Monday, 23 October 2017

अविद्यया मृत्युम् तीर्त्वा विद्यया अमृतमश्नुते
हिन्द की अद्भुत ज्ञान शलाका की उपलब्धि ?
हिन्द के पारंपरिक लोग अविद्या व विद्या में फर्क समझते हैं। महाशय सदानंद धूमे लिखते हैं ‘मिस स्टेप बाई मोदी मे नॉट दि इनफ फार कांग्रेस टु रिटर्न टु पावर’। टाइम्स आफ इंडिया शनिवार 21 अक्टूबर 2017 में ‘इज इंडिया टर्निंग रिलिजियस’ के स्तंभकार अमरीकन इंटरप्राइज इन्स्टीट्यूट वाशिंगटन डी.सी. में रेजिडेंट फेलो हैं। अमरीका सहित समूची पश्चिमी सभ्यता जिसका मूल स्त्रोत यूरप है भारत की अविद्या-विद्या शैली पचाने की ताकत नहीं रखते। उन्हें केेवल एक तत्व की जानकारी है। जिसे हिन्द का समाज विद्या कहता है वही विद्या-ज्ञानशलाका अंग्रेजी में नालेज कहलाती है। अविद्या और विद्या का भेद हिन्द की चिंतन शैली का मूल स्त्रोत है। अमरीकी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान नासा सहित पश्चिम के लोगों को अविद्या व विद्या का फर्क समझने में शायद कुछ लंबा समय लग सकता है। भारत का मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोक यूरप व अमरीका की नकल कर भारतीय चिंतन शैली को अंग्रेजी अनुवाद के माध्यम से समझना अपनी शान समझता है। सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन ने श्रीमद्भगवत गीता का अनुवाद अंग्रेजी में प्रस्तुत करते समय यह साफगोई की कि गीता के रहस्य को अंग्रेजी भाषा के जरिये नहीं समझा जा सकता। एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद के समय मूल भाषा की सरस्वती शक्ति अनूदित भाषा में हृदयंगम नहीं की जा सकती। यही वह मूल कारण है जिसकी वजह से विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध ज्ञानशलाका के उस भूमि उस भूमि के भूमिपुत्रों एवं पुत्रियों में मातृभाषायी विवेक जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी का हेतु है इसलिये हिन्द की अविद्या व विद्या धारणायें विश्व की इतर विवेक मान्यताओं से भिन्न है। महाशय सदानंद धूमे उनकेे नाम सदानंद तथा गोत्र नाम धूमे पूर्णतया भारतीय परिवेश वाले हैं। चाणक्य ने कहा - स्थान भ्रष्टा न शोभन्ते दंता केशा नखा नरः। महाशय धूमे स्थान भ्रष्ट नर हैं याने उन्होंने हिन्द को छोड़ कर अमरीकी जीवनशैली अपना ली है। उनकी नस्ल तो हिन्दुस्तानी है पर व्यावहारिकता में वाशिंगटन डी.सी. सभ्यता उन पर पूर्णतया छायी हुई है इसलिये सदानंद  होते हुए भी वे स्थान भ्रष्ट नर होने के नाते हिन्दुस्तानी सदानंद नहीं अमरीकी निरानंदी सदानंद बन गये हैं। उनके सरीखे के जो पंद्रह सोलह लाख मजहब के नजरिये से अपने आपको हिन्दू कहने वाले अमरीकी हिन्दुओं पर अब्राहम लिंकन से लेकर डोनाल्ड ट्रंप पर्यन्त अमरीकी राष्ट्राध्यक्षों का अमरीकी श्वेत नस्ल जिसे अंग्रेजी में रेसियलिज्म भी कहा जाता है मूल अमरीकी श्वेत नस्ल याने यूरप से जो श्वेत नस्ल के लोग अमरीका गये उनका समुच्चय अपनी नस्लवादी ताकत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप केे व्यक्तित्त्व में झलक रहा है। सैद्धांतिक तथा अमरीकी संविधान प्रदत्त समानता के सिद्धांत के बावजूद श्वेत नस्लवादियों में जो आत्मश्लाघा की भावना है उसे दबाना मुश्किल है। डोनाल्ड ट्रंप महाशय ने इसी नस्लवादी आत्मश्लाघा का लाभार्जन कर संयुक्त राज्य अमरीका के पैंतालीसवें राष्ट्राध्यक्ष के तौर पर स्वयं को प्रतिष्ठित किया है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव जीतने केे संदर्भ में रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भूमिका उतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितनी डोनाल्ड ट्रंप की अपनी श्वेत नस्ल पुनर्स्थापना का भगीरथ अभियान। 
