क्या हिन्द के अल्पसंख्यक समाज का नया मंत्र उद्गान कर जनाब नकवी हिन्दू-मुस्लिम सरोकार संवार रहे हैं ?
15 अगस्त 1947 के दिन बर्तानी पार्लमेंट ने पार्टिशन आफ इंडिया एक्ट का क्रियान्वयन करते समय हिन्दुस्तान की आबादी उन्तालीस करोड़ थी जिसमें तेईस प्रतिशत याने चौथाई से दो प्रतिशत कम मुस्लिम आबादी थी। प्रकारान्तर से यह माना जा सकता है कि हिन्दुस्तान का बंटवारा मजहबी आधार पर क्रियान्वित होते वक्त हिन्द की मुस्लिम आबादी पौने नौ करोड़ थी। सन 2017 में हिन्द की कुल जनसंख्या 130 करोड़ है जिसमें अठारह करोड़ या 180 मिलियन इस्लाम धर्मी भारत के नागरिक हैं। समूची दुनियां में मुस्लिम आबादी 160 करोड़ है जिसमें अठारह करोड़ मुसलमान भारत के नागरिक हैं। दुनियां के नक्शे में इंडोनेशिया जिसकी आबादी छब्बीस करोड़ है और आबादी का 86.1 प्रतिशत अंश इस्लाम धर्मावलंबी हैं। वहां दुनियां भर के मुसलमान जनसंख्या सवा बाईस करोड़ है याने इंडोनेशिया के नागरिकों में सवा बाईस करोड़ मुसलमान हैं जबकि पाकिस्तान जिसकी आबादी सवा उन्नीस करोड़ है वहां 97 प्रतिशत मुसलमान सुन्नी 17 प्रतिशत शिया 20 प्रतिशत ईसाई हिन्दू और इतर लोग 3 प्रतिशत हैं। यद्यपि पाकिस्तान के निर्माण में शिया मुसलमानों की प्रमुख भूमिका रही फिर भी पाकिस्तान की सुन्नी बहुल मुस्लिम आबादी शिया और अहमदिया मुसलमानों सहित कादियान वगैरह को मुसलमान मानने से इन्कार करती है। इस दृष्टिकोण को भी अगर महत्व दिया जाये तो पाकिस्तान की मुस्लिम जनसंख्या भारत की वर्तमान मुस्लिम आबादी से थोड़ा बहुत कम तो है ही, भारत विभाजनजन्य दूसरा मुस्लिम आबादी वाला बंगला देश भी आबादी के नजरिये से हिन्द से कम मुस्लिम आबादी वाला देश है। प्रोफेसर बर्नाड हेकेल की मान्यता है कि जिस मुल्क की 18 करोड़ मुस्लिम आबादी है वहां से जिहादी लोगों की संख्या लगभग शून्य के नजदीक है जबकि हिन्द के मजहबी बंटवारे से उपजे पाकिस्तान व बंगला देश में जिहादी लोग हिन्द से ज्यादा हैं ऐसा क्यों ? हिन्द के इस्लाम धर्मावलंबी हिन्द के पालिटिकल सिस्टम पर ज्यादा यकीन रखने वाले लोग हैं। संभवतः हिन्द के इस्लाम धर्मावलंबियों पर हिन्द की पारंपरिकता तथा यहां उपजे सूफी मत व तसउफ ने हिन्द के मुसलमानों को नैतिक आश्वासन से लाभान्वित कराया है। हिन्द का वासी कंकर कंकर में शंकर को देखता है यहां की सभी नदियां पहाड़ अपने अपने इलाकों के महत्वपूर्ण तीर्थ हैं। बर्नाड हेकेल ने यूरप र्में Zenofobic Nationalism का प्रसंग उठाया है इसे हम हिन्दुस्तानी तौर तरीकों में घृणाधारित राष्ट्रवाद का उत्पाद मान कर चल सकते हैं। राष्ट्रवाद की यह घृणालु शैली यूरप के राष्ट्र राज्यों में कमोबेश व्याप्त है। अमरीका की Monocasual Theory जिसे हिन्दुस्तानी सोच के तरीकों में कवीन्द्र रवीन्द्र नाथ ठाकुर का एकला चलो एकला चलो अभियान का अचानक वारदात का सूत्र माना जा सकता है। चूंकि अमरीकी राष्ट्र राज्य (United States of America) यूरप के भाषायी राष्ट्र राज्यों में से एक एकदम अकेला राष्ट्र चिंतन है अमरीका प्रवासी समूह का एकत्रित होकर अपने आप को विभिन्न नस्लों भाषायी वर्गों का एक ऐसा राष्ट्रीय जमावड़ा है जिसकी उम्र जमा जमा 240 वर्ष ही है। अमरीकी राष्ट्रवाद के प्रतीक फादर अब्राहम लिंकन ने गृह युद्ध का सामना करते हुए दास प्रथा निर्मूल कर डाली। इस मुहिम में उन्हें स्वयं भी आत्मबलिदान करना पड़ा। 