शीर्ष व्यक्तिगत सत्याग्रही संत विनोबा भावे
महात्मा गांधी के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही संत विनोबा भावे की भीषण अनदेखी पर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी
केन्द्र सरकार की सूचना विवेकहीनता पर तत्काल विचार करना उचित समझें।
हिन्दुस्तानी अखबारों विशेषतया अंग्रेजी अखबारों व उत्तर भारत के भाषायी अखबारों में एक नामचीन अखबार पंजाब केसरी है जिसे स्वतंत्रता सेनानी लाला जगत नारायण ने पंचनद के हिन्दी अखबार के रूप में जालंधर शहर से शुरू किया। हिन्द के रक्षा व वित्त मंत्री महाशय अरूण जेटली जो स्वयं भी स्वतंत्रता सेनानियों के बीच उभरे, उन्होंने भी महात्मा गांधी के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही संत विनोबा भावे का उल्लेख नहीं किया। यह हो सकता है कि हिन्द का सूचना तंत्र उन्हें सटीक जानकारी न दे पाया हो किन्तु वे यह तो स्वीकार करते ही हैं कि व्यक्तिगत सत्याग्रह भारत छोड़ो या क्विट इंडिया अभियान का बीज मंत्र बन गया। हिन्द की आजादी के दीवानों में एक व्यक्तित्त्व सरदार वल्लभ भाई पटेल का है जो महाभारतकालीन भीष्माचार्य के स्तर के परम भागवतवेत्ता थे और नियमित गुजराती भाषा में भागवत पारायण किया करते थे। पंजाब केसरी के वर्तमान संपादक स्वयं सांसद हैं उन्हें इस बात पर खोज करनी ही चाहिये कि उन्होंने अपने अखबार के 10 अगस्त 2017 केे अंक में जो फोटो छापे हैं उसमें प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही संत विनोबा कैसे छूट गये। ज्ञातव्य है कि संत विनोबा भारत की सभी भारतीय भाषाओं में पारंगत होने के अलावा इस्लाम धर्म की कुरआन शरीफ के हिन्दी अनुवादक भी रहे। उनकी कुरआन शरीफ की आयतों के उच्चारणों के प्रशंसक इस्लाम धर्मावलंबी भी हैं। अंततोगत्वा संत विनोबा का समूचा व्यक्तित्त्व महात्मा गांधी को समर्पित था। वे गांधी विचार के आध्यात्मिक विश्लेषण कर्त्ता भी थे ऐसे व्यक्ति जिसने हिन्दुस्तान की जमीन में पैदल घूम कर भूदान, ग्रामदान के जरिये हिन्द की जमीन का न्यायोचित वितरण का रास्ता प्रशस्त किया। सांसद अश्विनी कुमार ने जो ब्यौरे अपने अखबार के द्वारा उपलब्ध कराये हैं आज से 75 वर्ष पूर्व सात अगस्त 1942 की रात से लेकर नौ अगस्त 1942 के अढ़ाई दिन हिन्द के इतिहास के मुखर पन्ने हैं। कांग्रेस नेता महाशय गुलाम नबी आजाद ने अगस्त आठ 1942 का उल्लेख अपने संबोधन में किया। खबर प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया की है। महाशय गुलाम नबी आजाद फरमाते हैं भारत छोड़ो अभियान की 75वीं यादगार में पंडित नेहरू के लखनऊ से छपने वाले अखबार नेशनल हेरल्ड, यंग इंडिया व हरिजन का भी उल्लेख करते हैं। उनकी समूची वार्ता आधी अधूरी और सियासत से भरपूर है। नेशनल हेरल्ड ने 1934 में स्वातंत्र्यवीर शांतिलाल त्रिवेदी जो मूलतः राजकोट निवासी थे, के द्वारा जो ब्यौरे अस्कोट के रजवार के बारे में नेशनल हेरल्ड में प्रकाशनार्थ भेजे उसके अनुसार डाक्टर लोहिया ने यह निष्कर्ष निकाला कि कैलास मानसरोवर, राकसताल तथा दरकोट व लिपुलेख, तकलाकोट सहित समूचे तिब्बत की रकम अस्कोट के मार्फत पिथौरागढ़ खजाने में जमा होती थी इसलिये महाशय गुलाम नबी आजाद जो फरमा रहे हैं वह पूर्णतः उनकी अपनी राजनीतिक पार्टी का जानलेवा अभियान है। राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस इस समय नेतृत्व विहीन पार्टी प्रतीत होती है। उसकी स्थिति रस्सी जल गयी पर ऐंठन नहीं गयी