हर व्यक्ति के दोनों हाथों को काम देना हिन्द की सांस्कृतिक जरूरत।
केवल गाँधी का चरखा व कबीर का हथकरघा
हिन्द में रोजगार की सदानीरा गंगा का प्रवाह बढ़ा सकता है।
केवल गाँधी का चरखा व कबीर का हथकरघा
हिन्द में रोजगार की सदानीरा गंगा का प्रवाह बढ़ा सकता है।
चंपारण के नील खेती सत्याग्रह ने हिन्द और रूसी प्रशंसक लियो टालस्टाय ने मोहनदास करमचंद गांधी को ‘हिन्दू’ संज्ञा दी और कहा - हिन्द के हिन्दू ने यूरप को हिन्द स्वराज जरिये ऐसा नया रास्ता दिखाया है जिससे औद्योगिक क्रांति जन्य यूरोप अपनी पारंपरिकता को गतिशील बना सकता है। जो बात हिन्द स्वराज का रूसी भाषानुवाद पढ़ने के बाद जो प्रतिक्रिया अभिव्यक्त की पूरी शताब्दी (1918-2018) के पिछले सौ वर्षों में 2017 में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी महाशय की जर्मनी, स्पेन, रूस और फ्रांस देशों की यात्रा ने हिन्द की अगली विश्वायतन कर्तृत्व को नया मोड़ दे डाला। यूरप के इन चार महत्वपूर्ण देशों जर्मनी (जिसे भारतीय वाङमय शर्मणि कहता है और जर्मनी का प्रतीक स्वस्तिक चिह्न है) की भाषा पुरानी जर्मन में पिचानबे प्रतिशत शब्द संस्कृत, प्राकृत जन्य हैैैं। यही स्थिति रूस (जिसका भारतीय पर्याय ऋषि देश है) की भाषा पुरानी रूसी में भी पिचानबे प्रतिशत शब्द संस्कृत मूलक हैं इसलिये यूरप के इन दो देशों की यात्रा ने मोदी के हिन्दत्व में चार चांद लगा दिये हैं। ज्ञातव्य है कि जर्मनभाषी मैक्समूलर कभी हिन्द नहीं आये। उनका वैदिक ज्ञान उतना ही श्रेष्ठ स्तर का था जितना ज्ञानेश्वरी के रचयिता संत ज्ञानेश्वर जिन्होंने महाराष्ट्र के परभणी इलाके के ब्राह्मणों को भैंसे द्वारा वेद ऋचायें सुनवा दी थीं। स्वामी रामकृष्ण परमहंस की भी आध्यात्मिक चमत्कारिता महत्वपूर्ण थी। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को विश्व प्रसिद्धि दिलाई। मैक्समूलर जर्मनी से ब्रिटेन के आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने वैदिक संस्कृत निघंटु सहित ऋग्वेद का नागरी लिपि में प्रकाशन कराया। आक्सफोर्ड शब्द को वैदिक संस्कृत में अक्षपत्तन कहा और स्वयं को मोक्षमूलः संबोधित किया। ऋग्वेद का प्रकाशन होने के पश्चात यूरप में भारतीय वाङमय की धाक जम गयी। अनेक जर्मन, रूसी तथा बर्तानी विद्वानों ने भारतीय वाङमय का गूढ़ अध्ययन किया। महात्मा गांधी ने नील खेती के लिये जो अभियान चलाया, उन्होंने देखा कि हिन्द का जनसामान्य सालाना बारह गज कपड़ा भी नहीं जुटा सकता। महात्मा जी ने तय किया वे केवल दो धोतियां याने रोजाना पहनने के लिये केवल छः गज कपड़े का ही उपयोग करेंगे। यद्यपि जब महात्मा दक्षिण अफ्रीका में थे वहां गुजराती भाषा में डाक्टर जीवराज मेहता ने अपनी विशेष पुस्तक अंग्रेजी भाषा में रचित काव्य में महात्मा गांधी ने जो जाग्रति दक्षिण अफ्रीका में फैलाई उससे प्रभावित होकर मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा संबोधन दिया। यद्यपि हिन्द के लोग यह मानते थे कि मोहनदास करमचंद गांधी को सबसे पहले महात्मा संबोधन कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ टैगोर ने किया पर ऐतिहासिक तथ्य यह प्रतीति कराते हैं इंडियन ओपीनियन के जरिये मोहनदास करमंचद गांधी को सर्वप्रथम ऐलोपैथी चिकित्सक डाक्टर जीवराज मेहता ने अपनी पुस्तक के जरिये महात्मा कहा। हिन्द में मोहनदास करमचंद गांधी 1915 से निरंतर जनवरी 1924 तक भ्रमण करते रहे। उन्होंने हिन्द के गांव गांव शहर दर शहर की स्थिति आंक