Thursday, 18 May 2017

मुंह बाये खड़ा सवाल ?
खादी से जमीनी रोजगारयाप्ता व्यक्ति आंकड़ा तथा उन्हें बांटी गयी मजदूरी कितनी है ?
हिन्द का गरीब आदमी पंडित दीनदयाल उपाध्याय शताब्दी में खादी वालों से जवाब मांग रहा है ?? 
यह भी पूछ रहा है कि गरीब के दुःख निवारण कब और कैसे करोगे ???
बात सत्तर के दशक याने बीसवीं शती के आठवें दशक की थी। हिन्द का प्रधानमंत्रित्व श्रीमती इंदिरा गांधी किया करती थीं। उन्होंने शांति निकेतन में अपने गुरू रहे डा. जी. रामचंद्रन को खादी ग्रामोद्योग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री भारतरत्न सी. सुब्रह्मण्यम् थे। वे खादी ग्रामोद्योग अभियान के प्रशासक और समर्थक होने के अलावा कार्यक्रम की मुहिम में विसंगतियां न घुस पायें इस पर ज्यादा जोर देते थे। उन्होंने डा. जी. रामचंद्रन महाशय को मुंबई के राजभवन में तलब किया। डाक्टर साहब ने इस ब्लागर को कहा - समूचा खादी लिटरेचर लेकर मेरे साथ सी.एस. से मिलने चलो। महाशय सुब्रह्मण्यम ने वार्षिक प्रगति रपट को देख कर कहा - डी.जी.आर. यह तो बताइये कि तमिलनाडु के सलेम जिले में आपने कितने लोगों को रोजगार मुहैया किया है ? उन्होंने प्रगति रपट की सालाना विवरणिका के आंकड़ों को भ्रामक बताया। डाक्टर साहब ने इस ब्लागर को कहा आर्थिक अनुसंधान निदेशालय और तमिलनाडु के राज्य निदेशालय से सलेम जिले की रोजगार सांख्यिकी मुझे पेश करो। वास्तविकता यह थी कि खादी आयोग के प्रथम अध्यक्ष जो 1.4.1957 से तीन वर्ष पहले से अ.भा.खादी ग्रामोद्योग मंडल के सदर थे जिन्होंने खादी ग्रामोद्योग मंडल को मजबूत करने का संकल्प लिया था। वे 31 मार्च 1963 तक आयोग से जुड़े थे। उनके कार्यकाल में खादी ग्रामोद्योग आयोग का आर्थिक अनुसंधान पक्ष डा. जे.डी. सुन्दरम देखते थे जो आंकड़ों की बारीकी के विशेषज्ञ थे। बनावटी आंकड़े तैयार करना उनकी प्रकृति के विरूद्ध था। खादी आयोग के सदर वैकुंठ ल. मेहता का उन पर भरोसा था। वे वैकुंठ मेहता के खादी आयोग के सदर पद छोड़ने के सात आठ साल तक खादी आयोग से जुड़े रहे। जब उन्हें लगा कि खादी आयोग वैकुंठ ल. मेहता केे रास्ते से भटक गया है वे आयोग की नौकरी छोड़ संयुक्त राज्य अमरीका चले गये। इस घटनाक्रम को अन्दरूनी तौर पर भारत रत्न श्री सी. सुब्रह्मण्यम भलीभांति जानते थे इसीलिये उन्होंने डा. जी. रामचंद्रन को कहा - तमिलनाडु में पहला गांधी आश्रम सलेम जिले में स्थापित हुआ इसलिये वहां की सांख्यिकी चाहिये। 
टाइम्स आफ इंडिया ने मनी स्पिनर: सेल्स आफ खादी ऐंड विलेज गुड्स टौप रूपये 50 के करोड़ मार्क शीर्षक से जौह्न सरकार और सिद्धार्थ महाशय द्वय की रपट छापी है। खादी ग्रामोद्योग आयोग के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2016-2017 में जिसे उन्होंने पिछला वित्त वर्ष बताया - ग्रामोद्योगी वस्तुओं के विपणन में 24 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई जो 50 हजार करोड़ रूपये से कुछ कम है। उन्होंने