अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जनाब नकवी कृपापूर्वक गुजरात राज्य के सौराष्ट्र काठियावाड़ इलाके के खोजा मुस्लिम जिनके बीच पाकिस्तान के निर्माता कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना का उद्भव हुआ, अपना ध्यान केन्द्रित करने का संकल्प लें। हिन्द के स्वनामधन्य इतिहास वेत्ता बंगलुरू निवासी रामचंद्र गुह ने अपनी पुस्तक आधुनिक भारत के उन्नीस निर्माताओं में मोहम्मद अली जिन्ना को सर सैयद अहमद खां के उपरांत अत्यंत महत्व दिया है। हिन्द की सरकार के सूचना मंत्रालय ने आधुनिक भारत के पचास निर्माताओं की जीवनियां प्रकाशित की है। भारत सरकार की दृष्टि में मोहम्मद अली जिन्ना आधुनिक भारत के निर्माताओं की पंगत में नहीं गिने गये हैं पर इतिहास विशेषज्ञ रामचंद्र गुह की मान्यता है कि कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की आधुनिक हिन्दुस्तान के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। दूसरी ओर शीला रेड्डी ने अपनी पुस्तक मैरिज दैट शुक इंडिया में कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना और पारसी धर्मावलंबी मरियम के विवाह को निकाहनामा न मान कर सिविल मैरिज बताया है। जरूरत इस बात की है कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री महाशय रामचंद्र गुह व शीला रेड्डी की पुस्तकों का पुनरावलोकन करें। काठियावाड़ के खोजा मुसलमान हिन्द की आजादी के सत्तर साल बाद कहां कहां कितने हैं ? कितने खोजा मुसलमान कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के साथ कराची चले गये ? कितने अभी काठियावाड़ में रहते हैं ? महाशया शीला रेड्डी की पुस्तक में गुरूवार 2 नवंबर 2017 के दिन न्यूयार्क में जिस विधवा खान का ब्यौरा दिया गया है उसे पढ़ने से लगता है कि मोहम्मद अली जिन्ना व मरियम की इकलौती कन्या डाइना तब 98 वर्ष की थी। डाइना का जन्म 15 अगस्त 1919 के दिन लंदन में हुआ था। शीला रेड्डी की किताब ने मरने वाली महिला डाइना का उसकी मां मरियम ? इस सवाल को परखने की जरूरत है। अल्पसंख्यक मंत्रालय विदेश मंत्रालय की मदद से सही स्थिति का पता लगा सकता है। जहां तक कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना व पारसी धर्मावलंबी मरियम की इकलौती बेटी डाइना का प्रसंग है डाइना जिसने 19 वर्ष की उम्र में मुंबई के प्रसिद्ध पारसी परिवार से स्वयं को जोड़ा इस समूचे प्रसंग को अल्पसंख्यक मंत्रालय खोजबीन गहराई से संपन्न कर वस्तुस्थिति को सामने ला सकता है। ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन ने पाकिस्तान केे संस्थापक कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना का जीवन अहवाल जिस तरीके से प्रस्तुत किया है उसे भी अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री पढ़ें। दुनिया यह यकीन करती है कि बी.बी.सी. निष्पक्ष समाचार देने वाला संगठन है। हिन्द में बी.बी.सी. के प्रतिनिधि रहे मार्क टुलि का कहना था कि समूची दुनियां में सही खबर देने वाला केवल बी.बी.