ली। जनवरी 1924 में वे बेलगांव कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। महात्मा गांधी ने यह तय कर लिया कि हिन्द के गांव गांव शहर शहर के लोगों के दो हाथों को काम देने वाला उद्यम खेतीबाड़ी के बाद केवल चर्खे पर सूत कातना और चर्खे कते सूत को हथकरघा में बुन कर कपड़े के रूप में प्रस्तुत करना है तब हिन्द की जनसंख्या तीस करोड़ से कम थी। बिहार की बाबू नितीश कुमार सरकार चंपारण-प्रयाण को प्रादेशिक शताब्दी पर्व के तौर पर मनाना शुरू कर रही हैै पर मोहनदास करमचंद गांधी का चंपारण अभियान किसी एक राज्य या प्रदेश तक सीमित कर शताब्दी मनाया जाना राष्ट्रीय विवेक की अवहेलना मात्र है। इसलिये बिहार के मुख्यमंत्री महाशय को चाहिये कि वे महात्मा के चंपारण अभियान को राष्ट्रीय महत्व का पर्व मानते हुए हिन्द के घटक राज्यों व भारत सरकार के समग्र साझे अभियान के रूप में देखा जाना चाहिये। सुखद स्थिति तो यह होती कि सत्ता पक्ष तथा बिखरे हुए आपसी तनाव वाले घटक राज्य स्तरीय विभिन्न राजनीतिक दलों मंे न्यूनतम तालमेल की गुंजाइश होती। जम्मू कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कान्फ्रेंस में राजनीतिक मनमुटाव है। पंजाब में अकाली दल भाजपा गठजोड़ कांग्रेस तथा आआपा के तीन खेमे थे। यह नहीं कहा जा सकता कि अकाली दल व भाजपा युति विरोधी कांग्रेस तथा अति उत्साही आआपा का सामना करने में जोरशोर से लगे थे। ज्यादातर पंजाब का शहराती हिन्दू वह आर्यसमाजी हो या सनातनी बीजेपी का मतदाता रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शहराती हिन्दू संगठनों ने कांग्रेस को आआपा से कम खतरनाक माना। आआपा के नेता द्वय केजरीवाल व सिसोदिया की जोड़ी ग्रामीण पंजाब के वासियों को मंजूर नहीं थे। सिख मतदाता का एक नजरिया खालिस्तानी तंत्र को पुनः हिन्द में सफल बनाने के लिये कनाडा में रहने वाले खालिस्तानी आतंकियों से गहरी मेल मुलाकात भी केजरीवाल महाशय के काम नहीं आई क्योंकि पंजाब का सिख मतदाता हरियाणवी केजरीवाल नेतृत्व को संबल देने का पक्षधर नहीं था। वहीं दूसरी ओर पंजाब का मौना समाज जो गुरूगं्रथ साहब तथा गुरू नानक पर श्रद्धा रखता है पर आर्यसमाजी अथवा सनातनी हिन्दू जिन्हें पंजाब में घासीराम कहा जाता है वे लोग जो निरामिष हैं वे घासीराम कहलाते हैं शहरी पंजाब की 38 प्रतिशत हिन्दू बसासत ने आआपा को पछाड़ने के लिये कांग्रेस को अपना मत देना राष्ट्रीय हित माना। नतीजा यह हुआ कि केजरीवाल नेतृत्व दिवास्वप्न देखता रहा पर उसे न हिन्दू वोट मिला न ही व्यापक पैमाने पर सिख मतदाताओं का समर्थन मिला। महाशय केजरीवाल सत्ता के सपने देखते रहे पर मतदाताओं ने उनकी खाट खड़ी कर दी और वे कहीं के नहीं रहे। दूसरी ओर आप्रवासी खालिस्तान समर्थकों के बीच में अपनी पैठ उन्हें राजनीतिक रूप से नाकाम बना गई। अब वे कह रहे हैं कपिल मिश्रा बेवफा हैं। अगर महाशय केजरीवाल ने अपना राजनैतिक डमरू महाभारत के शांतिपर्व का अनुशीलन करने के बाद बजाया होता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की बराबरी का नाच नहीं नाचा होता तो शायद उनकी राजनीति कुछ दिन चल जाती। इसे ही कहते हैं उत्थान पतन की अजीबोगरीब गाथा। अगर कदाचित सुब्रह्मण्यम स्वामी महाशय केजरीवाल के खड़गपुर आइ.आइ.