Tuesday, 26 September 2017

अवसि देखिय देखन जोगू
मर्यादा पुरूषोत्तम राम की मर्यादा प्रियता 
और स्वयं मर्यादाओं का अनुपालन करने वाला अद्वितीय वैश्विक व्यक्तित्त्व
साकेत अथवा अयोध्या अर्थात युद्ध रहित मानव एवं सृष्टि के इतर जीवों की कर्मभूमि अयोध्या मर्यादा पुरूषोत्तम दाशरथि राम की मर्यादा का अद्वितीय लीला भूमि। जब दाशरथि राम वनवास को सीता और लक्ष्मण के साथ जारहे थे अयोध्या साकेत वासियों ने ऊर्ध्वबाहु होकर उद्घोषित किया - वयं सर्वे गमिष्यामो रामो दाशरथि यथा। दाशरथि राम ने अयोध्या वासियों से कहा - भरत, अयोध्या के राजा हैं। आप लोग लौट जाइये और भरत का अनुसरण कीजिये। यह घटना गंगातट श्रंगबेरपुर में घटी। राम सीता व लक्ष्मण के साथ श्रंगबेरपुर में केवट की नाव से गंगा पार कर भरद्वाज आश्रम की ओर उन्मुख हुए। राम ने जिन मर्यादाओं का अनुपालन किया, उनकी कीर्त्ति व यश बढ़े। राम ने मर्यादा पुरूषोत्तम की भूमिका का शुभारंभ कर डाला। उन्होंने अयोध्या वासियों का ध्यानाकर्षण कर साकेत वासियों को प्रेरित किया कि मर्यादा पुरूषोत्तम राम की मानवीय मर्यादाओं को तात्कालिक प्रभाव देने के लिये मर्यादा पुरूषोत्तम राम की लीला का नया उन्मेष शुरू करते हुए मर्यादा पुरूषोत्तम राम को अयोध्या का प्रतीक स्वीकार करते हुए अयोध्या वासियों केे लिये आस्था का नया आगार सृजित किया। अयोध्या का हर व्यक्ति मर्यादा पुरूषोत्तम राम की मानवीय मर्यादाओं का अनुशीलन करते हुए साकेत और अयोध्या के लिये मर्यादा पुरूषोत्तम व्यक्तित्त्व की पहल कर डाली। राम की मर्यादा पुरूषोत्तम आकृति को भौतिक रूप से स्थापित कर मर्यादा पुरूषोत्तम राम की परम पावनी कीर्त्ति का स्तंभ सृजित कर मर्यादा पुरूषोत्तम राम केे मर्यादा तत्त्व को तात्त्विक स्वरूप देकर राम के मर्यादा पुरूषोत्तम व्यक्तित्त्व को नया तथा समसामयिक आकार प्रदत्त कर दिया। अयोध्या - साकेत वासियों के लिये मर्यादा पुरूषोत्तम व्यक्तित्त्व को साकार करते हुए अयोध्या व साकेत के लिये मर्यादा पुरूषोत्तम राम की मानवीय मर्यादाओं को स्थायित्व देते हुए उनका रामलला विराजमान हैं इस भावना को स्थायित्व देने वाला राम के मर्यादा पुरूषोत्तम कौशल को अयोध्या को स्थायित्व देने वाला महापर्व निर्मित कराने की क्षमता केेवल मर्यादा पुरूषोत्तम वाले व्यक्तित्त्व में निहित है इसलिये मर्यादा पुरूषोत्तम स्वरूप को स्थायित्व देना हिन्द का मौजूदा युगधर्म है। सबसे महत्वपूर्ण स्थिति यह है कि अयोध्या में मर्यादा की लक्ष्मण रेखा का राष्ट्रीय सम्मान हो। राम जिसमें योगी रमण करते हैं यही दाशरथि राम भी हैै। दाशरथि राम की महत्वपूर्ण भूमिका ही मर्यादा पुरूषोत्तम राम की विश्व मानवीय सत्ता है जिसे तभी संवारा जा सकता है जब अयोध्या में मर्यादा पुरूषोत्तम राम की मर्यादा प्रियता को स्थायित्व