सी. ही है पर बीबीसी ने कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में ब्यौरा पेश करते समय हिन्दुस्तान के पक्ष की अनदेखी यह प्रमाणित करती है कि बीबीसी बर्तानियां के सियासी हित की अनदेखी नहीं कर सकता। पाकिस्तान का सृजन बर्तानी राज की राजनीतिक जरूरत थी इसीलिये बर्तानियां ने खोजा मुसलमान मोहम्मद अली जिन्ना को मुस्लिम कौम के लिये अलग राष्ट्र बनाने के कार्य में हरसंभव सहायता दी। अंततोगत्वा पाकिस्तान अस्तित्व में आगया। हिन्द के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जनाब नकवी साहब ने हिन्द के गरीब मुसलमानों के उत्थान के लिये जो तरीके अपनाये हैं वे स्तुत्य हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री तो कांग्रेसी राज में भी थे पर गरीब अल्पसंख्यकों के हित साधन उनका लक्ष्य नहीं था केवल कोरे वायदे करना तथा मजहबी नजरिये से जो मुसलमान धर्मभीरू थे उनकी भावनाओं का दोहन होता रहा। वास्तविक आर्थिक हित साधन के प्रति कांग्रेस सरकार का ध्यान नहीं था। महाशय नकवी ने गरीब मुसलमानों के हित संवर्धन का रोडमैप बना डाला।
तात्कालिक जरूरत यह है कि काठियावाड़ के खोजा मुसलमानों में जो आज भी गरीबी की मार सह रहे हैं उन्हें नकवी साहब सहारा दें। जो खोजा मुसलमान सिंध कराची या मुंबई नहीं गये आज भी काठियावाड़ में ही रहते हैं उनकी आर्थिकी सुधार उनके सामाजिक संबंधों ब्याह, निकाह संबंधी उनकी परंपराओं के साथ साथ जो काठियावाड़ी गुजराती भाषी मुसलमान अपने समाज के सामाजिक हित के पक्षधर हैं उन्हें संयोजित करने की तात्कालिक जरूरत है। कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना तथा उनकी सहोदर भगिनी फातिमा ने अपनी जात बिरादरी के लिये जो कुछ किया उसे प्रकाश में लाना आवश्यक है। क्या काठियावाड़ी खोजा मुसलमान कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना को अपने समाज का उद्धारक मानता है ? क्या मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा पारसी धर्मावलंबी मरियम से सिविल मैरिज करने से पहले जब वे केवल 14 वर्ष के थे उनका निकाहनामा खोजा मुसलमान लड़की से हुआ था जो अठारह वर्ष की उम्र में ही परलोक सिधार गयी। काठियावाड़ के खोजा मुसलमानों की सामाजिकता का वर्तमान स्वरूप क्या है ? इस पर सिलसिलेवार अध्ययन की जरूरत है। पाकिस्तान को मुस्लिम बहुल सिंध, सीमाप्रांत क्वेटा (बलूूचिस्तान) तथा जाट मुसलमानों का पंजाब राज्य के रूप में परिवर्तित करने के लिये पंजाबी, सिंधी, मुलतानी और बर्तानी राज के क्वेटा के बलूचों सहित बलूचिस्तान के शेष बलूचों को राजनीतिक स्वातंत्र्य दिलाने में भारत के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है इसलिये उन्हें सर्वप्रथम अपना ध्यान काठियावाड़ की मुस्लिम आबादी की ओर केन्द्रित करना जहां हिन्द के अल्पसंख्यकों में एक नयी जाग्रति लायेगा। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्म शताब्दी में (19.11.1917-19.11.20) बंगला देश की तर्ज पर सिंध बलूच मुलतान व पंजाब की मुसलमान आबादी को जागरूक किया जा सकता है। भारत का राजनीतिक हित पाकिस्तान के अस्तित्व को सिंध बलूच मुलतान व पंजाब के सिंधी मुसलमानों को उनका अपना अस्तित्व बनाये रखते हुए पाकिस्तान के एक नहीं पांच मुस्लिम जनसंख्या बहुल राष्ट्रों में परिवर्तित करने में जनाब नकवी साहब की अहम भूमिका हो सकती है इसलिये उन्हें जागरूक रह कर हिन्द के विदेश मंत्रालय के सहयोग से लक्ष्यपूर्ति करने का मुहूर्त आगया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की सबका साथ सबका विकास रणनीति पसंद है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की जनता में एक ऐसा समूह आगे बढ़ रहा है जो चीन-पाक संबंधों को चीन पाक इकानामिक कारीडोर वाली सिक्यांग को बलूचिस्तान के समुद्र तट पर्यन्त गलियारे का समर्थक नहीं है। यदि कहीं