टी प्रवेश कोड की पोल खोलने में कामयाब रहे केजरीवाल महाशय के तात्कालिक पतन का हेतु केवल कपिल मिश्रा की बेवफाई ही नहीं दिल्ली की जनता ने जो प्रति वर्ग किलोमीटर आबादी घनत्व 9340 व्यक्तियों वाला है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की आबादी लगभग पौने दो करोड़ लाख के करीब है। आबादी का यह विकराल घनत्व प्रतीति कराता है कि एक मीटर लंबे एक मीटर चौड़े क्षेत्र में लगभग दस आदमी औरतें कंधे से कंधा मिला कर गुजारा कर रहे हैं। आबादी के घनत्व की यह अद्भुत मीमांसा यह भी आभास कराती है कि हिन्द के 638003 गांवों और 5480 शहरी इलाकों के 22 भाषाओं को बोलने वाले लोग दिल्ली में जमावड़ा किये हुए हैं। दिल्ली की समस्याओं का समाधान अरविन्द केजरीवाल महाशय बिना मोदी सरकार की मदद और लेफ्टिनेंट गवर्नर के सहृदय रूख के खुशी खुशी संपन्न नहीं कर सकते। अगर रविन्द्र जैन सरकारी गवाह होगये तो जनाब केजरीवाल की सिट्टीपिट्टी गुम होने में विलंब नहीं लगेगा। कपिल मिश्रा ने जो आरोप महाशय केजरीवाल पर लगाये हैं अगर कानूनी जांच में आरोप साबित होगये तो सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे को दिल्ली के जंतरमंतर में एक बार फिर आकर यह घोषणा करनी चाहिये कि केजरीवाल का समर्थन कर उन्होंने महात्मा गांधी के हिन्द स्वराज की अवहेलना ही नहीं की वरन् केजरीवाल के स्वराज (जो वास्तव में भ्रष्टराज है) उसे हवा में लहरा कर जो राष्ट्रीय त्रुटि होगयी उसका प्रायश्चित्त करना चाहिये। केजरीवाल महाशय सरीखे लोगों की राजनैतिक क्षेत्र में पुनरावृत्ति न हो इसके लिये शिवसंकल्प नेता अण्णा हजारे के लिये राष्ट्र पर्व होगा। इस पूरे प्रकरण का साफ साफ नक्शा सामने आने मंे पांच से दस वर्ष तक का समय भी लग सकता है। यह संभव हो सकता है कि जिस तरह असम गण परिषद का उत्कर्ष हुआ कालांतर में भयावह अपकर्ष का मार्ग असम गण परिषद को मिला। असम तो भारतीय संघ का घटक राज्य था पर दिल्ली जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहलाती है भारतीय संसद भारत सरकार की मुख्य भूमि भी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भारतीय संघ के 28 घटक राज्यों के उपरांत उनतीसवां संघ शासित क्षेत्र है। आबादी 1,67,53,235 है तथा आबादी घनत्व बिहार में 1102 और पश्चिम बंग में 1029 है। आबादी का घनत्व सबसे कम 17 अरूणाचल प्रदेश में है। समूचे देश की आबादी वर्ष 2016 में 1,37,12,34,177 आंकी गयी है जो 2011 की जनगणना से 16,70,40,752 ज्यादा है। आबादी की बढ़त की प्रवृत्ति यह संकेत देरही है कि 2021 की जनगणना में आबादी बढ़त का यही क्रम रहा तो भारत की आबादी तब एक अरब पचास करोड़ से आगे की आंकी गयी है। जब महात्मा गांधी ने कदमकुआं पटना में चर्खा संघ अपनी छप्पनवीं सालगिरह पर स्थापित किया। महात्मा गांधी का जन्मदिन दुनियां के लोग 2 अक्टूबर को मनाते पर स्वयं महात्मा गांधी अपना जन्मदिन चर्खा जयंती के तौर पर आश्विन बदी द्वादशी को मनाते थे। सन 1924 में आश्विन बदी द्वादशी 24 सितंबर 1924 को थी तब मुल्क की आबादी तीस करोड़ से कम थी। आज की हिन्द की आबादी एक सौ पैंतीस करोड़ से ज्यादा है लगभग पांच अरब हाथों को काम देना आज के नेतृत्व की तात्कालिक समाधान चाहने वाली समस्या है। हिन्दुस्तान में आर. जगन्नाथन नाम के एक सज्जन हैं उनका आकलन है कि मुल्क रोजगार के पर्याप्त साधन न मिलने के कारण शहरी अराजकता की तरफ अग्रसर होरहा है। आर. जगन्नाथन अखबारनवीस भी हैं। महात्मा गांधी के स्वराज के निर्देशन संपादक भी हैं। हिन्द के शहरी इलाकों की संख्या 5480 तथा देहातों की संख्या 6,38,000 है। 