देश की पहली आवश्यकता क्या है ?
देशी नस्ल की गौओं बैलों की सुरक्षा या बीफ महोत्सव ?
हिन्द क्या चाहता है ? गोरक्षा या गोकशी वाला बीफ महोत्सव ?
केवल जनमत संग्रह (रेफरंडम) ही सही तरीका है, वही संपन्न कराना तात्कालिक जरूरत भी है।
पद्मभूषण महाशय किरीट शांतिलाल परेख ने आशंका जतायी है कि हिन्द की पारंपरिक नस्लवाली गायें, बछड़े और बैल मुल्क से लुप्त भी हो सकते हैं। महाशय किरीट शांतिलाल परेख विशेषज्ञ हैं उनमें गोरक्षा का मजहबी व मियादी बुखार भी नहीं है। वे मानते हैं संयुक्त राज्य अमरीका हिन्द की गायों, बैलों का गोमांस (बीफ) आयातक है। संयुक्त राज्य अमरीका में भैंस या भैंसे के मांस को भी बीफ की श्रेणी में रखता है। हिन्द की सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की जो पशु क्रूरता के संदर्भ में पशुओं को पशु मंडी द्वारा बेचने और पशु खरीद पर पाबन्दी से संबंधित है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बैंच ने भारत सरकार के पशु विक्रय संबंधी हुक्मनामे पर चार सप्ताह याने अठाईस दिन तक के लिये रोक लगा दी है। यह रोक मंगलवार 27 जून 2017 की पूर्व रात्रि बारह बजे तक प्रभावी रहेगी। यह फैसला मदुरै बैंच केे न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन ने जारी किया। बैंच ने यह आदेश पशु बिक्री पर रोक संबंधी जनहित याचिका प्रस्तुत करने वाले महानुभावों एस. सेलगोमेथी और आसिफ इलाही वाला ने प्रस्तुत की। यह अंतरिम हुक्मनामा रूल 22 बी. III. तथा रूल 22 ई पशु क्रूरता नियमावली पशु संरक्षा स्टाक मार्केट रूल्स 2017 के तहत जारी हुआ है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बैंच में प्रस्तुत याचिका के अलावा केरल, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री और कानून मंत्री ने भी केन्द्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की राजाज्ञा मानने से साफ इन्कार कर दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार इस हुक्म की अदूली करने पर आमादा है। कर्णाटक के कानून मंत्री इस हुक्म को संघीय व्यवस्था के प्रतिकूल देख रहे हैं। केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय तथा मुल्क के गैर भाजपाई दलों की अखिल भारतीय स्तर की इंडियन नेशनल कांग्रेस सहित क्षेत्रीय सुप्रीमो शैली वाली नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियों ने गौहत्या रोक बनाम बीफभोज समारोह का नया संघर्ष शुरू करने कांग्रेस सहित सभी गैर भाजपाई राजनीतिक दल जुलाई 2017 में संपन्न होने वाल राष्ट्रपति चुनाव के लिये आपसी जानलेवा मतभेदों के बावजूद एक प्लेटफार्म पर एकत्रित होने का महाप्रयास कर रहे हैं। भोजन स्वतंत्रता तथा पेशा या व्यवसाय स्वतंत्रता के अधिकार को वे संविधान प्रदत्त विचार स्वातंत्र्य तथा कृत्य स्वातंत्र्य के नजरिये से लाभान्वित होना चाहते हैं। केरल के मुख्यमंत्री महाशय यहां तक कह चुके हैं कि केन्द्र सरकार आने वाले समय में मछली पर भी रोक लगा सकती है। सवाल अब चाहत का भोजन अधिकार और चाहत का व्यापार-व्यवसाय अधिकार पर अटक गया है।
