Tuesday, 15 August 2017

हिन्दी नागरी विरोध का विकल्प
भारतीय संविधान के आधिकारिक संस्करण
हिन्दी व अंग्रेजी के अलावा शेष भारतीय भाषाओं व लिपियों में उपलब्ध करा कर देश आगे बढ़ सकेगा।
विश्व भाषायी वितान में केवल नागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिन्दी भाषा में जो बोला जाता है वही लिखा भी जाता है। नागरी के बावन अक्षर जिन्हें अंग्रेजी भाषा में अल्फाबेट कहते हैं सर्वाधिक 52 अल्फाबेट हैं। हवाई द्वीप समूह की भाषा हवाई में सबसे कम 12 अल्फाबेट हैं। लैटिन में 24, रोमन में 26, फारसी में 28 तथा अरबी में 32 अल्फाबेट हैं। विश्व भाषा आगणन में पहला स्थान अंग्रेजी का है। अंग्रेजी भाषा मूलतः बर्तानियां या इंग्लैंड के लोगों की मातृभाषा है पर अंग्रेजी ने संयुक्त राज्य अमरीका सहित जहां जहां अंग्र्रेजी उपनिवेश बने वहां वहां अंग्रेजी पहुंच गयी। यद्यपि संसार के ख्रिस्ती धर्मावलंबी संख्या सर्वाधिक दो अरब पचास करोड़ है पर सभी ख्रिस्ती धर्मावलंबी अंग्रेजी भाषी नहीं हैं। यूरप के देशों में रूस, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, नीदरलैंड, इटली, पुर्तगाल तथा स्केंनडेनेवियन देशों सहित रोमन लिपि अपनाने वाले यूरोपीय देश भाषायी नजरिये से एक दूसरे से पर्याप्त भिन्नता रखते हैं। अंग्रेजी के अलावा दुनियां के देशों में मंदारिन (चीन की मूलभाषा) अरबी में तीन भाषायें बोलने वाले लोगों की संख्या हिन्दी हिन्दुस्तानी व उर्दू बोलने वाले लोगों से ज्यादा है। हिन्दी हिन्दुस्तानी व उर्दू बोलने व समझने वाले लोगों की वैश्विक संख्या चौथे क्रम में आगणित है। दुनियां की हजारों बोली जाने वाली भाषाओं में केवल हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसके भाषायी भूमि में फारसी लिपि में लिखी जाने वाली उर्दू भाषा को संयुक्त प्रांत आगरा व अवध के शहरी मुसलमान अपने मादरे जबान या मातृभाषा बताते हैं। आज संयुक्त प्रांत आगरा व अवध जिसे पंद्रह अगस्त 1947 के पश्चता उत्तर प्रदेश  कहा जाने लगा इस सूबे की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार बीस करोड़ है जिसमें चार करोड़ मुसलमान हैं। उत्तर प्रदेश के देहाती मुसलमान हिन्दुओं की तरह भोजपुरी, बुन्देली, अवधी, ब्रज, रेखता (खड़ी बोली) बोलते हैं पर मेरठ, अलीगढ़, आगरा, इटावा, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली, रामपुर, बदायूं, शाहजहांपुर, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, फैजाबाद सहित शहरी मुसलमान उर्दू को अपनी मातृभाषा बताते हैं। हिन्द के बटवारे में उ.प्र. के उर्दू भाषी मुसलमानों और मुंबई के मुसलमानों ने पाकिस्तान की नींव रखी। दूसरे शब्दों में जिसे आजकल लोग उत्तर प्रदेश नाम से पुकारते हैं वह ही असली हिन्दुस्तान कहा जाता है, बाकी इलाके तो बिहार, बंगाल, उड़ीसा, आंध्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्णाटक, कोंकण, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, मेवाड़, मारवाड़ या राजपूताना, हरियाणा, कांगड़ा हिमाचल, कश्मीर, डोगरी भाषी जम्मू कहलाते हैं। स्वतंत्रता अभियान में हिन्दुस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण थी। स्वातंत्र्योत्तर हिन्दुस्तान में उ.