72.2 प्रतिशत आबादी आज भी गांवों में बसर कर रही है। शहरी इलाकों की आबादी 27.8 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री का शिवसंकल्प है कि 100 स्मार्ट शहरों की संरचना याने मुल्क के एक सौ शहरों को रहने लायक बनाना। अभी मुल्क के बड़े शहर मुंबई कोलकाता दिल्ली चेन्नै जैसे बड़े शहरों में झुग्गी झोपड़ी में जीवन बसर करने वालों की एक बहुत बड़ी मात्रा है जिसे अंग्रेजी में स्ट्रीट चिल्ड्रन कहा जाता है। उनकी भी एक बड़ी संख्या है जो पूर्णतः बेसहारे हैं अपराध जगत जिनका भरपूर उपयोग करता है। एक किस्म से देश के शहरों में ला आफ माब याने भीड़तंत्र का राज भी आर. जगन्नाथन सरीखे विचारक आंक रहे हैं। इंजीनियरिंग कम्प्यूटर तकनालाजी तथा मेडिकल शिक्षा में जाने वाले युवा अपने कैरिअर के पीछे आपाधापी से दौड़ रहे हैं। डाक्टरी इंजीनियरी तथा इनफार्मेशन तकनालाजी से समृद्ध युवा भारत के शहरों व गांवों को वन्दे कहते हुए विकसित देशों की तरफ मुखातिब हैं। एच वन वीसा एक तमाचा केे रूप में खड़ा है। यह स्वाभाविक है कि सुशिक्षित नवयुवा अपने सुखद भविष्य के लिये प्रवासी बनना ज्यादा पसंद करता है। ऐसी स्थिति में उन नौजवानों नवयुवतियों तथा हाथों से कात कर पारिश्रमिक अर्जित करने वाले लोगों के सामने केवल महात्मा गांधी का चर्खा और करघा ही आज भी उतना ही रोजगारमूलक है जितना तब था जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से अमदाबाद के कोचरब आश्रम में रहने लगे। लगातार हिन्द के गांव गांव घूमने के बाद महात्मा ने महसूस किया कि चर्खा और करघा ने ही ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया कर परिवार की आमदनी बढ़ाने की कूबत है। रोजाना की जिस समस्या से महात्मा गांधी 1915 से 1933 तक जूझते रहे वही समस्या आज भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के सामने मुंह बाये खड़ी है। ज्यादातर राजनीतिक दल और राजनीति करने वाले महानुभाव मैं मेरा परिवार मेरे रिश्तेदार इन से घिरे हैं। यद्यपि परमात्मा की सृष्टि में जनसंख्या का आठवां हिस्सा सदाचारी तथा आठवां हिस्सा कदाचारी होता है। इस ब्रह्माण्ड में शेष तीन चौथाई लोग सुविधा की तरफ अग्रसर होते हैं। आजादी के पिछले सत्तर वर्षाें में हिन्द को नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के रूप में ऐसा अकेला नेतृत्व मिला है जिसका लक्ष्य देश है समाज है तथा उद्देश्य सबका साथ सबका विकास है। मुल्क की हालत सौ वर्ष पहले तीस करोड़़ आबादी के साठ करोड़ हाथों को रोजगार देना पहली जरूरत थी। आज आबादी इतनी ज्यादा बढ़ गई हैं मुल्क में 2016 में एक सौ सैंतीस करोड़ से ज्यादा लोग हैं। अगली जनगणना तक मुल्क के लोगों की संख्या एक अरब पचास करोड़ से ज्यादा होने की संभावना है। याने लगभग पौने तीस सौ करोड़ हाथों को रोजगार मुहैया करना। आज हिन्द की पहली जरूरत है मुल्क के सफेद कालर नौकरियों ज्यादा से ज्यादा विभिन्न व्यवसायों सहित उद्यमिता क्षेत्र के सफेदपोश लोग ज्यादा से ज्यादा दस फीसदी को ही शास्ता बनने का मौका मिलता है बाकी नब्बे प्रतिशत याने एक सौ पचास करोड़ लोगों में एक सौ चवालीस करोड़ लोगों के 288 करोड़ हाथों को काम देने का एकमात्र रास्ता कपड़ा उद्योग है। संगठित कपड़ा उद्योग ज्यादा से ज्यादा पांच प्रतिशत लोगों को पावरलूम कताई मिलें बुनाई मिलों के माध्यम से रोजगार मिल सकता है। एक सौ चालीस करोड़ लोगों के 280 करोड़ हाथों को आधा अधूरा ही सही आंशिक रोजगार केवल गांधी का चर्खा और कबीर का करघा ही दे सकते हैं। यही गांधी का गुरूमंत्र था वह गुरूमंत्र 1915 से 1933 तक जितना