सुशासन का श्रीगणेश
138 करोड़ लोगों का योगक्षेम मुल्क की तात्कालिक जरूरत
138 करोड़ लोगों का योगक्षेम मुल्क की तात्कालिक जरूरत
1931 की ब्रिटिश इंडिया की जात बिरादरी तब हिन्द में ब्रिटिश कब्जे का समूचा महाराष्ट्र, ब्रिटिश कब्जे वाला गुजरात, सिंध, वर्तमान कर्णाटक राज्य का उत्तर कर्णाटक तथा मराठी भाषियों की बहुतायत वाला बांबे प्रेसीडेंसी का धारवाड़ क्षेत्र कोंकणी भाषी वह क्षेत्र जो पुर्तगाल के कब्जे में नहीं था याने रत्नागिरि का इलाका तब गोआ दमन दिवु पुर्तगाली क्षेत्र थे जिन्हें आजादी के चौदह वर्ष पश्चात डाक्टर लोहिया ने पुर्तगाली कब्जे से स्वतंत्र कराया। बंबई प्रेसीडेंसी में हैदराबाद को छोड़ कर वर्तमान तेलंगाना भी था जहां के लोगों की मातृभाषा तेलुगु थी। मद्रास प्रेसीडेंसी के समूचे तमिलनाडु, तटवर्ती आंध्र प्रदेश, दक्षिण कन्नड़ जिसका महत्वपूर्ण पश्चिमी घाट का मंगलुरू मुख्य केन्द्र था। केरल की रियासतों को छोड़ कर शेष मलयाली भाषी इलाका भी मद्रास प्रेसीडेंसी का हिस्सा थे। बंगाल प्रेसीडेंसी के वर्तमान पश्चिम बंगाल 3 जून 1947 के दिन बंगाल असेंबली ने सर्वसम्मत प्रस्ताव किया था कि वह वह Indian Union को छोड़ रहा है। बंगाल को हिन्दुस्तान से अलग नेशन मानता है। बंगाल प्रेसीडेंसी में बंगाल, बिहार, उड़ीसा व समूचा आसाम सम्मिलित था इसलिये वर्तमान बंगला देश जाति बिरादरी आंकड़े उपरोक्त तीन प्रेसीडेंसियों के अलावा समस्त पंजाब, पेशावर से लेकर रोहतक, सोनीपत, अंबाला और यमुना नदी के पश्चिमी किनारे तक अंग्रज बर्तानियां सरकार द्वारा यूनाइटेड प्राविंसेज आफ आगरा ऐंड अवध के तत्कालीन 51 जिले। पंजाब तथा बंगाल प्रेसीडेंसी के वे हिस्से जो आज क्रमशः पाकिस्तान तथा बंगला देश के नाम से जाने जाते हैं इन दोनों इलाकों का जाति बिरादरी ढांचा काफी बदल चुका था इसलिये 1931 की जाति जनगणना के आंकड़े वर्तमान बंगला देश और पाकिस्तान के संदर्भ में तथ्यहीन होगये हैं। मंडल कमीशन ने इस वास्तविकता का संज्ञान नहीं लिया। मंडल कमीशन ने यह मान कर अपनी आंकड़ा यात्रा शुरू की। 1931 में हिन्द में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा ओ.बी.सी. के नाम से पुकारे जाने वाले Other Backward Classes की संख्या ओबीसी राजनीति करने वाले दमदार नेताओं में लालू प्रसाद यादव अग्रणी हैं। वे मौजूदा बिहार राज्य यादव-मुसलमान युति का सदसंगठन करने वाले राजनेता हैं। उनका कहना है कि अनुसूचित जनजाति (जिसे अब लोग दलित कहने लगे हैं) उनकी संख्या में असाधारण वृद्धि हुई है। लालू प्रसाद यादव की सोच है कि आज के दिन हिन्द के दलित अनुसूचित जनजाति पूरी जनसंख्या का 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है जबकि वास्तविकता यह प्रतीत होती है कि वर्ष 2017 में हिन्द के दलित समाज की जनसंख्या पूरी आबादी का चतुर्थांश याने 25 प्रतिशत है। जहां तक आदिवासी या ट्रायबल जनसंख्या का सवाल है यह आंकड़ा 7.5 प्रतिशत से बढ़ कर लगभग 10 प्रतिशत के आसपास है। याने 2017 की जनसंख्या सैलाब की व्याख्या करते हुए दलित 25 प्रतिशत, आदिवासी 10 प्रतिशत, ओबीसी Other Backward Classes को 1931 के आंकड़ों के मुताबिक 54 प्रतिशत ही मानें। बंगला देश तथा पाकिस्तान दलित, ट्रायबल तथा ओबीसी की अनदेखी भी हो जाये तो भी वर्तमान में 36 करोड़ आबादी वाले मुस्लिम बहुल बंगला देश तथा पाकिस्तान का जाति वाला आंकड़ा गहरे पुनर्विचार की अपेक्षा कर रहा है। मंडल कमीशन के तर्कों पर विचार किया जाये तो हिन्द की आबादी का नब्बे प्रतिशत भाग लालू प्रसाद यादव महाशय के तर्क के अनुसार दलित, आदिवासी इतर पिछड़े वर्ग वाला है याने जिन्हें लोग सवर्ण या ऊँची जाति कहते हैं वे हिन्द की आबादी के 10 प्रतिशत मात्र हैं। 