प्र. के अलावा बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड तथा संघ शासित भारतीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की प्रादेशिक राजभाषायें हिन्दी है इसलिये यह स्वाभाविकता अंग्रेजी की बराबरी करने वाली भाषा बन गयी पर जिन घटक राज्यों की लिपि व भाषायें क्रमशः असमी, मइती मणिपुरी, बांगला, उड़िया, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, पंजाबी तथा उर्दू घोषित हुईं उन सब भाषाओं व उनकी लिपियां अलग अलग होने से उनके भाषायी अधिकारवाद पर अंग्रेजी व हिन्दी हावी होगयी। जरूरत तो इस बात की थी कि हिन्द के आजाद होने के बाद हिन्दी व अंग्रेजी के समानांतर भारतीय संविधान की आधिकारिक प्रति उपरोक्त सभी भाषाओं और लिपियों में भी प्रस्तावित होती तो हिन्दी विरोध का सामना किया जा सकता था। मुल्क की हर भाषा में मुल्क के संविधान का प्रामाणिक संस्करण जारी करने के लिये हिन्द के सभी भाषा भाषियों को कमर कसनी पड़ेगी। जिस दिन हिन्द के संविधान की प्रामाणिक प्रति हर हिन्दुस्तानी भाषा मंे उपलब्ध हो जायेगी वही वह मुहूर्त्त होगा जब हिन्द के आसेतु हिमाचल पूर्व में इरावती से लेकर पश्चिम में सिंधु नदी तक अटक से कटक तक सारे हिन्द की लोकभाषाओं में जिस दिन भारत का संविधान उपलब्ध कराया जायेगा। हर हिन्दुस्तानी वह अरूणाचल का वासी हो, नागालैंड वासी हो, मइती मणिपुरी का मइती भाषी हो, पूर्वांचल के जिन राज्यों ने अपनी राजभाषा अंग्रेजी घोषित की है उनके सहित असमी, मइती मणिपुरी, बांगला, उड़िया, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, कोंकणी, मराठी, गुजराती, पंजाबी तथा उर्दू सहित सभी भारतीय भाषाओं में जिस दिन भारतीय संविधान की आधिकारिक प्रामाणिक प्रति मंे संसद के दोनों सदनों के सदस्य अपनी हस्ताक्षरी पर भारत के उपराष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर तथा राष्ट्रपति के हस्ताक्षरों से भारतीय संविधान की आधिकारिक देश के अंग्रेजी व हिन्दी के अलावा घटक राज्य की राजभाषा तथा लिपि में भारतीय संविधान उपलब्ध होगा तथा समूचे देश में भारतीय संविधान की आधिकारिक प्रामाणिक प्रति असम से लेकर गुजरात पंजाब व जम्मू कश्मीर के लोगों की लोकभाषा अथवा संबंधित घटक के प्रदेश की राजभाषा में भारतीय संविधान की प्रामाणिक संस्करण को उन राज्यों के मतदाता अपनी अपनी भाषा में संविधान पढ़ेंगे तो संवैधानिक व्यवस्थायें सुदृढ़ होंगी। इस प्रावधान का सबसे बड़़ा फायदा भाषा भाषी ऊहापोह से हिन्द मुक्ति पा सकेगा तथा आजादी के सत्तर वर्ष उपरांत ही सही भारतीय संविधान के लागू होने के दिन 26 जनवरी 1950 याने पिछले अड़सठ वर्षों से चल रही भाषायी ऊहापोह एकदम शांत हो जायेगा। जिस दिन असमी, मइती मणिपुरी, बांगला, उड़िया, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, कोंकणी, मराठी, गुजराती, पंजाबी तथा उर्दू भाषाओं में मुल्क के लोग भारतीय संविधान की संसद स्वीकृत घटक राज्य की लिपि व भाषा में भारतीय संविधान प्रस्तुत होगा भाषायी विरोध स्वयं ही लुप्त हो जाने वाला है। सभी हिन्दी नागरी विरोधी राजनेता यह भलीभांति जानते हैं कि दिल्ली में राज करने के लिये उन्हें हिन्दी हिन्दुस्तानी व उर्दू का ही सहारा लेना होगा। हम हिन्दवासियों में जो लोग स्वभाषा प्रेमी हैं अपनी अपनी भाषा में भारतीय संविधान के प्रामाणिक दस्तावेज के लिये बिना विलंब किये पहल करें। एक बार फिर यह कहना सामयिक होगा कि हिन्दी हिन्दुस्तानी व इस दुनियां के सात अरब इन्सानों में से लगभग पौने दो अरब लोगों द्वारा बोली जाती है। अंग्रेजी, मंदारिन, अरबी भाषाओं के बाद हिन्दी और उसकी सहेली भाषायें बोलने वाले लोग भाषायी वितान के चौथे पायदान पर हैं।
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