महाशय धूमे ने अपने स्तंभ - टाइम्स आफ इंडिया के अंक गुरदासपुर जहां से दिवंगत विनोद खन्ना लगातार लोकसभा सदस्य चुने जाते रहे, लोकसभा उपचुनावों में सुनील जाखड़ की दो लाख मतों से भाजपा उम्मीदवार को परास्त कर बलराम जाखड़ की पंजाबी सनातनी हिन्दू शैली को नया उपहार दे डाला। भाजपा से नाता तोड़ कांग्रेस से जुड़े नवजोत सिंह सिद्धू ने घोषित किया कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में पुनः प्रतिष्ठा पाने के रास्ते में हैै। महाशय नवजोत सिंह सिद्धू की अपनी आत्म आकांक्षा पंजाब की राजनीति में हावी होने की थी। अपना आपा खोने वाली केजरीवाल की आआपा से शुरूआती कदमताल करने के इच्छुक सिद्धू ने अंततोगत्वा कैप्टन अमरेन्द्र सिंह का पल्लू पकड़ डाला। सुनील जाखड़ की जीत के लिये अपनी पीठ स्वयं ठोकने वाले सिद्धू ने आव देखा न ताव। धूमे फरमाते हैं कि राहुल गांधी अति उत्साहित हैं और गुजरात में आगामी विधानसभा निर्वाचन के समय महाशया सोनिया गांधी के परम विश्वसनीय अहमद पटेल को गुजरात में समर्थ राजनीतिक बनाने में प्रयासरत हैं पर वस्तुतः महाशय अहमद पटेल के राजपथ में चलने में सबसे बड़े घाटे में शंकर सिंह बाघेला हैं। वे गुजरात के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। गुजरात की राजनीतिक नब्ज के नाड़ी विशेषज्ञ भी हैं। कांग्रेस में गुजरात विधानसभा में नेता विरोध पक्ष भी रहे हैं। उन्होंने जो मंच स्थापित किया है वह गुजरात भाजपा को उतना नुकसान नहीं पहुंचा पायेगा जितना भाजपा विरोधी समूह (बाघेला का मंच, अरविन्द केजरीवाल की आत्म मंगल की कामना से गुजरात में अपने पैर जमाने का अभियान) भाजपा से ज्यादा  नुकसान कांग्रेस को करायेगा। महाशय धूमे फरमा रहे हैं कि रोजगारियां या नौकरियां नहीं बढ़ पारही हैं। उनकी राय के अनुसार यह साफ होगया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी से हिन्द का लोकमानस यकीन कर रहा था कि मोदी आर्थिकी को प्रोत्साहित करेंगे। महाशय धूमे की मान्यता अमरीकी चिंतनधारा से प्रभावित लगती है, वे हिन्द की बारीकियों से अवगत नहीं लगते। हिन्द का आम आदमी यह मानता है कि देश को सुशासन केेवल नरेन्द्र मोदी ही दे सकते हैं। प्रधानमंत्री बनने के दूसरे दावेदारों में कोई भी महानुभाव ऐसा नहीं है जिसको भ्रष्टाचार ने अपने आवरण से ढक न डाला हो। 
अब हिन्द के रिलीजियस प्रसंग पर बात करें। हिन्दू धर्म मानव धर्म का पर्याय है। मजहब विशेष तौर पर नैऋत सैमेटिक रिलीजन व हिन्दू धर्म में आकाश पाताल का अंतर है। हिन्दू धर्म व्यक्ति का मानव धर्म स्वरूप है। ‘स्वधर्मे निधनम् श्रेयः पर धर्मो भयावह’, अपने कर्तव्य की पूर्ति ही स्वधर्म है। हिन्द धर्म लंगरी मजहब नहीं है, यहां धार्मिक मतांतर स्वाभाविक मानवीय चेेतना है। लोकसभा के 2019 में होने वाले चुनावों में भाजपा तथा भाजपा विरोधी खेमे जिसमें एक नहीं अनेक प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं, उन प्रच्छन्न उम्मीदवारों में कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह सदाचारी राजनीतिज्ञ नहीं है इसलिये उन सभी कोे नरेन्द्र दामोदरदास मोदी केे द्वारा पराजित किया जाना एक सीधी प्रक्रिया है। वंशवादी राजनीति के पुरोधा आश लगाये बैठे हैं। राहुल गांधी हिन्द की राजनीतिक सत्ता पायेंगे पर महाशया सोनिया गांधी ने वह हिम्मत नहीं की जो राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने महाशया सोनिया गांधी के पतिदेव इंदिरा गांधी के ज्येष्ठ पुत्र राजीव गांधी को इंदिरा गांधी निधन के तत्काल उपरांत राजीव गांधी को हिन्द का