1. प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को उनके अड़सठवें जन्मदिन की वैश्वे दैविक मंगलकामनायें प्रस्तुत करते हुए विश्वकर्मा जयंती के साथ साथ नरेन्द्र मोदी जयंती हिन्द के लिये नया पैगाम लेकर आयी है। विश्वकर्मा दिवस शरद का पहला पर्व है। पश्येम शरद् शतम्, जीवेम शरदः शतम्, श्रणुयाम शरदः शतम् प्रव्रजाम शरदः शतम्। हिन्द में दो वास्तु विशेषज्ञ हुए। पहले हैं विश्वकर्मा दूसरे हैं मय दानव। विश्वकर्मा आधुनिक दिल्ली जिसे शक्रप्रस्थ, इन्द्रप्रस्थ तथा दिल्ली या देहली नाम से संबोधित किया जाता है, देहली या दिल्ली के तात्पर्य होते हैं दरवाजा याने दिल्ली हिन्द का दरवाजा है। इस राष्ट्र दरवाजे की सुरक्षा संरक्षा का सेवाभार पूर्व में विश्वकर्मा और पिछले सवा तीन वर्ष से नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पूरी निष्ठा तथा राष्ट्रभक्ति सहित मानवमात्र बन्धु है इस विवेक से संभाल रहे हैं। जन्मदिन के पुण्याहवाचन काल में प्रधानमंत्री जी से संपन्न और विपन्न में समदृष्टि रखते हुए हिन्द के स्मार्ट विलेज तथा स्मार्ट सिटी संवारने का शिवसंकल्प लेना मुल्क की पहली जरूरत है। यद्यपि जेल प्रशासन माया संघ के घटक राज्यों की उत्तरदायिता है भारत सरकार इतना तो कर ही सकती है कि प्रत्येक जेल को राष्ट्रीयकृत बैंकोें में से कोई एक बैंक जेल अंगीकरण का संकल्प ले। प्रत्येक जेल की वस्त्र ओढ़ने बिछावन केे वस्त्रों सहित कैदियों के पहिरावे के वस्त्र जेल कारिन्दों की वर्दियां वगैरह जेल में ही तैयार हों हर कैदी को हाथ से काम करने के बदले पारिश्रमिक मिले ऐसी व्यवस्था के संकल्प से जहां राज्य सरकारों के जेल बजट में संयम होगा वहीं जेल में जो बुनकर, कोरी, तांती विभिन्न अपराधों केे कारण बंदी हैं उनकी योग्यता का उपयोग जेल प्रबंधन में हो। देश भर के सभी जेल उद्यमिता केन्द्र का स्वरूप ग्रहण करें इसके लिये प्रधानमंत्री जी को राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मंत्रणा कर जेल उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाना देश के लिये अत्यंत लाभकर उपाय है।
2. बढ़ती आबादी के कारण सन 2016 के जनसंख्या आंकड़ों की तरफ ध्यानाकर्षण इसलिये जरूरी है कि मुल्क की वर्तमान आबादी 139 करोड़ से ज्यादा है इसलिये गांधी के चर्खे व कबीर के करघे के जरिये ही रात दिन बढ़ रही आबादी के दोनों हाथों को काम देने के लिये चर्खे में कताई व करघे में बुनाई के जरिये कतकर व बुनकर को उसके घर में ही काम दिया जाना राष्ट्र की पहली जरूरत है इसलिये हर चर्खा कातने वाले पुरूष या स्त्री को उसके फुर्सत के समय का उपयोग करने के लिये प्रोत्साहित किया जाये। यदि कोई कतकर मात्र पांच से दस रूपये रोजाना कताई परिश्रम अथवा हाथ बुनाई पारिश्रमिक अर्जित करता है इससे जहां परिवार की आमदनी में इजाफा होगा भले ही वह नौकरीनुमा फायदेमंद न हो। छोटी छोटी रकम भी देश की आर्थिक हालत सुधारने में मददगार हो सकती है इसलिये खेतीबाड़ी के बाद आज भी हिन्द के लोगों की माली हालत में वृद्धि करने का एकमात्र उपाय चर्खा कताई, निटिंग यार्न कताई, निटिंग यार्न हाथ बुनाई तथा तांती (बंगाल के बुनकर) कोरी - हिन्दू बुनकर तथा जुलाहों को बुनाई उनके घर में ही मिले, हाथ कते, करघा