कारगर था उतना ही कारगर आज भी है। इसलिये मेक इन इंडिया हर इन्सान के बेरोजगार हाथों को रोजगार देना - महाशय केजरीवाल संकल्पित अनार्किज्म - अराजकता से बचने का एकमात्र उपाय मुल्क केे घर घर में चर्खा चलाना मुल्क के जुलाहों बुनकरों तांतियों कोरियों के हाथ उनके करघों पर काम करें मुल्क हथकरघा के क्षेत्र में वही उपलब्धि करे जो अंग्रेजों के हिन्द आने से पहले गांव गांव शहर शहर में यत्र तत्र सर्वत्र व्याप्त थी। खादी ग्रामोद्योग आयोग के सदर जनाब विनय कुमार सक्सेना ने इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के निकासी द्वार पर चर्खा लगा कर मुल्क के लोगों तथा मुल्क में बाहर से आने वाले लोगों को एक संदेश दिया है। हिन्द का महत्वपूर्ण उद्यम चर्खे पर सूत कताई रेशम कताई ऊन कताई है। सोलर चर्खा कातने वाले को परिवार चलाने के लिये पारिश्रमिक उपलब्ध करने की क्षमता रखता है। पूर्ववर्ती सरकार ने एमएसएमई एक्ट 2006 पास कर गांधी की खादी को खादी मार्क का बंदी बना डाला। एमएसएमई मंत्रालय का मंत्रालय जब हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह देखते थे उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि मनरेगा से चर्खा और करघा जोड़ दिये जायें। वीरभद्र सिंह ने जयपुर में सार्वजनिक तौर से बयान दिया कि वे चर्खा कताई और करघा बुनाई को मनरेगा से जोड़ कर गांवों की रोजगार गारंटी को पुख्ता करना चाहते हैं। कांग्रेस नेतृत्व व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह को बात जंची नहीं वे खादी को खत्म करना चाहते थे पर खादी मरी नहीं - ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय’, यह कहावत खादी पर लागू होगयी। जमाना बदल गया नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथ में आगया जो गांव गांव की गवांइयत को बरकरार रख कर रूर्बनाइजेशन थिअरी का पक्षधर है। इसलिये आज भी गांधी की खादी के जरिये हिन्द दुनियां में सत्य अहिंसा का डंका बजा सकने की ताकत रखता है। राष्ट्र संघ महात्मा गांधी के जन्मदिन को Global Non-Violence Day विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मना रहा है। राष्ट्र संघ में महात्मा गांधी की खादी का एक उद्यमिता प्रतीक स्थापित किया जाये कि वह हिन्द के हर दूतावास में खादी ग्रामोद्योग कक्ष स्थापित कर मुल्क के लोगों के दोनों हाथों को काम देने वाला संकल्प ले। चर्खा और सूत कताई अपने आप में महान योग है। इसे सन 1935 में सेवाग्राम में पहुंच कर परमहंस योगानंद महाराज ने गांधी जी को यह साबित करके दिखाया कि चर्खा कताई में अंगूठे तर्जनी मध्यमा तथा अनामिका के पोर स्पर्श योग है। प्रधानमंत्री अब के योग दिवस लखनऊ में मना रहे हैं। योग दिवस में चर्खा कताई केे जरिये योगाभ्यास सबसे माकूल तरीका है। उसका भी प्रदर्शन योग दिवस में संपन्न किया जायेे। आटो बायोग्राफी आफ ए योगी - श्यामाचरण लाहिड़ी महाशय तथा परमहंस योगानंद महाराज की योग साधना कहानी अंग्रेजी के समानांतर हिन्द की भाषाओं में भी उपलब्ध की जाये। ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ का मंत्रोच्चार कीजिये चर्खा कात कर घर घर में योग वितान तैयार कीजिये यही योग का युगधर्म है। पतंजलि महाराज ने कहा था - अथातो योग जिज्ञासा। पातंजल योग से प्रसिद्धि पाने वाले बाबा रामदेव से अनुरोध किया जाये कि वे अपने व्यापार के समानांतर पातंजल योग का हिन्द की सभी भाषाओं में उल्था करा कर हर योग साधना करने वाले व्यक्ति को योग का माहात्म्य उसकी अपनी भाषा में समझने का अवसर दिलायें।