1931 की जातिगणना के नब्बे वर्ष पश्चात 2021 में हिन्द की जो जनगणना संकल्पित है उसके लिये जाति, उपजाति, गोत्र तथा जातीय व्यवसायों के संदर्भ में जनगणना अत्यंत उपादेय है। अगर मंडल कमीशन ने बंगला देश और पाकिस्तान (पंजाब व सिंध) की जातिगणना को नजरअंदाज न किया होता आज जो जन सैलाब 36 करोड़ लोगों का है उसमें से कम से कम 10 करोड़ लोगों को अलग से देखना होगा याने हिन्द की सवर्ण जनसंख्या का आधार मात्र 10 प्रतिशत मानने के उसे 20 प्रतिशत मानना होगा याने 1931 की जनगणना के वक्त मुल्क में 20 प्रतिशत सवर्ण, 55 प्रतिशत ओबीसी, 16 प्रतिशत दलित तथा 9 प्रतिशत कबीलाई समाज का सब मिला कर हिन्द की मंडल कमीशन वाली राजनीति का काला पाख या कालरात्रि 1947 में हिन्द से अलहदा हुए बंगाल असेंबली के 3 जून 1947 के प्रस्ताव तथा 15 अगस्त 1947 के दिन वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब का मुस्लिम बहुल इलाका सीमाप्रांत सिंध के जातीय आंकड़ों को संज्ञान में लेने के बजाय राजीव गांधी सरकार के पतन के पश्चात राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह हिन्द के प्रधानमंत्री हुए। उन्होंने मंडल कमीशन की सिफारिशें बिना विचार किये लागू करने का फरमान जारी कर डाला। हिन्द की जातिवादी व्यवस्था में यह इकतरफा हुक्मनामा अनेकानेक विसंगतियां का जन्मदाता बना जिसका पहला हिस्सा पूर्वी बंगाल जिसे अब बंगला देश के नाम से जाना जाता है तथा सिंध, सीमा प्रांत तथा मुस्लिम बहुल पंजाब के जातीय आंकड़े गिने ही नहीं गये थे। हिन्द की दलित, ट्रायबल तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को खुश करने के लिये जो रास्ता अपनाया वह सुविचारित नहीं था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह की पत्नी सीता देवी ने शपथपूर्वक हलफनामा पेश करते हुए अपने पति को विक्षिप्त, पागल करार दिया था। राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह कुछ नया करके दिखाना चाहते थे उन्होंने जो रास्ता अपनाया वह तर्कसंगत और न्यायसंगत तो नहीं था पर वाहवाही लूटने के उनके कृत्य ने हिन्द के जातिवादी आंकड़ों के साथ खिलवाड़ कर डाला। मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू करने से सबसे ज्यादा लाभग्राही मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव रहे। ये सब बातें अब इतिहास के पन्नों में दब गयी हैं इसलिये तात्कालिक जरूरत 2021 में संपन्न होने वाले जनगणना कार्यक्रम के लिये हिन्द के जातिवादी खेमों का सही सही नक्शा प्रस्तुत करना जरूरी है ताकि मुल्क में किस जाति के कितने लोग हैं ? व्यवसाय प्रधान जातियों का स्वरूप 1931 से 2021 तक के नब्बे वर्षों में कितना बदला है ? इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी महाशय को 1931 की जातीय जनगणना में पाकिस्तान वर्तमान सिंध, सीमाप्रांत तथा पाकिस्तान का पंजाब एवं पूर्व में ईस्ट पाकिस्तान नाम से जाने जारहे पूर्वी बंगाल तथा वर्तमान में बंगला देश की जो संयुक्त जनसंख्या छत्तीस करोड़ से अधिक है। हिन्द के बटवारे के समय यह जनसंख्या लगभग दस करोड़ मात्र थी इसलिये तात्कालिक हिन्द की राष्ट्रीय जरूरत बंगला देश, पाकिस्तान मंे 1931 की जनगणनानुसार कितने लोग अनुसूचित ट्रायबल एवं पिछड़े थे इसकी कानून सम्मत राष्ट्रव्यापी इनक्वायरी कमीशन स्थापित कर 1931 की वास्तविक जातबिरादरी आंकड़ा सुनिश्चित करना है तथा 2021 में जो जनगणना प्रस्तावित है उसके लिये आसेतु हिमाचल जातियों, उपजातियों, गोत्रों, व्यावसायिक क्षेत्र की जातियों का मानक तय करने की जरूरत है ताकि भविष्य में राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह सरीखा राजनीतिक कदम उठाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाये कि देश की जातीय, उपजातीय व्यावसायिक स्थिति राज्यवार तथा विकासखंडवार इस तरह सुनिश्चित की जा सके कि एक आइएएस अफसर तथा एक आइपीएस अफसर मुल्क के प्रत्येक विकासखंड के दो से अढ़ाई लाख लोगों का चौमुहां उत्कर्ष देख सके परख सके तथा मुल्क में व्याप्त डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन जो पूर्णतः सिस्टम फेलियर का त्रास सह रहा है सुशासन की तथा कारगर लोकतंत्र को मुल्क के 5480 विकासखंडों में सुनिश्चित किया जा सके। आईपीएस और आईएएस अफसर ज्यादा से ज्यादा दो अढ़ाई लाख लोगों का योगक्षेम देखते हुए सुशासन का मार्ग प्रशस्त कर सकें।
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