खादी ग्रामोद्योग आयोग के ग्राम उद्योग श्रेणी में गिने जाने वाले उद्यमों यथा शहद उत्पादन, साबुन (संभवतः उनका तात्पर्य नीम साबुन से है), कौस्मेटिक्स, फर्नीचर, जैविक भोज्य पदार्थ याने जैविक खाद से पैदा हुए अनाज, दालें, तिलहन और फल वगैरह को गिना है। हम दूर क्यों जायें, यदि केवल शहद तथा मधुमक्खी के छत्ते का मोम ही सिंह में कितना होता है यह देखें। खादी ग्रामोद्योग आयोग के तत्वावधान में मौन पालन (बी. कीपिंग) के एपिस मेलीफेरा और एपिस इंडिका द्वारा उत्पादित शहद, छत्ते का मोम जो खादी ग्रामोद्योग आयोग की एक असरदार उद्यमिता का प्रतीक है आयोग केवल उन्हीं आंकड़ों को अपना कह सकता है। हिन्द में आसेतु हिमाचल जंगलों में शहद के छत्ते डारसिटा हनी बी कहलाते हैं। डारसिटा हनी बी का सबसे बड़ा लाभार्थी डाबर है। डाबर के अलावा वैद्यनाथ सहित जंगली शहद तथा मोम के छत्ते का व्यवसाय करने वाले लोग हिमालय की तलहटी में पत्थरकट नाम से भी जाने जाते हैं। खादी ग्रामोद्योग आयोग का आंकड़ा शास्त्र कहता है ग्रामोद्योग उत्पादों में बिक्री के लिहाज से 24 प्रतिशत बढ़त है। उन्होंने अपने महत्वपूर्ण उद्यम हाथ कागज को नहीं गिना न ही रेशों से रस्सियां बनाने मरे हुए जानवरों के चमड़े से जूते और चमड़े की अन्य चीजें बनाने का उल्लेख किया है। खादी ग्रामोद्योग आयोेग मुख्य ग्रामोद्योगों में मौनपालन के अलावा तेलघानी, ग्रामीण चर्म उद्योग, ग्रामीण लोहारी तथा ठठेरी उद्यमिता व काष्ठकारी (फर्नीचर) उद्यमिता के समानांतर ग्रामीण कुम्हारी उद्यमिता, अनाज दाल प्रशोधन उद्यमिता, वैकुंठ ल. मेहता द्वारा मीथेन गैस के ज्ञाता जसभाई पटेल के नेतृत्व में गोबर गैस योजना का संचालन इन सभी उद्यमिताओं को अगर हिन्द में आसेतु हिमाचल में उद्यम कहीं कहीं हैं। उनमें से कितने उद्यम खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा पोषित संस्थायें, सहकारी संस्थायें तथा लिज्जत पापड़ बनाने वाली संस्थायें व्यक्ति आयोग द्वारा स्वीकृत हुए हैं उनकी उपलब्धि क्या है ? क्या पचास हजार करोड़ रूपये का जो माल खादी ग्रामोद्योग आयोग बिक्री किया गया बताया जारहा है उसका ग्राम, शहर, पंचायतवार, जिलावार ब्यौरा खादी ग्रामोद्योग आयोग की सांख्यिकी में दर्ज है या खादी आयोग की प्रगति रपट तैयार करने वाले स्टाफ ने अपनी बिक्री के आंकड़ों के समूचे हिन्द के माइक्रो क्राफ्ट उद्यमिता को अपनी उपलब्धि मान लिया है। लिज्जत पापड़ आयोग का लोकप्रिय भोज्य उत्पाद है। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने देश से वी.आइ.