गांधी अर्थशास्त्र, गांधी उद्यमिता गुरूमंत्र तथा विश्व में अहिंसा का वातावरण बनाने में विदेश मंत्रालय उसके कूटनीतिज्ञ विश्व राजनयिकता के नियंता समाज को भारत की पारंपरिक भाषाओं में जो कूटनीतिक साहित्य भरा पड़ा है उसे विदेश मंत्रालय को अपनाना चाहिये। राजदूतों के अलावा दूतावासों में तैनात विदेश राजनीतिज्ञ समूह में जहां राजदूतावास हैं दस देश की मुख्य भाषा सहयोगी भाषा की भाषायी विशेषतायें संबंधित देश में नियुक्त विदेश सेवा अधिकारी समूह का यह प्रयास होना चाहिये कि संबंधित देश की भाषा का ज्ञानार्जन हो। बर्तानिया के जो उपनिवेश हैं अमरीका सहित सभी अंग्रेजी भाषा अपनाने वाले राष्ट्रों के मामलों में हिन्द का वैदेशिक अधिकारी कठिनाई महसूस नहीं करेगा पर लातिन अमरीकी देश जहां के लोग अंग्रेजी नहीं फ्रेंच डच स्पेनी भाषाओं के उपयोक्ता हैं भारत के ज्यादातर अधिकारी फ्रेंच का अध्ययन पहले करते हैं हर विदेश विभाग अधिकारी के हाथ में सावित्री महाकाव्य पकड़ाना आज की वैश्विक जरूरत है। सावित्री महाकाव्य मूलतः फ्रेंच भाषा में लिखी गयी आधुनिक युग की युगांतरकारी रचना है जो इक्कीसवीं शताब्दी में वह महत्व अर्जित करेगी जो भारत के आदिकवि वाल्मीकि ने रामायण रच कर की है। सावित्री महाकाव्य को संस्कृत सहित भारत की आंतर भारती भाषाओं में अनुवाद कराया जाना चाहिये। महात्मा अरविंद घोष की यह रचना हिन्द की सविता शक्ति सूर्य शक्ति अथवा सोलर इनर्जी की प्रतीक है। हिन्द में गायत्री माता सावित्री दादी तथा सरस्वती को परदादी के रूप में जाना जाता हैै। भारत की महिला शक्ति वट सावित्री अमावस उत्तर भारत में तथा वट सावित्री पूनम दक्षिण भारत में एकादशी से लेकर अमावस और निर्जला एकादशी से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक मनाई जाती है। पंचम वेद महाभारत सहित महर्षि वेदव्यास रचित अठारहों पुराणों में सविता देवता सावित्री शक्ति का उपनिषदों व प्राप्त ग्रंथों में जो उल्लेख है उसे राजनीतिक क्रांतिकारिता से आध्यात्मिक क्रांति पथ के पात्र नैष्ठिक योगी पुडुचेरी में रह कर सावित्री महाकाव्य रचना फ्रेंच भाषा में संपन्न की। विदेश मंत्रालय को चाहिये कि सावित्री महाकाव्य का भाषांतरण फ्रेंच से हिन्द की भाषाओं के अलावा यूरप की भाषाओं में भी हो। सावित्री महाकाव्य अंग्रेजी रूपांतरण बहुत पहले होगया है। जिस तरह तुलसी का रामचरित मानस विश्व की लगभग सभी भाषाओं में उपलब्ध है। सावित्री महाकाव्य को भारत का विदेश मंत्रालय अपना गुरूमंत्र माने, सावित्री महाकाव्य के जरिये हिन्द का विदेश मंत्रालय दुनियां के हर देश में अपनी धाक जमा सकता है, साथ में गांधी की खादी का पैगाम भारत के हर विदेशी दूतावास के जरिये योगमार्ग का रास्ता भी प्रशस्त कर सकता है। भारत का विदेश मंत्रालय गांधी की खादी को हर विकसित राष्ट्र विकासशील राष्ट्र तथा विश्व के गरीब राष्ट्रों के लिये आर्थिक औषध का कार्य संपन्न करने की क्षमता रखता है। हाथ कते खादी सूत से हथकरघे में बुना कपड़ा जिसे हैंडलूम भी कहा जाता है वह गरीब दुनियां की आर्थिक सेहत को बदलने की क्षमता रखता है। कम्यूनिस्ट आदर्श को मानने वाला निरीश्वरवादी चीनी शास्ता समाज नागरिक की स्वतंत्र चेतना का समर्थन नहीं करता जब कि लोकतंत्री भारत चार्वाक के जमाने से कर्म स्वातंत्र्य विचार स्वातंत्र्य का उद्गाता है। हिन्द तर्क को समझने की क्षमता रखता है। निरीश्वरवादी चीन के कार्यक्रम