मीदवार के पिता श्री को दांडी मार्च से जोड़ा हो। यदि विज्ञापन उम्मीदवार की जानकारी के बिना छप गया तो उन्हें चाहिये कि वे अपनी स्पष्टीकरण लोकहित में जारी करें ताकि भविष्य में भ्रामक एडवर्टोरियल के जरिये राजनीतिक संशय ग्रस्तता के उदाहरण लोकसंज्ञान में न आयें। कूर्मांचल केसरी बदरी दत्त पांडे ने कुमांऊँ के इतिहास में अपने समय के स्वातंत्र्य वीरों का उल्लेख किया है पर जरूरत इस बात की है कि अल्मोड़ा जिले के जिन अठारह लोगों ने आजादी के लिये गोरा पल्टन की गोलियां सह कर अपने प्राण त्यागे और देश की आजादी के लिये आत्म बलिदान किया उनके बारे में कुली उतार अभियान के समानांतर कुमांऊँ के यशस्वी स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा गायी जाये। महाकवि कालिदास ने कहा - मूढ़ कवि यशः प्रार्थी। व्यक्ति में यश प्रार्थिता स्वाभाविक है पर यश प्रार्थिता का इतिवृत्त अतिशयोक्ति दोष से मुक्त हो। यह उन विचारकों का उत्तरदायित्त्व है जो राजनीतिक सांसारिक सहित्यिक आस्थामूलक इतिवृत्त लिखते हैं। उत्तराखंड राज्य के सृजन के अगले वर्ष नवंबर 2018 में यह नया राज्य वयस्क हो जायेगा और उत्तराखंड की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर बर्तानी हुक्मरानों द्वारा कुली बरदायश का सूत्रपात है। कुमांऊँ के पहले कमिश्नर मिस्टर ट्रेल ने अनेक अच्छे काम किये वे गौमांस भक्षी थे। कुमांऊँ के लोगों ने उनसे गौ हत्या रोकने की प्रार्थना की पर उन्होंने लोगों की इस प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया और कहा - गौ मांस तो उनके भोजन का मुख्य अंश है। वे गौ हत्या पर रोक नहीं लगायेंगे। दूसरे कामों में विशेष तौर पर अस्सीसाला बंदोबस्त उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। अस्सीसाला बन्दोबस्त की शुरूआत तो मिस्टर ट्रेल ने की उसे अमली जामा पहनाने का काम हेनरी रामजे और विकेट ने किया। हेनरी रामजे दीर्घ अवधि तक कुमांऊँ के कमिश्नर रहे। उनके कार्यकाल में ही अल्मोड़ा में रामजे हाईस्कूल की स्थापना हुई। रामजे हाईस्कूल के अंग्रेजी अध्यापक पादरी ओकले अल्मोड़ा म्यूनिसपैलिटी के सन 1929 में अध्यक्ष थे। उन्होंने ही महात्मा गांधी का नागरिक अभिनंदन संपन्न किया था तथा धाराप्रवाह हिन्दी में भाषण देकर अल्मोड़ा के लोकमानस को अचंभे में डालने का काम किया था। फादर ओकले के अलावा अल्मोड़ा के विक्टर मोहन जोशी जो स्वातंत्र्य सेनानी भी थे के अलावा इंडियन नेशनल कांग्रेस के अनेक कुमांउनी नेता उस नागरिक अभिनंदन में सम्मिलित थे। विज्ञापनों के इस युग में यह स्वाभाविक है कि अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिये लोग अतिशयोक्ति दोष अपनायें पर दांडी मार्च सरीखी महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना से अपने पुरखों को जोड़ने वाला विज्ञापन जारी करने से पहले विज्ञापन दाता को सही सही स्थिति पता करनी चाहिये कि महात्मा गांधी केे 78 सदस्यीय नमक सत्याग्रह वाले दांडी मार्च में वे 78 व्यक्ति कौन कौन थे। इस ब्लागर की जानकारी के अनुसार तत्कालीन अल्मोड़ा जिले के पाली पछाऊँ इलाके के केवल दो नौजवान ज्योतिराम कांडपाल व भैरव दत्त जोशी ने दांडी मार्च में सिरकत की थी। 
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