पी. कल्चर, खासदार संस्कृति की जड़ लालबत्ती को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने शासक व शासित के फर्क को हटा दिया है उनका आदर्श मनुष्य मात्र बंधु हैं यही बड़ा विवेक है पुराण पुरूषोत्तम पिता प्रभु एक हैं। इसे कहते हैं राजा औैर रंक की बराबरी। खादी ग्रामोद्योग आयोग संकल्प लेरहा है कि आर्थिक वर्ष 2018-2019 में याने महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 से पहले खादी विपणन दुगुना याने पांच हजार करोड़ रूपये हो जायेगा याने हम अगर यह मानें कि विनोबा भावे जो हर रोज चर्खा कातते थे उनकी मान्यता थी कि उनके जीवनकाल में खादी का उत्पादन इतना भी नहीं था कि हर व्यक्ति को लंगोटी या महिला अधोवस्त्र के लायक भी खादी बनायी जा सके। विनोबा को दिवंगत हुए ही 37 साल हो चुके हैं। उन्होंने खादी में बुनियादी सुधार लाने के लिये खादी कमीशन के समानांतर स्वयंसेवी खादी मिशन गठित किया और खादी वालो को गांधी मार्ग अपनाये रहने की आध्यात्मिक प्रेरणा दी। वर्तमान में विनोबा के अनुयायी महाशय बाल विजय खादी मिशन को शक्तिमंत बनाने के प्रयास में हैं। रिपोर्टर द्वय ने लिखा - पहले खादी केवल पालिटिकल क्लास द्वारा खादी का कुर्ता और टोपी के लिये पसंद की जाती थी। यह कहना है खादी मार्क का अनुसरण करने वाले महाशय हरीश विजूर का पर रिपोर्टर अपनी बात रखते हुए कहते हैं उपभोक्ता लोग स्वाभाविक (नेचुरल) उत्पाद पसंद कर रहे हैं। शायद रिपोर्टरों को यह पता नहीं कि संयुक्त राज्य अमरीका के डाक्टर चर्म रोग पीड़ित रोगियों को हाथ कती, हाथ बुनी सूती खादी का कपड़ा पहनने की राय देते हैं। खादी मार्क बनाम पारम्परिक खादी याने चर्खे पर कते कपास से तैयार सूत को हथकरघा (पावरलूम) में बुना गया हो, उस सूत और बुने गये कपड़े में कतकर और बुनकर के अंगुलियों के पोर याने दाहिने हाथ के अंगूठे का शीर्ष, तर्जनी शीर्ष, मध्यमा शीर्ष और अनामिका शीर्ष के पोर से कता हुआ तागा और हथकरघा में बुना हुआ तागा स्वयं में योग है। महात्मा गांधी से सन 1935 के जुलाई महीने में मिलने के लिये महायोगी परमहंस योगानंद जी सेवा गांव गये। उस दिन सोमवार होने के कारण महात्मा मौन व्रती थे अतः महात्मा और महायोगी परमहंस योगानंद के बीच लिख कर के वार्ता हुई। परमहंस योगानंद का आश्रम लासऐंजल्स के समुद्र तट पर आज भी सक्रियतापूर्वक चल रहा है। परमहंस योगानंद जी ने महात्मा जी से कहा - आपका चर्खा कातना उत्कृष्ट योग है। जब चर्खा कातने में अपने आप योग हो जाता है तो बुनने में भी योग होता है। इस तरह जो कपड़ा तैयार होता है वह विशिष्ट योग है। रिपोर्टरों के अनुसार खादी ग्रामोद्योग आयोग के सदर महाशय विनय कुमार सक्सेना ने सरकार - सिद्धार्थ द्वय को बताया कि अभी तक हम स्वयं खादी निर्यात नहीं कर रहे हैं पर यथाशीघ्र हम खादी निर्यात करेंगे। इस संदर्भ में विचार योग्य बिन्दु यह है कि खादी ग्रामोद्योग आयोग को भारत सरकार ने खादी व ग्रामोद्योग उत्पादों के निर्यात के लिये 1970 के दशक में ही अधिकृत कर दिया था पर क्रियान्वयन होने से रह गया। केवल ताड़ उत्पाद वस्तु भारत सरकार के ताड़ गुड़ सलाहकार रहे महाशय गजानन नाइक निरन्तर कराते रहे। खादी का निर्यात करने वाले खादी ग्रामोद्योग आयोग एक पूर्व कर्मी जे.जयन्त कवि आयोग सेवा से निवृत्त होने के पश्चात करते रहे हैं। संप्रति वे न्यूजर्सी में अब भारतीय आभूषणों के निर्यातक हैं। जयंत कवि जब तक भारत में थे नियमित रूप से गुजराती अखबार जन्मभूमि के लिये विचारोत्तेजक लेख लिखते रहते, इस ब्लागर को भी पढ़ाते रहते। 