45वें अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सात इस्लामी देशों के नागरिकों के संयुक्त राज्य अमरीका प्रवेश पर बंदी लगाई उनका हुक्म अदालती फैसलों से प्रभावित होगया। यूरप के देशों में भी मुस्लिम शरणार्थियों की बाढ़ सी आगई पश्चिमी देशों में वैश्विक इस्लामी जिहाद अथवा आतंक राजनीतिक कूटनीतिक तथा प्रशासनिक एवं मानवाधिकार संबंधी सरोकारों से जूझती यूरप संस्कृति वैश्विक जिहाद का जो अंकुर यूरप में उगा है वह यूरप के देशों के लिये अस्तित्व का खतरा नहीं महाशय बर्नार्ड हेकल का सोचना है कि पैंतालीसवें अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उदय यूरप के देश अपने क्षेत्रीय दुश्मन जिहाद के खिलाफ अचानक आया हुआ शुभ लक्षण मानते हैं। यूरप के देशों के कई विद्वानों चिंतकों और यूरप का हित चाहने वाले लोग जिनमें टालस्टाय सरीखे चिंतक अग्रणी थे उनका विचार था कि मोहनदास करमचंद गांधी ने जिन्हें टालस्टाय ने हिन्दू संज्ञा दी और साफ साफ कहा कि औद्योगिक क्रांति ने यूरप का जो भयावह अहित किया है उसे इंडियन ओपीनियन के प्रकाशित हिन्द स्वराज के बीस अध्यायों का मनन करने के बाद यूरप के विद्वानों ने महात्मा गांधी की राय को यूरप के लिये रामबाण औषध माना। हिन्द स्वराज भारत की एक भाषा गुजराती में प्रकाशित पुस्तिका थी जिसे यूरप के विद्वानों ने अपनी अपनी मातृभाषाओं यथा अंग्रेजी रसियन जर्मन फ्रेंच पुर्तगाली स्पेनी इटैलियन सहित अपनी अपनी भाषाओं में अनूदित कर महात्मा गांधी जिन्हें तब बर्तानियां सहित यूरप के देश मोहनदास करमचंद गांधी के नाम से ही जानते थे उन्होंने जो स्वभाषायी रचना प्रस्तुत की उसे यूरप के विभिन्न भाषी विद्वानों ने युगान्तरकारी शब्द समुच्चय मान कर टालस्टाय सहित अनेक विद्वानों ने महात्मा गांधी को हिन्दू विचारक मान कर उनकी वाणी से निकले हुए शब्द समुच्चय के यूरप के लिये वरदान माना और साफ साफ कहा कि यूरप औद्योगिक क्रांति के जिस मोहजाल में फंस चुका है उससे बाहर निकलने में केवल मोहनदास करमचंद गांधी का हिन्द स्वराज ही रामबाण औषध है पर हिन्दुस्तान के विचारकों ने जिनमें मोहनदास करमचंद गांधी के राजनीतिक गुरू प्रोफेसर सर गोखले भी सम्मिलित थे उन्होंने हिन्द स्वराज को मूर्ख रचना करार दिया। मोहनदास करमचंद गांधी ने प्रोफेसर गोखले की राय के खिलाफ कुछ बोला नहीं न कुछ विरोध में लिखा। उत्तर गांधी कालखंड में गांधी निर्वाण के ग्यारह वर्ष पश्चात तथा हिन्द स्वराज लिखे जाने के पचास वर्ष पश्चात काका साहेब कालेलकर ने पंडित नेहरू व संत विनोबा भावे को भी हिन्द स्वराज के खिलाफ बताया पर पंडित नेहरू व संत विनोबा ने अपने समूचे साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक जीवन में कभी भी हिन्द स्वराज की आलोचना नहीं की पर गांधी जीवन दर्शन को अपने लेखन का मुख्य विषय मानने वाले दत्तात्रेय काका कालेलकर जिन्हें उनके जीवन में लोग काका साहेब संबोधन से बोलते थे। जिन्हें महात्मा गांधी के तीन प्राचार्यों का राजनीतिक चिंतन के लिये आचार्य जीवतराम भगवानदास कृपलानी महात्मा के आध्यात्मिक चिंतन को वेगवती धार देने वाले आचार्य विनोबा भावे तथा गांधी साहित्य सहित गांधी जीवन दर्शन की व्याख्या