में तर्क की कोई भूमिका नहीं रहती। मीथेन गैस वामे गैस अथवा गोबर गैस की रचना हिन्द के मनीषी ग्रामीण अर्थवेत्ता जसुभाई पटेल ने सन 1955 से लगातार 1970 तक अहर्निश परिश्रम करते हुए संपन्न की। उन्हें विकेन्द्रित अर्थांग के मनीषी सहकारी आंदोलन के प्रवर्तक वैकुंठ ल. मेहता का समर्थन था। वैकुंठ ल. मेहता की योग्यता पंडित नेहरू समझते थे। लोग आज कहते हैं हिन्द में गोबर गैस की हवा निकल गयी। चीन के गांव गांव में जसुभाई पटेल रचित बायो गैस के लाखों लाख बायो गैस केन्द्र कार्यशील हैं। चूंकि हिन्द विचार व आचार स्वातंत्र्य का प्रतीक है। यहां बायो गैस के चार किस्म के प्लांट यत्र तत्र सर्वत्र हैं। जसुभाई की संरचना की हिन्द के बायो गैस संचालक आज भी उपलब्धि करते हैं। जरूरत इस बात की है कि गांव गांव में संपन्न हर घर के शौचालय को भी अपनायें। गांवों में स्वच्छता का यत्र तत्र विकास हो। अंततोगत्वा हम हिन्दुस्तानी जनसंख्या केे मामले में चीन को आने वाले पांच वर्ष में पछाड़ कर दुनियां की सर्वाधिक आबादी वाला हिन्दुस्तान अध्यात्म के समानांतर विकास मार्ग में भी अग्रणी होगा। यदुवंशियों के राजपुरोहित गर्ग ऋषि थे। उन्हों आभीर नंद से कहा - गोपराज, देवक्या अष्टमोगर्भ न स्त्री भवितुर्महति। देवकी की आठवीं संतान स्त्री हो ही नहीं सकती इसलिये मैं आपके पुत्र को देवकी पुत्र वसुदेव पुत्र के रूप में सोलह कलाओं के अवतार श्रीकृष्ण के रूप में देख रहा हूँ।
घर घर चर्खा चले, गांव गांव हथकरघा बुनकर हिन्द की शान बढ़ायें। इस दुनियां केे हर कोने में सूती खादी परिधान पहन कर पातंजल योग का महामंत्र फैलायें। जोर जोर से उच्चार करेें
गांधी अर्थशास्त्र, गांधी उद्यमिता गुरूमंत्र तथा विश्व में अहिंसा का वातावरण बनाने में विदेश मंत्रालय उसके कूटनीतिज्ञ विश्व राजनयिकता के नियंता समाज को भारत की पारंपरिक भाषाओं में जो कूटनीतिक साहित्य भरा पड़ा है उसे विदेश मंत्रालय को अपनाना चाहिये। राजदूतों के अलावा दूतावासों में तैनात विदेश राजनीतिज्ञ समूह में जहां राजदूतावास हैं दस देश की मुख्य भाषा सहयोगी भाषा की भाषायी विशेषतायें संबंधित देश में नियुक्त विदेश सेवा अधिकारी समूह का यह प्रयास होना चाहिये कि संबंधित देश की भाषा का ज्ञानार्जन हो। बर्तानिया के जो उपनिवेश हैं अमरीका सहित सभी अंग्रेजी भाषा अपनाने वाले राष्ट्रों के मामलों में हिन्द का वैदेशिक अधिकारी कठिनाई महसूस नहीं करेगा पर लातिन अमरीकी देश जहां के लोग अंग्रेजी नहीं फ्रेंच डच स्पेनी भाषाओं के उपयोक्ता हैं भारत के ज्यादातर अधिकारी फ्रेंच का अध्ययन पहले करते हैं हर विदेश विभाग अधिकारी के हाथ में सावित्री महाकाव्य पकड़ाना आज की वैश्विक जरूरत है। सावित्री महाकाव्य मूलतः फ्रेंच भाषा में लिखी गयी आधुनिक युग की युगांतरकारी रचना है जो इक्कीसवीं शताब्दी में वह महत्व अर्जित करेगी जो भारत के आदिकवि वाल्मीकि ने रामायण रच कर की है। सावित्री महाकाव्य को संस्कृत सहित भारत की आंतर भारती भाषाओं में अनुवाद कराया जाना चाहिये। महात्मा अरविंद घोष की यह रचना हिन्द की सविता शक्ति सूर्य शक्ति अथवा सोलर इनर्जी की प्रतीक है। हिन्द में गायत्री माता सावित्री दादी तथा सरस्वती को परदादी के रूप में जाना जाता हैै। भारत की महिला शक्ति वट सावित्री अमावस उत्तर भारत में तथा वट सावित्री पूनम दक्षिण भारत में एकादशी से लेकर अमावस और निर्जला एकादशी से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक मनाई जाती है। पंचम वेद महाभारत