दिया जाये। मर्यादा प्रतीक राम का पुरूषोत्तम स्वरूप जन जन को आह््लादित करे इसलिये सबसे पहले अयोध्या में मर्यादा पुरूषोत्तम राम की जीवंतता को स्थायित्व देते हुए मर्यादा के प्रतीक तत्वों को लोकसंग्रह के माध्यम से जाग्रत किया जाये। इस लोकसंग्रह संपन्न जागरण के लिये मर्यादा पुरूषोत्तम राम का व्यक्तित्त्व निखार कर अयोध्या से सैकड़ों हजारों मर्यादा पुरूषोत्तम प्रतीकों को लोकहितार्थ प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। मर्यादा पुरूषोत्तम राम का व्यक्तित्त्व ही सही माने में लोकसंग्रह का मार्ग है इसलिये आज की तात्कालिक आवश्यकता मर्यादा की स्थापना करना है। मर्यादा तभी बलवती होगी जब लोकमत राम के मर्यादा पुरूषोत्तम स्वरूप को वास्तविकता देते हुए हर व्यक्ति राम की मर्यादा का अनुपालन करने का संकल्प ले तथा अयोध्या में मर्यादा पुरूषोत्तम राम को साकार व्यक्तित्त्व के रूप में प्रस्तुत कर मर्यादा पुरूषोत्तम राम की लोक मर्यादा को जीवंत बनाया जाये। राम मंदिर और राम मर्यादा में हिन्द के लिये मंदिर से ज्यादा महत्व राम के मर्यादा पुरूषोत्तम स्वरूप का है इसलिये राम के मर्यादा पुरूषोत्तम प्रकल्प को स्थायित्व देते हुए अयोध्या से मर्यादा के प्रतीक दाशरथि राम का भव्य लोकसंग्रह मुल्क की तात्कालिक आवश्यकता है इसलिये मर्यादा पुरूषोत्तम राम के मर्यादा अनुपालन करने वाले व्यक्तित्त्व को उजागर करना आज के हिन्द की लोक आवश्यकता है। आइये, अयोध्या को युद्ध नहीं अथवा युद्ध रहित मानवीय आदर्श का प्रतीक बना डालिये। राम की लोक मर्यादा को स्थायित्व देकर हिन्द को मर्यादाओं के भीतर रहने का एक अनुपम अवसर अयोध्या में उपलब्ध हुआ है उसका लाभार्जन कर अयोध्या से ही यथाशीघ्र प्रारंभ हो। आज का हिन्द राम की लोक मर्यादा तथा मर्यादा पुरूषोत्तम व्यक्तित्त्व का लाभग्राही बने। मुल्क में रामराज्य की सुकल्पना तभी साकार हो सकती है जब जन जन राम की मर्यादा प्रियता के प्रति आकर्षित हो। मर्यादा पुरूषोत्तम राम का मर्यादा अनुशीलन हिन्द के लिये एक वरदान है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम का लौकिक स्वरूप हिन्द के समानांतर समूचे विश्व के लिये मर्यादा का प्रतीक है। मर्यादाओं का उल्लंघन न करने वाला राम का अलौकिक व्यक्तित्त्व मर्यादा पुरूषोत्तम के रूप में हिन्द की अद्वितीय उपलब्धि है। इसलिये मर्यादा पुरूषोत्तम राम को मानव लीला मानव हित साधन करे और संसार में मर्यादा प्रियता का वातावरण राम के मर्यादा पुरूषोत्तम स्वरूप को विश्व में शांति, सहअस्तित्व तथा विश्व बंधुत्व एवं वसुधैव कुटुंबकम का महान लोक आदर्श हिन्द विश्व के दूसरे राष्ट्रों में मर्यादा पुरूषोत्तम राम के व्यक्तित्त्व से आलोकित करने का संकल्प ले। 
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