बुने कपड़े देश में व्यापक मात्रा में निर्मित हों जिससे महात्मा गांधी का वह संकल्प संपन्न हो कि देश के हर हाथ को काम दिया जारहा है। आमदनी सीमित ही सही एक ऐसी स्थिति कायम होरही है जिससे छोटे से छोटा रोजगार भी अपनी महत्वता प्रदर्शित कर रहा है इसलिये मुल्क के स्मार्ट विलेज व स्मार्ट सिटी में जिला लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है उन्हें चर्खा कताई, हाथ बिनाई, करघा हैंडलूम बुनाई का लाभार्थी बनाया जाने का संकल्प लिया जाये। स्मार्ट विलेज और स्मार्ट सिटी में जिन्हें लाभप्रद नौकरी वाला रोजगार नहीं मिल पारहा है उन्हें विशेष रूप से चर्खा - करघा तथा हिन्द के सूती वस्त्र व्यापार से जोड़ा जाये। स्मार्ट विलेज व स्मार्ट सिटी में योग्य दर्जियों द्वारा वस्त्र निर्माण का कार्य संपन्न कराया जाये। चीन भारत सहित दुनियां के बाजार में सर्वत्र हावी है। गांधी का चर्खा, कबीर का हथकरघा एक नयी व्यवस्था का सूत्रपात करने की क्षमता रखता है इसलिये मुल्क के कपड़ा मंत्री को हैंडलूम विस्तार को संपन्न करने के लिये उपाय करने की आवश्यकता है।
3. मनरेगा - महात्मा गांधी नेशनल रूरल इम्प्लायमेंट गारंटी स्कीम पर पुनर्विचार करने की तात्कालिक आवश्यकता है। मुल्क के स्मार्ट विलेज और स्मार्ट सिटी क्षेत्रों में महात्मा गांधी नेशनल इम्प्लायमेंट गारंटी को इम्प्लायमेंट गारंटी का स्वरूप दिया जाना चाहिये। स्मार्ट विलेज के बुनकरों तथा दर्जियों को इम्प्लायमेंट गारंटी का लाभग्राही बनाना राष्ट्रहित में है। यद्यपि कांग्रेस सहित वे राजनीतिक दल जो मनरेगा का सदुपयोग नहीं दुरूपयोग करने में ज्यादा रूचि रखते हैं वे होहल्ला तो जरूर करेंगे पर इम्प्लायमेंट गारंटी स्मार्ट विलेज व स्मार्ट सिटी के उद्यमिता वरदान का कार्य संपन्न कर सकेगी। स्मार्ट विलेज व स्मार्ट सिटी में सुव्यवस्था के कारण इम्प्लायमेंट गारंटी का दुरूपयोग नहीं किया जा सकेगा। इम्प्लायमेंट गारंटी केवल स्मार्ट विलेज व स्मार्ट सिटी के परिगणित क्षेत्रों तक ही सीमित हो उसका लाभार्जन गरीबी के निवारण में भी मददगार हो सकता है।
4. गरीबी निवारण का जो स्वरूप श्रीमती इंदिरा गांधी ने संकल्पित किया उसका फलितार्थ गरीब और अमीर के बीच में खाई चौड़ी होती गयी। जरूरत इस बात की है कि गरीबी निवारण के लिये अब तक क्या हुआ ? उसकी समीक्षा की जाये और गरीब व अमीर के बीच आज जो युद्ध जैसी स्थिति है उससे निबटने के लिये तात्कालिक व दीर्घकालिक उपाय संकल्पित हो। 1931 की जनगणना में जातियों का जो विवरण मंडल कमीशन और राजा मांडा प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपनाया उसमें सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने बंगला देशी (तत्कालीन ईस्ट पाकिस्तान) सिंध, पंजाब, सीमा प्रांत के लोग जिनमें दस करोड़ लोगों की गणना नहीं हो पायी जिससे राजा मांडा द्वारा अपनाया गया तरीका पूर्णतः इकतरफा निर्णय हुआ जिसका सबसे ज्यादा लाभार्जन मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी तथा लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल ने किया जिसने मुल्क में पारिवारिक राज की नींव मजबूत कर डाली इसलिये तात्कालिक आवश्यकता इन विसंगतियों से निबटने की है।