गुजराती मराठी तथा हिन्दी भाषाओं में संपन्न करने वाले काका साहेब कालेलकर महात्मा के तीसरे आचार्य थे। यद्यपि अवध निवासी आचार्य नरेन्द्र देव महात्मा के वैष्णव धर्मी स्वरूप के प्रशंसक तथा व्याख्याता थे पर वे अध्यापक पहले थे मीमांसा करने वाले आचार्य बाद में। उन्होंने यह स्पष्ट किया हिन्द का राजनैतिक नेतृत्व केवल वैष्णव धर्मावलंबी ही कर सकता है और सफलता के शीर्ष पर ऊर्ध्वबाहु होकर घोषित करने की क्षमता रखता है। महात्मा गांधी ने हिन्द स्वराज में हिन्दू मुस्लिम समस्या को भी गहराई तक पहुंच कर छुआ। बर्नाड हेकल ने हिन्द के 18 करोड़ मुसलमानों के बारे में अपनी दो टूक राय इंडिया ऐक्सप्रेस के प्रवीण खत्री के पांच सवालों शीलामह राजकमल झा मनीया धिकर और अमृतलाल द्वारा उठाये गये मुद्दों पर अपनी खुली राय दी, महाशय बर्नार्ड हेकल की सोच साफ है कि हिन्द का अठारह करोड़ मुसलमान जिहाद के लिये समर्पित नहीं है। जाकिर नाइक के पूर्वज कोंकणस्थ थे वे अपने नाम के साथ आज भी नायक या उपनाम जोड़ने में अपने आपको प्रसिद्धि पथ पर ले जाना चाहते हैं। उनके पूर्वजों ने तीन या चार पीढ़ी पहले इस्लाम कबूल किया होगा। महात्मा गांधी के नशामुक्ति आंदोलन को तीव्र गति देने वाले गजानन नाइक भी कोंकणस्थ थे। उन्होंने ताड़ रस से ताड़ी (नशीला पेय) को नीरा में रूपांतरित कर महात्मा गांधी के खादी ग्रामोद्योग कार्यक्रम को एक नया जीवन दिया। गांधी जीवन काल में गजानन नाइक महात्मा गांधी के उद्यमिता पक्ष के महानायक थे। हिन्दुस्तान के आजाद होने व महात्मा गांधी के निर्वाण के पश्चात 1948 में तत्कालीन पंडित नेहरू सरकार में मंत्री रहे डाक्टर राजेन्द प्रसाद ने सबसे पहला काम गजानन नाइक को ताड़ गुड़ सलाहकार नियुक्त कर संपन्न किया। 1949 से लेकर 1972 तक गजानन नाइक ने हिन्द में नीरा, ताड़ गुड़, ताड़ चीनी तथा ताड़ के पत्तों की उद्यमिता को अहर्निश परिश्रम कर स्वास्थ्यवर्धक उद्यमिता के तौर पर स्थापित किया। ताड़ी के स्थान पर हिन्द के लोगों को प्रातः नीरापान करने का शौक अपनाने के लिये प्रेरित किया। बर्नार्ड हेकल ने प्रवीण स्वामी को जाकिर नाइक के प्रसंग में प्रवीण स्वामी से कहा - यह सही है कि सलाफिज्म अथवा तव्वसुफ संशयवर्धक अभिव्यक्ति प्रतीत होती है संभवत जिस मार्ग में जाकिर नाइक चल रहे हैं उन्हें स्वयं भी उसके आदि मध्यांत का बोध नहीं है। जाकिर नाइक का चालचलन भी यह प्रतीति नहीं कराता कि वह वस्तुतः किस विचारधारा का पोषक है ? उसे धनागम होता है उसका उपयोग वह मानसिक विकृति के तरीकों से करता है। सूफी मत के ईश्वरावलंबन से संभवतः जाकिर नाइक का कोई वास्ता नहीं है। श्रीकृष्ण ने अपने फुफुरे भाई पार्थ अर्जुन को कहा था - स काले नेह महता योगो नष्टः परंतप। समय आने पर योग भी नष्ट हो जाता है। ज्ञान राशि वेद भी लुप्त हो जाया करते हैं इसलिये किसी मजहब के लोग यह मान कर चलें कि उनका मजहब उनके पैगम्बर तथा उनकी धर्म पुस्तक शास्वत है जो जन्म लेता है वह मरता जरूर है। ऐसा प्रतीत होता है कि महाशय बर्नार्ड हेकेल कोे रामकृष्ण परमहंस और ज्ञानेश्वर की तरह अंतर्मुखी ज्ञान का आभास होगया है इसलिये वे यह कहने की हिम्मत किये हुए हैं कि हिन्द के अठारह करोड़ मुसलमानों एक छोटे से वर्ग का आतंकवाद दुनियां के अस्तित्व के लिये खतरा नहीं