आजादी के पश्चात पिछले सत्तर वर्षाें में हिन्द में शराब और मांस भोग में अथाह बढ़त हुई है। ये दोनों पेय और भोज्य पदार्थों का प्रयोग करने वाली हिन्द की जनसंख्या कितनी है ? कितने लोग मदिरा सेवन नहीं करते ? कितने लोग नित्य मदिरासेवी हैं ? ऐसे कितने लोग हैं जो बिना मदिरा पिये जीवित नहीं रह सकते ? आज प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, चोरी चकारी तथा सड़क दुर्घटनाओं के समाचार ज्यादा आते हैं। सोशल मीडिया और अखबार पढ़ने से लगता है हिन्द के लोग अराजकता की ओर बढ़ रहे हैं। महात्मा गांधी के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में पवनार धाम के संत विनोबा भावे घोषित हुए। पंडित नेहरू दूसरे व्यक्तिगत सत्याग्रही थे। विनोबा ने हिन्द के लोगों को हिन्दुत्व का रास्ता बताया संत विनोबा के अनुयायियों में बाबू जयप्रकाश नारायण अग्रणी थे। संत ने हिन्द के लोगों को तीन मुख्य करने लायक तरीेके सुझाये। 1. जमीन की समस्या को हल करने के लिये भूमिदान। 2. राजनैतिक तथा सामाजिक मतांतरों में तालमेल बिठाने के लिये सुतर्क वाली बहस जिसमें पहले वे मुद्दे रखे जायें जिनमें तीव्र विरोधाभास नहीं है। विरोधाभासी मसलों का निपटारा करने केे लिये वार्ता में व्यावहारिक घृणा वितृष्णा का परित्याग। 3. जिसे आज हम सेकुलरिज्म कहते हैं विनोबा ने श्रीमद्भागवत महापुराण के नित्य पाठ के जरिये सर्वधर्म समभाव का व्यावहारिक मार्ग सुझाया। वह था - श्रद्धा भागवते शास्त्रेऽनिन्दा अन्यत्र क्वापि हि। हिन्द के लोग जो हिंदुत्व पर यकीन करते हैं भागवत शास्त्र पर श्रद्धा रखते हुए अन्य हर किसी धर्मशास्त्र का भी पूर्णतः सम्मान करें। ‘परनिंदा सम पातक नाहीं’ यह था संत विनोबा भावे का मानव जीवन दर्शन। महाशया सोनिया गांधी, महाशय नितीश कुमार तथा बंगनेत्री ममता बनर्जी सहित जो भाजपा विरोधी नेता जुलाई 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में साझा उम्मीदवार लाना चाहते हैं यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्तमान में झारखंड राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति उम्मीदवार बना डाला तो भाजपा विरोधियों की हवा निकल जायेगी।
पशु बेजबान है वह क्रूरता सहता रहता है। बैलगाड़ी हो, घोड़ागाड़ी हो या भैंसे द्वारा खींची जारही भैंसागाड़ी हो मालिक अपने जानवर से उसकी ताकत से ज्यादा परिश्रम लेता हैै। इस क्रूरता को मालिक की समझ में आने पर ही वह अपने पालतू पशु पर क्रूरता नहीं करेगा। बड़ी क्रूरता पशु हिंसा भी है पर पशु क्रूरता से गोरक्षा का सीधा ताल्लुक नहीं है। हिन्द में आज सबसे ज्यादा संख्या जरसी गायों की है जो दूध ज्यादा देती हैं। जरसी गायों के बाद संकर गायों का क्रम आता है जो जरसी गायों के मुकाबले कम दूध देती हैं पर देसी नस्ल की गायों से पर्याप्त ज्यादा दूध संकर गायें भी देती हैं। जरसी गायों का दूध हिन्द की सरकार ए-1 दूध बताती हैै जो बाजार में 40 से 45 रूपये प्रति लीटर बिकता है। केन्द्र व राज्य सरकारें यह तो जरूर कहती हैं कि देसी नस्ल की गायों के दूध में पौष्टिकता है। बच्चों के लिये देसी नस्ल की गाय का दूध मां के दूध की बराबरी करता हैै। देसी गायों के दूध का बाजार भाव साठ से पैंसठ रूपये लीटर है। मूल सवाल तो बीफ भोजन की प्राथमिकता समर्थक लोग यह मान कर चल रहे हैं कि बीफ भोज उनका संवैधानिक अधिकार हैै। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने मुल्क के लोगों को बीफ भोजी और गोरक्षा समर्थक दो खेमों में बांट दिया है। दोनों खेमे अपने अपने उद्देश्य के लिये जीजान से लगे हुए हैं। अखबारों के समाचारों के मुताबिक उत्तर पूर्व के मिजोरम राज्य के भारतीय जनता पार्टी समर्थक मतदाताओं ने शासक दल को संकेत दिये हैं वे दलबदल कर जायेंगे ? जहां तक जरसी गायों का ताल्लुक है जब तक जरसी गाय दूध देती है वह गोधन है जिस दिन से जरसी या संकर गाय दूध देना बन्द कर देती है उसे मैकेनिकल स्लाटर हाऊस भेज कर बीफ के रूप में मांस बाजार में अच्छीखासी जगह मिल जाती है। बकरी, भेड़, सुअर तथा प्रतिबंधित वन्य जीव मांस बिक्री के बावजूद मांस बाजार में अनेकानेक जानवरों का मांस बिकता है। मुल्क की एक बड़ी दिक्कत यह भी है कि पशुपालक तथा किसान दूध देना बन्द कर रही गायों तथा बूढ़े बैलों को कसाइयों को बेच देते हैं ? इंडियन वेटिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट मुक्तेश्वर नैनीताल तथा इज्जतनगर बरेली की बूढ़ी गायें, बूढ़े बैल भी कसाइयों को बेचे जाने की खबरें छपती रहती हैं। ऐसा लगता है कि हिन्द की तात्कालिक जरूरत नयी पीढ़ी के लोगों के संज्ञान में लाना कि देसी नस्ल की गायों को गो उत्पाद - गोमूत्र, गोबर, दूध, दही, घी की रासायनिक पड़ताल विधिपूर्वक करायी जाये। नीलगायें जिन्हें हिन्द का आम आदमी फसल चौपट करने वाला मानता है नीलगाय गोमूत्र तथा गोबर की विशेषता जामनगर कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से करायी जाये। हर राज्य को जहां नीलगायें ज्यादा संख्या में हैं तथा नीलगायों के बाड़े भी बने हैं संबंधित विभाग नीलगाय के मूत्र का नमूना अपने राज्य की सरकार के माध्यम से गुजरात सरकार के कृषि विश्वविद्यालय जामनगर को भेजे साथ ही पूरी तरह काले रंग की गाय के गोबर, दूध, दही, घी के नमूने भी भेजे जायें। पूरी तरह तांबे की रंग की गाय अर्थात भूरे रंग की गाय का आधा लीटर दूध, पूरी तरह सफेद रंग की गाय का आधा लीटर दही, कपिला गाय का पावभर घी भी रासायनिक परीक्षण के लिये भेजे जायें। देसी नस्ल की इन गायों के अलावा जरसी गायों के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र की भी रासायनिक पड़ताल कर मुल्क की सभी भाषाओं में गुजरात कृषि विश्वविद्यालय जामनगर के निष्कर्ष संबंधित राज्य सरकार द्वारा जनता में वितरित की जाये। इस सारी प्रक्रिया में यदि लेटलतीफी तथा टालमटोल नहीं हुई तो बारह महीने 365 दिन के अंदर विभिन्न गोे उत्पादों का रासायनिक परीक्षण हर मतदाता के संज्ञान में लाया जा सकता है। निरामिष और सामिष भोज का विवाद यहां पर जरूरी नहीं हैै केवल गो उत्पादों की सही सही जमीनी स्थिति मुल्क के मतदाताओं के संज्ञान में आये। राज्यों की विधानसभा चुनावों तथा 2019 में संपन्न होने वाले लोकसभा निर्वाचन के वक्त यह लोकमत जाना जाये कि क्या मुल्क के लोग देसी गायों के नस्ल संरक्षण तथा देसी गायों व बैलों का मुल्क की सेहत रक्षा तथा आर्थिक सुरक्षा के पक्षधर हैं ? या यूरप व अमरीका की तरह जरसी गायों के दूध व संकर गायों के ज्यादा मात्रा वाले दूध चाहने व उनका गोमांस के चाहत वाले हैं ?
हिन्द क्या चाहता है ? गोरक्षा या गोकशी ? इसका फैसला हिन्द का मतदाता ही कर सकता है। बंग मुख्यमंत्री महाशया ममता बनर्जी तथा केरल मुख्यमंत्री पी. विजयन अथवा कर्णाटक बड़बोले कानून मंत्री इसके निर्णायक नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऋषि देश यात्रा पर ऋषि देश (रसिया) राष्ट्रपति ब्लादिर पुतिन महाशय ने ‘सहयात्रा के सत्तर साल’ शीर्षक से हिन्द के प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत समारोह किया है।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
No comments:
Post a Comment