जरूरत इस बात की महसूस होती है कि भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम ने पैंतीस वर्ष पूर्व रोजगार पारिश्रमिक संबंधी जो सवाल डाक्टर जी. रामचंद्रन महाशय से तमिलनाडु के सलेम जिले के बारे में पूछा था भारत के प्रधानमंत्री जी महाशय विनय कुमार सक्सेना अध्यक्ष खादी ग्रामोद्योग आयोग से पूछने की कृपा करें कि सक्सेना जी के आयोगाध्यक्ष पद संभालने से पूर्व वे गुजरात के जिस जिले में स्वयंसेवी कार्य करते थे उस जिले में किसी क्षेत्र पंचायत को चुनें जिसमें आयोग की सीधी वित्त पोषित संस्था समिति गुजरात राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड व उसकी पोषित संस्था समितियों ने पिछले वित्त वर्ष में कितने कतकरों (स्पिनर्स), बुनकरों, ग्रामोद्योग कारीगरों को वर्ष 2016-2017 रोजगार कितने दिन उपलब्ध कराया ? कारीगर जिन्हें खादी कमीशन आर्टिजन कहता है उन्हें रोजाना माहवारी पूरे वर्ष में कितना मेहनताना मिला ? जब 1956 में के.वी.आई.सी. एक्ट पास हुआ उसका मुख्य उद्देश्य रोजगार उपलब्ध कराना तथा जिन लोगों को रोजगार मिला है उन्हें पारिश्रमिक भी मिल रहा है यह सुनिश्चित कराना। 
खादी ग्रामोद्योग आयोग के द्वितीय अध्यक्ष जो आल इंडिया नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे उससे पहले सौराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने 1972 में आयोगाध्यक्ष से निवृत्ति के समय कहा - हमने देश के एक लाख गांव आच्छादित कर लिये हैं। ठीक तीस साल बाद टेक्नोक्रेट डाक्टर महेश शर्मा ने तत्कालीन खादी आयोग के सदर की हैसियत से घोषित किया कि आयोग ने 2,48,000 गांव आच्छादित कर लिये हैं। खादी आयोग ने संकल्प लिया है कि अगले वित्त वर्ष 2018-2019 में पांच हजार करोड़ मूल्य की खादी का विपणन होगा। गांधी की खादी यात्रा के मुताबिक आयोग द्वारा संकल्पित खादी की बिक्री का बीस प्रतिशत पांच सौ अरब या पांच हजार करोड़ बिक्री पेटे 20 प्रतिशत अर्जित होगा। बिक्री के इस अनुमान में कम से कम कताई मजदूरी तथा बुनाई मजदूरी दोनों मिल कर कम से कम 45 प्रतिशत तो होना ही चाहिये। कताई करने करने वाली रजिस्टर्ड कतकर संख्या तथा उन्हें वितरित मजदूरी रजिस्टर्ड बुनकर संख्या उन्हें वितरित मजदूरी एक क्षेत्र पंचायत में कितनी थी ? इसका खुलासा अगर आयोगाध्यक्ष प्रधानमंत्री जी को दे पाये वह सवाल जो भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम ने उठाया था उसका समाधान हो सकता है। रोजगार की जमीनी हालातों से जानकार होना शास्ता समाज का पहला सद्गुण है, गुण न हेरानो गुण ग्राहक हेरानो हैलोकप्रतिनिधि महानुभावो गुण ग्राहक बनिये। जीवन को तभी सफल बना सकते हैं जब गुण की पहचान हो जाये। 
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