प्रधानमंत्री नियुक्त कर डाला जो हिम्मत तथा महाशया इंदिरा गांधी के ऋण से उऋण होने के लिये राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने की। महाशया सोनिया गांधी ने यदि 2004 या 2009 में अपने इकलौते बेटे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया होता तो शायद राहुल गांधी अपने दिवंगत पिता राजीव गांधी की तरह कम से कम पांच वर्ष तो प्रधानमंत्री रहते ही। महाशया सोनिया से चूक होगयी वे हिम्मत हार गयीं। अब महाशय राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनना उतना ही कठिन है जितना सूरज का पश्चिम से उदय होना।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के बेहद अजूबा कदम जिसे धूमे महाशय ‘मिस स्टेप्स बाई मोदी’ कह रहे हैं मोदी से यदि कहीं कोई कोरकसर रह भी गयी हो पर हिन्द का जनसामान्य यह मानता है कि गुजरात से स्वामी दयानंद सरस्वती महात्मा गांधी और नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ऐसे मानव रत्न भारत को दिये हैं जिनका उद्देश्य लोकसंग्रह है। इस मानव श्रंखला में महत्वपूर्ण व्यक्तित्त्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हैं। सदानंद धूमे सहित हिन्द के जितने लोग प्रधानमंत्री मोदी के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विरोधी हैं उन्होंने राजनीतिक सदाचार का वह पाठ पढ़ा ही नहीं जो महाभारत के शांतिपर्व में युधिष्ठिर व भीष्म पितामह संवाद के उपाख्यानों में दर्ज है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी आन्वीक्षिकी षडविधा राजनीति के परम मर्मज्ञ हैं। उनके सभी विरोधी आन्वीक्षिकी विधा को अग्राह्य मानते हैं। हिन्द मजहबी देश है या ‘स्वधर्मे निधनम् श्रेयः पर धर्मो भयावह’ का उद्गाता ? अपना कर्तव्य निर्वहन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की सबसे बड़ी लोकसंग्रहकारी जनशक्ति है। महाशय धूमे मानते तो हैं कि 2019 में कांग्रेस पूर्णतया लुप्त भी हो सकती है पर वे तर्क देते हैं कि वंशवादी राजनय हिन्द से लुप्त न हो। महाशय धूमे ही नहीं हिन्द का समूचा मैकोलाइट अंग्रेजीदां भद्रलोक की भी सोच का आधार ही अभारतीय है। इस अभारतीयता के दोष का लाभार्जन प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को होना राजनीतिक तथ्य है। गुजरात प्रदेश कांग्रेसाध्यक्ष सोलंकी दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी गुजरात विधानसभा की 125 सीटों पर विजयी होगी पर महाशय सोलंकी ने यह नहीं बताया कि अगर पार्टी विधानसभा में विजयी होगयी तो उसका मुख्यमंत्री कौन होगा ? महाशय अहमद पटेल या पाटीदार हार्दिक पटेल ?  क्या हिन्दू बहुल गुजरात चाहे जैनी हो या सनातनी वैष्णव वामन बनिया क्या दलित गुजराती व ट्रायबल गुजराती महाशय अहमद पटेल को मुख्यमंत्री देखना पसंद करेगा ? गुुजरात में कांग्रेस के सामने एक बड़ा विस्मयकारी यक्ष प्रश्न यह भी है कि क्या महाशया सोनिया गांधी के विश्वासपात्र महाशय अहमद पटेल को गुजराती हिन्दू मानस मुख्यमंत्री बनाना पसंद करेगा ? अथवा कांग्रेस जहां थी वहां से भी नीचे उतर कर गुजरात में अपनी लुटिया बुरी तरह डुबा डालेगी ? देखते रहिये ! सोलंकी - अहमद पटेल संवाद क्या गुल खिलाता है ? महाशय शंकर सिंह बाघेला का मंच क्या कांग्रेस को सत्ता के गलियारे में पहुंचने के बजाय कहीं नेता विरोधी दल के सम्मान से पदच्युत कर शंकर सिंह बाघेला के विजयी उम्मीदवारों की संख्या कांग्रेस से ज्यादा न कर दे और नेता विरोधी दल के रूप में शंकर सिंह बाघेला पदासीन होजायें ?
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

No comments:

Post a Comment