वाली कहावत चरितार्थ कर रही है। आजाद महाशय यह भी फरमाते हैं कि वे विस्तार में गहराई तक पहुंच नहीं करना चाहते हैं। जहां तक गूगल के विकीपीडिया का संबंध है विकीपीडिया ने तिब्बत के बजाय चीन को महत्त्व देना शुरू किया है। यदि ब्रिटिश इंडिया व तिब्बत के बीच 1890 मं संपन्न संधि का राजनीतिक विश्लेषण सही परिप्रेक्ष्य में किया जाये जनाब गुलाम नबी आजाद महाशय के सारे तर्क धराशायी हो जायेंगे। यह संभव हो सकता है कि मुंबई, पुणे, नागपुर से प्रकाशित होने वाले मराठी अखबार संत विनोबा भावे की राष्ट्रीय भूमिका को पर्याप्त महत्व दें पर महाराष्ट्र में मराठा संगठन शक्ति निरंतर बलवती होती जारही है ऐसी स्थिति में क्या पुनः महाराष्ट्र मराठा शक्ति स्त्रोत नहीं बन जायेगा ? चूंकि महाराष्ट्र में शक्ति स्त्रोत मराठों का है इसलिये उनका पुनः उभराव महाराष्ट्र की राजनीतिक हालात में बदलाव ला सकता है। जो भी हो राजनीतिक शक्ति संतुलन को सही दिशा देने के लिये सबसे पहली जरूरत महाराष्ट्र में मराठी भाषा के जरिये मराठी में ही राजकाज के अलावा मराठी भाषा में भारतीय संविधान की प्रामाणिक प्रति उपलब्ध किये जाने के लिये संकल्प लिया जाये। बांबे प्रेसीडेंसी के अलावा मद्रास प्रेसीडेंसी व बंगाल प्रेसीडेंसी में स्थानीय भाषायें तमिल व बांगला में भी संबंधित राज्य सरकारों के सहयोग से भारतीय संविधान की प्रामाणिक प्रति तमिल व बांगला भाषाओं में भी उपलब्ध करा कर देश में भाषायी सौहार्द तथा जन जन तक उनकी भाषा में भारतीय संविधान की प्रामाणिक प्रति उपलब्ध हो और इन तीनों प्रेसिडेंसियों के मुख्य घटक महाराष्ट्र, तमिलनाडु व बंगाल से भारतीय संविधान स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराने का त्वरित संकल्प लिया जाये व महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक ये तीनों राज्य भारत के इतर राज्यों का मार्गदर्शन करने की स्थिति में हों। आने वाले पांच सात वर्ष में भारत की हर भाषा में भारत का संविधान संबंधित भाषा की लिपि तथा पड़ोसी घटक राज्य की लिपि में उपलब्ध कराने का शिवसंकल्प लिया जाये जिससे हिन्द में भारतीय संविधान की प्रामाणिक प्रति प्रत्येक लिपि, पड़ोसी लिपि तथा अधिकृत संविधान का दस्तावेज हर नागरिक को उपलब्ध कराने पर तात्कालिक विचार संपन्न हो। महात्मा गांधी के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही संत विनोबा भावे की भीषण अनदेखी पर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी
केन्द्र सरकार की सूचना विवेकहीनता पर तत्काल विचार करना उचित समझें।
अब प्रश्न उठता है कि वे कौन से कारण हैं जिनकी वजह से महात्मा गांधी के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही संत विनोबा भावे की महत्वपूर्ण भूमिका की अनदेखी हुई ? यह त्रुटि यदि सोशल मीडिया तथा मैं पहले, मैं पहले की आपाधापी एवं इस समय मुल्क में अच्छेखासे पैमाने में व्याप्त पेडन्यूज शैली की उपज है तो उस पर गंभीरतापूर्वक विचार किये जाने की तात्कालिक जरूरत है। हिन्द के सूचना प्रसारण मंत्रालय को माननीय प्रधानमंत्री जी के संज्ञान में लाना ही चाहिये कि क्या संत विनोबा भावे की अनदेखी लापरवाही केे कारण तो नहीं हुई। साथ ही प्रधानमंत्री जी को यह विचार करना चाहिये कि ऐसी त्रुटि दुबारा न हो इसका विश्लेषण कर जिन महानुभावों ने जानकारी अथवा अज्ञान के कारण संत विनोबा प्रसंग को माननीय प्रधानमंत्री जी के संज्ञान में प्रस्तुत नहीं किया। उन्हें भविष्य