है। अंततोगत्वा दुनियां के 1 अरब साठ करोड़ इस्लाम मतावलंबियों में जहां जहां आतंक जिहाद का बोलबाला कहा जारहा है उस सीरिया का क्षेत्रफल 1,35,180 वर्ग किलोमीटर और आबादी मात्र दो करोड़ से पंद्रह लाख कम है। जहां सुन्नी मुसलमान 74 प्रतिशत हैं सोलह प्रतिशत इस्लाम धर्म के इतर संप्रदाय हैं दस प्रतिशत ईसाई हैं। दूसरा देश लीबिया क्षेत्रफल 1759540 वर्ग किलोमीटर आबादी 63,30,159 है जिनमें सुन्नी मुस्लिम 97 प्रतिशत हैं इसलिये महाशय बर्नार्ड हेकेल के विचार को अंदर घुस कर मीमांसा करने की जरूरत प्रतीत होती है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि अपनी मजहबी और मानवाधिकार अवधारणा के कारण यूरप के ईसाई मतावलंबी भाषायी राष्ट्र मीडिया अतिशयोक्ति दोष के कारक तो नहीं बन गये हैं ? अमरीकी पैंतालीसवें राष्ट्रपति जिन इस्लामी देशों पर आप्रवासन रोक लगा रहे हैं पर वहां की अदालतें राष्ट्रपति की समर्थक नहीं पर अरब राष्ट्र समूहों ने भी अपने अपने राज्य में आतंक फैलाने वाले जिहादियों की आवाजाही रोक डाली है। इस्लाम की मौलिक विचार शक्ति आतंक के द्वारा लक्ष्यहीन हिंसा की अनुमति नहीं देता। जिहाद कहां से कैसे उदय हुआ उसका इतना संत्रास कैसे फैल गया यह विचारणीय बिन्दु है। मजहब का जो आध्यात्मिक तत्व होता है क्या उसके संदर्भ में इस्लाम धर्म को शांति के बजाय हिंसा का दूत माना जाये क्या ? जब तक सृष्टि रहेगी अनुकूल प्रतिकूल राज व्यवस्थायें चलती रहेंगी। हिन्द का सनातन राजधर्म हिरण्यकश्यप, वेन और रावण सरीखे शक्तिशाली राजाओं को दस्युधर्मी राजा मानता आरहा है। महाशय बर्नार्ड हेकेल की सोच पारंपरिक हिन्द की उस सोच से मिलती प्रतीत होती है जिसमें धरती में जीव जंतुओं का आठवां हिस्सा सदाचारी मर्यादाओं में रहने वाला होता है तथा आठवां हिस्सा जिसे जनसमाज दुराचार कहता है उसका पोषक हुआ करता है। जिस तरह आजकल डैमोक्रेसी में फ्लोटिंग वोट का रिवाज है उसी तरह जीव समाज का तीन चौथाई हिस्सा सदाचार दुराचार को अपने स्वार्थ से आंकता है, जहां लाभ दीखता है वहीं रम जाता है इसलिये जेनोफेविक नेशनलिज्म तथा मोनोकैजुअल स्थितियों का जो उल्लेख बर्नार्ड हेकल कर रहे हैं वह पृथ्वी के लिये नया नहीं है। जब से सृष्टि शुरू हुई यह क्रम चलता आरहा है। जिन लोगों को सियासत कर अपने लिये ठौर बनानी होती है वे सियासती हवा को अपने अनुकूल करने के लिये प्रयत्नशील रहते हैं। जब से संसार में माइग्रेशन, प्रवास या पर्यटन के आनंद लाभ का मार्ग खुला है सुशासन एकदम कठिन कार्य होगया है पर सुशासन असंभव नहीं है। अगर शासन करने वाला लोकनेतृत्व स्वार्थी न होकर निस्वार्थ हो, निर्भय हो, निरहंकार हो कठिनाइयों से घबराने वाला न हो तो डैमोक्रेसी में भी रामराज्य लाया जा सकता है पर यह स्थिति दिन रात सरीखी होगी। धरती में सुराज रामराज हमेशा के लिये स्थायी प्रबंध नहीं हो सकता क्योंकि शासनवर्ग का भी अपना निहित स्वार्थ रोका नहीं जा सकता, हर नेता या सरकारी अहलकार पर तीक्ष्ण नजर वाली देखरेख न तो व्यावहारिक है न ही हर मनुष्य के मानसिक, वाचिक अथवा कायिक कृत्यों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। महाशय बर्नार्ड हेकल ने हिन्द के अठारह करोड़ मुसलमानों के लिये राजनैतिक उतार चढ़़ाव में उनकी पैठ से, उनकी बात सुनी भी जाये