पाकिस्तान के वे लोग जो चीन की सदारत के पक्षधर नहीं हैं उन्होंने चीन के पाक स्थित राजदूत पर हमला कर दिया तो चीन एकदम पाक के खिलाफ जिहाद भी बोल सकता है। चीन को यह मालूम है कि हिन्द एक स्थिर राज्य है उसमें पाक सरीखी अस्थिरता के लिये कोई जगह नहीं है। हिन्दुस्तान की राजनीतिक स्थिरता तथा आर्थिक परिपक्वता का चीन खुल कर विरोध नहीं करना चाहता। अरूणाचल को विवादित क्षेत्र मानते हुए चीन परम पावन दलाई लामा और भारत के रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण का अरूणाचल प्रदेश पहुंचने पर विरोध करता रहता है। चीन ने तिब्बत पर जबर्दस्ती कब्जा कर रखा है वह तिब्बत को अपना हिस्सा मानते हुए व्यक्त करता रहता है कि तिब्बत आटोनोमस राज्य है पर भारत की नजर में तिब्बत ही भारत का असल पड़ोसी है चीन नहीं। वह दिन दूर नहीं जब दुनियां के ज्यादा राष्ट्र तिब्बत की स्वतंत्रता का गुणगान करने आगे आयेंगे। शी जिनपिंग को तिब्बत के परम पावन दलाई लामा के आगे घुटनों के बल पर तिब्बत की स्वतंत्रता स्वीकार करनी ही होगी। पाकिस्तान और चीन दोनों देश तिरेसठ ६३ का आंकड़ा बहुल दिनों तक बनाये नहीं रख सकते। दोनों मुल्क सैन्य सत्ता प्रधान हैं। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पाक सेना दोनों युद्ध उन्मादी राष्ट्र हैं। पाकिस्तान में एक नया समूह उभर रहा है जो चीन के प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करना चाहता। सवाल यह है कि नवाज शरीफ की तकदीर का ऊँट किस करवट बैठता है ? यदि पाकिस्तानी कानून के तहत नवाज शरीफ स्वयं को पाक साफ और निर्दोष साबित नहीं कर पाये तो उन्हें सत्ताच्युत होना एक अनिवार्यता है। सवाल यह भी उठता है कि क्या पाकिस्तान की सेना में अयूब खां सरीखा व्यक्तित्त्व उभरता है या पंजाब की सेना दो या तीन खेमों में बंट कर कहीं बिखराव की ओर तो अग्रसर नहीं होती है। सबसे बड़ी हिन्दुस्तानी उपलब्धि यह है कि पाकिस्तान का अवाम हिन्द के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के व्यक्तिगत सदाचार से प्रभावित है। पाक के राजनीतिज्ञ चाहे वे मुस्लिम लीग वाले हों या सिंध के पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता उन पर पाकी की उन्नीस करोड़ जनता का विश्वास ढह गया है। हिन्द के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जनाब नकवी साहब पाकिस्तान की इस विषम राजनीतिक स्थिति से भारत के मुसलमानों के हित साधन के समानांतर पाकिस्तान के सिंध बलूच मुलतान व पंजाब के मुसलमानों पर नैतिकता का रास्ता अपनाने के लिय प्रेरणा दे सकते हैं इसलिये जनाब नकवी साहब को अपनी अल्पसंख्यक कल्याण नीति का नैतिक लाभ पाकिस्तान के लोग भी प्राप्त कर सकें, अहर्निश ऐसे प्रयास में संलग्न रहने की राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय जरूरत के साथ साथ दुनियां के सबसे बड़े मजहबी समूह ईसाइयत के पश्चात दुनियां के एक अरब साठ करोड़ मुसलमानों तथा तीसरे पाये पर खड़े दुनियां के एक अरब सोलह करोड़ हिन्दुओं के बीच एक कारगर मजहबी पुल का निर्माण करने की क्षमता जनाब नकवी के जीवन दर्शन में उपलब्ध है।
जनाब नकवी अपने लक्ष्य साधन में कृतसंकल्प हों। दुनियां भर के मुसलमानों में यह भावना भर सकें कि भारत का हिन्दू सबके साथ सबके विकास तथा सबको साथ लेकर चलने वाला पारम्परिक समाज है जिसका लक्ष्य मानवता तथा विश्वबंधुत्व है।
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