के लिये ऐसी त्रुटियां न हों इसका पूरा पूरा इंतजाम होना चाहिये। महात्मा गांधी के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही संत विनोबा भावे थे दूसरे व्यक्तिगत सत्याग्रही जवाहरलाल नेहरू। सत्याग्रह शताब्दी समारोह नौ अगस्त 2042 को संपन्न करने केे लिये हिन्द की आजादी से जुड़े हर व्यक्ति जिसने आत्मबलिदान किया था राष्ट्र के लिये अपना हविष्य प्रस्तुत किया आने वाले पच्चीस वर्ष में हिन्द की हर भाषा में भारत छोड़ो अभियान का यथार्थ रूप प्रस्तुत करने के लिये माननीय प्रधानमंत्री सहृदयतापूर्वक देश की आजादी के लिये संघर्ष करने वाले हर व्यक्ति का खुलासा उपलब्ध हो इसलिये भारत छोड़ो अभियान की बारीकियां जानने के लिये Quit India National Ecquiry Commission गठित कर हिन्द की आजादी का ब्यौरा हिन्द की सभी भाषाओं में मिले ताकि 75 वर्ष पूर्व महात्मा गांधी ने करो या मरो का जो संदेश हिन्द के लोगों को दिया उसे आने वाले जमाने याने नौ अगस्त 2042 में भारत की आजादी के 150 करोड़ लोग हृदयंगम कर सकेें तथा हमारी राष्ट्रीयता को संबल मिले।
जब महात्मा गांधी ने संत विनोबा भावे को 8 अगस्त 1948 की रात को पहला व्यक्तिगत सत्याग्रही घोषित किया समूची दुनियां में संत विनोबा की एक खास पहचान होगयी। महात्मा गांधी ने सन 1933 में गांधी सेवा संघ स्थापित किया। खूबसूरत लिखने वाले रघुनाथ श्रीधर धोत्रे का सुलेेख महात्मा गांधी को बहुत पसंद था। जब धोत्रे जी व उनकी पत्नी अक्खाताई धोत्रे को पता चला कि महात्मा ने संत विनोबा को पहला व्यक्तिगत सत्याग्रही घोषित किया है धोत्रे जी में अवसाद ने आक्रमण कर डाला। विनोबा स्थितप्रज्ञ थे ऊपर खुशी आनंद की कोई झलक नहीं दिखी। इस घटना के ठीक चौदह वर्ष पश्चात छतरपुर केे मनीषी चिंतक चतुर्भुज पाठक ने गांधी विचार का एक पखवाड़ा संपन्न किया जिसमें यह ब्लागर भी उस पखवाड़े का एक व्यक्ति था। रघुनाथ श्रीधर धोत्रे ने चौदह वर्ष पूर्व के अपने विषाद की परतें खोलते हुए कहा - विनोबा मेरे साथी हैं, स्थितप्रज्ञ ब्रह्मचारी हैं। उनकी दृष्टि शुकदेव सरीखी है जो हर स्त्री को माता के रूप में ही देखते हैं। उन्होंने आगेे कहा - चौदह वर्ष पश्चात मैं प्रायश्चित्त कर रहा हूँ कि विनोबा और मुझमें कोई साम्य नहीं है। इसे ही कहते हैं वास्तविकता या वास्तविकी और व्यावहारिकी में कारगर तालमेल बैठाना। संत विनोबा ने पवनार धाम में जो अलख जगाई गांधी जीवन दर्शन की जो आध्यात्मिक व्याख्या के द्वारा पुरूष-स्त्री संबंधों को एक नया आयाम दिया। विनोबा भावे से दो मराठी भाषी महिला शक्ति स्त्रोत निर्मला देशपांडे व विमला ठकार ने अपने अपने क्षेत्र में कीर्तिमान कायम किये। जहां तक निर्मला देशपांडे के व्यक्तित्त्व व कृतित्व का सवाल है जीवन के उत्तरार्ध में निर्मला देशपांडे के कायिक, वाचिक तथा मानसिक संकल्प में व्यवधान उठ खड़ा हुआ। यह ब्लागर मानता है कि निर्मला जी स्थिरचित्त नहीं थीं पर विमला ठकार श्रीमद्भागवत महापुराण की अद्वितीय व्याख्याता रहीं। जब तक हिन्द में थीं विनोबा के मूलमंत्र ‘श्रद्धा भागवते शास्त्रे अनिंदाऽपि क्वापि हि’ का पालन करती रहीं। पिछले बीसियों वर्षों से विमला ठकार संयुक्त राज्य अमरीका में भागवत धर्म तथा भागवत शास्त्र की जो नूतन व्याख्या कर रही हैं वह अपने आप में एक अद्वितीय कृत्य है। अमरीकी लोगों में विमला ठकार ने एक नयी दिशा श्रीकृष्ण भक्ति की प्रस्तुत की है।
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