5. प्रधानमंत्री जी गुजरात में जन्मे वैकुंठ ल. मेहता ने विकेन्द्रित अर्थांग तथा सहकारी अभियान के जरिये जो आर्थिक सुधार के उपाय 1953-54 से 1963 तक संपन्न किये ग्यारहवें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम महाशय ने PURA - प्रोवाइडिंग अर्बन फैसिलिटी टु रूरल एरियाज का जो रास्ता सुझाया तथा आपने अपने गुजरात के मुख्यमंत्रित्व काल में 2011 में अहमदाबाद में गुजरात के गांवों की उनकी ग्रामीणता बरकरार रखते हुए रूर्बनाइजेशन का जो संकल्प किया हमारे गांवों को उपरोक्त तीन विधियों से लाभान्वित किया जाना है। इजरायल ने वैकुंठ ल. मेहता के रूर्बन सोसाइटी प्रस्ताव की प्रशंसा करते हुए बिहार के जीरादेई (डा. राजेन्द्र प्रसाद प्रथम राष्ट्रपति का गांव) पर विशेष अन्वेषण किया। आपकी हाल में संपन्न इजरायल यात्रा ने इजरायल व हिन्द के पारस्परिक संबंध मजबूत हुए हैं। जरूरत इस बात की है कि इजरायल ने गांवों के विकास का जो रोडमैप तैयार किया उसे हिन्द के उन गांवों में जिन्हें स्मार्ट विलेज का स्वरूप दिया गया है तात्कालिक प्रयोग किया जाये।
6. इस समय मुल्क में बीफ महोत्सव तथा हिन्द की देसी नस्ल की गायों की संरक्षा तथा गौपालन के क्षेत्र में ‘गोरक्षा’ संबंधी सवाल उबल रहे हैं। संविधान हर नागरिक को विचार स्वातंत्र्य, आचार स्वातंत्र्य का मौलिक अधिकार देता है। दूध उत्पादन के क्षेत्र में ए-1 दूध जरसी गायों व संकर गायों का दूध बाजार में चालीस से पैंतालीस रूपये लीटर बिक रहा है, उसकी मात्रा ज्यादा है। दूसरी ओर देेसी गायों का दूध साठ से पैंसठ रूपये लीटर बिकता है यह दूध उत्तम कोटि का दूध माना जाता है पर उत्पादन में सीमित है। देसी गायों की संरक्षा तथा देसी नस्ल की गायें सरकार का समर्थन पायें यह इस बात पर निर्भर करता है कि देसी गाय की गौरक्षा के लिये मुल्क का जनमत क्या सोचता है ? इसलिये देसी गायों की नस्लें वर्तमान में गिर की पंद्रह हजार गायों के अलावा किन किन नस्ल की कितनी गायें आज हिन्द में देसी नस्ल की गौ के रूप में विद्यमान हैं। प्रधानमंत्री जी यह राष्ट्रहित में है कि देसी गौ संरक्षण को प्राथमिकता दी जाये इसलिये देसी नस्ल की गायों की परिगणना, देसी गायें कहां कहां हैं ? कितनी हैं ? शहरों व गांवों में देसी गायों को छुट्टा छोड़ा जाता है इसलिये देसी गौ संरक्षण मुल्क केे लिये अत्यंत आवश्यक है। देसी गौ संरक्षा के विविध उपायों के लिये प्रधानमंत्री जी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार विमर्श कर देसी नस्ल गौ संरक्षण पर निर्णायक कदम उठाने का संकल्प लिया जाये। मुल्क क्या चाहता है ? बीफ महोत्सव के समानांतर क्या हिन्द के वे लोग जो निरामिष हैं उन्हें भी जीने का अधिकार दिया जाये ? जरसी गौ संकर गौ जब तक दूध दें उनके दूध का उपयोग तो हो ही रहा है जब वे दूध देना बन्द कर दें उन्हें मैकेनाइज्ड स्लाटर हाउस द्वारा बीफ भोजियों को ताजा बीफ उपलब्ध कराया जाये। जो लोग देसी नस्ल की गौ संरक्षा चाहते हैं उन्हें अपनी गोरक्षक भावना में सामयिक परिवर्तन करना होगा ताकि देश में सामाजिक व्यवस्था बनी रहे। हर वर्ग के लोग अपना अपना मार्ग चुनें पर सामने वाले को भी सहअस्तित्व के भाव से जीवित रहने का अवसर दें।
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