और वे अपने समाज को यत्किंचित लाभान्वित करने की स्थिति में पहुंचें यह तभी संभव है जब नेतृत्व सबका साथ सबका विकास पूरे मनोयोग से ईमानदारी से संपन्न करे। हिन्दुस्तान के मुसलमान अल्पसंख्यकों के लिये केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग है। अनेक नामीगिरामी मुसलमान नेताओं ने इस विभाग का नेतृत्व किया पर जनाब नकवी अकेले मुसलमान नेता हैं जिन्होंने अल्पसंख्यक हित को अपना पहला कर्तव्य सुनिश्चित किया है। बर्नार्ड हेकल के चिंतन को हिन्द के मौजूदा नरेन्द्र दामोदरदास मोदी सरकार को भी करीने से सोच विचार कर लोककल्याणकारी प्रतिभागिता का लाभार्जन गरीब मुसलमान कर सके अपने हाथ की दस्तकारी से हिन्द के हस्तकौशल को दुनियां के कोने में पहुंचाने के लिये अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय को तैयार कर सकें इस सारे प्रयत्न में केवल महात्मा गांधी की खादी, हथकरघा, हाथ से स्वेटर पुलोवर टोपी जुराब दस्ताने बुनना जो मुसलमान गांवों में रहते हैं तेली तमोली कागज बनाने वाले रेशों का काम करने वाले जूता बनाने वाले हैं उनकी हाथ की कारीगरी को केवल गांधी का रास्ता ही रोजगार वाला बना सकता है यानि योजनाकार यह सोचें कि हर आदमी को अथवा हर औरत को इंजीनियर डाक्टर कम्प्यूटर आपरेटर बना कर अच्छी आमदनी वाला बनाया जायेगा तो यह केवल दिवास्वप्न होगा। हिन्द में आज भी हर तीसरा आदमी गरीबी का भारत है उसकी गरीबी का शोषण करने के बजाय उसे हाथों का काम दिलाने उसे न्यूनतम मजदूरी दिलाने की जिम्मेवारी जनाब नकवी साहब लेंगे तो हिन्द के गरीब मुसलमान अपनी गर्दन खड़ी कर आत्मसम्मान से जीने का उपक्रम कर सकेंगे। मुल्क का पालिटिकल सिस्टम पटरी में कैसे लाया जाये आज गरीबी निवारण के क्षेत्र में इसका प्रयोग स्वामी विवेकानंद तथा महात्मा गांधी के दरिद्रनारायण गरीब में नारायण का वास है उसमें भी खुद की ताकत है यह राज करने वाले तथा भारत के मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोक जो मुल्क का शासन चलाते हैं उनमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद की भावना स्फूर्त हो समाज के कम से कम वे लोग जो सदाचार में श्रद्धा रखते हैं उनमें मानव मात्र बंधु हैं यही बड़ा विवेक है पुराण पुरूषोत्तम पिता प्रभु एक है - महात्मा गांधी का यह आदर्श उन शासकों के मन को छू जाये यही सत्कल्पना है जिससे भारत विश्वबंधुत्व का अपना गुरूमंत्र स्वयं जपे और दुनियां के दूसरे राष्ट्र राज्यों में भी वह भावना जाग्रत हो जिसके बारे में श्रीमद्भागवत महापुराण का ग्यारहवां स्कंध कहता है -
रवम् वायुमग्निं सलिलम् मर्हति ज्योतिषिं सत्वानि दिशो द्रुमादीन,
सरित् समुद्रांश्च हरेःशरीरम् यत्किंच भूतम् प्रणमेदजन्यः।
यह समूची धरती खुदा की है गौड की है जिसे हिन्दू महाविष्णु कहते हैं उस हरि की है। वर्तमान वैश्विक मजहब भेद की खाई को पाटना और उग्रता पर रोक लगाने के लिये बर्नार्ड हेकल के इतर उपायों को अगले पोस्ट में पढ़ सकते हैं यह मुफीद विचार है कि जिहाद को अस्तित्व संकट से जोड़ कर न देखा जाये जिहादी मानसिकता समझने के लिये चार्वाक का गुरूमंत्र - ऋणं कृत्वा घृतम् पिवेत अपनाना होगा खुद झुकना सामने वाले को झुकाना आज वैश्विक आवश्यकता है।
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