सहित महर्षि वेदव्यास रचित अठारहों पुराणों में सविता देवता सावित्री शक्ति का उपनिषदों व प्राप्त ग्रंथों में जो उल्लेख है उसे राजनीतिक क्रांतिकारिता से आध्यात्मिक क्रांति पथ के पात्र नैष्ठिक योगी पुडुचेरी में रह कर सावित्री महाकाव्य रचना फ्रेंच भाषा में संपन्न की। विदेश मंत्रालय को चाहिये कि सावित्री महाकाव्य का भाषांतरण फ्रेंच से हिन्द की भाषाओं के अलावा यूरप की भाषाओं में भी हो। सावित्री महाकाव्य अंग्रेजी रूपांतरण बहुत पहले होगया है। जिस तरह तुलसी का रामचरित मानस विश्व की लगभग सभी भाषाओं में उपलब्ध है। सावित्री महाकाव्य को भारत का विदेश मंत्रालय अपना गुरूमंत्र माने, सावित्री महाकाव्य के जरिये हिन्द का विदेश मंत्रालय दुनियां के हर देश में अपनी धाक जमा सकता है, साथ में गांधी की खादी का पैगाम भारत के हर विदेशी दूतावास के जरिये योगमार्ग का रास्ता भी प्रशस्त कर सकता है। भारत का विदेश मंत्रालय गांधी की खादी को हर विकसित राष्ट्र विकासशील राष्ट्र तथा विश्व के गरीब राष्ट्रों के लिये आर्थिक औषध का कार्य संपन्न करने की क्षमता रखता है। हाथ कते खादी सूत से हथकरघे में बुना कपड़ा जिसे हैंडलूम भी कहा जाता है वह गरीब दुनियां की आर्थिक सेहत को बदलने की क्षमता रखता है। कम्यूनिस्ट आदर्श को मानने वाला निरीश्वरवादी चीनी शास्ता समाज नागरिक की स्वतंत्र चेतना का समर्थन नहीं करता जब कि लोकतंत्री भारत चार्वाक के जमाने से कर्म स्वातंत्र्य विचार स्वातंत्र्य का उद्गाता है। हिन्द तर्क को समझने की क्षमता रखता है। निरीश्वरवादी चीन के कार्यक्रम में तर्क की कोई भूमिका नहीं रहती। मीथेन गैस वामे गैस अथवा गोबर गैस की रचना हिन्द के मनीषी ग्रामीण अर्थवेत्ता जसुभाई पटेल ने सन 1955 से लगातार 1970 तक अहर्निश परिश्रम करते हुए संपन्न की। उन्हें विकेन्द्रित अर्थांग के मनीषी सहकारी आंदोलन के प्रवर्तक वैकुंठ ल. मेहता का समर्थन था। वैकुंठ ल. मेहता की योग्यता पंडित नेहरू समझते थे। लोग आज कहते हैं हिन्द में गोबर गैस की हवा निकल गयी। चीन के गांव गांव में जसुभाई पटेल रचित बायो गैस के लाखों लाख बायो गैस केन्द्र कार्यशील हैं। चूंकि हिन्द विचार व आचार स्वातंत्र्य का प्रतीक है। यहां बायो गैस के चार किस्म के प्लांट यत्र तत्र सर्वत्र हैं। जसुभाई की संरचना की हिन्द के बायो गैस संचालक आज भी उपलब्धि करते हैं। जरूरत इस बात की है कि गांव गांव में संपन्न हर घर के शौचालय को भी अपनायें। गांवों में स्वच्छता का यत्र तत्र विकास हो। अंततोगत्वा हम हिन्दुस्तानी जनसंख्या केे मामले में चीन को आने वाले पांच वर्ष में पछाड़ कर दुनियां की सर्वाधिक आबादी वाला हिन्दुस्तान अध्यात्म के समानांतर विकास मार्ग में भी अग्रणी होगा। यदुवंशियों के राजपुरोहित गर्ग ऋषि थे। उन्हों आभीर नंद से कहा - गोपराज, देवक्या अष्टमोगर्भ न स्त्री भवितुर्महति। देवकी की आठवीं संतान स्त्री हो ही नहीं सकती इसलिये मैं आपके पुत्र को देवकी पुत्र वसुदेव पुत्र के रूप में सोलह कलाओं के अवतार श्रीकृष्ण के रूप में देख रहा हूँ।
घर घर चर्खा चले, गांव गांव हथकरघा बुनकर हिन्द की शान बढ़ायें। इस दुनियां केे हर कोने में सूती खादी परिधान पहन कर पातंजल योग का महामंत्र फैलायें। जोर जोर से उच्चार करेें
अथातो योग जिज्ञासा।
दुनियां की हर भाषा में पातंजल योग पढ़ायें।
योग मार्ग अपना कर ही विश्व शांति सत्य, अहिंसा अपना कर ही जन जन का सम्मान करायें।
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